Chapter 7: अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
ऑक्सीकरण संख्या, उपचयन-अपचयन की पहचान, असमानुपातन और आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण-संतुलन — रेडॉक्स का पूरा अध्याय।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
अपचयोपचय अभिक्रियाएँ — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Rasayan Vigyan Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry) | Chapter 7 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
ऑक्सीकरण संख्या
ऑक्सीकरण संख्या वह काल्पनिक आवेश है जो परमाणु पर तब होता जब उसके सारे आबंध आयनिक होते। यौगिक में सभी ऑक्सीकरण संख्याओं का योग यौगिक के आवेश के बराबर होता है।
मुक्त तत्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है, ऑक्सीजन की प्रायः −2 और हाइड्रोजन की प्रायः +1 होती है।
अपचयोपचय अभिक्रिया की पहचान
जिस पदार्थ की ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है, उसका उपचयन होता है; जिसकी घटती है, उसका अपचयन होता है। उपचायक वह है जो स्वयं अपचयित होकर दूसरे का उपचयन करे।
एक ही अभिक्रिया में उपचयन और अपचयन साथ होते हैं — इसीलिए उसे अपचयोपचय (redox) कहते हैं। असमानुपातन में एक ही पदार्थ का उपचयन और अपचयन दोनों होता है।
अभिक्रियाओं का संतुलन
रेडॉक्स समीकरण संतुलित करने की आयन-इलेक्ट्रॉन विधि में उपचयन और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाएँ अलग लिखी जाती हैं, इलेक्ट्रॉन बराबर किए जाते हैं और फिर जोड़ा जाता है।
अम्लीय माध्यम में H⁺ और H₂O से ऑक्सीजन व हाइड्रोजन का संतुलन किया जाता है।
ऑक्सीकरण और अपचयन की आधुनिक परिभाषा
पुरानी परिभाषा में ऑक्सीकरण का अर्थ ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना था, पर आधुनिक परिभाषा इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण पर आधारित है: उपचयन (oxidation) = इलेक्ट्रॉन का त्याग, ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना; अपचयन (reduction) = इलेक्ट्रॉन का ग्रहण, ऑक्सीकरण संख्या का घटना। एक ही अभिक्रिया में दोनों साथ होते हैं — इसीलिए उसे अपचयोपचय (redox) अभिक्रिया कहते हैं। उपचायक (oxidant) वह पदार्थ है जो स्वयं अपचयित होकर दूसरे का उपचयन करे; अपचायक (reductant) स्वयं उपचयित होकर दूसरे का अपचयन करे।
ऑक्सीकरण संख्या — नियम
ऑक्सीकरण संख्या वह काल्पनिक आवेश है जो परमाणु पर तब होता जब उसके सारे आबंध आयनिक होते। नियम: (1) मुक्त तत्व की ऑक्सीकरण संख्या 0; (2) एकपरमाणुक आयन की उसके आवेश के बराबर; (3) यौगिक/आयन में सभी ऑक्सीकरण संख्याओं का योग यौगिक के आवेश के बराबर; (4) F हमेशा −1; (5) O प्रायः −2 (परऑक्साइड में −1, OF2 में +2); (6) H प्रायः +1 (धात्विक हाइड्राइड में −1); (7) क्षार धातुएँ +1, क्षारीय मृदा धातुएँ +2। उदाहरण: KMnO4 में Mn = +7 (K +1, O −2×4 = −8, योग शून्य → Mn = +7); K2Cr2O7 में Cr = +6; H2SO4 में S = +6।
रेडॉक्स अभिक्रियाओं के प्रकार
(1) संयोजन: A + B → AB, जैसे 2Mg + O2 → 2MgO (Mg का उपचयन, O का अपचयन)। (2) अपघटन: AB → A + B, जैसे 2KClO3 → 2KCl + 3O2। (3) विस्थापन: धातु विस्थापन (Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu) और अधातु विस्थापन (Cl2 + 2KBr → 2KCl + Br2)। (4) असमानुपातन (disproportionation): एक ही पदार्थ का उपचयन और अपचयन दोनों — जैसे 2Cu+ → Cu2+ + Cu, और 3ClO− → 2Cl− + ClO3−। धातुओं की सक्रियता श्रेणी बताती है कि कौन-सी धातु किसे विस्थापित कर सकती है — श्रेणी में ऊपर वाली धातु नीचे वाली के आयन को विस्थापित करती है।
