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Class 8 • Science • Vigyan-3 (BSEB)

Chapter 10: विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

द्रवों में विद्युत चालन, सुचालक और अल्प चालक, आसुत जल बनाम नमक का घोल, विद्युत-अपघटन और विद्युत लेपन — पुस्तक के क्रियाकलापों सहित।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Science • Book: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 8)  |  अध्याय 10  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है और ये नोट्स पाठ्यपुस्तक का स्थान नहीं लेते।

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का सरलीकृत चित्र — लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के लिए चित्र

विद्युत धारा के प्रयोग का सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

हमने पिछली कक्षाओं में विद्युत धारा के प्रवाह, विद्युत परिपथ, चालकता एवं विद्युत धारा के विभिन्न प्रभावों के बारे में जाना है। हम पदार्थों को दो श्रेणियों में बाँटते हैं — विद्युत धारा के सुचालक एवं अल्प चालक। आइए, हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि द्रवों में से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। सभी द्रव सुचालक हैं? क्या द्रवों पर विद्युत धारा का कोई प्रभाव भी होता है?

1. क्रियाकलाप-1 — द्रवों में धारा की जाँच और परीक्षित्र (Tester)

आइए, सर्वप्रथम हम विद्युत धारा के प्रवाह की जाँच करने के लिए अपने साधारण जाँच परिपथ में बल्ब जलाकर देख लें। अब हम सेल की जगह बैटरी का उपयोग करेंगे और तार के खुले सिरों पर से लगभग 2 सेमी लम्बाई का प्लास्टिक हटा देंगे। हम इन दोनों तारों को आपस में सटाकर देखें। क्या बल्ब जला? यदि हाँ तो परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है और उपयोग में लाया गया तार ठीक है। (हम सावधानी रखेंगे कि तार बहुत कम समय के लिए सटाया जाय — अधिक समय तक सटाकर रखने से हमारी बैटरी जल्द खत्म हो जाएगी।) कई सेलों को जोड़कर बैटरी बनाने से हम परिपथ में ज़्यादा विद्युत धारा प्रवाहित कर सकते हैं। अतः हमारे प्रयोग में बल्ब अधिक प्रकाश देगा। बैटरी सेलों का समूह है।

इसके लिए हम एक नया Tester (परीक्षित्र) भी बनाते हैं। आपके विज्ञान किट में छोटी चुम्बकीय सूई होगी। इसे हम माचिस की ट्रे में रख लें या माचिस के ट्रे की आकार का एक डब्बा बना लें जिससे चुम्बकीय सूई दिखती रहे। इस Tester का उपयोग हम अल्प चालक पदार्थों में विद्युत धारा के प्रवाह की जाँच के लिए करते हैं। इस डब्बे के चारों ओर तार लपेट दें तथा दोनों सिरा अलग-अलग चिह्नित कर लें। आप अपने घर में दवाइयों अथवा विभिन्न व्यर्थ शीशियों एवं बोतलों के ढक्कन इकट्ठा करें जो लगभग 1 से.मी. गहराई का हो। इन ढक्कनों में कुछ प्रकार के तेल (सरसों तेल, नारियल तेल, डालडा, रिफाइन, घी), नींबू का रस, सिरका, पेय जल, दूध आदि लेते हैं। आइए, जाँच करें कि इन पदार्थों से होकर विद्युत धारा प्रवाहित होती है या नहीं। हम तार के दोनों खुले सिरों को लिए गए तरल में डुबोते हैं। ध्यान रहे कि खुले तारों के बीच की दूरी तरल में 1 से.मी. से अधिक न हो। हम अपने अवलोकनों को नोट करेंगे कि क्या सभी द्रवों में तार डालने पर बल्ब जला। यदि हाँ तो किस तरल में डालने पर बल्ब में सबसे अधिक प्रकाश दिखा।

