Chapter 6: भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास
नदी, हिमानी, वायु, लहरें और भूमिगत जल — पाँच शिल्पकार, और हर एक की अपनी अलग मूर्तियाँ।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 6 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
नदी, पवन, हिमनद, समुद्री लहरें और भूमिगत जल — ये पाँच कारक अपरदन और निक्षेपण से अलग-अलग भू-आकृतियाँ बनाते हैं। नदी युवावस्था में घाटी काटती है, प्रौढ़ावस्था में मैदान बनाती है और वृद्धावस्था में डेल्टा छोड़ती है।
पवन रेगिस्तान में बालू के टीले (बालूका स्तूप) बनाती है, हिमनद U-आकार की घाटी और हिमोढ़ बनाता है, समुद्री लहरें पुलिन और भृगु बनाती हैं, और चूना-पत्थर क्षेत्रों में भूमिगत जल गुफाएँ और स्टैलेक्टाइट बनाता है।
मुख्य बिंदु
- नदी: V-घाटी, जलप्रपात, बाढ़ का मैदान, डेल्टा।
- पवन: बालूका स्तूप, छत्रक शिला, लोएस।
- हिमनद: U-घाटी, हिमोढ़, हिमगह्वर।
- समुद्र: पुलिन, भृगु, रोधिका; भूमिगत जल: गुफा, स्टैलेक्टाइट/स्टैलेग्माइट।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| नदी | V-घाटी → मैदान → डेल्टा |
| पवन | बालूका स्तूप, छत्रक शिला |
| हिमनद | U-घाटी, हिमोढ़ |
| समुद्र/भूमिगत जल | पुलिन; गुफाएँ |
अधोमुख (ऊर्ध्वाधर) कटाव तरुणावस्था में प्रमुख होता है — नदी तब गहरी घाटी काटती है। प्रौढ़ावस्था में पार्श्व कटाव बढ़ता है, वृद्धावस्था में समतल मैदान बनता है।
गॉर्ज और कैनियन में अंतर: गॉर्ज सँकरी गहरी घाटी है; कैनियन की विशेषता सीढ़ीनुमा खड़े ढाल हैं। प्रश्न में 'सीढ़ीनुमा खड़े ढाल' लिखा हो तो उत्तर कैनियन है।
लेपीज़ = चूना प्रदेश का अनियमित धरातल — तीखे कटक और खाँच। सर्क = हिमानी की गहरी, लंबी, विस्तृत गर्त जिसके शीर्ष की दीवार खड़ी और किनारे अवतल हों।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): अलग-अलग कारकों की भू-आकृतियों का सामान्य चित्रण — नदी, पवन और हिमनद। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: कारक और उनकी आकृतियाँ।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): नदी की तीन अवस्थाएँ और उनकी स्थलाकृतियाँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
प्रवाहित जल (नदी) की तरुणावस्था में अधोमुख कटाव प्रमुख होता है — V-आकार घाटी, गॉर्ज, कैनियन, जलप्रपात और क्षिप्रिकाएँ बनती हैं। प्रौढ़ावस्था में विसर्प, गोखुर झील, बाढ़-मैदान और तटबंध बनते हैं। वृद्धावस्था में चौड़े मैदान, डेल्टा और समप्राय मैदान (peneplain) बनते हैं।
भूमिगत जल चूना-प्रदेशों में घोल-क्रिया से स्थलरूप बनाता है: लेपीज़ (तीखे कटक-खाँच वाला अनियमित धरातल), घोलरंध्र, युवाला (कई घोलरंध्रों का मिलना), कंदराएँ (गुफाएँ), स्टैलेक्टाइट (छत से लटकता) और स्टैलेग्माइट (फर्श से उठता)। चूना प्रदेशों में धरातलीय प्रवाह कम और भौम जल प्रवाह अधिक होता है, क्योंकि जल दरारों से भीतर चला जाता है।
हिमानी की अपरदन-आकृतियाँ: सर्क (गहरी गर्त, खड़ी दीवार, अवतल किनारे), अरेत (तीखी कटक), हॉर्न (पिरामिड-शिखर), U-आकार घाटी, लटकती घाटी। निक्षेपण-आकृतियाँ: हिमोढ़ (पार्श्विक, मध्यस्थ, अंतस्थ), ड्रमलिन, एस्कर (लंबी सर्पिल कटक), केम।
