Chapter 10: आपदा प्रबंधन : एक परिचय
आपदा क्या है, उसके चार घटक, पूर्व-तैयारी, राहत, पुनर्वास और राष्ट्रीय स्तर के कार्य — बाँका के गुड्डू की कहानी सहित। पुस्तक पृष्ठ 138–143।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Geography • Book: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
आपदा प्रबंधन : एक परिचय — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 9) | अध्याय 10 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बचाव दल, शिविर और प्राथमिक उपचार — आपदा प्रबंधन का एक सामान्य चित्र। यह किताब का चित्र नहीं है।

बाढ़ में नाव से लोगों की मदद करते बचावकर्मी — एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
आपदा क्या है
आपदा मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना है, जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है। इससे मृत्यु, अपंगता और घायल होने की स्थिति उत्पन्न होती है; साथ ही निर्मित क्षेत्रों का क्षतिग्रस्त होना और फसल व पशु संसाधन का विनाश भी देखने को मिलता है।
प्रारंभ में प्राकृतिक संकट ही मुख्य रूप से आपदा का रूप लेता था, लेकिन वर्तमान समय में मानवजनित संकट भी न सिर्फ आपदा का रूप लेता है, वरन् यह कहीं अधिक विनाशकारी होता है। मानवजनित आपदा के सर्वाधिक विनाशकारी संघटकों में रासायनिक, जैविक और नाभिकीय कचरे से उत्पन्न आपदा होश-हवाश उड़ा सकती है।
मानव जनित सामान्य आपदायें कल-कारखानों में दुर्घटना, जहरीले उत्पाद का रिसाव, प्रदूषण, बाँध के टूटने, मानवीय भूल के कारण आग लगने और धार्मिक व जातीय दंगों से उत्पन्न होती हैं।
आपदा प्रबंधन के चार प्रमुख घटक
आपदा मानवजनित हो अथवा प्राकृतिक, उसका प्रबंधन आवश्यक है। आपदा को पूर्णतः समाप्त कर देना लगभग असंभव है, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है — प्रभाव कम होने से त्रासदी का प्रभाव कम होता है और मरने वालों की संख्या कम होती है।
आपदा प्रबंधन के चार प्रमुख घटक होते हैं — (1) आपदा के पूर्व की तैयारी, (2) जवाबी कार्रवाई तथा राहत कार्य, (3) सामान्य जीवन स्तर पर पुनः स्थापित होना और पुनर्वास, (4) रोकथाम और दुष्प्रभाव को कम करने की योजना। नीचे इन्हीं चारों का विवरण है।
आपदा आने के पूर्व की तैयारी — नौ बातें
किसी क्षेत्र में आपदा आने के पूर्व याद रखी जाने वाली महत्वपूर्ण बातें ये हैं — (i) विद्यालय/समुदाय/व्यक्ति के द्वारा आपदा प्रबंधन योजनाएँ तैयार करना। (ii) सामुदायिक जागरूकता और शिक्षा। (iii) मॉक ड्रिल चेतावनी प्रणाली का प्रशिक्षण। (iv) समुचित चेतावनी प्रणाली की पूर्ण जानकारी। (v) सामग्री और मानवीय कौशल संसाधन — दोनों प्रकार के संसाधनों की सूची।
(vi) असुरक्षित समूहों और भवनों की पहचान करना। (vii) पारस्परिक सहायता व्यवस्था को विकसित करना। (viii) सार्वजनिक जगहों से पूर्वानुमान की घोषणा — जैसे धार्मिक स्थलों से मुख्य पूजा और प्रार्थना के बाद। (ix) राहत कार्य चलाने हेतु विद्यालय, धर्मशाला, पंचायत भवन और धार्मिक स्थलों की पहचान।
आपदा आते ही — जवाबी कार्रवाई और राहत — दस कार्य
