Chapter 14: जैव-विविधता एवं संरक्षण
पृथ्वी पर जीवन की विविधता ही जीवन का आधार है — और आज वही विविधता सबसे अधिक खतरे में है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
जैव-विविधता एवं संरक्षण — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 14 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
जैव-विविधता का अर्थ है — जीवों की विविधता: आनुवंशिक विविधता (एक प्रजाति के अंदर), प्रजातीय विविधता (अलग-अलग प्रजातियाँ) और पारिस्थितिक विविधता (अलग-अलग आवास)। भारत जैसे देशों में यह विविधता बहुत अधिक है, इसलिए उन्हें महाविविधता (megadiversity) देश कहते हैं।
जैव-विविधता पर खतरा है — आवास नष्ट होना, शिकार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन। संरक्षण दो तरह का है: स्व-स्थाने (in-situ: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, बायोस्फीयर रिज़र्व) और बाह्य-स्थाने (ex-situ: चिड़ियाघर, बीज बैंक, वनस्पति उद्यान)। हॉटस्पॉट वे क्षेत्र हैं जहाँ विविधता अधिक पर खतरा भी अधिक है।
मुख्य बिंदु
- तीन स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारिस्थितिक।
- खतरे: आवास नष्ट होना, शिकार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन।
- स्व-स्थाने: उद्यान, अभयारण्य; बाह्य-स्थाने: चिड़ियाघर, बीज बैंक।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| आनुवंशिक | एक प्रजाति के अंदर विविधता |
| प्रजातीय | अलग-अलग प्रजातियों की संख्या |
| स्व-स्थाने | प्राकृतिक आवास में संरक्षण |
| बाह्य-स्थाने | आवास से बाहर संरक्षण |
जैव-विविधता का संरक्षण सभी जीवधारियों के लिए महत्त्वपूर्ण है — केवल जंतुओं या केवल पौधों के लिए नहीं; पारितंत्र में सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
असुरक्षित (vulnerable) प्रजातियाँ वे नहीं हैं जो दूसरों को असुरक्षा दें या जिनकी संख्या अत्यधिक हो — वे हैं जिनके लुप्त होने का खतरा है।
पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit, 1992) ब्राज़ील (रियो डी जेनेरो) में हुआ था। भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 में पारित हुआ।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): जैव-विविधता का सामान्य चित्रण — वन में बाघ, हाथी, पक्षी और पेड़। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: जैव-विविधता और संरक्षण।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): जैव-विविधता के तीन स्तर और संरक्षण के उपाय — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
जैव-विविधता (biodiversity) पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता है — इसके तीन स्तर हैं: आनुवंशिक विविधता (एक प्रजाति के भीतर जीनों की भिन्नता), प्रजातीय विविधता (प्रजातियों की संख्या व प्रकार) और पारितंत्रीय विविधता (आवासों व पारितंत्रों की विविधता)। जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र हैं — वहाँ वर्ष भर गर्मी व वर्षा से जीवन फलता-फूलता है।
प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका: पारितंत्र की स्थिरता, पोषक तत्त्वों का चक्र, परागण, जल-शुद्धिकरण, मृदा-निर्माण, जलवायु-नियंत्रण — सब जैव-विविधता पर निर्भर हैं। विविधता अधिक होने पर पारितंत्र किसी एक प्रजाति के नष्ट होने से भी चलता रहता है; विविधता कम होने पर पारितंत्र भंगुर हो जाता है।
जैव-विविधता के ह्रास के कारण: आवास का नाश (वन-कटाई, नगरीकरण, कृषि-विस्तार), विदेशज प्रजातियों का आगमन (जो स्थानीय प्रजातियों को दबा देती हैं), प्रदूषण, अतिदोहन (शिकार, अत्यधिक मछली पकड़ना), जलवायु परिवर्तन। हवाई द्वीप का उदाहरण: विदेशज प्रजातियों और भूमि-विकास से वहाँ की विशेष प्रजातियाँ असुरक्षित हो गई हैं।
महा विविधता केंद्र (megadiversity centres): उष्ण कटिबंधीय देश जिनमें संसार की सर्वाधिक प्रजातीय विविधता पाई जाती है — 12 देश: मैक्सिको, कोलंबिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राज़ील, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया। हॉट-स्पॉट वे क्षेत्र हैं जो अधिक संकट में हैं — इन्हें अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने वनस्पति के आधार पर निर्धारित किया है; मेडागास्कर के 85% पौधे व जीव संसार में अन्यत्र कहीं नहीं पाए जाते।
संरक्षण के उपाय: प्रत्येक देश अपने वन्य जीवों के आवास चिह्नित कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे; प्रजातियों के पलने-बढ़ने के स्थान सुरक्षित व संरक्षित हों; वन्य जीवों व पौधों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप हो। भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के अंतर्गत नेशनल पार्क, पशुविहार (अभयारण्य) और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र बनाए गए — ये मनोरंजन, पालतू जीवों या शिकार के लिए नहीं, संरक्षण के लिए हैं।
