Chapter 6: साम्यावस्था
भौतिक और रासायनिक साम्य, साम्य स्थिरांक Kc/Kp, ला-शातेलिए सिद्धांत, आयनिक साम्य, pH और बफ़र — साम्य का पूरा अध्याय।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
साम्यावस्था — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry) | Chapter 6 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
रासायनिक साम्य क्या है
जब किसी उत्क्रमणीय अभिक्रिया में अग्र और पश्च अभिक्रिया की दरें बराबर हो जाती हैं, तो साम्य स्थापित होता है। साम्य में सांद्रताएँ स्थिर दिखती हैं, पर अभिक्रियाएँ चलती रहती हैं — इसलिए यह गतिक साम्य है।
साम्य स्थिरांक Kc उत्पादों और अभिकारकों की सांद्रताओं के अनुपात से बनता है। Kc अधिक हो तो उत्पाद अधिक बनते हैं।
ला-शातेलिए का सिद्धांत
यदि साम्य निकाय पर कोई बदलाव (सांद्रता, दाब, ताप) लगाया जाए, तो साम्य उस दिशा में खिसकता है जो बदलाव को कम करे।
अभिकारक बढ़ाने पर साम्य उत्पाद की ओर खिसकता है। दाब बढ़ाने पर साम्य कम मोलों वाली ओर खिसकता है। उत्प्रेरक साम्य की स्थिति नहीं बदलता, केवल साम्य तक पहुँचने की गति बढ़ाता है।
आयनिक साम्य और pH
जल का आयनिक गुणनफल Kw = [H⁺][OH⁻] = 10⁻¹⁴ (25°C पर) होता है। pH = −log[H⁺] है; pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय होता है।
बफ़र विलयन pH में छोटे बदलाव का विरोध करता है। लवणों के जल-अपघटन से विलयन अम्लीय या क्षारीय हो सकता है।
साम्य क्या है — भौतिक और रासायनिक
जब किसी बंद निकाय में दो विपरीत प्रक्रमों की दरें बराबर हो जाएँ, तो साम्य स्थापित होता है। भौतिक साम्य के उदाहरण: ठोस ⇌ द्रव (गलनांक पर), द्रव ⇌ वाष्प (वाष्प-दाब स्थिर), गैस का विलयन में घुलना (हेनरी नियम)। रासायनिक साम्य: उत्क्रमणीय अभिक्रिया में अग्र और पश्च अभिक्रियाओं की दरें बराबर हो जाती हैं। साम्य गतिक (dynamic) होता है — सांद्रताएँ स्थिर दिखती हैं, पर दोनों अभिक्रियाएँ चलती रहती हैं। साम्य पर पहुँचने में लगा समय उत्प्रेरक से कम हो सकता है, पर साम्य की स्थिति (सांद्रताएँ) उत्प्रेरक से नहीं बदलती।
साम्य स्थिरांक Kc और Kp
सामान्य अभिक्रिया aA + bB ⇌ cC + dD के लिए Kc = [C]c[D]d / [A]a[B]b (साम्य सांद्रताओं से)। गैसीय अभिक्रियाओं के लिए Kp आंशिक दाबों से बनता है। दोनों में संबंध: Kp = Kc(RT)Δn, जहाँ Δn = गैसीय उत्पादों के मोल − गैसीय अभिकारकों के मोल। शुद्ध ठोस और द्रव का व्यंजक में स्थान नहीं होता (उनकी सांद्रता स्थिर मानी जाती है) — जैसे CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g) के लिए Kp = pCO2। K का मान केवल ताप पर निर्भर करता है, सांद्रता या दाब बदलने से नहीं। अभिक्रिया भागफल Qc की Kc से तुलना दिशा बताती है: Q < K हो तो अभिक्रिया आगे (उत्पाद की ओर) चलेगी, Q > K हो तो पीछे, Q = K हो तो साम्य।
ला-शातेलिए सिद्धांत
यदि साम्य निकाय पर कोई बदलाव (सांद्रता, दाब, ताप) लगाया जाए, तो साम्य उस दिशा में खिसकता है जो बदलाव के प्रभाव को कम करे। अभिकारक बढ़ाओ → साम्य उत्पाद की ओर; उत्पाद बढ़ाओ → अभिकारक की ओर। दाब बढ़ाने पर साम्य कम गैसीय मोलों वाली ओर खिसकता है (जैसे N2 + 3H2 ⇌ 2NH3 में उच्च दाब अमोनिया के पक्ष में); यदि Δn = 0 हो (जैसे H2 + I2 ⇌ 2HI), तो दाब का कोई प्रभाव नहीं। ताप बढ़ाने पर साम्य ऊष्माशोषी दिशा में खिसकता है (ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ताप बढ़ाने से K घटता है)। अक्रिय गैस मिलाने पर: स्थिर आयतन पर कोई प्रभाव नहीं, स्थिर दाब पर साम्य अधिक मोलों वाली ओर खिसकता है। उत्प्रेरक केवल गति बढ़ाता है, K और साम्य-स्थिति नहीं बदलता।
आयनिक साम्य, pH और जल का आयनन
जल का आयनिक गुणनफल Kw = [H+][OH−] = 1.0×10−14 (25°C पर)। pH = −log[H+]; pOH = −log[OH−]; pH + pOH = 14 (25°C)। pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय, 7 से अधिक क्षारीय। दुर्बल अम्ल HA के लिए आयनन स्थिरांक Ka = [H+][A−]/[HA]; वियोजन की मात्रा α ≈ √(Ka/C) (जब α छोटा हो)। pKa = −log Ka — pKa जितना छोटा, अम्ल उतना प्रबल।
बफ़र, लवण-जलअपघटन और विलेयता गुणनफल
बफ़र विलयन थोड़ा अम्ल या क्षार मिलाने पर भी pH लगभग स्थिर रखता है — दुर्बल अम्ल + उसका संयुग्मी क्षार (जैसे CH3COOH + CH3COONa) या दुर्बल क्षार + उसका संयुग्मी अम्ल। हेंडरसन-हासेलबाल्ख समीकरण: pH = pKa + log([लवण]/[अम्ल])। लवण-जलअपघटन: प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार का लवण (जैसे NH4Cl) अम्लीय विलयन देता है; दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार का लवण (जैसे CH3COONa) क्षारीय; दोनों प्रबल का लवण (NaCl) उदासीन। अल्प विलेय लवण AB के लिए विलेयता गुणनफल Ksp = [A+][B−]; यदि आयनिक गुणनफल > Ksp हो, तो अवक्षेप बनेगा। सम-आयन प्रभाव से विलेयता घटती है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| बदलाव | साम्य की दिशा |
|---|---|
| अभिकारक बढ़ाएँ | उत्पाद की ओर |
| दाब बढ़ाएँ | कम मोलों की ओर |
| ताप बढ़ाएँ (ऊष्माशोषी) | उत्पाद की ओर |
पहले Q निकालो, फिर K से तुलना करो: Q < K → आगे, Q > K → पीछे, Q = K → साम्य। यही एक नियम दिशा के हर प्रश्न का उत्तर है।
Kp के व्यंजक में शुद्ध ठोस/द्रव को मत लिखो — उनकी सांद्रता स्थिर होती है। CaCO3 ⇌ CaO + CO2 के लिए Kp = pCO2 ही है, CaCO3 और CaO इसमें नहीं आते।
दुर्बल अम्ल का pH निकालते समय पहले α ≈ √(Ka/C) से [H+] = Cα निकालो, फिर pH = −log[H+]। यदि α > 0.05 हो, तो द्विघात समीकरण हल करना पड़ेगा।

चित्र 1: चित्र 1 में साम्य को प्रभावित करने वाले कारक केंद्र के चारों ओर दिखाए गए हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): गतिक साम्य: अग्र और पश्च दरें बराबर हो जाती हैं, सांद्रताएँ स्थिर दिखती हैं पर अभिक्रिया रुकती नहीं। ला-शातेलिए: बदलाव लगाने पर साम्य उस दिशा में खिसकता है जो बदलाव का विरोध करे।
मुख्य शब्द / Key Terms
- गतिक साम्य: दरें बराबर, अभिक्रियाएँ जारी।
- साम्य स्थिरांक: उत्पाद/अभिकारक का अनुपात।
- ला-शातेलिए सिद्धांत: बदलाव का विरोध करने की दिशा।
- pH: −log[H⁺]।
- बफ़र: pH को स्थिर रखने वाला विलयन।
- अभिक्रिया भागफल Q: किसी भी क्षण सांद्रताओं से बना वही अनुपात जो K में होता है; Q की K से तुलना दिशा बताती है।
- हेनरी नियम: स्थिर ताप पर गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है।
- सम-आयन प्रभाव: किसी सम-आयन वाले विद्युत-अपघट्य के मिलाने से दुर्बल विद्युत-अपघट्य का वियोजन घटना।
- विलेयता गुणनफल Ksp: अल्प विलेय लवण के संतृप्त विलयन में आयनों की सांद्रताओं का गुणनफल।
- संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म: एक प्रोटॉन के अंतर वाले युग्म, जैसे CH3COOH / CH3COO−।
- हेंडरसन-हासेलबाल्ख समीकरण: pH = pKa + log([लवण]/[अम्ल]) — बफ़र का pH।
याद रखें
- साम्य में अभिक्रियाएँ रुकती नहीं हैं।
- उत्प्रेरक साम्य की स्थिति नहीं बदलता।
- Kc केवल ताप पर निर्भर करता है।
- pH पैमाना लघुगणकीय है।
- बफ़र में दुर्बल अम्ल और उसका लवण होता है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: साम्य में सांद्रताओं को बराबर मान लेना। साम्य में सांद्रताएँ स्थिर होती हैं, बराबर नहीं — उनका अनुपात Kc के बराबर होता है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- गतिक साम्य क्या है? संकेत: दरें बराबर पर अभिक्रियाएँ जारी रहने की अवस्था।
- ला-शातेलिए का सिद्धांत क्या है? संकेत: निकाय बदलाव का विरोध करने की दिशा में खिसकता है।
- pH का सूत्र लिखिए। संकेत: pH = −log[H⁺]।
- उत्प्रेरक साम्य पर क्या प्रभाव डालता है? संकेत: केवल गति बढ़ाता है, स्थिति नहीं बदलता।
- बफ़र क्या है? संकेत: pH में छोटे बदलाव का विरोध करने वाला विलयन।
मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच
ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।
- प्रश्न: H2(g) + I2(g) ⇌ 2HI(g) के लिए Kc = 50 है। किसी क्षण [H2] = 0.1 M, [I2] = 0.1 M, [HI] = 0.5 M हो, तो अभिक्रिया किस दिशा में चलेगी?
