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Class 11 • Chemistry • Rasayan Vigyan Bhag-1

Chapter 3: तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

आवर्त सारणी का विकास, आधुनिक नियम, और परमाणु त्रिज्या से विद्युत-ऋणात्मकता तक की सभी प्रवृत्तियाँ — कारण सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Rasayan Vigyan Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry)  |  Chapter 3  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

आवर्त सारणी की बनावट

आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में बनी है। इसमें 18 वर्ग (ऊर्ध्वाधर स्तंभ) और 7 आवर्त (क्षैतिज पंक्तियाँ) हैं।

एक ही वर्ग के तत्वों के बाहरी इलेक्ट्रॉन विन्यास समान होते हैं, इसलिए उनके रासायनिक गुण मिलते-जुलते हैं।

आवर्त प्रवृत्तियाँ

बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है क्योंकि नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है। ऊपर से नीचे जाने पर त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि नई कक्षा जुड़ती है।

आयनन एन्थैल्पी बाएँ से दाएँ बढ़ती है और ऊपर से नीचे घटती है। विद्युत ऋणात्मकता भी बाएँ से दाएँ बढ़ती है — फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।

तत्वों के प्रकार

धातुएँ बाईं ओर, अधातुएँ दाईं ओर और उपधातुएँ उनके बीच की सीढ़ी पर होती हैं।

क्षार धातुएँ (वर्ग 1) बहुत क्रियाशील होती हैं, हैलोजन (वर्ग 17) भी क्रियाशील अधातुएँ हैं और उत्कृष्ट गैसें (वर्ग 18) लगभग अक्रिय होती हैं।

वर्गीकरण की आवश्यकता और प्रारंभिक प्रयास

1800 में केवल 31 तत्व ज्ञात थे, 1865 तक 63 और आज 118 से अधिक। इतने तत्वों और उनके असंख्य यौगिकों का अलग-अलग अध्ययन कठिन था, इसलिए वैज्ञानिकों ने गुणों के आधार पर वर्गीकरण किया। डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड का अष्टक नियम और मेंडेलीव की आवर्त सारणी इसी दिशा के प्रयास थे। मेंडेलीव ने परमाणु भार के बढ़ते क्रम में तत्व रखे और समान गुणों वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रखा; उन्होंने गैलियम (एका-ऐलुमिनियम) और जर्मेनियम (एका-सिलिकॉन) जैसे अज्ञात तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी भी की, जो बाद में सही निकली।

आधुनिक आवर्त नियम और सारणी की बनावट

आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन होते हैं। आधुनिक सारणी में 18 वर्ग और 7 आवर्त हैं। एक ही वर्ग के तत्वों के बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, इसलिए उनके रासायनिक गुण मिलते हैं। s-ब्लॉक (वर्ग 1–2), p-ब्लॉक (13–18), d-ब्लॉक (3–12, संक्रमण तत्व) और f-ब्लॉक (लैन्थेनॉइड, ऐक्टिनॉइड — सारणी के नीचे अलग पंक्तियों में) — यही चार ब्लॉक हैं। उत्कृष्ट गैसें (वर्ग 18) पूरी भरी बाह्यतम कोश के कारण लगभग अक्रियाशील हैं।

परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या

परमाणु त्रिज्या नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन तक की दूरी है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन उसी कोश में जुड़ते हैं, इसलिए आकर्षण बढ़ता है और त्रिज्या घटती है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर नया कोश जुड़ता है और परिरक्षण बढ़ता है, इसलिए त्रिज्या बढ़ती है। धनायन अपने जनक परमाणु से छोटा होता है (इलेक्ट्रॉन कम, आकर्षण अधिक) और ऋणायन बड़ा होता है (इलेक्ट्रॉन अधिक, प्रतिकर्षण अधिक)। समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ (जैसे N3−, O2−, F−, Na+, Mg2+) में नाभिकीय आवेश जितना अधिक, त्रिज्या उतनी छोटी।

आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और विद्युत-ऋणात्मकता

आयनन एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो गैसीय परमाणु से सबसे ढीले इलेक्ट्रॉन को निकालने में लगती है। आवर्त में बाएँ से दाएँ यह बढ़ती है (आकार घटने और आवेश बढ़ने से), वर्ग में नीचे जाने पर घटती है। दो प्रसिद्ध अपवाद: Be की आयनन एन्थैल्पी B से अधिक है (भरा 2s उपकोश अधिक स्थायी) और N की O से अधिक है (अर्ध-पूर्ण 2p3 अधिक स्थायी)। इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर मुक्त/अवशोषित ऊर्जा है — हैलोजन की सबसे अधिक ऋणात्मक होती है; क्लोरीन का मान फ्लोरीन से अधिक ऋणात्मक है क्योंकि F के छोटे आकार में इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षण अधिक होता है। विद्युत-ऋणात्मकता (पॉलिंग पैमाना) आबंध के इलेक्ट्रॉनों को खींचने की क्षमता है — आवर्त में बढ़ती है, वर्ग में घटती है; F (4.0) सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक है।

रासायनिक गुणों की आवर्तिता

संयोजकता: वर्ग 1–2 के लिए वर्ग संख्या के बराबर, वर्ग 13–17 के लिए (18 − वर्ग संख्या) के बराबर ऑक्सीकरण अवस्था सामान्य है। ऑक्साइडों की प्रकृति आवर्त में बदलती है: बाईं ओर क्षारीय (Na2O), बीच में उभयधर्मी (Al2O3), दाईं ओर अम्लीय (Cl2O7)। धात्विक लक्षण आवर्त में घटता है और वर्ग में बढ़ता है; अधात्विक लक्षण इसके विपरीत। विकर्ण संबंध (जैसे Li–Mg, Be–Al, B–Si) — विकर्ण पर स्थित तत्वों के गुण मिलते-जुलते होते हैं।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

प्रवृत्तिबाएँ से दाएँ
परमाणु त्रिज्याघटती है
आयनन एन्थैल्पीबढ़ती है
विद्युत ऋणात्मकताबढ़ती है
प्रवृत्ति-तालिका एक पंक्ति में

आवर्त में बाएँ → दाएँ: त्रिज्या घटे, आयनन एन्थैल्पी बढ़े, विद्युत-ऋणात्मकता बढ़े, धात्विक लक्षण घटे। वर्ग में ऊपर → नीचे: ठीक उल्टा।

दो अपवाद मत भूलो

आयनन एन्थैल्पी में Be > B और N > O हैं — भरे/अर्ध-पूर्ण उपकोश की अतिरिक्त स्थिरता के कारण। बिना कारण बताए केवल क्रम लिखने पर अंक कटते हैं।

तेज़ तरीका

समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ की त्रिज्या तुलना में इलेक्ट्रॉन गिनने की ज़रूरत नहीं — सीधे नाभिकीय आवेश (प्रोटॉन संख्या) देखो: आवेश अधिक → त्रिज्या छोटी।

तत्वों का वर्गीकरण — आवर्त प्रवृत्तियाँ

चित्र 1: चित्र 1 में आवर्त सारणी की बनावट से प्रवृत्तियों तक का क्रम दिखाया गया है।

तत्वों का वर्गीकरण — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

आवर्त प्रवृत्तियाँ — वर्ग और आवर्त में बदलाव

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): आवर्त सारणी: 18 वर्ग (ऊर्ध्वाधर) और 7 आवर्त (क्षैतिज)। बाएँ से दाएँ त्रिज्या घटती है और आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है; ऊपर से नीचे त्रिज्या बढ़ती है और आयनन एन्थैल्पी घटती है। F सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व है।

मुख्य शब्द / Key Terms

  • वर्ग: आवर्त सारणी का ऊर्ध्वाधर स्तंभ।
  • आवर्त: आवर्त सारणी की क्षैतिज पंक्ति।
  • आयनन एन्थैल्पी: इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा।
  • विद्युत ऋणात्मकता: इलेक्ट्रॉन खींचने की प्रवृत्ति।
  • उपधातु: धातु और अधातु दोनों के गुण वाला तत्व।
  • आवर्त नियम (आधुनिक): तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन होते हैं।
  • समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़: समान इलेक्ट्रॉन-संख्या वाली स्पीशीज़, जैसे N3−, O2−, F−, Na+, Mg2+ (सभी 10 इलेक्ट्रॉन)।
  • परिरक्षण प्रभाव: आंतरिक कोशों के इलेक्ट्रॉनों द्वारा बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण का कम होना।
  • उभयधर्मी ऑक्साइड: जो अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करे, जैसे Al2O3, ZnO।
  • विकर्ण संबंध: आवर्त सारणी में विकर्ण पर स्थित तत्वों के गुणों की समानता, जैसे Li और Mg।
  • संक्रमण तत्व: d-ब्लॉक के तत्व जिनके परमाणु या आयन में d उपकोश आंशिक रूप से भरा हो।

