Chapter 5: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
धरातल कभी शांत नहीं रहता — भीतर की शक्तियाँ उसे उठाती हैं, बाहर की शक्तियाँ उसे घिसकर समतल करती हैं।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 5 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
पृथ्वी की सतह कभी स्थिर नहीं रहती। अंतर्जात प्रक्रियाएँ (पृथ्वी के अंदर से — जैसे पटल विरूपण, ज्वालामुखी) सतह को ऊँचा-नीचा करती हैं, और बहिर्जात प्रक्रियाएँ (बाहर से — अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण) उसे समतल करने की कोशिश करती हैं। दोनों के बीच संतुलन से भू-आकृतियाँ बनती हैं।
अपक्षय (weathering) चट्टान का अपने स्थान पर टूटना है; अपरदन (erosion) टूटे पदार्थ का परिवहन है; निक्षेपण (deposition) उसका जमाव है। मिट्टी का निर्माण भी अपक्षय और जैविक क्रियाओं का लंबा परिणाम है।
मुख्य बिंदु
- अंतर्जात: पटल विरूपण (diastrophism), ज्वालामुखी, भूकंप।
- बहिर्जात: अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण, मृदा निर्माण।
- अपक्षय के प्रकार: भौतिक, रासायनिक, जैविक।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| अंतर्जात | अंदर की शक्ति — उत्थान, धँसाव |
| बहिर्जात | बाहर की शक्ति — घिसाव, जमाव |
| अपक्षय | स्थान पर टूटना, परिवहन नहीं |
| अपरदन | परिवहन सहित घिसाव |
तल संतुलन (gradation) = अपरदन के माध्यम से उच्चावच के अंतर का कम होना। अंतर्जनित बल भिन्नता बनाते हैं, बहिर्जनिक बल उसे सम करने में लगे रहते हैं — पर कभी पूरी तरह सफल नहीं होते।
अपक्षय (weathering) स्थैतिक है — चट्टान वहीं टूटती है, स्थानांतरण नहीं होता। अपरदन (erosion) में स्थानांतरण होता है। बृहत् संचलन में भी स्थानांतरण होता है, पर बिना किसी कारक (जल/वायु/हिम) के — केवल गुरुत्व से।
मृदा निर्माण के कारक: मूल पदार्थ, स्थलाकृति, जलवायु, जैविक क्रियाएँ, कालावधि। इनमें जलवायु और जैविक क्रियाएँ सक्रिय कारक हैं; मूल पदार्थ, स्थलाकृति और कालावधि निष्क्रिय।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): अपक्षय और अपरदन का सामान्य चित्रण — टूटी चट्टान, बहता पदार्थ और पवन। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: भू-आकृतिक प्रक्रियाओं की कड़ी।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): अंतर्जनित बनाम बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ और मृदा निर्माण के कारक — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ दो वर्गों में बँटती हैं। अंतर्जनित (भीतर की) प्रक्रियाएँ — पटल-विरूपण (diastrophism: पर्वत-निर्माण, महाद्वीप-निर्माण, भूकंप) और ज्वालामुखीयता — धरातल में भिन्नता पैदा करती हैं। बहिर्जनिक (बाहर की) प्रक्रियाएँ — अपक्षय, बृहत् संचलन, अपरदन और निक्षेपण — इस भिन्नता को घिसकर सम करने का प्रयास करती हैं; इन्हें ही अनुवर्ती/क्रमिक (gradational) प्रक्रियाएँ कहते हैं।
अपक्षय तीन प्रकार का है: रासायनिक (विलयन, कार्बोनेटीकरण, जलयोजन, ऑक्सीकरण, न्यूनीकरण — जल, ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में खनिजों का अपघटन), भौतिक/यांत्रिक (तापीय फैलाव-संकुचन, तुषार-क्रिया, भार-मुक्ति से अपशल्कन) और जैविक (पौधों की जड़ें, केंचुए, चूहे, मानव-क्रियाएँ)। कोई एक प्रक्रिया अकेले काम नहीं करती — प्रायः एक का योगदान अधिक होता है।