उत्तर: Qc = (0.5)²/(0.1 × 0.1) = 0.25/0.01 = 25। Q < K (25 < 50), इसलिए अभिक्रिया आगे (उत्पाद HI की ओर) चलेगी। - प्रश्न: N2(g) + 3H2(g) ⇌ 2NH3(g) के लिए Kp और Kc का संबंध लिखो और बताओ कि दाब बढ़ाने पर साम्य किस ओर खिसकेगा।
उत्तर: Δn = 2 − 4 = −2, इसलिए Kp = Kc(RT)−2। दाब बढ़ाने पर साम्य कम गैसीय मोलों वाली ओर, अर्थात NH3 (उत्पाद) की ओर खिसकेगा। - प्रश्न: 0.01 M HCl विलयन का pH कितना है? 0.001 M NaOH का pH कितना है?
उत्तर: HCl प्रबल अम्ल है: [H+] = 0.01, pH = −log(10−2) = 2। NaOH प्रबल क्षार है: [OH−] = 10−3, pOH = 3, pH = 14 − 3 = 11। - प्रश्न: एक दुर्बल अम्ल HA (Ka = 1.8×10−5) के 0.1 M विलयन का pH लगभग कितना है?
उत्तर: [H+] = √(Ka × C) = √(1.8×10−5 × 0.1) = √(1.8×10−6) ≈ 1.34×10−3 M। pH = −log(1.34×10−3) ≈ 2.87। - प्रश्न: NH4Cl का जलीय विलयन अम्लीय क्यों होता है, जबकि NaCl उदासीन है?
उत्तर: NH4Cl में NH4+ दुर्बल क्षार NH3 का संयुग्मी अम्ल है — वह जल से अभिक्रिया करके H+ देता है (जलअपघटन), इसलिए विलयन अम्लीय होता है। NaCl में Na+ और Cl− दोनों प्रबल क्षार/अम्ल के आयन हैं, जलअपघटन नहीं करते। - प्रश्न: बफ़र विलयन क्या है? CH3COOH + CH3COONa बफ़र में थोड़ा HCl मिलाने पर pH क्यों नहीं बदलता?
उत्तर: बफ़र थोड़ा अम्ल/क्षार मिलाने पर pH लगभग स्थिर रखता है। HCl से आया H+ ऐसीटेट आयन (CH3COO−) से मिलकर अल्प-आयनित CH3COOH बना लेता है, इसलिए [H+] लगभग नहीं बढ़ता और pH स्थिर रहता है। - प्रश्न: AgCl का Ksp = 1.8×10−10 है। शुद्ध जल में इसकी मोलर विलेयता कितनी है?
उत्तर: AgCl ⇌ Ag+ + Cl−; विलेयता s हो, तो Ksp = s²। s = √(1.8×10−10) ≈ 1.34×10−5 mol/L। - प्रश्न: हैबर प्रक्रम में अमोनिया की अधिकतम उपलब्धि के लिए ताप और दाब की क्या शर्तें हैं? व्यवहार में क्या किया जाता है?
उत्तर: अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (ΔH < 0) और Δn < 0 वाली है — इसलिए कम ताप और उच्च दाब पक्ष में हैं। व्यवहार में लगभग 200 atm दाब और 700 K ताप पर लोहे के उत्प्रेरक से काम चलाया जाता है (बहुत कम ताप पर गति बहुत धीमी हो जाती है)। - प्रश्न: CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g) के लिए साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखो।
उत्तर: Kp = pCO2। शुद्ध ठोस CaCO3 और CaO की सांद्रताएँ स्थिर होने से वे व्यंजक में नहीं आते। - प्रश्न: उत्प्रेरक साम्य स्थिरांक K को क्यों नहीं बदलता?
उत्तर: उत्प्रेरक अग्र और पश्च दोनों अभिक्रियाओं की गति समान अनुपात में बढ़ाता है — इसलिए साम्य तक पहुँचना तेज़ होता है, पर साम्य सांद्रताएँ और K (जो केवल ताप पर निर्भर है) नहीं बदलते।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- साम्य में सांद्रताएँ बराबर क्यों नहीं होतीं? उत्तर: क्योंकि उनका अनुपात Kc के बराबर होता है, न कि 1 के।
- दाब बढ़ाने पर साम्य किस ओर खिसकेगा? उत्तर: कम मोलों वाली ओर।
- [H⁺] = 10⁻³ हो तो pH कितना होगा? उत्तर: 3।
- ताप बदलने पर Kc क्यों बदलता है? उत्तर: क्योंकि साम्य स्थिरांक केवल ताप पर निर्भर करता है।
- अमोनिया के निर्माण में दाब बढ़ाने का क्या लाभ है? उत्तर: साम्य उत्पाद की ओर खिसकता है क्योंकि उत्पाद की ओर मोल कम होते हैं।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न
नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।
अभ्यास 7 (पुस्तक-अध्याय 7)
- प्रश्न: एक द्रव को सीलबंद पात्र में निश्चित ताप पर इसके वाष्प के साथ साम्य में रखा जाता है। पात्र का आयतन अचानक बढ़ा दिया जाता है। (क) वाष्प-दाब परिवर्तन का प्रारंभिक परिणाम क्या होगा? (ख) प्रारंभ में वाष्पन एवं संघनन की दर कैसे बदलती है? (ग) क्या होगा, जब कि साम्य पुनः अंतिम रूप से स्थापित हो जाएगा तब अंतिम वाष्प दाब क्या होगा?