यदि बैटरी और बल्ब समान हैं तो विभिन्न द्रवों में प्रकाश की तीव्रता अलग-अलग है, क्यों? क्या इसका कारण पदार्थ से होकर कम और अधिक विद्युत धारा का प्रवाहित होना नहीं है? जिन पदार्थों से होकर विद्युत धारा अल्प मात्रा में प्रवाहित होती है वे पदार्थ अल्प चालक कहे जाते हैं। तालिका-1 में भरिए: तरल पदार्थ, बल्ब के दीप्त होने की तीव्रता, सुचालक/अल्प चालक।

तालिका-2 (सुचालक/अल्प चालक द्रव): नल का पानी, नींबू का रस, दूध, शहद, रिफाइन तेल/सरसों तेल, सिरका — स्तंभ: तरल पदार्थ, चुम्बकीय सूई का विक्षेप (हाँ/नहीं), सुचालक/अल्प चालक। इस सारणी को और आगे बढ़ाने का प्रयास कीजिए।

हवा भी विशेष परिस्थिति में चालक बन जाती है

जब हमारे Tester (परीक्षित्र) के खुले तार एक दूसरे को न छूते हों परन्तु नज़दीक हों तो चुम्बकीय सूई विक्षेपित हो सकती है। हमें ज्ञात है कि इन दोनों सिरों के बीच हवा है, जो विद्युत का हीन चालक है पर नमी बढ़ जाने या विभव बढ़ जाने पर यह सुचालक की तरह कार्य करने लगता है। आइए पता लगाने का प्रयास करें कि क्या अन्य अल्प चालक भी विशेष परिस्थिति में सुचालक की तरह कार्य करने लगते हैं — जैसे वायु तड़ित के समय सुचालक के रूप में कार्य करने लगता है। वास्तव में विशेष परिस्थितियों में अधिकांश पदार्थ विद्युत धारा का चालन करते हैं। यही कारण है कि पदार्थों को चालकों और विद्युतरोधियों में वर्गीकृत करने की अपेक्षा सुचालकों एवं अल्प चालकों के रूप में वर्गीकृत करने को अधिक मान्यता दी जाती है।

2. क्रियाकलाप-2 — जल की चालकता की जाँच (आसुत जल बनाम नमक का घोल)

हमने सारणी में नल के (पानी) जल के चालकता की जाँच की। आइए, अब आसुत जल में विद्युत चालन का परीक्षण करते हैं। एक साफ स्वच्छ प्लास्टिक अथवा रबड़ का ढक्कन लीजिए। इसमें दो चम्मच आसुत जल डालिए। (आसुत जल आप विद्यालय की प्रयोगशाला या दवा की दुकान से प्राप्त कर सकते हैं।) आप अपने परीक्षित्र (Tester) से इसकी चालकता की जाँच कीजिए। आप क्या पाते हैं? क्या आसुत जल विद्युत का चालन करती है? अब थोड़ा-सा नमक (एक चुटकी) आसुत जल में मिलाइए और अपने परीक्षण को दुहराइए। इस बार आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

जब हम आसुत जल में नमक मिलाते हैं तो हमें नमक का घोल प्राप्त होता है — यह विद्युत का अच्छा चालक है। जो जल हम हैण्डपम्प, कुआँ, तालाब, नदी से प्राप्त करते हैं, वह शुद्ध नहीं होता। इसमें अनेक लवण घुले हो सकते हैं। खनिज लवणों की थोड़ी मात्रा इसमें प्राकृतिक रूप से रहती है, इसलिए यह विद्युत का सुचालक होता है। इसके विपरीत आसुत जल में किसी प्रकार का लवण नहीं होने के कारण यह विद्युत का अल्प चालक होता है।

सावधानी — जानलेवा हो सकती है

विद्युत चालकता की जाँच करते समय घर या विद्यालय के विद्युत बोर्ड का उपयोग कभी न किया जाय — यह खतरनाक हो सकता है। यह प्रयोग अभिभावक अथवा शिक्षक की उपस्थिति में ही कीजिए। हम सामान्य रूप से जिस जल का उपयोग अपने घरेलू कार्यों एवं स्वयं की सफाई के लिए करते हैं, वह लवणों के घुले होने के कारण चालक होता है। यही कारण है कि आपको गीले हाथों से या गीले फर्श पर खड़े होकर विद्युत परिपथ के साथ किसी भी प्रकार का कार्य करने से मना किया जाता है।