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से संतुलन
अम्लीय माध्यम में संतुलन के चरण: (1) अभिक्रिया को उपचयन और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाओं में बाँटो। (2) उपचयन संख्या बदलने वाले परमाणुओं को छोड़कर बाकी संतुलित करो। (3) इलेक्ट्रॉन जोड़कर आवेश संतुलित करो। (4) इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर करके दोनों अर्ध-अभिक्रियाएँ जोड़ो। (5) O के संतुलन के लिए H2O और H के संतुलन के लिए H+ जोड़ो। क्षारीय माध्यम में अंत में H+ को OH− से उदासीन करके H2O बना लो। उदाहरण: MnO4− + Fe2+ (अम्लीय) → Mn2+ + Fe3+ का संतुलित रूप है: MnO4− + 8H+ + 5Fe2+ → Mn2+ + 4H2O + 5Fe3+।
रेडॉक्स अनुमापन और इलेक्ट्रोड विभव का विचार
रेडॉक्स अनुमापनों (जैसे KMnO4 बनाम Fe2+ या ऑक्सैलिक अम्ल) में सूचक की ज़रूरत प्रायः नहीं पड़ती, क्योंकि KMnO4 स्वयं गुलाबी रंग का सूचक है — अंतिम बिंदु पर हल्का स्थायी गुलाबी रंग आता है। विद्युत-रासायनिक श्रेणी (मानक इलेक्ट्रोड विभवों की श्रेणी) बताती है कि कौन-सा पदार्थ प्रबल उपचायक है (धनात्मक E° — जैसे F2, MnO4− अम्लीय माध्यम में) और कौन-सा प्रबल अपचायक है (ऋणात्मक E° — जैसे Li, Zn)। इसी श्रेणी से धातुओं की सक्रियता और सेल का विद्युत वाहक बल समझा जाता है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| प्रक्रम | ऑक्सीकरण संख्या |
|---|---|
| उपचयन | बढ़ती है |
| अपचयन | घटती है |
किसी यौगिक में सभी ऑक्सीकरण संख्याओं का योग आवेश के बराबर होना चाहिए। उत्तर निकालने के बाद यह योग ज़रूर जाँचो — यह एक पंक्ति की आत्म-जाँच है।
उपचायक और अपचायक को उल्टा न लिखो: जो स्वयं अपचयित होता है वही उपचायक है। 'उपचायक = अपचयित होता है' — यह वाक्य याद रखो।
अम्लीय माध्यम में संतुलन करते समय क्रम याद रखो: परमाणु (O छोड़कर) → इलेक्ट्रॉन (आवेश) → O के लिए H2O → H के लिए H+। इसी क्रम से गलती नहीं होती।

चित्र 1: चित्र 1 में रेडॉक्स की पहचान से संतुलन तक का क्रम दिखाया गया है।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): रेडॉक्स का मूल: Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu में Zn की ऑक्सीकरण संख्या 0 से +2 होती है (उपचयन, इलेक्ट्रॉन त्याग) और Cu2+ की +2 से 0 होती है (अपचयन, इलेक्ट्रॉन ग्रहण)। उपचायक स्वयं अपचयित होता है।
मुख्य शब्द / Key Terms
- ऑक्सीकरण संख्या: काल्पनिक आवेश।
- उपचयन: ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना।
- अपचयन: ऑक्सीकरण संख्या का घटना।
- उपचायक: स्वयं अपचयित होकर दूसरे का उपचयन करे।
- असमानुपातन: एक ही पदार्थ का उपचयन और अपचयन।
- उपचयन (Oxidation): इलेक्ट्रॉन का त्याग; ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना।
- अपचयन (Reduction): इलेक्ट्रॉन का ग्रहण; ऑक्सीकरण संख्या का घटना।
- अपचायक: जो स्वयं उपचयित होकर दूसरे का अपचयन करे।
- आयन-इलेक्ट्रॉन विधि: अर्ध-अभिक्रियाओं से रेडॉक्स समीकरण संतुलित करने की विधि।
याद रखें
- ऑक्सीकरण संख्या आवेश नहीं, एक गणना-उपकरण है।
- उपचयन और अपचयन हमेशा साथ होते हैं।
- मुक्त तत्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।
- संतुलन में आवेश भी संतुलित होना चाहिए।
