Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Class 11 • Psychology • Manovigyan

Chapter 4: संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ

संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण — आँख-कान की कार्यप्रणाली, गेस्टाल्ट नियम, गहराई के संकेत और भ्रम।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Psychology • Book: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  अध्याय 4  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

स्रोत-नोट: यह अध्याय BSTBPC की Class 11 Psychology सूची के अध्याय 5 (Sensory, Attentional and Perceptual Processes) से मेल खाता है — साइट की सूची में अध्याय 4 है। विषय-वस्तु EG के अपने हिंदी शब्दों में है; यहाँ कोई आधिकारिक PDF नहीं दिया जाता है।

अध्याय का सार

दुनिया को जानना और उद्दीपकों की प्रकृति — दुनिया का ज्ञान ज्ञानेन्द्रियों से शुरू होता है। पाँच बाहरी इंद्रियाँ हैं — दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद, स्पर्श — और दो आंतरिक इंद्रियाँ हैं जो शरीर की भीतरी स्थिति (जैसे मांसपेशियों का खिंचाव, संतुलन) बताती हैं। उद्दीपक वह ऊर्जा है जो ज्ञानेन्द्रिय को सक्रिय करती है — प्रकाश, ध्वनि, गंध, रासायनिक पदार्थ, दबाव। हर इंद्रिय की एक सीमा होती है: वह सिर्फ एक निश्चित परास की ऊर्जा पर ही प्रतिक्रिया देती है — इसी को ज्ञानेन्द्रियों की कार्यात्मक सीमा कहते हैं।

आँख और कान की कार्यप्रणाली — दृष्टि में प्रकाश कॉर्निया और लेंस से होकर रेटिना पर पड़ता है। रेटिना में दो तरह के ग्राही हैं: शलाकाएँ (rods — कम रोशनी में काम करती हैं, रंग नहीं बतातीं) और शंकु (cones — तेज़ रोशनी में काम करते हैं, रंग बताते हैं)। प्रकाश और अंधकार अनुकूलन (adaptation) इसी तंत्र की देन है — तेज़ रोशनी से अंधेरे में जाने पर आँख को समय लगता है। रंग के तीन आयाम हैं: वर्ण (hue — लाल, हरा जैसा रंग), संतृप्ति (saturation — रंग की गहराई) और चमक (brightness)। श्रवण में ध्वनि कान के पर्दे और तीन छोटी हड्डियों से होकर कॉक्लिया तक पहुँचती है, जहाँ बेसिलर झिल्ली पर स्थित कॉर्टी का अंग (organ of Corti) ध्वनि को तंत्रिका आवेग में बदलता है। ध्वनि के गुण हैं: प्रबलता (loudness), तारत्व (pitch) और टिम्बर (स्वर की गुणवत्ता)।

अवधान: परिभाषा, गुण और प्रकार — अवधान वह प्रक्रिया है जिसमें हम कई जानकारियों में से कुछ को चुनकर उन पर ध्यान देते हैं और बाकी को छाँट देते हैं। इसके गुण हैं: सक्रियता (alertness — तैयार रहना), एकाग्रता (concentration — एक बिंदु पर टिकना) और खोज (search — ज़रूरी जानकारी ढूँढ़ना)। अवधान के प्रकार हैं: चयनात्मक अवधान (कई में से एक को चुनना), सतत अवधान (लंबे समय तक टिकना) और विभाजित अवधान (दो काम एक साथ — यह तभी संभव है जब एक काम अत्यधिक अभ्यस्त हो)। अवधान का विस्तार (span) लगभग सात जमा-घटा दो (7 ± 2) इकाइयाँ माना जाता है। चयनात्मक अवधान को बाहरी कारक (तीव्रता, नवीनता, गति) और भीतरी कारक (रुचि, आवश्यकता, मनोदशा) प्रभावित करते हैं। फ़िल्टर सिद्धांत कहता है कि अवधान एक छन्नी की तरह काम करता है; फ़िल्टर-क्षीणन सिद्धांत कहता है कि छाँटी गई जानकारी पूरी तरह रुकती नहीं, कमज़ोर होकर आगे बढ़ती है।