हमने देखा कि साधारण नमक आसुत जल में मिलाने पर इसे अच्छा चालक बना देते हैं। आइए, पता लगाएँ कि और कौन-कौन से पदार्थ हैं जो आसुत जल को अच्छा चालक बना सकते हैं।

3. क्रियाकलाप-3 और 4 — विलयनों में धारा और रासायनिक परिवर्तन

क्रियाकलाप-3: बोतलों के चार ढक्कन लीजिए; प्रत्येक में लगभग दो चाय के चम्मच आसुत जल डालिए। एक ढक्कन के आसुत जल में नींबू के रस की कुछ बूँदें डालिए और दूसरे में कास्टिक सोडा की थोड़ी मात्रा। तीसरे में नमक तथा फेनोफ्थेलीन की कुछ बूँदें डालते हैं। अब बारी-बारी से इन तीनों ढक्कनों में बैटरी एवं बल्ब से जुड़े तार के खुले सिरे लगभग 1 से.मी. की दूरी पर डालिए। ध्यान रहे कि प्रत्येक द्रव में तार डुबाने से पहले इसे अच्छी तरह धोकर फिर पोंछकर सुखा देना चाहिए। इस क्रियाकलाप में आप सर्वप्रथम यह नोट कीजिए कि कौन द्रव सुचालक है और कौन अल्प चालक। पुनः तार के सिरों को समान समय तक इन द्रवों में डुबाए रखकर इसमें होनेवाले परिवर्तनों को नोट कीजिए।

क्रियाकलाप-4: एक प्लास्टिक की कटोरी अथवा नाद लीजिए। इसमें नमक घुला आसुत जल भरिए। पुनः थोड़ी-सी फेनोफ्थेलीन या नींबू का रस की कुछ बूँदें डाल दीजिए। अब आप दो बेकार सेलों में से सावधानीपूर्वक कार्बन की छड़ें निकाल लीजिए — ध्यान रहे कि छड़ के ऊपर पीतल की टोपी लगी हो। अब पीतल की टोपी को सरस कागज़ से साफ कर उस पर तार के सिरे को अच्छी तरह से साफ कर लपेट लीजिए। अब कार्बन की इन दोनों छड़ों को इस विलयन में खड़ा कीजिए। ध्यान रहे कि तार लपेटी टोपी विलयन से ऊपर रहे। अब दोनों तारों को क्रमशः बैटरी के धन तथा ऋण टर्मिनल से जोड़ दीजिए। कार्बन की छड़ की जगह 6 से.मी. लम्बाई की लोहे की काँटी भी ले सकते हैं। टर्मिनल से जुड़ जाने के बाद इलेक्ट्रोड (धन टर्मिनल से जुड़ा एनोड तथा ऋण टर्मिनल से जुड़ा कैथोड) से होकर विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित होगी। 3–4 मिनट तक प्रतीक्षा करने के बाद आप इलेक्ट्रोडों को ध्यानपूर्वक देखिए। क्या आप इलेक्ट्रोडों के समीप कुछ बुलबुले देखते हैं? क्या हम विलयन में हो रहे परिवर्तन को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं? आपने पिछली कक्षा में रासायनिक अभिक्रिया के बारे में जान लिया है।

रासायनिक अभिक्रिया के कारण कैथोड के समीप का बुलबुला हाइड्रोजन गैस का है जिसके कारण इस इलेक्ट्रोड के समीप का विलयन लाल हो जाता है। एनोड (धन टर्मिनल) के समीप निकलनेवाले बुलबुले ऑक्सीजन के हैं। इस प्रयोग में हम निकलनेवाले गैसों की जाँच नहीं कर सकते क्योंकि जाँच के लिए गैसों को जमा करना होगा। इसके लिए पुनः अलग से व्यवस्था कर नया क्रियाकलाप कीजिए।