- फ्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या हमेशा −1 होती है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: उपचायक और अपचायक को उल्टा लिख देना। उपचायक स्वयं अपचयित होता है — नाम दूसरे के काम से पड़ता है, अपने बदलाव से नहीं।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- ऑक्सीकरण संख्या किसे कहते हैं? संकेत: काल्पनिक आवेश जो आबंध आयनिक होने पर होता।
- उपचयन में ऑक्सीकरण संख्या कैसी होती है? संकेत: बढ़ती है।
- उपचायक क्या है? संकेत: जो स्वयं अपचयित होकर दूसरे का उपचयन करे।
- असमानुपातन क्या है? संकेत: एक ही पदार्थ का उपचयन और अपचयन दोनों।
- मुक्त सोडियम की ऑक्सीकरण संख्या कितनी है? संकेत: शून्य।
मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच
ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।
- प्रश्न: निम्न में Mn की ऑक्सीकरण संख्या बताओ: MnO2, KMnO4, MnSO4।
उत्तर: MnO2: O = −2×2 = −4, इसलिए Mn = +4। KMnO4: K = +1, O = −8, इसलिए Mn = +7। MnSO4: SO4 = −2, इसलिए Mn = +2। - प्रश्न: Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu में उपचायक, अपचायक, उपचयन और अपचयन पहचानो।
उत्तर: Zn की ऑक्सीकरण संख्या 0 से +2 हुई — उपचयन, Zn अपचायक है। Cu2+ की +2 से 0 हुई — अपचयन, CuSO4 (Cu2+) उपचायक है। - प्रश्न: असमानुपातन का एक उदाहरण समीकरण सहित दो और बताओ कि वह असमानुपातन क्यों है।
उत्तर: 2Cu+ → Cu2+ + Cu: Cu+ की एक मात्रा +2 (उपचयन) और दूसरी 0 (अपचयन) हो जाती है — एक ही स्पीशीज़ का दोनों बदलाव असमानुपातन है। दूसरा: 3ClO− → 2Cl− + ClO3− (Cl: +1 से −1 और +5)। - प्रश्न: अम्लीय माध्यम में MnO4− + Fe2+ → Mn2+ + Fe3+ को संतुलित करो।
उत्तर: अर्ध-अभिक्रियाएँ: MnO4− + 8H+ + 5e− → Mn2+ + 4H2O; Fe2+ → Fe3+ + e− (×5)। जोड़ने पर: MnO4− + 8H+ + 5Fe2+ → Mn2+ + 4H2O + 5Fe3+। - प्रश्न: H2O2 में O की ऑक्सीकरण संख्या −1 क्यों है, −2 क्यों नहीं?
उत्तर: H2O2 में O–O आबंध है (परऑक्साइड)। योग नियम से: 2(+1) + 2x = 0 → x = −1। परऑक्साइड में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या −1 ही होती है — यह नियम का अपवाद है, गलती नहीं। - प्रश्न: क्या Zn, CuSO4 विलयन से Cu को विस्थापित कर सकता है? क्या Cu, ZnSO4 से Zn को विस्थापित कर सकता है?
उत्तर: हाँ — Zn, Cu से अधिक सक्रिय है, इसलिए Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu होती है। उल्टा नहीं: Cu, Zn से कम सक्रिय है, इसलिए Cu + ZnSO4 में कोई अभिक्रिया नहीं होगी। - प्रश्न: K2Cr2O7 में Cr की ऑक्सीकरण संख्या निकालो।
उत्तर: K = +1×2 = +2, O = −2×7 = −14। योग शून्य होने के लिए 2Cr = +12, इसलिए Cr = +6। - प्रश्न: ऑक्सीकरण संख्या और संयोजकता में क्या अंतर है? FeCl3 से समझाओ।
उत्तर: संयोजकता आबंध बनाने की क्षमता है (FeCl3 में Fe की संयोजकता 3), ऑक्सीकरण संख्या काल्पनिक आवेश है (FeCl3 में Fe की +3)। संख्या कई बार समान होती है, पर अवधारणा अलग है — ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक भी हो सकती है (जैसे Fe3O4 में Fe की +8/3)। - प्रश्न: KMnO4 अनुमापन में सूचक क्यों नहीं डाला जाता?
उत्तर: क्योंकि KMnO4 स्वयं गहरा गुलाबी है। अंतिम बिंदु पर एक बूँद अधिक KMnO4 विलयन में हल्का स्थायी गुलाबी रंग दे देती है — यही स्वयं-सूचक (self-indicator) का काम करता है। - प्रश्न: Cl2 + 2KBr → 2KCl + Br2 में कौन उपचयित और कौन अपचयित हुआ?
