Chapter 10: वायुमंडल में जल
जलवाष्प वायुमंडल का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है — उसी से मेघ बनते हैं, वर्षा होती है, मौसम बदलता है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
वायुमंडल में जल — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 10 | माध्यम: हिंदी
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अध्याय का सार
वायुमंडल में जल तीन रूपों में है — गैसीय जलवाष्प, द्रव बूँदें (बादल, वर्षा) और ठोस हिम। वाष्पीकरण से जल वायु में जाता है, संघनन (condensation) से वह बूँदों में बदलता है, और वर्षण (precipitation) से धरती पर लौटता है — यही जल चक्र है।
संघनन के लिए ठंडी सतह या उठती हुई वायु और संघनन केंद्रक (धूलकण) चाहिए। वर्षा के प्रकार हैं — संवहनीय (गर्म हवा उठने से), पर्वतीय (पर्वत से टकराकर उठने से) और चक्रवाती (वाताग्र से)। ओस, पाला, कोहरा भी संघनन के ही रूप हैं।
मुख्य बिंदु
- जल चक्र: वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह/रिसाव।
- आर्द्रता: वायु में जलवाष्प की मात्रा; सापेक्ष आर्द्रता प्रतिशत में।
- वर्षा के तीन प्रकार: संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवाती।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| वाष्पीकरण | द्रव से गैस बनना |
| संघनन | गैस से द्रव बनना |
| संवहनीय वर्षा | गर्म हवा के उठने से |
| पर्वतीय वर्षा | पर्वत से टकराकर उठने से |
मानव के लिए वायुमंडल का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक जलवाष्प है — क्योंकि वही मौसम की सभी घटनाओं (मेघ, वर्षा, तूफ़ान) का आधार है। ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है, पर मौसम की दृष्टि से जलवाष्प प्रमुख है।
सापेक्ष आर्द्रता और संतृप्त हवा को एक मत समझिए: संतृप्त हवा वह दशा है जिसमें नमी पूरी क्षमता के अनुरूप हो; सापेक्ष आर्द्रता उस क्षमता का प्रतिशत है।
सबसे ऊँचा बादल पक्षाभ (cirrus) है — पतला, सफ़ेद, रेशेदार, हिम-कणों से बना। वर्षा मेघ (nimbus) सबसे नीचे और सबसे घना होता है।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): जल चक्र का सामान्य चित्रण — वाष्पीकरण, बादल और वर्षा। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: जल चक्र के चरण।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): जल चक्र और वर्षा के तीन प्रकार — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
वायुमंडल में जल तीन रूपों में है: जलवाष्प (गैस), मेघ-बूँदें (द्रव) और हिम-कण (ठोस)। जल द्रव से गैस में वाष्पीकरण से बदलता है; गैस से द्रव में संघनन से। वाष्पोत्सर्जन (पौधों से जल का निकलना) भी वायुमंडल में जलवाष्प जोड़ता है। ऊँचाई के साथ जलवाष्प की मात्रा तेजी से घटती है, क्योंकि ऊँचाई पर तापमान कम होता है और ठंडी वायु कम जलवाष्प धारण कर सकती है।
आर्द्रता तीन तरह की: निरपेक्ष आर्द्रता (प्रति घन मीटर वायु में जलवाष्प की वास्तविक मात्रा), सापेक्ष आर्द्रता (वास्तविक मात्रा का संतृप्त क्षमता से प्रतिशत), विशिष्ट आर्द्रता (प्रति किलोग्राम वायु में जलवाष्प)। संतृप्त हवा वह है जिसमें नमी उसकी पूरी क्षमता के अनुरूप हो — तापमान बढ़ने पर क्षमता बढ़ती है, इसलिए सापेक्ष आर्द्रता घट जाती है।
