Chapter 4: जलवायु
भारत की जलवायु मानसूनी है — एक ही देश में एकता भी है और क्षेत्रीय विविधता भी।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
जलवायु — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 4 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
भारत की जलवायु मानसूनी है — यानी वर्षा मुख्यतः ग्रीष्मकालीन दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होती है। मानसून की उत्पत्ति स्थल-समुद्र के तापन-अंतर से है: गर्मियों में स्थल गर्म होकर निम्न दाब बनाता है, समुद्र से नम पवनें खिंच आती हैं; सर्दियों में उल्टा होता है।
भारत में चार ऋतुएँ मानी जाती हैं — शीत, ग्रीष्म, वर्षा (मानसून) और लौटता मानसून। मानसून की दो शाखाएँ हैं — अरब सागर शाखा (पश्चिमी घाट, मुंबई) और बंगाल की खाड़ी शाखा (पूर्वोत्तर, कोलकाता)। पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों में उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा लाते हैं, जो गेहूँ के लिए महत्त्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- मानसून: मौसमी पवन, दिशा बदलती है।
- दो शाखाएँ: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी।
- पश्चिमी विक्षोभ: शीतकालीन वर्षा, गेहूँ के लिए लाभकारी।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| दक्षिण-पश्चिमी मानसून | जून–सितंबर, मुख्य वर्षा |
| लौटता मानसून | अक्टूबर–नवंबर, तमिलनाडु में वर्षा |
| अरब सागर शाखा | पश्चिमी घाट, मुंबई |
| बंगाल शाखा | पूर्वोत्तर, सबसे पहले वर्षा |
भारत में मानसून का आगमन सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल तट पर होता है (मानसून प्रस्फोट) और जुलाई के मध्य तक पूरे देश में फैल जाता है। वापसी सितंबर-अक्टूबर में होती है।
तमिलनाडु के तटीय प्रदेशों में जाड़े के आरंभ में वर्षा उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है, दक्षिण-पश्चिमी मानसून से नहीं — यह प्रश्न हर वर्ष किसी न किसी रूप में आता है।
भारत में सबसे अधिक वर्षा मासिनराम (मेघालय) में होती है। चेरापूँजी पहले सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान माना जाता था — उत्तर में 'वर्तमान में' लिखा हो तो मासिनराम लिखें।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): मानसून का सामान्य चित्रण — समुद्र से स्थल की ओर नम पवनें और वर्षा। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: मानसून की कार्यविधि।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): ग्रीष्मकालीन (दक्षिण-पश्चिम) और शीतकालीन (उत्तर-पूर्व) मानसून की दिशाएँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहते हैं — यानी वर्षा का अधिकांश भाग ग्रीष्मकालीन दक्षिण-पश्चिमी मानसून से आता है। फिर भी, एकता के साथ विविधता है: राजस्थान के थार में 10 सेमी से कम वर्षा होती है, तो मासिनराम में 1,000 सेमी से अधिक।
मानसून की उत्पत्ति का मूल कारण है — स्थल और समुद्र के गर्म होने की दर में अंतर। ग्रीष्म में स्थल तेज़ी से गर्म होकर निम्न दाब बनाता है, तो समुद्र से आर्द्र पवनें स्थल की ओर चलती हैं। शीत में स्थिति उलट जाती है — स्थल पर उच्च दाब बनता है और पवनें स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्वी मानसून) चलती हैं।
अंतःउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) वह निम्न दाब की पेटी है जहाँ व्यापारिक पवनें मिलती हैं। ग्रीष्म में यह उत्तर की ओर खिसककर गंगा के मैदान के ऊपर आ जाती है और मानसून गर्त (ट्रफ़) कहलाती है — इसी से मानसून की वर्षा जुड़ी है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में चार स्पष्ट मौसम हैं: शीत ऋतु (दिसंबर–फ़रवरी), ग्रीष्म ऋतु (मार्च–मई), वर्षा ऋतु/दक्षिण-पश्चिमी मानसून (जून–सितंबर) और मानसून की वापसी/शरद ऋतु (अक्टूबर–नवंबर)।
मानसून प्रस्फोट (बर्स्ट) का अर्थ है — लंबे शुष्क काल के बाद अचानक तेज़ वर्षा का आरंभ। उत्तर-पश्चिमी भारत में रबी की फसलों के लिए शीतकालीन वर्षा पश्चिमी विक्षोभों (शीतोष्ण चक्रवातों) से आती है, जो भूमध्य सागर की ओर से आते हैं।
जलवायु-परिवर्तन का अध्याय-अंतिम भाग हरितगृह प्रभाव और भूमंडलीय तापन से जुड़ा है: कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और क्लोरो-फ़्लोरो-कार्बन जैसी गैसें दीर्घ तरंगी विकिरण को रोककर पृथ्वी को गर्म करती हैं।