क्रियाकलाप-5: एक चौड़े मुँहवाला पेंदी कटा बोतल लीजिए। इसमें दो छेदवाला कॉर्क लगाकर उसमें दो इलेक्ट्रोड फिट कीजिए। इलेक्ट्रोड के रूप में ताँबे की पत्ती अथवा लोहे की काँटी का उपयोग किया जा सकता है। अब नमक मिला जल उसमें डाल दीजिए। इलेक्ट्रोड इस प्रकार लगा दीजिए कि कॉर्क से थोड़ा-थोड़ा बाहर निकला रहे। अब दो परखनली में जल भरकर इलेक्ट्रोडों के ऊपर उलट दीजिए। अब इलेक्ट्रोडों को बैटरी से जोड़ दीजिए। अब गैस के बुलबुले निकलेंगे जो परखनलियों में अलग-अलग जमा हो जाएँगे। धन टर्मिनल की ओर वाली परखनली में ऑक्सीजन और ऋण टर्मिनलवाली परखनली में हाइड्रोजन गैस जमा होगी। आप अवलोकन करते रहिए क्या दोनों परखनलियों के जल का स्तर समान है? आप देखते हैं कि एक परखनली बिल्कुल खाली हो जाती है तो दूसरी आधी क्यों? पिछली कक्षाओं में आपने जाना है कि ऑक्सीजन जलने में मदद करता है और हाइड्रोजन जलने में मदद तो नहीं करती पर खुद जलती है। आप जलती तीली/संठी को बारी-बारी से दोनों परखनलियों के मुँह पर लाइए। क्या आपको पता चला कि किस परखनली में कौनसी गैस है?

आप जान पाएँगे कि किसी चालक विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसके फलस्वरूप गैसों के बनने से बुलबुले निकलते हैं। अन्य द्रवों में इस प्रकार की घटना देखी जा सकती है, जिनसे होकर विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है। इलेक्ट्रोडों पर धातु के निक्षेप देखे जा सकते हैं। विलयन के रंगों में परिवर्तन हो सकते हैं — यह रासायनिक अभिक्रिया में उपयोग में लाए जानेवाले इलेक्ट्रोडों और विलयन पर निर्भर करते हैं। ये विद्युत धारा के कुछ रासायनिक प्रभाव हैं।

इतिहास — निकोलसन (1800) और डेवी (1807)

सर्वप्रथम 1800 ई. में ब्रिटिश रसायनज्ञ विलियम निकोलसन ने यह दर्शाया कि यदि इलेक्ट्रोड जल में डूबे हों और उनके द्वारा विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाय तो हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बुलबुले उत्पन्न होते हैं। ऑक्सीजन धन टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड पर और हाइड्रोजन ऋण टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड पर बनते हैं। सन् 1807 ई. में सर हम्फ्री डेवी ने एक प्रयोग करते समय पोटाश (शोरा) से विद्युत धारा गुजारी — विद्युत धारा गुजरने से पोटाश गर्म होकर पिघल गया। कुछ ढेले ऋण टर्मिनल की ओर बन रहे थे। डेवी ने इस तत्व का नाम पोटैशियम रखा; इसी प्रकार उन्होंने सोडियम, कैल्शियम, स्ट्रॉशियम, मैग्निशियम और बेरियम धातुओं का पता लगाया। धातुओं के निष्कर्षण में विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव एवं इस कारण होने वाले विद्युत-विच्छेदन का व्यापक प्रयोग होता है।

आप विद्युत धारा के प्रवाह और इसके प्रभावों का परीक्षण फलों, सब्जियों, वनस्पतियों पर कर सकते हैं। इन परीक्षणों को करते समय चुम्बकीय सूई अथवा LED का उपयोग किया जाना अच्छा होगा क्योंकि ये अल्प चालकता को भी प्रदर्शित कर सकते हैं। LED आपको बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हो जाएँगे। इस प्रकार के प्रयोगों से अनेक रोचक तथ्य सामने आएँगे।

4. विद्युत लेपन (Electroplating)

