Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Class 11 • Psychology • Manovigyan

Chapter 3: मानव विकास

जीवन भर का विकास — प्रक्रियाएँ, संदर्भ, अवस्थाएँ, पियाजे, कोहलबर्ग और किशोरावस्था की चुनौतियाँ।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Psychology • Book: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

मानव विकास — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  अध्याय 3  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

स्रोत-नोट: यह अध्याय BSTBPC की Class 11 Psychology सूची के अध्याय 4 (Human Development) से मेल खाता है — साइट की सूची में अध्याय 3 है। BSTBPC सूची का अध्याय 3 (The Bases of Human Behaviour — मानव व्यवहार के आधार) वर्तमान साइट-सूची में अलग अध्याय के रूप में नहीं है, इसलिए यहाँ उसका पृष्ठ नहीं है। विषय-वस्तु EG के अपने हिंदी शब्दों में है; यहाँ कोई आधिकारिक PDF नहीं दिया जाता है।

अध्याय का सार

विकास का अर्थ — विकास गर्भाधान से मृत्यु तक चलने वाले क्रमबद्ध, प्रगतिशील और पूर्वानुमेय बदलावों का प्रतिरूप है। वृद्धि (growth) सिर्फ आकार बढ़ना है, परिपक्वता (maturation) जैविक परिपक्वता से आने वाला बदलाव है, और विकास इन दोनों से बड़ा है — उसमें वृद्धि और ह्रास (जैसे वृद्धावस्था में गिरावट) दोनों आते हैं। विकास में तीन प्रक्रियाएँ एक साथ गुँथी होती हैं: जैविक (जीन, मस्तिष्क, शरीर), संज्ञानात्मक (सोचना, प्रत्यक्षण, समस्या समाधान) और सामाजिक-भावनात्मक (दूसरों से संबंध, भावनाएँ, व्यक्तित्व)।

विकास को प्रभावित करने वाले कारक और संदर्भ — विकास पर आनुवंशिकता (जीन से मिलने वाले गुण) और वातावरण (परिवार, स्कूल, समाज) दोनों का असर पड़ता है — यह 'प्रकृति बनाम पालन' की बहस नहीं, दोनों के मेल की बात है। ब्रॉन्फेनब्रेनर के संदर्भ-दृष्टिकोण में पाँच स्तर हैं: सूक्ष्म तंत्र (microsystem — परिवार, स्कूल जैसा तत्काल परिवेश), मध्य तंत्र (mesosystem — परिवार और स्कूल जैसे तंत्रों के बीच संबंध), बाह्य तंत्र (exosystem — माता-पिता का कार्यस्थल जैसा अप्रत्यक्ष परिवेश), वृहद् तंत्र (macrosystem — संस्कृति, मूल्य, कानून) और काल तंत्र (chronosystem — समय के साथ बदलाव)।

विकास की अवस्थाओं का विहंगावलोकन — जीवन-अवधि की अवस्थाएँ हैं: गर्भावस्था (prenatal — गर्भ में विकास; माँ का कुपोषण, दवाएँ और बीमारियाँ इस पर असर डाल सकती हैं), शैशव (जन्म से लगभग 2 वर्ष), बाल्यावस्था (2 से लगभग 12 वर्ष), किशोरावस्था (लगभग 12 से 19 वर्ष), वयस्कता और वृद्धावस्था। जीवन-अवधि दृष्टिकोण कहता है कि विकास किसी एक उम्र में रुकता नहीं, बहु-दिशात्मक होता है (कुछ क्षमताएँ बढ़ती हैं, कुछ घटती हैं) और इतिहास व संदर्भ से जुड़ा होता है।