याद रखें

  • आधुनिक सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।
  • एक वर्ग के तत्वों के गुण समान होते हैं।
  • त्रिज्या बाएँ से दाएँ घटती है, ऊपर से नीचे बढ़ती है।
  • फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है।
  • उत्कृष्ट गैसें लगभग अक्रिय होती हैं।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: आवर्त सारणी को परमाणु भार के क्रम में मान लेना। आधुनिक सारणी परमाणु संख्या के क्रम में है — यही मेंडेलीव की सारणी से मुख्य सुधार है।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. आधुनिक आवर्त सारणी किस क्रम में है? संकेत: परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में।
  2. कितने वर्ग और आवर्त हैं? संकेत: 18 वर्ग, 7 आवर्त।
  3. बाएँ से दाएँ त्रिज्या क्यों घटती है? संकेत: नाभिकीय आकर्षण बढ़ने से।
  4. सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व कौनसा है? संकेत: फ्लोरीन।
  5. उत्कृष्ट गैसें कहाँ होती हैं? संकेत: वर्ग 18 में।

मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच

ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।

  1. प्रश्न: निम्न को परमाणु त्रिज्या के बढ़ते क्रम में लगाओ: Na, Mg, Al, Si। कारण भी दो।
    उत्तर: बढ़ता क्रम: Si < Al < Mg < Na। ये सभी तीसरे आवर्त के हैं; बाएँ से दाएँ नाभिकीय आवेश बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन उसी कोश में जुड़ते हैं, इसलिए आकर्षण बढ़ता है और त्रिज्या घटती है।
  2. प्रश्न: N3−, O2−, F−, Na+, Mg2+ को त्रिज्या के बढ़ते क्रम में लगाओ।
    उत्तर: बढ़ता क्रम: Mg2+ < Na+ < F− < O2− < N3−। सभी में 10 इलेक्ट्रॉन हैं; नाभिकीय आवेश (Mg = 12 … N = 7) जितना अधिक, इलेक्ट्रॉन उतने कसकर खिंचे, त्रिज्या उतनी छोटी।
  3. प्रश्न: बेरिलियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी बोरॉन से अधिक क्यों है?
    उत्तर: Be का विन्यास 1s²2s² है — भरा हुआ 2s उपकोश अधिक स्थायी है, इसलिए इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन है। B (2s²2p¹) का अकेला p इलेक्ट्रॉन अपेक्षाकृत ढीला है, इसलिए उसकी आयनन एन्थैल्पी कम है।
  4. प्रश्न: क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी फ्लोरीन से अधिक ऋणात्मक क्यों है?
    उत्तर: F का आकार बहुत छोटा है; नया इलेक्ट्रॉन पहले से भरे छोटे 2p उपकोश में जाने पर तीव्र इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षण झेलता है। Cl का आकार बड़ा होने से यह प्रतिकर्षण कम है, इसलिए ऊर्जा अधिक मुक्त होती है।
  5. प्रश्न: सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व कौन है और वर्ग में नीचे जाने पर विद्युत-ऋणात्मकता क्यों घटती है?
    उत्तर: फ्लोरीन (पॉलिंग मान 4.0)। वर्ग में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है और परिरक्षण बढ़ता है, इसलिए नाभिक आबंध-इलेक्ट्रॉनों को कम खींच पाता है।
  6. प्रश्न: Na2O, Al2O3 और Cl2O7 की अम्ल-क्षार प्रकृति बताओ।
    उत्तर: Na2O क्षारीय, Al2O3 उभयधर्मी (अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया), Cl2O7 अम्लीय है — आवर्त में बाएँ से दाएँ ऑक्साइड क्षारीय से अम्लीय होते जाते हैं।
  7. प्रश्न: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु भार के बजाय परमाणु संख्या के क्रम में क्यों रखा गया?
    उत्तर: क्योंकि तत्वों के गुण परमाणु संख्या (प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनिक विन्यास) पर निर्भर करते हैं, परमाणु भार पर नहीं। मोसले के प्रयोग ने यह सिद्ध किया; इससे मेंडेलीव सारणी की विसंगतियाँ (जैसे Ar–K, Co–Ni का क्रम) भी दूर हुईं।
  8. प्रश्न: धनायन जनक परमाणु से छोटा और ऋणायन बड़ा क्यों होता है?
    उत्तर: धनायन में इलेक्ट्रॉन कम होते हैं — नाभिकीय आकर्षण प्रति इलेक्ट्रॉन बढ़ जाता है और कभी-कभी पूरा कोश ही हट जाता है। ऋणायन में इलेक्ट्रॉन अधिक होने से प्रतिकर्षण बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन मेघ फैल जाता है।
  9. प्रश्न: विकर्ण संबंध क्या है? एक उदाहरण दो।
    उत्तर: आवर्त सारणी में विकर्ण पर स्थित तत्वों के गुणों की समानता विकर्ण संबंध है, जैसे लीथियम (Li) और मैग्नीशियम (Mg) — दोनों के नाइट्राइड बनते हैं और दोनों के कार्बोनेट गर्म करने पर अपघटित होते हैं।
  10. प्रश्न: उत्कृष्ट गैसों की आयनन एन्थैल्पी अपने आवर्त में सबसे अधिक क्यों होती है?
    उत्तर: क्योंकि उनकी बाह्यतम कोश पूरी भरी होती है — यह विन्यास अत्यंत स्थायी है, इसलिए इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए सबसे अधिक ऊर्जा चाहिए।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. सोडियम और क्लोरीन में किसकी त्रिज्या अधिक होगी? उत्तर: सोडियम की, क्योंकि वह बाईं ओर है।
  2. ऊपर से नीचे आयनन एन्थैल्पी क्यों घटती है? उत्तर: क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाता है।
  3. क्षार धातुएँ क्यों क्रियाशील होती हैं? उत्तर: क्योंकि वे अपना एक इलेक्ट्रॉन आसानी से खो देती हैं।
  4. उपधातु कहाँ स्थित होते हैं? उत्तर: धातुओं और अधातुओं के बीच की सीढ़ी पर।
  5. एक ही वर्ग के तत्वों के गुण समान क्यों होते हैं? उत्तर: क्योंकि उनका बाहरी इलेक्ट्रॉन विन्यास समान होता है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न

नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।

अभ्यास 3 (पुस्तक-अध्याय 3)

  1. प्रश्न: आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
    उत्तर: तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास — विशेषकर संयोजकता कोश का विन्यास। समान संयोजकता विन्यास वाले तत्व एक ही वर्ग में आते हैं।
  2. प्रश्न: मेंडेलीव ने किस महत्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उसपर दृढ़ रह पाए?
    उत्तर: परमाणु द्रव्यमान को। नहीं — कुछ तत्वों (जैसे Te और I, Co और Ni) को क्रम से हटकर रखना पड़ा, क्योंकि द्रव्यमान-क्रम गुणधर्मों के क्रम से मेल नहीं खाता था।
  3. प्रश्न: मेंडेलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?
    उत्तर: मेंडेलीव का नियम परमाणु द्रव्यमान पर आधारित था; आधुनिक नियम परमाणु संख्या पर — तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं।
  4. प्रश्न: क्वांटम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।
    उत्तर: छठा आवर्त n = 6 से शुरू होता है; इसमें भरे जाने वाले उपकोश 6s, 4f, 5d, 6p हैं — क्षमताएँ 2 + 14 + 10 + 6 = 32 इलेक्ट्रॉन, अर्थात् 32 तत्व।
  5. प्रश्न: आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?
    उत्तर: Z = 14 सिलिकॉन है — विन्यास [Ne] 3s² 3p²; बाह्यतम कोश n = 3, इसलिए आवर्त 3; संयोजकता इलेक्ट्रॉन 4, इसलिए वर्ग 14।
  6. प्रश्न: उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है।
    उत्तर: आवर्त 3, वर्ग 17 — क्लोरीन, Z = 17 (विन्यास 3s² 3p⁵)।
  7. प्रश्न: कौन से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है? (i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा, (ii) सी बोर्ग समूह द्वारा।
    उत्तर: (i) लॉरेन्सियम (Lr, Z = 103) — लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला के नाम पर। (ii) सीबोर्गियम (Sg, Z = 106) — ग्लेन सीबोर्ग के नाम पर।
  8. प्रश्न: एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
    उत्तर: क्योंकि उनका संयोजकता-कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, और रासायनिक गुणधर्म मुख्यतः संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं।
  9. प्रश्न: ‘परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनी त्रिज्या’ से आप क्या समझते हैं?
    उत्तर: परमाणु त्रिज्या: नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन कोश तक की दूरी (सहसंयोजक त्रिज्या, धात्विक त्रिज्या या वान्डरवाल्स त्रिज्या के रूप में मापी जाती है)। आयनी त्रिज्या: किसी आयन के नाभिक से उस दूरी तक की प्रभावी त्रिज्या जहाँ तक आयन का प्रभाव रहता है — धनायन की त्रिज्या जनक परमाणु से छोटी और ऋणायन की बड़ी होती है।
  10. प्रश्न: किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
    उत्तर: वर्ग में नीचे जाने पर त्रिज्या बढ़ती है — नया कोश जुड़ता है। आवर्त में बाएँ से दाएँ त्रिज्या घटती है — नाभिकीय आवेश बढ़ता है, परिरक्षण लगभग समान रहता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर खिंचते हैं।
  11. प्रश्न: समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज़ का नाम लिखिए, जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी — (i) F⁻, (ii) Ar, (iii) Mg²⁺, (iv) Rb⁺।
    उत्तर: समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। (i) F⁻ (10e) के साथ: Ne, Na⁺, O²⁻; (ii) Ar (18e) के साथ: Cl⁻, K⁺, Ca²⁺; (iii) Mg²⁺ (10e) के साथ: Ne, F⁻, Na⁺; (iv) Rb⁺ (36e) के साथ: Kr, Br⁻, Sr²⁺।
  12. प्रश्न: निम्नलिखित स्पीशीज़ पर विचार कीजिए — N³⁻, O²⁻, F⁻, Na⁺, Mg²⁺ तथा Al³⁺। (क) इनमें क्या समानता है? (ख) इन्हें आयनी त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