उत्तर: Br− की ऑक्सीकरण संख्या −1 से 0 हुई — उपचयन (Br− अपचायक)। Cl2 की 0 से −1 हुई — अपचयन (Cl2 उपचायक)। यह अधातु-विस्थापन रेडॉक्स है।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- H₂O में O की ऑक्सीकरण संख्या कितनी है? उत्तर: −2।
- KMnO₄ में Mn की ऑक्सीकरण संख्या निकालिए। उत्तर: K +1, O −2×4 = −8, इसलिए Mn = +7।
- रेडॉक्स संतुलन में इलेक्ट्रॉन क्यों बराबर किए जाते हैं? उत्तर: क्योंकि दिए गए इलेक्ट्रॉन ही लिए जाते हैं।
- अम्लीय माध्यम में ऑक्सीजन का संतुलन कैसे करते हैं? उत्तर: H₂O जोड़कर।
- जंग लगना रेडॉक्स क्यों है? उत्तर: क्योंकि लोहे का उपचयन और ऑक्सीजन का अपचयन साथ होता है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न
नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।
अभ्यास 8 (पुस्तक-अध्याय 8)
- प्रश्न: निम्नलिखित स्पीशीज़ में प्रत्येक रेखांकित तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या का निर्धारण कीजिए — (क) NaH₂PO₄, (ख) NaHSO₄, (ग) H₄P₂O₇, (घ) K₂MnO₄, (ङ) CaO₂, (च) NaBH₄, (छ) H₂S₂O₇, (ज) KAl(SO₄)₂·12H₂O।
उत्तर: (क) NaH₂PO₄ में P = +5; (ख) NaHSO₄ में S = +6; (ग) H₄P₂O₇ में P = +5; (घ) K₂MnO₄ में Mn = +6; (ङ) CaO₂ में O = −1 (परऑक्साइड); (च) NaBH₄ में B = +3 (H हाइड्राइड रूप में −1 है); (छ) H₂S₂O₇ में S = +6; (ज) KAl(SO₄)₂·12H₂O में S = +6। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों के रेखांकित तत्वों की ऑक्सीकरण-संख्या क्या है तथा इन परिणामों को आप कैसे प्राप्त करते हैं? (क) KI₃, (ख) H₂S₄O₆, (ग) Fe₃O₄, (घ) CH₃CH₂OH, (ङ) CH₃COOH।
उत्तर: (क) KI₃ में I की औसत ऑक्सीकरण-संख्या = −1/3 (I₃⁻ में एक I, −1 और दो I, 0 होते हैं)। (ख) H₂S₄O₆ में S की औसत = +2.5 (संरचना में दो S, +5 और दो S, 0 होते हैं)। (ग) Fe₃O₄ में Fe की औसत = +8/3 (एक Fe²⁺ और दो Fe³⁺)। (घ) CH₃CH₂OH में CH₃ कार्बन = −3 और CH₂ कार्बन = −1। (ङ) CH₃COOH में CH₃ कार्बन = −3 और COOH कार्बन = +3। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं को अपचयोपचय अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करने का प्रयास करें — (क) CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(g), (ख) Fe₂O₃(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO₂(g), (ग) 4BCl₃(g) + 3LiAlH₄(s) → 2B₂H₆(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl₃(s), (घ) 2K(s) + F₂(g) → 2K⁺F⁻(s), (ङ) 4NH₃(g) + 5O₂(g) → 4NO(g) + 6H₂O(g)।
उत्तर: (क) Cu +2 → 0 (अपचयन), H 0 → +1 (ऑक्सीकरण) — रेडॉक्स है। (ख) Fe +3 → 0 (अपचयन), C +2 → +4 (ऑक्सीकरण) — रेडॉक्स है। (ग) B +3 → −3 (अपचयन), H −1 → +1 (ऑक्सीकरण) — रेडॉक्स है। (घ) K 0 → +1 (ऑक्सीकरण), F 0 → −1 (अपचयन) — रेडॉक्स है। (ङ) N −3 → +2 (ऑक्सीकरण), O 0 → −2 (अपचयन) — रेडॉक्स है। - प्रश्न: फ्लुओरीन बर्फ से अभिक्रिया करके यह परिवर्तन लाती है — H₂O(s) + F₂(g) → HF(g) + HOF(g)। इस अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित कीजिए।
उत्तर: F₂ (0) से HF में F (−1) अपचयित होता है और HOF में F (+1) ऑक्सीकृत होता है — F₂ का असमानुपातन है; साथ ही O (−2) से HOF में O (0) ऑक्सीकृत होता है। यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है। - प्रश्न: H₂SO₅, Cr₂O₇²⁻ तथा NO₃⁻ में सल्फर, क्रोमियम तथा नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण-संख्या की गणना कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा इसमें हेत्वाभास (Fallacy) का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर: H₂SO₅ (कैरो अम्ल) में S = +6 — सीधे नियम लगाने पर +8 आता है, जो भ्रम है; वास्तविक संरचना में एक परऑक्साइड O–O आबंध है (दो O की ऑक्सीकरण-संख्या −1 है), इसलिए S = +6 ही सही है। Cr₂O₇²⁻ में Cr = +6; NO₃⁻ में N = +5। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए — (क) मरक्यूरी (II) क्लोराइड, (ख) निकेल (II) सल्फेट, (ग) टिन (IV) ऑक्साइड, (घ) थैलियम (I) सल्फेट, (ङ) आयरन (III) सल्फेट, (च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड।
उत्तर: (क) HgCl₂, (ख) NiSO₄, (ग) SnO₂, (घ) Tl₂SO₄, (ङ) Fe₂(SO₄)₃, (च) Cr₂O₃। - प्रश्न: उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए, जिनमें कार्बन −4 से +4 तक की तथा नाइट्रोजन −3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
उत्तर: कार्बन: CH₄ (−4), CH₃Cl (−2), CH₂O (0), HCOOH (+2), CO₂ (+4)। नाइट्रोजन: NH₃ (−3), N₂H₄ (−2), N₂ (0), N₂O (+1), NO (+2), HNO₂ (+3), NO₂ (+4), HNO₃ (+5)। - प्रश्न: अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परऑक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक — दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओज़ोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?
