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अध्याय 2: तीन बुद्धिमान

Original notes — ready CBSE (NCERT, English Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Malhar

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लोककथा • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि की कहानी

तीन भाई बिना देखे ही खोए ऊँट का पूरा हाल बता देते हैं — और राजा की परीक्षा में पेटी के भीतर का कच्चा अनार भी पहचान लेते हैं।

तीन बुद्धिमान — EG के अपने शब्दों में सार

पुस्तक: Malhar (CBSE, कक्षा 7)  |  अध्याय 2  |  माध्यम: Hindi

Labelled diagram for तीन बुद्धिमान

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पेड़ के नीचे विचार-विमर्श करते बुद्धिमान लोग। पाठ के भाव की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

Illustration for तीन बुद्धिमान

मिलकर पहेली सुलझाते बच्चे। समझदारी और सहयोग की सामान्य तस्वीर।

पाठ के बारे में

एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। पिता उनसे कहा करते थे कि उनके पास रुपया-पैसा या सोना-चाँदी नहीं है, इसलिए वे दूसरे प्रकार का धन संचित करें — हर वस्तु और स्थिति को पूरी तरह समझने और जानने का प्रयास करें, कुछ भी उनकी दृष्टि से न बचे। रुपये-पैसे के स्थान पर उनके पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन पा लेने पर उन्हें कभी किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी।

पिता के चल बसने के बाद तीनों भाई यात्रा पर निकल पड़े। चालीस दिनों तक चलते रहे; खाने-पीने का सामान समाप्त हो गया, पैरों में छाले पड़ गए, फिर भी वे चलते रहे। अंत में वे एक बड़े नगर के पास पहुँचे। वहाँ बड़े भाई ने धरती पर दृष्टि डालकर कहा कि थोड़ी ही देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है। मँझले भाई ने कहा कि वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता होगा। सबसे छोटे भाई ने कहा कि ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।

कुछ समय बाद एक घुड़सवार वहाँ से निकला जो अपना खोया ऊँट ढूँढ़ रहा था। भाइयों के बताए लक्षण सुनकर उसे संदेह हुआ कि ऊँट उन्हीं के पास है। वह उन्हें तलवार दिखाकर राजा के पास ले गया और उन पर चोरी तथा महिला-बच्चे को मार डालने का आरोप लगाया। राजा ने भी पहले यही माना, क्योंकि बिना बताए इतनी सही जानकारी भाइयों को कैसे मिली?

राजा ने भाइयों की सच्चाई की जाँच के लिए एक पेटी मँगवाई। भाइयों ने पेटी को देखे बिना ही बता दिया कि उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है, वह अनार है और अभी कच्चा है। पेटी खोलने पर सचमुच कच्चा अनार निकला। राजा चकित रह गया, उसने भाइयों को निर्दोष माना और ऊँट के स्वामी को उनके बताए रास्ते पर ऊँट खोजने को कहा।

भाइयों ने अपने अनुमानों का रहस्य भी बताया: बड़े भाई ने धूल पर पैरों के चिह्नों से ऊँट के बड़े होने का अनुमान लगाया और घुड़सवार को चारों ओर देखते देखकर समझ लिया कि वह कुछ खोज रहा है। मँझले भाई ने देखा कि सड़क के दायीं ओर की घास ऊँट ने चरी थी, पर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी — इसलिए ऊँट एक ही आँख से देखता होगा। छोटे भाई ने ऊँट के घुटने टेककर बैठने के चिह्नों के पास महिला के जूतों और छोटे-छोटे पैरों के चिह्न देखे थे। पेटी के बारे में — वह हल्की थी, उसमें किसी छोटी गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि आई, पेटी उद्यान की ओर से लाई गई थी जहाँ अनार के पेड़ थे, और उस समय उद्यान के सभी अनार कच्चे थे। राजा ने कहा कि धन-संपत्ति की दृष्टि से वे धनवान नहीं हैं, पर उनके पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है, और उसने उन्हें अपने दरबार में रख लिया।

अनुमानों की कड़ी

  1. बड़े भाई: धूल पर बड़े पैरों के चिह्न — बहुत बड़ा ऊँट गया है।
  2. मँझला भाई: दायीं ओर की घास चरी, बायीं ओर की नहीं — ऊँट एक आँख से देखता है।
  3. छोटा भाई: घुटने टेकने के चिह्न + महिला के जूतों के चिह्न + छोटे पैरों के चिह्न — महिला बच्चे के साथ सवार थी।
  4. पेटी: हल्की पेटी + भीतर गोल वस्तु के लुढ़कने की आवाज़ — कोई छोटी गोल वस्तु।
  5. पेटी उद्यान की ओर से आई + आसपास अनार के पेड़ — वह वस्तु अनार है।
  6. उद्यान के सभी अनार अभी कच्चे — अनार कच्चा है।

