Chapter 2: परमाणु की संरचना
उपपरमाण्विक कणों की खोज से बोर मॉडल तक, और क्वांटम संख्याओं से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तक — परमाणु का पूरा चित्र।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
परमाणु की संरचना — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry) | Chapter 2 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
परमाणु के कण
परमाणु के केंद्र में नाभिक होता है जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं; इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं।
परमाणु संख्या Z प्रोटॉनों की संख्या है और द्रव्यमान संख्या A प्रोटॉन + न्यूट्रॉन की संख्या है। समस्थानिकों में Z समान पर A अलग होता है।
बोर मॉडल और स्पेक्ट्रम
बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में घूमता है और ऊर्जा ग्रहण या त्याग करने पर ही कक्षा बदलता है।
हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम की रेखाएँ इन्हीं कक्षा-बदलावों से बनती हैं। बोर मॉडल एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के लिए अच्छा है, पर बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए नहीं।
क्वांटम संख्याएँ और कक्षक
इलेक्ट्रॉन की स्थिति चार क्वांटम संख्याओं से बताई जाती है — मुख्य (n), दिगंशीय (l), चुंबकीय (m) और चक्रण (s)।
s कक्षक गोलाकार, p कक्षक डंबल के आकार का होता है। इलेक्ट्रॉन भरने में आफबाऊ नियम, पाउली अपवर्जन नियम और हुंड का नियम लागू होते हैं।
उपपरमाण्विक कणों की खोज
कैथोड किरण प्रयोग से इलेक्ट्रॉन की खोज हुई — यह ऋणावेशित कण है (आवेश −1.6×10−19 C, द्रव्यमान 9.1×10−31 kg)। कैनाल किरणों से प्रोटॉन मिला (धनावेशित, द्रव्यमान ≈ इलेक्ट्रॉन का 1836 गुना)। चैडविक ने न्यूट्रॉन खोजा — आवेशहीन, द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर। थॉमसन का 'तरबूज़ मॉडल' (धनावेश के गोले में इलेक्ट्रॉन धँसे हुए) रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से गलत साबित हुआ।
रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल और उसकी कमी
α-कणों में से अधिकांश सोने की पन्नी से सीधे निकल गए, कुछ थोड़े कोण से मुड़े और बहुत कम (लगभग 20000 में से 1) वापस लौटे। इससे निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है और धनावेश एक छोटे, भारी केंद्रक — नाभिक — में है। कमी: विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार घूमता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर जाना चाहिए था, पर परमाणु स्थायी है — इसका उत्तर बोर मॉडल ने दिया।
बोर मॉडल और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा वाली स्थिर कक्षाओं में घूम सकता है; इनमें घूमते हुए वह ऊर्जा नहीं खोता। ऊर्जा ग्रहण करने पर वह ऊँची कक्षा में जाता है और लौटते समय अंतर की ऊर्जा प्रकाश के रूप में देता है — यही स्पेक्ट्रम रेखा है। हाइड्रोजन की ऊर्जा En = −13.6/n² eV है। बामर श्रेणी (n2 = 2) दृश्य क्षेत्र में आती है; लाइमन पराबैंगनी में, पाश्चन, ब्रैकेट, फुण्ड अवरक्त में। बोर मॉडल केवल एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं (H, He+, Li2+) के लिए सफल है और बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं, सूक्ष्म संरचना तथा अनिश्चितता की व्याख्या नहीं करता।
द्वैत प्रकृति और अनिश्चितता
दे ब्रॉग्ली: हर गतिशील कण की तरंगदैर्घ्य λ = h/mv होती है। हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत: किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति और संवेग दोनों एक साथ यथार्थता से नहीं जाने जा सकते (Δx × Δp ≥ h/4π)। इसलिए अब हम 'कक्षा' की जगह 'कक्षक' (orbital) की बात करते हैं — वह त्रिविम क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता अधिकतम (लगभग 90–95%) होती है।
क्वांटम संख्याएँ
मुख्य क्वांटम संख्या n (1, 2, 3…) कोश का आकार और ऊर्जा बताती है। दिगंशी संख्या l (0 से n−1) उपकोश और आकृति बताती है: l = 0 → s (गोलाकार), 1 → p (डमरू), 2 → d, 3 → f। चुंबकीय संख्या ml (−l से +l) कक्षक का अभिविन्यास बताती है। चक्रण संख्या ms (+1/2 या −1/2) इलेक्ट्रॉन का चक्रण बताती है। किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन 2n² होते हैं; किसी कक्षक में अधिकतम 2 (विपरीत चक्रण वाले)।
कक्षकों की आकृति, नोड और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
s कक्षक गोलाकार होता है; p के तीन कक्षक (px, py, pz) परस्पर लंबवत डमरू-आकार के होते हैं। नोड वह तल/गोला है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य होती है: त्रिज्य नोड = n − l − 1, कोणीय नोड = l। आफबाऊ सिद्धांत: इलेक्ट्रॉन बढ़ती ऊर्जा के क्रम में भरते हैं (1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d… — (n + l) नियम)। पाउली अपवर्जन: एक परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं। हुण्ड का नियम: एक ही ऊर्जा वाले कक्षकों में पहले एक-एक इलेक्ट्रॉन (समान चक्रण) भरता है, फिर युग्मन होता है। अपवाद याद रखो: Cr (3d54s1) और Cu (3d104s1) — अर्ध-पूर्ण और पूर्ण d उपकोश अधिक स्थायी होते हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| कक्षक | आकार |