उत्तर: (क) आयतन बढ़ने पर वाष्प-दाब प्रारंभ में घट जाएगा। (ख) वाष्पन की दर बढ़ेगी और संघनन की दर घटेगी, जब तक साम्य पुनः स्थापित न हो जाए। (ग) साम्य स्थापित होने पर वाष्प-दाब पुनः पहले जितना ही हो जाएगा — निश्चित ताप पर वाष्प-दाब केवल ताप पर निर्भर करता है, आयतन पर नहीं। - प्रश्न: निम्न साम्य के लिए Kc क्या होगा, यदि साम्य पर प्रत्येक पदार्थ की सांद्रताएँ हैं [SO₂] = 0.60 M, [O₂] = 0.82 M एवं [SO₃] = 1.90 M — 2SO₂(g) + O₂(g) ⇌ 2SO₃(g)।
उत्तर: Kc = [SO₃]²/([SO₂]²[O₂]) = (1.90)²/((0.60)² × 0.82) = 3.61/0.2952 = 12.23। - प्रश्न: एक निश्चित ताप एवं कुल दाब 10⁵ Pa पर आयोडीन वाष्प में आयतनानुसार 40% आयोडीन परमाणु होते हैं। I₂(g) ⇌ 2I(g) — साम्य के लिए Kp की गणना कीजिए।
उत्तर: 1 मोल I₂ से: साम्य पर I₂ = 0.6 मोल, I = 0.8 मोल, कुल 1.4 मोल। आंशिक दाब: p(I₂) = 0.6/1.4 × 10⁵ Pa, p(I) = 0.8/1.4 × 10⁵ Pa। Kp = p(I)²/p(I₂) = (0.5714²/0.4286) × 10⁵ Pa = 0.7619 × 10⁵ Pa = 0.76 bar। - प्रश्न: निम्नलिखित में से प्रत्येक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक Kc का व्यंजक लिखिए — (i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl₂(g), (ii) 2Cu(NO₃)₂(s) ⇌ 2CuO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g), (iii) CH₃COOC₂H₅(aq) + H₂O(l) ⇌ CH₃COOH(aq) + C₂H₅OH(aq), (iv) Fe³⁺(aq) + 3OH⁻(aq) ⇌ Fe(OH)₃(s), (v) I₂(s) + 5F₂ ⇌ 2IF₅।
उत्तर: (i) Kc = [NO]²[Cl₂]/[NOCl]²। (ii) Kc = [NO₂]⁴[O₂] (ठोसों की सांद्रता स्थिर)। (iii) Kc = [CH₃COOH][C₂H₅OH]/[CH₃COOC₂H₅] (जल विलायक, स्थिर)। (iv) Kc = 1/([Fe³⁺][OH⁻]³)। (v) Kc = [IF₅]²/[F₂]⁵ (I₂ ठोस)। - प्रश्न: Kp के मान से निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए — (i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl₂(g); Kp = 1.8×10⁻² at 500 K, (ii) CaCO₃(s) ⇌ CaO(s) + CO₂(g); Kp = 167 at 1073 K।
उत्तर: (i) Δn_g = 1; Kc = Kp/(RT) = 1.8×10⁻²/(0.0831 × 500) = 4.33×10⁻⁴। (ii) Δn_g = 1; Kc = 167/(0.0831 × 1073) = 1.87। - प्रश्न: साम्य NO(g) + O₃(g) ⇌ NO₂(g) + O₂(g) के लिए 1000 K पर Kc = 6.3×10¹⁴ है। साम्य में अग्र एवं प्रतीप दोनों अभिक्रियाएँ प्राथमिक रूप से द्विअणुक हैं। प्रतीप अभिक्रिया के लिए Kc क्या है?
उत्तर: प्रतीप अभिक्रिया का Kc = 1/(6.3×10¹⁴) = 1.59×10⁻¹⁵। - प्रश्न: साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?
उत्तर: शुद्ध ठोस और शुद्ध द्रव की मोलर सांद्रता (घनत्व/मोलर द्रव्यमान) निश्चित ताप पर स्थिर रहती है — वह साम्य स्थिरांक में समाहित हो जाती है, इसलिए व्यंजक में उसे नहीं लिखा जाता। - प्रश्न: N₂ एवं O₂ के मध्य निम्नलिखित अभिक्रिया होती है — 2N₂(g) + O₂(g) ⇌ 2N₂O(g)। यदि एक 10 L के पात्र में 0.482 मोल N₂ एवं 0.933 मोल O₂ रखे जाएँ तथा एक ताप, जिसपर N₂O बनने दिया जाए तो साम्य मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए। Kc = 2.0×10⁻³⁷।
उत्तर: Kc अत्यंत छोटा है — N₂O नगण्य बनेगा। साम्य पर [N₂] ≈ 0.0482 M, [O₂] ≈ 0.0933 M, [N₂O] = √(Kc × [N₂]² × [O₂]) = √(2.0×10⁻³⁷ × 0.0482² × 0.0933) = 6.58×10⁻²¹ M। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड Br₂ से अभिक्रिया कर नाइट्रोसिल ब्रोमाइड बनाती है — 2NO(g) + Br₂(g) ⇌ 2NOBr(g)। जब स्थिर ताप पर एक बंद पात्र में 0.087 मोल NO एवं 0.0437 मोल Br₂ मिश्रित किए जाते हैं, तब 0.0518 मोल NOBr प्राप्त होती है। NO एवं Br₂ की साम्य मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: NOBr 0.0518 मोल बनने में NO 0.0518 मोल और Br₂ 0.0259 मोल खपत हुए। साम्य पर NO = 0.087 − 0.0518 = 0.0352 मोल; Br₂ = 0.0437 − 0.0259 = 0.0178 मोल। - प्रश्न: साम्य 2SO₂(g) + O₂(g) ⇌ 2SO₃(g) के लिए 450 K पर Kp = 2.0×10¹⁰ bar है। इस ताप पर Kc का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: Δn_g = −1; Kp = Kc(RT)^Δn_g → Kc = Kp × RT = 2.0×10¹⁰ × 0.0831 × 450 = 7.48×10¹¹। - प्रश्न: HI(g) का एक नमूना 0.2 atm दाब पर एक फ्लास्क में रखा जाता है। साम्य पर HI(g) का आंशिक दाब 0.04 atm है। यहाँ दिए गए साम्य के लिए Kp का मान क्या होगा? 2HI(g) ⇌ H₂(g) + I₂(g)।
उत्तर: वियोजन: HI = 0.2 − 2x = 0.04 → x = 0.08; p(H₂) = p(I₂) = 0.08 atm। Kp = (0.08 × 0.08)/(0.04)² = 4.0। - प्रश्न: 500 K ताप पर एक 20 L पात्र में N₂ के 1.57 मोल, H₂ के 1.92 मोल एवं NH₃ के 8.13 मोल का मिश्रण लिया जाता है। अभिक्रिया N₂(g) + 3H₂(g) ⇌ 2NH₃(g) के लिए Kc का मान 1.7×10² है। क्या अभिक्रिया-मिश्रण साम्य में है? यदि नहीं, तो नेट अभिक्रिया की दिशा क्या होगी?
उत्तर: सांद्रताएँ: [N₂] = 0.0785, [H₂] = 0.096, [NH₃] = 0.4065 M। Qc = (0.4065)²/(0.0785 × 0.096³) = 2379 > Kc (170)। मिश्रण साम्य में नहीं है; नेट अभिक्रिया प्रतीप दिशा (NH₃ का वियोजन) में होगी। - प्रश्न: एक गैस अभिक्रिया के लिए Kc = [NH₃]⁴[O₂]⁵/([NO]⁴[H₂O]⁶) है, तो इस व्यंजक के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर: 4NO(g) + 6H₂O(g) ⇌ 4NH₃(g) + 5O₂(g)। - प्रश्न: H₂O का एक मोल एवं CO का एक मोल 725 K ताप पर 10 L के पात्र में लिए जाते हैं। साम्य पर 40% जल (भारात्मक) CO के साथ निम्नलिखित समीकरण के अनुसार अभिक्रिया करता है — H₂O(g) + CO(g) ⇌ H₂(g) + CO₂(g)। अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर: साम्य पर: H₂O = 0.6, CO = 0.6, H₂ = 0.4, CO₂ = 0.4 मोल। K = (0.4 × 0.4)/(0.6 × 0.6) = 0.44। - प्रश्न: 700 K ताप पर अभिक्रिया H₂(g) + I₂(g) ⇌ 2HI(g) के लिए साम्य स्थिरांक 54.8 है। यदि हमने शुरू में HI(g) लिया हो, 700 K ताप साम्य स्थापित हो, तथा साम्य पर 0.5 mol L⁻¹ HI(g) उपस्थित हो, तो साम्य पर H₂(g) एवं I₂(g) की सांद्रताएँ क्या होंगी?