बृहत् संचलन में शैलों का मलवा गुरुत्व के सीधे प्रभाव से ढाल के अनुरूप खिसकता है — इसमें जल, वायु या हिम मलवा नहीं ढोते, मलवा स्वयं चलता है। गति के अनुसार: मंद (विसर्पण) और तीव्र (प्रवाही: मलवा अवधाव/अवलांच, स्खलन, पतन)। मलवा अवधाव तीव्र प्रवाही बृहत् संचलन है।
अपरदन व निक्षेपण के कारक: प्रवाहित जल, भूमिगत जल, हिमानी, वायु, लहरें व धाराएँ। प्रत्येक कारक अपरदन, परिवहन और निक्षेपण — तीनों कार्य करता है, पर भिन्न-भिन्न स्थलरूप बनाता है।
मृदा निर्माण: अपक्षय से बने पदार्थ पर जलवायु, जैविक क्रियाएँ, स्थलाकृति, मूल पदार्थ और कालावधि के प्रभाव से मृदा बनती है। अपक्षय के बिना मृदा नहीं बन सकती — इसलिए अपक्षय मृदा निर्माण की आवश्यक अनिवार्यता है। जलवायु मृदा की गहराई, ह्यूमस की मात्रा और रंग तय करती है; जैविक क्रियाएँ (केंचुए, बैक्टीरिया, पौधे) जैव पदार्थ व नाइट्रोजन जोड़ती हैं।
- अंतर्जनित: पटल-विरूपण, ज्वालामुखीयता — भिन्नता बनाते हैं।
- बहिर्जनिक: अपक्षय, बृहत् संचलन, अपरदन, निक्षेपण — सम करते हैं।
- तल संतुलन: अपरदन से उच्चावच-अंतर का कम होना।
- जलयोजन: खनिज जल सोखकर फूलते हैं — चीका मिट्टी पर सर्वाधिक प्रभाव।
- मृदा कारक: मूल पदार्थ, स्थलाकृति, जलवायु, जैविक क्रियाएँ, कालावधि।
Key Terms — मुख्य शब्द
- अंतर्जात प्रक्रिया: पृथ्वी के अंदर से चलने वाली शक्ति।
- बहिर्जात प्रक्रिया: वायुमंडल-जल-जीवों से चलने वाली शक्ति।
- अपक्षय: चट्टान का बिना हिले टूटना-गलना।
- अपरदन: पदार्थ का उठाकर ले जाया जाना।
- मृदा निर्माण: अपक्षय + जैविक पदार्थ से मिट्टी बनना।
- तल संतुलन: अपरदन द्वारा उच्चावच के अंतर का कम होना — क्रमिक (gradational) प्रक्रिया का लक्ष्य।
- अपशल्कन: भार हटने पर चट्टान की ऊपरी परत का चादर-जैसे उत्खंडित होना।
- ह्यूमस: मृत वनस्पति से बना सूक्ष्म विभाजित जैव पदार्थ — मृदा की उर्वरता का आधार।
- नाइट्रोजन निर्धारण: बैक्टीरिया द्वारा वायुमंडलीय नाइट्रोजन का पौधों के उपयोग योग्य रूप में बदलना।
- आवरण प्रस्तर: आधार शैल के ऊपर अपक्षयित पदार्थ की परत — मृदा का कच्चा माल।
Remember — याद रखें
- अपक्षय और अपरदन का फर्क (परिवहन है या नहीं) परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
- अंतर्जात = निर्माण, बहिर्जात = समतलन — यह मोटा नियम याद रखें।
- मिट्टी बनने में समय, जलवायु और जीव — तीनों का हाथ है।
- उदाहरणों के साथ उत्तर लिखें: नदी, पवन, हिमनद।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: अपक्षय और अपरदन को पर्याय मान लेना। उत्तर में परिवहन की कसौटी से फर्क स्पष्ट करें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- अंतर्जात और बहिर्जात में क्या अंतर है?
संकेत: शक्ति के स्रोत के बारे में सोचें। - अपक्षय किसे कहते हैं?
संकेत: स्थान पर टूटने के बारे में सोचें। - अपरदन अपक्षय से कैसे अलग है?
संकेत: परिवहन के बारे में सोचें। - अपक्षय के तीन प्रकार बताइए।
संकेत: भौतिक, रासायनिक, जैविक के बारे में सोचें। - मिट्टी कैसे बनती है?
संकेत: अपक्षय और जैविक पदार्थ के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- अंतर्जात प्रक्रियाएँ कौन सी हैं?
पृथ्वी के अंदर की शक्तियों से चलने वाली — पटल विरूपण, ज्वालामुखी, भूकंप। - बहिर्जात प्रक्रियाएँ कौन सी हैं?
बाहर की शक्तियों से चलने वाली — अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण। - अपक्षय और अपरदन में क्या अंतर है?
अपक्षय में चट्टान अपने स्थान पर टूटती है; अपरदन में टूटा पदार्थ नदी-पवन-हिम द्वारा ले जाया जाता है। - अपक्षय के प्रकार क्या हैं?