|---|---|
| s | गोलाकार |
| p | डंबल के आकार का |
| d | जटिल, चार पत्तियों जैसा |
En = −13.6/n² eV (H परमाणु); तरंग-संख्या ṽ = RH(1/n1² − 1/n2²); λ = h/mv; कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²।
कक्षा (orbit) और कक्षक (orbital) को एक न समझो। कक्षा बोर का निश्चित पथ है; कक्षक क्वांटम मॉडल का प्रायिकता-क्षेत्र है। बोर्ड में यह अंतर सीधे पूछा जाता है।
(n + l) नियम से भरने का क्रम याद रखो: मान छोटा → पहले; मान बराबर → n छोटा पहले। इसलिए 4s (4+0 = 4), 3d (3+2 = 5) से पहले भरता है।

चित्र 1: चित्र 1 में परमाणु के कण और कक्षक केंद्र के चारों ओर दिखाए गए हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बोर मॉडल: इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं (n = 1, 2, 3) में घूमता है; बाहर की कक्षा की ऊर्जा अधिक होती है। कक्षा बदलने पर ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है — इसी से स्पेक्ट्रम की रेखाएँ बनती हैं।
मुख्य शब्द / Key Terms
- परमाणु संख्या: प्रोटॉनों की संख्या।
- द्रव्यमान संख्या: प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।
- समस्थानिक: समान Z, अलग A वाले परमाणु।
- कक्षक: इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता वाला क्षेत्र।
- क्वांटम संख्या: इलेक्ट्रॉन की स्थिति बताने वाली संख्या।
- समभारिक: समान द्रव्यमान संख्या पर अलग परमाणु संख्या वाले परमाणु, जैसे 40Ar और 40Ca।
- कक्षक (Orbital): नाभिक के चारों ओर वह त्रिविम क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता अधिकतम होती है।
- नोड: वह क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य होती है; त्रिज्य नोड = n − l − 1, कोणीय नोड = l।
- रिडबर्ग नियतांक: RH = 1.09677×107 m−1 — स्पेक्ट्रम रेखाओं की तरंग-संख्या की गणना में प्रयोग होता है।
- आफबाऊ सिद्धांत: इलेक्ट्रॉन कक्षकों में बढ़ती ऊर्जा के क्रम में भरते हैं।
याद रखें
- Z से तत्व की पहचान होती है।
- न्यूट्रॉन = A − Z।
- आफबाऊ में ऊर्जा के बढ़ते क्रम में भराव होता है।
- एक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- हुंड के नियम में पहले एक-एक, फिर जोड़े बनते हैं।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: कक्षा और कक्षक को एक समझ लेना। कक्षा बोर का निश्चित पथ है; कक्षक वह क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता अधिक होती है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या क्या हैं? संकेत: Z = प्रोटॉन; A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।
- समस्थानिक किसे कहते हैं? संकेत: समान Z, अलग A वाले परमाणु।
- s कक्षक का आकार कैसा है? संकेत: गोलाकार।
- एक कक्षक में कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं? संकेत: अधिकतम 2।
- बोर मॉडल किसके लिए अच्छा है? संकेत: एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के लिए।
मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच
ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।
- प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 में लौटता है। उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य लगभग कितनी होगी और वह किस श्रेणी की है?
उत्तर: ṽ = RH(1/4 − 1/9) = 1.09677×107 × (5/36) ≈ 1.523×106 m−1। λ = 1/ṽ ≈ 6.56×10−7 m = 656 nm। n2 = 2 होने से यह बामर श्रेणी की लाल रेखा (Hα) है। - प्रश्न: n = 3 वाले कोश में कितने उपकोश, कितने कक्षक और अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
उत्तर: उपकोश: l = 0, 1, 2 → 3s, 3p, 3d (3 उपकोश)। कक्षक: 1 + 3 + 5 = 9। अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n² = 18। - प्रश्न: 3d कक्षक के लिए n, l और ml के संभावित मान बताओ।
उत्तर: n = 3, l = 2, ml = −2, −1, 0, +1, +2 (पाँच मान, पाँच कक्षक)। - प्रश्न: 4s कक्षक, 3d कक्षक से पहले क्यों भरता है?
उत्तर: (n + l) नियम से: 4s के लिए 4 + 0 = 4 और 3d के लिए 3 + 2 = 5। मान छोटा होने से 4s की ऊर्जा कम है, इसलिए वह पहले भरता है। - प्रश्न: क्रोमियम (Z = 24) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सामान्य नियम से अलग क्यों है?
उत्तर: सामान्य नियम से 3d44s2 बनता, पर अर्ध-पूर्ण d5 उपकोश अधिक स्थायी होता है, इसलिए वास्तविक विन्यास 3d54s1 है। कॉपर में भी यही कारण d104s1 देता है। - प्रश्न: 2px कक्षक में कितने कोणीय नोड और कितने त्रिज्य नोड होते हैं?
उत्तर: n = 2, l = 1: कोणीय नोड = l = 1; त्रिज्य नोड = n − l − 1 = 0। कुल 1 नोड। - प्रश्न: रदरफोर्ड प्रयोग में अधिकांश α-कण सीधे क्यों निकल गए?
उत्तर: क्योंकि परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान है; धनावेश केवल छोटे नाभिक में केंद्रित है, इसलिए अधिकांश कण बिना टकराए निकल जाते हैं। - प्रश्न: समस्थानिक और समभारिक में अंतर उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर: समस्थानिक: Z समान, A अलग — 12C और 14C। समभारिक: A समान, Z अलग — 40Ar (Z = 18) और 40Ca (Z = 20)। - प्रश्न: हाइज़ेनबर्ग सिद्धांत बोर मॉडल के लिए क्या समस्या खड़ी करता है?
