Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Bhautik Bhugol ke Siddhant • Class 11 Geography

Chapter 7: वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

पृथ्वी के चारों ओर गैसों का पतला कंबल — वही हमें न ज़्यादा गर्म होने देता है, न ज़्यादा ठंडा।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

वायुमंडल का संघटन तथा संरचना — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  अध्याय 7  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

अध्याय का सार

वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर गैसों, जलवाष्प और धूलकणों का आवरण है। इसमें नाइट्रोजन (लगभग 78%) सबसे ज़्यादा है, फिर ऑक्सीजन (लगभग 21%); बाकी में आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि हैं। जलवाष्प और धूलकण कम मात्रा में होते हुए भी मौसम के लिए निर्णायक हैं।

वायुमंडल की परतें हैं — क्षोभमंडल (मौसम यहीं होता है), समतापमंडल (ओज़ोन परत यहीं), मध्यमंडल, आयनमंडल (रेडियो तरंगें) और बाह्यमंडल। ऊँचाई के साथ तापमान का व्यवहार हर परत में अलग होता है।

मुख्य बिंदु

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य बात
नाइट्रोजनलगभग 78%
ऑक्सीजनलगभग 21%
क्षोभमंडलमौसम की परत
समतापमंडलओज़ोन परत
ध्यान दें

वायुमंडल में नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, आर्गन 0.93% और कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% है। सबसे अधिक मात्रा वाली गैस नाइट्रोजन है — ऑक्सीजन नहीं।

सामान्य गलती

मानव जीवन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण परत क्षोभमंडल है (मौसम यहीं होता है) — समतापमंडल नहीं, भले ही ओज़ोन परत उसी में हो।

परीक्षा टिप

ऑक्सीजन 120 किमी की ऊँचाई पर नगण्य हो जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड सौर विकिरण के लिए पारदर्शी है पर पार्थिव विकिरण के लिए अपारदर्शी — इसीलिए वह ग्रीनहाउस गैस है।

वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): वायुमंडल की परतों का सामान्य चित्रण — बादल, ओज़ोन पट्टी और सूर्य किरणें। यह किताब का चित्र नहीं है।

वायुमंडल की परतें

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: वायुमंडल की परतें नीचे से ऊपर।

वायुमंडल की परतें — क्षोभमंडल से बहिर्मंडल तक

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): वायुमंडल की पाँच परतें और उनकी ऊँचाइयाँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।

विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार

वायुमंडल पृथ्वी को घेरने वाली गैसों की परत है, जो गुरुत्वाकर्षण से बँधी है। इसका संघटन: नाइट्रोजन (78%), ऑक्सीजन (21%), आर्गन (0.93%), कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%), साथ ही जलवाष्प (परिवर्तनशील, 0–4%) और धूलकण। जलवाष्प वायुमंडल को कंबल की तरह काम करने में मदद करती है — वह पृथ्वी से निकलने वाले ताप को संग्रहित करती है, इसलिए पृथ्वी न अधिक गर्म होती है, न अधिक ठंडी।

धूलकण वायुमंडल के ठोस कण हैं — समुद्री नमक, महीन मिट्टी, धुएँ की कालिमा, राख, पराग और उल्काओं के टूटे कण। धूल और नमक के कण आर्द्रताग्राही केंद्र का काम करते हैं — इनके चारों ओर जलवाष्प संघनित होकर मेघ बनाती है। धूलकणों का जमाव उपोष्ण और शीतोष्ण प्रदेशों की सूखी हवा में अधिक होता है।

तापमान के आधार पर वायुमंडल पाँच संस्तरों में बँटा है: (1) क्षोभमंडल — सतह से लगभग 13 किमी (ध्रुवों पर 8 किमी, विषुवत् पर 18 किमी); तापमान हर 165 मीटर पर 1° सेल्सियस घटता है; धूलकण व जलवाष्प यहीं हैं; मौसम के परिवर्तन यहीं होते हैं। क्षोभसीमा पर विषुवत् के ऊपर −80° सेल्सियस और ध्रुवों के ऊपर −45° सेल्सियस तापमान होता है। (2) समतापमंडल — 50 किमी तक; ओज़ोन परत यहीं है, जो पराबैंगनी किरणों को सोखकर पृथ्वी को बचाती है। (3) मध्यमंडल — 80 किमी तक; तापमान घटकर −100° सेल्सियस हो जाता है। (4) आयनमंडल — 80–400 किमी; विद्युत आवेशित कण (आयन) रेडियो तरंगों को वापस पृथ्वी पर लौटाते हैं। (5) बहिर्मंडल — सबसे ऊपरी, विरल परत, धीरे-धीरे अंतरिक्ष में मिल जाती है।

