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Bhautik Bhugol ke Siddhant • Class 11 Geography

Chapter 9: वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ

गर्म हवा ऊपर उठती है, ठंडी नीचे आती है — इसी सरल नियम से दुनिया की सारी पवनें, मानसून और चक्रवात चलते हैं।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  अध्याय 9  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

अध्याय का सार

वायु हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है — यही पवन है। भूमध्य रेखा पर गर्म हवा ऊपर उठकर निम्न दाब बनाती है, ध्रुवों पर ठंडी हवा उतरकर उच्च दाब बनाती है। इस असमान तापन से पृथ्वी पर तीन परिसंचरण कोशिकाएँ (हैडली, फैरल, ध्रुवीय) बनती हैं।

पृथ्वी के घूमने से पवनें सीधी नहीं बहतीं — कोरिऑलिस बल उन्हें उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी में बाईं ओर मोड़ देता है। इसलिए व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पवनें तय दिशाओं में बहती हैं। चक्रवात निम्न दाब के केंद्र वाली घूमती व्यवस्था है।

मुख्य बिंदु

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य बात
व्यापारिक पवनउपोष्ण उच्च से भूमध्यरेखीय निम्न की ओर
पछुआ पवनउपोष्ण उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर
चक्रवातनिम्न दाब केंद्र, अंदर की ओर घूमती पवन
प्रतिचक्रवातउच्च दाब केंद्र, बाहर की ओर पवन
ध्यान दें

धरातल पर वायुदाब 1,000 मिलीबार हो तो 1 किमी की ऊँचाई पर लगभग 900 मिलीबार होगा — ऊँचाई के साथ दाब घटता है (लगभग 10 मीटर पर 1 मिलीबार)।

सामान्य गलती

उत्तरी गोलार्ध में निम्न दाब के चारों ओर पवनें घड़ी की सुइयों के विपरीत चलती हैं (चक्रवातीय); उच्च दाब के चारों ओर घड़ी की दिशा में (प्रतिचक्रवातीय)। दक्षिणी गोलार्ध में उल्टा।

परीक्षा टिप

वायुराशियों के उद्गम क्षेत्र समतल, विस्तृत और समरूप होते हैं — साइबेरिया का मैदानी भाग इसका उदाहरण है; हिमालय या दक्कन पठार नहीं।

वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): वैश्विक पवन परिसंचरण का सामान्य चित्रण — व्यापारिक पवनें और चक्रवात। यह किताब का चित्र नहीं है।

पवनें कैसे बहती हैं?

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: पवन परिसंचरण की कड़ी।

वायुदाब पेटियाँ और ग्रहीय पवनें

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सात वायुदाब पेटियाँ और व्यापारिक, पछुआ, ध्रुवीय पवनें — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।

विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार

वायुदाब वायु के भार का माप है; इकाई मिलीबार है। मौसम मानचित्र बनाते समय सभी स्थानों का वायुदाब समुद्र तल तक घटाकर दिखाया जाता है, ताकि ऊँचाई के अंतर से तुलना न बिगड़े — वरना ऊँचे स्थानों का दाब हमेशा कम दिखेगा। ऊँचाई के साथ दाब घटता है: धरातल पर 1,000 मिलीबार हो तो 1 किमी ऊपर लगभग 900 मिलीबार।

वायुदाब पेटियाँ सात हैं: विषुवतीय निम्न दाब (अंतर उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र, ITCZ — विषुवत् वृत्त के निकट), दोनों गोलार्धों में उपोष्ण उच्च दाब (लगभग 30° उत्तर-दक्षिण), उपध्रुवीय निम्न दाब (लगभग 60°) और ध्रुवीय उच्च दाब। इन्हीं पेटियों के बीच ग्रहीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक (उपोष्ण उच्च से विषुवत् निम्न की ओर), पछुआ (उपोष्ण उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर) और ध्रुवीय पवनें।

पवनों की दिशा व वेग को प्रभावित करने वाले कारक: दाब प्रवणता बल (उच्च से निम्न की ओर), कोरियोलिस बल (पृथ्वी के घूर्णन से दिशा का विक्षेप — उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर, दक्षिणी में बाईं ओर), अभिकेंद्रीय बल और घर्षण बल। जब दाब प्रवणता बल और कोरियोलिस बल संतुलित हो जाते हैं, तो पवनें समदाब रेखाओं के समानांतर चलती हैं — इन्हें भूविक्षेपी (geostrophic) पवनें कहते हैं।