आपदा आते ही जवाबी कार्यवाही और राहत कार्यों की सामुदायिक व्यवस्था जरूरी है। कुछ आवश्यक कार्य ये हैं — (i) स्थानीय समूहों की सहायता से सामुदायिक रसोई स्थापित करना। (ii) आपदाकालीन क्रिया-केन्द्र (नियंत्रण कक्ष) को चालू करना। (iii) आपदा प्रबंधन योजनाओं को कार्यरूप देना। (iv) चिकित्सा शिविर की स्थापना तथा दवाई और डाक्टर की पर्याप्त व्यवस्था करना। (v) संसाधन जुटाना।
(vi) ताजा स्थिति के अनुसार आपदा की चेतावनी देते रहना। (vii) आवास के लिए अस्थायी व्यवस्था करना। (viii) समुचित आश्रय और शौचालय की व्यवस्था करना। (ix) प्रभावित लोगों को ढूंढने और उनका बचाव करने के लिए दल भेजना। (x) खोज एवं बचाव दल की तैनाती करना।
पुनर्वास स्तर — आठ कार्य
इस स्तर पर (पुनर्वास स्तर) निम्नांकित कार्य आवश्यक हैं — (i) जिनके परिजन बिछड़ गए हैं, उन्हें दिलासा देने के कार्यक्रम और परिजन से मिलाने का प्रयास। (ii) अनिवार्य सेवाओं — सड़क और संचार सुविधाओं — का पुनः शुरुआत करना। (iii) आश्रय/अस्थायी आवास सुलभ कराना। (iv) निर्माण के लिए मलबे से प्रयोग के लायक सामग्री इकट्ठा करना।
(v) सामान्य जीवन स्तर और पुनर्वास पुनः स्थापित करवाना। (vi) रोजगार के अवसर ढूंढना। (vii) नए भवनों का पुनः निर्माण करना। (viii) समुदाय को स्वस्थ रहने की और सुरक्षा उपायों की जानकारी देना।
प्रभाव को कम करना — पाँच कार्य
आपदा को पूर्णतः रोकना असंभव है। निम्न कार्यों के द्वारा इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है — (i) जोखिम क्षेत्रों में बसाव को रोकना। (ii) भूमि उपयोग की योजना तैयार करना। (iii) आपदा-रोधी भवन का निर्माण करना। (iv) आपदा घटने से पहले जोखिम को कम करने के तरीके तलाशना। (v) सामुदायिक जागरूकता और शिक्षा।
आपदा प्रबंधक के रूप में — तुम भी बन सकते हो
बच्चों, आप स्वयं आपदा प्रबंधक बन सकते हैं। कहीं भी उद्घोषणा से जब आप यह सुनते हैं कि आपदा आने वाला है, तब घबराने या डरने के बदले आप इसकी सूचना अपने परिवार और पड़ोसियों को दे सकते हैं — इससे सभी लोग मिलकर इसके रोकथाम और बचाव में लग सकते हैं।
आप अपने मित्रों और शिक्षकों की मदद से राहत कार्य चला सकते हैं — अर्थात् विद्यालय में कुछ समय के लिए प्रभावित लोगों को रखना और गाँव से सहयोग लेकर उनके भोजन और चिकित्सीय व्यवस्था करना। आपकी यह व्यवस्था आपदा प्रभावित लोगों के दुख-दर्द को बाँटेगी।
बॉक्स — बाँका जिले के एक गाँव के एक बच्चे की बहादुरी की कहानी: विद्यालय के बगल में एक तालाब था। सात साल के दो लड़के एक साथ विद्यालय से लौटते समय तालाब में स्नान करने लगे। उसी समय एक लड़का डूब गया। दूसरा लड़का शोर मचाते हुए गाँव की तरफ दौड़ा। इससे बहुत सारे लोग एकत्रित होकर डूबे हुए बच्चे को निकालने में सफल हुए और प्राथमिक उपचार से उसकी जान बच गई। सात साल के गुड्डू ने पढ़े-लिखे आपदा प्रबंधकों की नाक काट ली। उसके साहस की चर्चा बहुत दिनों तक आस-पास के गाँवों में होती रही। ऐसे बच्चे अपने कारनामों से समुदाय को जोड़ देते हैं और प्रबंधन की वह मिसाल कायम करते हैं जो इससे जुड़ी हुई बड़ी-बड़ी इकाइयाँ नहीं कर पातीं।
राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन का कार्य — सात कार्य
