Chapter 9: ईंधन: हमारी जरूरत
ईंधन क्या है, उसके प्रकार और वर्गीकरण, कोयले की कहानी, पेट्रोलियम का परिष्करण, प्राकृतिक गैस और ईंधन-संरक्षण — पुस्तक के क्रियाकलापों सहित।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Science • Book: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ईंधन: हमारी जरूरत — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 8) | अध्याय 9 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): ईंधनों का सरलीकृत चित्र — लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

रसोई में गैस पर खाना बनाते व्यक्ति का सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
आप अपने घर में भोजन बनते देखते होंगे, पानी गरम करते देखते होंगे। विभिन्न प्रकार की मशीनें — जैसे गेहूँ पीसनेवाली मशीन से लेकर ईंट पकानेवाली भट्टी या गाँव में मिट्टी के बरतन बनानेवाले लोग जब उसे पकाते हैं, वहाँ भी ईंधन की आवश्यकता पड़ती है। ठंड के दिनों में आप अपनी दादी, माँ को आग तापते देखते होंगे। हर एक जलनेवाला पदार्थ जो जलकर ऊष्मा ऊर्जा देता है, उसे ईंधन कहते हैं। अपने आस-पास पाए जानेवाले ईंधन की एक सूची बनाइए — आपकी सूची में गोबर (गोइठा), लकड़ी, कोयला, काष्ठ चारकोल, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी इत्यादि हो सकते हैं। इन पदार्थों में देखें कौन पदार्थ जलता है और कौन नहीं।
क्रियाकलाप-1: एक तालिका बनाइए जिसमें यह बताइए कि कौन सा ईंधन किस काम में आता है — (1) घरेलू उपयोग में, (2) ट्रांसपोर्ट में, (3) विद्युत (बिजली) उत्पादन में, (4) औद्योगिक उपयोग में, (5) रॉकेट प्रक्षेपण में। इसमें आप शिक्षक महोदय की मदद ले सकते हैं।
1. ईंधन किन-किन अवस्थाओं में पाया जाता है?
ईंधन ठोस, द्रव या गैस — तीनों अवस्थाओं में पाए जाते हैं। ठोस ईंधन जैसे — चारकोल, मोम, कोयला; द्रव ईंधन जैसे — पेट्रोल, केरोसीन, द्रव हाइड्रोजन; गैस ईंधन जैसे — कोल गैस, प्राकृतिक गैस। अतः हम यह जान पाए कि सभी पदार्थों के जलाने से ऊष्मा के रूप में हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। इन सभी पदार्थों को ईंधन कहते हैं।
ईंधन के क्या-क्या गुण होते हैं? आइए, ईंधन के गुणों को जानने के लिए क्रियाकलाप करते हैं। क्रियाकलाप-2 की आवश्यक सामग्री — कपूर, कागज़, किरोसीन (मिट्टी का तेल), लकड़ी/एल.पी.जी., लालटेन/लैम्प, कोयला, मोटरसाइकिल/स्कूटर, पेट्रोल, माचिस, मोमबत्ती, शीशी, काँच की छड़ें, काँच की बीकर (250), परखनली, लोहे/एल्युमिनियम कीप, कुल्हड़, पारदर्शी ट्यूब (10 ml) का डिस्पोजल सीरिंज, फिनोफ्थेलीन सूचक, चूना, कपड़ा इत्यादि। मोमबत्ती को जलाइए। जलते हुए मोमबत्ती से निकलने वाली गैस को परखनली या शीशी में लिए गए क्रमशः चूने के पानी या फिनोफ्थेलीन के रंगीन सूचक घोल में प्रवाहित कीजिए। क्या चूने का पानी या फिनोफ्थेलीन के रंगीन सूचक पर कोई प्रभाव पड़ता है? इसी प्रकार सभी पदार्थों को जलाकर उनसे निकलनेवाली गैस का चूने का पानी या फिनोफ्थेलीन के रंगीन सूचक पर पड़नेवाले प्रभाव को सूचीबद्ध कीजिए। क्रियाकलाप के पश्चात् सभी अवलोकनों को सूचीबद्ध कीजिए।
पुस्तक का चित्र-9.2 बताता है: जलती हुई मोमबत्ती के ऊपर कीप रखकर निकली गैस को नली से शीशी में चूने के पानी या फिनोफ्थेलीन सूचक तक पहुँचाया जाता है। तालिका में जलनेवाले पदार्थ — कपूर, कागज़, किरोसीन (केरोसीन लैम्प), कोयला, पेट्रोल (मोटर साइकिल/स्कूटर की निकास नली से निकलनेवाली गैस), द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (रसोई गैस), लकड़ी — और एक खाली पंक्ति भी है।