उत्तर: 2HI ⇌ H₂ + I₂ में: [H₂] = [I₂] = x; K = [HI]²/([H₂][I₂]) = 0.25/x² = 54.8 → x = √(0.25/54.8) = 0.0675 M। अतः [H₂] = [I₂] = 0.0675 M। - प्रश्न: ICl, जिसकी सांद्रता प्रारंभ में 0.78 M है, को यदि साम्य पर आने दिया जाए, तो प्रत्येक की साम्य पर सांद्रताएँ क्या होंगी? 2ICl(g) ⇌ I₂(g) + Cl₂(g); Kc = 0.14।
उत्तर: मानें [I₂] = [Cl₂] = x; [ICl] = 0.78 − 2x। Kc = x²/(0.78 − 2x)² = 0.14 → x/(0.78 − 2x) = 0.374 → x = 0.167 M। साम्य पर [I₂] = [Cl₂] = 0.167 M, [ICl] = 0.78 − 0.334 = 0.446 M। - प्रश्न: नीचे दर्शाए गए साम्य में 899 K पर Kp का मान 0.04 atm है। C₂H₆ की साम्य पर सांद्रता क्या होगी यदि 4.0 atm दाब पर C₂H₆ को एक फ्लास्क में रखा गया है एवं साम्यावस्था पर आने दिया जाता है? C₂H₆(g) ⇌ C₂H₄(g) + H₂(g)।
उत्तर: मानें वियोजन x atm: p(C₂H₆) = 4 − x, p(C₂H₄) = p(H₂) = x। Kp = x²/(4 − x) = 0.04 → x² + 0.04x − 0.16 = 0 → x = 0.38 atm। साम्य पर p(C₂H₆) = 3.62 atm। - प्रश्न: ऐथेनॉल एवं ऐसीटिक अम्ल की अभिक्रिया से ऐथिल ऐसीटेट बनाया जाता है एवं साम्य को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है — CH₃COOH(l) + C₂H₅OH(l) ⇌ CH₃COOC₂H₅(l) + H₂O(l)। (i) इस अभिक्रिया के लिए सांद्रता अनुपात (अभिक्रिया-भागफल) Qc लिखिए। (ii) यदि 293 K पर 1.00 मोल ऐसीटिक अम्ल एवं 0.18 मोल ऐथेनॉल प्रारंभ में लिए जाएँ तो अंतिम साम्य मिश्रण में 0.171 मोल ऐथिल ऐसीटेट है। साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए। (iii) 0.5 मोल ऐथेनॉल एवं 1.0 मोल ऐसीटिक अम्ल से प्रारंभ करते हुए 293 K ताप पर कुछ समय पश्चात् ऐथिल ऐसीटेट के 0.214 मोल पाए गए तो क्या साम्य स्थापित हो गया?
उत्तर: (i) Qc = [CH₃COOC₂H₅][H₂O]/([CH₃COOH][C₂H₅OH])। (ii) साम्य पर: अम्ल 0.829, ऐल्कोहॉल 0.009, एस्टर 0.171, जल 0.171 → K = (0.171 × 0.171)/(0.829 × 0.009) = 3.92। (iii) उस क्षण Q = (0.214 × 0.214)/((1 − 0.214)(0.5 − 0.214)) = 0.204 < K (3.92) — साम्य अभी स्थापित नहीं हुआ है; अभिक्रिया अग्र दिशा में जारी रहेगी। - प्रश्न: 437 K ताप पर निर्वात में PCl₅ का एक नमूना एक फ्लास्क में लिया गया। साम्य स्थापित होने पर PCl₅ की सांद्रता 0.5×10⁻¹ mol L⁻¹ पाई गई, यदि Kc का मान 8.3×10⁻³ है, तो साम्य पर PCl₃ एवं Cl₂ की सांद्रताएँ क्या होंगी? PCl₅(g) ⇌ PCl₃(g) + Cl₂(g)।
उत्तर: [PCl₃] = [Cl₂] = x; Kc = x²/0.05 = 8.3×10⁻³ → x = √(8.3×10⁻³ × 0.05) = 0.0204 M। - प्रश्न: लोह अयस्क से स्टील बनाते समय जो अभिक्रिया होती है, वह आयरन (II) ऑक्साइड का कार्बन मोनोक्साइड के द्वारा अपचयन है एवं इससे धात्विक लोह एवं CO₂ मिलते हैं। FeO(s) + CO(g) ⇌ Fe(s) + CO₂(g); Kp = 0.265 atm at 1050 K। 1050 K पर CO एवं CO₂ के साम्य पर आंशिक दाब क्या होंगे, यदि उनके प्रारंभिक आंशिक दाब हैं — p_CO = 1.4 atm एवं p_CO₂ = 0.80 atm।
उत्तर: प्रारंभिक Q = 0.80/1.4 = 0.571 > Kp (0.265) — अभिक्रिया प्रतीप दिशा में जाएगी। मानें x atm प्रतीप: (0.80 − x)/(1.4 + x) = 0.265 → x = 0.339। साम्य पर p_CO = 1.74 atm, p_CO₂ = 0.46 atm। - प्रश्न: अभिक्रिया N₂(g) + 3H₂(g) ⇌ 2NH₃(g) के लिए (500 K पर) साम्य स्थिरांक Kc = 0.061 है। एक विशेष समय पर मिश्रण का संघटन इस प्रकार है — 3.0 mol L⁻¹ N₂, 2.0 mol L⁻¹ H₂ एवं 0.5 mol L⁻¹ NH₃। क्या अभिक्रिया साम्य में है? यदि नहीं, तो साम्य स्थापित करने के लिए अभिक्रिया किस दिशा में अग्रसर होगी?
उत्तर: Qc = (0.5)²/(3.0 × 2.0³) = 0.0104 < Kc (0.061) — साम्य में नहीं है; अभिक्रिया अग्र दिशा (NH₃ निर्माण) में अग्रसर होगी। - प्रश्न: ब्रोमीन मोनोक्लोराइड BrCl विघटित होकर ब्रोमीन एवं क्लोरीन देता है तथा साम्य स्थापित होता है: 2BrCl(g) ⇌ Br₂(g) + Cl₂(g)। इसके लिए 500 K पर Kc = 32 है। यदि प्रारंभ में BrCl की सांद्रता 3.3×10⁻³ mol L⁻¹ हो, तो साम्य पर मिश्रण में इसकी सांद्रता क्या होगी?
उत्तर: मानें [Br₂] = [Cl₂] = x; [BrCl] = 3.3×10⁻³ − 2x। Kc = x²/(3.3×10⁻³ − 2x)² = 32 → x/(3.3×10⁻³ − 2x) = 5.657 → x = 1.52×10⁻³। साम्य पर [BrCl] = 3.3×10⁻³ − 3.03×10⁻³ = 2.68×10⁻⁴ M। - प्रश्न: 1127 K एवं 1 atm दाब पर CO तथा CO₂ के गैसीय मिश्रण में साम्यावस्था पर ठोस कार्बन में 90.55% (भारात्मक) CO है। C(s) + CO₂(g) ⇌ 2CO(g) — उपरोक्त ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc के मान की गणना कीजिए।
उत्तर: 100 g गैस में: CO = 90.55 g = 3.234 मोल, CO₂ = 9.45 g = 0.2148 मोल; मोल-अंश CO = 0.9377, CO₂ = 0.0623। 1 atm पर Kp = (0.9377)²/0.0623 = 14.11; Δn_g = 1, इसलिए Kc = Kp/(RT) = 14.11/(0.0821 × 1127) = 0.153। - प्रश्न: 298 K पर NO एवं O₂ से NO₂ बनती है — NO(g) + ½O₂(g) ⇌ NO₂(g)। अभिक्रिया के लिए (क) ΔG° एवं (ख) साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए — ΔfG°(NO₂) = 52.0 kJ/mol, ΔfG°(NO) = 87.0 kJ/mol, ΔfG°(O₂) = 0 kJ/mol।
उत्तर: (क) ΔG° = 52.0 − 87.0 − 0 = −35.0 kJ mol⁻¹। (ख) K = e^(−ΔG°/RT) = e^(35000/(8.314 × 298)) = 1.37×10⁶। - प्रश्न: निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य में जब आयतन बढ़ाकर दाब कम किया जाता है, तब बतलाइए कि अभिक्रिया के उत्पादों के मोलों की संख्या बढ़ती है या घटती है या समान रहती है? (क) PCl₅(g) ⇌ PCl₃(g) + Cl₂(g), (ख) CaO(s) + CO₂(g) ⇌ CaCO₃(s), (ग) 3Fe(s) + 4H₂O(g) ⇌ Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)।