आपके घरों में रोज़-रोज़ उपयोग में लाई जानेवाली कुछ ऐसी वस्तुएँ होंगी जो चमकदार हैं और इस पर सामान्यतया खरोंच भी नहीं लगता है — जैसे आपके साइकिल की हैंडल और रिम, दरवाज़े और खिड़कियों के हैण्डल तथा चिटकनियाँ, कुछ सजावटी गुलदस्ते आदि महिलाओं द्वारा उपयोग में लाए जानेवाले सस्ते आभूषण जो सोने और चांदी की तरह दिखते हैं। ये वस्तुएँ एक सस्ती कम चमकदार धातु पर दूसरी धातु चढ़ाकर बनाई जाती है। यह परत किस प्रकार चढ़ाई जाती है? आइए, स्वयं करके देखें।

क्रियाकलाप-6: एक बीकर में थोड़ा आसुत जल लगभग 250 मिलीलीटर लीजिए। दो ताम्बे के पतले प्लेट लगभग 10 से.मी. लम्बा और 4 से.मी. चौड़ाई का लीजिए। आसुत जल में दो चम्मच कॉपर सल्फेट घोलिए। विलयन को अधिक चालक बनाने के लिए कुछ बूँदें सल्फ्यूरिक अम्ल के डाल दीजिए। अब ताँबे के प्लेटों को सरस कागज़ से रगड़कर साफ कर लीजिए। पुनः अच्छी तरह जल से धोकर सूखा लीजिए। इन प्लेटों को बैटरी के टर्मिनल से जोड़कर विलयन में डुबाइए। ध्यान रहे कि विलयन के अंदर दोनों प्लेटों के बीच कुछ दूरी बनी रहे और परिपथ के तार और प्लेट का जोड़ विलयन में न डूबे। परिपथ में लगभग 15 से 20 मिनट तक विद्युत धारा प्रवाहित होने दीजिए। अब विलयन से इलेक्ट्रोडों को निकालकर ध्यानपूर्वक देखिए। क्या उनमें से किसी एक में कुछ अन्तर पाते हैं? क्या आप इस पर कोई परत चढ़ी देखते हैं? इस परत का रंग कैसा है? जब कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फेट कॉपर (ताँबा) तथा सल्फेट में वियोजित (टूट) जाता है। स्वतंत्र ताँबा (कॉपर) ऋण टर्मिनल की ओर आकर्षित होता है तथा उस पर निक्षेपित हो जाता है। विलयन में कॉपर की क्षतिपूर्ति किस प्रकार होती है? आप अपने अवलोकन में ध्यान देंगे कि दूसरे ताँबे के प्लेट से समान मात्रा में कॉपर विलयन में घुल जाता है। इस प्रकार कॉपर का एक प्लेट पर निक्षेपित होने तथा दूसरे प्लेट से विलयन में घुलने की प्रक्रिया चलती रहती है।

अतः आप मनचाही धातु की परत किसी अन्य पदार्थ पर चढ़ा सकते हैं। आप ऋण टर्मिनल के इलेक्ट्रोड बदलकर इस क्रिया को दुहरा सकते हैं। विद्युत द्वारा किसी पदार्थ पर किसी वांछित धातु की परत चढ़ाने (निक्षेपित) की प्रक्रिया को विद्युत लेपन कहते हैं। यह विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का सर्वाधिक सामान्य उपयोग है। इस विधि का प्रयोग कर लोहे पर क्रोमियम की परत चढ़ाकर कार के कुछ पुर्ज़े, नल, बर्नर, साइकिल की हैण्डल, रिम आदि को चमकदार बनाया जाता है। साथ ही यह खरोंच का प्रतिरोध करता है और जंग लगने या झरने, टूटने से बचाता है। क्रोमियम महँगी धातु है। अतः किसी पदार्थ को क्रोमियम का न बनाकर अन्य पदार्थ से बनाकर उस पर क्रोमियम की परत चढ़ा दी जाती है। आभूषण बनाने में सस्ती धातुओं के आभूषण बनाकर उस पर सोने अथवा चाँदी का विद्युत लेपन किया जाता है जिससे देखने में तो ये सोने–चाँदी सा दिखे पर सस्ते हों। लोहे की छड़ों, चादरों पर जिंक (जस्ता) का निक्षेपण जंग से बचाव करता है। टिन, क्रोमियम आदि की परत लोहे की क्रियाशीलता को वायुमंडल से अलग रखकर कम करता है।

