Chapter 5: ऊष्मागतिकी
निकाय और परिवेश, ऊष्मागतिकी के नियम, एन्थैल्पी, हेस का नियम, एंट्रॉपी और गिब्ज़ ऊर्जा — स्वतः प्रवर्तिता का पूरा गणित।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ऊष्मागतिकी — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry) | Chapter 5 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
ऊष्मागतिकी की मूल बातें
रसायन में निकाय वह भाग है जिसका अध्ययन होता है और बाकी सब परिवेश है। आंतरिक ऊर्जा U निकाय की कुल ऊर्जा है।
ऊष्मा (Q) और कार्य (W) ऊर्जा के स्थानांतरण के तरीके हैं, स्वयं ऊर्जा के रूप नहीं। ऊष्माशोषी अभिक्रिया ऊष्मा लेती है और ऊष्माक्षेपी ऊष्मा देती है।
एन्थैल्पी और हेस का नियम
स्थिर दाब पर दी गई ऊष्मा एन्थैल्पी में बदलाव ΔH के बराबर होती है। अभिक्रिया की एन्थैल्पी उत्पादों और अभिकारकों की संभवन एन्थैल्पियों के अंतर से निकलती है।
हेस का नियम कहता है कि अभिक्रिया की कुल एन्थैल्पी मार्ग पर निर्भर नहीं करती — इसलिए कई छोटी अभिक्रियाओं की एन्थैल्पी जोड़कर बड़ी अभिक्रिया की एन्थैल्पी निकाली जा सकती है।
स्वतः प्रवर्तिता और गिब्ज़ ऊर्जा
केवल ΔH से अभिक्रिया की स्वतः प्रवर्तिता तय नहीं होती; एंट्रॉपी ΔS भी ज़रूरी है। गिब्ज़ ऊर्जा ΔG = ΔH − TΔS है।
ΔG ऋणात्मक हो तो अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है। कम ताप पर ΔH और अधिक ताप पर TΔS का प्रभाव हावी होता है।
मूल परिभाषाएँ
निकाय वह भाग है जिसका अध्ययन किया जा रहा है, परिवेश उसके आसपास का सब कुछ है। खुला निकाय पदार्थ और ऊर्जा दोनों का विनिमय करता है, बंद निकाय केवल ऊर्जा का, और विलगित निकाय किसी का नहीं। अवस्था-फलन (जैसे U, H, S, G, T, P, V) का मान केवल निकाय की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है, मार्ग पर नहीं; पथ-फलन (q ऊष्मा, w कार्य) मार्ग पर निर्भर करते हैं। आंतरिक ऊर्जा U निकाय की कुल ऊर्जा है — यह मापी नहीं जा सकती, केवल उसका परिवर्तन ΔU मापा जा सकता है।
प्रथम नियम और एन्थैल्पी
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण है: ΔU = q + w (यहाँ w निकाय पर किया गया कार्य है; रसायन की चिह्न-परिपाटी में निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है)। स्थिर आयतन पर w = 0, इसलिए ΔU = qV। स्थिर दाब पर दी गई ऊष्मा एन्थैल्पी-परिवर्तन के बराबर होती है: ΔH = qP, और ΔH = ΔU + ΔngRT, जहाँ Δng गैसीय उत्पादों और अभिकारकों के मोलों का अंतर है। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔH ऋणात्मक (ऊष्मा निकलती है) और ऊष्माशोषी में धनात्मक होती है। मानक संभवन एन्थैल्पी ΔfH° वह ΔH है जब 1 मोल यौगिक अपने तत्वों की मानक अवस्था से बनता है; तत्वों की मानक अवस्था में ΔfH° = 0 माना जाता है।
हेस का नियम और आबंध एन्थैल्पी