प्रत्यक्षण और गेस्टाल्ट नियम — प्रत्यक्षण संवेदी जानकारी की व्याख्या और अर्थपूर्ण रचना है। गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों का मुख्य प्रस्ताव है कि हम दृश्य क्षेत्र को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, संगठित समग्र के रूप में देखते हैं। संगठन के नियम हैं: निकटता (पास की चीज़ें एक समूह), समानता (एक जैसी चीज़ें एक समूह), समापन/पूर्ति (अधूरी आकृति को पूरा देखना), निरंतरता (एक दिशा में चलती रेखा को एक मानना) और आकृति-भूमि पृथक्करण (मुख्य आकृति को पृष्ठभूमि से अलग देखना)। प्रत्यक्षण पर हमारी प्रेरणा, अपेक्षा, संज्ञानात्मक शैली और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी असर पड़ता है — इसलिए एक ही चित्र दो लोगों को अलग दिख सकता है।

स्थान, गहराई और दूरी का प्रत्यक्षण; प्रत्यक्षण-स्थिरता — रेटिना पर बनने वाली छवि द्वि-आयामी होती है, पर हम दुनिया त्रि-आयामी देखते हैं — यह गहराई के संकेतों से संभव होता है। एकनेत्री (monocular) संकेत: सापेक्ष आकार, आच्छादन (एक वस्तु का दूसरी को ढकना), रैखिक परिप्रेक्ष्य, वायवीय परिप्रेक्ष्य (दूर की चीज़ धुंधली), बनावट-प्रवणता और गति-लंबन (motion parallax)। द्विनेत्री (binocular) संकेत: रेटिनल विषमता (दोनों आँखों की छवि में अंतर) और अभिसरण (पास की वस्तु पर दोनों आँखों का भीतर की ओर मुड़ना)। प्रत्यक्षण-स्थिरता का अर्थ है कि दूरी या रोशनी बदलने पर भी वस्तु का आकार, आकृति और चमक हमें लगभग एक जैसी लगती है — आकार-स्थिरता, आकृति-स्थिरता और चमक-स्थिरता।

भ्रम और प्रत्यक्षण पर सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव — भ्रम (illusion) गलत प्रत्यक्षण है — संवेदी जानकारी की गलत व्याख्या। मूलर-लायर भ्रम में तीर-युक्त रेखाएँ बराबर होकर भी छोटी-बड़ी लगती हैं। कुछ भ्रम सार्वभौमिक हैं, कुछ व्यक्तिगत और संस्कृति-विशिष्ट। संस्कृति प्रत्यक्षण को गहराई से प्रभावित करती है: हडसन के अफ़्रीका-अध्ययन में चित्रों से अपरिचित लोगों को चित्रों में गहराई समझने में कठिनाई हुई; सिन्हा और मिश्रा के अध्ययनों में शिकारी-संग्रहकर्ता, किसान और शहरी लोगों के चित्र-प्रत्यक्षण में सांस्कृतिक अनुभव का अंतर दिखा। 'बढ़ईगीरी वाली दुनिया' (carpentered world) की परिकल्पना कहती है कि समकोणीय वातावरण में रहने वाले लोग घेराव वाली रेखाओं की लंबाई को कम आँकने के आदी हो जाते हैं — इसलिए भ्रम भी सीखा हुआ हो सकता है।

मुख्य बिंदु

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य बात
संवेदनाज्ञानेन्द्रियों से जानकारी लेना
अवधानकई जानकारियों में से कुछ को चुनना
प्रत्यक्षणचुनी जानकारी को अर्थ देना
शलाकाएँकम रोशनी, रंग नहीं
शंकुतेज़ रोशनी, रंग बताते हैं
भ्रमगलत प्रत्यक्षण, जैसे मूलर-लायर
आकृति-भूमिमुख्य आकृति को पृष्ठभूमि से अलग देखना

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): ज्ञानेन्द्रियों का सामान्य चित्रण — आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा। यह किताब का चित्र नहीं है।