उत्तर: बोर मॉडल इलेक्ट्रॉन का निश्चित पथ (कक्षा) मानता है, जिसके लिए स्थिति और संवेग दोनों ठीक-ठीक जानने ज़रूरी हैं — अनिश्चितता सिद्धांत इसे असंभव बताता है। इसलिए कक्षक (प्रायिकता) की अवधारणा आई। - प्रश्न: Fe (Z = 26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखो और अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताओ।
उत्तर: 1s²2s²2p⁶3s²3p⁶4s²3d⁶। 3d में 5 कक्षक: पहले 5 में एक-एक, फिर एक युग्म — अयुग्मित = 4।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- कार्बन-14 में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन कितने हैं? उत्तर: प्रोटॉन 6, न्यूट्रॉन 8।
- आफबाऊ नियम क्या कहता है? उत्तर: इलेक्ट्रॉन कम ऊर्जा वाले कक्षक में पहले भरते हैं।
- p कक्षक में कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं? उत्तर: 6, क्योंकि उसमें 3 कक्षक होते हैं।
- हुंड का नियम उदाहरण सहित समझाइए। उत्तर: समान ऊर्जा वाले कक्षकों में पहले एक-एक इलेक्ट्रॉन भरता है, फिर जोड़े बनते हैं।
- कक्षक और कक्षा में अंतर बताइए। उत्तर: कक्षा निश्चित पथ है; कक्षक प्रायिकता वाला क्षेत्र है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न
नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।
अभ्यास 2 (पुस्तक-अध्याय 2)
- प्रश्न: (i) एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए। (ii) एक मोल इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान और आवेश की गणना कीजिए।
उत्तर: (i) 1 g इलेक्ट्रॉन = 1/(9.11×10⁻²⁸ g) ≈ 1.098×10²⁷ इलेक्ट्रॉन। (ii) 1 मोल इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11×10⁻³¹ × 6.022×10²³ = 5.48×10⁻⁷ kg; आवेश = 6.022×10²³ × 1.602×10⁻¹⁹ = 96487 C ≈ 96500 C। - प्रश्न: (i) मेथेन के एक मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए। (ii) 7 mg ¹⁴C में न्यूट्रॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675×10⁻²⁷ kg) (iii) मानक ताप और दाब (STP) पर 34 mg NH₃ में प्रोटॉनों की (क) कुल संख्या और (ख) कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित हो जाएगा?
उत्तर: (i) CH₄ में 10 इलेक्ट्रॉन प्रति अणु — 1 मोल में 10 × 6.022×10²³ = 6.022×10²⁴ इलेक्ट्रॉन। (ii) ¹⁴C: 7 mg = 0.5 mmol = 3.011×10²⁰ परमाणु; प्रति परमाणु 8 न्यूट्रॉन — (क) 2.409×10²¹ न्यूट्रॉन, (ख) 2.409×10²¹ × 1.675×10⁻²⁷ = 4.035×10⁻⁶ kg। (iii) NH₃: 34 mg = 2 mmol = 1.204×10²¹ अणु; प्रति अणु 10 प्रोटॉन — (क) 1.204×10²² प्रोटॉन, (ख) 1.204×10²² × 1.673×10⁻²⁷ ≈ 2.015×10⁻⁵ kg। दाब-ताप बदलने से मोलों की संख्या नहीं बदलती, इसलिए उत्तर नहीं बदलेगा। - प्रश्न: निम्नलिखित नाभिकों में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या बताइए — ¹³₆C, ¹⁶₈O, ²⁴₁₂Mg, ⁵⁶₂₆Fe, ⁸⁸₃₈Sr।
उत्तर: ¹³₆C: p 6, n 7; ¹⁶₈O: p 8, n 8; ²⁴₁₂Mg: p 12, n 12; ⁵⁶₂₆Fe: p 26, n 30; ⁸⁸₃₈Sr: p 38, n 50। - प्रश्न: नीचे दिए गए परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु संख्या (Z) वाले परमाणुओं का पूर्ण प्रतीक लिखिए — (i) Z = 17, A = 35; (ii) Z = 92, A = 233; (iii) Z = 4, A = 9।
उत्तर: (i) ³⁵₁₇Cl, (ii) ²³³₉₂U, (iii) ⁹₄Be। - प्रश्न: सोडियम लैम्प द्वारा उत्सर्जित पीले प्रकाश की तरंग-दैर्घ्य (λ) 580 nm है। इसकी आवृत्ति (ν) और तरंग-संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: ν = c/λ = 3.00×10⁸/580×10⁻⁹ = 5.17×10¹⁴ Hz; तरंग-संख्या = 1/λ = 1/(580×10⁻⁷ cm) = 17241 cm⁻¹। - प्रश्न: प्रत्येक ऐसे फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए — (i) जो 3×10¹⁵ Hz आवृत्ति वाले प्रकाश के संगत हो, (ii) जिसकी तरंग-दैर्घ्य 0.50 Å हो।
उत्तर: (i) E = hν = 6.626×10⁻³⁴ × 3×10¹⁵ = 1.99×10⁻¹⁸ J। (ii) E = hc/λ = 6.626×10⁻³⁴ × 3×10⁸/(0.50×10⁻¹⁰) = 3.98×10⁻¹⁵ J। - प्रश्न: 2.0×10⁻¹⁰ s काल वाली प्रकाश तरंग की तरंग-दैर्घ्य, आवृत्ति और तरंग-संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: ν = 1/T = 5.0×10⁹ Hz; λ = c/ν = 0.06 m; तरंग-संख्या = 1/λ = 16.67 m⁻¹। - प्रश्न: ऐसे प्रकाश, जिसकी तरंग-दैर्घ्य 4000 pm हो और जो 1 J ऊर्जा दे, के फोटॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर: एक फोटॉन की ऊर्जा = hc/λ = 4.97×10⁻¹⁷ J; फोटॉनों की संख्या = 1/(4.97×10⁻¹⁷) = 2.01×10¹⁶। - प्रश्न: यदि 4×10⁻⁷ m तरंग-दैर्घ्य वाला एक फोटॉन 2.13 eV कार्यफलन वाली धातु की सतह से टकराता है, तो (i) फोटॉन की ऊर्जा (eV में), (ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा और (iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन के वेग की गणना कीजिए (1 eV = 1.602×10⁻¹⁹ J)।
उत्तर: (i) E = hc/λ = 4.97×10⁻¹⁹ J = 3.10 eV। (ii) KE = 3.10 − 2.13 = 0.97 eV = 1.55×10⁻¹⁹ J। (iii) v = √(2KE/m) = √(2×1.55×10⁻¹⁹/9.11×10⁻³¹) = 5.84×10⁵ m s⁻¹। - प्रश्न: सोडियम परमाणु के आयनन के लिए 242 nm तरंग-दैर्घ्य की विद्युत-चुम्बकीय विकिरण पर्याप्त होती है। सोडियम की आयनन ऊर्जा kJ mol⁻¹ में ज्ञात कीजिए।