शैशव और बाल्यावस्था — शैशव में गत्यात्मक विकास दो रुझानों से चलता है: शिरोपुच्छीय (cephalocaudal — सिर से पैर की ओर नियंत्रण, पहले सिर फिर धड़ फिर पैर) और समीपोदूरस्थ (proximodistal — शरीर के केंद्र से बाहर की ओर, पहले धड़ फिर हाथ-पैर की उँगलियाँ)। लगाव (attachment) भी शैशव की बड़ी उपलब्धि है — हार्लो के अध्ययन ने दिखाया कि बच्चे को सिर्फ भोजन नहीं, संपर्क-सुख (contact comfort) भी चाहिए; सुरक्षित लगाव वाले बच्चे बाद में आत्मविश्वासी होते हैं। बाल्यावस्था में पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरण दिखते हैं: संवेदी-गामक (0–2 वर्ष, वस्तु-स्थायित्व की समझ), पूर्व-संक्रियात्मक (2–7 वर्ष, केंद्रीकरण, अहं-केंद्रितता, जीववाद), मूर्त-संक्रियात्मक (7–11 वर्ष, संरक्षण की समझ) और औपचारिक-संक्रियात्मक (11 वर्ष से, अमूर्त और तार्किक सोच)। कोहलबर्ग के नैतिक तर्क के तीन स्तर हैं: पूर्व-परंपरागत (दंड और पुरस्कार), परंपरागत (नियम और सामाजिक स्वीकृति) और उत्तर-परंपरागत (सिद्धांत और न्याय)।

किशोरावस्था की चुनौतियाँ — किशोरावस्था में यौवनारंभ (puberty) के साथ वृद्धि-स्फुरण (growth spurt), प्रजनन परिपक्वता और द्वितीयक लैंगिक लक्षण आते हैं (लड़कियों में रजोदर्शन/menarche)। एरिक्सन के अनुसार इस अवस्था की बड़ी चुनौती पहचान (identity) बनाना है — 'मैं कौन हूँ?' का उत्तर खोजना। किशोरों में अहं-केंद्रितता भी दिखती है — वे मानते हैं कि सब उन्हीं को देख रहे हैं। साथियों का दबाव, माता-पिता से टकराव, करियर का चुनाव और नशीली दवाओं का जोखिम इस अवस्था की वास्तविक चुनौतियाँ हैं; माता-पिता, साथियों और वयस्कों से सकारात्मक संबंध इनसे बचाव करते हैं।

वयस्कता और वृद्धावस्था — वयस्कता में व्यक्तित्व में स्थिरता और बदलाव दोनों दिखते हैं; विवाह, माता-पिता बनना और बच्चों का घर छोड़ना बड़े संक्रमण हैं। वृद्धावस्था में रूप-रंग, याददाश्त और संज्ञान में बदलाव आते हैं; जीवनसाथी की मृत्यु सबसे कठिन हानि मानी जाती है — उसके बाद अकेलापन, अवसाद और आर्थिक कठिनाई आ सकती है, जिसमें बच्चों, पोते-पोतियों और दोस्तों का सहारा मदद करता है। भारतीय संस्कृति में वृद्ध माता-पिता का बच्चों पर निर्भर रहना सामान्य और स्वीकृत है — वृद्धों को सुरक्षा और अपनेपन का एहसास देना ज़रूरी है।

मुख्य बिंदु

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य बात
शैशवजन्म–2 वर्ष, गत्यात्मक विकास, लगाव
बाल्यावस्था2–12 वर्ष, पियाजे के चरण, नैतिक तर्क
किशोरावस्था12–19 वर्ष, यौवनारंभ, पहचान
वयस्कताविवाह, माता-पिता बनना, करियर
वृद्धावस्थास्मृति-संज्ञान में बदलाव, सहारे की ज़रूरत
शिरोपुच्छीयसिर से पैर की ओर नियंत्रण
समीपोदूरस्थकेंद्र से बाहर की ओर नियंत्रण

मानव विकास

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): मानव विकास का सामान्य चित्रण — जीवन की अवस्थाएँ सीढ़ियों पर। यह किताब का चित्र नहीं है।