अत्यन्त ज्वलनशील पदार्थों का परीक्षण, सीधे ही जलाकर नहीं कीजिए। चूने के पानी के घोल को सदैव ढँककर ही रखिए। फिनोफ्थेलीन सूचक घोल का रंगीन विलयन हल्का गुलाबी लेना उपयुक्त रहता है। (नोट: चूने के पानी एवं फिनोफ्थेलीन के रंगीन सूचक आप वर्ग 7 में बना चुके हैं।)
आप वर्ग 7 में कार्बन डाइऑक्साइड के गुणों एवं इनके पहचान के लिए प्रयोग कर चुके हैं। क्या उपर्युक्त सभी पदार्थ के जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है? उपर्युक्त सभी पदार्थ के जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो चूने के पानी को दूधिया एवं फिनोफ्थेलीन के रंगीन सूचक को रंगहीन कर देता है। यह कार्बन डाइऑक्साइड गैस, वायुमंडल से ऑक्सीजन प्राप्त करके ईंधन में उपस्थित कार्बन से क्रिया कर बनता है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनने के उपरान्त ऊष्मा और प्रकाश प्राप्त होती है।
कार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + ऊष्मा। कौन सा पदार्थ है जो अधिकांशतः ईंधन में होता है? सभी ईंधन मुख्य रूप से कार्बन से बने होते हैं। आप अपने आस-पास कौन-कौन से ईंधन उपयोग होते हुए देखते हैं? इनकी सूची बनाइए। क्या आपने कभी सोचा है कि ये सभी तरह के ईंधन कहाँ से प्राप्त होते हैं? अलग-अलग तरह के ईंधनों, उनके स्रोतों और उनके गुणों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर सूचीबद्ध कीजिए — तालिका: ईंधन, उनके स्रोत, गुण एवं उपयोग।
2. ईंधन का वर्गीकरण
उपर्युक्त सूची में हम देखते हैं कि सभी ईंधन एक जैसा नहीं है। अतः ईंधन का वर्गीकरण इस प्रकार करते हैं —
(i) उत्पत्ति के आधार पर: प्राथमिक ईंधन — लकड़ी, कोयला, तेल, पेट्रोलियम इत्यादि। द्वितीयक ईंधन — चारकोल, कोक, रसोई गैस इत्यादि।
(ii) भौतिक अवस्था के आधार पर: ठोस — लकड़ी, कोयला; द्रव — पेट्रोलियम; गैस — प्राकृतिक गैस।
क्रियाकलाप-3 (पीढ़ियों का खेल): कुछ बरतन लीजिए। उन्हें मूँगफली/भुने हुए चने/पॉपकार्न (मक्का का लावा) इत्यादि से भरिए। बच्चों को सात के समूहों में बाँट दीजिए। अब इन समूहों को 1, 2, और 4 बच्चों वाले उपसमूहों में बाँट दीजिए। उन्हें क्रमशः पहली, दूसरी और तीसरी पीढ़ी के रूप में चिह्नित कीजिए। ये उपसमूह उपभोक्ताओं को निरूपित करते हैं। जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ दूसरी और तीसरी पीढ़ी में उपभोक्ताओं की संख्या अधिक है। प्रत्येक समूह के लिए मेज़ पर एक पूरा भरा पात्र रख दीजिए। प्रत्येक समूह की पहली पीढ़ी के उपभोक्ताओं से कहिए कि वे अपने समूह के पात्र से वस्तुओं का उपभोग करें। अब प्रत्येक समूह की दूसरी पीढ़ी को भी वैसा ही करने को कहिए। विद्यार्थियों से कहिए कि वे प्रत्येक पात्र में वस्तुओं की उपलब्धता को ध्यान से देखें। यदि पात्रों में कुछ शेष बचा है तो प्रत्येक समूह की तीसरी पीढ़ी के सभी उपभोक्ताओं को खाने हेतु कुछ मिला या नहीं। यह भी देखिए कि क्या पात्रों में अब भी कुछ शेष बच गया है? क्या पहली पीढ़ी के उपभोक्ताओं द्वारा ही सभी पदार्थ को समाप्त कर दिया गया या दूसरी और अंतिम पीढ़ी के लिए भी कुछ बचा? हो सकता है कि कुछ समूहों में पहली पीढ़ी आनेवाली पीढ़ी/पीढ़ियों के लिए पदार्थों की उपलब्धता के विषय में चिन्तित हो। अब सोचिए: यदि बरतनों में खाद्य पदार्थ के स्थान पर प्राकृतिक संसाधन यथा कोयला, पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस जैसे समाप्त होनेवाले प्राकृतिक संसाधन हों तो क्या होगा? कोयला कैसे प्राप्त होता है?