भारत के प्रायः सभी क्षेत्रों में लगभग सालोभर प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदाओं का सैलाब देखने को मिलता है। गुजरात के भुज भूकंप 2001 और हिन्द महासागर की सुनामी (2004) जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने आपदा प्रबंधकों को हिलाकर रख दिया। फिर हर रोज कहीं न कहीं बम ब्लास्ट और आतंकवादी घटनाएँ आपदा प्रबंधन में लगे हुए लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं।
एक अच्छी बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की कई योजनाएँ बनाई गई हैं; इसके दूरगामी प्रभाव निश्चित रूप से लाभदायी होंगे — 1) आपदा प्रबंधन के लिए प्रति वर्ष बजट में आकस्मिक निधि का प्रबंधन किया गया है, जिससे संकट के समय धनराशि की समस्या नहीं होती है। 2) आपदा प्रबंधन हेतु प्रधानमंत्री राहत कोष का भी गठन किया गया है। 3) आपदाओं की बारंबारता के क्षेत्र का मानचित्रण किया जा रहा है, जिससे उसके क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके।
4) आपदा प्रबंधन में लगे हुए लोगों के लिए प्रशिक्षण का कार्य भी आवश्यक है — अतः उसके लिए अनेक प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं; विश्वविद्यालय में आपदा प्रबन्धन की पढ़ाई भी प्रारंभ की गयी है। 5) पंचायत और ग्रामीण स्तर पर भी आपदा प्रबंधन के लिए न सिर्फ प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, वरन् इससे निपटने की पूर्ण जानकारी दी जा रही है। आतंकवाद और साम्प्रदायिक दंगों को कम करने के लिए आतंकवाद विरोधी दस्ते का भी गठन किया गया है। 6) आपदा प्रबंधन में स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण है — यह परामर्शदात्री के रूप में महत्वपूर्ण कार्य करता है।
बॉक्स — बच्चों, क्या तुम जानते हो कि वर्तमान समय में आपदाओं की सूचना उपग्रह की मदद से भी मिलती है। इससे अनेक प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के पूर्वानुमान की संभावना बढ़ती है।
7) आपदा प्रबंधन का कार्य ग्रामसभा की साझेदारी के बिना अपूर्ण है — अतः हर आपदा प्रबंधन में ग्राम सभा की सक्रियता से आम लोगों की सक्रियता बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में लोग स्वयं कार्यों की प्राथमिकता तय करते हैं और आपदा के प्रभाव को न्यूनतम स्तर पर ले आते हैं। आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि प्रबंधन में समुदाय आगे आएँ, क्योंकि प्रबंधन का पहला लाभ व्यक्ति अनुभव करता है और दूसरा लाभ सामुदायिक संतुष्टि के रूप में होता है। अतः वर्तमान समय में समुदाय की भूमिका सर्वाधिक महत्व की है।
सावधानियाँ — पुस्तक की अपनी बातें
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एकल (क)–(घ) विकल्प वाले नहीं हैं — प्रत्येक प्रश्न में चार कथन (i)–(iv) दिए गए हैं, जिनमें से सही कथनों का चयन करना है; पृष्ठ पर प्रश्न उसी प्रारूप में, उत्तरों के साथ दिए गए हैं।
कहानी में 'बाँका जिले' और बच्चे का नाम 'गुड्डू' जैसा छपा है वैसा ही दर्ज है।
भुज भूकंप 2001 और हिन्द महासागर सुनामी 2004 पुस्तक के अनुसार हैं।
वर्तनियाँ पुस्तक के अनुसार: मॉक ड्रिल, परामर्शदात्री, ग्रामसभा, आपदारोधी।
Key Terms — मुख्य शब्द
- आपदा — मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है — मृत्यु, अपंगता, घायल होना, निर्मित क्षेत्रों की क्षति, फसल/पशु संसाधन का विनाश।