What you should learn — तुम्हें क्या सीखना चाहिए

सुचालक/अल्प चालक की पहचान, आसुत जल व नमक के घोल का अंतर, इलेक्ट्रोड/एनोड/कैथोड, विद्युत-अपघटन में गैसों का बनना (कैथोड पर हाइड्रोजन, एनोड पर ऑक्सीजन) और विद्युत लेपन की प्रक्रिया व उपयोग को समझें।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • इलेक्ट्रोड (Electrode) — विलयन में डूबी वह छड़/प्लेट जिससे होकर धारा विलयन में जाती है; धन टर्मिनल से जुड़ा एनोड, ऋण टर्मिनल से जुड़ा कैथोड।
  • सुचालक (Good conductor) — जिससे होकर विद्युत धारा अच्छी मात्रा में प्रवाहित होती है।
  • अल्पचालक (Poor conductor) — जिससे होकर विद्युत धारा अल्प मात्रा में प्रवाहित होती है।
  • रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect) — चालक विलयन से धारा प्रवाहित होने पर होनेवाली रासायनिक अभिक्रियाएँ (गैसों के बुलबुले, धातु-निक्षेप, रंग-परिवर्तन)।
  • विद्युत लेपन (Electroplating) — विद्युत द्वारा किसी पदार्थ पर किसी वांछित धातु की परत चढ़ाने (निक्षेपित) की प्रक्रिया।
  • एल.ई.डी. (Light Emitting Diode) — अल्प चालकता को भी प्रदर्शित करनेवाला सूचक; चुम्बकीय सूई की तरह कम धारा पर भी काम करता है।
  • परीक्षित्र (Tester) — चुम्बकीय सूई वाला यंत्र जिससे अल्प चालक पदार्थों में धारा की जाँच की जाती है।
  • बैटरी — सेलों का समूह; कई सेल जोड़ने से परिपथ में ज़्यादा धारा प्रवाहित होती है।

Remember — याद रखें

  • कुछ द्रव विद्युत के सुचालक होते हैं एवं कुछ अल्पचालक विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव, अम्लों, क्षारकों एवं लवणों के विलयन होते हैं।
  • किसी चालक द्रव में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।
  • विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युत लेपन कहते हैं।
  • आसुत जल अल्प चालक है; नमक मिलाने पर वह अच्छा चालक बन जाता है। नल/कुआँ/तालाब/नदी का जल लवण घुले होने से सुचालक है।
  • नमक-मिले जल में धारा प्रवाहित करने पर कैथोड (ऋण टर्मिनल) पर हाइड्रोजन और एनोड (धन टर्मिनल) पर ऑक्सीजन गैस बनती है; कैथोड के पास का विलयन लाल हो जाता है।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: 'आसुत जल सुचालक है' लिखना — आसुत जल अल्प चालक है; लवण घुले होने पर ही जल अच्छा चालक बनता है। दूसरी गलती: गैसों के टर्मिनल उलट देना — हाइड्रोजन ऋण टर्मिनल (कैथोड) पर, ऑक्सीजन धन टर्मिनल (एनोड) पर बनती है। तीसरी गलती: विद्युत लेपन में परत चढ़नेवाली वस्तु को धन टर्मिनल से जोड़ना — परत ऋण टर्मिनल वाली वस्तु पर चढ़ती है (कॉपर ऋण टर्मिनल की ओर आकर्षित होता है)।

Chart / Table: सुचालक/अल्प चालक द्रव (तालिका-2, पुस्तक से)

तरल पदार्थचुम्बकीय सूई का विक्षेप (हाँ/नहीं)सुचालक/अल्प चालक
नल का पानी— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)
नींबू का रस— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)
दूध— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)
शहद— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)
रिफाइन तेल/सरसों तेल— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)
सिरका— (प्रयोग से भरें)— (प्रयोग से भरें)