क्रियाकलाप-4: लकड़ी के कोयले और पत्थर के कोयले के कुछ टुकड़े दिखाकर बच्चों से पूछिए कि ये कहाँ से आते हैं? क्या पत्थर का कोयला लकड़ी के कोयले से बहुत भिन्न होता है? यह बहुत ही घना ठोस यानी पत्थर जैसा ठोस होता है। लकड़ी का कोयला लकड़ी जलाकर बनता है। अन्य खनिजों की तरह कोयला भी खानों से खोदकर निकाला जाता है।
3. कोयला कैसे बनता है? — कोयले की कहानी
क्या आप जानते हैं कि कोयला कैसे बनता है? क्रियाकलाप-5: कुछ लकड़ी के टुकड़े लेकर उन्हें ऐसे बंद बरतन में गर्म कीजिए जिसके बगल में नली लगी हो। इसको धीरे-धीरे गर्म कीजिए तथा अवलोकन कीजिए। क्या लकड़ी के रंग एवं अवस्था में कोई परिवर्तन होता है? क्या लकड़ी के रंग में एकाएक परिवर्तन हो गया? बंद बरतन में लकड़ी को गर्म करने से लकड़ी धीरे-धीरे कोयले में बदल जाती है। साथ ही इसमें से द्रव और गैसीय पदार्थ भी निकलते हैं।
लगभग 300 मिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी पर निचले जलीय क्षेत्रों में घने वन थे। बाढ़, भूकम्प इत्यादि जैसे प्राकृतिक क्रियाओं के कारण, वे वन मिट्टी के नीचे दब गए। उनके ऊपर अधिक मिट्टी जम जाने के कारण वे संपिडित हो गए। जैसे-जैसे वे गहरे होते गए उनका ताप भी बढ़ता गया। उच्च दाब और उच्च ताप पर वायु की अनुपस्थिति में अवसादी शैलों की परतों के बीच में मृत वनस्पति ऊतक भी सुरक्षित रहा। निरंतर और धीरे-धीरे दबाव पड़ते रहने के कारण पौधे पीट में बदल गए और फिर लिग्नाइट और उसके बाद कोयले में बदल गए। पीट और लिग्नाइट दोनों ही अच्छे किस्म के ईंधन नहीं होते क्योंकि जलने में इनसे बहुत अधिक धुआँ निकलता है — जैसा कि लकड़ी के जलने में निकलता है। कोयले में मुख्य रूप से कार्बन होता है। मृत वनस्पति के, धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तन को कार्बनीकरण कहते हैं। कोयला, वनस्पति के अवशेषों से बना है, अतः कोयले को जीवाश्म ईंधन भी कहते हैं।
यदि कोयला को वायु में गर्म करते हैं तो क्या होगा? वायु में गर्म करने पर कोयला जलता है और मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है: कोयला —गर्म करने पर→ कार्बन डाइऑक्साइड + ऊष्मा ऊर्जा। उद्योग में कोयले से विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा कौन-कौन से उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं? क्रियाकलाप-6: एक परखनली लीजिए उसमें कोयला रखिए। अब चित्रानुसार उसे सजाकर कोयला को धीरे-धीरे गर्म करते हुए अवलोकन कीजिए। दूसरी परखनली में क्या कोई पदार्थ जमा हो रहा है? उस पदार्थ के रंग का अवलोकन कीजिए। खुली निकासनली के ऊपर जलती हुए माचिस की तीली ले जाकर देखिए। क्या इस नली से कोई गैस निकल रही है? बंद परखनली में कोयला को गर्म करने पर इसका रंग बदल जाता है तथा दूसरी परखनली में भूरे काले रंग का तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं।
कोक: कोयला को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर कोक प्राप्त होता है। यह एक कठोर, सरंध्र और काला पदार्थ है। यह कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है। कोक का उपयोग इस्पात के औद्योगिक निर्माण और बहुत से धातुओं के निष्कर्षण में किया जाता है।
कोलतार: दूसरी परखनली में जमा भूरे-काले गाढ़ा द्रव को कोलतार कहते हैं। इसका गंध अप्रिय होता है। यह लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण होता है। कोलतार से प्राप्त उत्पादों का उपयोग प्रारंभिक पदार्थों के रूप में दैनिक जीवन में काम आने वाले विभिन्न पदार्थों के औद्योगिक निर्माण में तथा उद्योगों जैसे — संश्लेषित रंग, औषधि, विस्फोटक, सुगंध प्लास्टिक, पेन्ट, फोटो ग्रैफिक सामग्री, छत निर्माण सामग्री आदि में होता है। माँस एवं अन्य कीटों को भगाने हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली नैफ्थलीन की गोलियाँ भी कोलतार से प्राप्त की जाती हैं। क्या आप जानते हैं आजकल पक्की सड़क के निर्माण में कोलतार के स्थान पर कौन सा पेट्रोलियम उत्पाद का उपयोग किया जाता है? आजकल पक्की सड़कों के निर्माण में बिटुमेन का प्रयोग किया जाता है।