मेघ बनते हैं जब आर्द्र वायु ऊपर उठकर ठंडी होती है और जलवाष्प धूलकणों के चारों ओर संघनित होती है। वर्गीकरण: ऊँचे मेघ — पक्षाभ (cirrus, सबसे ऊँचा, हिम-कण), मध्यम — स्तरी (stratus, परतदार), नीचे — कपासी (cumulus, फूले हुए) और वर्षा मेघ (nimbus, घने, वर्षा देने वाले)। संघनन के रूप: ओस, तुषार (पाला), कुहरा, धुंध और मेघ।
वर्षा तीन प्रकार की: संवहनीय (गर्म वायु ऊपर उठकर — विषुवतीय क्षेत्रों में, गरज के साथ मूसलाधार, अल्पकालिक), पर्वतीय (आर्द्र वायु पर्वत-ढाल पर ऊपर चढ़कर — पवनाभिमुख ढाल पर अधिक, प्रतिपवन ढाल पर वृष्टि छाया क्षेत्र), चक्रवातीय/फ्रंटल (वाताग्र पर गर्म व ठंडी वायु के मिलने से — शीतोष्ण क्षेत्रों में)। ओलापत्थर वर्षा की बूँदों के ठंडी परतों से गुजरकर बर्फ के गोले बनने से बनते हैं।
विश्व में वर्षा का वितरण: विषुवत् से ध्रुव की ओर घटती है; महाद्वीपों के भीतरी भागों की अपेक्षा तटीय क्षेत्रों में अधिक; महासागरों पर स्थल से अधिक। 200 सेमी से अधिक: विषुवतीय पट्टी, शीतोष्ण पश्चिमी तट, मानसूनी तटीय भाग। 100–200 सेमी: महाद्वीपों के भीतरी भाग। 50–100 सेमी: उष्ण मरुस्थलीय व शीतोष्ण भीतरी भाग। 50 सेमी से कम: वृष्टि छाया क्षेत्र व ऊँचे अक्षांश।
- द्रव → गैस: वाष्पीकरण; गैस → द्रव: संघनन।
- संतृप्त हवा: नमी पूरी क्षमता के अनुरूप।
- सबसे ऊँचा बादल: पक्षाभ (cirrus)।
- वर्षा के तीन प्रकार: संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवातीय।
- वर्षा विषुवत् से ध्रुव की ओर घटती है।
Key Terms — मुख्य शब्द
- जलवाष्प: वायु में गैसीय जल।
- संघनन: जलवाष्प का द्रव में बदलना।
- वर्षण: वर्षा, हिम, ओला आदि के रूप में जल का गिरना।
- आर्द्रता: वायु में जलवाष्प की मात्रा।
- वाताग्र: दो अलग वायुराशियों की सीमा।
- वाष्पोत्सर्जन: पौधों की पत्तियों से जल का वाष्प रूप में निकलना।
- सापेक्ष आर्द्रता: वास्तविक जलवाष्प का संतृप्त क्षमता से प्रतिशत।
- वृष्टि छाया क्षेत्र: पर्वत के प्रतिपवन ढाल का शुष्क क्षेत्र — वर्षा बहुत कम।
- ओसांक: वह तापमान जिस पर वायु संतृप्त होकर संघनन आरंभ करती है।
- ओलापत्थर: ठंडी परतों से गुजरकर बर्फ के गोले बनी वर्षा की बूँदें।
Remember — याद रखें
- वाष्पीकरण और संघनन उल्टी प्रक्रियाएँ हैं — दिशा न बदलें।
- वर्षा के तीन प्रकारों के कारण अलग-अलग हैं — नाम से कारण जोड़ें।
- ओस और पाला भी संघनन के रूप हैं, वर्षण नहीं।
- सापेक्ष आर्द्रता 100% होने पर संघनन शुरू होता है।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: संघनन और वर्षण को एक मान लेना। उत्तर में संघनन = बूँद बनना, वर्षण = गिरना, यह फर्क लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- जल चक्र के चरण क्या हैं?
संकेत: वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण के बारे में सोचें। - संघनन के लिए क्या चाहिए?
संकेत: ठंडक और धूलकण के बारे में सोचें। - संवहनीय वर्षा कैसे होती है?