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. सुचालक और अल्प चालक में अंतर बताइए। दो-दो द्रव उदाहरण दीजिए।
  2. आसुत जल में नमक मिलाने पर उसकी चालकता क्यों बढ़ जाती है?
  3. एनोड और कैथोड किसे कहते हैं? नमक-मिले जल में प्रत्येक पर कौन सी गैस बनती है?
  4. विद्युत लेपन किसे कहते हैं? अपने घर की दो विद्युत-लेपित वस्तुओं के नाम लिखिए।
  5. गीले हाथों से विद्युत परिपथ का कार्य क्यों मना किया जाता है?

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. प्रश्न: Tester (परीक्षित्र) क्या है और इसे क्यों बनाया जाता है?
    उत्तर: माचिस की ट्रे/डब्बे में रखी छोटी चुम्बकीय सूई वाला यंत्र, जिसके चारों ओर तार लपेटा जाता है। अल्प चालक पदार्थों में धारा बहुत कम होती है — बल्ब नहीं जलता, पर चुम्बकीय सूई विक्षेपित हो जाती है, इसलिए Tester से अल्प चालकता की भी जाँच हो जाती है।
  2. प्रश्न: नल का जल सुचालक क्यों है जबकि आसुत जल अल्प चालक है?
    उत्तर: नल/कुआँ/तालाब/नदी के जल में खनिज लवण प्राकृतिक रूप से घुले होते हैं, इसलिए वह सुचालक है; आसुत जल में किसी प्रकार का लवण नहीं होता, इसलिए वह अल्प चालक है। नमक मिलाते ही आसुत जल का घोल अच्छा चालक बन जाता है।
  3. प्रश्न: विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के तीन उदाहरण दीजिए।
    उत्तर: (1) चालक विलयन में गैसों के बुलबुले बनना (नमक-मिले जल में कैथोड पर हाइड्रोजन, एनोड पर ऑक्सीजन); (2) इलेक्ट्रोडों पर धातु का निक्षेप (कॉपर सल्फेट में ऋण टर्मिनल पर कॉपर चढ़ना); (3) विलयन के रंग में परिवर्तन (कैथोड के पास विलयन का लाल होना)।
  4. प्रश्न: कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत लेपन कैसे होता है?
    उत्तर: धारा प्रवाहित करने पर कॉपर सल्फेट कॉपर तथा सल्फेट में वियोजित हो जाता है; स्वतंत्र कॉपर ऋण टर्मिनल की ओर आकर्षित होकर उस प्लेट पर निक्षेपित हो जाता है; दूसरे ताँबे के प्लेट से समान मात्रा में कॉपर विलयन में घुलकर क्षतिपूर्ति करता है।
  5. प्रश्न: लोहे पर क्रोमियम की परत क्यों चढ़ाई जाती है? जिंक का लेपन किस काम आता है?
    उत्तर: क्रोमियम की परत वस्तु को चमकदार बनाती है, खरोंच का प्रतिरोध करती है और जंग/झरने/टूटने से बचाती है; क्रोमियम महँगा है इसलिए पूरा पदार्थ क्रोमियम का न बनाकर उस पर परत चढ़ाई जाती है। लोहे की छड़ों/चादरों पर जिंक (जस्ता) का निक्षेपण जंग से बचाव करता है; टिन/क्रोमियम की परत लोहे को वायुमंडल से अलग रखकर उसकी क्रियाशीलता कम करती है।