हेस का नियम: किसी अभिक्रिया की कुल एन्थैल्पी-परिवर्तन मार्ग पर निर्भर नहीं करती — इसलिए किसी बड़ी अभिक्रिया की ΔH उसके छोटे चरणों की ΔH जोड़कर निकाली जा सकती है। व्यवहार में: ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। आबंध एन्थैल्पी विधि से भी ΔrH का अनुमान लगता है: ΔrH ≈ Σ(टूटे आबंधों की ऊर्जा) − Σ(बने आबंधों की ऊर्जा)। किरचॉफ नियम ताप-परिवर्तन के साथ ΔH के बदलाव को ऊष्माधारिताओं के अंतर से जोड़ता है।
स्वतः प्रवर्तिता, एंट्रॉपी और द्वितीय नियम
केवल ΔH से स्वतः प्रवर्तिता तय नहीं होती — बर्फ़ का पिघलना ऊष्माशोषी है, फिर भी 0°C से ऊपर स्वतः होता है। कारण है एंट्रॉपी S — अव्यवस्था का माप। द्वितीय नियम: किसी स्वतः प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी बढ़ती है (ΔSकुल > 0)। तृतीय नियम: परम शून्य (0 K) पर पूर्ण क्रिस्टल की एंट्रॉपी शून्य होती है। गैसीय मोल बढ़ने पर ΔS धनात्मक होता है; ठोस → द्रव → गैस जाने पर एंट्रॉपी बढ़ती है।
गिब्ज़ ऊर्जा — अंतिम कसौटी
गिब्ज़ ऊर्जा G = H − TS; स्थिर ताप-दाब पर ΔG = ΔH − TΔS। ΔG < 0 → स्वतः प्रवर्तित; ΔG > 0 → अस्वतः; ΔG = 0 → साम्य। चार स्थितियाँ याद रखो: (1) ΔH < 0, ΔS > 0 → सभी ताप पर स्वतः; (2) ΔH > 0, ΔS < 0 → किसी ताप पर स्वतः नहीं; (3) ΔH < 0, ΔS < 0 → केवल कम ताप पर स्वतः; (4) ΔH > 0, ΔS > 0 → केवल उच्च ताप पर स्वतः। साम्य पर ΔG = 0 होने से ΔG° = −RT ln K मिलता है — यही ऊष्मागतिकी और साम्य स्थिरांक की कड़ी है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| चिह्न | अर्थ |
|---|---|
| ΔH ऋणात्मक | ऊष्माक्षेपी |
| ΔH धनात्मक | ऊष्माशोषी |
| ΔG ऋणात्मक | स्वतः प्रवर्तित |
रसायन में: निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक, निकाय पर किया गया कार्य धनात्मक; निकाय द्वारा दी गई ऊष्मा ऋणात्मक, ग्रहण की गई धनात्मक। ΔU = q + w में यही परिपाटी चलती है।
ΔH और ΔU को एक न समझो। गैसीय मोल बदलने पर दोनों अलग होते हैं: ΔH = ΔU + ΔngRT। यदि Δng = 0 हो, तभी ΔH = ΔU।
स्वतः प्रवर्तिता के प्रश्न में पहले ΔH और ΔS के चिह्न देखो — (ΔH < 0, ΔS > 0) हो तो बिना गणना बताए 'सभी ताप पर स्वतः' लिख सकते हो।

चित्र 1: चित्र 1 में एन्थैल्पी से स्वतः प्रवर्तिता तक का क्रम दिखाया गया है।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): हेस का नियम: सीधे मार्ग की ΔH, बीच के सभी चरणों की ΔH के योग के बराबर होती है — क्योंकि एन्थैल्पी अवस्था-फलन है, मार्ग पर निर्भर नहीं करती। ΔG = ΔH − TΔS; ΔG < 0 होने पर प्रक्रम स्वतः प्रवर्तित होता है।
मुख्य शब्द / Key Terms
- निकाय: अध्ययन किया जाने वाला भाग।
- एन्थैल्पी: स्थिर दाब पर ऊष्मा का माप।
- एंट्रॉपी: अव्यवस्था का माप।
- गिब्ज़ ऊर्जा: स्वतः प्रवर्तिता का माप।
- हेस का नियम: एन्थैल्पी मार्ग पर निर्भर नहीं करती।
- अवस्था-फलन: जिसका मान केवल अवस्था पर निर्भर करे, मार्ग पर नहीं — U, H, S, G।
- पथ-फलन: जिसका मान मार्ग पर निर्भर करे — ऊष्मा q, कार्य w।
- मानक संभवन एन्थैल्पी: तत्वों की मानक अवस्था से 1 मोल यौगिक बनने की ΔH।