वायु (मरुस्थल) की अपरदन-आकृतियाँ: मशरूम शैल, यारडंग, इन्सेलबर्ग, पवन-गर्त। निक्षेपण: बालू-टिब्बे — बरखान (अर्धचंद्राकार), सीफ (एक भुजा, लंबी), अनुदैर्ध्य, अनुप्रस्थ और परवलयिक (parabolic) टिब्बे। मरुस्थलों में पवन ही एकमात्र कारक नहीं है — कभी-कभी वर्षा भी अपरदन करती है, पर पवन प्रमुख है।
लहरें व धाराएँ तटीय स्थलरूप बनाती हैं: अपरदन से भृगु, तरंग-कर्तित चबूतरा, मेहराब और स्टैक; निक्षेपण से पुलिन (beach), रोधिका, स्पिट और लैगून। रासायनिक अपक्षय आर्द्र प्रदेशों में यांत्रिक से अधिक शक्तिशाली होता है (जल व तापमान की अधिकता से), शुष्क प्रदेशों में यांत्रिक (तापीय) अधिक।
- तरुणावस्था: अधोमुख कटाव; V-घाटी, गॉर्ज, कैनियन।
- कैनियन: सीढ़ीनुमा खड़े ढाल वाली गहरी घाटी।
- लेपीज़: तीखे कटक-खाँच वाला चूना-धरातल।
- सर्क: हिमानी की गहरी गर्त, खड़ी दीवार, अवतल किनारे।
- आर्द्र प्रदेश: रासायनिक अपक्षय > यांत्रिक अपक्षय।
Key Terms — मुख्य शब्द
- V-घाटी: नदी की युवावस्था में कटी गहरी घाटी।
- डेल्टा: नदी के मुहाने पर त्रिभुजाकार जमाव।
- U-घाटी: हिमनद द्वारा चौड़ी-गहरी घाटी।
- बालूका स्तूप: पवन से जमा बालू का टीला।
- स्टैलेक्टाइट: गुफा की छत से लटकता चूना-जमाव।
- गॉर्ज: सँकरी, गहरी नदी-घाटी — खड़े ढाल, पर सीढ़ीनुमा नहीं।
- कैनियन: सीढ़ीनुमा खड़े ढालों वाली गहरी, चौड़ी घाटी।
- युवाला: कई घोलरंध्रों के मिलने से बनी बड़ी विलयन-गर्त।
- बरखान: अर्धचंद्राकार बालू-टिब्बा — पवन की दिशा में भुजाएँ आगे।
- समप्राय मैदान: नदी-अपरदन के अंत में बना लगभग समतल मैदान (peneplain)।
Remember — याद रखें
- हर कारक की कम से कम दो आकृतियाँ याद करें — एक अपरदन की, एक निक्षेपण की।
- V-घाटी (नदी) और U-घाटी (हिमनद) का फर्क ज़रूर लिखें।
- डेल्टा निक्षेपण का, जलप्रपात अपरदन का उदाहरण है।
- कारक का नाम + आकृति + प्रक्रिया — तीनों साथ लिखें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: सभी आकृतियों को एक ही कारक से जोड़ देना। उत्तर में कारक के अनुसार वर्गीकरण करें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- नदी की तीन अवस्थाओं में क्या बनता है?
संकेत: घाटी, मैदान, डेल्टा के बारे में सोचें। - V-घाटी और U-घाटी में क्या अंतर है?
संकेत: नदी बनाम हिमनद के बारे में सोचें। - पवन की दो आकृतियाँ बताइए।
संकेत: बालूका स्तूप के बारे में सोचें। - डेल्टा कैसे बनता है?
संकेत: मुहाने पर जमाव के बारे में सोचें। - स्टैलेक्टाइट कहाँ बनता है?
संकेत: चूना-पत्थर गुफा के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- नदी की अवस्थाएँ क्या बनाती हैं?
युवावस्था में V-घाटी और जलप्रपात, प्रौढ़ावस्था में बाढ़ का मैदान, वृद्धावस्था में डेल्टा। - V-घाटी और U-घाटी में क्या अंतर है?
V-घाटी नदी की कटाव से संकरी-गहरी होती है; U-घाटी हिमनद से चौड़ी और सपाट तल वाली होती है। - पवन की प्रमुख आकृतियाँ कौन सी हैं?
अपरदन से छत्रक शिला, निक्षेपण से बालूका स्तूप और लोएस। - हिमनद क्या-क्या बनाता है?
U-घाटी, हिमगह्वर (cirque) और हिमोढ़ (moraine) — हिम द्वारा लाया जमाव। - भूमिगत जल की आकृतियाँ कौन सी हैं?
चूना-पत्थर में गुफाएँ, छत से लटकते स्टैलेक्टाइट और फर्श से उठते स्टैलेग्माइट।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): स्थलरूप विकास की किस अवस्था में अधोमुख कटाव प्रमुख होता है?
