Chapter 6: मानव स्मृति
स्मृति की प्रकृति — तीन पड़ाव, प्रसंस्करण के स्तर, दीर्घकालिक स्मृति के प्रकार, भूलना और स्मृति सुधार।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Psychology • Book: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
मानव स्मृति — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 6 | माध्यम: हिंदी
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स्रोत-नोट: यह अध्याय BSTBPC की Class 11 Psychology सूची के अध्याय 7 (Human Memory) से मेल खाता है — साइट की सूची में अध्याय 6 है। विषय-वस्तु EG के अपने हिंदी शब्दों में है; यहाँ कोई आधिकारिक PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
स्मृति की प्रकृति — स्मृति जानकारी को समय के साथ बनाए रखने और पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया है। इसके तीन परस्पर जुड़े चरण हैं: कूटसंकेतन (encoding — जानकारी को स्मृति-तंत्र के अनुकूल रूप में दर्ज करना), भंडारण (storage — जानकारी को समय तक बनाए रखना) और पुनः प्राप्ति (retrieval — ज़रूरत पड़ने पर जानकारी को चेतना में वापस लाना)। स्मृति लगभग हर संज्ञानात्मक प्रक्रिया — प्रत्यक्षण, चिंतन, समस्या समाधान — के केंद्र में है।
सूचना-प्रसंस्करण दृष्टिकोण: चरण मॉडल — एटकिंसन और शिफ्रिन (1968) के चरण मॉडल (Stage Model) में स्मृति की तुलना कंप्यूटर से की गई है। जानकारी तीन पड़ावों से गुज़रती है: संवेदी स्मृति (ज्ञानेन्द्रियों की क्षणिक छाप — दृष्टि के लिए कुछ ही क्षण), अल्पकालिक/कार्यकारी स्मृति (कुछ समय तक सीमित मात्रा — लगभग सात जमा-घटा दो इकाइयाँ) और दीर्घकालिक स्मृति (लंबे समय तक, बड़ी क्षमता)। जानकारी एक पड़ाव से अगले में तभी जाती है जब उस पर ध्यान दिया जाए और उसका अभ्यास (rehearsal) हो।
प्रसंस्करण के स्तर और दीर्घकालिक स्मृति के प्रकार — प्रसंस्करण-स्तर दृष्टिकोण कहता है कि जानकारी को तीन स्तरों पर कूटबद्ध किया जा सकता है: संरचनात्मक (दिखावट), ध्वन्यात्मक (आवाज़) और अर्थगत (अर्थ)। अर्थगत प्रसंस्करण सबसे गहरा स्तर है और सबसे अच्छा धारण (retention) देता है — इसलिए अर्थ समझकर याद करना रटने से बेहतर है। दीर्घकालिक स्मृति के दो बड़े वर्ग हैं: घोषणात्मक स्मृति (तथ्य और घटनाएँ — इसमें प्रासंगिक/घटनात्मक स्मृति और अर्थगत स्मृति आती हैं) और प्रक्रियात्मक स्मृति (कौशल और आदतें — जैसे साइकिल चलाना, जो बिना सोचे हो जाता है)।
दीर्घकालिक स्मृति में ज्ञान का प्रतिनिधित्व और संगठन — दीर्घकालिक स्मृति की सामग्री संप्रत्ययों, श्रेणियों और प्रतिमाओं (images) के रूप में दर्शाई जाती है और पदानुक्रम में संगठित होती है — जैसे 'जीव → जानवर → कुत्ता → पालतू कुत्ता'। स्कीमा (schema) किसी विषय के बारे में संगठित ज्ञान-ढाँचा है जो नई जानकारी की व्याख्या को आकार देता है। संज्ञानात्मक मितव्ययिता (cognitive economy) का अर्थ है कि सामान्य गुण ऊँचे स्तर पर ही दर्ज होते हैं, हर उदाहरण के साथ दोहराए नहीं जाते — इसलिए स्मृति कुशलता से काम करती है।