मुख्य शब्द

  • पैनी दृष्टि — बारीक़ी से देखने की आदत; छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना।
  • तीव्र बुद्धि — तेज़ समझ; देखी बात से सही निष्कर्ष निकालना।
  • लोककथा — लोगों में सुनते-सुनाते चली आई कहानी।
  • ज्ञानेंद्रियाँ — पाँच इंद्रियाँ: आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा।
  • निर्दोष — जिसने अपराध न किया हो।
  • अनुमान — देखे-सुने संकेतों से लगाया गया तर्कसंगत अंदाज़ा।

याद रखें

  • पिता की सीख: पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि ही सच्चा धन है।
  • तीनों भाई चालीस दिन पैदल चले, तब नगर के पास पहुँचे।
  • ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर चोरी का आरोप लगाया था।
  • राजा ने पेटी की परीक्षा से भाइयों की बुद्धिमानी को परखा।
  • अंत में राजा ने भाइयों को निर्दोष माना और दरबार में रख लिया।
ध्यान दोभाइयों ने ऊँट को देखा तक नहीं था — उन्होंने केवल चिह्न देखे और उनसे तर्क किया। यही इस लोककथा की कुंजी है: निरीक्षण + तर्क = सही अनुमान।
सामान्य गलती‘भाइयों ने ऊँट देखा था’ लिखना गलत है। परीक्षा में यही पूछा जाता है कि बिना देखे उन्होंने कैसे जाना — उत्तर में चिह्नों और तर्क का उल्लेख ज़रूरी है।

तालिका: किस भाई ने क्या देखा और क्या निष्कर्ष निकाला

विषयविवरणविवरण
बड़ा भाईधूल पर पैरों के चिह्नऊँट बहुत बड़ा था
मँझला भाईएक ओर की घास चरी, दूसरी ओर की नहींऊँट एक आँख से देखता था
छोटा भाईघुटने टेकने + जूतों + छोटे पैरों के चिह्नमहिला बच्चे के साथ सवार थी
तीनों (पेटी)हल्की पेटी, लुढ़कने की आवाज़, उद्यान, कच्चे अनारपेटी में कच्चा अनार है

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. पिता ने बेटों को कैसा धन संचित करने को कहा और क्यों?
    संकेत: रुपया-पैसा बनाम पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि की तुलना करो।
  2. तीनों भाइयों ने ऊँट के बारे में तीन बातें कैसे जानीं? क्रम से लिखो।
    संकेत: हर भाई के देखे चिह्न और उसके तर्क को अलग-अलग लिखो।
  3. घुड़सवार को भाइयों पर संदेह क्यों हुआ?
    संकेत: सोचो — बिना बताए सही जानकारी सुनकर कोई क्या सोचेगा?
  4. राजा ने भाइयों की सच्चाई की जाँच कैसे की?
    संकेत: पेटी वाली परीक्षा को अपने शब्दों में लिखो।
  5. अपने जीवन का कोई अनुभव लिखो जब तुमने ध्यान से देखकर कोई समस्या सुलझाई हो।
    संकेत: पहले समस्या, फिर देखे संकेत, फिर हल — इस क्रम में लिखो।

प्रश्न और उत्तर

  1. लोककथा में पिता ने ‘धन संचय’ से क्या अर्थ बताया था?
    पिता का अर्थ रुपया-पैसा इकट्ठा करना नहीं था, बल्कि पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना था। उन्होंने कहा कि ऐसा धन पा लेने पर बेटों को कभी किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी।
  2. तीनों भाइयों ने बिना देखे ऊँट के बारे में क्या-क्या बताया?
    उन्होंने बताया कि ऊँट बहुत बड़ा था, वह एक आँख से नहीं देख पाता था, और उस पर एक महिला छोटे बच्चे के साथ सवार थी। ये तीनों बातें उन्होंने सड़क पर दिखे चिह्नों से अनुमान लगाकर बताई थीं।
  3. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी पर विश्वास क्यों किया?
    क्योंकि भाइयों ने अपनी हर बात को तर्क के साथ समझाया, और पेटी की परीक्षा में उनका बताया कच्चा अनार सच निकला। राजा ने स्वयं पेटी खुलवाकर जाँच की थी, इसलिए उसे विश्वास हो गया।
  4. राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?
    अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। राजा ने पहले आरोप पर ही दंड नहीं दिया, बल्कि परीक्षा लेकर सच्चाई जाँची और तब निर्दोषों को छोड़ा।
  5. लोककथा से क्या सीख मिलती है?
    सीख यह है कि बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डालनी चाहिए। पैनी दृष्टि, पाँचों ज्ञानेंद्रियों का उपयोग और तर्क से सोचने पर बिना देखी बातें भी सही-सही जानी जा सकती हैं।