Extension — पुस्तक के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार

  1. रिक्त स्थान: (क) किसी विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर ______ प्रभाव उत्पन्न होता है। उत्तर: रासायनिक।
  2. रिक्त स्थान: (ख) वांछित धातु को किसी पदार्थ पर निक्षेपित करना ______ कहलाता है। उत्तर: विद्युत लेपन।
  3. रिक्त स्थान: (ग) नमक मिले जल में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर ऑक्सीजन ______ टर्मिनल पर और हाइड्रोजन ______ टर्मिनल पर मिलता है। उत्तर: ऑक्सीजन धन टर्मिनल (एनोड) पर, हाइड्रोजन ऋण टर्मिनल (कैथोड) पर।
  4. रिक्त स्थान: (घ) विद्युत चालन करने वाला अधिकांश द्रव ______, ______ और ______ के विलयन होते हैं। उत्तर: अम्लों, क्षारकों और लवणों।
  5. विस्तृत: चित्र में दिए गए द्रव में टेस्टर परीक्षित्र का तार डालने पर बल्ब नहीं जलता पर चुम्बकीय सूई विक्षेपित होती है। इसका क्या कारण है? व्याख्या कीजिए। उत्तर-संकेत: द्रव अल्प चालक है — धारा इतनी कम है कि बल्ब नहीं जलता, पर चुम्बकीय सूई इतनी संवेदनशील है कि कम धारा पर भी विक्षेपित हो जाती है; इसलिए अल्प चालकता की जाँच Tester/LED से की जाती है, बल्ब से नहीं।
  6. विस्तृत: क्या शुद्ध जल विद्युत का चालन करता है? यदि नहीं तो इसे चालक बनाने के लिए क्या करना होगा? उत्तर-संकेत: नहीं — आसुत/शुद्ध जल अल्प चालक है क्योंकि इसमें कोई लवण नहीं होता; नमक (या कोई अम्ल/क्षार/लवण) मिलाने पर उसका घोल अच्छा चालक बन जाता है।
  7. विस्तृत: क्या तेज वर्षा के समय लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के तारों की मरम्मत करना सुरक्षित होगा? उत्तर-संकेत: नहीं — वर्षा का जल लवण घुले होने से चालक होता है और गीली स्थिति में विद्युत परिपथ का कार्य खतरनाक है; पुस्तक गीले हाथों/गीले फर्श पर विद्युत कार्य से मना करती है।

अभ्यास-4 (तालिका-कार्य, पुस्तक से): अपने आसपास दिखने वाले विद्युत लेपित वस्तुओं की सूची इस प्रकार बनाइए — विद्युत लेपित वस्तु | किस पदार्थ पर | किस धातु का लेपन (उदाहरण: साइकिल की हैण्डल | लोहा | क्रोमियम)।

परियोजना कार्य (पुस्तक से): (1) विभिन्न फलों तथा सब्जियों से होकर विद्युत चालन का परीक्षण कीजिए और अपने परिणामों का प्रदर्शन कर सारणी बनाइए। (2) धातु की एक चालक प्लेट लेकर इस पर पोटाशियम आयोडाइड तथा स्टार्च का गीला पेस्ट फैलाइए। चित्र-10.5 के अनुसार धातु की प्लेट को बैटरी के एक टर्मिनल से संयोजित कर लीजिए। बैटरी के दूसरे टर्मिनल से एक ताम्बे का तार संयोजित कर उसके स्वतंत्र सिरे से प्लेट पर कुछ अक्षर लिखिए — आप क्या देखते हैं?

Recap — विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव
  • सुचालक बनाम अल्प चालक: धारा की मात्रा से पहचान; बल्ब न जले तो Tester/LED से जाँच; हवा भी नमी/विभव बढ़ने पर चालक बन जाती है।
  • आसुत जल अल्प चालक; नमक/अम्ल/क्षार/लवण मिलाने पर अच्छा चालक; नल/कुआँ/तालाब/नदी का जल लवणयुक्त होने से सुचालक — गीले हाथों से विद्युत कार्य मना है।
  • रासायनिक प्रभाव: चालक विलयन में धारा से गैसों के बुलबुले (कैथोड पर हाइड्रोजन, एनोड पर ऑक्सीजन), धातु-निक्षेप, रंग-परिवर्तन; निकोलसन 1800, डेवी 1807 (पोटैशियम आदि की खोज)।
  • विद्युत लेपन: वांछित धातु की परत चढ़ाना; कॉपर सल्फेट में ऋण टर्मिनल पर कॉपर चढ़ता है; लोहे पर क्रोमियम (चमक + जंग से बचाव), जिंक (जंग से बचाव), सोना/चाँदी (सस्ते आभूषण)।

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