मौसम और जलवायु के तत्त्व हैं: तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, मेघ और वर्षण। भूगोलवेत्ता मुख्यतः पहले दो संस्तरों (क्षोभमंडल व समतापमंडल) का अध्ययन करते हैं, क्योंकि मौसम और जीवन इन्हीं से प्रभावित होते हैं।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • वायुमंडल: पृथ्वी के चारों ओर गैसों का आवरण।
  • क्षोभमंडल: सबसे निचली परत, मौसम यहीं बनता है।
  • ओज़ोन: पराबैंगनी किरणें सोखने वाली गैस।
  • आयनमंडल: आवेशित कणों वाली परत, रेडियो संचार में सहायक।
  • जलवाष्प: वायु में गैसीय जल; बादल-वर्षा का स्रोत।
  • क्षोभसीमा: क्षोभमंडल व समतापमंडल के बीच की सीमा — तापमान स्थिर रहता है।
  • ओज़ोन परत: समतापमंडल में ओज़ोन गैस की परत — पराबैंगनी किरणें सोखती है।
  • आर्द्रताग्राही केंद्र: धूल/नमक कण जिनके चारों ओर जलवाष्प संघनित होकर मेघ बनाती है।
  • तापमान ह्रास दर: ऊँचाई के साथ तापमान का घटना — क्षोभमंडल में लगभग 1° सेल्सियस प्रति 165 मीटर।
  • आयन: विद्युत आवेशित कण — आयनमंडल में रेडियो तरंगों को परावर्तित करते हैं।

Remember — याद रखें

  • 78% नाइट्रोजन और 21% ऑक्सीजन — ये दो आंकड़े पक्के करें।
  • मौसम = क्षोभमंडल, ओज़ोन = समतापमंडल — जगह न बदलें।
  • जलवाष्प कम है पर मौसम के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है।
  • परतों का क्रम नीचे से ऊपर याद करें।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: ओज़ोन परत को क्षोभमंडल में लिख देना। उत्तर में परत का नाम और काम दोनों सही लिखें।

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. वायुमंडल में सबसे ज़्यादा गैस कौन सी है?
    संकेत: नाइट्रोजन के बारे में सोचें।
  2. ऑक्सीजन कितने प्रतिशत है?
    संकेत: 21% के बारे में सोचें।
  3. मौसम किस परत में होता है?
    संकेत: क्षोभमंडल के बारे में सोचें।
  4. ओज़ोन परत कहाँ है और क्या करती है?
    संकेत: समतापमंडल के बारे में सोचें।
  5. जलवाष्प क्यों महत्त्वपूर्ण है?
    संकेत: बादल और वर्षा के बारे में सोचें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. वायुमंडल का संघटन क्या है?
    लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, 0.93% आर्गन और अल्प मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और धूलकण।
  2. मौसम किस परत में बनता है?
    क्षोभमंडल में — सबसे निचली परत में, जहाँ जलवाष्प और धूलकण सबसे ज़्यादा हैं।
  3. ओज़ोन परत कहाँ है?
    समतापमंडल में; वह सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सोखकर जीवों की रक्षा करती है।
  4. आयनमंडल का क्या उपयोग है?
    वहाँ आवेशित कण रेडियो तरंगों को परावर्तित करते हैं, जिससे लंबी दूरी का रेडियो संचार संभव है।
  5. जलवाष्प कम होकर भी महत्त्वपूर्ण क्यों है?
    क्योंकि बादल, वर्षा, कोहरा और ऊष्मा का संतुलन उसी पर निर्भर है।

पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।

  1. बहुविकल्पीय (i): वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सी गैस मौजूद है?
    नाइट्रोजन — विकल्प (ग)। लगभग 78%। ऑक्सीजन 21% के साथ दूसरे स्थान पर है।
  2. बहुविकल्पीय (ii): मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण वायुमंडलीय परत कौन-सी है?
    क्षोभमंडल — विकल्प (ख)। मौसम की सभी घटनाएँ (मेघ, वर्षा, तूफ़ान) यहीं होती हैं और जीवन-यापन की वायु यहीं है।
  3. बहुविकल्पीय (iii): समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिमा, महीन मिट्टी किससे संबंधित हैं?
    धूलकण — विकल्प (ग)। ये वायुमंडल के ठोस कण हैं, जो मेघ-निर्माण के केंद्र बनते हैं।
  4. बहुविकल्पीय (iv): कितनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है?
    120 किमी — विकल्प (ख)। ऊँचाई के साथ ऑक्सीजन घटती जाती है और 120 किमी पर लगभग समाप्त हो जाती है।
  5. बहुविकल्पीय (v): कौन-सी गैस सौर विकिरण के लिए पारदर्शी और पार्थिव विकिरण के लिए अपारदर्शी है?
    कार्बन डाइऑक्साइड — विकल्प (घ)। यही गुण उसे ग्रीनहाउस गैस बनाता है — सूर्य की गर्मी भीतर आने देती है, पृथ्वी की गर्मी बाहर जाने से रोकती है।
  6. लघु उत्तरीय (क): वायुमंडल से आप क्या समझते हैं?
    पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाली गैसों की परत, जो गुरुत्वाकर्षण से पृथ्वी से बँधी है। इसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और धूलकण होते हैं।
  7. लघु उत्तरीय (ख): मौसम एवं जलवायु के तत्त्व कौन-कौन से हैं?
    तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, मेघ और वर्षण — ये छह तत्त्व मौसम और जलवायु को निर्धारित करते हैं।
  8. लघु उत्तरीय (ग): वायुमंडल की संरचना के बारे में लिखें।
    पाँच संस्तर: क्षोभमंडल (13 किमी, मौसम यहीं), समतापमंडल (50 किमी, ओज़ोन), मध्यमंडल (80 किमी, −100° सेल्सियस), आयनमंडल (80–400 किमी, रेडियो तरंगें), बहिर्मंडल (सबसे ऊपरी, विरल)।
  9. लघु उत्तरीय (घ): सभी संस्तरों में क्षोभमंडल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है?
    क्योंकि मौसम की सभी घटनाएँ यहीं होती हैं — मेघ, वर्षा, तूफ़ान, कुहरा। धूलकण व जलवाष्प यहीं हैं, और मानव-जीवन की वायु यहीं से मिलती है। तापमान ह्रास दर भी इसी संस्तर की विशेषता है।
  10. दीर्घ उत्तरीय (क): वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें।
    वायुमंडल में स्थायी गैसें: नाइट्रोजन 78% (जीवों के लिए प्रोटीन का आधार, पर सीधे उपयोग नहीं होती), ऑक्सीजन 21% (श्वसन व दहन के लिए), आर्गन 0.93%, कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% (प्रकाश संश्लेषण व ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए)। परिवर्तनशील घटक: जलवाष्प (0–4%, ऊँचाई के साथ घटती है, मेघ-वर्षा का आधार) और धूलकण (समुद्री नमक, पराग, राख, कालिमा — मेघ-निर्माण के केंद्र)। जलवाष्प व CO₂ वायुमंडल को कंबल बनाते हैं — पृथ्वी का तापमान संतुलित रखते हैं।
  11. दीर्घ उत्तरीय (ख): वायुमंडल की संरचना का चित्र खींचे और व्याख्या करें।
    चित्र में पाँच परतें ऊँचाई के क्रम में दिखाएँ: क्षोभमंडल (0–13 किमी, तापमान घटता है, मौसम यहीं, क्षोभसीमा पर विषुवत् पर −80° सेल्सियस), समतापमंडल (13–50 किमी, ओज़ोन परत, पराबैंगनी किरणें सोखती है), मध्यमंडल (50–80 किमी, तापमान घटकर −100° सेल्सियस), आयनमंडल (80–400 किमी, आयन रेडियो तरंगें लौटाते हैं), बहिर्मंडल (400 किमी से ऊपर, विरल, अंतरिक्ष में विलीन)। भूगोलवेत्ता पहले दो संस्तरों पर अधिक ध्यान देते हैं।

बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A

बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।

  1. वायुमंडल की गैसों का प्रतिशत सहित संघटन लिखिए।
    नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, आर्गन 0.93%, कार्बन डाइऑक्साइड 0.03%, शेष जलवाष्प व धूलकण।
  2. क्षोभमंडल और समतापमंडल में दो अंतर लिखिए।
    क्षोभमंडल: 13 किमी, तापमान घटता है, मौसम यहीं। समतापमंडल: 50 किमी तक, ओज़ोन परत, तापमान बढ़ता है, मौसम नहीं।
  3. धूलकण मेघ-निर्माण में कैसे सहायक हैं?
    धूल व नमक के कण आर्द्रताग्राही केंद्र बनते हैं — जलवाष्प इनके चारों ओर संघनित होकर मेघ की बूँदें बनाती है।
  4. ओज़ोन परत का महत्त्व लिखिए।
    समतापमंडल की ओज़ोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोख लेती है और पृथ्वी के जीवों को उनसे बचाती है।
  5. आयनमंडल रेडियो संचार में कैसे सहायक है?
    आयनमंडल के विद्युत आवेशित कण पृथ्वी से भेजी गई रेडियो तरंगों को वापस पृथ्वी पर लौटा देते हैं, जिससे लंबी दूरी का रेडियो संचार संभव होता है।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

Recap — सार

संघटन: N₂ 78%, O₂ 21%, Ar 0.93%, CO₂ 0.03% + जलवाष्प + धूलकण। परतें: क्षोभ (13 किमी, मौसम) → समताप (50 किमी, ओज़ोन) → मध्य (80 किमी, −100°) → आयन (80–400 किमी, रेडियो) → बहिर् (विरल)। O₂ 120 किमी पर नगण्य; CO₂ = ग्रीनहाउस गैस।