संकेत: गर्म हवा उठने के बारे में सोचें। - पर्वतीय वर्षा कैसे होती है?
संकेत: पर्वत से टकराने के बारे में सोचें। - ओस क्या है?
संकेत: सतह पर संघनन के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- जल चक्र क्या है?
समुद्र-स्थल से वाष्पीकरण, वायु में संघनन, वर्षण से वापसी, फिर अपवाह और रिसाव — जल का निरंतर चक्र। - संघनन कब होता है?
जब नम हवा ठंडी होती है और जलवाष्प धूलकणों पर बूँदों में बदल जाती है। - संवहनीय वर्षा कैसे होती है?
धरती गर्म होकर हवा को ऊपर उठाती है; ऊपर ठंडी होकर वह संघनित होती है और वर्षा करती है। - पर्वतीय वर्षा कैसे होती है?
नम पवन पर्वत से टकराकर ऊपर उठती है, ठंडी होती है और पवनाभिमुख ढाल पर वर्षा करती है। - चक्रवाती वर्षा क्या है?
जब गर्म और ठंडी वायुराशियाँ वाताग्र पर मिलती हैं, तो गर्म हवा ऊपर उठकर वर्षा करती है।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): मानव के लिए वायुमंडल का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक कौन-सा है?
जलवाष्प — विकल्प (क)। जलवाष्प ही मेघ, वर्षा, तूफ़ान — मौसम की सभी घटनाओं का आधार है; इस अध्याय की दृष्टि से वही सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। - बहुविकल्पीय (ii): जल के द्रव से गैस में बदलने की प्रक्रिया कौन-सी है?
वाष्पीकरण — विकल्प (ख)। संघनन उल्टी प्रक्रिया है (गैस → द्रव), वाष्पोत्सर्जन पौधों से निकलने वाला जल है, अवक्षेपण वर्षण का दूसरा नाम है। - बहुविकल्पीय (iii): वायु की वह दशा जिसमें नमी उसकी पूरी क्षमता के अनुरूप हो, क्या कहलाती है?
संतृप्त हवा — विकल्प (घ)। सापेक्ष आर्द्रता उस क्षमता का प्रतिशत है, निरपेक्ष मात्रा है, विशिष्ट प्रति किलोग्राम मात्रा है — दशा का नाम संतृप्त हवा है। - बहुविकल्पीय (iv): आकाश में सबसे ऊँचा बादल कौन-सा है?
पक्षाभ (cirrus) — विकल्प (क)। पतले, सफ़ेद, रेशेदार हिम-कणों वाले बादल सबसे ऊँचाई पर होते हैं; वर्षा मेघ सबसे नीचे होते हैं। - लघु उत्तरीय (क): वर्षण के तीन प्रकारों के नाम लिखें।
संवहनीय वर्षा, पर्वतीय (स्थलकृत) वर्षा और चक्रवातीय (फ्रंटल) वर्षा। - लघु उत्तरीय (ख): सापेक्ष आर्द्रता की व्याख्या कीजिए।
किसी तापमान पर वायु में मौजूद वास्तविक जलवाष्प का उसी तापमान पर वायु की संतृप्त क्षमता से प्रतिशत। तापमान बढ़ने पर क्षमता बढ़ती है, इसलिए सापेक्ष आर्द्रता घट जाती है — भले ही जलवाष्प की मात्रा वही रहे। - लघु उत्तरीय (ग): ऊँचाई के साथ जलवाष्प की मात्रा तेजी से क्यों घटती है?