    उत्तर: (क) सभी में 10 इलेक्ट्रॉन हैं — सभी समइलेक्ट्रॉनिक हैं (Ne विन्यास)। (ख) बढ़ती त्रिज्या: Al³⁺ < Mg²⁺ < Na⁺ < F⁻ < O²⁻ < N³⁻ (नाभिकीय आवेश घटने पर त्रिज्या बढ़ती है)।
  13. प्रश्न: धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
    उत्तर: धनायन बनने पर इलेक्ट्रॉन कम होते हैं — नाभिकीय खिंचाव प्रति इलेक्ट्रॉन बढ़ता है और कभी-कभी पूरा कोश हट जाता है, इसलिए त्रिज्या घटती है। ऋणायन में इलेक्ट्रॉन बढ़ते हैं — इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश प्रति इलेक्ट्रॉन घटता है, इसलिए त्रिज्या बढ़ती है।
  14. प्रश्न: आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा ‘आद्य अवस्था’ पदों की सार्थकता क्या है?
    उत्तर: ‘विलगित गैसीय’ इसलिए कि पड़ोसी परमाणुओं/विलायक का प्रभाव न आए — केवल परमाणु की अपनी प्रवृत्ति मापी जाए। ‘आद्य अवस्था’ इसलिए कि ऊर्जा की तुलना एक निश्चित आधार (सबसे कम ऊर्जा वाली अवस्था) से हो।
  15. प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा −2.18×10⁻¹⁸ J है। परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol⁻¹ के पदों में परिकलित कीजिए। [संकेत — उत्तर प्राप्त करने के लिए मोल संकल्पना का उपयोग कीजिए।]
    उत्तर: प्रति मोल आयनन ऊर्जा = 2.18×10⁻¹⁸ × 6.022×10²³ = 1.313×10⁶ J mol⁻¹ = 1313 kJ mol⁻¹।
  16. प्रश्न: द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है — Li < B < Be < C < O < N < F < Ne। व्याख्या कीजिए कि (i) Be की ΔᵢH, B से अधिक क्यों है? (ii) O की ΔᵢH, N और F से कम क्यों है?
    उत्तर: (i) Be का विन्यास 2s² पूर्ण भरा है — भरे हुए s उपकोश से इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन है; B का 2p¹ इलेक्ट्रॉन अपेक्षाकृत आसानी से निकलता है। (ii) N का विन्यास 2p³ अर्ध-भरा (अधिक स्थायी) है, इसलिए O (2p⁴) से N की आयनन एन्थैल्पी अधिक है; F की आयनन एन्थैल्पी O से अधिक है क्योंकि आवर्त में दाएँ जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है और त्रिज्या घटती है।
  17. प्रश्न: आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है, किंतु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है।
    उत्तर: Na (3s¹) का अकेला इलेक्ट्रॉन आसानी से निकलता है, जबकि Mg (3s²) का भरा s उपकोश और अधिक नाभिकीय आवेश इसे कठिन बनाते हैं — इसलिए Na की IE₁ कम। Na⁺ से दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने पर स्थायी Ne विन्यास टूटता है, इसलिए Na की IE₂ बहुत अधिक; Mg⁺ से दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने पर Mg²⁺ (Ne विन्यास) बनता है, इसलिए Mg की IE₂ कम है।
  18. प्रश्न: मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौन से कारक हैं?
    उत्तर: परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, नए कोश जुड़ते हैं, भीतरी इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण बढ़ता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है — बाह्य इलेक्ट्रॉन नाभिक से ढीला बँधता है।
  19. प्रश्न: वर्ग 13 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol⁻¹) में इस प्रकार हैं — B 801, Al 577, Ga 579, In 558, Tl 589। सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
    उत्तर: Al से Ga में वृद्धि d-इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण (d-ब्लॉक संकुचन) के कारण है; In से Tl में वृद्धि 4f और 5d इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण तथा अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण है।
  20. प्रश्न: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी? (i) O या F, (ii) F या Cl।