कोयला गैस: कोयले के प्रक्रमण द्वारा कोक बनाते समय चित्र में दूसरी परखनली से कोयला गैस प्राप्त होती है। यह कोयला प्रक्रमण संयंत्रों के निकट स्थापित बहुत से उद्योगों में ईंधन के रूप में उपयोग की जाती है। क्या आप जानते हैं कि कोयला गैस का उपयोग प्रथम कहाँ किया गया था? लंदन में 1810 में तथा न्यूयार्क में 1820 के आस-पास कोयला गैस का उपयोग प्रथम बार सड़कों पर रोशनी के लिए किया गया था। आजकल इसका उपयोग रोशनी के बजाय ऊष्मा के स्रोत के रूप में किया जाता है।
4. पेट्रोलियम
आपने आसपास के वैसे मोटर वाहनों की सूची तैयार कीजिए जो पेट्रोलियम पदार्थ से चलते हैं। तालिका 9.3: मोटर वाहन एवं उनमें उपयोग होने वाले पेट्रोलियम पदार्थ। मोटर वाहन में प्रयुक्त ईंधन जैसे — डीजल एवं पेट्रोल, प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त होते हैं जिसे पेट्रोलियम कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि पेट्रोलियम कैसे बनता है? तेल की खोज में विज्ञान किस प्रकार सहायता करता है? हम जानते हैं कि मिट्टी की नई परतें पुरानी परतों के ऊपर जमती चली जाती है। इस प्रकार परतों में वृक्ष और मरे हुए जीव भी दब जाते हैं। इन मृत जीवों पर दबाव और ताप का प्रभाव पड़ता है। मरे हुए समुद्री प्राणी भी समुद्र की तली में जमा हो जाते हैं। मिट्टी और रेत भी समुद्र की तली में बैठ जाते हैं। इस प्रकार मृत समुद्री प्राणियों की परतें अजैव तलछट के साथ दब जाती हैं। इन पर बहुत भारी दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे लाखों वर्षों में वायु की अनुपस्थिति, उच्च ताप और उच्च दाब में प्राणियों के मृत शरीर पेट्रोलियम में बदल जाते हैं।
चित्र-9.6 में आप देख सकते हैं कि पेट्रोलियम तेल और गैस की परत जल की परत के ऊपर है। ऐसा क्यों है? तेल वहाँ उत्पन्न हुआ जहाँ कि कभी समुद्री शैल थे। चूँकि तेल भीतर मिलनेवाले अन्य सभी पदार्थों से हल्का होता है इसलिए वह धीरे-धीरे ऊपर आ गया। केवल कुछ प्रकार के शैलों में अर्थात् सरंध्र शैलों में ही इस प्रकार ऊपर आने दिए। आप जान गए कि मृत समुद्री जीवों और पौधों से बहुत मंद भू-वैज्ञानिक प्रक्रमों द्वारा पेट्रोलियम बनता है। हो सकता है कि वे शैल जो कभी समुद्र की तलहटियों में रहे हों, अब पहाड़ों, रेगिस्तानों या मैदानों में बदल चुके हैं। तेल खोजनेवाला भू-वैज्ञानिक इसलिए पहाड़, रेगिस्तान, मैदान या समुद्र की तलहटी में तेल की खोज करने के लिए जाता है।
पेट्रोलियम का परिष्करण: तेल के कुएँ से जो तेल निकलता है वह कच्चा तेल या पेट्रोलियम होता है। यह गहरे रंग का तेलीय द्रव है जिसकी गंध अप्रिय होती है। यह विभिन्न संघटकों के मिश्रण होते हैं। पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों को पृथक् करने की प्रक्रिया परिष्करण कहलाता है। पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों की क्वथनांक अलग-अलग होती है। अतः पेट्रोलियम का परिष्करण प्रभाजी आसवन विधि से करते हैं। चित्र-9.7 पेट्रोलियम परिष्करणी में ऊपर से नीचे — रिफाइनरी गैस (ईंधन के रूप में), पेट्रोल (कारों में) 40°C, नैफ्था (रासायनिक उत्पादन में) 110°C, केरोसीन (जेट ईंधन) 180°C, डीजल तेल (डीजल इंजनों में) 260°C, अवशेष (जहाज़ों का ईंधन, स्नेहक तेल, सड़क की सतह) 340°C।
तालिका 9.4 — पेट्रोलियम के विभिन्न संघटक और उनके उपयोग: (1) द्रव रूप में पेट्रोलियम गैस (LPG) — घरों और उद्योगों में ईंधन के रूप में; (2) पेट्रोल — मोटर ईंधन, वैमानिक ईंधन, शुष्क धुलाई के लिए विलायक; (3) किरोसीन तेल (मिट्टी का तेल) — स्टोव, लैम्प और जेट वायुयान के लिए ईंधन; (4) डीजल — भारी मोटर वाहनों और विद्युत जनित्रों के लिए ईंधन; (5) स्नेहक तेल — स्नेहक; (6) पैराफिन मोम — मलहम, मोमबत्ती, वैसलीन आदि में; (7) बिटुमेन — पेन्ट एवं सड़क निर्माण में।
हमारे देश में तेल कहाँ-कहाँ से प्राप्त किए जाते हैं? हमारे देश में तेल पैदा करनेवाले क्षेत्र असम (माहोर कटिया–मोरम), गुजरात (अंकलेश्वर), मुम्बई हाई समुद्रतल में और जगह तेल की खोज की जा रही है। बिहार में तेल शोधक कारखाने कहाँ हैं? बिहार में बरौनी में तेल शोधक कारखाना है। भारत में तेल शोधक कारखाना कहाँ-कहाँ है?