उत्तर: (क) गैसीय मोल 1 → 2 बढ़ते हैं — दाब घटाने पर साम्य अग्र दिशा में जाएगा, उत्पादों के मोल बढ़ेंगे। (ख) गैसीय मोल 1 → 0 घटते हैं — दाब घटाने पर साम्य प्रतीप दिशा में जाएगा, उत्पाद (CaCO₃) के मोल घटेंगे। (ग) गैसीय मोल दोनों ओर 4 हैं — दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं, मोल समान रहेंगे। - प्रश्न: निम्नलिखित में से दाब बढ़ाने पर कौन-कौन सी अभिक्रियाएँ प्रभावित होंगी? यह भी बताएँ कि दाब परिवर्तन करने पर अभिक्रिया अग्र या प्रतीप दिशा में गतिमान होगी? (i) COCl₂(g) ⇌ CO(g) + Cl₂(g), (ii) CH₄(g) + 2S₂(g) ⇌ CS₂(g) + 2H₂S(g), (iii) CO₂(g) + C(s) ⇌ 2CO(g), (iv) 2H₂(g) + CO(g) ⇌ CH₃OH(g), (v) CaCO₃(s) ⇌ CaO(s) + CO₂(g), (vi) 4NH₃(g) + 5O₂(g) ⇌ 4NO(g) + 6H₂O(g)।
उत्तर: (i) प्रभावित — गैस मोल 1 → 2; दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा। (ii) अप्रभावित — गैस मोल दोनों ओर 3। (iii) प्रभावित — गैस मोल 1 → 2; दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा। (iv) प्रभावित — गैस मोल 3 → 1; दाब बढ़ाने पर अग्र दिशा। (v) प्रभावित — गैस मोल 0 → 1; दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा। (vi) प्रभावित — गैस मोल 9 → 10; दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए 1024 K पर साम्य स्थिरांक 1.6×10⁵ है। H₂(g) + Br₂(g) ⇌ 2HBr(g)। यदि HBr के 10.0 bar सीलयुक्त पात्र में डाले जाएँ, तो सभी गैसों के 1024 K पर साम्य दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर: HBr का वियोजन: मानें p(H₂) = p(Br₂) = x; p(HBr) = 10 − 2x। K = (10 − 2x)²/x² = 1.6×10⁵ → (10 − 2x)/x = 400 → x = 0.0249 bar। साम्य पर p(H₂) = p(Br₂) = 0.0249 bar, p(HBr) = 9.95 bar। - प्रश्न: निम्नलिखित ऊष्माशोषी अभिक्रिया के अनुसार ऑक्सीकरण द्वारा डाइहाइड्रोजन गैस प्राकृतिक गैस से प्राप्त की जाती है — CH₄(g) + H₂O(g) ⇌ CO(g) + 3H₂(g)। (क) उपरोक्त अभिक्रिया के लिए Kp का व्यंजक लिखिए। (ख) Kp एवं अभिक्रिया मिश्रण का साम्य पर संघटन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि (i) दाब बढ़ा दिया जाए, (ii) ताप बढ़ा दिया जाए, (iii) उत्प्रेरक प्रयुक्त किया जाए।
उत्तर: (क) Kp = p(CO) × p(H₂)³/(p(CH₄) × p(H₂O))। (ख) (i) गैस मोल 2 → 4 बढ़ते हैं — दाब बढ़ाने पर साम्य प्रतीप दिशा में जाएगा (Kp अपरिवर्तित, केवल संघटन बदलेगा)। (ii) अभिक्रिया ऊष्माशोषी है — ताप बढ़ाने पर Kp बढ़ेगा और साम्य अग्र दिशा में जाएगा। (iii) उत्प्रेरक साम्य को तेज़ी से पहुँचाता है, Kp और संघटन अपरिवर्तित रहते हैं। - प्रश्न: साम्य 2H₂(g) + CO(g) ⇌ CH₃OH(g) पर प्रभाव बताइए — (क) H₂ मिलाने पर, (ख) CH₃OH मिलाने पर, (ग) CO हटाने पर, (घ) CH₃OH हटाने पर।
उत्तर: (क) H₂ मिलाने पर साम्य अग्र दिशा में जाएगा (अधिक CH₃OH बनेगा)। (ख) CH₃OH मिलाने पर साम्य प्रतीप दिशा में जाएगा। (ग) CO हटाने पर साम्य प्रतीप दिशा में जाएगा। (घ) CH₃OH हटाने पर साम्य अग्र दिशा में जाएगा। - प्रश्न: 473 K पर फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड PCl₅ के विघटन के लिए Kc का मान 8.3×10⁻³ है। यदि विघटन इस प्रकार दर्शाया जाए, तो PCl₅(g) ⇌ PCl₃(g) + Cl₂(g); ΔᵣH° = 124.0 kJ mol⁻¹। (क) अभिक्रिया के लिए Kc का व्यंजक लिखिए। (ख) प्रतीप अभिक्रिया के लिए समान ताप पर Kc का मान क्या होगा? (ग) यदि (i) और अधिक PCl₅ मिलाया जाए, (ii) दाब बढ़ाया जाए तथा (iii) ताप बढ़ाया जाए, तो Kc पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर: (क) Kc = [PCl₃][Cl₂]/[PCl₅]। (ख) प्रतीप अभिक्रिया का Kc = 1/(8.3×10⁻³) = 120.5। (ग) (i) PCl₅ मिलाने से Kc अपरिवर्तित — केवल संघटन बदलता है। (ii) दाब बढ़ाने से Kc अपरिवर्तित (निश्चित ताप पर स्थिरांक है)। (iii) ताप बढ़ाने से ऊष्माशोषी अग्र अभिक्रिया का Kc बढ़ेगा। - प्रश्न: हाबर विधि में प्रयुक्त हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस से प्राप्त मेथेन को उच्च ताप की भाप से क्रिया कर बनाया जाता है। दो पदों वाली अभिक्रिया में प्रथम पद में CO एवं H₂ बनती हैं। दूसरे पद में प्रथम पद में बनने वाली CO और अधिक भाप से अभिक्रिया करती है। CO(g) + H₂O(g) ⇌ CO₂(g) + H₂(g)। यदि 400°C पर अभिक्रिया पात्र में CO एवं भाप का सममोलर मिश्रण इस प्रकार लिया जाए कि p_CO = p_H₂O = 4.0 bar, H₂ का साम्यावस्था पर आंशिक दाब क्या होगा? 400°C पर Kp = 10.1।
उत्तर: मानें x bar H₂ बनता है: p(CO) = p(H₂O) = 4 − x, p(CO₂) = p(H₂) = x। Kp = x²/(4 − x)² = 10.1 → x/(4 − x) = 3.178 → x = 3.04 bar। साम्य पर p(H₂) = 3.04 bar। - प्रश्न: बताइए कि निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों की सांद्रता सुप्रेक्ष्य होगी — (क) Cl₂(g) ⇌ 2Cl(g); Kc = 5×10⁻³⁹, (ख) Cl₂(g) + 2NO(g) ⇌ 2NOCl(g); Kc = 3.7×10⁸, (ग) Cl₂(g) + 2NO₂(g) ⇌ 2NO₂Cl(g); Kc = 1.8।
उत्तर: (क) Kc अत्यंत छोटा — केवल अभिकारक (Cl₂) सुप्रेक्ष्य होगा। (ख) Kc बहुत बड़ा — केवल उत्पाद (NOCl) सुप्रेक्ष्य होगा। (ग) Kc ≈ 1.8 — अभिकारक और उत्पाद दोनों सुप्रेक्ष्य सांद्रता में होंगे। - प्रश्न: 25°C पर अभिक्रिया 3O₂(g) ⇌ 2O₃(g) के लिए Kc का मान 2.0×10⁻⁵⁰ है। यदि वायु में 25°C ताप पर O₂ की साम्यावस्था सांद्रता 1.6×10⁻² है, तो O₃ की सांद्रता क्या होगी?