तरुणावस्था — विकल्प (क)। युवा नदी ऊर्ध्वाधर काटती है और गहरी घाटी बनाती है; प्रौढ़ावस्था में पार्श्व कटाव और वृद्धावस्था में निक्षेपण प्रमुख होता है। - बहुविकल्पीय (ii): सीढ़ीनुमा खड़े ढालों वाली गहरी घाटी किस नाम से जानी जाती है?
कैनियन — विकल्प (घ)। गॉर्ज सँकरी गहरी घाटी है पर सीढ़ीनुमा ढाल कैनियन की पहचान है; अंधी घाटी वह है जहाँ नदी भूमिगत हो जाए। - बहुविकल्पीय (iii): किन प्रदेशों में रासायनिक अपक्षय यांत्रिक से अधिक शक्तिशाली होता है?
आर्द्र प्रदेश — विकल्प (क)। आर्द्रता और तापमान की अधिकता से रासायनिक क्रियाएँ तेज़ होती हैं; शुष्क प्रदेशों में तापीय (यांत्रिक) अपक्षय प्रमुख है। - बहुविकल्पीय (iv): कौन-सा वक्तव्य 'लेपीज़' शब्द को परिभाषित करता है?
अनियमित धरातल जिनके तीखे कटक व खाँच हों — विकल्प (घ)। यही चूना-प्रदेश की घोल-क्रिया से बना धरातल है; उथले गर्त घोलरंध्र हैं, वृत्ताकार मुख-कीप आकार भी घोलरंध्र का लक्षण है। - बहुविकल्पीय (v): गहरे, लंबे व विस्तृत गर्त या बेसिन, जिनके शीर्ष की दीवार खड़ी व किनारे अवतल हों, क्या कहलाते हैं?
सर्क — विकल्प (क)। हिमानी की सर्क-गर्त की यही परिभाषा है; पार्श्विक हिमोढ़ निक्षेप है, घाटी हिमनद स्वयं हिमानी है, एस्कर निक्षेप-कटक है। - लघु उत्तरीय (क): चट्टानों में अध:कर्तित विसर्प और मैदानी भागों में जलोढ़ के सामान्य विसर्प क्या बताते हैं?
अध:कर्तित (incised) विसर्प बताते हैं कि नदी ने उत्थान के बाद अपनी पुरानी विसर्प-आकृति को गहराई में काटकर बनाए रखा है — यानी क्षेत्र ऊपर उठा है। मैदानी सामान्य विसर्प बताते हैं कि नदी मंद ढाल पर पार्श्व कटाव से बलखा रही है — प्रौढ़ावस्था का लक्षण है। - लघु उत्तरीय (ख): घाटी रंध्र अथवा युवाला का विकास कैसे होता है?
चूना-प्रदेश में जल दरारों से भीतर घुसकर चूना घोलता है — छोटे घोलरंध्र बनते हैं। कई घोलरंध्र आपस में मिलकर बड़े हो जाते हैं, तो युवाला (बड़ी विलयन-गर्त) बनता है। - लघु उत्तरीय (ग): चूनायुक्त चट्टानी प्रदेशों में धरातलीय जल प्रवाह की अपेक्षा भौम जल प्रवाह अधिक क्यों पाया जाता है?
क्योंकि चूना जल में घुलता है — दरारें और संधियाँ चौड़ी होकर भूमिगत मार्ग बन जाती हैं। वर्षा का जल धरातल पर बहने के बजाय इन्हीं दरारों से भीतर चला जाता है, इसलिए नदियाँ कम और भूमिगत प्रवाह अधिक होता है। - लघु उत्तरीय (घ): हिमनद घाटियों में कई रैखिक निक्षेपण स्थलरूप मिलते हैं — उनकी अवस्थिति व नाम बताएँ।
पार्श्विक हिमोढ़: घाटी की दोनों दीवारों के साथ। मध्यस्थ हिमोढ़: दो हिमानियों के मिलने पर बीच में। अंतस्थ हिमोढ़: हिमानी के अंतिम छोर पर अर्धचंद्राकार ढेर। एस्कर: घाटी-तल पर लंबी सर्पिल कटक (हिमानी के नीचे की नदी का निक्षेप)। - लघु उत्तरीय (ङ): मरुस्थली क्षेत्रों में पवन कैसे कार्य करती है? क्या यही एकमात्र कारक है?