- ऊष्माधारिता: ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा; CP − CV = R (आदर्श गैस, प्रति मोल)।
याद रखें
- ΔH का चिह्न अभिक्रिया की दिशा बताता है।
- हेस के नियम से अप्रत्यक्ष एन्थैल्पी निकाली जाती है।
- ΔG ऋणात्मक = स्वतः प्रवर्तित।
- एंट्रॉपी ब्रह्मांड में बढ़ती है।
- दहन प्रायः ऊष्माक्षेपी होता है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: ΔH ऋणात्मक होने पर ही अभिक्रिया को स्वतः प्रवर्तित मान लेना। बर्फ का पिघलना ऊष्माशोषी है, फिर भी स्वतः होता है क्योंकि एंट्रॉपी बढ़ती है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी में अंतर बताइए। संकेत: ऊष्माक्षेपी ऊष्मा देती है, ऊष्माशोषी लेती है।
- गिब्ज़ ऊर्जा का सूत्र लिखिए। संकेत: ΔG = ΔH − TΔS।
- हेस का नियम क्या है? संकेत: कुल एन्थैल्पी मार्ग पर निर्भर नहीं करती।
- ΔG ऋणात्मक का अर्थ क्या है? संकेत: अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित है।
- निकाय और परिवेश क्या हैं? संकेत: निकाय अध्ययन का भाग है, बाकी परिवेश है।
मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच
ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।
- प्रश्न: किसी अभिक्रिया में ΔH = −100 kJ/mol और ΔS = −200 J/K/mol है। किस ताप तक यह स्वतः प्रवर्तित रहेगी?
उत्तर: सीमा ताप T = ΔH/ΔS = (−100000)/(−200) = 500 K। ΔH < 0, ΔS < 0 होने से यह केवल कम ताप पर स्वतः है — 500 K से नीचे स्वतः, ऊपर अस्वतः। - प्रश्न: H2(g) + 1/2O2(g) → H2O(l) के लिए ΔH = −286 kJ/mol है। ΔU कितना होगा? (T = 298 K)
उत्तर: Δng = 0 − 1.5 = −1.5। ΔH = ΔU + ΔngRT से ΔU = ΔH − ΔngRT = −286 − (−1.5 × 8.314 × 298/1000) = −286 + 3.72 = −282.28 kJ/mol। - प्रश्न: बर्फ़ का पिघलना ऊष्माशोषी (ΔH > 0) है, फिर भी 25°C पर स्वतः क्यों होता है?
उत्तर: क्योंकि पिघलने में एंट्रॉपी बढ़ती है (ΔS > 0, ठोस → द्रव)। ΔG = ΔH − TΔS में उच्च ताप पर TΔS पद हावी हो जाता है और ΔG ऋणात्मक हो जाता है। 0°C से नीचे ΔH हावी रहता है, इसलिए बर्फ़ नहीं पिघलती। - प्रश्न: हेस के नियम से C(s) + O2(g) → CO2(g) की ΔH निकालो, यदि C + 1/2O2 → CO की ΔH = −110 kJ/mol और CO + 1/2O2 → CO2 की ΔH = −283 kJ/mol है।
उत्तर: दोनों चरण जोड़ने पर CO कट जाता है और कुल अभिक्रिया मिलती है: ΔH = −110 + (−283) = −393 kJ/mol। यही CO2 की मानक संभवन एन्थैल्पी भी है। - प्रश्न: अवस्था-फलन और पथ-फलन में अंतर उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर: अवस्था-फलन (U, H, S, G, T, P, V) का मान केवल वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है — पहाड़ की ऊँचाई की तरह, रास्ता कोई भी हो। पथ-फलन (q, w) मार्ग पर निर्भर करते हैं — जैसे चढ़ाई में किया गया काम रास्ते पर निर्भर करता है। - प्रश्न: किसी प्रक्रम में निकाय 200 J ऊष्मा ग्रहण करता है और 150 J कार्य करता है। ΔU कितना है?
