अध्याय 3: फूल और काँटा
Original notes — ready CBSE (NCERT, English Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Malhar
एक ही पौधे पर पलने वाले फूल और काँटे के स्वभाव बिल्कुल अलग हैं — सम्मान कुल से नहीं, कर्म और गुणों से मिलता है।
फूल और काँटा — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Malhar (CBSE, कक्षा 7) | अध्याय 3 | माध्यम: Hindi

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): एक गुलाब का फूल — इस तस्वीर में काँटा स्पष्ट नहीं दिखता, इसलिए लेबल फूल, पत्ती और तने पर लगाए गए हैं; पाठ फूल के साथ काँटे की सीख देता है। पाठ के भाव की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

बगीचे में फूलों की सुगंध लेते बच्चे। विनम्रता और आनंद की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
इस कविता में फूल और काँटे का जन्म एक ही जगह होता है — एक ही पौधा उन्हें पालता है, रात में एक ही चाँद की चाँदनी उन पर पड़ती है, एक-सा मेह (वर्षा) उन पर बरसता है और एक-सी हवाएँ उन पर बहती हैं। फिर भी उनके ढंग एक-से नहीं होते। कवि कहते हैं कि समान परिस्थितियाँ मिलने पर भी स्वभाव अलग-अलग हो सकता है।
काँटे का स्वभाव चुभने वाला है: वह किसी की उँगलियाँ छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पर कतर देता है और भौंरे के श्याम तन को बेध देता है। वह सबकी आँख में खटकता है।
फूल का स्वभाव इसके विपरीत है: वह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है, अपनी सुगंध और निराले रंग से कली जी को खिला देता है। वह सबके सिर पर शोभता है, अर्थात सम्मान पाता है।
कविता का अंतिम संदेश यह है कि कुल की बड़ाई तब काम नहीं आती जब व्यक्ति में बड़प्पन की कमी हो। अर्थात व्यक्ति का सम्मान उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव और कर्म से होता है। फूल और काँटा एक ही कुल (पौधे) के हैं, फिर भी एक सम्मान पाता है और दूसरा आँख में खटकता है।
कवि हरिऔध का जन्म आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनके अनेक कविता-संकलन प्रकाशित हैं, जिनमें ‘चंद्र-खिलौना’ और ‘खेल-तमाशा’ उल्लेखनीय हैं।
फूल और काँटे की तुलना
- जन्म और पालन: दोनों एक ही जगह, एक ही पौधे पर।
- परिस्थितियाँ: एक ही चाँदनी, एक-सा मेह, एक-सी हवाएँ।
- काँटे का व्यवहार: छेदना, फाड़ना, पर कतरना, बेधना — सबकी आँख में खटकना।
- फूल का व्यवहार: गोद में लेना, रस पिलाना, सुगंध और रंग से मन खिलाना — सिर पर शोभना।
- निष्कर्ष: सम्मान कुल से नहीं, गुणों और कर्म से मिलता है।
मुख्य शब्द
- मेह — वर्षा, बारिश।
- वर बसन — सुंदर वस्त्र।
- शोभना — शोभा पाना, सुंदर लगना।
- खटकना — आँख में चुभना; बुरा लगना।
- बड़प्पन — बड़ाई, महानता; गुणों से मिलने वाला सम्मान।
- कुल — वंश, परिवार, जन्म का घराना।
- विशेषण — संज्ञा की विशेषता बताने वाला शब्द; विशेष्य — वह संज्ञा जिसकी विशेषता बताई जाए।
याद रखें
- फूल और काँटा एक ही पौधे पर पलते हैं, फिर भी स्वभाव अलग है।
- काँटा छेदता और फाड़ता है; फूल सुगंध, रंग और रस देता है।
- काँटा आँख में खटकता है, फूल सिर पर शोभता है।
- संदेश: सम्मान कुल से नहीं, गुणों और कर्म से मिलता है।
- कवि: हरिऔध; ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।
तालिका: फूल बनाम काँटा
| विषय | विवरण | विवरण |
|---|---|---|
| जन्म | एक ही पौधा | एक ही पौधा |
| परिस्थितियाँ | एक ही चाँदनी, मेह, हवाएँ | एक ही चाँदनी, मेह, हवाएँ |
| व्यवहार | तितलियों को गोद, भौंरे को रस, सुगंध और रंग | उँगली छेदना, वस्त्र फाड़ना, पर कतरना, तन बेधना |
| परिणाम | सिर पर शोभता है | सबकी आँख में खटकता है |
| सीख | गुणों से सम्मान मिलता है | कुल की बड़ाई गुणों की कमी नहीं ढकती |
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- फूल और काँटे में क्या-क्या समान है और क्या-क्या भिन्न है? तालिका बनाकर लिखो।
संकेत: पहले समानताएँ (पौधा, चाँदनी, मेह, हवा), फिर भिन्नताएँ (व्यवहार) लिखो। - काँटे के कौन-कौन से काम कविता में बताए गए हैं?
संकेत: उँगली, वस्त्र, तितली और भौंरे वाली पंक्तियों को याद करो। - फूल दूसरों को क्या-क्या देता है?
संकेत: गोद, रस, सुगंध और रंग — चारों बातों को लिखो। - ‘किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर’ — इस पंक्ति का अर्थ अपने शब्दों में लिखो।
संकेत: कुल बनाम गुण की तुलना करके समझाओ। - यदि तुम्हें फूल और काँटे में से एक चुनना हो तो किसे चुनोगे और क्यों?