रचनात्मक प्रक्रिया के रूप में स्मृति — स्मृति सिर्फ पुनरुत्पादन नहीं, रचनात्मक प्रक्रिया है। एबिंगहॉस (1885) ने खुद पर प्रयोग करके दिखाया कि भूलना एक समान गति से नहीं होता — शुरू में तेज़, फिर धीरे-धीरे स्थिर। बार्टलेट (1932) ने कहानियों और पाठों से दिखाया कि स्मृति सक्रिय और रचनात्मक है: जो हम याद करते हैं, वह समय के साथ बदलता और संशोधित होता है — इसलिए दो लोगों की एक ही घटना की याद अलग-अलग हो सकती है। क्रमिक पुनरुत्पादन (serial reproduction) में कहानी हर बार सुनाने पर बदलती जाती है — यही रचनात्मकता का प्रमाण है।
भूलने की प्रकृति और कारण; स्मृति सुधारना — भूलना समय के साथ संचित जानकारी का ह्रास है। इसके कारण हैं: चिह्न-क्षय (trace decay — समय बीतने से स्मृति-चिह्न कमज़ोर होना), हस्तक्षेप (पुरानी जानकारी नई में बाधा — अग्रोन्मुख हस्तक्षेप; नई जानकारी पुरानी में बाधा — पश्चोन्मुख हस्तक्षेप) और पुनः प्राप्ति की विफलता (सही संकेत/cue न मिलने पर जानकारी होते हुए भी न मिलना)। स्मृति सुधारने की रणनीतियाँ हैं: स्मृति-सहायक विधियाँ (mnemonics — जैसे कीवर्ड विधि में प्रतिमा बनाना), संगठन (chunking — छोटी इकाइयों को बड़े समूहों में बाँधना), पर्याप्त पुनः प्राप्ति-संकेत बनाना, और PQRST विधि (Preview — सरसरी नज़र, Question — प्रश्न बनाना, Read — पढ़ना, Self-recitation — खुद दोहराना, Test — जाँच करना)। कोई एक विधि रातों-रात स्मृति नहीं सुधारती — स्वास्थ्य, रुचि, प्रेरणा और विषय से परिचय भी मायने रखते हैं।
मुख्य बिंदु
- स्मृति के चरण: कूटसंकेतन → भंडारण → पुनः प्राप्ति।
- चरण मॉडल: संवेदी → अल्पकालिक → दीर्घकालिक (एटकिंसन-शिफ्रिन, 1968)।
- सबसे गहरा प्रसंस्करण: अर्थगत — सबसे अच्छा धारण।
- दीर्घकालिक स्मृति: घोषणात्मक (प्रासंगिक + अर्थगत) और प्रक्रियात्मक।
- भूलना: चिह्न-क्षय, हस्तक्षेप, पुनः प्राप्ति की विफलता।
- सुधार: mnemonics, chunking, PQRST।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| संवेदी स्मृति | क्षणिक छाप, कुछ ही क्षण |
| अल्पकालिक स्मृति | सीमित क्षमता, लगभग 7 ± 2 इकाइयाँ |
| दीर्घकालिक स्मृति | लंबा समय, बड़ी क्षमता |
| घोषणात्मक | तथ्य और घटनाएँ |
| प्रक्रियात्मक | कौशल और आदतें |
| एबिंगहॉस | भूलने की वक्र — शुरू में तेज़ |
| बार्टलेट | स्मृति रचनात्मक है |

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): स्मृति का सामान्य चित्रण — मस्तिष्क में संचित जानकारी। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: स्मृति के पड़ाव।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): स्मृति के तीन पड़ाव: संवेदी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति।
Key Terms — मुख्य शब्द
- स्मृति: जानकारी ग्रहण, संचय और पुनः प्राप्ति।
- संवेदी स्मृति: क्षणिक संवेदी छाप।
- अल्पकालिक स्मृति: कुछ मिनट की सीमित स्मृति।
- दीर्घकालिक स्मृति: लंबे समय की स्मृति।
- हस्तक्षेप: पुरानी-नई जानकारी का टकराव।
- कूटसंकेतन: जानकारी को स्मृति-तंत्र के अनुकूल रूप में दर्ज करना।