- आपदा प्रबंधन के चार घटक — (1) आपदा के पूर्व की तैयारी; (2) जवाबी कार्रवाई तथा राहत कार्य; (3) सामान्य जीवन स्तर पर पुनः स्थापित होना और पुनर्वास; (4) रोकथाम और दुष्प्रभाव को कम करने की योजना।
- मॉक ड्रिल — चेतावनी प्रणाली का प्रशिक्षण — पूर्व-तैयारी की नौ बातों में से एक।
- आपदाकालीन क्रिया-केन्द्र — आपदा आते ही चालू किया जाने वाला नियंत्रण कक्ष; सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, खोज एवं बचाव दल के साथ राहत का अंग।
- पुनर्वास — सामान्य जीवन स्तर पर पुनः स्थापित होना — बिछड़े परिजनों को मिलाना, सड़क/संचार पुनः शुरू करना, आश्रय, मलबे से सामग्री, रोजगार, नए भवनों का निर्माण।
- आपदा-रोधी भवन — प्रभाव कम करने के पाँच कार्यों में से एक — जोखिम क्षेत्रों में बसाव रोकना, भूमि उपयोग योजना, आपदा-रोधी भवन, जोखिम कम करने के तरीके, सामुदायिक जागरूकता/शिक्षा।
- आकस्मिक निधि — आपदा प्रबंधन के लिए प्रति वर्ष बजट में किया गया प्रबंधन, जिससे संकट के समय धनराशि की समस्या न हो।
- प्रधानमंत्री राहत कोष — आपदा प्रबंधन हेतु गठित कोष (राष्ट्रीय स्तर के सात कार्यों में से एक)।
- ग्रामसभा की साझेदारी — आपदा प्रबंधन ग्रामसभा की साझेदारी के बिना अपूर्ण है — ग्राम सभा की सक्रियता से आम लोगों की सक्रियता बढ़ती है; लोग स्वयं प्राथमिकता तय करते हैं।
Remember — याद रखें
- आपदा = मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना, जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी है; पूर्णतः समाप्त करना लगभग असंभव, प्रभाव कम किया जा सकता है।
- चार घटक: पूर्व की तैयारी (9 बातें), जवाबी कार्रवाई/राहत (10 कार्य), पुनर्वास (8 कार्य), रोकथाम/प्रभाव कम करना (5 कार्य)।
- पूर्व-तैयारी: योजनाएँ, जागरूकता/शिक्षा, मॉक ड्रिल, चेतावनी प्रणाली की जानकारी, संसाधनों की सूची, असुरक्षित समूहों/भवनों की पहचान, पारस्परिक सहायता, सार्वजनिक जगहों से घोषणा, राहत-स्थलों की पहचान।
- राहत: सामुदायिक रसोई, नियंत्रण कक्ष, चिकित्सा शिविर, संसाधन, चेतावनी देते रहना, अस्थायी आवास/आश्रय/शौचालय, खोज एवं बचाव दल।
- बाँका की कहानी: सात साल के गुड्डू ने शोर मचाकर गाँव वालों को इकट्ठा किया; डूबे बच्चे को निकालकर प्राथमिक उपचार से जान बचाई।
- राष्ट्रीय स्तर: आकस्मिक निधि, प्रधानमंत्री राहत कोष, बारंबारता-क्षेत्र का मानचित्रण, प्रशिक्षण केन्द्र/विश्वविद्यालय में पढ़ाई, पंचायत-स्तर प्रशिक्षण + आतंकवाद विरोधी दस्ता, स्वयंसेवी संस्थाएँ (परामर्शदात्री), ग्रामसभा की साझेदारी।
- उपग्रह से सूचना मिलने से पूर्वानुमान की संभावना बढ़ी है; भुज भूकंप 2001, हिन्द महासागर सुनामी 2004 (पुस्तक के अनुसार)।
सबसे बड़ी भूल: चार घटकों को आपस में मिला देना — पूर्व-तैयारी (9 बातें) अलग है, राहत (10 कार्य) अलग है, पुनर्वास (8 कार्य) अलग है, प्रभाव कम करना (5 कार्य) अलग है। दूसरी भूल: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को एकल (क)–(घ) विकल्प समझना — ये बहु-चयन प्रारूप के हैं: प्रत्येक में चार कथन (i)–(iv) हैं, सही कथनों का चयन करना है (Q1: (i) और (ii); Q2: (ii) और (iii))। तीसरी भूल: 'आपदा को पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है' लिखना — पुस्तक के अनुसार यह लगभग असंभव है, प्रभाव कम किया जा सकता है।