उत्तर: [O₃] = √(Kc × [O₂]³) = √(2.0×10⁻⁵⁰ × (1.6×10⁻²)³) = √(8.19×10⁻⁵⁶) = 2.86×10⁻²⁸ M। - प्रश्न: CO(g) + 3H₂(g) ⇌ CH₄(g) + H₂O(g) अभिक्रिया एक लिटर फ्लास्क में 1300 K पर साम्यावस्था में है। इसमें CO के 0.3 मोल, H₂ के 0.01 मोल, H₂O के 0.02 मोल एवं CH₄ की अज्ञात मात्रा है। दिए गए ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc का मान 3.90 है। मिश्रण में CH₄ की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: Kc = [CH₄][H₂O]/([CO][H₂]³) = 3.90 → [CH₄] = 3.90 × 0.3 × (0.01)³/0.02 = 5.85×10⁻⁵ मोल। - प्रश्न: संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म का क्या अर्थ है? निम्नलिखित स्पीशीज़ के लिए संयुग्मी अम्ल/क्षार बताइए — HNO₂, CN⁻, HClO₄, F⁻, OH⁻, CO₃²⁻ एवं S²⁻।
उत्तर: संयुग्मी युग्म: दो स्पीशीज़ जो एक प्रोटॉन के अंतर से संबंधित हों। HNO₂ का संयुग्मी क्षार NO₂⁻; CN⁻ का संयुग्मी अम्ल HCN; HClO₄ का संयुग्मी क्षार ClO₄⁻; F⁻ का संयुग्मी अम्ल HF; OH⁻ का संयुग्मी अम्ल H₂O (तथा संयुग्मी क्षार O²⁻); CO₃²⁻ का संयुग्मी अम्ल HCO₃⁻; S²⁻ का संयुग्मी अम्ल HS⁻। - प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन से लूइस अम्ल हैं? H₂O, BF₃, H⁺ एवं NH₄⁺।
उत्तर: लूइस अम्ल इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं: BF₃ (B पर अपूर्ण अष्टक) और H⁺ (रिक्त कक्षक) लूइस अम्ल हैं। H₂O लूइस क्षारक है (एकाकी युग्म देता है)। NH₄⁺ लूइस अम्ल नहीं है — N का अष्टक पूर्ण है और कोई रिक्त कक्षक नहीं है (यह केवल ब्रन्स्टेड अम्ल है)। - प्रश्न: निम्नलिखित ब्रन्स्टेड अम्लों के लिए संयुग्मी क्षारकों के सूत्र लिखिए — HF, H₂SO₄ एवं HCO₃⁻।
उत्तर: HF → F⁻; H₂SO₄ → HSO₄⁻; HCO₃⁻ → CO₃²⁻। - प्रश्न: ब्रन्स्टेड क्षारकों NH₂⁻, NH₃ तथा HCOO⁻ के संयुग्मी अम्ल लिखिए।
उत्तर: NH₂⁻ → NH₃; NH₃ → NH₄⁺; HCOO⁻ → HCOOH। - प्रश्न: स्पीशीज़ H₂O, HCO₃⁻, HSO₄⁻ तथा NH₃ ब्रन्स्टेड अम्ल तथा क्षारक — दोनों की भाँति व्यवहार करते हैं। प्रत्येक के संयुग्मी अम्ल तथा क्षारक बताइए।
उत्तर: H₂O: संयुग्मी अम्ल H₃O⁺, संयुग्मी क्षारक OH⁻। HCO₃⁻: संयुग्मी अम्ल H₂CO₃, संयुग्मी क्षारक CO₃²⁻। HSO₄⁻: संयुग्मी अम्ल H₂SO₄, संयुग्मी क्षारक SO₄²⁻। NH₃: संयुग्मी अम्ल NH₄⁺, संयुग्मी क्षारक NH₂⁻। - प्रश्न: निम्नलिखित स्पीशीज़ को लूइस अम्ल तथा क्षारक में वर्गीकृत कीजिए तथा बताइए कि ये किस प्रकार लूइस अम्ल-क्षारक के समान कार्य करते हैं — (क) OH⁻, (ख) F⁻, (ग) H⁺, (घ) BCl₃।
उत्तर: (क) OH⁻ लूइस क्षारक (एकाकी युग्म देता है)। (ख) F⁻ लूइस क्षारक (एकाकी युग्म देता है)। (ग) H⁺ लूइस अम्ल (इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है)। (घ) BCl₃ लूइस अम्ल (B पर अपूर्ण अष्टक, इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है)। - प्रश्न: एक मृदु पेय के नमूने में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता 3.8×10⁻³ M है। उसकी pH परिकलित कीजिए।
उत्तर: pH = −log(3.8×10⁻³) = 2.42। - प्रश्न: सिरके के एक नमूने की pH, 3.76 है, इसमें हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: [H⁺] = 10^(−3.76) = 1.74×10⁻⁴ M। - प्रश्न: HF, HCOOH तथा HCN का 298 K पर आयनन स्थिरांक क्रमशः 6.8×10⁻⁴, 1.8×10⁻⁴ तथा 4.8×10⁻⁹ है। इनके संगत संयुग्मी क्षारकों के आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: Kb = Kw/Ka: F⁻ के लिए 1.0×10⁻¹⁴/6.8×10⁻⁴ = 1.47×10⁻¹¹; HCOO⁻ के लिए 1.0×10⁻¹⁴/1.8×10⁻⁴ = 5.56×10⁻¹¹; CN⁻ के लिए 1.0×10⁻¹⁴/4.8×10⁻⁹ = 2.08×10⁻⁶। - प्रश्न: फीनॉल का आयनन स्थिरांक 1.0×10⁻¹⁰ है। 0.05 M फीनॉल के विलयन में फीनॉलेट आयन की सांद्रता तथा 0.01 M सोडियम फीनेट विलयन में उसके जलयोजन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 0.05 M फीनॉल में [C₆H₅O⁻] = √(Ka × C) = √(1.0×10⁻¹⁰ × 0.05) = 2.24×10⁻⁶ M। सोडियम फीनेट के लिए जलयोजन स्थिरांक Kh = Kw/Ka = 1.0×10⁻¹⁴/1.0×10⁻¹⁰ = 1.0×10⁻⁴; जलयोजन मात्रा h = √(Kh/C) = √(1.0×10⁻⁴/0.01) = 0.1; [OH⁻] = h × C = 1.0×10⁻³ M। - प्रश्न: H₂S का प्रथम आयनन स्थिरांक 9.1×10⁻⁸ है। इसके 0.1 M विलयन में HS⁻ आयनों की सांद्रता की गणना कीजिए तथा बताइए कि यदि इसमें 0.1 M HCl भी उपस्थित हो, तो सांद्रता किस प्रकार प्रभावित होगी, यदि H₂S का द्वितीय वियोजन स्थिरांक 1.2×10⁻¹³ हो, तो सल्फाइड S²⁻ आयनों की दोनों स्थितियों में सांद्रता की गणना कीजिए।
उत्तर: [HS⁻] = √(Ka₁ × C) = √(9.1×10⁻⁸ × 0.1) = 9.54×10⁻⁵ M। बिना HCl के [S²⁻] = Ka₂ = 1.2×10⁻¹³ M (लगभग)। 0.1 M HCl की उपस्थिति में सम-आयन प्रभाव से [HS⁻] घटकर Ka₁ × [H₂S]/[H⁺] = 9.1×10⁻⁸ × 0.1/0.1 = 9.1×10⁻⁸ M रह जाती है, और [S²⁻] = Ka₂ × [HS⁻]/[H⁺] = 1.2×10⁻¹³ × 9.1×10⁻⁸/0.1 = 1.09×10⁻¹⁹ M। - प्रश्न: ऐसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.74×10⁻⁵ है। इसके 0.05 M विलयन में वियोजन की मात्रा, ऐसीटेट आयन सांद्रता तथा pH का परिकलन कीजिए।
उत्तर: α = √(Ka/C) = √(1.74×10⁻⁵/0.05) = 0.0187। [CH₃COO⁻] = α × C = 9.33×10⁻⁴ M। pH = −log(9.33×10⁻⁴) = 3.03। - प्रश्न: 0.01 M कार्बनिक अम्ल (HA) के विलयन की pH, 4.15 है। इसके ऋणायन की सांद्रता, अम्ल का आयनन स्थिरांक तथा pKa मान परिकलित कीजिए।
उत्तर: [H⁺] = [A⁻] = 10^(−4.15) = 7.08×10⁻⁵ M। Ka = [H⁺]²/(C − [H⁺]) = (7.08×10⁻⁵)²/(0.01 − 7.08×10⁻⁵) = 5.05×10⁻⁷। pKa = 6.30। - प्रश्न: पूर्ण वियोजन मानते हुए निम्नलिखित विलयनों के pH ज्ञात कीजिए — (क) 0.003 M HCl, (ख) 0.005 M NaOH, (ग) 0.002 M HBr, (घ) 0.002 M KOH।
उत्तर: (क) pH = −log(0.003) = 2.52; (ख) pOH = −log(0.005) = 2.30, pH = 11.70; (ग) pH = −log(0.002) = 2.70; (घ) pOH = −log(0.002) = 2.70, pH = 11.30। - प्रश्न: निम्नलिखित विलयनों के pH ज्ञात कीजिए — (क) 2 ग्राम TlOH को जल में घोलकर 2 लिटर विलयन बनाया जाए, (ख) 0.3 ग्राम Ca(OH)₂ को जल में घोलकर 500 mL विलयन बनाया जाए, (ग) 0.3 ग्राम NaOH को जल में घोलकर 200 mL विलयन बनाया जाए, (घ) 13.6 M HCl के 1 mL को जल से तनुकरण करके कुल आयतन 1 लिटर किया जाए।
उत्तर: (क) TlOH = 2/221.4 = 0.00903 मोल; 2 L में 0.00452 M; pOH = 2.35, pH = 11.65। (ख) Ca(OH)₂ = 0.3/74 = 0.00405 मोल; [OH⁻] = 2 × 0.00405/0.5 = 0.0162 M; pH = 12.21। (ग) NaOH = 0.3/40 = 0.0075 मोल; 0.2 L में 0.0375 M; pH = 12.57। (घ) HCl = 13.6 × 0.001 = 0.0136 M; pH = 1.87। - प्रश्न: ब्रोमोऐसीटिक अम्ल की आयनन की मात्रा 0.132 है। 0.1 M अम्ल की pH तथा pKa का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: [H⁺] = 0.132 × 0.1 = 0.0132 M; pH = 1.88। Ka = α²C/(1 − α) = (0.132)² × 0.1/(1 − 0.132) = 2.01×10⁻³; pKa = 2.70। - प्रश्न: 0.005 M कोडीन (C₁₈H₂₁NO₃) विलयन की pH 9.95 है। इसका आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: pOH = 14 − 9.95 = 4.05; [OH⁻] = 10^(−4.05) = 8.91×10⁻⁵ M। Kb = [OH⁻]²/C = (8.91×10⁻⁵)²/0.005 = 1.59×10⁻⁶। - प्रश्न: 0.001 M ऐनीलीन विलयन का pH क्या है? ऐनीलीन का आयनन स्थिरांक सारणी 7.7 से ले सकते हैं। इसके संयुग्मी अम्ल का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: ऐनीलीन का Kb = 4.27×10⁻¹⁰ (सारणी से)। [OH⁻] = √(Kb × C) = √(4.27×10⁻¹⁰ × 0.001) = 6.53×10⁻⁷ M; pOH = 6.19, pH = 7.81। संयुग्मी अम्ल (C₆H₅NH₃⁺) का Ka = Kw/Kb = 1.0×10⁻¹⁴/4.27×10⁻¹⁰ = 2.34×10⁻⁵। - प्रश्न: यदि 0.05 M ऐसीटिक अम्ल के pKa का मान 4.74 है, तो आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि इसे (अ) 0.01 M, (ब) 0.1 M HCl विलयन में डाला जाए, तो वियोजन की मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है?
