Chapter 13: महासागरीय जल संचलन
समुद्र का जल कभी स्थिर नहीं रहता — लहरें हिलती हैं, ज्वार उठता-गिरता है, धाराएँ महाद्वीपों के किनारे बहती हैं।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
महासागरीय जल संचलन — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 13 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
महासागरीय जल कभी स्थिर नहीं रहता — वह लहरों, ज्वार-भाटा और धाराओं से गति करता है। लहरें पवन से बनती हैं और सिर्फ सतह को हिलाती हैं; ज्वार-भाटा चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्व से दिन में दो बार आता है।
महासागरीय धाराएँ बड़े पैमाने पर जल की धाराएँ हैं — गर्म धाराएँ भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं। गल्फ स्ट्रीम (गर्म) पश्चिमी यूरोप को सर्दियों में भी अपेक्षाकृत गर्म रखती है; लैब्राडोर (ठंडी) उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट को ठंडा करती है।
मुख्य बिंदु
- लहर: पवन से सतही गति; ज्वार: गुरुत्व से दैनिक उतार-चढ़ाव।
- गर्म धारा: भूमध्य रेखा → ध्रुव; ठंडी धारा: ध्रुव → भूमध्य रेखा।
- धाराएँ जलवायु, मछली पालन और नौवहन को प्रभावित करती हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| लहर | पवन से सतही दोलन |
| ज्वार-भाटा | चंद्र-सूर्य गुरुत्व से |
| गर्म धारा | गल्फ स्ट्रीम — यूरोप को गर्म |
| ठंडी धारा | लैब्राडोर — तट को ठंडा |
महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे गति ज्वार (tide) से संबंधित है — तरंगें क्षैतिज ऊर्जा ले जाती हैं, धाराएँ क्षैतिज बहाव हैं; ऊर्ध्वाधर गति ज्वार की है।
उपभू (perigee) = पृथ्वी-चंद्रमा की न्यूनतम दूरी; अपभू (apogee) = अधिकतम दूरी। उपसौर (perihelion) = पृथ्वी-सूर्य की न्यूनतम दूरी (जनवरी में) — उपभू और उपसौर को मत मिलाइए।
वृहत् ज्वार (spring tide) तब आता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण लगाते हैं — अमावस्या और पूर्णिमा को।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): महासागरीय संचलन का सामान्य चित्रण — गर्म और ठंडी धाराएँ, लहरें। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: महासागरीय संचलन के प्रकार।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): वृहत् ज्वार व लघु ज्वार की स्थितियाँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
महासागरीय जल की गतियाँ तीन प्रकार की हैं: तरंगें, ज्वार-भाटा और धाराएँ। तरंगें पवन की ऊर्जा से बनती हैं — जल के कण वृत्ताकार पथ पर घूमते हैं, जल आगे नहीं बढ़ता, ऊर्जा आगे बढ़ती है। महासागरीय तरंगें अपनी ऊर्जा पवन से प्राप्त करती हैं।
ज्वार-भाटा समुद्र के जल का नियतकालिक उठना-गिरना है, जो चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न होता है। चंद्रमा के सामने वाले भाग पर जल खिंचकर उठता है (ज्वार), विपरीत भाग पर भी अपकेंद्रीय बल से ज्वार उठता है — इसलिए दिन में दो बार ज्वार आता है। वृहत् ज्वार (spring): जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में हों (अमावस्या, पूर्णिमा) — दोनों का गुरुत्व एक ही दिशा में लगता है, ज्वार सबसे ऊँचा। लघु ज्वार (neap): जब सूर्य-चंद्रमा समकोण पर हों (अष्टमी) — गुरुत्व विपरीत दिशा में, ज्वार सबसे नीचा।