बरौनी तेल शोधक कारखाना का निर्माण रूस एवं रोमानिया देश के सहयोग से 1964 ई. में किया गया जिसकी क्षमता 1965 ई. में 1 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष थी। बाद में इसकी क्षमता 6 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाई गई। प्रारम्भ में कच्चे तेल की आपूर्ति असम से होती थी। बाद में उत्तर पूर्व में अन्य तेल शोधक स्थापित हो जाने पर कच्चे तेल की आपूर्ति अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व के देशों से हल्दिया (पश्चिम बंगाल) द्वारा पाइप लाइन से होने लगी। इस कच्चे तेल से L.P.G., नेफ्था, डीजल, पेट्रोल, कोलतार (अलकतरा) इत्यादि अलग किए जाते हैं तथा जरूरत के अनुसार यहाँ से अन्य स्थानों पर आपूर्ति की जाती है। पाइपलाइन द्वारा बरौनी से पटना, मुगलसराय, इलाहाबाद, कानपुर तक आपूर्ति की जाती है। पटना से दक्षिण बिहार के लगभग सभी पेट्रोल पम्प पर टैंक लॉरी द्वारा आपूर्ति की जाती है तथा उत्तर बिहार के लगभग सभी पेट्रोल पम्प पर बरौनी से आपूर्ति की जाती है। जहाँ से पेट्रोल पम्प सामान्य डीजल, H.S.D. (High Speed Diesel), पेट्रोल, M.S. (Motor Spirit) इत्यादि बेचते हैं। इसी प्रकार L.P.G. के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर बॉटलिंग प्लान्ट बना हुआ है जैसे आरा के नजदीक गीधा में, पूर्णिया में।
5. प्राकृतिक गैस
प्राकृतिक गैस एक बहुत महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है, क्योंकि इसका परिवहन पाइपों द्वारा सरलतापूर्वक हो जाता है। प्राकृतिक गैस को उच्च दाब पर संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) के रूप में भंडारित किया जाता है। सीएनजी का उपयोग ऊर्जा उत्पादन हेतु किया जाता है। इसका उपयोग परिवहन वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा रहा है क्योंकि यह कम प्रदूषणकारी है। यह एक स्वच्छ ईंधन है। सीएनजी का अधिक लाभ यह है कि इसे घरों और कारखानों में सीधा जलाया जा सकता है, जहाँ इसकी आपूर्ति पाइपों के माध्यम से की जा सकती है। बड़ोदरा (गुजरात) और दिल्ली के कुछ भागों में इसी प्रकार के पाइप द्वारा गैस उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राकृतिक गैस का उपयोग प्रारंभिक पदार्थ के रूप में बहुत से रसायनों और उर्वरकों के औद्योगिक निर्माण में किया जाता है। भारत में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं। हमारे देश में प्राकृतिक गैस त्रिपुरा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कृष्णा–गोदावरी डेल्टा में पाई जाती है।
क्रियाकलाप-7: हमने देखा कि हमारे प्राकृतिक संसाधन सीमित रहने के कारण समाप्त हो सकते हैं। मृतजीवों के ईंधन में परिवर्तन के लिए लाखों वर्ष का समय लग जाता है। दूसरी ओर, इनके ज्ञात भंडार कुछ सौ वर्ष और चलनेवाले हैं। इसके अतिरिक्त इन ईंधनों का जलना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। क्या जीवाश्म ईंधन के अलावा हम किसी स्रोत से ईंधन प्राप्त कर सकते हैं? सूर्य का प्रकाश, वायु, जल से भी ईंधन प्राप्त किया जा सकता है। ये संसाधन प्राकृतिक में असीमित मात्रा में उपस्थित हैं और मानवीय क्रियाकलापों से समाप्त होनेवाले नहीं हैं। अतः यह आवश्यक है कि हम सूर्य के प्रकाश, वायु और जल से प्राप्त ईंधन का उपयोग अधिक से अधिक मात्रा में करने का प्रयास करें और प्रकृति से प्राप्त ईंधन जैसे — जीवाश्म ईंधन का उपयोग तभी करें जब नितान्त आवश्यक हो। इसके परिणामस्वरूप हमारी आनेवाली पीढ़ी को ईंधन के लिए कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े, पर्यावरण बेहतर बनेगा, विश्व ऊष्मण का कम खतरा रहेगा और ईंधन की उपलब्धता लम्बे समय तक रहेगी।
जहाँ तक संभव हो गाड़ी समान और मध्यम गति से चलाइए। यातायात लाइटों पर अथवा जहाँ आपको प्रतीक्षा करनी हो, गाड़ी का इंजन बंद कर दीजिए। टायरों का दाब सही रखिए। गाड़ी का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित कीजिए। रसोई गैस स्टोव जलाइए जब खाना बनाने के सभी सामान एकत्रित कर लीजिए। जहाँ तक संभव हो प्रेशर कुकर का प्रयोग कीजिए। रसोई गैस स्टोव जलाने के लिए माचिस का प्रयोग कीजिए। आवश्यकता रहने पर ही विद्युत बल्ब एवं अन्य उपकरण का प्रयोग कीजिए।
What you should learn — तुम्हें क्या सीखना चाहिए