उत्तर: SO₂ में S (+4) मध्यवर्ती अवस्था में है — वह +6 तक ऑक्सीकृत भी हो सकता है और 0/−2 तक अपचयित भी। H₂O₂ में O (−1) मध्यवर्ती है — O₂ (0) तक ऑक्सीकृत और H₂O (−2) तक अपचयित हो सकता है। O₃ में O (0) केवल अपचयित हो सकता है (उच्चतम अवस्था नहीं, बल्कि O की सामान्य अवस्था −2 की ओर जाता है) और HNO₃ में N (+5) अपनी उच्चतम अवस्था में है — वह केवल अपचयित हो सकता है, ऑक्सीकृत नहीं। - प्रश्न: इन अभिक्रियाओं को देखिए — (क) 6CO₂(g) + 6H₂O(l) → C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(g), (ख) O₃(g) + H₂O₂(l) → H₂O(l) + 2O₂(g)। बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज़्यादा उचित क्यों है? (क) 6CO₂(g) + 12H₂O(l) → C₆H₁₂O₆(aq) + 6H₂O(l) + 6O₂(g), (ख) O₃(g) + H₂O₂(l) → H₂O(l) + O₂(g) + O₂(g)। उपरोक्त अपचयोपचय अभिक्रियाओं (क) तथा (ख) के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
उत्तर: पहले रूप में जल के स्रोत का पता नहीं चलता — दूसरे रूप में दिखता है कि प्रकाश-संश्लेषण में मुक्त O₂ जल से आती है, CO₂ से नहीं; और ओज़ोन अभिक्रिया में दो O₂ अणुओं के स्रोत अलग-अलग हैं (एक O₃ से, एक H₂O₂ से)। अन्वेषण विधि: समस्थानिक चिह्नन (¹⁸O) — जल को ¹⁸O से चिह्नित करके देखें कि O₂ में ¹⁸O आता है या नहीं। - प्रश्न: AgF₂ एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए, तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों?
उत्तर: AgF₂ में Ag की ऑक्सीकरण-संख्या +2 है, जो सिल्वर के लिए असामान्य है — Ag²⁺ आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी Ag⁺ (+1) बन जाता है, इसलिए AgF₂ प्रबल ऑक्सीकारक है। - प्रश्न: ‘जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया संपन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।’ इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
उत्तर: उदाहरण: (i) P₄ + Cl₂ (कम) → PCl₃; P₄ + Cl₂ (अधिक) → PCl₅। (ii) Fe + HCl (कम/तनु) → FeCl₂; Fe + Cl₂ (अधिक) → FeCl₃। (iii) C + O₂ (कम) → CO; C + O₂ (अधिक) → CO₂। - प्रश्न: इन प्रेक्षणों की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे? (क) यद्यपि क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट — दोनों ही ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलुइन से बेंज़ोइक अम्ल बनाने के लिए हम ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं? इस अभिक्रिया के लिए संतुलित अपचयोपचय समीकरण दीजिए। (ख) क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गंध वाली HCl गैस प्राप्त होती है, परंतु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?
उत्तर: (क) ऐल्कोहॉलिक KMnO₄ (क्षारीय माध्यम) टॉलुइन के मेथिल समूह का चयनात्मक ऑक्सीकरण करके बेंज़ोइक अम्ल बनाता है; अम्लीय KMnO₄ अधिक प्रबल होकर वलय को भी तोड़ सकता है। संतुलित समीकरण: C₆H₅CH₃ + 2KMnO₄ → C₆H₅COOK + 2MnO₂ + KOH + H₂O (क्षारीय माध्यम, सरलीकृत)। (ख) सांद्र H₂SO₄, Cl⁻ को HCl में बदलता है (केवल अम्ल-क्षार अभिक्रिया); Br⁻ प्रबल अपचायक है, इसलिए H₂SO₄ उसे Br₂ में ऑक्सीकृत कर देता है — लाल वाष्प Br₂ की होती है। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए — (क) 2AgBr(s) + C₆H₆O₂(aq) → 2Ag(s) + 2HBr(aq) + C₆H₄O₂(aq), (ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH₃)₂]⁺(aq) + 3OH⁻(aq) → 2Ag(s) + HCOO⁻(aq) + 4NH₃(aq) + 2H₂O(l), (ग) HCHO(l) + 2Cu²⁺(aq) + 5OH⁻(aq) → Cu₂O(s) + HCOO⁻(aq) + 3H₂O(l), (घ) N₂H₄(l) + 2H₂O₂(l) → N₂(g) + 4H₂O(l), (ङ) Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq) → 2PbSO₄(s) + 2H₂O(l)।