पवन अपघर्षण (रेत से रगड़कर काटना) और अपवाहन (ढीला पदार्थ उड़ाकर ले जाना) से अपरदन करती है, और रेत जमा करके टिब्बे बनाती है। पवन प्रमुख है, पर एकमात्र नहीं — कभी-कभी होने वाली मूसलाधार वर्षा भी मरुस्थल में अपरदन करती है। - दीर्घ उत्तरीय (क): आर्द्र व शुष्क जलवायु प्रदेशों में प्रवाहित जल ही सबसे महत्त्वपूर्ण भू-आकृतिक कारक है — विस्तार से वर्णन करें।
आर्द्र प्रदेशों में वर्षा अधिक होती है — नदियाँ बारहमासी, तेज़ और अधिक अपरदन करती हैं; घाटियाँ, विसर्प, बाढ़-मैदान, डेल्टा बनते हैं। शुष्क प्रदेशों में भी, यद्यपि वर्षा कम है, जब वर्षा होती है तो मूसलाधार होती है — अचानक बाढ़ (flash flood) से गहरी नालियाँ, बजादा और प्लाया बनते हैं। दोनों ही जलवायु में जल का कार्य पवन, हिमानी या लहरों से अधिक व्यापक है, क्योंकि जल हर जगह, हर ढाल पर काम करता है। - दीर्घ उत्तरीय (ख): चूना चट्टानें आर्द्र व शुष्क जलवायु में भिन्न व्यवहार क्यों करती हैं? प्रमुख प्रक्रिया व परिणाम बताएँ।
आर्द्र जलवायु में जल अधिक और कार्बन डाइऑक्साइड से युक्त होता है — चूना घुलता है, इसलिए घोल-क्रिया (विलयन) प्रमुख है: लेपीज़, घोलरंध्र, युवाला, कंदराएँ, स्टैलेक्टाइट-स्टैलेग्माइट बनते हैं। शुष्क जलवायु में जल कम होता है, इसलिए घोल-क्रिया मंद पड़ जाती है और यांत्रिक अपक्षय (तापीय फैलाव-संकुचन) प्रमुख हो जाता है — चूना चट्टानें टूटकर ढेर बनाती हैं, पर कंदराएँ नहीं बनतीं। - दीर्घ उत्तरीय (ग): हिमनद ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों को निम्न पहाड़ियों व मैदानों में कैसे परिवर्तित करते हैं?
हिमानी अपघर्षण (तल पर रगड़) और उत्पाटन (चट्टान-खंड उखाड़ना) से ऊँचे भागों को घिसती है — सर्क, अरेत, हॉर्न बनते हैं और घाटियाँ U-आकार की हो जाती हैं। घिसा हुआ पदार्थ हिमोढ़, ड्रमलिन, एस्कर और आउटवॉश मैदान के रूप में नीचे जमा होता है। इस तरह ऊँचे पर्वत धीरे-धीरे निम्न पहाड़ियों और मैदानों में बदल जाते हैं — यही हिमानी का समतलन-कार्य है।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- नदी की तरुण, प्रौढ़ और वृद्ध अवस्था की एक-एक प्रमुख स्थलाकृति लिखिए।
तरुण: V-आकार घाटी/गॉर्ज। प्रौढ़: विसर्प/गोखुर झील। वृद्ध: डेल्टा/समप्राय मैदान। - गॉर्ज और कैनियन में अंतर लिखिए।
गॉर्ज: सँकरी, गहरी घाटी। कैनियन: चौड़ी, गहरी घाटी जिसके ढाल सीढ़ीनुमा खड़े हों। - स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट में अंतर लिखिए।
स्टैलेक्टाइट: कंदरा की छत से नीचे लटकता चूना-स्तंभ। स्टैलेग्माइट: फर्श से ऊपर उठता चूना-स्तंभ। दोनों के मिलने से स्तंभ बनता है। - सर्क, अरेत और हॉर्न — तीनों को एक वाक्य में परिभाषित कीजिए।
सर्क: हिमानी की गर्त। अरेत: दो सर्कों के बीच की तीखी कटक। हॉर्न: कई सर्कों से घिरा पिरामिड-शिखर। - बरखान और सीफ टिब्बों में अंतर लिखिए।
बरखान: अर्धचंद्राकार, भुजाएँ पवन की दिशा में आगे। सीफ: एक ही लंबी भुजा, पवन-दिशा में बदलाव से बनी।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
नदी: तरुण (अधोमुख कटाव, गॉर्ज/कैनियन) → प्रौढ़ (विसर्प, गोखुर) → वृद्ध (डेल्टा, समप्राय)। चूना: लेपीज़, घोलरंध्र, युवाला, कंदराएँ। हिमानी: सर्क, अरेत, हॉर्न, हिमोढ़, एस्कर। वायु: बरखान, सीफ, अनुदैर्ध्य/अनुप्रस्थ टिब्बे। आर्द्र में रासायनिक > यांत्रिक अपक्षय।