ईंधन की परिभाषा, तीनों अवस्थाएँ, प्राथमिक/द्वितीयक वर्गीकरण, कोयले की कहानी (पीट → लिग्नाइट → कोयला, कार्बनीकरण), कोक/कोलतार/कोयला गैस, पेट्रोलियम का निर्माण व प्रभाजी आसवन से परिष्करण, CNG/LPG और ईंधन-संरक्षण को समझें।
Key Terms — मुख्य शब्द
- ईंधन (Fuel) — जलने पर अधिक मात्रा में ऊष्मा एवं प्रकाश का उत्सर्जन करनेवाला पदार्थ।
- प्राथमिक ईंधन (Primary Fuel) — प्रकृति में पाए जानेवाले ईंधन; जैसे लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम।
- द्वितीयक ईंधन (Secondary Fuel) — प्राथमिक ईंधन से प्राप्त किए जानेवाले ईंधन; जैसे कोक, कोयला गैस।
- जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) — मृत जीवों/वनस्पतियों के अवशेषों से लाखों वर्षों में बना ईंधन; कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।
- कार्बनीकरण — मृत वनस्पति के धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तन।
- कोक (Coke) — कोयले को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर प्राप्त कठोर, सरंध्र, काला पदार्थ; कार्बन का लगभग शुद्ध रूप।
- कोलतार (Coaltar) — कोयला गर्म करने पर दूसरी परखनली में जमा भूरे-काले गाढ़ा द्रव; लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण।
- कोयला गैस (Coal Gas) — कोक बनाते समय प्राप्त गैस; पहले सड़कों की रोशनी में, अब ऊष्मा के स्रोत के रूप में।
- परिष्करण (Refining) — पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों को पृथक् करने की प्रक्रिया।
- प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) — अलग-अलग क्वथनांक के आधार पर पेट्रोलियम का परिष्करण।
- संपीडित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas, CNG) — उच्च दाब पर भंडारित प्राकृतिक गैस; कम प्रदूषणकारी, स्वच्छ ईंधन।
- द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (Liquified Petroleum Gas) — द्रव रूप में पेट्रोलियम गैस (LPG); घरों और उद्योगों में ईंधन।
Remember — याद रखें
- कोई भी पदार्थ जो जलने पर अधिक मात्रा में ऊष्मा एवं प्रकाश का उत्सर्जन करता है, ईंधन कहलाता है।
- प्रकृति में पाए जानेवाले ईंधन को प्राथमिक ईंधन कहते हैं। जैसे — लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम इत्यादि।
- वैसे ईंधन जो प्राथमिक ईंधन से प्राप्त किए जाते हैं, उसे द्वितीयक ईंधन कहते हैं। जैसे — कोक, कोयला, गैस इत्यादि।
- कोयला से कोक, कोलतार और कोयला गैस प्राप्त करते हैं।
- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन है। इसका निर्माण सजीवों के मृत अवशेषों से लाखों वर्ष पूर्व हुआ था।
- जीवाश्म ईंधन समाप्त होनेवाला संसाधन है।
- पेट्रोलियम का परिष्करण प्रभाजी आसवन विधि से किया जाता है। इसके उत्पाद के रूप में पेट्रोलियम गैस, पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, पैराफिन मोम, स्नेहक तेल आदि प्राप्त होते हैं।
- सूर्य का प्रकाश, वायु एवं जल अक्षय ऊर्जा स्रोत हैं।
- कोयले और पेट्रोलियम के संसाधन सीमित हैं। हमें इनका न्यायोचित उपयोग करना चाहिए।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: कोक को 'कोयले का शुद्ध रूप' लिखना — पुस्तक कहती है कोक कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है। दूसरी गलती: बरौनी में 'तेल का कुआँ' बताना — बरौनी में तेल शोधक कारखाना है, कुआँ नहीं; कच्चा तेल असम से (बाद में हल्दिया पाइपलाइन से) आता है। तीसरी गलती: CNG को पेट्रोल से अधिक प्रदूषक बताना — CNG कम प्रदूषणकारी, स्वच्छ ईंधन है।
Chart / Table: पेट्रोलियम के संघटक और उपयोग (तालिका 9.4)
| संघटक | उपयोग |
|---|---|
| द्रव रूप में पेट्रोलियम गैस (LPG) | घरों और उद्योगों में ईंधन |
| पेट्रोल | मोटर ईंधन, वैमानिक ईंधन, शुष्क धुलाई के लिए विलायक |
| किरोसीन तेल (मिट्टी का तेल) | स्टोव, लैम्प और जेट वायुयान के लिए ईंधन |
| डीजल | भारी मोटर वाहनों और विद्युत जनित्रों के लिए ईंधन |
| स्नेहक तेल | स्नेहक |
| पैराफिन मोम | मलहम, मोमबत्ती, वैसलीन आदि में |
| बिटुमेन | पेन्ट एवं सड़क निर्माण में |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- ईंधन किसे कहते हैं? अपने आस-पास के पाँच ईंधनों के नाम लिखिए।
- ठोस, द्रव और गैस ईंधन के दो-दो उदाहरण दीजिए।
- सभी ईंधनों के जलने पर कौन सी गैस निकलती है और वह चूने के पानी पर क्या प्रभाव डालती है?