    उत्तर: (i) F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी O से अधिक ऋणात्मक है (F का छोटा आकार और अधिक नाभिकीय आवेश)। (ii) Cl की F से अधिक ऋणात्मक है — F के छोटे 2p कक्षक में आने वाले इलेक्ट्रॉन पर अधिक प्रतिकर्षण होता है, जबकि Cl के 3p कक्षक में स्थान अधिक है।
  21. प्रश्न: आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
    उत्तर: O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है — O⁻ पर पहले से ऋणावेश है, इसलिए दूसरा इलेक्ट्रॉन जोड़ने के लिए प्रतिकर्षण के विरुद्ध ऊर्जा देनी पड़ती है।
  22. प्रश्न: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता में क्या मूल अंतर है?
    उत्तर: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर मुक्त/अवशोषित ऊर्जा है (मापनीय राशि)। विद्युत्-ऋणात्मकता किसी परमाणु की बंध में साझा इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति है (सापेक्ष गुण, कोई निरपेक्ष मात्रक नहीं)।
  23. प्रश्न: सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत् ऋणात्मकता पाउलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?
    उत्तर: यह कथन सही नहीं है — किसी तत्व की विद्युत्-ऋणात्मकता स्थिर नहीं होती; वह ऑक्सीकरण अवस्था, संकरण और रासायनिक परिवेश पर निर्भर करती है। 3.0 केवल एक औसत/मानक मान है।
  24. प्रश्न: उस सिद्धांत का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित होता है — (i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, (ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
    उत्तर: (i) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऋणायन बनता है — इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ता है, प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है, त्रिज्या बढ़ती है। (ii) इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन बनता है — प्रतिकर्षण घटता है, प्रभावी आवेश बढ़ता है, त्रिज्या घटती है।
  25. प्रश्न: किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
    उत्तर: समान होगी — समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और नाभिकीय आवेश समान होते हैं; आयनन एन्थैल्पी इलेक्ट्रॉनिक संरचना पर निर्भर करती है, नाभिकीय द्रव्यमान पर नहीं।
  26. प्रश्न: धातुओं और अधातुओं में मुख्य अंतर क्या है?
    उत्तर: धातुएँ विद्युत्-धनात्मक होती हैं — इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं, चमकदार, तन्य, आघातवर्ध्य और ऊष्मा-विद्युत् की सुचालक होती हैं। अधातुएँ विद्युत्-ऋणात्मक होती हैं — इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं, भंगुर और कुचालक होती हैं।
  27. प्रश्न: आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए — (क) उस तत्व का नाम बताइए, जिसके बाह्य उप-कोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों। (ख) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो। (ग) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो। (घ) उस वर्ग का नाम बताइए, जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
    उत्तर: (क) मैंगनीज़ (3d⁵ उपकोश में पाँच इलेक्ट्रॉन)। (ख) कैल्शियम या मैग्नीशियम (दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर M²⁺ बनाते हैं)। (ग) ऑक्सीजन या सल्फर (दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके O²⁻/S²⁻ बनाते हैं)। (घ) वर्ग 17 (हैलोजन — F, Cl गैस; Br द्रव; I ठोस अधातु; At धात्विक लक्षण वाला)।
  28. प्रश्न: प्रथम वर्ग के तत्वों के लिए अभिक्रियाशीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है — Li < Na < K < Rb < Cs; जबकि वर्ग 17 के तत्वों में क्रम F > Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।