उत्तर: शुद्ध विलयन में α = √(Ka/C) = √(1.82×10⁻⁵/0.05) = 0.0191। सम-आयन प्रभाव से: (अ) 0.01 M HCl में α = Ka/[H⁺] = 1.82×10⁻⁵/0.01 = 0.00182; (ब) 0.1 M HCl में α = 1.82×10⁻⁵/0.1 = 0.000182। HCl की सांद्रता बढ़ने पर वियोजन घटता है। - प्रश्न: डाइमेथिल एमीन का आयनन स्थिरांक 5.4×10⁻⁴ है। इसके 0.02 M विलयन की आयनन की मात्रा की गणना कीजिए। यदि यह विलयन NaOH प्रति 0.1 M हो तो डाइमेथिल एमीन का प्रतिशत आयनन क्या होगा?
उत्तर: α = √(Kb/C) = √(5.4×10⁻⁴/0.02) = 0.164। 0.1 M NaOH की उपस्थिति में सम-आयन प्रभाव से α = Kb/[OH⁻] = 5.4×10⁻⁴/0.1 = 0.0054, अर्थात् 0.54% आयनन। - प्रश्न: निम्नलिखित जैविक द्रवों, जिनमें pH दी गई है, की हाइड्रोजन आयन सांद्रता परिकलित कीजिए — (क) मानव पेशीय द्रव, 6.83; (ख) मानव उदर द्रव, 1.2; (ग) मानव रुधिर, 7.38; (घ) मानव लार, 6.4।
उत्तर: (क) 10^(−6.83) = 1.48×10⁻⁷ M; (ख) 10^(−1.2) = 6.31×10⁻² M; (ग) 10^(−7.38) = 4.17×10⁻⁸ M; (घ) 10^(−6.4) = 3.98×10⁻⁷ M। - प्रश्न: दूध, कॉफी, टमाटर रस, नींबू रस तथा अंडे की सफेदी के pH का मान क्रमशः 6.8, 5.0, 4.2, 2.2 तथा 7.8 है। प्रत्येक के संगत H⁺ आयन की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: दूध: 1.58×10⁻⁷ M; कॉफी: 1.0×10⁻⁵ M; टमाटर रस: 6.31×10⁻⁵ M; नींबू रस: 6.31×10⁻³ M; अंडे की सफेदी: 1.58×10⁻⁸ M। - प्रश्न: 298 K पर 0.561 g, KOH जल में घोलने पर प्राप्त 200 mL विलयन की है pH, पोटैशियम, हाइड्रोजन तथा हाइड्रॉक्सिल आयनों की सांद्रताएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर: KOH = 0.561/56.1 = 0.01 मोल; 0.2 L में 0.05 M। [K⁺] = [OH⁻] = 0.05 M; pH = 12.70; [H⁺] = Kw/[OH⁻] = 1.0×10⁻¹⁴/0.05 = 2.0×10⁻¹³ M। - प्रश्न: 298 K पर Sr(OH)₂ विलयन की विलेयता 19.23 g/L है। स्ट्रॉन्शियम तथा हाइड्रॉक्सिल आयन की सांद्रता तथा विलयन की pH ज्ञात कीजिए।
उत्तर: Sr(OH)₂ का मोलर द्रव्यमान 121.6; विलेयता = 19.23/121.6 = 0.158 M। [Sr²⁺] = 0.158 M, [OH⁻] = 0.316 M; pOH = 0.50, pH = 13.50। - प्रश्न: प्रोपेनोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.32×10⁻⁵ है। 0.05 M अम्ल विलयन के आयनन की मात्रा तथा pH ज्ञात कीजिए। यदि विलयन में 0.01 M HCl मिलाया जाए तो उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: α = √(1.32×10⁻⁵/0.05) = 0.0162; [H⁺] = 0.0162 × 0.05 = 8.12×10⁻⁴ M; pH = 3.09। 0.01 M HCl मिलाने पर α = Ka/[H⁺] = 1.32×10⁻⁵/0.01 = 0.00132। - प्रश्न: यदि साइनिक अम्ल (HCNO) के 0.1 M विलयन की pH, 2.34 हो, तो अम्ल के आयनन स्थिरांक तथा आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: [H⁺] = 10^(−2.34) = 4.57×10⁻³ M; α = 4.57×10⁻³/0.1 = 0.0457। Ka = [H⁺]²/(C − [H⁺]) = (4.57×10⁻³)²/(0.1 − 0.00457) = 2.19×10⁻⁴। - प्रश्न: यदि नाइट्रस अम्ल का आयनन स्थिरांक 4.5×10⁻⁴ है, तो 0.04 M सोडियम नाइट्राइट विलयन की pH तथा जलयोजन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: NO₂⁻ का Kh = Kw/Ka = 1.0×10⁻¹⁴/4.5×10⁻⁴ = 2.22×10⁻¹¹। जलयोजन मात्रा h = √(Kh/C) = √(2.22×10⁻¹¹/0.04) = 2.36×10⁻⁵। [OH⁻] = h × C = 9.43×10⁻⁷ M; pOH = 6.03, pH = 7.97। - प्रश्न: यदि पीरीडिनियम हाइड्रोजन क्लोराइड के 0.02 M विलयन का pH 3.44 है, तो पीरीडीन का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: पीरीडिनियम आयन के लिए [H⁺] = 10^(−3.44) = 3.63×10⁻⁴ M; Ka(संयुग्मी अम्ल) = (3.63×10⁻⁴)²/(0.02 − 0.000363) = 6.71×10⁻⁶। पीरीडीन का Kb = Kw/Ka = 1.0×10⁻¹⁴/6.71×10⁻⁶ = 1.49×10⁻⁹। - प्रश्न: निम्नलिखित लवणों के जलीय विलयनों के उदासीन, अम्लीय तथा क्षारीय होने की प्रागुक्ति कीजिए — NaCl, KBr, NaCN, NH₄NO₃, NaNO₂ तथा KF।
उत्तर: NaCl: उदासीन (प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक)। KBr: उदासीन। NaCN: क्षारीय (दुर्बल अम्ल HCN का लवण)। NH₄NO₃: अम्लीय (दुर्बल क्षारक NH₃ का लवण)। NaNO₂: क्षारीय (दुर्बल अम्ल HNO₂ का लवण)। KF: क्षारीय (दुर्बल अम्ल HF का लवण)। - प्रश्न: क्लोरोऐसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.35×10⁻³ है। 0.1 M अम्ल तथा इसके 0.1 M सोडियम लवण की pH ज्ञात कीजिए।
उत्तर: अम्ल: [H⁺] = √(Ka × C) = √(1.35×10⁻³ × 0.1) = 0.0116 M; pH = 1.93। लवण (सोडियम क्लोरोऐसीटेट): pH = 7 + ½pKa + ½log C = 7 + ½(2.87) + ½(−1) = 7.94। - प्रश्न: 310 K पर जल का आयनिक गुणनफल 2.7×10⁻¹⁴ है। इसी तापक्रम पर उदासीन जल की pH ज्ञात कीजिए।
उत्तर: उदासीन जल में [H⁺] = √Kw = √(2.7×10⁻¹⁴) = 1.64×10⁻⁷ M; pH = 6.78। - प्रश्न: निम्नलिखित मिश्रणों की pH परिकलित कीजिए — (क) 0.2 M Ca(OH)₂ का 10 mL + 0.1 M HCl का 25 mL, (ख) 0.01 M H₂SO₄ का 10 mL + 0.01 M Ca(OH)₂ का 10 mL, (ग) 0.1 M H₂SO₄ का 10 mL + 0.1 M KOH का 10 mL।
