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Bharat: Bhautik Paryavaran • Class 11 Geography

Chapter 3: अपवाह तंत्र

नदियों का जाल ही भारत का अपवाह तंत्र है — हिमालयी नदियाँ बारहमासी, प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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अपवाह तंत्र — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  अध्याय 3  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

अध्याय का सार

अपवाह तंत्र का अर्थ है — नदियों और उनकी सहायक नदियों का जाल। भारत के अपवाह को दो भागों में बाँटते हैं: हिमालयी नदियाँ (सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र — बारहमासी, हिम और वर्षा दोनों से जल) और प्रायद्वीपीय नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती — मुख्यतः वर्षा पर निर्भर, मौसमी)।

हिमालयी नदियाँ लंबी, गहरी घाटियाँ काटती हैं और विशाल मैदान बनाती हैं; प्रायद्वीपीय नदियाँ छोटी, पठारी और अधिकतर पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। नर्मदा और ताप्ती अपवाद हैं — वे पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरती हैं, क्योंकि वे भ्रंश घाटियों से बहती हैं।

मुख्य बिंदु

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य बात
गंगाहिमालयी, सबसे बड़ा मैदान
ब्रह्मपुत्रहिमालयी, असम में चौड़ी
गोदावरीप्रायद्वीपीय, 'दक्षिण की गंगा'
नर्मदाभ्रंश घाटी, पश्चिमगामी
ध्यान दें

भारत के अपवाह को दो भागों में बाँटते हैं: बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ (लगभग 77 प्रतिशत अपवाह क्षेत्र) और अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ (लगभग 23 प्रतिशत)।

सामान्य गलती

'बंगाल का शोक' दामोदर है, कोसी नहीं — कोसी 'बिहार का शोक' कहलाती है। दोनों को आपस में मत मिलाइए।

परीक्षा टिप

पंचनद में झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज हैं — सिंधु पंचनद का हिस्सा नहीं, वह मुख्य नदी है जिसमें ये पाँचों मिलती हैं।

अपवाह तंत्र

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): अपवाह तंत्र का सामान्य चित्रण — पर्वत से मैदान और समुद्र तक नदियाँ। यह किताब का चित्र नहीं है।

भारत का अपवाह

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: भारत के अपवाह तंत्र का वर्गीकरण।

हिमालयी और प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दो अपवाह परिवार — हिमालयी नदियाँ और प्रायद्वीपीय नदियाँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।

विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार

अपवाह तंत्र का अर्थ है — किसी क्षेत्र की मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों का जाल। जिस क्षेत्र का जल एक नदी में बहता है, उसे उस नदी की द्रोणी (बेसिन) कहते हैं; छोटी इकाई को जल-संभर (वाटरशेड) कहते हैं।

हिमालयी नदियाँ बारहमासी हैं — उन्हें हिम के पिघलने और वर्षा, दोनों से जल मिलता है। सिंधु तंत्र में झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज (पंचनद) हैं। गंगा तंत्र में यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन और रामगंगा हैं। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में सांगपो कहलाती है और असम में बहुत चौड़ी हो जाती है।

प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी हैं — मुख्यतः वर्षा पर निर्भर। पूर्व की ओर बहने वाली बड़ी नदियाँ: महानदी, गोदावरी (दक्षिण की गंगा), कृष्णा और कावेरी — ये डेल्टा बनाती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियों में बहती हैं और ज्वारनदमुख बनाती हैं, डेल्टा नहीं।

नदी के प्रवाह-प्रारूप (पैटर्न) भी पूछे जाते हैं: वृक्षाकार (पेड़ की शाखाओं जैसा), जालीनुमा (आयताकार मोड़), अपकेंद्रीय (केंद्र से बाहर की ओर) और अभिकेंद्रीय (बाहर से केंद्र की ओर)। डेल्टा नदी-मुख का त्रिभुजाकार निक्षेप है; ज्वारनदमुख चौड़ा समुद्री मुख है जहाँ ज्वार का पानी चढ़ता है।

नदी-जोड़ो (इंटरलिंकिंग) की चर्चा भी अध्याय में है: जल-अधिक्य वाली द्रोणियों से जल-कमी वाली द्रोणियों में जल ले जाने की योजना — इसके सामाजिक-आर्थिक लाभ (सिंचाई, बाढ़-नियंत्रण, पेयजल) और पर्यावरणीय चिंताएँ, दोनों परीक्षा में पूछी जाती हैं।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • अपवाह तंत्र: नदियों का जाल और उनकी दिशा।
  • बारहमासी: साल भर बहने वाली नदी।
  • मौसमी: मुख्यतः वर्षा ऋतु में बहने वाली नदी।
  • जलविभाजक: दो नदी-तंत्रों को अलग करने वाली ऊँचाई।
  • भ्रंश घाटी: धँसाव से बनी घाटी, जैसे नर्मदा की।
  • द्रोणी: वह क्षेत्र जिसका सारा जल एक मुख्य नदी में बहता है।
  • जल-संभर: द्रोणी की छोटी इकाई — एक छोटी नदी या नाले का अपवाह क्षेत्र।
  • बारहमासी: साल भर बहने वाली नदी — हिमालयी नदियों की विशेषता।
  • अनित्यवाही: मौसमी नदी — सूखे मौसम में सूख जाती है।
  • ज्वारनदमुख: नदी का चौड़ा समुद्री मुख जहाँ ज्वार चढ़ता है; डेल्टा से अलग।