उत्तर: q = +200 J, w = −150 J (निकाय द्वारा कार्य)। ΔU = q + w = 200 − 150 = +50 J — आंतरिक ऊर्जा 50 J बढ़ी। - प्रश्न: ΔG° = −RT ln K का अर्थ बताओ। K > 1 होने पर ΔG° का चिह्न क्या होगा?
उत्तर: यह साम्य स्थिरांक और मानक गिब्ज़ ऊर्जा की कड़ी है। K > 1 होने पर ln K धनात्मक, इसलिए ΔG° ऋणात्मक — अर्थात मानक अवस्था में उत्पादों की ओर झुकाव है। - प्रश्न: ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रिया में ΔH का चिह्न और एक-एक उदाहरण दो।
उत्तर: ऊष्माक्षेपी: ΔH < 0, ऊष्मा निकलती है — दहन (CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O)। ऊष्माशोषी: ΔH > 0, ऊष्मा ली जाती है — N2 + O2 → 2NO। - प्रश्न: आदर्श गैस के लिए CP और CV में क्या संबंध है और क्यों?
उत्तर: CP − CV = R (प्रति मोल)। स्थिर दाब पर गैस फैलकर कार्य भी करती है, इसलिए ताप बढ़ाने के लिए अतिरिक्त ऊष्मा चाहिए — यही अंतर R है। - प्रश्न: तृतीय नियम क्या कहता है? इसका एक उपयोग बताओ।
उत्तर: परम शून्य (0 K) पर पूर्ण क्रिस्टलीय पदार्थ की एंट्रॉपी शून्य होती है। इससे किसी भी पदार्थ की परम (absolute) एंट्रॉपी S° 0 K से ताप तक ऊष्माधारिता समाकलित करके निकाली जा सकती है।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- बर्फ का पिघलना ऊष्माशोषी होकर भी स्वतः क्यों होता है? उत्तर: क्योंकि एंट्रॉपी में वृद्धि ΔG को ऋणात्मक बना देती है।
- हेस के नियम का एक उपयोग बताइए। उत्तर: जिन अभिक्रियाओं की एन्थैल्पी सीधे नहीं मापी जा सकती, उनकी गणना करना।
- दहन ऊष्माक्षेपी क्यों होता है? उत्तर: क्योंकि उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों से कम होती है।
- ताप बढ़ने पर ΔG पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उत्तर: TΔS पद बढ़ेगा, इसलिए एंट्रॉपी का प्रभाव बढ़ेगा।
- एंट्रॉपी बढ़ने का एक उदाहरण दीजिए। उत्तर: ठोस का पिघलना या गैस का फैलना।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न
नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।
अभ्यास 6 (पुस्तक-अध्याय 6)
- प्रश्न: सही उत्तर चुनिए — ऊष्मागतिकी अवस्था फलन एक राशि है, (i) जो ऊष्मा-परिवर्तनों के लिए प्रयुक्त होती है, (ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है, (iii) जो दाब-आयतन कार्य की गणना करने में प्रयुक्त होती है, (iv) जिसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।
उत्तर: (ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है — अवस्था फलन केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करता है। - प्रश्न: एक प्रक्रम के रुद्धोष्म परिस्थितियों में होने के लिए — (i) ΔT = 0, (ii) Δp = 0, (iii) q = 0, (iv) w = 0।
उत्तर: (iii) q = 0 — रुद्धोष्म प्रक्रम में निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता। - प्रश्न: सभी तत्वों की एन्थैल्पी उनकी संदर्भ-अवस्था में होती है — (i) इकाई, (ii) शून्य, (iii) < 0, (iv) सभी तत्वों के लिए भिन्न होती है।
उत्तर: (ii) शून्य — परिपाटी के अनुसार तत्वों की मानक संदर्भ अवस्था में संभवन एन्थैल्पी शून्य मानी जाती है। - प्रश्न: मेथेन के दहन के लिए ΔU° का मान −X kJ mol⁻¹ है। इसके लिए ΔH° का मान होगा — (i) = ΔU°, (ii) > ΔU°, (iii) < ΔU°, (iv) = 0।
