Chapter 2: संरचना तथा भूआकृति विज्ञान
भारत की धरती जैसी आज दिखती है, वह करोड़ों वर्षों की भू-वैज्ञानिक कहानी का नतीजा है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
संरचना तथा भूआकृति विज्ञान — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 2 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
भारत की भू-आकृति उसकी भू-वैज्ञानिक संरचना का परिणाम है। प्रायद्वीपीय भारत प्राचीन गोंडवाना भूमि का हिस्सा है — कठोर, पुरानी चट्टानों वाला स्थिर खंड। उत्तर में हिमालय युवा वलित पर्वत है, जो भारतीय प्लेट के टकराव से बना।
भारत के मुख्य भौतिक विभाग हैं — उत्तरी पर्वतीय प्रदेश (हिमालय), उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, तटीय मैदान और द्वीप समूह। हिमालय की तीन समानांतर श्रेणियाँ हैं — हिमाद्रि (महान हिमालय), हिमाचल (लघु हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय)।
मुख्य बिंदु
- प्रायद्वीप: प्राचीन, स्थिर, कठोर चट्टानें।
- हिमालय: युवा, वलित, अभी भी उठ रहा है।
- उत्तरी मैदान: हिमालय और प्रायद्वीप से आई जलोढ़ मिट्टी से बना।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| हिमाद्रि | महान हिमालय — सबसे ऊँची, हिमाच्छादित |
| हिमाचल | लघु हिमालय — मध्यम ऊँचाई |
| शिवालिक | बाह्य हिमालय — सबसे नई, नीची |
| प्रायद्वीपीय पठार | प्राचीन, त्रिभुजाकार, नदियों से कटा |
प्रायद्वीपीय भारत प्राचीन गोंडवाना भूमि का हिस्सा है — इसीलिए यहाँ की चट्टानें सबसे पुरानी और स्थिर हैं। हिमालय, इसके उल्टा, सबसे युवा पर्वत है और अब भी ऊँचा हो रहा है।
डोडाबेटा को अनामलाई या कार्डामम में मत लिखिए — वह नीलगिरि पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी है (2,637 मीटर)। अनाईमुडी (2,695 मीटर) दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है, जो अनामलाई में है।
द्वीपों के प्रश्नों में चैनल याद रखें: 10° चैनल अंडमान को निकोबार से अलग करता है; 9° चैनल लक्षद्वीप को मिनिकॉय से अलग करता है।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): भारत की भू-आकृति का सामान्य चित्रण — समानांतर हिमालय श्रेणियाँ, मैदान और पठार। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: भारत के भौतिक विभाग।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): भारत के पाँच भू-आकृतिक विभाग — उत्तर से दक्षिण — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
भारत की भू-आकृति उसकी भू-वैज्ञानिक संरचना का परिणाम है। प्रायद्वीपीय भारत प्राचीन गोंडवाना भूमि का टुकड़ा है — कठोर, स्थिर और पुराना। हिमालय और उत्तरी मैदान इसके बाद बने: हिमालय टेथिस सागर के अवसादों के ऊपर उठने से बना, और उत्तरी मैदान हिमालयी नदियों के अवसादों से भरा।
उत्तरी पर्वतीय प्रदेश में तीन समानांतर श्रेणियाँ हैं: सबसे उत्तर में हिमाद्रि (महान हिमालय — एवरेस्ट, कंचनजंगा जैसी ऊँची चोटियाँ), बीच में हिमाचल (लघु हिमालय — शिमला, मसूरी जैसे नगर) और दक्षिण में शिवालिक (बाह्य हिमालय — सबसे युवा, कच्ची चट्टानें)।
उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र की देन है — खादर (नई, उपजाऊ कछार) और बांगर (पुरानी, ऊँची कछार) इसके दो भाग हैं। तराई और भाबर मैदान की दक्षिणी पट्टी में मिलते हैं।
प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख पहाड़ियाँ हैं: अरावली (सबसे पुरानी), विंध्य, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्वी घाट। पश्चिमी घाट पूर्वी घाट से ऊँचा और निरंतर है; अनाईमुडी दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
तटीय मैदान दो हैं: पश्चिमी तटीय मैदान सँकरा है (कोंकण, कन्नड़, मालाबार) और यहाँ नदियाँ ज्वारनदमुख (एश्चुअरी) बनाती हैं, डेल्टा नहीं। पूर्वी तटीय मैदान चौड़ा है (उत्तरी सरकार, कोरोमंडल) और यहाँ महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी के डेल्टा हैं।
द्वीप समूह दो हैं: बंगाल की खाड़ी में अंडमान-निकोबार (ज्वालामुखी-जनित, बैरन आइलैंड भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी) और अरब सागर में लक्षद्वीप (प्रवाल-निर्मित, 36 द्वीप, मिनिकॉय सबसे बड़ा)।