- मानसून आगमन: लगभग 1 जून, केरल तट।
- सबसे अधिक वर्षा: मासिनराम (मेघालय)।
- तमिलनाडु तट पर जाड़े की वर्षा: उत्तर-पूर्वी मानसून से।
- चार मौसम: शीत, ग्रीष्म, वर्षा, मानसून की वापसी।
- रबी की शीतकालीन वर्षा: पश्चिमी विक्षोभों से।
Key Terms — मुख्य शब्द
- मानसून: मौसम के अनुसार दिशा बदलने वाली पवन।
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून: ग्रीष्मकालीन समुद्री पवन, मुख्य वर्षा।
- लौटता मानसून: शीतकाल में स्थल से समुद्र की ओर लौटती पवन।
- पश्चिमी विक्षोभ: भूमध्य सागर से आने वाला शीतकालीन तूफ़ान।
- वर्षा की परिवर्तनशीलता: साल-दर-साल वर्षा में उतार-चढ़ाव।
- मानसून प्रस्फोट: लंबे शुष्क काल के बाद अचानक तेज़ वर्षा का आरंभ — केरल तट पर लगभग 1 जून।
- अंतःउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र: भूमध्य रेखा के पास निम्न दाब की पेटी जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं।
- पश्चिमी विक्षोभ: भूमध्य सागर से आने वाले शीतोष्ण चक्रवात — उत्तर-पश्चिम भारत में रबी की वर्षा के स्रोत।
- हरितगृह प्रभाव: वायुमंडलीय गैसों द्वारा दीर्घ तरंगी विकिरण का अवशोषण, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है।
- लू: ग्रीष्म में उत्तर भारत में चलने वाली गर्म, शुष्क पवन।
Remember — याद रखें
- मानसून की दिशा गर्मियों में समुद्र → स्थल, सर्दियों में स्थल → समुद्र — यही क्रम लिखें।
- दोनों शाखाओं के क्षेत्र अलग-अलग याद करें।
- लौटता मानसून तमिलनाडु में वर्षा करता है — यह विशेष तथ्य है।
- पश्चिमी विक्षोभ गेहूँ से जोड़कर याद करें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: मानसून को सिर्फ 'वर्षा' मान लेना। उत्तर में मानसून = पवन व्यवस्था है, वर्षा उसका परिणाम है।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- मानसून किसे कहते हैं?
संकेत: दिशा बदलने वाली पवन के बारे में सोचें। - ग्रीष्मकालीन मानसून क्यों आता है?
संकेत: स्थल के गर्म होने के बारे में सोचें। - मानसून की दो शाखाएँ कौन सी हैं?
संकेत: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बारे में सोचें। - लौटता मानसून कहाँ वर्षा करता है?
संकेत: तमिलनाडु के बारे में सोचें। - पश्चिमी विक्षोभ क्या है?
संकेत: शीतकालीन वर्षा के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- मानसून क्या है?
मौसम के अनुसार दिशा बदलने वाली पवन व्यवस्था; गर्मियों में समुद्र से स्थल की ओर, सर्दियों में स्थल से समुद्र की ओर। - ग्रीष्मकालीन मानसून कैसे बनता है?
गर्मियों में भारतीय स्थल गर्म होकर निम्न दाब बनाता है, जिससे समुद्र की नम पवनें अंदर खिंच आती हैं। - मानसून की दो शाखाएँ कौन सी हैं?
अरब सागर शाखा (पश्चिमी घाट, मुंबई) और बंगाल की खाड़ी शाखा (पूर्वोत्तर, कोलकाता)। - लौटता मानसून कहाँ वर्षा करता है?
अक्टूबर–नवंबर में लौटती पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तमिलनाडु तट पर वर्षा करती हैं। - पश्चिमी विक्षोभ क्यों महत्त्वपूर्ण है?
वे सर्दियों में उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा लाते हैं, जो रबी की गेहूँ की फसल के लिए बहुत लाभकारी है।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): जाड़े के आरंभ में तमिलनाडु तट पर वर्षा किस कारण होती है?
उत्तर-पूर्वी मानसून से — विकल्प (ख)। शीत में पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं, पर बंगाल की खाड़ी से आर्द्रता लेकर तमिलनाडु तट पर वर्षा करती हैं। - बहुविकल्पीय (ii): भारत के कितने भू-भाग पर 75 सेमी से कम औसत वार्षिक वर्षा होती है?
एक-तिहाई — विकल्प (ग)। यही भाग सूखा-प्रवण माना जाता है। - बहुविकल्पीय (iii): दक्षिण भारत के बारे में कौन-सा तथ्य ठीक नहीं है?
'यहाँ जलवायु विषम पाई जाती है' — विकल्प (घ)। दक्षिण भारत में दैनिक और वार्षिक तापांतर कम होता है और तापमान सारा वर्ष ऊँचा रहता है — यानी जलवायु सम (विषम नहीं) है। - बहुविकल्पीय (iv): सूर्य मकर रेखा पर सीधा चमके तो उत्तर-पश्चिमी भारत में क्या होता है?
तापमान कम होने से उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है — विकल्प (क)। यही शीतकालीन उच्च दाब उत्तर-पूर्वी मानसून का स्रोत है। - लघु उत्तरीय (i): अंतःउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र क्या है?