- भंडारण: जानकारी को समय तक बनाए रखना।
- पुनः प्राप्ति: संचित जानकारी को चेतना में वापस लाना।
- अभ्यास (rehearsal): जानकारी को बनाए रखने के लिए दोहराना — रखरखाव अभ्यास बनाम विस्तृत अभ्यास।
- चंकिंग: छोटी इकाइयों को अर्थपूर्ण बड़े समूहों में बाँधना।
- स्कीमा: किसी विषय के बारे में संगठित ज्ञान-ढाँचा।
- हस्तक्षेप: पुरानी/नई जानकारी का एक-दूसरे के धारण में बाधा डालना।
- स्मृति-सहायक (mnemonic): स्मृति सुधारने की रणनीति, जैसे कीवर्ड विधि।
अर्थ समझकर याद करना रटने से बेहतर है — क्योंकि अर्थगत प्रसंस्करण सबसे गहरा स्तर है।
सावधानी: अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति की क्षमता/अवधि उलट देना आम गलती है।
परीक्षा की तैयारी में PQRST अपनाएँ: पहले सरसरी नज़र, फिर प्रश्न, फिर पढ़ना, फिर खुद दोहराना, अंत में जाँच।
Remember — याद रखें
- तीनों पड़ावों का क्रम और अवधि लिखें।
- भूलने के कारणों के नाम लिखें।
- स्मृति सुधार के उपाय लिखें।
- एन्कोडिंग-स्टोरेज-रिट्रीवल तीनों शब्द लिखें।
- तीनों पड़ावों का क्रम और अवधि लिखें — संवेदी (क्षण), अल्पकालिक (सीमित), दीर्घकालिक (लंबा)।
- घोषणात्मक बनाम प्रक्रियात्मक का फर्क उदाहरण सहित लिखें।
- एबिंगहॉस (भूलने की वक्र) और बार्टलेट (रचनात्मक स्मृति) — दोनों के नाम और योगदान अलग लिखें।
- PQRST के पाँचों चरणों के नाम क्रम से लिखें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति की अवधि उलट देना। उत्तर में सेकंड-मिनट-लंबा समय क्रम लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- स्मृति किसे कहते हैं?
संकेत: ग्रहण, संचय, पुनः प्राप्ति के बारे में सोचें। - स्मृति के तीन पड़ाव कौन से हैं?
संकेत: संवेदी, अल्पकालिक, दीर्घकालिक के बारे में सोचें। - अल्पकालिक स्मृति की क्षमता कैसी है?
संकेत: सीमित होने के बारे में सोचें। - भूलने के कारण क्या हैं?
संकेत: हस्तक्षेप के बारे में सोचें। - स्मृति कैसे सुधारें?
संकेत: अभ्यास के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- स्मृति क्या है?
जानकारी को ग्रहण करने, संचित करने और ज़रूरत पड़ने पर पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया। - स्मृति के तीन पड़ाव कौन से हैं?
संवेदी (कुछ सेकंड), अल्पकालिक (कुछ मिनट, सीमित क्षमता) और दीर्घकालिक (लंबे समय, बड़ी क्षमता)। - भूलना क्यों होता है?
समय बीतने, पुरानी-नई जानकारी के हस्तक्षेप और पुनः प्राप्ति की विफलता से। - स्मृति कैसे सुधारें?
अर्थपूर्ण ढंग से सीखकर, अभ्यास को बाँटकर, जानकारी को समूहों में संगठित करके और पुनः स्मरण का अभ्यास करके। - उदाहरण दीजिए।
फ़ोन नंबर को समूहों में बाँटकर याद करना अल्पकालिक स्मृति की सीमा से निपटने का उपाय है।
बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न
नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- स्मृति के तीन चरण लिखिए और कूटसंकेतन का अर्थ बताइए।
कूटसंकेतन, भंडारण, पुनः प्राप्ति। कूटसंकेतन जानकारी को स्मृति-तंत्र के अनुकूल रूप में दर्ज करना है। - चरण मॉडल के तीन पड़ाव कौन-से हैं?