- तीन स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय।
- सबसे समृद्ध क्षेत्र: उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र।
- महा विविधता केंद्र: 12 देश (भारत सहित)।
- हॉट-स्पॉट: IUCN द्वारा वनस्पति के आधार पर निर्धारित।
- पृथ्वी सम्मेलन: 1992, ब्राज़ील (रियो)। भारत: वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972।
Key Terms — मुख्य शब्द
- जैव-विविधता: जीवों की आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिक विविधता।
- हॉटस्पॉट: अधिक विविधता + अधिक खतरे वाला क्षेत्र।
- स्व-स्थाने संरक्षण: प्राकृतिक आवास में ही संरक्षण।
- बाह्य-स्थाने संरक्षण: आवास से बाहर — चिड़ियाघर, बीज बैंक।
- महाविविधता देश: बहुत अधिक जैव-विविधता वाला देश।
- आनुवंशिक विविधता: एक प्रजाति के भीतर जीनों की भिन्नता — अनुकूलन की क्षमता का आधार।
- विदेशज प्रजाति: किसी क्षेत्र में बाहर से लाई गई प्रजाति — स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा।
- हॉट-स्पॉट: अधिक संकटग्रस्त जैव-विविधता क्षेत्र — IUCN द्वारा निर्धारित।
- जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र: संरक्षण, अनुसंधान और सतत उपयोग के लिए घोषित बड़ा क्षेत्र।
- IUCN: अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ — संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची बनाता है।
Remember — याद रखें
- तीनों स्तरों के नाम और अर्थ अलग-अलग लिखें।
- स्व-स्थाने/बाह्य-स्थाने के उदाहरण सही जगह लिखें।
- खतरे के कारणों में आवास नष्ट होना सबसे पहला लिखें।
- भारत को महाविविधता देश कहने का कारण बताएँ।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: स्व-स्थाने और बाह्य-स्थाने के उदाहरण उलट देना। उत्तर में 'स्थाने = उसी स्थान पर' का नियम याद रखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- जैव-विविधता के तीन स्तर कौन से हैं?
संकेत: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारिस्थितिक के बारे में सोचें। - जैव-विविधता पर सबसे बड़ा खतरा क्या है?
संकेत: आवास नष्ट होने के बारे में सोचें। - हॉटस्पॉट किसे कहते हैं?
संकेत: अधिक विविधता + खतरे के बारे में सोचें। - स्व-स्थाने संरक्षण के उदाहरण दीजिए।
संकेत: उद्यान और अभयारण्य के बारे में सोचें। - बाह्य-स्थाने संरक्षण क्या है?
संकेत: चिड़ियाघर और बीज बैंक के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- जैव-विविधता क्या है?
जीवों की विविधता — आनुवंशिक (एक प्रजाति के अंदर), प्रजातीय (अलग प्रजातियाँ) और पारिस्थितिक (अलग आवास) — तीन स्तरों पर। - जैव-विविधता क्यों घट रही है?
आवास नष्ट होना, शिकार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन इसके मुख्य कारण हैं। - हॉटस्पॉट क्या है?
वह क्षेत्र जहाँ स्थानिक प्रजातियाँ बहुत हैं पर खतरा भी बहुत अधिक है, इसलिए संरक्षण की प्राथमिकता वहाँ है। - स्व-स्थाने संरक्षण क्या है?
जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही बचाना — जैसे राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिज़र्व। - बाह्य-स्थाने संरक्षण क्या है?
जीवों को आवास से बाहर बचाना — जैसे चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान और बीज बैंक।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): जैव-विविधता का संरक्षण किसके लिए महत्त्वपूर्ण है?
सभी जीवधारी — विकल्प (घ)। पारितंत्र में पौधे, जंतु और सूक्ष्म जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं; किसी एक के बिना तंत्र नहीं चलता। - बहुविकल्पीय (ii): असुरक्षित प्रजातियाँ कौन-सी हैं?
जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है — विकल्प (घ)। 'असुरक्षित' का अर्थ दूसरों को असुरक्षा देना नहीं है, और न ही संख्या का अधिक होना — यह लुप्तप्राय होने का खतरा है। - बहुविकल्पीय (iii): नेशनल पार्क और पशुविहार किस उद्देश्य से बनाए गए हैं?
संरक्षण के लिए — विकल्प (घ)। मनोरंजन, पालतू जीवों या शिकार के लिए नहीं — इनका उद्देश्य वन्य जीवों व उनके आवासों की रक्षा है। - बहुविकल्पीय (iv): जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र कौन-से हैं?
उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र — विकल्प (क)। वर्ष भर गर्मी व वर्षा से यहाँ जीवन सबसे अधिक फलता-फूलता है; शीतोष्ण, ध्रुवीय व महासागरीय क्षेत्रों में विविधता कम है। - बहुविकल्पीय (v): किस देश में पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) हुआ था?
ब्राज़ील — विकल्प (ख)। 1992 में रियो डी जेनेरो में हुआ सम्मेलन, जिसमें जैव-विविधता सम्मेलन (CBD) पर हस्ताक्षर हुए। - लघु उत्तरीय (क): जैव-विविधता क्या है?
पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों — पौधों, जंतुओं, सूक्ष्म जीवों — की विविधता। इसमें जीनों, प्रजातियों और पारितंत्रों — तीनों स्तरों की विविधता आती है। - लघु उत्तरीय (ख): जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?
आनुवंशिक विविधता (एक प्रजाति के भीतर जीन-भिन्नता), प्रजातीय विविधता (प्रजातियों की संख्या व प्रकार), पारितंत्रीय विविधता (आवासों व पारितंत्रों की विविधता)। - लघु उत्तरीय (ग): हॉट-स्पॉट से आप क्या समझते हैं?
वे क्षेत्र जो जैव-विविधता से समृद्ध हैं पर अधिक संकट में हैं — IUCN ने इन्हें वनस्पति के आधार पर निर्धारित किया है। इनमें संसाधन उपलब्ध कराकर संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। - लघु उत्तरीय (घ): मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्त्व का संक्षेप में वर्णन करें।
जंतु परागण करते हैं, बीज फैलाते हैं, कीट-नियंत्रण करते हैं, मृदा को उर्वर बनाते हैं, भोजन (दूध, मांस, मछली) देते हैं और पारितंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं — मानव-जीवन इनके बिना नहीं चल सकता। - लघु उत्तरीय (ङ): विदेशज प्रजातियों से आप क्या समझते हैं?
वे प्रजातियाँ जो किसी क्षेत्र में बाहर से (मानव द्वारा जानबूझकर या अनजाने में) लाई जाती हैं। स्थानीय शत्रुओं के अभाव में वे तेजी से फैलती हैं और स्थानीय प्रजातियों का भोजन, आवास छीनकर उन्हें संकट में डाल देती हैं। - दीर्घ उत्तरीय (क): प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें।
जैव-विविधता पारितंत्र की स्थिरता का आधार है: विविध पौधे प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन व भोजन देते हैं; विविध जीव परागण, बीज-वितरण, अपघटन और पोषक-चक्र चलाते हैं; मृदा-जीव मृदा बनाते हैं; वन जल-चक्र व जलवायु नियंत्रित करते हैं। विविधता अधिक होने पर किसी एक प्रजाति के नष्ट होने से भी तंत्र चलता रहता है — यही प्रकृति की सुरक्षा-जाल (safety net) है। - दीर्घ उत्तरीय (ख): जैव-विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक और रोकने के उपाय बताएँ।
कारक: आवास का नाश (वन-कटाई, नगरीकरण, बाँध, खनन), विदेशज प्रजातियाँ, प्रदूषण (वायु, जल, मृदा), अतिदोहन (शिकार, अत्यधिक मत्स्यन), जलवायु परिवर्तन। उपाय: आवासों की सुरक्षा (नेशनल पार्क, अभयारण्य, जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र), वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम जैसे कानूनों का पालन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का नियमन (CITES), विदेशज प्रजातियों पर नियंत्रण, जन-जागरूकता और सतत उपयोग। भारत में 1972 का अधिनियम इसी दिशा में बड़ा कदम था।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- जैव-विविधता के तीन स्तर लिखिए।
आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय। - महा विविधता केंद्र किसे कहते हैं? दो देशों के नाम लिखिए।
उष्ण कटिबंधीय देश जिनमें सर्वाधिक प्रजातीय विविधता हो (12 देश)। जैसे भारत, ब्राज़ील (या मैक्सिको, इंडोनेशिया)। - हॉट-स्पॉट की परिभाषा और निर्धारण का आधार लिखिए।
अधिक संकटग्रस्त समृद्ध क्षेत्र; IUCN द्वारा वनस्पति के आधार पर निर्धारित। - नेशनल पार्क और पशुविहार में अंतर लिखिए।
नेशनल पार्क: कड़े नियम, मानव-गतिविधि लगभग वर्जित, पूरे पारितंत्र की रक्षा। पशुविहार: अपेक्षाकृत नरम नियम, कुछ मानव-गतिविधियाँ (जैसे चराई) अनुमत हो सकती हैं। दोनों का उद्देश्य संरक्षण है। - विदेशज प्रजातियाँ स्थानीय जैव-विविधता के लिए क्यों खतरनाक हैं?
उनके प्राकृतिक शत्रु नहीं होते, वे तेजी से फैलती हैं और स्थानीय प्रजातियों का भोजन व आवास छीन लेती हैं — जैसे हवाई द्वीप में हुआ।
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तीन स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय। समृद्ध: उष्ण कटिबंध। महा विविधता: 12 देश (भारत सहित)। हॉट-स्पॉट: IUCN, वनस्पति-आधारित। ह्रास के कारण: आवास-नाश, विदेशज प्रजातियाँ, प्रदूषण, अतिदोहन, जलवायु परिवर्तन। संरक्षण: पार्क, अभयारण्य, जीवमंडल क्षेत्र; भारत अधिनियम 1972; पृथ्वी सम्मेलन 1992, ब्राज़ील।