उत्तर: (क) ऑक्सीकृत: C₆H₆O₂ (हाइड्रोक्विनोन); अपचित: AgBr; ऑक्सीकारक: AgBr; अपचायक: C₆H₆O₂। (ख) ऑक्सीकृत: HCHO; अपचित: [Ag(NH₃)₂]⁺; ऑक्सीकारक: [Ag(NH₃)₂]⁺; अपचायक: HCHO। (ग) ऑक्सीकृत: HCHO; अपचित: Cu²⁺; ऑक्सीकारक: Cu²⁺; अपचायक: HCHO। (घ) ऑक्सीकृत: N₂H₄; अपचित: H₂O₂; ऑक्सीकारक: H₂O₂; अपचायक: N₂H₄। (ङ) ऑक्सीकृत: Pb (0 → +2); अपचित: PbO₂ (+4 → +2); ऑक्सीकारक: PbO₂; अपचायक: Pb। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है? 2S₂O₃²⁻(aq) + I₂(s) → S₄O₆²⁻(aq) + 2I⁻(aq); S₂O₃²⁻(aq) + 2Br₂(l) + 5H₂O(l) → 2SO₄²⁻(aq) + 4Br⁻(aq) + 10H⁺(aq)।
उत्तर: क्योंकि Br₂, I₂ से प्रबल ऑक्सीकारक है — I₂ थायोसल्फेट को केवल टेट्राथायोनेट (S₄O₆²⁻) तक ऑक्सीकृत कर पाता है, जबकि Br₂ उसे पूरी तरह सल्फेट (SO₄²⁻) तक ऑक्सीकृत कर देता है। - प्रश्न: अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजनों में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहैलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।
उत्तर: F₂ का मानक अपचयन विभव (+2.87 V) हैलोजनों में सबसे अधिक है — वह सभी हैलाइडों को ऑक्सीकृत कर सकता है। HI का अपचयन विभव सबसे कम है — I⁻ आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागकर I₂ बनाता है, इसलिए HI श्रेष्ठ अपचायक है। उदाहरण: F₂ + 2Cl⁻ → 2F⁻ + Cl₂; 2HI + Cl₂ → 2HCl + I₂। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है — XeO₆⁴⁻(aq) + 2F⁻(aq) + 6H⁺(aq) → XeO₃(g) + F₂(g) + 3H₂O(l)। यौगिक Na₄XeO₆ (जिसका एक भाग XeO₆⁴⁻ है) के बारे में आप इस अभिक्रिया से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर: यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें Xe(VIII) अपचयित होकर Xe(VI) बनता है और F⁻ ऑक्सीकृत होकर F₂ बनता है — अर्थात् Xe(VIII) इतना प्रबल ऑक्सीकारक है कि वह F⁻ को भी ऑक्सीकृत कर सकता है। निष्कर्ष: Na₄XeO₆ में Xe की +8 अवस्था अत्यंत प्रबल ऑक्सीकारक है। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में (क) H₃PO₂(aq) + 4AgNO₃(aq) + 2H₂O(l) → H₃PO₄(aq) + 4Ag(s) + 4HNO₃(aq), (ख) H₃PO₂(aq) + 2CuSO₄(aq) + 2H₂O(l) → H₃PO₄(aq) + 2Cu(s) + H₂SO₄(aq), (ग) C₆H₅CHO(l) + 2[Ag(NH₃)₂]⁺(aq) + 3OH⁻(aq) → C₆H₅COO⁻(aq) + 2Ag(s) + 4NH₃(aq) + 2H₂O(l), (घ) C₆H₅CHO(l) + 2Cu²⁺(aq) + 5OH⁻(aq) → कोई परिवर्तन नहीं। इन अभिक्रियाओं से Ag⁺ तथा Cu²⁺ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
उत्तर: Ag⁺, H₃PO₂ और C₆H₅CHO दोनों से अपचयित होकर Ag देता है — Ag⁺ प्रबल ऑक्सीकारक है। Cu²⁺, H₃PO₂ से अपचयित होकर Cu देता है, परंतु C₆H₅CHO (बेंज़ैल्डिहाइड) को ऑक्सीकृत नहीं कर पाता — Cu²⁺, Ag⁺ से दुर्बल ऑक्सीकारक है। - प्रश्न: आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए — (क) MnO₄⁻(aq) + I⁻(aq) → MnO₂(s) + I₂(s) (क्षारीय माध्यम), (ख) MnO₄⁻(aq) + SO₂(g) → Mn²⁺(aq) + HSO₄⁻(aq) (अम्लीय माध्यम), (ग) H₂O₂(aq) + Fe²⁺(aq) → Fe³⁺(aq) + H₂O(l) (अम्लीय माध्यम), (घ) Cr₂O₇²⁻ + SO₂(g) → Cr³⁺(aq) + SO₄²⁻(aq) (अम्लीय माध्यम)।