संवेदी स्मृति, अल्पकालिक (कार्यकारी) स्मृति और दीर्घकालिक स्मृति। - घोषणात्मक और प्रक्रियात्मक स्मृति का एक-एक उदाहरण दीजिए।
घोषणात्मक: अपने जन्मदिन की तारीख याद होना। प्रक्रियात्मक: साइकिल चलाना आना। - अग्रोन्मुख और पश्चोन्मुख हस्तक्षेप में अंतर बताइए।
अग्रोन्मुख: पुरानी जानकारी नई के धारण में बाधा डाले। पश्चोन्मुख: नई जानकारी पुरानी के धारण में बाधा डाले। - चंकिंग से स्मृति कैसे सुधरती है?
छोटी इकाइयों को अर्थपूर्ण समूहों में बाँधने से अल्पकालिक स्मृति की सीमित क्षमता में ज़्यादा जानकारी समा जाती है।
पुस्तक की प्रश्नावली से — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के Review Questions पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के अपने शब्दों में हिंदी में लिखा गया है (किताब का शब्दशः पाठ नहीं) और उत्तर अध्याय की विषय-वस्तु से दिए गए हैं।
- 'कूटसंकेतन', 'भंडारण' और 'पुनः प्राप्ति' शब्दों का अर्थ बताइए।
कूटसंकेतन: जानकारी को स्मृति-तंत्र के अनुकूल रूप में दर्ज करना। भंडारण: जानकारी को समय तक बनाए रखना। पुनः प्राप्ति: ज़रूरत पड़ने पर संचित जानकारी को चेतना में वापस लाना। ये तीनों परस्पर जुड़े चरण हैं। - संवेदी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति तंत्रों से जानकारी कैसे संसाधित होती है?
जानकारी पहले संवेदी स्मृति में क्षणिक छाप के रूप में आती है। ध्यान देने पर वह अल्पकालिक स्मृति में जाती है, जहाँ सीमित मात्रा में कुछ समय तक रहती है। अभ्यास (rehearsal) और गहरे प्रसंस्करण से वह दीर्घकालिक स्मृति में जाती है, जहाँ लंबे समय तक बड़ी मात्रा में रहती है और पुनः प्राप्ति से वापस लाई जा सकती है। - रखरखाव अभ्यास और विस्तृत अभ्यास में क्या अंतर है?
रखरखाव अभ्यास (maintenance rehearsal) जानकारी को बिना अर्थ जोड़े बार-बार दोहराना है — यह अल्पकालिक धारण में मदद करता है। विस्तृत अभ्यास (elaborative rehearsal) जानकारी को अर्थ, उदाहरण और पुराने ज्ञान से जोड़कर संसाधित करता है — यह दीर्घकालिक धारण को मज़बूत करता है। - घोषणात्मक और प्रक्रियात्मक स्मृतियों में अंतर कीजिए।
घोषणात्मक स्मृति तथ्यों और घटनाओं की स्मृति है — इसे शब्दों में बताया जा सकता है (जैसे किसी घटना की याद)। प्रक्रियात्मक स्मृति कौशलों और आदतों की स्मृति है — इसे करना आता है, बताना मुश्किल होता है (जैसे साइकिल चलाना)। - दीर्घकालिक स्मृति में पदानुक्रमित संगठन का वर्णन कीजिए।
दीर्घकालिक स्मृति की सामग्री संप्रत्ययों, श्रेणियों और प्रतिमाओं के रूप में पदानुक्रम में संगठित होती है — सामान्य श्रेणी ऊपर, विशिष्ट उदाहरण नीचे। जैसे 'जीव' के नीचे 'जानवर', उसके नीचे 'कुत्ता'। सामान्य गुण ऊँचे स्तर पर ही दर्ज होते हैं (संज्ञानात्मक मितव्ययिता), इसलिए एक गुण हर उदाहरण के साथ दोहराया नहीं जाता। - भूलना क्यों होता है?