उत्तर: प्रति परमाणु E = hc/λ = 8.21×10⁻¹⁹ J; प्रति मोल = 8.21×10⁻¹⁹ × 6.022×10²³ = 494.7 kJ mol⁻¹। - प्रश्न: 25 वॉट का एक बल्ब 0.57 μm तरंग-दैर्घ्य वाले पीले रंग का एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। प्रति सेकंड क्वांटा के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिए।
उत्तर: एक क्वांटम की ऊर्जा = hc/λ = 3.49×10⁻¹⁹ J; प्रति सेकंड क्वांटा = 25/(3.49×10⁻¹⁹) = 7.17×10¹⁹ s⁻¹। - प्रश्न: किसी धातु की सतह पर 6800 Å तरंग-दैर्घ्य वाली विकिरण डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (ν₀) और कार्यफलन (W₀) ज्ञात कीजिए।
उत्तर: ν₀ = c/λ = 3.00×10⁸/(6800×10⁻¹⁰) = 4.41×10¹⁴ Hz; W₀ = hν₀ = 6.626×10⁻³⁴ × 4.41×10¹⁴ = 2.92×10⁻¹⁹ J = 1.82 eV। - प्रश्न: जब हाइड्रोजन परमाणु के n = 4 ऊर्जा स्तर से n = 2 ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन जाता है, तो किस तरंग-दैर्घ्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
उत्तर: 1/λ = R(1/2² − 1/4²) = 1.097×10⁷ × 3/16 = 2.057×10⁶ m⁻¹; λ = 486 nm (बामर श्रेणी, नीली-हरी रेखा)। - प्रश्न: यदि इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्षक में उपस्थित हो, तो H परमाणु के आयनन के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी? अपने उत्तर की तुलना हाइड्रोजन परमाणु के आयनन एन्थैल्पी से कीजिए। (आयनन एन्थैल्पी n = 1 कक्षक से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा होती है।)
उत्तर: n = 5 से आयनन ऊर्जा = 2.18×10⁻¹⁸/25 = 8.72×10⁻²⁰ J, जो तलस्थ अवस्था की आयनन ऊर्जा (2.18×10⁻¹⁸ J) का केवल 1/25 है। - प्रश्न: जब हाइड्रोजन परमाणु में उत्तेजित इलेक्ट्रॉन n = 6 से मूल अवस्था में जाता है, तो प्राप्त उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या क्या होगी?
उत्तर: संभावित संक्रमणों की संख्या = 6×5/2 = 15 रेखाएँ। - प्रश्न: (i) हाइड्रोजन के प्रथम कक्षक से संबंधित ऊर्जा −2.18×10⁻¹⁸ J atom⁻¹ है। पाँचवें कक्षक से संबंधित ऊर्जा बताइए। (ii) हाइड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणना कीजिए।
उत्तर: (i) E₅ = −2.18×10⁻¹⁸/25 = −8.72×10⁻²⁰ J atom⁻¹। (ii) r₅ = 0.529×10⁻¹⁰ × 25 = 1.3225×10⁻⁹ m = 1322.5 pm। - प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में अधिकतम तरंग-दैर्घ्य वाले संक्रमण की तरंग-संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: अधिकतम तरंग-दैर्घ्य = न्यूनतम ऊर्जा संक्रमण: n = 3 → n = 2। तरंग-संख्या = 1.097×10⁷(1/4 − 1/9) = 1.524×10⁶ m⁻¹। - प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा से पाँचवीं कक्षा तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की जूल में गणना कीजिए। जब यह इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है, तो किस तरंग-दैर्घ्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा? (इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा −2.18×10⁻¹¹ ergs है।)
उत्तर: ΔE = 2.18×10⁻¹⁸(1 − 1/25) = 2.093×10⁻¹⁸ J। लौटने पर λ = hc/ΔE = 9.50×10⁻⁸ m = 95.0 nm (पराबैंगनी क्षेत्र)। - प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा Eₙ = (−2.18×10⁻¹⁸)/n² J द्वारा दी जाती है। n = 2 कक्षा से इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। प्रकाश की सबसे लंबी तरंग-दैर्घ्य (cm में) क्या होगी, जिसका उपयोग इस संक्रमण में किया जा सके?
उत्तर: E = 2.18×10⁻¹⁸/4 = 5.45×10⁻¹⁹ J; λ = hc/E = 3.65×10⁻⁷ m = 3.65×10⁻⁵ cm। - प्रश्न: 2.05×10⁷ m s⁻¹ वेग से गति कर रहे किसी इलेक्ट्रॉन का तरंग-दैर्घ्य क्या होगा?
उत्तर: λ = h/(mv) = 6.626×10⁻³⁴/(9.11×10⁻³¹ × 2.05×10⁷) = 3.55×10⁻¹¹ m। - प्रश्न: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1×10⁻³¹ kg है। यदि इसकी गतिज ऊर्जा 3.0×10⁻²⁵ J हो, तो इसकी तरंग-दैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर: v = √(2KE/m) = √(2×3.0×10⁻²⁵/9.1×10⁻³¹) = 8.12×10² m s⁻¹; λ = h/(mv) = 6.626×10⁻³⁴/(9.1×10⁻³¹ × 8.12×10²) = 8.97×10⁻⁷ m। - प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सम-आयनी स्पीशीज़ हैं, अर्थात् किनमें इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या है? Na⁺, K⁺, Mg²⁺, Ca²⁺, S²⁻, Ar।
उत्तर: Na⁺ (10), Mg²⁺ (10) सम-आयनी हैं; K⁺ (18), Ca²⁺ (18), S²⁻ (18), Ar (18) सम-आयनी हैं। - प्रश्न: (i) निम्नलिखित आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए — (क) H⁻, (ख) Na⁺, (ग) O²⁻, (घ) F⁻। (ii) उन तत्वों की परमाणु-संख्या बताइए, जिनके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निम्नलिखित रूप में दर्शाया जाता है — (क) 3s¹, (ख) 2p³ तथा (ग) 3p⁵। (iii) निम्नलिखित विन्यासों वाले परमाणुओं के नाम बताइए — (क) [He] 2s¹, (ख) [Ne] 3s² 3p³, (ग) [Ar] 4s² 3d¹।
उत्तर: (i) H⁻: 1s²; Na⁺: 1s² 2s² 2p⁶; O²⁻: 1s² 2s² 2p⁶; F⁻: 1s² 2s² 2p⁶। (ii) (क) Na (Z = 11), (ख) N (Z = 7), (ग) Cl (Z = 17)। (iii) (क) Li, (ख) P, (ग) Sc। - प्रश्न: किस न्यूनतम n मान द्वारा g कक्षक का अस्तित्व अनुमत होगा?