Chart / Table: आपदा प्रबंधन के चार प्रमुख घटक — एक दृष्टि में
| घटक | क्या होता है | कितने कार्य/बातें (पुस्तक) |
|---|---|---|
| आपदा के पूर्व की तैयारी | योजनाएँ, जागरूकता/शिक्षा, मॉक ड्रिल, चेतावनी प्रणाली की जानकारी, संसाधनों की सूची, असुरक्षित समूहों/भवनों की पहचान, पारस्परिक सहायता, सार्वजनिक घोषणा, राहत-स्थलों की पहचान | 9 बातें |
| जवाबी कार्रवाई तथा राहत कार्य | सामुदायिक रसोई, नियंत्रण कक्ष, योजनाओं को कार्यरूप, चिकित्सा शिविर, संसाधन, चेतावनी देते रहना, अस्थायी आवास/आश्रय/शौचालय, खोज एवं बचाव दल | 10 कार्य |
| सामान्य जीवन स्तर पर पुनः स्थापित होना और पुनर्वास | बिछड़े परिजनों को दिलासा + मिलाना, सड़क/संचार पुनः शुरू, आश्रय, मलबे से सामग्री, जीवन स्तर + पुनर्वास, रोजगार, नए भवनों का निर्माण, स्वास्थ्य/सुरक्षा जानकारी | 8 कार्य |
| रोकथाम और दुष्प्रभाव को कम करने की योजना | जोखिम क्षेत्रों में बसाव रोकना, भूमि उपयोग योजना, आपदा-रोधी भवन, जोखिम कम करने के तरीके, सामुदायिक जागरूकता/शिक्षा | 5 कार्य |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- आपदा की परिभाषा लिखिए और मानवजनित आपदाओं के चार उदाहरण दीजिए।
संकेत: मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है। मानवजनित: कल-कारखानों में दुर्घटना, जहरीले उत्पाद का रिसाव, प्रदूषण, बाँध टूटना, मानवीय भूल से आग, धार्मिक/जातीय दंगे। - आपदा प्रबंधन के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
संकेत: (1) पूर्व की तैयारी; (2) जवाबी कार्रवाई तथा राहत कार्य; (3) सामान्य जीवन स्तर पर पुनः स्थापित होना और पुनर्वास; (4) रोकथाम और दुष्प्रभाव को कम करने की योजना। - आपदा आने के पूर्व की तैयारी की पाँच बातें लिखिए।
संकेत: योजनाएँ तैयार करना; सामुदायिक जागरूकता/शिक्षा; मॉक ड्रिल प्रशिक्षण; चेतावनी प्रणाली की पूर्ण जानकारी; संसाधनों की सूची (कोई भी पाँच)। - राहत कार्य के पाँच कार्य और पुनर्वास के तीन कार्य लिखिए।
संकेत: राहत: सामुदायिक रसोई, नियंत्रण कक्ष, चिकित्सा शिविर, संसाधन जुटाना, खोज एवं बचाव दल। पुनर्वास: बिछड़े परिजनों को मिलाना, सड़क/संचार पुनः शुरू, आश्रय/रोजगार/नए भवन। - बाँका जिले की कहानी से आपदा प्रबंधन का कौन-सा सिद्धांत सीखा जा सकता है?
संकेत: सूचना और सामुदायिक तत्परता: गुड्डू के शोर से लोग इकट्ठे हुए, डूबे बच्चे को निकालकर प्राथमिक उपचार से जान बचाई — छोटा बच्चा भी सूचना देकर और समुदाय को जोड़कर प्रबंधन कर सकता है।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- आपदा प्रबंधन क्या है? उसके चार प्रमुख घटकों का वर्णन कीजिए।
आपदा मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना है जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है; उसका प्रबंधन आवश्यक है — पूर्णतः समाप्त करना लगभग असंभव है, पर प्रभाव कम किया जा सकता है। चार घटक: (1) पूर्व की तैयारी (9 बातें — योजनाएँ, जागरूकता, मॉक ड्रिल, चेतावनी जानकारी, संसाधन-सूची, असुरक्षित समूहों/भवनों की पहचान, पारस्परिक सहायता, सार्वजनिक घोषणा, राहत-स्थलों की पहचान); (2) जवाबी कार्रवाई/राहत (10 कार्य — रसोई, नियंत्रण कक्ष, चिकित्सा शिविर, संसाधन, चेतावनी, आवास/आश्रय/शौचालय, खोज-बचाव दल); (3) पुनर्वास (8 कार्य — परिजनों को मिलाना, सड़क/संचार, आश्रय, मलबे से सामग्री, जीवन स्तर, रोजगार, नए भवन, स्वास्थ्य/सुरक्षा जानकारी); (4) रोकथाम/प्रभाव कम करना (5 कार्य — जोखिम क्षेत्रों में बसाव रोकना, भूमि उपयोग योजना, आपदा-रोधी भवन, जोखिम कम करने के तरीके, जागरूकता/शिक्षा)। - आपदा के प्रभाव को कम करने के उपाय लिखिए।