दाब प्रवणता उत्तर से दक्षिण की ओर हो (उपोष्ण उच्च से विषुवत् की ओर), तो उत्तरी गोलार्ध में पवनें उत्तर-पूर्वी होती हैं — क्योंकि कोरियोलिस बल उन्हें दाईं ओर मोड़ देता है। यही उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें हैं। समुद्र समीर दिन में समुद्र से स्थल की ओर (स्थल गर्म होकर निम्न दाब बनाता है) और स्थल समीर रात में स्थल से समुद्र की ओर चलती है।

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्रों पर उत्पन्न होते हैं, क्योंकि उन्हें ऊष्मा व आर्द्रता समुद्र की गर्म सतह से मिलती है — स्थल पर आते ही ऊर्जा की आपूर्ति रुक जाती है और वे क्षीण हो जाते हैं। चक्रवात की आँख (केंद्र) शांत होती है; आँख की भित्ति (eyewall) में मूसलाधार वर्षा होती है और पवनें सर्वाधिक वेग (250 किमी/घंटा तक) से चलती हैं। तड़ितझंझा और टोरनेडो अल्पकालिक पर आक्रामक स्थानीय तूफ़ान हैं।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • वायुदाब: वायु का भार; उच्च-निम्न दाब से पवन बनती है।
  • कोरिऑलिस बल: पृथ्वी के घूर्णन से पवन की दिशा मोड़ने वाला बल।
  • व्यापारिक पवन: उपोष्ण से भूमध्य रेखा की ओर बहने वाली स्थायी पवन।
  • चक्रवात: निम्न दाब केंद्र वाली घूर्णनशील पवन व्यवस्था।
  • मानसून: मौसम के अनुसार दिशा बदलने वाली पवन।
  • दाब प्रवणता बल: उच्च दाब से निम्न दाब की ओर लगने वाला बल — पवनों का मूल चालक।
  • कोरियोलिस बल: पृथ्वी के घूर्णन से पवनों की दिशा का विक्षेप (उत्तर में दाईं, दक्षिण में बाईं ओर)।
  • भूविक्षेपी पवन: दाब प्रवणता व कोरियोलिस के संतुलन से समदाब रेखाओं के समानांतर चलने वाली पवन।
  • वायुराशि: तापमान व आर्द्रता में समरूप वायु का विशाल पिंड — उद्गम क्षेत्र में बनता है।
  • लैंडफॉल: वह स्थान जहाँ चक्रवात तट पार करके स्थल पर पहुँचता है।

Remember — याद रखें

  • कोरिऑलिस की दिशा (उत्तर में दाईं) उलट न जाए — यह बहुत पूछा जाता है।
  • पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर — हमेशा यही क्रम।
  • चक्रवात = निम्न दाब, प्रतिचक्रवात = उच्च दाब।
  • मानसून स्थायी पवन नहीं, मौसमी पवन है।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: पवन को निम्न से उच्च दाब की ओर बहना लिख देना। उत्तर में दिशा हमेशा उच्च → निम्न लिखें।

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. पवन क्यों बहती है?
    संकेत: दाब के अंतर के बारे में सोचें।
  2. कोरिऑलिस बल क्या करता है?
    संकेत: दिशा मोड़ने के बारे में सोचें।
  3. व्यापारिक पवनें कहाँ से कहाँ बहती हैं?
    संकेत: उपोष्ण से भूमध्य रेखा के बारे में सोचें।
  4. चक्रवात किसे कहते हैं?
    संकेत: निम्न दाब केंद्र के बारे में सोचें।
  5. मानसून स्थायी पवन क्यों नहीं है?
    संकेत: मौसमी दिशा-बदलाव के बारे में सोचें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. पवन क्यों बहती है?
    वायुदाब के अंतर के कारण — वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।
  2. कोरिऑलिस बल क्या है?
    पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न आभासी बल जो पवनों को उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी में बाईं ओर मोड़ता है।
  3. तीन परिसंचरण कोशिकाएँ कौन सी हैं?
    हैडली (उष्ण), फैरल (मध्य अक्षांश) और ध्रुवीय कोशिका।
  4. चक्रवात और प्रतिचक्रवात में क्या अंतर है?
    चक्रवात निम्न दाब केंद्र वाली अंदर घूमती व्यवस्था है; प्रतिचक्रवात उच्च दाब केंद्र वाली बाहर फैलती व्यवस्था है।
  5. मानसून कैसे बनता है?
    स्थल और समुद्र के मौसमी तापन-अंतर से दाब बदलता है, जिससे पवन की दिशा मौसम के साथ उलट जाती है।

पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।

  1. बहुविकल्पीय (i): धरातल पर वायुदाब 1,000 मिलीबार हो तो 1 किमी की ऊँचाई पर कितना होगा?
    900 मिलीबार — विकल्प (ख)। ऊँचाई के साथ दाब घटता है — लगभग 10 मीटर पर 1 मिलीबार की दर से, 1 किमी पर लगभग 100 मिलीबार की कमी। 1,100/1,300 मिलीबार धरातल से अधिक हैं, जो असंभव है।
  2. बहुविकल्पीय (ii): अंतर उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) प्रायः कहाँ होता है?
    विषुवत् वृत्त के निकट — विकल्प (क)। विषुवत् पर गर्म वायु ऊपर उठती है, इसलिए निम्न दाब बनता है और दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें यहीं अभिसरित होती हैं।
  3. बहुविकल्पीय (iii): उत्तरी गोलार्ध में निम्न वायुदाब के चारों ओर पवनों की दिशा क्या होगी?
    घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा के विपरीत — विकल्प (ख)। निम्न दाब में वायु केंद्र की ओर खिंचती है और कोरियोलिस बल से वामावर्त घूमती है — यही चक्रवातीय परिसंचरण है।
  4. बहुविकल्पीय (iv): वायुराशियों के निर्माण का उद्गम क्षेत्र कौन-सा है?
    साइबेरिया का मैदानी भाग — विकल्प (ख)। वायुराशि के लिए विस्तृत, समतल, समरूप क्षेत्र चाहिए जहाँ वायु लंबे समय तक ठहरकर एक-से गुण ग्रहण करे; विषुवतीय वन, हिमालय पर्वत और दक्कन पठार ऐसे क्षेत्र नहीं हैं।
  5. लघु उत्तरीय (क): वायुदाब मापने की इकाई क्या है? मौसम मानचित्र पर वायुदाब को समुद्र तल तक क्यों घटाया जाता है?
    इकाई मिलीबार है। ऊँचाई के साथ दाब घटता है, इसलिए अलग-अलग ऊँचाई वाले स्थानों की तुलना के लिए सबका दाब समुद्र तल के स्तर पर लाया जाता है — वरना ऊँचे स्थान हमेशा निम्न दाब वाले दिखेंगे और मानचित्र भ्रामक होगा।
  6. लघु उत्तरीय (ख): दाब प्रवणता उत्तर से दक्षिण की ओर हो तो उत्तरी गोलार्ध में उष्णकटिबंध में पवनें उत्तर-पूर्वी क्यों होती हैं?
    दाब प्रवणता बल पवन को उत्तर से दक्षिण (उपोष्ण उच्च से विषुवत् निम्न की ओर) धकेलता है। कोरियोलिस बल उत्तरी गोलार्ध में पवन को दाईं ओर मोड़ देता है — इसलिए उत्तर से आने वाली पवन उत्तर-पूर्वी हो जाती है। यही उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवन है।
  7. लघु उत्तरीय (ग): भूविक्षेपी पवनें क्या हैं?
    जब दाब प्रवणता बल और कोरियोलिस बल बराबर व विपरीत हो जाते हैं, तो पवन न निम्न दाब की ओर जाती है, न उच्च की ओर — समदाब रेखाओं के समानांतर चलती है। ऐसी पवनें भूविक्षेपी कहलाती हैं; ये ऊपरी वायुमंडल में (घर्षण से ऊपर) पाई जाती हैं।
  8. लघु उत्तरीय (घ): समुद्र व स्थल समीर का वर्णन करें।
    दिन में स्थल समुद्र से जल्दी गर्म होता है — स्थल पर निम्न दाब बनता है, समुद्र से ठंडी वायु स्थल की ओर आती है (समुद्र समीर)। रात में स्थल जल्दी ठंडा होता है — स्थल पर उच्च दाब बनता है, वायु स्थल से समुद्र की ओर जाती है (स्थल समीर)।
  9. दीर्घ उत्तरीय (क): पवनों की दिशा व वेग को प्रभावित करने वाले कारक बताएँ।
    दाब प्रवणता बल: दाब-अंतर जितना अधिक, पवन उतनी तेज़; दिशा उच्च से निम्न की ओर। कोरियोलिस बल: घूर्णन से दिशा का विक्षेप (उत्तर में दाईं, दक्षिण में बाईं ओर)। घर्षण बल: धरातल के निकट पवन को धीमा करता है और दिशा मोड़ता है। अभिकेंद्रीय बल: वक्र पथ पर घूमती पवन में। जब दाब प्रवणता व कोरियोलिस संतुलित हों, तो भूविक्षेपी पवनें समदाब रेखाओं के समानांतर चलती हैं।
  10. दीर्घ उत्तरीय (ख): पृथ्वी पर वायुमंडलीय सामान्य परिसंचरण का वर्णन करते हुए चित्र बनाएँ; 30° उत्तर-दक्षिण पर उपोष्ण उच्च दाब के कारण बताएँ।
    चित्र में तीन कोशिकाएँ दिखाएँ: हैडली (विषुवत् निम्न से 30° उच्च तक), फैरेल (30°–60°) और ध्रुवीय (60°–ध्रुव)। विषुवत् पर गर्म वायु ऊपर उठती है, 30° पर ठंडी होकर नीचे उतरती है — इसलिए 30° उत्तर व दक्षिण में उपोष्ण उच्च दाब पेटी बनती है। कारण: ऊपर से उतरती वायु संपीडित होकर गर्म होती है, शुष्क हो जाती है और नीचे बैठकर उच्च दाब बनाती है — इसीलिए 30° के आसपास विश्व के बड़े मरुस्थल (सहारा, थार, कालाहारी) हैं।
  11. दीर्घ उत्तरीय (ग): उष्ण कटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्रों पर ही क्यों उत्पन्न होते हैं? किस भाग में मूसलाधार वर्षा व उच्च वेग की पवनें होती हैं और क्यों?
    चक्रवात को ऊर्जा समुद्र की गर्म सतह (27° सेल्सियस से अधिक) से वाष्पीकरण द्वारा मिलती है — स्थल पर यह ऊर्जा-स्रोत नहीं है, इसलिए स्थल पर चक्रवात बन नहीं सकता और आते ही क्षीण हो जाता है। मूसलाधार वर्षा व सर्वाधिक वेग (250 किमी/घंटा तक) आँख की भित्ति (eyewall) में होती है — क्योंकि वहाँ वायु प्रबल व वृत्ताकार रूप में आरोहण करती है, क्षोभसीमा तक पहुँचती है, संघनन से भारी वर्षा होती है और कोणीय संवेग के कारण वेग अधिकतम होता है। आँख (केंद्र) शांत होती है, जहाँ वायु अवतलित होती है।

बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A

बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।

  1. वायुदाब की इकाई और समुद्र-तल समानीकरण का कारण लिखिए।
    मिलीबार। ऊँचाई के साथ दाब घटता है, इसलिए तुलना के लिए सभी स्थानों का दाब समुद्र तल के स्तर पर लाया जाता है।
  2. ITCZ किसे कहते हैं? यह कहाँ स्थित होता है?
    अंतर उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र — जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं। विषुवत् वृत्त के निकट स्थित होता है।
  3. कोरियोलिस बल का पवनों की दिशा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    उत्तरी गोलार्ध में पवन दाईं ओर, दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती है। विषुवत् पर यह बल शून्य होता है।
  4. समुद्र समीर और स्थल समीर में अंतर लिखिए।
    समुद्र समीर: दिन में, समुद्र से स्थल की ओर। स्थल समीर: रात में, स्थल से समुद्र की ओर। कारण: स्थल व जल के गर्म-ठंडा होने की गति का अंतर।
  5. चक्रवात की आँख और आँख की भित्ति में अंतर लिखिए।
    आँख: केंद्र का शांत क्षेत्र, वायु अवतलित होती है, मौसम साफ़। भित्ति: आँख के चारों ओर का वलय, प्रबल आरोहण, मूसलाधार वर्षा, सर्वाधिक पवन-वेग।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

Recap — सार

दाब: मिलीबार; 1 किमी पर 1,000 → 900। पेटियाँ: विषुवत् निम्न (ITCZ), 30° उच्च, 60° निम्न, ध्रुवीय उच्च। पवन-कारक: दाब प्रवणता, कोरियोलिस, घर्षण। भूविक्षेपी = समदाब के समानांतर। चक्रवात: केवल समुद्र पर; आँख शांत, भित्ति में वर्षा व वेग अधिकतम।