उत्तर: (क) 2MnO₄⁻ + 6I⁻ + 4H₂O → 2MnO₂ + 3I₂ + 8OH⁻। (ख) 2MnO₄⁻ + 5SO₂ + 2H₂O + H⁺ → 2Mn²⁺ + 5HSO₄⁻। (ग) H₂O₂ + 2Fe²⁺ + 2H⁺ → 2Fe³⁺ + 2H₂O। (घ) Cr₂O₇²⁻ + 3SO₂ + 2H⁺ → 2Cr³⁺ + 3SO₄²⁻ + H₂O। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरणों को आयन इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण-संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा संतुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकरण और अपचायकों की पहचान कीजिए — (क) P₄(s) + OH⁻(aq) → PH₃(g) + HPO₂⁻(aq), (ख) N₂H₄(l) + ClO₃⁻(aq) → NO(g) + Cl⁻(g), (ग) Cl₂O₇(g) + H₂O₂(aq) → ClO₂⁻(aq) + O₂(g) + H⁺।
उत्तर: (क) P₄ + 3OH⁻ + 3H₂O → PH₃ + 3HPO₂⁻ (P₄ असमानुपातन: अपचायक भी, ऑक्सीकारक भी)। (ख) 3N₂H₄ + 4ClO₃⁻ → 6NO + 4Cl⁻ + 6H₂O (अपचायक: N₂H₄; ऑक्सीकारक: ClO₃⁻)। (ग) Cl₂O₇ + 4H₂O₂ + 2OH⁻ → 2ClO₂⁻ + 4O₂ + 5H₂O (अपचायक: H₂O₂; ऑक्सीकारक: Cl₂O₇)। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रिया से आप कौन सी सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं — (CN)₂(g) + 2OH⁻(aq) → CN⁻(aq) + CNO⁻(aq) + H₂O(l)।
उत्तर: यह (CN)₂ का असमानुपातन है — सायनोजन में C की ऑक्सीकरण-संख्या +3 है; CN⁻ में C +2 (अपचयन) और CNO⁻ में C +4 (ऑक्सीकरण) हो जाती है। क्षारीय माध्यम में (CN)₂ सायनाइड और सायनेट में बदल जाता है। - प्रश्न: Mn³⁺ आयन विलयन में अस्थायी होता है तथा असमानुपातन द्वारा Mn²⁺, MnO₂ और H⁺ आयन देता है। इस अभिक्रिया के लिए संतुलित आयनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर: 2Mn³⁺ + 2H₂O → Mn²⁺ + MnO₂ + 4H⁺। - प्रश्न: Cs, Ne, I तथा F में ऐसे तत्व की पहचान कीजिए, जो (क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, (ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, (ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, (घ) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
उत्तर: (क) F — केवल −1। (ख) Cs — केवल +1। (ग) I — −1 से +7 तक। (घ) Ne — उत्कृष्ट गैस, कोई ऑक्सीकरण अवस्था नहीं (0 ही)। - प्रश्न: जल के शुद्धिकरण में क्लोरीन को प्रयोग में लाया जाता है। क्लोरीन की अधिकता हानिकारक होती है। सल्फर डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करके इस अधिकता को दूर किया जाता है। जल में होने वाले इस अपचयोपचय परिवर्तन के लिए संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर: Cl₂ + SO₂ + 2H₂O → 2HCl + H₂SO₄ — Cl₂ अपचयित होकर Cl⁻ बनता है और SO₂ ऑक्सीकृत होकर सल्फेट बनता है। - प्रश्न: इस पुस्तक में दी गई आवर्त सारणी की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए — (क) संभावित अधातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन की अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों। (ख) किन्हीं तीन धातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
उत्तर: (क) P, S, Cl, Br, I — इनकी मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ असमानुपातन दिखाती हैं (जैसे Cl₂ → Cl⁻ + ClO⁻; P₄ → PH₃ + HPO₂⁻)। (ख) Cu⁺ (→ Cu²⁺ + Cu), Mn³⁺ (→ Mn²⁺ + MnO₂) और Au⁺ (→ Au³⁺ + Au) असमानुपातन दिखाते हैं। - प्रश्न: नाइट्रिक अम्ल निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि के प्रथम पद में अमोनिया गैस के ऑक्सीजन गैस द्वारा ऑक्सीकरण से नाइट्रिक ऑक्साइड गैस तथा जलवाष्प बनती है। 10.0 ग्राम अमोनिया तथा 20.00 ग्राम ऑक्सीजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड की कितनी अधिकतम मात्रा प्राप्त हो सकती है?