पाँच कार्य: (i) जोखिम क्षेत्रों में बसाव को रोकना; (ii) भूमि उपयोग की योजना तैयार करना; (iii) आपदा-रोधी भवन का निर्माण करना; (iv) आपदा घटने से पहले जोखिम को कम करने के तरीके तलाशना; (v) सामुदायिक जागरूकता और शिक्षा। - एक छात्र आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों की किस प्रकार मदद कर सकता है? विद्यालय की भूमिका भी लिखिए।
छात्र स्वयं आपदा प्रबंधक बन सकता है: उद्घोषणा सुनते ही घबराने के बदले परिवार/पड़ोसियों को सूचना देना; मित्रों/शिक्षकों की मदद से राहत कार्य चलाना — विद्यालय में कुछ समय के लिए प्रभावित लोगों को रखना, गाँव से सहयोग लेकर भोजन/चिकित्सा की व्यवस्था करना; इससे प्रभावितों का दुख-दर्द बँटता है। विद्यालय: राहत-स्थल के रूप में पहचान, प्रभावितों को अस्थायी आश्रय, चिकित्सा शिविर और भोजन की व्यवस्था में सहयोग। - ग्राम पंचायत की भूमिका और राष्ट्रीय स्तर के कार्यों का वर्णन कीजिए।
ग्राम पंचायत: ग्रामसभा की साझेदारी के बिना प्रबंधन अपूर्ण है — ग्राम सभा की सक्रियता से आम लोगों की सक्रियता बढ़ती है, लोग स्वयं प्राथमिकता तय करते हैं, प्रभाव न्यूनतम होता है; पंचायत भवन राहत-स्थल, पंचायत-स्तर प्रशिक्षण और पूर्ण जानकारी। राष्ट्रीय स्तर: प्रति वर्ष बजट में आकस्मिक निधि; प्रधानमंत्री राहत कोष; बारंबारता-क्षेत्र का मानचित्रण; प्रशिक्षण केन्द्र और विश्वविद्यालय में पढ़ाई; पंचायत/ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षण + आतंकवाद विरोधी दस्ता; स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान (परामर्शदात्री); उपग्रह से सूचना से पूर्वानुमान की संभावना बढ़ी है। - बाँका जिले की कहानी सुनाइए और उसका संदेश लिखिए।
विद्यालय के बगल में तालाब था; सात साल के दो लड़के स्नान करते समय एक डूब गया; दूसरे (गुड्डू) के शोर से लोग एकत्रित हुए, डूबे बच्चे को निकालकर प्राथमिक उपचार से जान बचाई; सात साल के गुड्डू ने पढ़े-लिखे आपदा प्रबंधकों की नाक काट ली। संदेश: सूचना देना और समुदाय को जोड़ना ही प्रबंधन की पहली कड़ी है — छोटे बच्चे भी अपने कारनामों से समुदाय को जोड़कर मिसाल कायम कर सकते हैं।
- आपदा: मानवजनित/प्राकृतिक घटना, मानव जीवन के लिए त्रासदी; पूर्णतः समाप्त करना लगभग असंभव, प्रभाव कम किया जा सकता है।
- चार घटक: पूर्व-तैयारी (9), राहत (10), पुनर्वास (8), रोकथाम/प्रभाव कम करना (5)।
- छात्र भी प्रबंधक: सूचना देना, विद्यालय में आश्रय, भोजन/चिकित्सा में सहयोग — बाँका के गुड्डू की कहानी।
- राष्ट्रीय स्तर: आकस्मिक निधि, प्रधानमंत्री राहत कोष, मानचित्रण, प्रशिक्षण, आतंकवाद विरोधी दस्ता, स्वयंसेवी संस्थाएँ, ग्रामसभा की साझेदारी।
- अभ्यास: वस्तुनिष्ठ 2 (बहु-चयन प्रारूप) + लघु 4 + दीर्घ 2 + परियोजना 1 = 9 प्रश्न।