भूलना तीन कारणों से होता है: (1) चिह्न-क्षय — समय बीतने से स्मृति-चिह्न कमज़ोर हो जाता है; (2) हस्तक्षेप — पुरानी या नई जानकारी एक-दूसरे के धारण में बाधा डालती है; (3) पुनः प्राप्ति की विफलता — सही संकेत न मिलने पर जानकारी होते हुए भी याद नहीं आती। एबिंगहॉस के अनुसार भूलना शुरू में तेज़, फिर धीमा होता है। - पुनः प्राप्ति से जुड़ा भूलना हस्तक्षेप से होने वाले भूलने से कैसे अलग है?
पुनः प्राप्ति से जुड़े भूलने में जानकारी संचित तो होती है, पर सही संकेत (cue) न मिलने से वह चेतना में नहीं आती — संकेत मिलते ही याद आ सकती है। हस्तक्षेप वाले भूलने में दूसरी जानकारी (पुरानी या नई) पहली जानकारी के धारण को ही कमज़ोर कर देती है। - 'स्मृति एक रचनात्मक प्रक्रिया है' — इसके पक्ष में क्या प्रमाण हैं?
बार्टलेट के प्रयोगों में कहानियाँ हर बार सुनाने पर बदलती गईं — लोग अपनी स्कीमा के अनुसार कहानी को संशोधित करते थे। क्रमिक पुनरुत्पादन में मूल कहानी के कई संस्करण बन गए, जिनमें विवरण छूटे, जुड़े और बदले। इससे सिद्ध होता है कि स्मृति सिर्फ दर्ज जानकारी की नकल नहीं, उसका पुनर्निर्माण है। - स्मृति-सहायक (mnemonics) की परिभाषा दीजिए। अपनी स्मृति सुधारने की एक योजना सुझाइए।
Mnemonics स्मृति सुधारने की रणनीतियाँ हैं — कुछ प्रतिमाओं का उपयोग करती हैं (जैसे कीवर्ड विधि: नए शब्द को किसी परिचित शब्द की प्रतिमा से जोड़ना), कुछ संगठन का (जैसे chunking)। अपनी योजना: (1) अर्थ समझकर पढ़ें, (2) जानकारी को समूहों (chunks) में बाँधें, (3) PQRST अपनाएँ — सरसरी नज़र, प्रश्न, पढ़ना, खुद दोहराना, जाँच, (4) पुनः प्राप्ति-संकेत बनाएँ, (5) बँटे हुए अभ्यास से दोहराएँ।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
विस्तार — ‘मानव स्मृति’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘मानव स्मृति’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘स्मृति’ और ‘संवेदी स्मृति’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- स्मृति — ‘स्मृति’ का अर्थ है — जानकारी ग्रहण, संचय और पुनः प्राप्ति।। ‘मानव स्मृति’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- संवेदी स्मृति — ‘संवेदी स्मृति’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — क्षणिक संवेदी छाप। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘मानव स्मृति’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- अल्पकालिक स्मृति — ‘अल्पकालिक स्मृति’ — कुछ मिनट की सीमित स्मृति।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘मानव स्मृति’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- दीर्घकालिक स्मृति — ‘दीर्घकालिक स्मृति’ का सामान्य अर्थ है — लंबे समय की स्मृति।। परंतु ‘मानव स्मृति’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- हस्तक्षेप — ‘हस्तक्षेप’ का अर्थ है — पुरानी-नई जानकारी का टकराव।। ‘मानव स्मृति’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- कूटसंकेतन — ‘कूटसंकेतन’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — जानकारी को स्मृति-तंत्र के अनुकूल रूप में दर्ज करना। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘मानव स्मृति’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- चरण: कूटसंकेतन → भंडारण → पुनः प्राप्ति।
- पड़ाव: संवेदी → अल्पकालिक (7 ± 2) → दीर्घकालिक।
- गहरा प्रसंस्करण (अर्थगत) = सबसे अच्छा धारण।
- दीर्घकालिक: घोषणात्मक (प्रासंगिक + अर्थगत) और प्रक्रियात्मक।
- स्मृति रचनात्मक है — बार्टलेट; भूलने की वक्र — एबिंगहॉस।
- भूलना: क्षय, हस्तक्षेप, संकेत की कमी; सुधार: mnemonics, chunking, PQRST।