- प्राथमिक और द्वितीयक ईंधन में अंतर उदाहरण सहित बताइए।
- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को जीवाश्म ईंधन क्यों कहते हैं?
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- प्रश्न: कोक कैसे प्राप्त होता है और इसके क्या उपयोग हैं?
उत्तर: कोयले को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर कोक प्राप्त होता है। यह कठोर, सरंध्र, काला पदार्थ है और कार्बन का लगभग शुद्ध रूप है। इसका उपयोग इस्पात के औद्योगिक निर्माण और बहुत से धातुओं के निष्कर्षण में किया जाता है। - प्रश्न: कोलतार क्या है? इसके उत्पादों के दो उपयोग बताइए।
उत्तर: कोयला गर्म करने पर दूसरी परखनली में जमा भूरे-काले गाढ़ा द्रव कोलतार है; यह लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण है। इसके उत्पादों से संश्लेषित रंग, औषधि, विस्फोटक, सुगंध, प्लास्टिक, पेन्ट, फोटोग्रैफिक सामग्री, छत निर्माण सामग्री बनती है; नैफ्थलीन की गोलियाँ भी कोलतार से प्राप्त होती हैं। - प्रश्न: पेट्रोलियम का परिष्करण किस विधि से होता है और क्यों?
उत्तर: प्रभाजी आसवन विधि से, क्योंकि पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों की क्वथनांक अलग-अलग होती है। कच्चा तेल गहरे रंग का तेलीय द्रव है जिसकी गंध अप्रिय होती है। - प्रश्न: CNG को स्वच्छ ईंधन क्यों कहा जाता है? इसके दो लाभ बताइए।
उत्तर: CNG कम प्रदूषणकारी है, इसलिए स्वच्छ ईंधन है। इसे घरों और कारखानों में पाइपों द्वारा सीधा जलाया जा सकता है, और इसका परिवहन पाइपों द्वारा सरलतापूर्वक हो जाता है। - प्रश्न: जीवाश्म ईंधनों के स्थान पर सूर्य के प्रकाश, वायु और जल से प्राप्त ईंधन का उपयोग क्यों बढ़ाना चाहिए?
उत्तर: क्योंकि ये असीमित मात्रा में उपस्थित हैं और मानवीय क्रियाकलापों से समाप्त होनेवाले नहीं हैं; जीवाश्म ईंधन सीमित हैं, कुछ सौ वर्षों में समाप्त हो सकते हैं और उनका जलना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
Extension — पुस्तक के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार
- रिक्त स्थान: (क) ______ तथा ______ जीवाश्म ईंधन हैं। उत्तर: कोयला तथा पेट्रोलियम (प्राकृतिक गैस भी जीवाश्म ईंधन है)।
- रिक्त स्थान: (ख) ______ तथा ______ समाप्त नहीं होनेवाले ईंधन के स्रोत हैं। उत्तर: सूर्य का प्रकाश तथा वायु (जल भी अक्षय स्रोत है)।
- रिक्त स्थान: (ग) कोलतार ______ का उत्पाद है। उत्तर: कोयला।
- रिक्त स्थान: (घ) पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों को पृथक् करने का प्रक्रम ______ कहलाता है। उत्तर: परिष्करण।
- रिक्त स्थान: (ङ) वाहनों के लिए सबसे कम प्रदूषक ईंधन ______ है। उत्तर: सीएनजी (CNG)।
- सही/गलत: (क) जीवाश्म ईंधन प्रयोगशाला में बनाए जा सकते हैं। उत्तर: असत्य — ये मृत जीवों/वनस्पतियों से लाखों वर्षों में बनते हैं।
- सही/गलत: (ख) कोक, कार्बन का शुद्ध रूप है। उत्तर: सत्य (पुस्तक के शब्दों में 'लगभग शुद्ध रूप')।
- सही/गलत: (ग) पेट्रोल की अपेक्षा सीएनजी अधिक प्रदूषक ईंधन है। उत्तर: असत्य — CNG कम प्रदूषणकारी है।
- सही/गलत: (घ) बरौनी में तेल का कुआँ है। उत्तर: असत्य — बरौनी में तेल शोधक कारखाना है; कच्चा तेल असम/हल्दिया पाइपलाइन से आता है।
- सही/गलत: (ङ) कोलतार विभिन्न पदार्थों का मिश्रण है। उत्तर: सत्य — लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण।
- विस्तृत: कोयला किस प्रकार बनता है? उत्तर-संकेत: ~300 मिलियन वर्ष पूर्व निचले जलीय क्षेत्रों के घने वन बाढ़/भूकम्प से मिट्टी के नीचे दबे; अधिक मिट्टी से संपिडन; गहराई पर ताप बढ़ा; उच्च दाब-ताप, वायु की अनुपस्थिति में अवसादी शैलों के बीच मृत वनस्पति सुरक्षित रही; धीरे-धीरे पीट → लिग्नाइट → कोयला (कार्बनीकरण)।