भौतिक (ताप-हिम से टूटना), रासायनिक (जल-वायु से गलना) और जैविक (जड़ों-जीवों से टूटना)। - मृदा निर्माण में क्या-क्या काम आता है?
अपक्षयित पदार्थ, जलवायु, जीव-जंतु, वनस्पति और लंबा समय।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): निम्नलिखित में से कौन-सी एक अनुक्रमिक (क्रमिक/gradational) प्रक्रिया है?
अपरदन — विकल्प (घ)। किताब में तल संतुलन की परिभाषा ही 'अपरदन के माध्यम से उच्चावच के अंतर का कम होना' है। ज्वालामुखीयता और पटल-विरूपण अंतर्जनित हैं, इसलिए क्रमिक नहीं। - बहुविकल्पीय (ii): जलयोजन प्रक्रिया किस पदार्थ को प्रभावित करती है?
चीका (क्ले) मिट्टी — विकल्प (ग)। चीका खनिज जल सोखकर फूलते हैं और आयतन बढ़ाते हैं — यही जलयोजन का प्रभाव है। क्वार्ट्ज प्रतिरोधी है, ग्रेनाइट पर जल-अपघटन (hydrolysis) अधिक प्रभावी है, और लवण विलयन/क्रिस्टलीकरण से प्रभावित होते हैं। - बहुविकल्पीय (iii): मलवा अवधाव को किस श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है?
तीव्र प्रवाही बृहत् संचलन — विकल्प (ख)। मलवा अवधाव में मलवा तेज़ गति से प्रवाह की तरह बहता है; यह मंद विसर्पण नहीं है और अवतलन/धसकन भी नहीं। - लघु उत्तरीय (क): अपक्षय पृथ्वी पर जैव विविधता के लिए उत्तरदायी है — कैसे?
अपक्षय से चट्टानें टूटकर मृदा बनती हैं; मृदा की गहराई और गुणों पर वनस्पति निर्भर करती है, और वनस्पति पर जीव-जंतु। बिना अपक्षय के न मृदा होती, न वन, न उन पर निर्भर जैव विविधता। - लघु उत्तरीय (ख): बृहत् संचलन जो वास्तविक, तीव्र एवं गोचर हैं, वे क्या हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
मलवा अवधाव (debris avalanche), भूस्खलन (landslide), शैल पतन (rock fall) और कीचड़ प्रवाह (mudflow) — ये तीव्र, दिखाई देने वाले और वास्तविक संचलन हैं, जिनमें मलवा तेज़ी से ढाल के अनुरूप खिसकता है। - लघु उत्तरीय (ग): विभिन्न गतिशील एवं शक्तिशाली बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक क्या हैं तथा वे क्या प्रधान कार्य संपन्न करते हैं?
प्रवाहित जल, भूमिगत जल, हिमानी, वायु, लहरें और धाराएँ। प्रधान कार्य तीन हैं: अपरदन (काटना), परिवहन (ढोना) और निक्षेपण (जमाना) — इन्हीं से स्थलरूप बनते और बदलते हैं। - लघु उत्तरीय (घ): क्या मृदा निर्माण में अपक्षय एक आवश्यक अनिवार्यता है?