संकेत: अपने उत्तर का कारण गुणों के आधार पर दो।
प्रश्न और उत्तर
- कविता में काँटे के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?
सत्य कथन यह है कि काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। वह तितलियों के पर कतरता है और भौंरे के तन को बेधता है। यह कहना गलत होगा कि काँटा सुगंध नष्ट करता है या पौधे को हानि पहुँचाता है — कविता में ऐसा नहीं कहा गया है। - फूल और काँटे की समानताओं और विभिन्नताओं को सही रूप में व्यक्त करने वाला कथन कौन-सा है?
सही कथन यह है कि फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं; उन्हें समान देखभाल मिलती है, फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं। यह कहना गलत है कि लोगों के विचार दोनों के बारे में समान होते हैं। - कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है?
उपयुक्त निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति के कर्म के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं, और यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है तो उसके कुल को भी प्रसिद्धि मिलती है। यह कहना गलत है कि कुल ही सम्मान का आधार होता है या कुल की प्रतिष्ठा गुणों से बड़ी होती है। - कविता के अनुसार ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त कथन कौन-सा है?
बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्म से पहचाना जाता है। धन-दौलत, ताकत या कुल का नाम बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार नहीं है, और कुल की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को नहीं ढकती। - कविता का मुख्य संदेश क्या है?
संदेश यह है कि समान परिस्थितियों में भी व्यक्ति अपने स्वभाव और कर्म से पहचाना जाता है। फूल जैसा व्यवहार — दूसरों को सुख, सुगंध और आनंद देना — सम्मान दिलाता है, जबकि चुभने वाला व्यवहार आँख में खटकता है।
विस्तार — NCERT अभ्यासों से
- पंक्तियों पर विचार करो — ‘मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।’
इन पंक्तियों का अर्थ है कि वर्षा और हवा दोनों के लिए समान हैं, फिर भी उनके तौर-तरीके एक-से नहीं हैं। इससे यह सीख मिलती है कि परिस्थितियाँ समान होने पर भी व्यक्ति का चरित्र उसके अपने चुनाव और कर्म से बनता है। - विशेषण और विशेष्य की पहचान करो — ‘सुंदर गीत’ में कौन-सा शब्द विशेषण है और कौन-सा विशेष्य?
‘सुंदर’ विशेषण है, क्योंकि वह गीत की विशेषता बता रहा है; ‘गीत’ विशेष्य है, क्योंकि वह वह संज्ञा है जिसकी विशेषता बताई जा रही है। इसी प्रकार ‘अनूठा रस’ में ‘अनूठा’ विशेषण और ‘रस’ विशेष्य है। - फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाने वाले पौधों के नाम और विशेषताएँ बताओ।
बबूल — पीले या सफ़ेद छोटे गुच्छेदार फूल, लंबे और नुकीले काँटे; ईंधन, चारा और औषधियों में उपयोग। गुलाब — विभिन्न रंगों के फूल, तने पर छोटे और तीखे काँटे; सजावटी पौधा और इत्र के लिए प्रसिद्ध। नागफनी — रंग-बिरंगे फूल, पूरी सतह पर काँटे; सूखे क्षेत्रों में पाया जाता है। बेर — छोटे हल्के पीले फूल, शाखाओं पर छोटे काँटे; फल खाद्य और औषधीय। करौंदा — छोटे सफ़ेद सुगंधित फूल, तीखे काँटे; फल से अचार, जैम और जेली बनती है। नींबू — छोटे सफ़ेद, हल्की गुलाबी छाया वाले सुगंधित फूल, तीखे काँटे; फल खट्टे और विटामिन सी से भरपूर। - अपने आस-पास से ऐसे उदाहरण दो जो एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न होकर भी साथ-साथ पाए जाते हों।
उदाहरण: नमक और चीनी (दोनों सफ़ेद, स्वाद विपरीत), शांत और क्रोधी स्वभाव, खट्टा-मीठा स्वाद, काला-सफ़ेद रंग, सुख-दुख अनुभव। इनसे यह समझ आता है कि विपरीत चीज़ें भी एक साथ रह सकती हैं। - वाद-विवाद का विषय — ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है’ — दोनों पक्षों के तर्क संक्षेप में लिखो।
फूल के पक्ष में: जीवन में कोमलता, प्रेम और आनंद आवश्यक है। काँटे के पक्ष में: काँटा सुरक्षा देता है, संघर्ष की याद दिलाता है और पौधे की रक्षा करता है। निष्कर्ष यह निकलता है कि केवल कोमलता या केवल कठोरता से जीवन नहीं चलता — दोनों का संतुलन चाहिए। - कल्पना से फूल और काँटे के बीच एक छोटा संवाद लिखो।
संवाद का आधार यही होना चाहिए: फूल कहे कि वह दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया है; काँटा कहे कि वह संघर्ष की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए है। दोनों के गुणों और जीवन में योगदान पर चर्चा होनी चाहिए।
- कवि: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947)।
- समानता: एक ही पौधा, चाँदनी, मेह, हवाएँ।
- अंतर: फूल देता है — सुगंध, रंग, रस; काँटा चुभता है।
- परिणाम: फूल सिर पर शोभता है, काँटा आँख में खटकता है।
- संदेश: सम्मान कुल से नहीं, गुणों और कर्म से मिलता है।
- भाषा-बिंदु: विशेषण–विशेष्य; साथ पाए जाने वाले पौधे।
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