अभ्यास — किताब के प्रश्न-प्रकार (उत्तर सहित)
नीचे अध्याय के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर दिए गए उत्तरों से मिलान करें।
अभ्यास — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (2, बहु-चयन प्रारूप — देखें नोट)
- 1. आपदा प्रबंधन के प्रमुख घटक हैं — (i) आपदा के पूर्व वैयक्तिक स्तर पर तैयारी करना। (ii) आपदा के पूर्व सामुदायिक स्तर पर तैयारी करना। (iii) रोकथाम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना। (iv) आपदा के संबंध में जानकारी नहीं रखना। — उत्तर: (i) और (ii) — पूर्व की तैयारी के स्तर; (iii) और (iv) गलत दृष्टिकोण हैं।
- 2. मानवजनित आपदा के प्रभाव को कम करने के कौन-से उपाय हैं? — (i) भूमि उपयोग की जानकारी नहीं रखना। (ii) आपदारोधी भवन का निर्माण करना। (iii) सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान देना। (iv) जोखिम क्षेत्रों में बसाव को बढ़ाना। — उत्तर: (ii) और (iii) — प्रभाव-कम-करने की सूची से; (i) और (iv) उसके विपरीत हैं।
अभ्यास — लघु उत्तरीय प्रश्न (4)
- 1. आपदा प्रबंधन क्या है? — उत्तर: मानवजनित अथवा प्राकृतिक घटना का प्रबंधन — पूर्णतः समाप्त करना लगभग असंभव, प्रभाव कम किया जा सकता है; चार घटक: पूर्व-तैयारी, राहत, पुनर्वास, रोकथाम/प्रभाव कम करना।
- 2. आपदा को कम करने के लिए कौन-कौन से उपाय किये जाने चाहिए? — उत्तर: पाँच कार्य — जोखिम क्षेत्रों में बसाव रोकना, भूमि उपयोग योजना, आपदा-रोधी भवन, जोखिम कम करने के तरीके, सामुदायिक जागरूकता/शिक्षा।
- 3. तुम आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों की किस प्रकार मदद करोगे? — उत्तर: सूचना देना (परिवार/पड़ोसी), मित्रों/शिक्षकों की मदद से राहत कार्य — विद्यालय में आश्रय, गाँव से सहयोग लेकर भोजन/चिकित्सा; दुख-दर्द बाँटना।
- 4. विद्यालय द्वारा किस प्रकार आपदा प्रभावित लोगो को मदद पहुँचाया जा सकता है? — उत्तर: विद्यालय को राहत-स्थल के रूप में पहचानना; कुछ समय के लिए प्रभावितों को रखना; भोजन/चिकित्सा की व्यवस्था में सहयोग; मॉक ड्रिल और चेतावनी-प्रशिक्षण।
अभ्यास — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (2)
- 1. आपदा प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका का वर्णन करें। — संकेत: ग्रामसभा की साझेदारी के बिना प्रबंधन अपूर्ण; ग्राम सभा की सक्रियता से आम लोगों की सक्रियता; लोग स्वयं प्राथमिकता तय करते हैं; पंचायत भवन राहत-स्थल; पंचायत/ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षण और पूर्ण जानकारी।
- 2. आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे कार्यों की समीक्षा करें। — संकेत: आकस्मिक निधि, प्रधानमंत्री राहत कोष, बारंबारता-क्षेत्र का मानचित्रण, प्रशिक्षण केन्द्र/विश्वविद्यालय में पढ़ाई, पंचायत-स्तर प्रशिक्षण + आतंकवाद विरोधी दस्ता, स्वयंसेवी संस्थाएँ (परामर्शदात्री), उपग्रह से सूचना, ग्रामसभा की साझेदारी; भुज 2001, सुनामी 2004 का संदर्भ।
अभ्यास — परियोजना कार्य (1)
- 1. बच्चों, आप अपने गाँव/मुहल्ले में एक वर्ष के अंतर्गत आग और महामारी के बारे में दादा-दादी तथा बुजुर्गों से जानकारी इकट्ठा करें।
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