उत्तर: g के लिए l = 4; l ≤ n − 1, इसलिए n ≥ 5। न्यूनतम n = 5। - प्रश्न: एक इलेक्ट्रॉन किसी 3d कक्षक में है। इसके लिए n, l और mₗ के संभव मान दीजिए।
उत्तर: n = 3, l = 2, mₗ = −2, −1, 0, +1, +2 में से कोई एक। - प्रश्न: किसी तत्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन और 35 न्यूट्रॉन हैं। (i) इसमें प्रोटॉनों की संख्या बताइए। (ii) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताइए।
उत्तर: (i) उदासीन परमाणु में प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन = 29 (तत्व Cu)। (ii) 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ 3d¹⁰। - प्रश्न: H₂⁺, H₂ और O₂⁺ स्पीशीज़ में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर: H₂⁺: 1 इलेक्ट्रॉन; H₂: 2 इलेक्ट्रॉन; O₂⁺: 15 इलेक्ट्रॉन। - प्रश्न: (i) किसी परमाणु कक्षक का n = 3 है। उसके लिए l और mₗ के संभव मान क्या होंगे? (ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए mₗ और l क्वांटम संख्याओं के मान बताइए। (iii) निम्नलिखित में से कौन से कक्षक संभव हैं — 1p, 2s, 2p और 3f।
उत्तर: (i) l = 0, 1, 2; mₗ = 0; −1, 0, +1; −2, −1, 0, +1, +2। (ii) 3d के लिए l = 2, mₗ = −2, −1, 0, +1, +2। (iii) 2s और 2p संभव हैं; 1p असंभव (n = 1 में l = 0 ही) और 3f असंभव (n = 3 में l अधिकतम 2) है। - प्रश्न: s, p, d संकेतन द्वारा निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कक्षकों को बताइए — (क) n = 1, l = 0; (ख) n = 3, l = 1; (ग) n = 4, l = 2; (घ) n = 4, l = 3।
उत्तर: (क) 1s, (ख) 3p, (ग) 4d, (घ) 4f। - प्रश्न: कारण देते हुए बताइए कि निम्नलिखित क्वांटम संख्या के कौन से मान संभव नहीं हैं — (क) n = 0, l = 0, mₗ = 0, mₛ = +½; (ख) n = 1, l = 0, mₗ = 0, mₛ = −½; (ग) n = 1, l = 1, mₗ = 0, mₛ = +½; (घ) n = 2, l = 1, mₗ = 0, mₛ = −½; (ङ) n = 3, l = 3, mₗ = −3, mₛ = +½; (च) n = 3, l = 1, mₗ = 0, mₛ = +½।
उत्तर: असंभव: (क) n = 0 संभव नहीं; (ग) n = 1 में l = 1 संभव नहीं; (ङ) n = 3 में l = 3 संभव नहीं। शेष (ख), (घ), (च) संभव हैं। - प्रश्न: किसी परमाणु में निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कितने इलेक्ट्रॉन होंगे? (क) n = 4, mₛ = −½; (ख) n = 3, l = 0।
उत्तर: (क) n = 4 कोश में 32 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिनमें आधे (16) mₛ = −½ वाले हैं। (ख) n = 3, l = 0 (3s) में 2 इलेक्ट्रॉन। - प्रश्न: यह दर्शाइए कि हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रॉग्ली तरंग-दैर्घ्य का पूर्ण गुणक होती है।
उत्तर: बोर प्रतिबंध mvr = nh/2π से 2πr = nh/(mv) = nλ — परिधि दे-ब्रॉग्ली तरंग-दैर्घ्य का n गुणा है। - प्रश्न: He⁺ स्पेक्ट्रम के n = 4 से n = 2 बामर संक्रमण से प्राप्त तरंग-दैर्घ्य के बराबर वाला संक्रमण हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्या होगा?
उत्तर: तरंग-संख्या He⁺ (4→2) के लिए = 4R(1/4 − 1/16) = 0.75R। हाइड्रोजन के लिए 0.75R = R(1/n₁² − 1/n₂²) से 1/n₁² − 1/n₂² = 0.75 → n₁ = 1, n₂ = 2। अतः हाइड्रोजन में संगत संक्रमण n = 2 → n = 1 है (लाइमैन श्रेणी की पहली रेखा)। - प्रश्न: He⁺(g) → He²⁺(g) + e⁻ प्रक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा 2.18×10⁻¹⁸ J atom⁻¹ है।
उत्तर: He⁺ (Z = 2) की आयनन ऊर्जा = 2.18×10⁻¹⁸ × Z² = 8.72×10⁻¹⁸ J atom⁻¹। - प्रश्न: यदि कार्बन परमाणु का व्यास 0.15 nm है, तो उन कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए, जिन्हें 20 cm स्केल की लंबाई में एक-एक करके व्यवस्थित किया जा सकता है।
उत्तर: 20 cm = 20×10⁷ nm; संख्या = 20×10⁷/0.15 = 1.33×10⁹ परमाणु। - प्रश्न: कार्बन के 2×10⁸ परमाणु एक कतार में व्यवस्थित हैं। यदि इस व्यवस्था की लंबाई 2.4 cm है, तो कार्बन परमाणु के व्यास की गणना कीजिए।
उत्तर: व्यास = 2.4 cm/(2×10⁸) = 1.2×10⁻⁸ cm = 120 pm। - प्रश्न: ज़िंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है — (क) ज़िंक परमाणु की त्रिज्या pm में तथा (ख) 1.6 cm की लंबाई में कतार में लगातार उपस्थित परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: (क) त्रिज्या = 1.3 Å = 130 pm। (ख) संख्या = 1.6 cm/(2.6×10⁻⁸ cm) = 6.15×10⁷। - प्रश्न: किसी कण का स्थिर विद्युत् आवेश 2.5×10⁻¹⁶ C है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: आवेश/इलेक्ट्रॉन-आवेश = 2.5×10⁻¹⁶/1.602×10⁻¹⁹ = 1561 इलेक्ट्रॉन। - प्रश्न: मिलिकन के प्रयोग में तेल की बूँद पर चमकती X-किरणों द्वारा प्राप्त स्थैतिक विद्युत्-आवेश प्राप्त किया जाता है। तेल की बूँद पर यदि स्थैतिक विद्युत् आवेश −1.282×10⁻¹⁸ C है, तो इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: 1.282×10⁻¹⁸/1.602×10⁻¹⁹ = 8 इलेक्ट्रॉन। - प्रश्न: रदरफ़ोर्ड के प्रयोग में सोने, प्लैटिनम आदि भारी परमाणुओं की पतली पत्ती को α कणों द्वारा बमबारी की जाती है। यदि ऐलुमिनियम आदि जैसे हल्के परमाणु की पतली पन्नी ली जाए, तो उपरोक्त परिणामों में क्या अंतर होगा?