    उत्तर: वर्ग 1 में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है — इलेक्ट्रॉन त्यागना आसान होता है, इसलिए अभिक्रियाशीलता बढ़ती है। वर्ग 17 में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का परिमाण) घटती है, इसलिए अभिक्रियाशीलता घटती है।
  29. प्रश्न: s-, p-, d- और f-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
    उत्तर: s-ब्लॉक: ns¹⁻²; p-ब्लॉक: ns² np¹⁻⁶; d-ब्लॉक: (n−1)d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻²; f-ब्लॉक: (n−2)f⁰⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻² ns²।
  30. प्रश्न: तत्व, जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए — (i) ns² np⁴, जिसके लिए n = 3 है; (ii) (n−1)d² ns², जब n = 4 है; (iii) (n−2)f⁷ (n−1)d¹ ns², जब n = 6 है।
    उत्तर: (i) 3s² 3p⁴ — सल्फर, आवर्त 3, वर्ग 16। (ii) 3d² 4s² — टाइटेनियम, आवर्त 4, वर्ग 4। (iii) 4f⁷ 5d¹ 6s² — गैडोलिनियम, आवर्त 6, f-ब्लॉक (लैन्थेनॉयड)।
  31. प्रश्न: कुछ तत्वों की प्रथम ΔᵢH₁ और द्वितीय ΔᵢH₂ आयनन एन्थैल्पी (kJ mol⁻¹ में) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (ΔₑgH) निम्नलिखित हैं — I: 520, 7300, −60; II: 419, 3051, −48; III: 1681, 3374, −328; IV: 1008, 1846, −295; V: 2372, 5251, +48; VI: 738, 1451, −40। ऊपर दिए गए तत्वों में से कौन-सी (क) सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है? (ख) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है? (ग) सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है? (घ) सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है? (ङ) ऐसी धातु है, जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड (MX₂) बनाती है? (च) ऐसी धातु है, जो मुख्यतः MX वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है?
    उत्तर: (क) VI (Mg — धातुओं में उच्चतम IE₁); (ख) II (K — न्यूनतम IE₁); (ग) III (हैलोजन जैसी — अत्यधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि); (घ) V (उत्कृष्ट गैस — धनात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि); (ङ) VI (Mg → MgX₂); (च) I (Li — छोटा धनायन, LiX में सहसंयोजी लक्षण)।
  32. प्रश्न: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रगुक्ति कीजिए — (क) लीथियम और ऑक्सीजन, (ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन, (ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन, (घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन, (ङ) फॉस्फोरस और फ्लुओरीन, (च) 71वाँ तत्व और फ्लुओरीन।
    उत्तर: (क) Li₂O, (ख) Mg₃N₂, (ग) AlI₃, (घ) SiO₂, (ङ) PF₅, (च) LuF₃ (71वाँ तत्व ल्यूटिशियम है)।
  33. प्रश्न: आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्नलिखित में से किसको व्यक्त करता है? (क) परमाणु संख्या, (ख) परमाणु द्रव्यमान, (ग) मुख्य क्वांटम संख्या, (घ) दिगंशी क्वांटम संख्या।
    उत्तर: (ग) मुख्य क्वांटम संख्या — आवर्त संख्या बाह्यतम कोश की मुख्य क्वांटम संख्या (n) के बराबर होती है।
  34. प्रश्न: आधुनिक आवर्त सारणी के लिए निम्नलिखित के संदर्भ में कौन सा कथन सही नहीं है? (क) p-ब्लॉक में 6 स्तंभ हैं, क्योंकि p-कोश के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। (ख) d-ब्लॉक में 8 स्तंभ हैं, क्योंकि d-उप-कोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। (ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तंभों की संख्या उस उपकोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। (घ) तत्व के इलेक्ट्रॉन विन्यास को भरते समय अंतिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उप-कोश उसके दिगंशी क्वांटम संख्या को प्रदर्शित करता है।