उत्तर: (क) OH⁻ = 2 × 0.2 × 10 = 4 mmol; H⁺ = 0.1 × 25 = 2.5 mmol; शेष OH⁻ = 1.5 mmol/35 mL = 0.0429 M; pH = 12.63। (ख) H⁺ = 2 × 0.01 × 10 = 0.2 mmol; OH⁻ = 2 × 0.01 × 10 = 0.2 mmol — पूर्ण उदासीनीकरण, pH = 7.00। (ग) H⁺ = 2 × 0.1 × 10 = 2 mmol; OH⁻ = 0.1 × 10 = 1 mmol; शेष H⁺ = 1 mmol/20 mL = 0.05 M; pH = 1.30। - प्रश्न: सिल्वर क्रोमेट, बेरियम क्रोमेट, फेरिक हाइड्रॉक्साइड, लेड क्लोराइड तथा मरक्यूरस आयोडाइड विलयन की सारणी 7.9 में दिए गए विलेयता गुणनफल स्थिरांक की सहायता से विलेयता ज्ञात कीजिए तथा प्रत्येक आयन की मोलरता भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: सारणी 7.9 के Ksp मानों से: Ag₂CrO₄ (Ksp = 1.1×10⁻¹²): s = (Ksp/4)^(1/3) = 6.5×10⁻⁵ M; [Ag⁺] = 1.3×10⁻⁴ M, [CrO₄²⁻] = 6.5×10⁻⁵ M। BaCrO₄ (Ksp = 1.2×10⁻¹⁰): s = 1.1×10⁻⁵ M। Fe(OH)₃ (Ksp = 2.79×10⁻³⁹): s = (Ksp/27)^(1/4) ≈ 1.4×10⁻¹⁰ M। PbCl₂ (Ksp = 1.6×10⁻⁵): s = (Ksp/4)^(1/3) = 1.59×10⁻² M। Hg₂I₂ (Ksp = 4.5×10⁻²⁹): s = (Ksp/4)^(1/3) ≈ 2.2×10⁻¹⁰ M। - प्रश्न: Ag₂CrO₄ तथा AgBr का विलेयता गुणनफल स्थिरांक क्रमशः 1.1×10⁻¹² तथा 5.0×10⁻¹³ है। उनके संतृप्त विलयन की मोलरता का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर: Ag₂CrO₄ की विलेयता s₁ = (1.1×10⁻¹²/4)^(1/3) = 6.50×10⁻⁵ M; AgBr की विलेयता s₂ = √(5.0×10⁻¹³) = 7.07×10⁻⁷ M। अनुपात s₁/s₂ = 91.97 ≈ 92। - प्रश्न: यदि 0.002 M सांद्रता वाले सोडियम आयोडेट तथा क्यूप्रिक लवण विलयन के समान आयतन को मिलाया जाए, तो क्या कॉपर आयोडेट का अवक्षेपण होगा? (कॉपर आयोडेट के लिए Ksp = 7.4×10⁻⁸)
उत्तर: मिलाने के बाद [Cu²⁺] = [IO₃⁻] = 0.001 M। आयनिक गुणनफल = [Cu²⁺][IO₃⁻]² = 0.001 × (0.001)² = 1.0×10⁻⁹ < Ksp (7.4×10⁻⁸) — अवक्षेपण नहीं होगा। - प्रश्न: बेन्ज़ोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 6.46×10⁻⁵ तथा सिल्वर बेन्ज़ोएट का Ksp 2.5×10⁻¹³ है। 3.19 pH वाले बफर विलयन में सिल्वर बेन्ज़ोएट जल की तुलना में कितना गुना विलेय होगा?
उत्तर: जल में विलेयता s = √Ksp। बफर (pH 3.19) में बेन्ज़ोएट का अधिकांश भाग HBz में बदल जाता है; विलेयता s′ = s × (1 + [H⁺]/Ka) = s × (1 + 10^(−3.19)/6.46×10⁻⁵) = s × (1 + 10.0) = 11 s। अतः लगभग 11 गुना अधिक विलेय होगा। - प्रश्न: फैरस सल्फेट तथा सोडियम सल्फाइड के सममोलर विलयनों की अधिकतम सांद्रता बताइए जब उनके समान आयतन मिलाने पर आयरन सल्फाइड अवक्षेपित न हो। (आयरन सल्फाइड के लिए Ksp = 6.3×10⁻¹⁸)
उत्तर: मिलाने के बाद प्रत्येक की सांद्रता आधी (c/2) रहती है; अवक्षेपण न होने की शर्त (c/2)² ≤ Ksp → c ≤ 2√Ksp = 2 × 2.51×10⁻⁹ = 5.02×10⁻⁹ M। - प्रश्न: 1 ग्राम कैल्सियम सल्फेट को घोलने के लिए कम से कम कितने आयतन जल की आवश्यकता होगी? (कैल्सियम सल्फेट के लिए Ksp = 9.1×10⁻⁶)
उत्तर: विलेयता s = √Ksp = 3.02×10⁻³ mol L⁻¹; द्रव्यमान प्रति लिटर = 3.02×10⁻³ × 136 = 0.410 g L⁻¹। 1 g के लिए आयतन = 1/0.410 = 2.44 L। - प्रश्न: 0.1 M HCl में हाइड्रोजन सल्फाइड से संतृप्त विलयन की सांद्रता 1.0×10⁻¹⁹ M है। यदि इस विलयन का 10 mL निम्नलिखित 0.04 M विलयन के 5 mL डाला जाए, तो किन विलयनों से अवक्षेप प्राप्त होगा? FeSO₄, MnCl₂, ZnCl₂ एवं CdCl₂।
उत्तर: मिलाने के बाद [M²⁺] = 0.04 × 5/15 = 0.0133 M; [S²⁻] = 1.0×10⁻¹⁹ × 10/15 = 6.67×10⁻²⁰ M। आयनिक गुणनफल = 0.0133 × 6.67×10⁻²⁰ = 8.9×10⁻²²। यह ZnS (Ksp ≈ 1.6×10⁻²⁴) और CdS (Ksp ≈ 8.0×10⁻²⁷) के Ksp से अधिक है — इसलिए ZnCl₂ और CdCl₂ से अवक्षेप प्राप्त होगा; FeS और MnS के Ksp अधिक हैं, इसलिए FeSO₄ और MnCl₂ से अवक्षेप नहीं मिलेगा।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘गतिक साम्य’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘गतिक साम्य’ का अर्थ है — दरें बराबर, अभिक्रियाएँ जारी।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘साम्य स्थिरांक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘साम्य स्थिरांक’ का अर्थ है — उत्पाद/अभिकारक का अनुपात।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘ला-शातेलिए सिद्धांत’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ला-शातेलिए सिद्धांत’ का अर्थ है — बदलाव का विरोध करने की दिशा।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘pH’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘pH’ का अर्थ है — −log[H⁺]।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘बफ़र’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘बफ़र’ का अर्थ है — pH को स्थिर रखने वाला विलयन।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘अभिक्रिया भागफल Q’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘साम्यावस्था’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘अभिक्रिया भागफल Q’ का अर्थ है — किसी भी क्षण सांद्रताओं से बना वही अनुपात जो K में होता है; Q की K से तुलना दिशा बताती है।। ‘साम्यावस्था’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘साम्यावस्था’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘साम्यावस्था’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘साम्यावस्था’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘साम्यावस्था’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘साम्यावस्था’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
- साम्य गतिक है; K केवल ताप पर निर्भर करता है; Q < K → आगे, Q > K → पीछे।
- Kp = Kc(RT)Δn; ठोस/द्रव व्यंजक में नहीं आते।
- ला-शातेलिए: सांद्रता, दाब, ताप के बदलाव का विरोध; उत्प्रेरक K नहीं बदलता।
- Kw = 10−14 (25°C); pH + pOH = 14; pH = −log[H+]।
- दुर्बल अम्ल: [H+] ≈ √(KaC); बफ़र: pH = pKa + log([लवण]/[अम्ल])।
- अवक्षेप तभी जब आयनिक गुणनफल > Ksp; सम-आयन विलेयता घटाता है।