हाँ। अपक्षय के बिना आधार शैल से ढीला पदार्थ (आवरण प्रस्तर) नहीं बनेगा, और बिना आवरण प्रस्तर के मृदा का कच्चा माल ही नहीं होगा। अपक्षय मृदा निर्माण की पहली और अनिवार्य सीढ़ी है। - दीर्घ उत्तरीय (क): 'हमारी पृथ्वी भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के दो विरोधात्मक वर्गों के खेल का मैदान है' — विवेचना कीजिए।
अंतर्जनित बल (पटल-विरूपण, ज्वालामुखीयता, भूकंप) धरातल को ऊपर उठाते हैं, मोड़ते हैं, तोड़ते हैं — भिन्नता पैदा करते हैं। बहिर्जनिक बल (अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण) ऊँचे भागों को घिसते हैं और निचले भागों को भरते हैं — भिन्नता मिटाने का प्रयास करते हैं। दोनों एक-दूसरे के विरोधी हैं, पर दोनों चलते रहते हैं, इसलिए भिन्नता बनी रहती है। पृथ्वी का धरातल इन्हीं दो विरोधी खेलों का परिणाम है — न कभी पूरी तरह समतल, न कभी केवल ऊँचा-नीचा। - दीर्घ उत्तरीय (ख): 'बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी अंतिम ऊर्जा सूर्य की गर्मी से प्राप्त करती हैं' — व्याख्या कीजिए।
बहिर्जनिक प्रक्रियाओं की ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है: सूर्य की गर्मी से वायु चलती है, जल का वाष्पीकरण व वर्षा-चक्र चलता है, तापमान-अंतर से अपक्षय होता है, और जल-चक्र से नदियाँ, हिमानी व लहरें चलती हैं। गुरुत्व इन प्रक्रियाओं को दिशा देता है (मलवा नीचे खिसकता है, जल नीचे बहता है), पर ऊर्जा का अंतिम स्रोत सौर विकिरण ही है — बिना सूर्य के न वायु, न वर्षा, न अपरदन। - दीर्घ उत्तरीय (ग): क्या भौतिक एवं रासायनिक अपक्षय प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं? सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
नहीं। भौतिक अपक्षय चट्टान को तोड़कर नई सतहें खोलता है, जिससे रासायनिक क्रिया के लिए क्षेत्र बढ़ता है; रासायनिक अपक्षय खनिजों को कमज़ोर करता है, जिससे भौतिक टूटन आसान हो जाती है। उदाहरण: तापीय फैलाव-संकुचन से दरारें पड़ती हैं, उनमें जल घुसकर रासायनिक अपघटन करता है; फिर अपघटित चट्टान और आसानी से टूटती है। दोनों एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं। - दीर्घ उत्तरीय (घ): मृदा निर्माण प्रक्रियाओं तथा कारकों में अंतर बताइए; जलवायु एवं जैविक क्रियाओं की भूमिका लिखिए।
प्रक्रियाएँ वे क्रियाएँ हैं जो मृदा बनाती हैं (अपक्षय, ह्यूमस बनना, निक्षालन, नाइट्रोजन निर्धारण); कारक वे दशाएँ हैं जो इन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं (मूल पदार्थ, स्थलाकृति, जलवायु, जैविक क्रियाएँ, कालावधि)। जलवायु: वर्षा व तापमान से अपक्षय की गति, ह्यूमस की मात्रा और मृदा का रंग तय होते हैं (ठंडी जलवायु में ह्यूमस जमा होता है, उष्ण-आर्द्र में कम रहता है)। जैविक क्रियाएँ: पौधे जैव पदार्थ देते हैं, बैक्टीरिया नाइट्रोजन निर्धारित करते हैं, केंचुए मृदा को उलट-पलटकर गठन सुधारते हैं।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- अंतर्जनित और बहिर्जनिक प्रक्रियाओं में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
अंतर्जनित: पृथ्वी के भीतर से — पटल-विरूपण, ज्वालामुखीयता; भिन्नता बनाते हैं। बहिर्जनिक: बाहर से — अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण; भिन्नता सम करते हैं। - अपक्षय और अपरदन में दो अंतर लिखिए।
अपक्षय स्थैतिक है (चट्टान वहीं टूटती है, स्थानांतरण नहीं); अपरदन में स्थानांतरण होता है। अपक्षय अपरदन की पूर्व-शर्त है — बिना टूटे पदार्थ के अपरदन का महत्त्व नहीं। - रासायनिक अपक्षय की चार प्रक्रियाओं के नाम लिखिए।
विलयन, कार्बोनेटीकरण, जलयोजन, ऑक्सीकरण (और न्यूनीकरण)। - मृदा निर्माण के पाँच कारकों के नाम और सक्रिय/निष्क्रिय वर्गीकरण लिखिए।
सक्रिय: जलवायु, जैविक क्रियाएँ। निष्क्रिय: मूल पदार्थ, स्थलाकृति, कालावधि। - बृहत् संचलन किसे कहते हैं? इसमें गुरुत्व की भूमिका लिखिए।
शैलों के मलवे का गुरुत्व के सीधे प्रभाव से ढाल के अनुरूप खिसकना। इसमें जल/वायु/हिम कारक नहीं होते — गुरुत्व ही चालक है; मंद (विसर्पण) से तीव्र (अवधाव, स्खलन) तक गति होती है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
दो विरोधी वर्ग: अंतर्जनित (भिन्नता बनाते हैं) बनाम बहिर्जनिक (सम करते हैं)। तल संतुलन = अपरदन से अंतर कम होना। अपक्षय: रासायनिक/भौतिक/जैविक; बृहत् संचलन = गुरुत्व से खिसकाव (मलवा अवधाव = तीव्र प्रवाही)। मृदा: अपक्षय अनिवार्य; कारक 5, सक्रिय 2 (जलवायु, जैविक)।