- हिमालय की तीन श्रेणियाँ: हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक।
- दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी: अनाईमुडी (2,695 मीटर, अनामलाई)।
- डोडाबेटा: नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी (2,637 मीटर)।
- 10° चैनल: अंडमान–निकोबार के बीच; 9° चैनल: लक्षद्वीप–मिनिकॉय के बीच।
- बैरन आइलैंड: भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी द्वीप।
Key Terms — मुख्य शब्द
- वलित पर्वत: चट्टानों के मुड़ने से बना पर्वत।
- गोंडवाना: प्राचीन दक्षिणी महाद्वीप।
- जलोढ़ मैदान: नदियों के जमाव से बना मैदान।
- पठार: ऊँची, सपाट-सी भूमि।
- दून: शिवालिक और हिमाचल के बीच की घाटी।
- हिमाद्रि: महान हिमालय — सबसे उत्तर की, सबसे ऊँची श्रेणी; एवरेस्ट और कंचनजंगा यहीं हैं।
- खादर: नदियों की नई कछार — हर बाढ़ में नई उपजाऊ मिट्टी मिलती है।
- बांगर: पुरानी कछार — बाढ़ के स्तर से ऊँची, कम उपजाऊ।
- ज्वारनदमुख: नदी का चौड़ा समुद्री मुख, जहाँ डेल्टा नहीं बनता — पश्चिमी तट की नदियों की विशेषता।
- प्रवाल द्वीप: मूँगा-जीवों के निक्षेप से बने द्वीप — लक्षद्वीप इसका उदाहरण है।
Remember — याद रखें
- तीन हिमालय श्रेणियों का क्रम उत्तर से दक्षिण याद करें।
- प्रायद्वीप प्राचीन है, हिमालय युवा — यह विपरीतता याद रखें।
- उत्तरी मैदान की मिट्टी जलोढ़ है — उपजाऊपन का कारण यही है।
- दून का उदाहरण: देहरादून।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक का क्रम उलट देना। उत्तर में उत्तर → दक्षिण क्रम लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- प्रायद्वीपीय भारत कैसा खंड है?
संकेत: प्राचीन और स्थिर के बारे में सोचें। - हिमालय की तीन श्रेणियाँ कौन सी हैं?
संकेत: उत्तर से दक्षिण क्रम के बारे में सोचें। - उत्तरी मैदान कैसे बना?
संकेत: जलोढ़ जमाव के बारे में सोचें। - हिमालय युवा पर्वत क्यों कहलाता है?
संकेत: टकराव से बनने के बारे में सोचें। - दून किसे कहते हैं?
संकेत: दो श्रेणियों के बीच की घाटी के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- प्रायद्वीपीय भारत की विशेषता क्या है?
यह प्राचीन गोंडवाना भूमि का हिस्सा है — कठोर चट्टानों वाला स्थिर खंड, जो हिमालय से बहुत पुराना है। - हिमालय की तीन श्रेणियाँ कौन सी हैं?
उत्तर से दक्षिण: हिमाद्रि (महान हिमालय), हिमाचल (लघु हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय)। - हिमालय कैसे बना?
भारतीय प्लेट के उत्तर खिसककर यूरेशियाई प्लेट से टकराने से चट्टानें मुड़कर ऊपर उठीं — यही वलित पर्वत है। - उत्तरी मैदान कैसे बना?
हिमालय की नदियों ने लाखों वर्षों तक जलोढ़ मिट्टी जमा करके इसे समतल और उपजाऊ बनाया। - दून क्या है?
शिवालिक और हिमाचल के बीच की लंबी घाटी, जैसे देहरादून।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): अंडमान और निकोबार को कौन-सा जल क्षेत्र अलग करता है?
10° चैनल — विकल्प (ख)। 11° चैनल का विकल्प भ्रम के लिए है; मन्नार की खाड़ी भारत-श्रीलंका के बीच है। - बहुविकल्पीय (ii): डोडाबेटा चोटी किस पहाड़ी श्रृंखला में है?
नीलगिरि — विकल्प (क)। डोडाबेटा (2,637 मीटर) नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी है। - लघु उत्तरीय (i): लक्षद्वीप जाने वाला व्यक्ति किस तटीय मैदान से होकर जाएगा और क्यों?
पश्चिमी तटीय मैदान से — क्योंकि लक्षद्वीप केरल तट के पास, अरब सागर में स्थित है। पश्चिमी तट से ही वहाँ के लिए जहाज़ और नौकाएँ चलती हैं; पूर्वी तट से जाना लंबा और बेवजह होगा। - लघु उत्तरीय (ii): भारत में ठंडा मरुस्थल कहाँ है? मुख्य श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
लद्दाख में — लेह-कारगिल क्षेत्र। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है और सर्दी कठोर होती है। मुख्य श्रेणियाँ: काराकोरम, लद्दाख और ज़ास्कर। - लघु उत्तरीय (iii): पश्चिमी तटीय मैदान पर डेल्टा क्यों नहीं बनता?