पृथ्वी-चंद्रमा की दूरी बदलती रहती है: न्यूनतम दूरी उपभू (perigee), अधिकतम अपभू (apogee)। पृथ्वी-सूर्य की दूरी भी बदलती है: न्यूनतम उपसौर (perihelion — जनवरी में), अधिकतम अपसौर (aphelion — जुलाई में)। उपसौर जनवरी में होने से उत्तरी गोलार्ध की शीत ऋतु थोड़ी मृदु हो जाती है।
ज्वार-भाटा नौसंचालन से गहराई से जुड़ा है: ज्वार के समय जल गहरा होता है, इसलिए बड़े जहाज़ बंदरगाहों में आ-जा सकते हैं; भाटा के समय जल उथला हो जाता है और जहाज़ों को रुकना पड़ता है। ज्वारीय ऊर्जा से विद्युत भी बनाई जाती है।
महासागरीय धाराएँ गर्म व ठंडी दो तरह की होती हैं। उत्पत्ति के कारण: पवनें (मुख्य), तापमान-अंतर, लवणता-अंतर, पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस — उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर, दक्षिणी में बाईं ओर मोड़), महाद्वीपों की आकृति। धाराएँ तापमान को प्रभावित करती हैं: गर्म धाराएँ तटीय क्षेत्रों को गर्म व आर्द्र बनाती हैं, ठंडी धाराएँ ठंडा व शुष्क। उत्तर-पश्चिम यूरोप का तट गर्म उत्तरी अटलांटिक धारा (गल्फ स्ट्रीम) के कारण शीत ऋतु में भी मृदु रहता है — वरना उस अक्षांश पर अत्यधिक ठंड पड़ती। जहाँ गर्म व ठंडी धाराएँ मिलती हैं, वहाँ प्लैंकटन बढ़ता है और विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र बनते हैं।
- ऊपर-नीचे गति: ज्वार; ऊर्जा: तरंगें पवन से।
- वृहत् ज्वार: सूर्य-चंद्रमा एक ही दिशा में (अमावस्या/पूर्णिमा)।
- उपभू: चंद्रमा की न्यूनतम दूरी; उपसौर: सूर्य की न्यूनतम दूरी (जनवरी)।
- ज्वार → नौसंचालन: गहरा जल, जहाज़ों का आना-जाना।
- उत्तर-पश्चिम यूरोप: गर्म धारा से मृदु शीत ऋतु।
Key Terms — मुख्य शब्द
- लहर: पवन से समुद्र सतह का दोलन।
- ज्वार: गुरुत्व से समुद्र तल का दैनिक उतार-चढ़ाव।
- महासागरीय धारा: एक दिशा में बहने वाली जल की बड़ी धारा।
- गल्फ स्ट्रीम: अटलांटिक की गर्म धारा।
- अपवेलिंग: गहरे ठंडे जल का सतह पर आना; मछली के लिए अच्छा।
- वृहत् ज्वार: सूर्य-चंद्रमा के एक सीध में होने पर सबसे ऊँचा ज्वार (अमावस्या/पूर्णिमा)।
- लघु ज्वार: सूर्य-चंद्रमा के समकोण पर होने पर सबसे नीचा ज्वार (अष्टमी)।
- उपभू: पृथ्वी-चंद्रमा की न्यूनतम दूरी की स्थिति।
- उपसौर: पृथ्वी-सूर्य की न्यूनतम दूरी की स्थिति (जनवरी में)।
- मत्स्य क्षेत्र: गर्म व ठंडी धाराओं के मिलने का क्षेत्र — प्लैंकटन से मछलियों की भरमार।
Remember — याद रखें
- लहर और धारा का फर्क लिखें — लहर दोलन है, धारा बहाव है।
- गर्म/ठंडी धारा की दिशा (कहाँ से कहाँ) सही लिखें।
- ज्वार का कारण चंद्रमा का गुरुत्व है, पवन नहीं।
- गल्फ स्ट्रीम का यूरोप पर प्रभाव उदाहरण के साथ लिखें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: लहर को ही धारा मान लेना। उत्तर में लहर = दोलन, धारा = बहाव, यह फर्क स्पष्ट करें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- लहर कैसे बनती है?
संकेत: पवन के बारे में सोचें। - ज्वार-भाटा का कारण क्या है?