उत्तर: 4NH₃ + 5O₂ → 4NO + 6H₂O। NH₃ = 10/17 = 0.588 मोल; O₂ = 20/32 = 0.625 मोल। आवश्यक O₂ = 5/4 × 0.588 = 0.735 मोल > 0.625 — O₂ सीमांत। NO = 4/5 × 0.625 = 0.5 मोल = 15.0 g। - प्रश्न: सारणी 8.1 में दिए गए मानक विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या इन अभिकारकों के बीच अभिक्रिया संभव है? (क) Fe³⁺ तथा I⁻(aq), (ख) Ag⁺ तथा Cu(s), (ग) Fe³⁺(aq) तथा Br⁻(aq), (घ) Ag(s) तथा Fe³⁺(aq), (ङ) Br₂(aq) तथा Fe²⁺।
उत्तर: मानक विभव: Fe³⁺/Fe²⁺ = +0.77 V, I₂/I⁻ = +0.54 V, Ag⁺/Ag = +0.80 V, Cu²⁺/Cu = +0.34 V, Br₂/Br⁻ = +1.09 V। (क) संभव (0.77 > 0.54)। (ख) संभव (0.80 > 0.34)। (ग) संभव नहीं (0.77 < 1.09)। (घ) संभव नहीं (0.80 > 0.77, Ag, Fe³⁺ को अपचयित नहीं कर सकता)। (ङ) संभव (1.09 > 0.77)। - प्रश्न: निम्नलिखित में से प्रत्येक के विद्युत्-अपघटन से प्राप्त उत्पादों के नाम बताइए — (क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO₃ का जलीय विलयन, (ख) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO₃ का जलीय विलयन, (ग) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ H₂SO₄ का तनु विलयन, (घ) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl₂ का जलीय विलयन।
उत्तर: (क) कैथोड पर Ag जमा होता है, ऐनोड पर Ag घुलता है (विलयन की सांद्रता अपरिवर्तित)। (ख) कैथोड पर Ag, ऐनोड पर O₂ (जल का ऑक्सीकरण)। (ग) कैथोड पर H₂, ऐनोड पर O₂ (जल का अपघटन)। (घ) कैथोड पर Cu, ऐनोड पर Cl₂। - प्रश्न: निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए — Al, Cu, Fe, Mg तथा Zn।
उत्तर: Mg > Al > Zn > Fe > Cu — अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित करती है। - प्रश्न: नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए — K⁺/K = −2.93 V, Ag⁺/Ag = 0.80 V, Hg²⁺/Hg = 0.79 V, Mg²⁺/Mg = −2.37 V, Cr³⁺/Cr = −0.74 V।
उत्तर: अपचायक क्षमता विभव के घटने के साथ बढ़ती है: Ag < Hg < Cr < Mg < K (K सबसे प्रबल अपचायक)। - प्रश्न: उस गैल्वेनी सेल को चित्रित कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है — Zn(s) + 2Ag⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + 2Ag(s)। अब बताइए कि (क) कौन सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है? (ख) सेल में विद्युत्धारा के वाहक कौन हैं? (ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर: (क) Zn इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है (ऐनोड)। (ख) बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉन (Zn से Ag की ओर) और विलयन में आयन (लवण-सेतु से) धारा के वाहक हैं। (ग) ऐनोड (Zn): Zn → Zn²⁺ + 2e⁻; कैथोड (Ag): 2Ag⁺ + 2e⁻ → 2Ag।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘ऑक्सीकरण संख्या’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ऑक्सीकरण संख्या’ का अर्थ है — काल्पनिक आवेश।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘उपचयन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘उपचयन’ का अर्थ है — ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘अपचयन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘अपचयन’ का अर्थ है — ऑक्सीकरण संख्या का घटना।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘उपचायक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘उपचायक’ का अर्थ है — स्वयं अपचयित होकर दूसरे का उपचयन करे।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘असमानुपातन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘असमानुपातन’ का अर्थ है — एक ही पदार्थ का उपचयन और अपचयन।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘उपचयन (Oxidation)’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘उपचयन (Oxidation)’ का अर्थ है — इलेक्ट्रॉन का त्याग; ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना।। ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘अपचयोपचय अभिक्रियाएँ’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
- उपचयन = इलेक्ट्रॉन त्याग, ऑक्सीकरण संख्या बढ़ना; अपचयन = इलेक्ट्रॉन ग्रहण, संख्या घटना।
- उपचायक स्वयं अपचयित होता है; अपचायक स्वयं उपचयित होता है।
- नियम: मुक्त तत्व 0; F −1; O प्रायः −2 (परऑक्साइड −1); H प्रायः +1; योग = आवेश।
- KMnO4 में Mn +7; K2Cr2O7 में Cr +6; H2SO4 में S +6।
- असमानुपातन: एक ही स्पीशीज़ का उपचयन + अपचयन (2Cu+, 3ClO−)।
- आयन-इलेक्ट्रॉन विधि: अर्ध-अभिक्रिया → इलेक्ट्रॉन बराबर → H2O/H+ से O/H संतुलन।