विकास की अवस्थाएँ

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: विकास की अवस्थाएँ।

मानव विकास

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): जीवन-अवधि की अवस्थाएँ: शैशव, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, वयस्कता, वृद्धावस्था।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • विकास: जीवन भर के क्रमबद्ध बदलाव।
  • संज्ञानात्मक विकास: सोच और समझ का विकास।
  • किशोरावस्था: बाल्यावस्था से वयस्कता का संक्रमण।
  • आनुवंशिकता: माता-पिता से मिलने वाले गुण।
  • वातावरण: परिवार, स्कूल, समाज का प्रभाव।
  • परिपक्वता: जैविक परिपक्वता से आने वाला बदलाव — सीखने से अलग।
  • जीवन-अवधि दृष्टिकोण: विकास जीवन भर चलता है, बहु-दिशात्मक है और संदर्भ से जुड़ा है।
  • विकासात्मक कार्य: किसी अवस्था में सीखे जाने वाले कौशल — जैसे चलना, पढ़ना, पहचान बनाना।
  • लगाव: बच्चे और देखभाल करने वाले के बीच भावनात्मक बंधन।
  • केंद्रीकरण: पूर्व-संक्रियात्मक बच्चे की सीमा — एक समय में किसी वस्तु के एक ही पहलू पर ध्यान।
  • अहं-केंद्रितता: दूसरों के दृष्टिकोण से न देख पाना — बच्चे और किशोर दोनों में अलग रूप में दिखती है।
  • पहचान: एरिक्सन के अनुसार किशोरावस्था की केंद्रीय चुनौती — 'मैं कौन हूँ?'
  • यौवनारंभ: किशोरावस्था में शारीरिक परिपक्वता की प्रक्रिया।
जानकारी

विकास 'जीवन भर' चलता है — उत्तर में सिर्फ बचपन तक सीमित न करें; वृद्धावस्था भी विकास का हिस्सा है।

सावधानी

सावधानी: शिरोपुच्छीय (सिर→पैर) और समीपोदूरस्थ (केंद्र→बाहर) की दिशा उलट देना आम गलती है।

टिप

पियाजे याद करने की तरकीब: संवेदी (महसूस करना) → पूर्व (अभी तर्क अधूरा) → मूर्त (ठोस चीज़ों पर तर्क) → औपचारिक (अमूर्त तर्क)।

Remember — याद रखें

  • विकास के चार आयाम लिखें।
  • किशोरावस्था की विशेषताएँ (पहचान, साथी-दबाव) लिखें।
  • प्रकृति बनाम पालन — दोनों का असर लिखें।
  • विकास और वृद्धि का फर्क (वृद्धि = आकार, विकास = समग्र) लिखें।
  • वृद्धि, परिपक्वता और विकास — तीनों की परिभाषा अलग-अलग लिखें, एक-दूसरे से मिलाएँ नहीं।
  • पियाजे के चरणों के नाम, आयु और एक-एक पहचान साथ लिखें।
  • ब्रॉन्फेनब्रेनर के पाँच स्तरों के नाम हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
  • किशोरावस्था = सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं — पहचान, साथी-दबाव और नैतिक सोच भी लिखें।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: विकास को सिर्फ शारीरिक वृद्धि मान लेना। उत्तर में चारों आयाम लिखें।

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. विकास किसे कहते हैं?
    संकेत: जीवन भर के बदलाव के बारे में सोचें।
  2. विकास के आयाम कौन से हैं?
    संकेत: शारीरिक और संज्ञानात्मक के बारे में सोचें।
  3. किशोरावस्था की विशेषता क्या है?
    संकेत: पहचान के बारे में सोचें।
  4. प्रकृति बनाम पालन क्या है?
    संकेत: आनुवंशिकता और वातावरण के बारे में सोचें।
  5. विकास और वृद्धि में क्या अंतर है?
    संकेत: समग्र बनाम आकार के बारे में सोचें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. विकास क्या है?
    जन्म से मृत्यु तक चलने वाली क्रमबद्ध बदलाव की प्रक्रिया — शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक आयामों में।
  2. विकास और वृद्धि में क्या अंतर है?
    वृद्धि सिर्फ आकार बढ़ना है; विकास समग्र बदलाव है — सोच, संबंध और भावनाओं सहित।
  3. किशोरावस्था की विशेषताएँ क्या हैं?
    पहचान की खोज, स्वतंत्रता की चाह, साथियों का प्रभाव और अमूर्त सोच का विकास।
  4. संज्ञानात्मक विकास क्या है?
    सोच और समझ का विकास — बच्चा धीरे-धीरे ठोस से अमूर्त (जैसे न्याय, भविष्य) सोचने लगता है।
  5. प्रकृति बनाम पालन क्या है?
    विकास पर आनुवंशिकता (प्रकृति) और वातावरण (पालन — परिवार, स्कूल, समाज) दोनों का असर होता है; कोई एक अकेला कारण नहीं है।

बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न

नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. विकास और वृद्धि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
    वृद्धि आकार का बढ़ना है (लंबाई, वज़न)। विकास समग्र, क्रमबद्ध बदलाव है — शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक — जो गर्भाधान से मृत्यु तक चलता है और जिसमें ह्रास भी शामिल है।
  2. ब्रॉन्फेनब्रेनर के सूक्ष्म तंत्र और वृहद् तंत्र का एक-एक उदाहरण दीजिए।
    सूक्ष्म तंत्र: परिवार या स्कूल — बच्चा सीधे इनमें रहता है। वृहद् तंत्र: संस्कृति, मूल्य और कानून — जो पूरे समाज के विकास को आकार देते हैं।
  3. पियाजे के पूर्व-संक्रियात्मक चरण की दो विशेषताएँ लिखिए।
    केंद्रीकरण (एक पहलू पर ही ध्यान) और अहं-केंद्रितता (दूसरे के दृष्टिकोण से न देख पाना)।
  4. किशोरावस्था में पहचान की चुनौती से क्या तात्पर्य है?
    एरिक्सन के अनुसार किशोर को 'मैं कौन हूँ, मेरे मूल्य क्या हैं, मेरा भविष्य क्या है' — इन प्रश्नों का उत्तर खोजकर एक स्थिर पहचान बनानी होती है।
  5. वृद्धावस्था में वृद्धों को किस तरह के सहारे की ज़रूरत होती है?
    सुरक्षा और अपनेपन का एहसास, संकट में देखभाल, अकेलेपन से बचाव के लिए परिवार और दोस्तों का साथ, और आर्थिक व भावनात्मक सहारा।

पुस्तक की प्रश्नावली से — Extension Q&A

नीचे के प्रश्न पुस्तक के Review Questions पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के अपने शब्दों में हिंदी में लिखा गया है (किताब का शब्दशः पाठ नहीं) और उत्तर अध्याय की विषय-वस्तु से दिए गए हैं।