जानकारी का सफर

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: संवेदना से प्रत्यक्षण तक।

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): संवेदना से प्रत्यक्षण तक की कड़ी: जानकारी लेना, चुनना, अर्थ देना।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • संवेदना: ज्ञानेन्द्रियों से जानकारी प्राप्त करना।
  • अवधान: जानकारी में से कुछ चुनना।
  • प्रत्यक्षण: चुनी जानकारी को अर्थ देना।
  • भ्रम: गलत प्रत्यक्षण।
  • ज्ञानेन्द्रियाँ: आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा।
  • उद्दीपक: वह ऊर्जा जो ज्ञानेन्द्रिय को सक्रिय करती है — प्रकाश, ध्वनि आदि।
  • अनुकूलन: रोशनी के स्तर के अनुसार आँख की संवेदनशीलता का बदलना — प्रकाश और अंधकार अनुकूलन।
  • कॉर्टी का अंग: कॉक्लिया की बेसिलर झिल्ली पर स्थित श्रवण का मुख्य अंग।
  • चयनात्मक अवधान: कई उद्दीपकों में से एक पर ध्यान देना।
  • सतत अवधान: लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान टिकाए रखना।
  • विभाजित अवधान: दो काम एक साथ करना — अभ्यस्त काम के साथ ही संभव।
  • प्रत्यक्षण-स्थिरता: दूरी/रोशनी बदलने पर भी वस्तु का आकार, आकृति, चमक एक जैसा लगना।
  • गेस्टाल्ट: समग्र रूप में प्रत्यक्षण का दृष्टिकोण — पूरा, भागों के जोड़ से बड़ा।
जानकारी

संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण अत्यधिक अंतर्संबंधित हैं — किताब इन्हें एक ही संज्ञानात्मक प्रक्रिया के तीन पहलू मानती है।

सावधानी

सावधानी: संवेदना (जानकारी लेना) और प्रत्यक्षण (अर्थ देना) को एक मानना सबसे आम गलती है।

टिप

अवधान का विस्तार 7 ± 2 — यह संख्या परीक्षा में सीधे पूछी जाती है, इसे रट लें।

Remember — याद रखें

  • तीनों का क्रम लिखें — संवेदना → अवधान → प्रत्यक्षण।
  • भ्रम का उदाहरण दें।
  • प्रत्यक्षण पर अनुभव का असर लिखें।
  • अवधान चयनात्मक है — यह बात लिखें।
  • तीनों का क्रम लिखें: संवेदना → अवधान → प्रत्यक्षण।
  • शलाकाएँ बनाम शंकु का फर्क (रोशनी और रंग) उलटाएँ नहीं।
  • गहराई के संकेतों को एकनेत्री और द्विनेत्री में बाँटकर लिखें।
  • भ्रम का उदाहरण (मूलर-लायर) और संस्कृति का प्रभाव — दोनों लिखें।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: संवेदना और प्रत्यक्षण को एक मान लेना। उत्तर में लेना बनाम अर्थ देना का फर्क लिखें।

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. संवेदना क्या है?
    संकेत: जानकारी लेने के बारे में सोचें।
  2. अवधान क्या है?
    संकेत: चुनने के बारे में सोचें।
  3. प्रत्यक्षण क्या है?
    संकेत: अर्थ देने के बारे में सोचें।
  4. भ्रम किसे कहते हैं?
    संकेत: गलत प्रत्यक्षण के बारे में सोचें।
  5. प्रत्यक्षण पर क्या असर डालता है?
    संकेत: अनुभव के बारे में सोचें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण क्या हैं?
    संवेदना ज्ञानेन्द्रियों से जानकारी लेना है; अवधान उसमें से कुछ चुनना है; प्रत्यक्षण चुनी जानकारी को अर्थ देकर पहचानना है।
  2. अवधान चयनात्मक क्यों है?
    क्योंकि हम एक समय में सब कुछ नहीं देख-सुन सकते, इसलिए ध्यान कुछ पर टिकता है।
  3. प्रत्यक्षण पर अनुभव का क्या असर है?
    अतीत का अनुभव, अपेक्षा और संस्कृति यह तय करते हैं कि हम किसी आकृति या ध्वनि का क्या अर्थ निकालते हैं।
  4. भ्रम क्या है?
    गलत प्रत्यक्षण — जैसे अंधेरे में रस्सी को साँप समझना।
  5. ज्ञानेन्द्रियाँ कौन सी हैं?
    आँख (दृष्टि), कान (श्रवण), नाक (गंध), जीभ (स्वाद) और त्वचा (स्पर्श)।

बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न

नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण में अंतर एक-एक उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
    संवेदना: आँख पर प्रकाश पड़ना। अवधान: शोर भरी कक्षा में शिक्षक की आवाज़ चुनना। प्रत्यक्षण: उस आवाज़ को शब्दों और अर्थ के रूप में समझना।
  2. शलाकाओं और शंकुओं में दो अंतर बताइए।
    शलाकाएँ कम रोशनी में काम करती हैं और रंग नहीं बतातीं; शंकु तेज़ रोशनी में काम करते हैं और रंग बताते हैं।
  3. चयनात्मक और सतत अवधान में अंतर बताइए।
    चयनात्मक अवधान कई उद्दीपकों में से एक को चुनता है; सतत अवधान लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान टिकाए रखता है।
  4. रेटिनल विषमता क्या है?
    दोनों आँखें वस्तु को थोड़े अलग कोण से देखती हैं, इसलिए दोनों रेटिना की छवियों में अंतर होता है — मस्तिष्क इसी अंतर से गहराई का अनुमान लगाता है।
  5. मूलर-लायर भ्रम क्या है?
    दो बराबर लंबाई की रेखाएँ, जिनके सिरों पर तीर विपरीत दिशा में बने हों, बराबर होकर भी छोटी-बड़ी लगती हैं — यह गलत प्रत्यक्षण (भ्रम) का उदाहरण है।

पुस्तक की प्रश्नावली से — Extension Q&A

नीचे के प्रश्न पुस्तक के Review Questions पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के अपने शब्दों में हिंदी में लिखा गया है (किताब का शब्दशः पाठ नहीं) और उत्तर अध्याय की विषय-वस्तु से दिए गए हैं।