उत्तर: (iii) < ΔU° — CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O(l) में Δn_g = 1 − 3 = −2, इसलिए ΔH° = ΔU° + Δn_gRT = ΔU° − 2RT, अर्थात् अधिक ऋणात्मक। - प्रश्न: मेथेन, ग्रैफाइट एवं डाइहाइड्रोजन के लिए 298 K पर दहन एन्थैल्पी के मान क्रमशः −890.3 kJ mol⁻¹, −393.5 kJ mol⁻¹ एवं −285.8 kJ mol⁻¹ हैं। CH₄(g) की विरचन एन्थैल्पी क्या होगी? (i) −74.8, (ii) −52.27, (iii) +74.8, (iv) +52.26 kJ mol⁻¹।
उत्तर: (i) −74.8 kJ mol⁻¹ — ΔfH(CH₄) = ΔcH(C) + 2ΔcH(H₂) − ΔcH(CH₄) = −393.5 + 2(−285.8) − (−890.3) = −74.8 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: एक अभिक्रिया A + B → C + D + q के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक पाया गया। यह अभिक्रिया संभव होगी — (i) उच्च ताप पर, (ii) केवल निम्न ताप पर, (iii) किसी भी ताप पर नहीं, (iv) किसी भी ताप पर।
उत्तर: (iv) किसी भी ताप पर — अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (q मुक्त) है और ΔS धनात्मक है, इसलिए ΔG = ΔH − TΔS सभी तापों पर ऋणात्मक रहेगा। - प्रश्न: एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 701 J ऊष्मा अवशोषित होती है एवं 394 J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम में आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
उत्तर: ΔU = q + w = 701 + (−394) = 307 J (निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक)। - प्रश्न: एक बम कैलोरीमीटर में NH₂CN(s) की अभिक्रिया डाइऑक्सीजन के साथ की गई एवं ΔU का मान −742.7 kJ mol⁻¹ पाया गया (298 K पर)। इस अभिक्रिया के लिए 298 K पर एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात कीजिए — NH₂CN(g) + 3/2 O₂(g) → N₂(g) + CO₂(g) + H₂O(l)।
उत्तर: Δn_g = 2 − 2.5 = −0.5; ΔH = ΔU + Δn_gRT = −742.7 + (−0.5 × 8.314 × 298/1000) = −742.7 − 1.24 = −743.9 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: 60.0 g ऐलुमिनियम का ताप 35°C से 55°C करने के लिए कितने किलो जूल ऊष्मा की आवश्यकता होगी? Al की मोलर ऊष्माधारिता 24 J mol⁻¹ K⁻¹ है।
उत्तर: मोल = 60/27 = 2.222; q = nCΔT = 2.222 × 24 × 20 = 1067 J = 1.07 kJ। - प्रश्न: 10.0°C पर 1 मोल जल की बर्फ −10°C पर जमाने पर एन्थैल्पी-परिवर्तन की गणना कीजिए। Δ_fusH = 6.03 kJ mol⁻¹ (0°C पर), C_p[H₂O(l)] = 75.3 J mol⁻¹ K⁻¹, C_p[H₂O(s)] = 36.8 J mol⁻¹ K⁻¹।
उत्तर: जल 10°C → 0°C: 75.3 × 10 = 753 J मुक्त; जमना: 6030 J मुक्त; बर्फ 0°C → −10°C: 36.8 × 10 = 368 J मुक्त। कुल ΔH = −(753 + 6030 + 368) = −7151 J = −7.15 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: CO₂ की दहन एन्थैल्पी −393.5 kJ mol⁻¹ है। कार्बन एवं ऑक्सीजन से 35.2 g CO₂ बनने पर उत्सर्जित ऊष्मा की गणना कीजिए।
उत्तर: CO₂ = 35.2/44 = 0.8 मोल; उत्सर्जित ऊष्मा = 0.8 × 393.5 = 314.8 kJ। - प्रश्न: CO(g), CO₂(g), N₂O(g) एवं N₂O₄(g) की विरचन एन्थैल्पी क्रमशः −110, −393, 81 एवं 9.7 kJ mol⁻¹ हैं। अभिक्रिया N₂O₄(g) + 3CO(g) → N₂O(g) + 3CO₂(g) के लिए ΔᵣH का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: ΔᵣH = [81 + 3(−393)] − [9.7 + 3(−110)] = −1098 − (−320.3) = −777.7 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g); ΔᵣH° = −92.4 kJ mol⁻¹। NH₃ गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी क्या है?