संकेत: चंद्रमा के गुरुत्व के बारे में सोचें। - गर्म धारा किस दिशा में बहती है?
संकेत: भूमध्य रेखा से ध्रुव के बारे में सोचें। - गल्फ स्ट्रीम का क्या प्रभाव है?
संकेत: पश्चिमी यूरोप के बारे में सोचें। - धाराएँ मछली पालन को कैसे प्रभावित करती हैं?
संकेत: अपवेलिंग के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- लहर और धारा में क्या अंतर है?
लहर पवन से सतह का ऊपर-नीचे दोलन है, जिसमें जल आगे नहीं बहता; धारा जल का एक दिशा में वास्तविक बहाव है। - ज्वार-भाटा क्यों आता है?
चंद्रमा (और कुछ हद तक सूर्य) के गुरुत्व से समुद्र का जल खिंचता है, जिससे दिन में लगभग दो बार उतार-चढ़ाव आता है। - गर्म और ठंडी धारा में क्या अंतर है?
गर्म धारा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बहती है; ठंडी धारा ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर। - गल्फ स्ट्रीम का प्रभाव क्या है?
यह गर्म जल पश्चिमी यूरोप तक ले जाती है, जिससे वहाँ सर्दियाँ अपेक्षाकृत नरम रहती हैं। - धाराओं का आर्थिक महत्त्व क्या है?
वे तटीय जलवायु, मछली के क्षेत्र (अपवेलिंग) और जहाज़ों के मार्ग को प्रभावित करती हैं।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे गति किससे संबंधित है?
ज्वार — विकल्प (क)। तरंगें ऊर्जा का क्षैतिज स्थानांतरण हैं, धाराएँ क्षैतिज बहाव हैं; जल का ऊर्ध्वाधर उठना-गिरना ज्वार है। - बहुविकल्पीय (ii): वृहत् ज्वार आने का क्या कारण है?
सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल — विकल्प (क)। अमावस्या व पूर्णिमा को दोनों एक सीध में होते हैं, इसलिए ज्वार सबसे ऊँचा उठता है। - बहुविकल्पीय (iii): पृथ्वी तथा चंद्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?
उपभू — विकल्प (ग)। उपभू (perigee) न्यूनतम दूरी है, अपभू (apogee) अधिकतम; उपसौर/अपसौर सूर्य से दूरी के लिए हैं। - बहुविकल्पीय (iv): पृथ्वी उपसौर की स्थिति कब होती है?
जनवरी — विकल्प (घ)। 3 जनवरी के आसपास पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है; जुलाई में अपसौर (सबसे दूर) होता है। - लघु उत्तरीय (क): तरंगें क्या हैं?
पवन की ऊर्जा से महासागरीय सतह पर उत्पन्न दोलन। जल के कण वृत्ताकार पथ पर घूमते हैं — जल आगे नहीं बढ़ता, केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है। तट के निकट पहुँचकर तरंगें टूटती हैं। - लघु उत्तरीय (ख): महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?
पवन से। पवन सतह के जल को धकेलती है और घर्षण से ऊर्जा देती है — पवन जितनी तेज़ और जितनी देर चलेगी, तरंगें उतनी बड़ी होंगी। - लघु उत्तरीय (ग): ज्वार-भाटा क्या है?
समुद्र के जल का नियतकालिक उठना (ज्वार) और गिरना (भाटा) — चंद्रमा व सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न। सामान्यतः दिन में दो बार ज्वार और दो बार भाटा आता है। - लघु उत्तरीय (घ): ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण (मुख्य) और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण, साथ ही पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली का अपकेंद्रीय बल। चंद्रमा के सामने वाले भाग पर जल खिंचता है और विपरीत भाग पर भी ज्वार उठता है। - लघु उत्तरीय (ङ): ज्वार-भाटा नौसंचालन से कैसे संबंधित है?