उत्तर: हल्के नाभिक α कणों को कम विक्षेपित करेंगे — बड़े कोणों पर प्रकीर्णन बहुत कम होगा, क्योंकि हल्का नाभिक स्वयं गति कर जाएगा और प्रतिकर्षण कम होगा। - प्रश्न: ⁷⁹₃₅Br तथा ⁷⁹Br प्रतीक मान्य है, जबकि ³⁵₇₉Br तथा ³⁵Br मान्य नहीं हैं। संक्षेप में कारण बताइए।
उत्तर: मानक प्रतीक ᴬZX में ऊपर द्रव्यमान संख्या (A) और नीचे परमाणु संख्या (Z) लिखी जाती है — ⁷⁹₃₅Br सही है; ³⁵₇₉Br में A और Z उल्टे हैं, और ³⁵Br में द्रव्यमान संख्या ही नहीं है। - प्रश्न: एक 81 द्रव्यमान संख्या वाले तत्व में प्रोटॉनों की तुलना में 31.7% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इसका परमाणु प्रतीक लिखिए।
उत्तर: मानें p प्रोटॉन: n = 1.317p; p + n = 81 → 2.317p = 81 → p = 35, n = 46। तत्व Br — प्रतीक ⁸¹₃₅Br। - प्रश्न: 37 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर ऋणावेश की एक इकाई है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉन की तुलना में न्यूट्रॉन 11.1% अधिक हैं, तो आयन का प्रतीक लिखिए।
उत्तर: आयन ऋणावेशी: इलेक्ट्रॉन = p + 1; न्यूट्रॉन = 1.111(p + 1); p + n = 37 → p + 1.111p + 1.111 = 37 → p = 17, n = 20, इलेक्ट्रॉन = 18। आयन ³⁷₁₇Cl⁻। - प्रश्न: 56 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर धनावेश की 3 इकाई है, और इसमें इलेक्ट्रॉन की तुलना में 30.4% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इस आयन का प्रतीक लिखिए।
उत्तर: धनावेशी: इलेक्ट्रॉन = p − 3; न्यूट्रॉन = 1.304(p − 3); p + n = 56 → p + 1.304p − 3.912 = 56 → p = 26, n = 30, इलेक्ट्रॉन = 23। आयन ⁵⁶₂₆Fe³⁺। - प्रश्न: निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए — (क) माइक्रोवेव ओवन से विकिरण, (ख) यातायात-संकेत से त्रणमणि (amber) प्रकाश, (ग) एफ.एम. रेडियो से प्राप्त विकिरण, (घ) बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें, (च) X-किरणें।
उत्तर: बढ़ती आवृत्ति: एफ.एम. रेडियो < माइक्रोवेव < त्रणमणि प्रकाश < X-किरणें < कॉस्मिक किरणें। - प्रश्न: नाइट्रोजन लेज़र 337.1 nm की तरंग-दैर्घ्य पर एक विकिरण उत्पन्न करती है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6×10²⁴ हो, तो इस लेज़र की क्षमता की गणना कीजिए।
उत्तर: एक फोटॉन की ऊर्जा = hc/λ = 5.90×10⁻¹⁹ J; कुल ऊर्जा = 5.6×10²⁴ × 5.90×10⁻¹⁹ = 3.3×10⁶ J; प्रति सेकंड उत्सर्जन मानने पर शक्ति ≈ 3.3×10⁶ W। - प्रश्न: निऑन गैस को सामान्यतः संकेत बोर्डों में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यह 616 nm पर प्रबलता से विकिरण-उत्सर्जन करती है, तो (क) उत्सर्जन की आवृत्ति, (ख) 30 सेकंड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी, (ग) क्वांटम की ऊर्जा तथा (घ) उपस्थित क्वांटम की संख्या की गणना कीजिए (यदि यह 2 J की ऊर्जा उत्पन्न करती है)।
उत्तर: (क) ν = c/λ = 4.87×10¹⁴ Hz; (ख) दूरी = 3.00×10⁸ × 30 = 9.0×10⁹ m; (ग) E = hν = 3.23×10⁻¹⁹ J; (घ) क्वांटा = 2/(3.23×10⁻¹⁹) = 6.19×10¹⁸। - प्रश्न: खगोलीय प्रेक्षणों में दूरस्थ तारों से मिलने वाले संकेत बहुत कमज़ोर होते हैं। यदि फोटॉन संसूचक 600 nm के विकिरण से कुल 3.15×10⁻¹⁸ J प्राप्त करता है, तो संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर: एक फोटॉन की ऊर्जा = hc/λ = 3.31×10⁻¹⁹ J; फोटॉन = 3.15×10⁻¹⁸/(3.31×10⁻¹⁹) ≈ 10 (लगभग 9.5, अर्थात् 10 फोटॉन)। - प्रश्न: उत्तेजित अवस्थाओं में अणुओं के जीवनकाल का माप प्रायः लगभग नैनो सेकंड परास वाले विकिरण स्रोत का उपयोग करके किया जाता है। यदि विकिरण स्रोत का काल 2 ns और स्पंदित विकिरण स्रोत के दौरान उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 2.5×10¹⁵ है, तो स्रोत की ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर: स्रोत की आवृत्ति = 1/(2×10⁻⁹) = 5×10⁸ Hz; एक फोटॉन की ऊर्जा = hν = 3.31×10⁻²⁵ J; कुल ऊर्जा = 2.5×10¹⁵ × 3.31×10⁻²⁵ = 8.28×10⁻¹⁰ J। - प्रश्न: सबसे लंबी द्विगुणित तरंग-दैर्घ्य जिस अवशोषण संक्रमण 589 और 589.6 nm पर देखा जाता है। प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति और दो उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा के अंतर की गणना कीजिए।
उत्तर: ν₁ = c/589 nm = 5.093×10¹⁴ Hz; ν₂ = c/589.6 nm = 5.088×10¹⁴ Hz; ऊर्जा अंतर = h(ν₁ − ν₂) = 6.626×10⁻³⁴ × 5.18×10¹¹ = 3.43×10⁻²² J = 0.00214 eV। - प्रश्न: सीज़ियम परमाणु का कार्यफलन 1.9 eV है, तो (क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंग-दैर्घ्य, (ख) देहली आवृत्ति की गणना कीजिए। यदि सीज़ियम तत्व को 500 nm की तरंग-दैर्घ्य के साथ विकिरणित किया जाए, तो निकले हुए फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और वेग की गणना कीजिए।