उत्तर: 2 मोल NH₃ के लिए ΔᵣH° = −92.4 kJ, इसलिए 1 मोल के लिए ΔfH°(NH₃) = −46.2 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: निम्नलिखित आँकड़ों से CH₃OH(l) की मानक-विरचन एन्थैल्पी ज्ञात कीजिए — CH₃OH(l) + 3/2 O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l); ΔᵣH° = −726 kJ mol⁻¹; C(ग्रैफाइट) + O₂(g) → CO₂(g); ΔcH° = −393 kJ mol⁻¹; H₂(g) + ½O₂(g) → H₂O(l); ΔfH° = −286 kJ mol⁻¹।
उत्तर: ΔfH(CH₃OH) = ΔcH(C) + 2ΔfH(H₂O) − ΔcH(CH₃OH) = −393 + 2(−286) − (−726) = −239 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: CCl₄(g) → C(g) + 4Cl(g) अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी-परिवर्तन ज्ञात कीजिए एवं CCl₄ में C–Cl की आबंध एन्थैल्पी की गणना कीजिए — Δ_vapH°(CCl₄) = 30.5 kJ mol⁻¹, ΔfH°(CCl₄) = −135.5 kJ mol⁻¹, ΔaH°(C) = 715.0 kJ mol⁻¹, ΔaH°(Cl₂) = 242 kJ mol⁻¹।
उत्तर: ΔfH°(CCl₄, g) = −135.5 + 30.5 = −105.0 kJ mol⁻¹; Cl परमाणु की कणन एन्थैल्पी = 242/2 = 121 kJ mol⁻¹। ΔH = 715 + 4×121 − (−105) = 1304 kJ mol⁻¹; C–Cl आबंध एन्थैल्पी = 1304/4 = 326 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: एक विलगित निकाय के लिए ΔU = 0, इसके लिए ΔS क्या होगा?
उत्तर: विलगित निकाय में स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम के लिए ΔS > 0 (धनात्मक) होता है; साम्य पर ΔS = 0। - प्रश्न: 298 K पर अभिक्रिया 2A + B → C के लिए ΔH = 400 kJ mol⁻¹ एवं ΔS = 0.2 kJ K⁻¹ mol⁻¹ है। ΔH एवं ΔS को ताप-विस्तार में स्थिर मानते हुए बताइए कि किस ताप पर अभिक्रिया स्वतः होगी?
उत्तर: ΔG = 0 पर T = ΔH/ΔS = 400/0.2 = 2000 K; 2000 K से ऊपर अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होगी। - प्रश्न: अभिक्रिया 2Cl(g) → Cl₂(g) के लिए ΔH एवं ΔS के चिह्न क्या होंगे?