ज्वार के समय जल गहरा होता है — बड़े जहाज़ बंदरगाहों में प्रवेश कर सकते हैं और नदियों में ऊपर तक जा सकते हैं। भाटा के समय जल उथला हो जाता है, जहाज़ों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसलिए बंदरगाहों के समय-सारणी ज्वार के अनुसार बनते हैं। - दीर्घ उत्तरीय (क): जल धाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं? उत्तर-पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को ये किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
गर्म धाराएँ अपने साथ उष्ण कटिबंध की गर्मी लाती हैं — तटीय क्षेत्र गर्म व आर्द्र हो जाते हैं; ठंडी धाराएँ ठंडक व शुष्कता लाती हैं। उत्तर-पश्चिम यूरोप (ब्रिटेन, नॉर्वे) का तट उसी अक्षांश के अन्य क्षेत्रों (जैसे कनाडा के पूर्वी तट) से कहीं मृदु है — क्योंकि गर्म उत्तरी अटलांटिक धारा (गल्फ स्ट्रीम) वहाँ गर्म जल लाती है। शीत ऋतु में भी वहाँ तापमान हिमांक से ऊपर रहता है और बंदरगाह खुले रहते हैं; पछुआ पवनें इस गर्मी को भीतर तक पहुँचाती हैं। - दीर्घ उत्तरीय (ख): जल धाराएँ कैसे उत्पन्न होती हैं?
मुख्य कारण पवनें हैं — व्यापारिक व पछुआ पवनें सतह के जल को धकेलकर धाराएँ बनाती हैं। अन्य कारण: तापमान-अंतर (गर्म जल हल्का, ऊपर; ठंडा जल भारी, नीचे — संवहन), लवणता-अंतर (अधिक लवणीय जल भारी, नीचे डूबता है), पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस बल से धाराएँ मुड़ती हैं — उत्तर में दाईं, दक्षिण में बाईं ओर), और महाद्वीपों की आकृति (धाराओं को मोड़ती है)। इन्हीं से महासागरों में वृत्ताकार धारा-प्रणालियाँ (gyres) बनती हैं।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- तरंग, ज्वार और धारा में एक-एक अंतर लिखिए।
तरंग: ऊर्जा का दोलन, जल आगे नहीं बढ़ता। ज्वार: ऊर्ध्वाधर उठना-गिरना (गुरुत्व से)। धारा: जल का क्षैतिज बहाव (पवन व घनत्व-अंतर से)। - वृहत् और लघु ज्वार में अंतर लिखिए।
वृहत्: सूर्य-चंद्रमा एक सीध में (अमावस्या/पूर्णिमा), ज्वार सबसे ऊँचा। लघु: सूर्य-चंद्रमा समकोण पर (अष्टमी), ज्वार सबसे नीचा। - उपभू, अपभू, उपसौर, अपसौर — चारों को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए।
उपभू: चंद्रमा की न्यूनतम दूरी। अपभू: चंद्रमा की अधिकतम दूरी। उपसौर: सूर्य की न्यूनतम दूरी (जनवरी)। अपसौर: सूर्य की अधिकतम दूरी (जुलाई)। - ज्वार-भाटा से नौसंचालन को क्या लाभ है?
ज्वार के समय गहरा जल बड़े जहाज़ों को बंदरगाह में प्रवेश देता है; भाटा के समय जहाज़ रुकते हैं — इसलिए समय-सारणी ज्वार के अनुसार बनती है। - गर्म और ठंडी धाराओं का तटीय जलवायु पर प्रभाव लिखिए।
गर्म धारा: तट गर्म व आर्द्र। ठंडी धारा: तट ठंडा व शुष्क, कोहरा अधिक। मिलने के स्थान पर प्रमुख मत्स्य क्षेत्र बनते हैं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
तरंग = पवन-ऊर्जा का दोलन; ज्वार = ऊर्ध्वाधर गति (चंद्रमा-सूर्य गुरुत्व); धारा = क्षैतिज बहाव। वृहत् ज्वार: एक ही दिशा में गुरुत्व (अमावस्या/पूर्णिमा)। उपभू = चंद्रमा निकट; उपसौर = सूर्य निकट (जनवरी)। गर्म धारा से उत्तर-पश्चिम यूरोप मृदु।