विस्तार — NCERT अभ्यासों से

  1. मिलान करो — ‘कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे’ / ‘हम कहीं भी हों, भूखे नहीं मरेंगे’ / ‘घुड़सवार ने भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा’ / ‘लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था’।
    क्रम से: थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया; हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा; घोड़े पर सवार व्यक्ति ने भाइयों को अविश्वास से देखा; लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।
  2. पंक्ति पर विचार करो — ‘रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी।’
    इसका अर्थ है कि ज्ञान और समझ ही स्थायी संपत्ति है। रुपया-पैसा खर्च हो सकता है, पर ध्यान से देखने और सोचने की आदत हर स्थिति में काम आती है और व्यक्ति को दूसरों से पीछे नहीं रहने देती।
  3. कारक का परिचय दो और लोककथा के वाक्यों से उदाहरण दो।
    कारक वह रूप है जो बताता है कि संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया से क्या संबंध है, जैसे — ‘भाइयों ने ऊँट के बारे में बताया’ में ‘ने’ कर्ता कारक का चिह्न है; ‘पेटी में अनार था’ में ‘में’ अधिकरण कारक का चिह्न है। कारक के चिह्नों को पहचानकर वाक्य का अर्थ स्पष्ट होता है।
  4. पहेली बूझो — (1) लंबी पूँछ पेड़ की शाखाओं से लिपटी रहे, कीट और छोटे जीव खाए, रंग बदल ले और चारों दिशाओं में देख सके — यह प्राणी कौन? (2) मेज़ पर लाल, हरा, नीला, पीला चार डिब्बे बराबर-बराबर रखे हैं; लाल नीले के पास है, हरा पीले के पास नहीं है, पीला लाल के पास नहीं है, हरा लाल के पास है — पीले के बराबर में कौन-सा डिब्बा है?
    (1) गिरगिट। (2) क्रम हरा–लाल–नीला–पीला बनता है, इसलिए पीले डिब्बे के बराबर में नीला डिब्बा है।
  5. सूचनापत्र लिखने का अभ्यास — कल्पना करो कि तुम वह घुड़सवार हो जिसका ऊँट खो गया है। सूचनापत्र में क्या-क्या लिखोगे?
    सूचनापत्र में खोए ऊँट की पहचान (बहुत बड़ा, एक आँख से नहीं देखता), उस पर सवार महिला और बच्चे का उल्लेख, खोने का स्थान और सूचना देने वाले से संपर्क का तरीका लिखा जाएगा। केवल लोककथा में दी गई जानकारी का ही उपयोग करना है।
  6. ‘हाँ’ या ‘नहीं’ खेल और ‘स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना’ गतिविधियों से क्या सीख मिलती है?
    इनसे सीख मिलती है कि ज्ञान केवल आँखों से नहीं मिलता — कान, नाक, जीभ और त्वचा भी जानकारी देती हैं। सोच-समझकर प्रश्न पूछना और संकेतों को जोड़ना ही बुद्धिमानी है।
पुनरावलोकन — एक नज़र में
  • पिता की सीख: पैनी दृष्टि + तीव्र बुद्धि = सच्चा धन।
  • ऊँट: बड़ा, एक आँख से नहीं देखता, महिला + बच्चा सवार।
  • आरोप: चोरी का; परीक्षा: पेटी में कच्चा अनार।
  • राजा का निर्णय: जाँच के बाद भाइयों को निर्दोष माना, दरबार में रखा।
  • भाषा-बिंदु: कारक; विवरणात्मक भाषा; पाँच ज्ञानेंद्रियाँ।
  • मूल्य: बिना जाँच के किसी को दोषी न ठहराओ।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।