उत्तर: आबंध बनता है इसलिए ΔH ऋणात्मक; 2 मोल गैस से 1 मोल गैस बनती है इसलिए ΔS ऋणात्मक। - प्रश्न: अभिक्रिया 2A(g) + B(g) → 2D(g) के लिए ΔU° = −10.5 kJ एवं ΔS° = −44.1 J K⁻¹ है। अभिक्रिया के लिए ΔG° की गणना कीजिए और बताइए कि क्या अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित हो सकती है?
उत्तर: Δn_g = −1; ΔH° = ΔU° + Δn_gRT = −10.5 − 2.48 = −12.98 kJ। ΔG° = ΔH° − TΔS° = −12.98 − 298×(−0.0441) = −12.98 + 13.14 = +0.16 kJ mol⁻¹ — धनात्मक, इसलिए अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं होगी। - प्रश्न: 300 K पर एक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक 10 है। ΔG° का मान क्या होगा? R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹।
उत्तर: ΔG° = −2.303 RT log K = −2.303 × 8.314 × 300 × log₁₀(10) = −5744 J mol⁻¹ = −5.74 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: निम्नलिखित अभिक्रियाओं के आधार पर NO(g) के ऊष्मागतिकी स्थायित्व पर टिप्पणी कीजिए — ½N₂(g) + ½O₂(g) → NO(g); ΔfH° = 90 kJ mol⁻¹; NO(g) + ½O₂(g) → NO₂(g); ΔᵣH° = −74 kJ mol⁻¹।
उत्तर: NO की संभवन एन्थैल्पी धनात्मक (90 kJ mol⁻¹) है, इसलिए NO अपने तत्वों की तुलना में ऊष्मागतिकीय रूप से अस्थायी है; फिर भी NO से NO₂ बनना ऊष्माक्षेपी (−74 kJ mol⁻¹) है, इसलिए NO ऑक्सीजन से मिलकर आसानी से NO₂ में बदल जाता है। - प्रश्न: जब 1.00 मोल H₂O(l) को मानक परिस्थितियों में विरचित किया जाता है, तब परिवेश के एन्ट्रॉपी-परिवर्तन की गणना कीजिए — ΔfH° = −286 kJ mol⁻¹।
उत्तर: परिवेश को प्राप्त ऊष्मा = 286 kJ; ΔS_परिवेश = 286000/298 = 960 J K⁻¹ mol⁻¹।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘निकाय’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘निकाय’ का अर्थ है — अध्ययन किया जाने वाला भाग।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘एन्थैल्पी’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘एन्थैल्पी’ का अर्थ है — स्थिर दाब पर ऊष्मा का माप।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘एंट्रॉपी’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘एंट्रॉपी’ का अर्थ है — अव्यवस्था का माप।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘गिब्ज़ ऊर्जा’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘गिब्ज़ ऊर्जा’ का अर्थ है — स्वतः प्रवर्तिता का माप।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘हेस का नियम’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘हेस का नियम’ का अर्थ है — एन्थैल्पी मार्ग पर निर्भर नहीं करती।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘अवस्था-फलन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘ऊष्मागतिकी’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘अवस्था-फलन’ का अर्थ है — जिसका मान केवल अवस्था पर निर्भर करे, मार्ग पर नहीं — U, H, S, G।। ‘ऊष्मागतिकी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘ऊष्मागतिकी’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘ऊष्मागतिकी’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘ऊष्मागतिकी’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘ऊष्मागतिकी’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘ऊष्मागतिकी’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
- ΔU = q + w; स्थिर दाब पर qP = ΔH; ΔH = ΔU + ΔngRT।
- हेस का नियम: कुल ΔH मार्ग से स्वतंत्र; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)।
- द्वितीय नियम: स्वतः प्रक्रम में ब्रह्मांड की एंट्रॉपी बढ़ती है।
- ΔG = ΔH − TΔS; ΔG < 0 स्वतः, = 0 साम्य; ΔG° = −RT ln K।
- चार स्थितियाँ: (−,+) सभी ताप पर स्वतः; (+,−) कभी नहीं; (−,−) कम ताप पर; (+,+) उच्च ताप पर।
- CP − CV = R (आदर्श गैस, प्रति मोल)।