उत्तर: (क) λ₀ = hc/W₀ = 6.626×10⁻³⁴ × 3.00×10⁸/(1.9 × 1.602×10⁻¹⁹) = 653 nm। (ख) ν₀ = W₀/h = 4.59×10¹⁴ Hz। 500 nm पर फोटॉन ऊर्जा = 2.48 eV; KE = 2.48 − 1.9 = 0.58 eV = 9.32×10⁻²⁰ J; v = √(2KE/m) = 4.52×10⁵ m s⁻¹। - प्रश्न: जब सोडियम धातु को विभिन्न तरंग-दैर्घ्यों के साथ विकिरणित किया जाता है, तो निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होते हैं — λ (nm): 500, 450, 400; v × 10⁻⁵ (cm s⁻¹): 2.55, 4.35, 5.35। देहली तरंग-दैर्घ्य तथा प्लांक स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर: KE = ½mv² के विरुद्ध 1/λ का आलेख एक सरल रेखा है; ढाल = hc और अंतःखंड = −φ। तीनों बिंदुओं से h ≈ 6.66×10⁻³⁴ J s और φ ≈ 3.66×10⁻¹⁹ J प्राप्त होते हैं; देहली तरंग-दैर्घ्य λ₀ = hc/φ ≈ 546 nm। - प्रश्न: प्रकाश विद्युत् प्रभाव प्रयोग में सिल्वर धातु से फोटोइलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन 0.35 V की वोल्टता द्वारा रोका जा सकता है। जब 256.7 nm के विकिरण का उपयोग किया जाता है, तो सिल्वर धातु के लिए कार्यफलन की गणना कीजिए।
उत्तर: फोटॉन ऊर्जा = hc/λ = 7.74×10⁻¹⁹ J = 4.83 eV; कार्यफलन = 4.83 − 0.35 = 4.48 eV। - प्रश्न: यदि 150 pm तरंग-दैर्घ्य का फोटॉन एक परमाणु से टकराता है और इसके अंदर बँधा हुआ इलेक्ट्रॉन 1.5×10⁷ m s⁻¹ वेग से बाहर निकलता है, तो उस ऊर्जा की गणना कीजिए, जिससे यह नाभिक से बँधा हुआ है।
उत्तर: फोटॉन ऊर्जा = hc/λ = 1.325×10⁻¹⁵ J; इलेक्ट्रॉन की KE = ½ × 9.11×10⁻³¹ × (1.5×10⁷)² = 1.025×10⁻¹⁶ J; बंधन ऊर्जा = 1.325×10⁻¹⁵ − 1.025×10⁻¹⁶ = 1.22×10⁻¹⁵ J। - प्रश्न: पाशन श्रेणी का उत्सर्जन संक्रमण n कक्षा से आरंभ होता है। कक्षा n = 3 में खत्म होता है तथा इसे ν = 3.29×10¹⁵ (Hz) [1/3² − 1/n²] से दर्शाया जा सकता है। यदि संक्रमण 1285 nm पर प्रेक्षित होता है, तो n के मान की गणना कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
उत्तर: ν = c/λ = 2.33×10¹⁴ Hz; 2.33×10¹⁴ = 3.29×10¹⁵(1/9 − 1/n²) → 1/n² = 1/9 − 0.0709 = 0.0402 → n² = 24.9 → n = 5। यह पाशन श्रेणी का संक्रमण है, अवरक्त (infrared) क्षेत्र में। - प्रश्न: उस उत्सर्जन संक्रमण के तरंग-दैर्घ्य की गणना कीजिए, जो 1.3225 nm त्रिज्या वाले कक्षा से आरंभ और 211.6 pm पर समाप्त होता है। इस संक्रमण की श्रेणी का नाम और स्पेक्ट्रम का क्षेत्र भी बताइए।
उत्तर: त्रिज्या 1.3225 nm = 25 × 0.529 Å → n₁ = 5; 211.6 pm = 4 × 52.9 pm → n₂ = 2। 1/λ = R(1/4 − 1/25) = 1.097×10⁷ × 0.21 = 2.304×10⁶ m⁻¹ → λ = 434 nm; बामर श्रेणी, दृश्य क्षेत्र। - प्रश्न: दे ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित द्रव्य के दोहरे व्यवहार से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज हुई, जिसे जैव अणुओं और अन्य प्रकार के पदार्थों की अति आवर्धित प्रतिबिंब के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस सूक्ष्मदर्शी में यदि इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6×10⁶ m s⁻¹ है, तो इस इलेक्ट्रॉन से संबंधित दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर: λ = h/(mv) = 6.626×10⁻³⁴/(9.11×10⁻³¹ × 1.6×10⁶) = 4.55×10⁻¹⁰ m। - प्रश्न: इलेक्ट्रॉन विवर्तन के समान न्यूट्रॉन विवर्तन सूक्ष्मदर्शी को अणुओं की संरचना के निर्धारण में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यहाँ 800 pm की तरंग-दैर्घ्य ली जाए, तो न्यूट्रॉन से संबंधित अभिलाक्षणिक वेग की गणना कीजिए।
उत्तर: v = h/(mλ) = 6.626×10⁻³⁴/(1.675×10⁻²⁷ × 800×10⁻¹²) = 494 m s⁻¹। - प्रश्न: यदि बोर के प्रथम कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.9×10⁶ m s⁻¹ है, तो इससे संबंधित दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर: λ = h/(mv) = 6.626×10⁻³⁴/(9.11×10⁻³¹ × 2.9×10⁶) = 2.51×10⁻¹⁰ m। - प्रश्न: एक प्रोटॉन, जो 1000 V के विभवांतर में गति कर रहा है, से संबंधित वेग 4.37×10⁵ m s⁻¹ है। यदि 0.1 kg द्रव्यमान की हॉकी की गेंद इस वेग से गतिमान है, तो इससे संबंधित तरंग-दैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर: λ = h/(mv) = 6.626×10⁻³⁴/(0.1 × 4.37×10⁵) = 1.52×10⁻³⁸ m — इतनी छोटी कि इसका कोई भौतिक अर्थ नहीं है। - प्रश्न: यदि एक इलेक्ट्रॉन की स्थिति को ± 0.002 nm की शुद्धता से मापी जाती है, तो इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता की गणना कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन का संवेग h/4π × 0.05 nm है, तो क्या इस मान को निकालने में कोई कठिनाई होगी?