    उत्तर: (ख) सही नहीं है — d-ब्लॉक में 10 स्तंभ होते हैं (d उपकोश में 10 इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं), 8 नहीं।
  35. प्रश्न: ऐसा कारक, जो संयोजकता इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता है, उस तत्व की रासायनिक प्रवृत्ति भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता? (क) संयोजक मुख्य क्वांटम संख्या (n), (ख) नाभिकीय आवेश (Z), (ग) नाभिकीय द्रव्यमान, (घ) क्रोड इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
    उत्तर: (ग) नाभिकीय द्रव्यमान — संयोजकता कोश नाभिकीय आवेश, कोश संख्या और परिरक्षण से प्रभावित होता है, नाभिक के द्रव्यमान से नहीं।
  36. प्रश्न: सम इलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ F⁻, Ne और Na⁺ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता है? (क) नाभिकीय आवेश (Z), (ख) मुख्य क्वांटम संख्या (n), (ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया, (घ) उपर्युक्त कारणों में से कोई भी नहीं, क्योंकि उनका आकार समान है।
    उत्तर: (क) नाभिकीय आवेश (Z) — इलेक्ट्रॉन संख्या समान (10) होने पर भी Z बढ़ने (F⁻: 9, Ne: 10, Na⁺: 11) पर त्रिज्या घटती है।
  37. प्रश्न: आयनन एन्थैल्पी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है? (क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन से आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है। (ख) क्रोड उत्कृष्ट गैस के विन्यास से जब इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है, तब आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है। (ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करता है। (घ) कम n मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
    उत्तर: (घ) गलत है — इसके विपरीत, अधिक n वाले (बाहरी) कक्षकों से इलेक्ट्रॉन आसानी से निकलते हैं; कम n वाले कक्षक नाभिक से अधिक दृढ़ता से बँधे होते हैं।
  38. प्रश्न: B, Al, Mg, K तत्वों के लिए धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम इनमें कौन सा है? (क) B > Al > Mg > K, (ख) Al > Mg > B > K, (ग) Mg > Al > K > B, (घ) K > Mg > Al > B।
    उत्तर: (घ) K > Mg > Al > B — आवर्त में बाएँ से दाएँ धात्विक लक्षण घटता है और वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ता है।
  39. प्रश्न: तत्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु अभिलक्षण का इनमें से सही क्रम कौन सा है? (क) B > C > Si > N > F, (ख) Si > C > B > N > F, (ग) F > N > C > B > Si, (घ) F > N > C > Si > B।
    उत्तर: (ग) F > N > C > B > Si — अधात्विक लक्षण आवर्त में दाएँ जाने पर बढ़ता है और वर्ग में नीचे जाने पर घटता है।
  40. प्रश्न: तत्वों F, Cl, O और N तथा ऑक्सीकरण गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता का निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है? (क) F > Cl > O > N, (ख) F > O > Cl > N, (ग) Cl > F > O > N, (घ) O > F > N > Cl।
    उत्तर: (ख) F > O > Cl > N — ऑक्सीकरण क्षमता (विद्युत्-ऋणात्मकता और इलेक्ट्रॉन ग्रहण प्रवृत्ति) के अनुसार यही क्रम है।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • आधुनिक नियम: गुण परमाणु संख्या के आवर्ती फलन हैं; सारणी में 18 वर्ग, 7 आवर्त।
  • त्रिज्या: आवर्त में घटे, वर्ग में बढ़े; धनायन छोटा, ऋणायन बड़ा।
  • आयनन एन्थैल्पी: आवर्त में बढ़े, वर्ग में घटे; अपवाद Be > B, N > O।
  • इलेक्ट्रॉन लब्धि: हैलोजन सबसे अधिक ऋणात्मक; Cl > F (परिमाण में)।
  • विद्युत-ऋणात्मकता: F सबसे अधिक (4.0); आवर्त में बढ़े, वर्ग में घटे।
  • ऑक्साइड: बाईं ओर क्षारीय, बीच में उभयधर्मी, दाईं ओर अम्लीय।
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