क्योंकि ऊँचाई पर तापमान कम होता है और ठंडी वायु कम जलवाष्प धारण कर सकती है। साथ ही, जलवाष्प का स्रोत (महासागर, धरातल) नीचे है — ऊपर पहुँचते-पहुँचते अधिकांश जलवाष्प संघनित होकर वर्षा के रूप में गिर जाती है। - लघु उत्तरीय (घ): बादल कैसे बनते हैं? बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
आर्द्र वायु ऊपर उठकर ठंडी होती है; जलवाष्प धूलकणों के चारों ओर संघनित होकर छोटी बूँदों/हिम-कणों में बदलती है — यही मेघ है। वर्गीकरण: ऊँचे (पक्षाभ), मध्यम (स्तरी), नीचे (कपासी, वर्षा मेघ) — ऊँचाई व आकार के आधार पर। - दीर्घ उत्तरीय (क): विश्व के वर्षण वितरण के प्रमुख लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
विषुवत् से ध्रुव की ओर वर्षा घटती है। तटीय क्षेत्रों में भीतरी भागों से अधिक; महासागरों पर स्थल से अधिक। विषुवत् से 35°–40° उत्तर-दक्षिण के बीच पूर्वी तटों पर बहुत अधिक वर्षा, पश्चिम की ओर घटती है। 45°–65° के बीच पछुआ पवनों से पश्चिमी किनारों पर अधिक वर्षा। पर्वतों के पवनाभिमुख ढाल पर अधिक, प्रतिपवन पर वृष्टि छाया। मात्रा के अनुसार: 200 सेमी से अधिक (विषुवतीय, मानसूनी तट, शीतोष्ण पश्चिमी तट), 100–200 सेमी (भीतरी भाग), 50–100 सेमी (मरुस्थलीय-भीतरी), 50 सेमी से कम (वृष्टि छाया, ऊँचे अक्षांश)। - दीर्घ उत्तरीय (ख): संघनन के कौन-कौन से प्रकार हैं? ओस एवं तुषार के बनने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
संघनन के रूप: ओस, तुषार (पाला), कुहरा, धुंध और मेघ। ओस: रात में धरातल ठंडा होकर ओसांक से नीचे चला जाता है — वायु की जलवाष्प ठंडी सतहों (घास, पत्तियों) पर बूँदों में जम जाती है। तुषार: जब ओसांक हिमांक (0° सेल्सियस) से नीचे हो, तो जलवाष्प सीधे बर्फ के क्रिस्टल (तुषार) के रूप में जमती है — यही पाला है, जो फसलों को हानि पहुँचाता है।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- वाष्पीकरण और संघनन में अंतर लिखिए।
वाष्पीकरण: द्रव → गैस (ऊष्मा अवशोषित)। संघनन: गैस → द्रव (ऊष्मा मुक्त)। दोनों जल चक्र की विपरीत प्रक्रियाएँ हैं। - सापेक्ष आर्द्रता तापमान बढ़ने पर क्यों घट जाती है?
क्योंकि तापमान बढ़ने पर वायु की जलवाष्प धारण-क्षमता बढ़ जाती है; वास्तविक मात्रा वही रहने पर भी क्षमता से प्रतिशत घट जाता है। - संवहनीय और पर्वतीय वर्षा में अंतर लिखिए।
संवहनीय: गर्म वायु के ऊपर उठने से (विषुवतीय, गरज के साथ)। पर्वतीय: आर्द्र वायु के पर्वत-ढाल पर चढ़ने से (पवनाभिमुख ढाल पर अधिक)। - वृष्टि छाया क्षेत्र किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
पर्वत के प्रतिपवन ढाल का शुष्क क्षेत्र — वायु नीचे उतरकर गर्म हो जाती है और वर्षा नहीं करती। जैसे पश्चिमी घाट के पूर्वी भाग (महाराष्ट्र का भीतरी पठार)। - ओस और तुषार में अंतर लिखिए।
ओस: ओसांक 0° से ऊपर होने पर जलवाष्प की बूँदें। तुषार: ओसांक 0° से नीचे होने पर बर्फ के क्रिस्टल (पाला)।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
जलवाष्प = मौसम का आधार। द्रव→गैस = वाष्पीकरण; संतृप्त हवा = पूरी क्षमता वाली नमी। सबसे ऊँचा बादल: पक्षाभ। वर्षा: संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवातीय। वितरण: विषुवत् से ध्रुव की ओर घटती; तट > भीतरी भाग; 200 सेमी से अधिक: विषुवतीय/मानसूनी तट।