Remember — याद रखें

  • हिमालयी बनाम प्रायद्वीपीय — हर अंतर के साथ उदाहरण लिखें।
  • नर्मदा-ताप्ती का पश्चिमगामी होना अपवाद है, नियम नहीं।
  • गोदावरी को 'दक्षिण की गंगा' कहते हैं।
  • नदी का उद्गम, सहायक और मुहाना — तीनों याद करें।

Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: सभी प्रायद्वीपीय नदियों को पूर्वगामी मान लेना। उत्तर में नर्मदा-ताप्ती का अपवाद ज़रूर लिखें।

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. भारत के अपवाह के दो भाग कौन से हैं?
    संकेत: हिमालयी और प्रायद्वीपीय के बारे में सोचें।
  2. हिमालयी नदियाँ बारहमासी क्यों हैं?
    संकेत: हिम और वर्षा के बारे में सोचें।
  3. प्रायद्वीपीय नदियाँ कैसी हैं?
    संकेत: मौसमी होने के बारे में सोचें।
  4. नर्मदा पश्चिम की ओर क्यों बहती है?
    संकेत: भ्रंश घाटी के बारे में सोचें।
  5. गोदावरी को क्या कहते हैं?
    संकेत: 'दक्षिण की गंगा' के बारे में सोचें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. भारत के अपवाह के दो भाग कौन से हैं?
    हिमालयी अपवाह (सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र) और प्रायद्वीपीय अपवाह (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती)।
  2. हिमालयी नदियाँ बारहमासी क्यों हैं?
    उन्हें हिम के पिघलने और वर्षा दोनों से जल मिलता है, इसलिए वे साल भर बहती हैं।
  3. प्रायद्वीपीय नदियाँ कैसी हैं?
    मुख्यतः वर्षा पर निर्भर, इसलिए मौसमी; वे पठारी, छोटी और अधिकतर पूर्व की ओर बहती हैं।
  4. नर्मदा-ताप्ती अपवाद क्यों हैं?
    वे भ्रंश घाटियों से बहती हैं, इसलिए पूर्व की बजाय पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरती हैं।
  5. गोदावरी को 'दक्षिण की गंगा' क्यों कहते हैं?
    क्योंकि वह प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी है और उसका मैदान गंगा मैदान की तरह उपजाऊ है।

पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।

  1. बहुविकल्पीय (i): 'बंगाल का शोक' किस नदी को कहा जाता था?
    दामोदर को — विकल्प (घ)। दामोदर घाटी में बार-बार बाढ़ आती थी, इसलिए यह नाम पड़ा। कोसी 'बिहार का शोक' है।
  2. बहुविकल्पीय (ii): भारत में सबसे बड़ी नदी-द्रोणी किसकी है?
    गंगा की — विकल्प (ग)। सिंधु और ब्रह्मपुत्र की द्रोणियाँ बड़ी हैं, पर भारत के भीतर गंगा की द्रोणी सबसे बड़ी है।
  3. बहुविकल्पीय (iii): पंचनद में कौन-सी नदी शामिल नहीं है?
    सिंधु — विकल्प (ख)। पंचनद झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज हैं; सिंधु वह मुख्य नदी है जिसमें ये मिलती हैं।
  4. बहुविकल्पीय (iv): भ्रंश घाटी में कौन-सी नदी बहती है?
    नर्मदा — विकल्प (ग)। नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियों में बहती हैं, इसलिए वे डेल्टा नहीं बनातीं।
  5. बहुविकल्पीय (v): अलकनंदा और भागीरथी का संगम कहाँ है?
    देव प्रयाग — विकल्प (घ)। यहीं से दोनों के मिलने के बाद नदी गंगा कहलाती है।
  6. अंतर स्पष्ट कीजिए (i): नदी द्रोणी और जल-संभर।
    नदी द्रोणी बड़ी इकाई है — किसी मुख्य नदी और उसकी सभी सहायक नदियों का पूरा अपवाह क्षेत्र। जल-संभर छोटी इकाई है — किसी छोटी नदी या नाले का अपवाह क्षेत्र। कई जल-संभर मिलकर एक द्रोणी बनाते हैं।
  7. अंतर स्पष्ट कीजिए (ii): वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप।
    वृक्षाकार प्रारूप में सहायक नदियाँ पेड़ की शाखाओं की तरह मुख्य नदी में मिलती हैं — समतल, समान चट्टानों वाले क्षेत्रों में। जालीनुमा प्रारूप में नदियाँ समकोण पर मुड़ती हैं — कठोर-कोमल चट्टानों की पट्टियों वाले क्षेत्रों में।
  8. अंतर स्पष्ट कीजिए (iii): अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप।
    अपकेंद्रीय में नदियाँ किसी ऊँचे केंद्र (गुंबद/पहाड़ी) से चारों ओर बाहर की ओर बहती हैं। अभिकेंद्रीय में नदियाँ चारों ओर से बहकर किसी नीची जगह (झील/गर्त) में मिलती हैं।
  9. अंतर स्पष्ट कीजिए (iv): डेल्टा और ज्वारनदमुख।
    डेल्टा नदी-मुख पर अवसाद के जमाव से बना त्रिभुजाकार भूभाग है (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा)। ज्वारनदमुख नदी का चौड़ा, खुला समुद्री मुख है जहाँ ज्वार का पानी चढ़ता है और अवसाद जम नहीं पाता (नर्मदा-तापी)।
  10. लघु उत्तरीय (i): नदियों को जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
    सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ती है, बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव घटता है, सूखा-प्रवण क्षेत्रों को पेयजल और कृषि-जल मिलता है, जल-परिवहन और विद्युत उत्पादन के अवसर बढ़ते हैं, और राज्यों के बीच जल-सहयोग बढ़ता है।
  11. लघु उत्तरीय (ii): प्रायद्वीपीय नदियों के तीन लक्षण लिखिए।
    एक, वे मौसमी (अनित्यवाही) हैं — मुख्यतः वर्षा पर निर्भर। दो, उनकी घाटियाँ उथली और प्रौढ़ हैं, क्योंकि वे पुरानी, कठोर चट्टानों पर बहती हैं। तीन, अधिकांश पूर्व की ओर बहकर डेल्टा बनाती हैं; नर्मदा-तापी अपवाद हैं जो पश्चिम में बहती हैं।
  12. दीर्घ उत्तरीय (i): उत्तर भारतीय नदियों की विशेषताएँ क्या हैं? वे प्रायद्वीपीय नदियों से कैसे भिन्न हैं?
    उत्तर भारतीय नदियाँ बारहमासी हैं (हिम + वर्षा दोनों से जल), लंबी हैं, विशाल मैदान बनाती हैं और सिंचाई-परिवहन में अधिक उपयोगी हैं। प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी, छोटी, उथली घाटियों वाली हैं और कठोर पठारी चट्टानों पर बहती हैं। हिमालयी नदियों में बाढ़ और अवसाद अधिक होता है; प्रायद्वीपीय में जल-प्रवाह वर्षा के साथ घटता-बढ़ता है।
  13. दीर्घ उत्तरीय (ii): हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक हिमालय के गिरिपद के साथ यात्रा में कौन-सी मुख्य नदियाँ आएँगी? किसी एक का वर्णन कीजिए।
    मार्ग में यमुना, रामगंगा, घाघरा (सरयू), गंडक, कोसी और महानंदा जैसी नदियाँ आएँगी, जो हिमालय से निकलकर मैदान में उतरती हैं। उदाहरण — कोसी: 'बिहार का शोक' कहलाती है क्योंकि वह बार-बार मार्ग बदलकर भीषण बाढ़ लाती है; नेपाल के हिमालय से निकलकर गंगा में मिलती है।

बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A

बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।

  1. सिंधु नदी तंत्र की पाँच सहायक नदियों (पंचनद) के नाम लिखिए।
    झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। ये सभी सिंधु में मिलती हैं; सिंधु स्वयं पंचनद का हिस्सा नहीं है।
  2. गंगा की तीन प्रमुख सहायक नदियाँ और उनके मिलने के स्थान लिखिए।
    यमुना (प्रयागराज में), घाघरा, गंडक, कोसी और सोन — ये सभी गंगा में अलग-अलग स्थानों पर मिलती हैं। गंगा का उद्गम गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से भागीरथी के रूप में होता है।
  3. नर्मदा और तापी डेल्टा क्यों नहीं बनातीं?
    दोनों भ्रंश घाटियों में बहती हैं और तेज़ बहाव से अपना अवसाद समुद्र में दूर तक बहा ले जाती हैं। उनके मुख चौड़े ज्वारनदमुख हैं, जहाँ ज्वार अवसाद जमने नहीं देता।
  4. भारत के अपवाह का विभाजन प्रतिशत सहित लिखिए।
    बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों का अपवाह क्षेत्र लगभग 77 प्रतिशत और अरब सागर में गिरने वाली नदियों का लगभग 23 प्रतिशत है।
  5. मानचित्र कार्य: गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और नर्मदा को उनके मुख की दिशा सहित लिखिए।
    गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा — बंगाल की खाड़ी (पूर्व); नर्मदा — अरब सागर (पश्चिम, खंभात की खाड़ी)।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

Recap — सार

अपवाह तंत्र = मुख्य नदी + सहायक नदियों का जाल। हिमालयी नदियाँ बारहमासी (सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र तंत्र), प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी पूर्व में; नर्मदा-तापी भ्रंश घाटियों में पश्चिम में)। सबसे बड़ी द्रोणी गंगा की; देव प्रयाग में अलकनंदा-भागीरथी मिलकर गंगा बनती हैं; बंगाल का शोक दामोदर है।