यह भूमध्य रेखा के पास निम्न दाब की पेटी है जहाँ उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें मिलती हैं। ग्रीष्म में यह उत्तर खिसककर गंगा-मैदान के ऊपर मानसून गर्त बन जाती है, जिससे मानसून की वर्षा जुड़ी है। - लघु उत्तरीय (ii): मानसून प्रस्फोट क्या है? सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान कौन-सा है?
लंबे शुष्क काल के बाद अचानक तेज़ वर्षा के आरंभ को मानसून प्रस्फोट कहते हैं — केरल तट पर लगभग 1 जून को। भारत में सबसे अधिक वर्षा मासिनराम (मेघालय) में होती है। - लघु उत्तरीय (iii): रबी किसानों को शीतकालीन वर्षा किस चक्रवात से मिलती है? वे कहाँ उत्पन्न होते हैं?
पश्चिमी विक्षोभों (शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों) से। ये भूमध्य सागर की ओर से उत्पन्न होकर पश्चिम से पूर्व की ओर चलते हुए उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्षा करते हैं — रबी (गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभकारी। - दीर्घ उत्तरीय (i): जलवायु में एकता होते हुए भी क्षेत्रीय विभिन्नताएँ क्यों हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
एकता यह है कि पूरा देश मानसूनी चक्र से बँधा है — ग्रीष्म में मानसून, शीत में वापसी। विभिन्नता यह है कि थार में 10 सेमी से कम और मासिनराम में 1,000 सेमी से अधिक वर्षा होती है; कश्मीर में सर्दी में हिमपात होता है तो केरल में तापमान सारा वर्ष ऊँचा रहता है। कारण: अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी और पर्वतों की स्थिति। - दीर्घ उत्तरीय (ii): भारतीय मौसम विभाग के अनुसार कितने मौसम हैं? किसी एक का वर्णन कीजिए।
चार मौसम: शीत (दिसंबर–फ़रवरी), ग्रीष्म (मार्च–मई), वर्षा (जून–सितंबर) और मानसून की वापसी (अक्टूबर–नवंबर)। वर्षा ऋतु: दक्षिण-पश्चिमी मानसून से देश की लगभग 75–80 प्रतिशत वर्षा होती है; केरल में 1 जून के आसपास आगमन, जुलाई मध्य तक पूरे देश में फैलाव; कृषि, नदियों और भूजल के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण ऋतु।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- मानसून की उत्पत्ति का मूल कारण लिखिए।
स्थल और समुद्र के गर्म होने की दर में अंतर। ग्रीष्म में स्थल तेज़ी से गर्म होकर निम्न दाब बनाता है, तो आर्द्र समुद्री पवनें स्थल की ओर चलती हैं — यही दक्षिण-पश्चिमी मानसून है। - ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन मानसून में अंतर लिखिए।
ग्रीष्मकालीन: दक्षिण-पश्चिम से, समुद्र से स्थल की ओर, आर्द्र, अधिकांश वर्षा देती है। शीतकालीन: उत्तर-पूर्व से, स्थल से समुद्र की ओर, शुष्क; केवल तमिलनाडु तट पर बंगाल की खाड़ी से आर्द्रता लेकर वर्षा करती है। - भारत में वर्षा के वितरण की दो विषमताएँ लिखिए।
एक, थार (10 सेमी से कम) बनाम मासिनराम (1,000 सेमी से अधिक)। दो, ग्रीष्मकालीन मानसून से अधिकांश वर्षा, पर तमिलनाडु में मुख्य वर्षा शीतकालीन उत्तर-पूर्वी मानसून से। - हरितगृह प्रभाव क्या है? दो हरितगृह गैसों के नाम लिखिए।
वायुमंडलीय गैसों द्वारा पृथ्वी से निकलने वाली दीर्घ तरंगी विकिरण का अवशोषण, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है। गैसें: कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन (नाइट्रस ऑक्साइड, CFC भी)। - मानचित्र कार्य: मासिनराम, थार मरुस्थल और तमिलनाडु तट की वर्षा-विशेषता एक-एक पंक्ति में लिखिए।
मासिनराम: सर्वाधिक वर्षा; थार: न्यूनतम वर्षा (मरुस्थल); तमिलनाडु तट: शीतकालीन (उत्तर-पूर्वी मानसून) वर्षा।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
भारत की जलवायु मानसूनी है: ग्रीष्म में दक्षिण-पश्चिमी मानसून (केरल में 1 जून के आसपास प्रस्फोट) और शीत में उत्तर-पूर्वी मानसून। ITCZ का उत्तर खिसकना मानसून गर्त बनाता है; पश्चिमी विक्षोभ रबी की वर्षा देते हैं। एकता के साथ विविधता: थार में 10 सेमी से कम, मासिनराम में 1,000 सेमी से अधिक वर्षा; चार मौसम — शीत, ग्रीष्म, वर्षा, वापसी।