उत्तर: Δx = 0.002 nm = 2×10⁻¹² m; Δp ≥ h/(4πΔx) = 6.626×10⁻³⁴/(4π × 2×10⁻¹²) = 2.64×10⁻²³ kg m s⁻¹। संवेग का दिया गया मान p = h/(4π × 0.05 nm) = 1.05×10⁻²⁴ kg m s⁻¹ है, जो अनिश्चितता (2.64×10⁻²³) से छोटा है — इसलिए इस संवेग को इस शुद्धता से मापना संभव नहीं होगा। - प्रश्न: छः इलेक्ट्रॉनों की क्वांटम संख्या नीचे दी गई है। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। क्या इनमें से किसी की ऊर्जा समान है? 1. n = 4, l = 2, mₗ = −2, mₛ = −½; 2. n = 3, l = 2, mₗ = 1, mₛ = +½; 3. n = 4, l = 1, mₗ = 0, mₛ = +½; 4. n = 3, l = 2, mₗ = −2, mₛ = −½; 5. n = 3, l = 1, mₗ = −1, mₛ = +½; 6. n = 4, l = 1, mₗ = 0, mₛ = +½।
उत्तर: (n + l) नियम से: 3p का (n + l) = 4; 3d और 4p का (n + l) = 5 — बराबरी में पहले निम्न n आता है, इसलिए 3d, 4p से पहले; 4d का (n + l) = 6। क्रम: 5 (3p) < 2 = 4 (3d) < 3 = 6 (4p) < 1 (4d)। समान ऊर्जा वाले: (2, 4) और (3, 6)। - प्रश्न: ब्रोमीन परमाणु में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसके 2p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन, 3p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन तथा 4p कक्षक में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनमें से कौन सा इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करता है?
उत्तर: 4p इलेक्ट्रॉन — यह नाभिक से सबसे दूर है और भीतरी इलेक्ट्रॉनों द्वारा सबसे अधिक परिरक्षित है, इसलिए इसका प्रभावी नाभिकीय आवेश सबसे कम है। - प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा? (i) 2s और 3s, (ii) 4d और 4f तथा (iii) 3d और 3p।
उत्तर: (i) 2s (नाभिक के निकट); (ii) 4d (4f से कम परिरक्षित); (iii) 3p (3d की तुलना में नाभिक के अधिक निकट)। - प्रश्न: Al तथा Si में 3p कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। कौन सा इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
उत्तर: Si का 3p इलेक्ट्रॉन — Si का नाभिकीय आवेश (Z = 14) Al (Z = 13) से अधिक है, और दोनों का परिरक्षण लगभग समान है। - प्रश्न: इन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए — (क) P, (ख) Si, (ग) Cr, (घ) Fe, (ङ) Kr।
उत्तर: (क) P: 3; (ख) Si: 2; (ग) Cr: 6; (घ) Fe: 4; (ङ) Kr: 0। - प्रश्न: (क) n = 4 से संबंधित कितने उपकोश हैं? (ख) उस उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे, जिसके लिए mₛ = −½ एवं n = 4 है?
उत्तर: (क) n = 4 में 4 उपकोश: 4s, 4p, 4d, 4f। (ख) n = 4 कोश में कुल 32 इलेक्ट्रॉन; mₛ = −½ वाले 16 इलेक्ट्रॉन।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘परमाणु संख्या’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘परमाणु संख्या’ का अर्थ है — प्रोटॉनों की संख्या।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘द्रव्यमान संख्या’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘द्रव्यमान संख्या’ का अर्थ है — प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘समस्थानिक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘समस्थानिक’ का अर्थ है — समान Z, अलग A वाले परमाणु।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘कक्षक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘कक्षक’ का अर्थ है — इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता वाला क्षेत्र।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘क्वांटम संख्या’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘क्वांटम संख्या’ का अर्थ है — इलेक्ट्रॉन की स्थिति बताने वाली संख्या।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘समभारिक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘परमाणु की संरचना’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘समभारिक’ का अर्थ है — समान द्रव्यमान संख्या पर अलग परमाणु संख्या वाले परमाणु, जैसे 40Ar और 40Ca।। ‘परमाणु की संरचना’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘परमाणु की संरचना’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘परमाणु की संरचना’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘परमाणु की संरचना’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘परमाणु की संरचना’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘परमाणु की संरचना’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
- बोर: En = −13.6/n² eV; बामर श्रेणी (n2 = 2) दृश्य क्षेत्र में।
- λ = h/mv (दे ब्रॉग्ली); Δx × Δp ≥ h/4π (हाइज़ेनबर्ग)।
- चार क्वांटम संख्याएँ: n, l (0 से n−1), ml (−l से +l), ms (±1/2)।
- नोड: त्रिज्य = n − l − 1, कोणीय = l; कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन।
- आफबाऊ (n + l नियम) + पाउली + हुण्ड; अपवाद: Cr = 3d54s1, Cu = 3d104s1।
- समस्थानिक: Z समान, A अलग; समभारिक: A समान, Z अलग।