  1. ज्ञानेन्द्रियों की कार्यात्मक सीमाएँ समझाइए।
    हर ज्ञानेन्द्रिय सिर्फ एक सीमित परास की ऊर्जा पर प्रतिक्रिया देती है — आँख सिर्फ दृश्य प्रकाश की तरंगों पर, कान सिर्फ एक सीमित आवृत्ति-परास की ध्वनि पर। इस परास के बाहर की ऊर्जा (जैसे पराबैंगनी प्रकाश या बहुत ऊँची आवृत्ति की ध्वनि) हमें महसूस नहीं होती — यही कार्यात्मक सीमा है।
  2. प्रकाश और अंधकार अनुकूलन से क्या तात्पर्य है? ये कैसे होते हैं?
    तेज़ रोशनी से अंधेरे में (या उल्टा) जाने पर आँख की संवेदनशीलता धीरे-धीरे बदलती है — इसे अनुकूलन कहते हैं। अंधकार अनुकूलन में शलाकाओं की संवेदनशीलता बढ़ती है (रोडोप्सिन का पुनर्निर्माण होता है), इसलिए कुछ देर बाद अंधेरे में भी दिखने लगता है; प्रकाश अनुकूलन में शंकु तेज़ी से काम संभालते हैं।
  3. रंग-दृष्टि क्या है और रंग के आयाम कौन-से हैं?
    रंग-दृष्टि शंकुओं से होती है जो अलग-अलग तरंगदैर्घ्य पर प्रतिक्रिया देते हैं। रंग के तीन आयाम हैं: वर्ण (कौन-सा रंग — लाल, हरा, नीला), संतृप्ति (रंग कितना गहरा/शुद्ध है) और चमक (रंग कितना हल्का या गहरा लगता है)।
  4. श्रवण-संवेदना कैसे होती है?
    ध्वनि तरंगें कान के पर्दे को हिलाती हैं, तीन छोटी हड्डियाँ इस कंपन को बढ़ाकर कॉक्लिया तक पहुँचाती हैं। कॉक्लिया की बेसिलर झिल्ली पर स्थित कॉर्टी का अंग कंपन को तंत्रिका आवेग में बदलता है, जो श्रवण तंत्रिका से मस्तिष्क तक जाता है — वहीं ध्वनि की प्रबलता, तारत्व और टिम्बर का अनुभव बनता है।
  5. अवधान की परिभाषा दीजिए और उसके गुण समझाइए।
    अवधान वह प्रक्रिया है जिसमें हम कई जानकारियों में से कुछ को चुनकर उन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसके गुण हैं: सक्रियता (ध्यान के लिए तैयार रहना), एकाग्रता (एक बिंदु पर ध्यान टिकाना) और खोज (ज़रूरी जानकारी को ढूँढ़ना)।
  6. चयनात्मक अवधान के निर्धारक बताइए। चयनात्मक अवधान सतत अवधान से कैसे अलग है?
    चयनात्मक अवधान को बाहरी कारक (तीव्रता, नवीनता, गति, आकार) और भीतरी कारक (रुचि, आवश्यकता, मनोदशा) प्रभावित करते हैं। चयनात्मक अवधान कई में से एक को चुनता है; सतत अवधान लंबे समय तक एक ही उद्दीपक या काम पर ध्यान बनाए रखता है।
  7. दृश्य क्षेत्र के प्रत्यक्षण के संबंध में गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों का मुख्य प्रस्ताव क्या है?
    गेस्टाल्ट प्रस्ताव है कि हम दृश्य क्षेत्र को अलग-अलग टुकड़ों के जोड़ के रूप में नहीं, संगठित समग्र के रूप में देखते हैं — संगठन निकटता, समानता, समापन, निरंतरता और आकृति-भूमि जैसे नियमों से होता है।
  8. स्थान का प्रत्यक्षण कैसे होता है?
    स्थान का प्रत्यक्षण गहराई और दूरी के संकेतों से होता है — एकनेत्री संकेत (सापेक्ष आकार, आच्छादन, रैखिक और वायवीय परिप्रेक्ष्य, बनावट-प्रवणता, गति-लंबन) और द्विनेत्री संकेत (रेटिनल विषमता, अभिसरण) मिलकर मस्तिष्क को बताते हैं कि कौन-सी वस्तु कितनी दूर है।
  9. गहराई के प्रत्यक्षण के एकनेत्री संकेत कौन-से हैं? गहराई के प्रत्यक्षण में द्विनेत्री संकेतों की भूमिका समझाइए।
    एकनेत्री संकेत: सापेक्ष आकार, आच्छादन, रैखिक परिप्रेक्ष्य, वायवीय परिप्रेक्ष्य, बनावट-प्रवणता, गति-लंबन। द्विनेत्री संकेत गहराई की सटीक जानकारी देते हैं — दोनों आँखों की छवियों का अंतर (रेटिनल विषमता) और पास की वस्तु पर आँखों का भीतर मुड़ना (अभिसरण) मस्तिष्क को दूरी का अनुमान लगाने में मदद करते हैं।
  10. भ्रम क्यों होते हैं?
    भ्रम तब होते हैं जब संवेदी जानकारी की व्याख्या गलत हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रत्यक्षण सिर्फ जानकारी लेना नहीं, उसकी रचना भी है — हमारी आदतें, अपेक्षाएँ और सांस्कृतिक अनुभव व्याख्या को बदल देते हैं, जैसे मूलर-लायर चित्र में तीरों की दिशा लंबाई के अनुमान को बदल देती है।
  11. सामाजिक-सांस्कृतिक कारक हमारे प्रत्यक्षण को कैसे प्रभावित करते हैं?
    संस्कृति यह तय करती है कि हम किन उद्दीपकों से परिचित हैं और उनकी व्याख्या की हमारी आदत क्या है। हडसन के अध्ययन में चित्रों से अपरिचित लोगों को चित्रों में गहराई समझने में कठिनाई हुई; सिन्हा और मिश्रा के अध्ययनों में शिकारी-संग्रहकर्ता, किसान और शहरी लोगों के चित्र-प्रत्यक्षण में अंतर दिखा — अर्थात् प्रत्यक्षण सांस्कृतिक अनुभव से सीखा जाता है।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

Recap — याद रखने वाली बातें
← Chapter 3: मानव विकासChapter 5: अधिगम →