- विस्तृत: जीवाश्म ईंधन समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन क्यों हैं? उत्तर-संकेत: बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, जबकि ज्ञात भंडार कुछ सौ वर्षों में समाप्त हो सकते हैं; उपयोग की गति निर्माण की गति से बहुत अधिक है।
- विस्तृत: ईंधन कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर-संकेत: उत्पत्ति के आधार पर प्राथमिक (लकड़ी, कोयला, तेल, पेट्रोलियम) व द्वितीयक (चारकोल, कोक, रसोई गैस); भौतिक अवस्था के आधार पर ठोस (लकड़ी, कोयला), द्रव (पेट्रोलियम), गैस (प्राकृतिक गैस)।
- विस्तृत: पेट्रोलियम निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए। उत्तर-संकेत: नई मिट्टी की परतों के नीचे वृक्ष व मृत जीव दबे; समुद्री प्राणी समुद्र की तली में अजैव तलछट के साथ दबे; भारी दबाव, लाखों वर्षों में वायु की अनुपस्थिति, उच्च ताप-दाब में पेट्रोलियम बना; तेल हल्का होने से सरंध्र शैलों से ऊपर उठा — चित्र-9.6 में तेल/गैस की परत जल की परत के ऊपर है।
- विस्तृत: कोयला के विभिन्न उत्पादों के अभिलक्षणों एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए। उत्तर-संकेत: कोक (कठोर, सरंध्र, काला, लगभग शुद्ध कार्बन; इस्पात व धातु-निष्कर्षण), कोलतार (भूरे-काले गाढ़ा द्रव, अप्रिय गंध, ~200 पदार्थों का मिश्रण; रंग, औषधि, विस्फोटक, प्लास्टिक, पेन्ट, नैफ्थलीन), कोयला गैस (कोक बनाते समय प्राप्त; पहले सड़कों की रोशनी — लंदन 1810, न्यूयार्क ~1820 — अब ऊष्मा का स्रोत; संयंत्रों के निकट के उद्योगों में ईंधन)।
- विस्तृत: एलपीजी और सीएनजी का ईंधन के रूप में उपयोग करने से क्या लाभ हैं? उत्तर-संकेत: LPG घरों/उद्योगों में ईंधन; CNG कम प्रदूषणकारी स्वच्छ ईंधन, पाइपों से सीधा घरों/कारखानों में जलाया जा सकता है, परिवहन वाहनों में ईंधन।
- विस्तृत: सूर्य के प्रकाश एवं वायु को ईंधन के रूप में उपयोग करने से क्या लाभ हैं? उत्तर-संकेत: असीमित, समाप्त न होनेवाले स्रोत; आनेवाली पीढ़ी को कठिनाई नहीं, पर्यावरण बेहतर, विश्व ऊष्मण का कम खतरा, ईंधन की उपलब्धता लम्बे समय तक।
- विस्तृत: भारत में तेल क्षेत्र कहाँ-कहाँ पाए जाते हैं? उत्तर-संकेत: असम (माहोर कटिया–मोरम), गुजरात (अंकलेश्वर), मुम्बई हाई समुद्रतल; बिहार में बरौनी तेल शोधक कारखाना (1964, रूस-रोमानिया सहयोग; 1965 में 1 मिलियन मीट्रिक टन/वर्ष, बाद में 6 मिलियन तक)।
परियोजना कार्य (पुस्तक से): (1) अपने पड़ोस के किन्हीं पाँच परिवारों का चयन कीजिए — उनका ऊर्जा उपभोग (कोयला, गैस, विद्युत, पेट्रोल, मिट्टी का तेल) पिछले पाँच वर्षों में बढ़ा है या कम हुआ है, और ऊर्जा बचत हेतु उन्होंने क्या उपाय किए हैं — पता लगाइए। (2) भारत का एक रूपरेखा मानचित्र लीजिए — कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पाए जाने के स्थान तथा तेल शोधक कारखाने चिह्नित कीजिए। (3) भारत में प्रमुख तापीय शक्ति संयंत्रों के स्थानों का पता लगाइए और वहाँ स्थापित किए जाने के संभावित कारण बताइए। (4) ईंधन की बर्बादी कहाँ-कहाँ और किस रूप में हो रही है, और बर्बादी को कैसे रोका जा सकता है — पता लगाइए।
- ईंधन = जलने पर अधिक ऊष्मा व प्रकाश देनेवाला पदार्थ; सभी ईंधन मुख्यतः कार्बन से बने; जलने पर CO2 निकलती है (चूने का पानी दूधिया, फिनोफ्थेलीन रंगहीन)।
- वर्गीकरण: उत्पत्ति से प्राथमिक (लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम) व द्वितीयक (चारकोल, कोक, रसोई गैस); अवस्था से ठोस/द्रव/गैस।
- कोयला: पीट → लिग्नाइट → कोयला (कार्बनीकरण, ~300 मिलियन वर्ष); उत्पाद — कोक, कोलतार, कोयला गैस।
- पेट्रोलियम: मृत समुद्री जीवों से लाखों वर्षों में; परिष्करण प्रभाजी आसवन से (LPG, पेट्रोल, केरोसीन, डीजल, स्नेहक तेल, पैराफिन मोम, बिटुमेन); CNG स्वच्छ ईंधन; सूर्य/वायु/जल अक्षय स्रोत।
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