क्योंकि पश्चिमी तट की नदियाँ छोटी और तेज़ बहाव वाली हैं, कठोर चट्टानों पर बहती हैं और अपना अवसाद समुद्र में दूर तक बहा ले जाती हैं। तट के धँसने से उनके मुख चौड़े ज्वारनदमुख बन जाते हैं, डेल्टा नहीं। - दीर्घ उत्तरीय (i): अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूहों की तुलना कीजिए।
अरब सागर के लक्षद्वीप प्रवाल-निर्मित हैं — 36 छोटे द्वीप, मिनिकॉय सबसे बड़ा, केरल तट से लगभग 280 किमी दूर। बंगाल की खाड़ी के अंडमान-निकोबार समुद्र में डूबी पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर हैं — बड़े, ऊँचे, वनाच्छादित; बैरन आइलैंड यहाँ का जीवंत ज्वालामुखी है और सैडल चोटी (738 मीटर) सबसे ऊँची है। दोनों का जलवायु-प्रकार भूमध्यरेखीय-सा है, पर उत्पत्ति और आकार बिल्कुल अलग हैं। - दीर्घ उत्तरीय (ii): नदी घाटी मैदान में मिलने वाली महत्त्वपूर्ण स्थलाकृतियाँ कौन-सी हैं? वर्णन कीजिए।
बाढ़ का मैदान (नदी के दोनों ओर फैली समतल भूमि), प्राकृतिक तटबंध (नदी किनारे अवसाद की ऊँची पट्टी), विसर्प (नदी के घुमाव), गोखुर झील (कटा हुआ पुराना विसर्प), खादर-बांगर (नई-पुरानी कछार) और डेल्टा (मुख पर त्रिभुजाकार निक्षेप)। ये सब नदी के अपरदन और निक्षेपण से बनते हैं। - दीर्घ उत्तरीय (iii): बद्रीनाथ से सुंदर वन डेल्टा तक गंगा के साथ चलें तो रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएँगी?
बद्रीनाथ के पास हिमालय में गहरी घाटियाँ और गॉर्ज; हरिद्वार के बाद मैदान में प्रवेश — भाबर-तराई पट्टी, फिर विसर्प और गोखुर झीलें; बाढ़ के मैदान में तटबंध और खादर; अंत में सुंदर वन में विशाल डेल्टा, जहाँ गंगा कई धाराओं में बँटकर बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- हिमालय की तीन समानांतर श्रेणियों के नाम और एक-एक विशेषता लिखिए।
हिमाद्रि (महान हिमालय) — सबसे ऊँची, एवरेस्ट यहीं; हिमाचल (लघु हिमालय) — शिमला-मसूरी जैसे पर्वतीय नगर; शिवालिक (बाह्य हिमालय) — सबसे युवा, कच्ची चट्टानें, भूकंप-प्रवण। - खादर और बांगर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
खादर नई कछार है — हर बाढ़ में नई मिट्टी मिलती है, अधिक उपजाऊ, नदी के निकट। बांगर पुरानी कछार है — बाढ़-स्तर से ऊँची, कंकड़-पत्थर वाली, कम उपजाऊ। - पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों में दो अंतर लिखिए।
पश्चिमी मैदान सँकरा है और नदियाँ ज्वारनदमुख बनाती हैं; पूर्वी मैदान चौड़ा है और नदियों के डेल्टा हैं। पश्चिमी तट पर मानसून पहले टकराता है, पूर्वी तट पर उत्तर-पूर्वी मानसून से सर्दी में वर्षा होती है। - लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार की उत्पत्ति में क्या अंतर है?
लक्षद्वीप प्रवाल (मूँगा) निक्षेप से बना है; अंडमान-निकोबार समुद्र में डूबी पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर हैं, जिनमें बैरन आइलैंड जैसा जीवंत ज्वालामुखी भी है। - मानचित्र कार्य: भारत के पाँच भू-आकृतिक विभागों को उत्तर से दक्षिण क्रम में लिखिए।
उत्तरी पर्वतीय प्रदेश → उत्तरी मैदान → प्रायद्वीपीय पठार → तटीय मैदान → द्वीप समूह।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
भारत की धरती तीन कहानियों से बनी है: पुराना गोंडवाना पठार, युवा हिमालय और नदियों का मैदान। हिमालय की तीन श्रेणियाँ (हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक), मैदान की खादर-बांगर, पश्चिमी तट के ज्वारनदमुख बनाम पूर्वी तट के डेल्टा, और दो द्वीप समूह — प्रवाल-निर्मित लक्षद्वीप तथा पर्वत-शिखर अंडमान-निकोबार — यही इस अध्याय का सार है।