  1. विकास क्या है? यह वृद्धि और परिपक्वता से कैसे अलग है?
    विकास गर्भाधान से मृत्यु तक चलने वाले क्रमबद्ध, प्रगतिशील और पूर्वानुमेय बदलावों का प्रतिरूप है। वृद्धि सिर्फ आकार का बढ़ना है; परिपक्वता जैविक परिपक्वता से आने वाला बदलाव है। विकास इन दोनों से बड़ा है — उसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक बदलाव तथा वृद्धावस्था का ह्रास भी शामिल है।
  2. विकास पर जीवन-अवधि दृष्टिकोण की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
    विकास जीवन भर चलता है, बहु-दिशात्मक होता है (कुछ क्षमताएँ बढ़ती हैं, कुछ घटती हैं), बहु-आयामी होता है (जैविक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक), इतिहास और संदर्भ से जुड़ा होता है, और व्यक्ति की अपनी भूमिका (अपने विकास को आकार देना) भी इसमें होती है।
  3. विकासात्मक कार्य क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
    विकासात्मक कार्य किसी अवस्था में सीखे जाने वाले कौशल और उपलब्धियाँ हैं। उदाहरण: शैशव में चलना, बाल्यावस्था में पढ़ना-लिखना, किशोरावस्था में पहचान बनाना, वयस्कता में करियर और परिवार की ज़िम्मेदारी संभालना।
  4. 'बच्चे के विकास में बच्चे के वातावरण की बड़ी भूमिका है।' उदाहरणों सहित समर्थन कीजिए।
    परिवार का प्यार और भाषा का माहौल बच्चे की भाषा और आत्मविश्वास बनाता है; स्कूल की पढ़ाई संज्ञानात्मक विकास बढ़ाती है; साथियों का समूह सामाजिक कौशल सिखाता है; गरीबी या कुपोषण जैसे वातावरणीय कारक विकास को धीमा कर सकते हैं।
  5. सामाजिक-सांस्कृतिक कारक विकास को कैसे प्रभावित करते हैं?
    संस्कृति बताती है कि बच्चे से क्या अपेक्षा है — कब बोलना, कैसे व्यवहार करना, किस काम को महत्व देना। पालन-पोषण की शैली, स्कूल की व्यवस्था, लैंगिक भूमिकाएँ और सामुदायिक मूल्य बच्चे के सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास को आकार देते हैं।
  6. विकासशील बच्चे में होने वाले संज्ञानात्मक बदलावों की चर्चा कीजिए।
    बच्चा संवेदी-गामक चरण में वस्तु-स्थायित्व सीखता है, पूर्व-संक्रियात्मक चरण में भाषा और कल्पना बढ़ती है पर तर्क अभी सीमित रहता है, मूर्त-संक्रियात्मक चरण में संरक्षण और वर्गीकरण की समझ आती है, और औपचारिक-संक्रियात्मक चरण में अमूर्त, व्यवस्थित और तार्किक सोच विकसित होती है।
  7. बचपन में बने लगाव-बंधनों के दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं। दैनिक जीवन के उदाहरणों से समझाइए।
    सुरक्षित लगाव वाला बच्चा स्कूल में आत्मविश्वास से दोस्त बनाता है और नई चुनौती से कम डरता है; असुरक्षित लगाव वाला बच्चा दूसरों पर भरोसा करने में हिचक सकता है। बड़े होने पर भी शुरुआती लगाव संबंधों की शैली — भरोसा, निकटता, अलगाव से निपटना — को प्रभावित करता है।
  8. किशोरावस्था क्या है? अहं-केंद्रितता की अवधारणा समझाइए।
    किशोरावस्था बाल्यावस्था से वयस्कता तक का संक्रमण है — यौवनारंभ, पहचान की खोज और स्वतंत्रता की चाह इसकी पहचान है। अहं-केंद्रितता में किशोर मानता है कि सब उसी को देख रहे हैं और उसी के बारे में सोच रहे हैं (काल्पनिक दर्शक), और वह खुद को अनोखा व अजेय समझ सकता है।
  9. किशोरावस्था में पहचान के निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं? उदाहरण सहित समर्थन कीजिए।
    परिवार के मूल्य और स्वतंत्रता की मात्रा, साथियों का समूह, स्कूल और शिक्षक, संस्कृति और मीडिया, तथा खुद के अनुभव — जैसे किसी खेल या कला में सफलता — पहचान बनाते हैं। उदाहरण: जिस किशोर को घर में चर्चा की आज़ादी मिलती है, वह अपनी राय और मूल्यों के प्रति ज़्यादा स्पष्ट होता है।
  10. वयस्कता में प्रवेश पर व्यक्तियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
    करियर चुनना और उसमें टिकना, विवाह और परिवार की ज़िम्मेदारी, माता-पिता बनना, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पुराने संबंधों में बदलाव (बच्चों का घर छोड़ना) और अपने शारीरिक बदलावों से सामंजस्य — ये सब वयस्कता की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

विस्तार — ‘मानव विकास’ को गहराई से समझें

किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘मानव विकास’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।

इस पाठ में ‘विकास’ और ‘संज्ञानात्मक विकास’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।

पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।

मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या

नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।

Recap — याद रखने वाली बातें
← Chapter 2: मनोविज्ञान में जाँच की विधियाँChapter 4: संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ →