Chapter 2: ढहते विश्वास
बाँध टूटा, विश्वास ढहा — पर एक माँ की ममता नहीं ढही।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ढहते विश्वास — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | वर्णिका भाग-2 — अध्याय 2 | प्रकार: कहानी (सातकोड़ी होता) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दरार पड़ा स्तंभ — टूटते विश्वास का एक सामान्य प्रतीकात्मक चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

हाथ मिलाते मित्र — विश्वास का एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
कहानी की केंद्रीय पात्र लक्ष्मी है, जो देवी नदी के किनारे दलेई बाँध के नीचे के एक घर में रहती है। उसका पति लक्ष्मण कलकत्ता में काम करता है और उसका भेजा हुआ पैसा पर्याप्त नहीं होता, इसलिए लक्ष्मी तहसीलदार के घर छोटे-मोटे काम भी करती है।
कहानी में ओडिशा के जन-जीवन पर बाढ़ और सूखे का प्रभाव दिखाया गया है। सूखे के बाद एक महीने तक लगातार बारिश होती है, और बाढ़ का डर बढ़ जाता है। लक्ष्मी के मन में पहले की बाढ़ की स्मृति भी है — एक बच्चा अपनी मृत माँ के शरीर से चिपका हुआ था, और सियार घूम रहे थे। कहानी में हीराकुड बाँध का भी उल्लेख है — लक्ष्मी के ससुर की मृत्यु उसी के निर्माण के दौरान हुई थी।
गाँव के युवक — जिनमें अच्युत भी है — बाँध पर पहरा देते हैं। पर बाँध टूट जाता है। लक्ष्मी अपने दो बेटियों और छोटे बेटे के साथ भागती है, शिव मंदिर के पास के बरगद के पेड़ पर चढ़ जाती है, बेहोश हो जाती है, और होश आने पर पाती है कि पेड़ की शाखाओं में एक डूबा हुआ बच्चा फँसा हुआ है — वह उसका अपना बेटा नहीं है — जिसे वह अपने सीने से लगा लेती है। शीर्षक का भाव यही है कि बाँध, भाग्य और दैवी सुरक्षा पर विश्वास ढह जाता है, पर मानवीय ममता और करुणा नहीं ढहती।
क्या सीखना है
लक्ष्मी, उसका परिवार, बाढ़ का भय, बाँध का टूटना और शीर्षक के भाव को समझें।
मुख्य शब्द
- लक्ष्मी — कहानी की केंद्रीय पात्र; दलेई बाँध के नीचे रहने वाली महिला।
- दलेई बाँध — देवी नदी पर बना बाँध, जिसके नीचे लक्ष्मी का घर है।
- हीराकुड बाँध — ओडिशा का प्रसिद्ध बाँध; लक्ष्मी के ससुर की मृत्यु उसी के निर्माण में हुई थी।
- अच्युत — गाँव का युवक, जो बाँध पर पहरा देता है।
- ढहते विश्वास — शीर्षक का भाव — बाँध, भाग्य और सुरक्षा पर विश्वास का ढहना।
याद रखें
- लक्ष्मी देवी नदी के किनारे दलेई बाँध के नीचे रहती है।
- पति लक्ष्मण कलकत्ता में काम करता है; पैसा पर्याप्त नहीं होता।
- लक्ष्मी तहसीलदार के घर छोटे-मोटे काम करती है।
- बाँध टूटने पर लक्ष्मी बरगद के पेड़ पर चढ़ जाती है।
- पेड़ में डूबा बच्चा मिलता है — वह उसका अपना बेटा नहीं है।
सातकोड़ी होता का जन्म 29 अक्तूबर 1929 को मयूरभंज, ओडिशा में हुआ था। वे उड़िया के कहानीकार थे — उन्होंने भारतीय रेलवे और ओडिशा सरकार के पदों पर सेवा की। यह कहानी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा संपादित-अनूदित संग्रह 'उड़िया की चर्चित कहानियाँ' (विभूति प्रकाशन, दिल्ली) से ली गई है।
इस कहानी का विषय लोगों के बीच विश्वास का टूटना नहीं है — इसका केंद्र बाढ़ है, और बाँध, भाग्य और सुरक्षा पर विश्वास का ढहना है। उत्तर में यही केंद्र लिखें। लेखक का नाम पुस्तक के अनुसार सातकोड़ी होता है।
'बाढ़ के दृश्यों का वर्णन' और 'शीर्षक की सार्थकता' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। बाढ़ के वर्णन में बरगद का पेड़ और डूबा बच्चा अवश्य लिखें।
Chart / Table: कहानी के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| लक्ष्मी | दलेई बाँध के नीचे का घर; पति कलकत्ता में |
| परिवार | दो बेटियाँ और छोटा बेटा |
| आजीविका | पति की कमाई + तहसीलदार के घर काम |
| बाढ़ का भय | एक महीने की लगातार बारिश; पहले की बाढ़ की स्मृति |
| बाँध | टूट जाता है; गाँव के युवक पहरा देते थे |
| अंत | बरगद पर डूबा बच्चा; ममता नहीं ढही |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- लक्ष्मी कौन थी? उसकी पारिवारिक परिस्थितियों का चित्रण कीजिए।
संकेत: बाँध के नीचे का घर और पति की कमाई से सोचें। - कहानी से सिद्ध कीजिए कि ओडिशा का जन-जीवन बाढ़ और सूखे से बहुत प्रभावित है।
संकेत: सूखे के बाद बारिश और बाँध से सोचें। - कहानी के बाढ़-दृश्यों का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
संकेत: बाँध टूटने और बरगद से सोचें। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
संकेत: ढहते विश्वास और न ढहने वाली ममता से सोचें। - लक्ष्मी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
संकेत: संघर्ष, ममता, साहस से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि बाढ़ और आपदा में बाँध, भाग्य और दैवी सुरक्षा पर विश्वास ढह जाता है, पर मानवीय ममता और करुणा नहीं ढहती — लक्ष्मी अपने बच्चों के साथ-साथ एक अनजान डूबे बच्चे को भी अपने सीने से लगा लेती है। - लक्ष्मी कौन थी?
लक्ष्मी देवी नदी के किनारे दलेई बाँध के नीचे के घर में रहने वाली महिला थी। उसका पति लक्ष्मण कलकत्ता में काम करता था, और उसका भेजा पैसा पर्याप्त नहीं होता था, इसलिए वह तहसीलदार के घर छोटे-मोटे काम भी करती थी। - बाढ़ का भय कैसे बढ़ा?
सूखे के बाद एक महीने तक लगातार बारिश हुई, और बाढ़ का डर बढ़ गया। लक्ष्मी के मन में पहले की बाढ़ की स्मृति भी थी — एक बच्चा अपनी मृत माँ के शरीर से चिपका हुआ था, और सियार घूम रहे थे। - बाँध टूटने पर क्या हुआ?
बाँध टूटने पर लक्ष्मी अपने दो बेटियों और छोटे बेटे के साथ भागी, शिव मंदिर के पास के बरगद के पेड़ पर चढ़ गई, बेहोश हो गई, और होश आने पर पाती है कि पेड़ की शाखाओं में एक डूबा हुआ बच्चा फँसा है — वह उसका अपना बेटा नहीं है — जिसे वह अपने सीने से लगा लेती है। - इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
यही कि आपदा में भौतिक सुरक्षा ढह सकती है, पर मानवीय करुणा नहीं ढहती — और यही करुणा मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 7 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- लक्ष्मी कौन थी? उसकी पारिवारिक परिस्थितियों का चित्रण कीजिए।
लक्ष्मी देवी नदी के किनारे दलेई बाँध के नीचे के घर में रहने वाली महिला थी। उसका पति लक्ष्मण कलकत्ता में काम करता था और उसका भेजा हुआ पैसा पर्याप्त नहीं होता था, इसलिए वह तहसीलदार के घर छोटे-मोटे काम भी करती थी। उसके दो बेटियाँ और एक छोटा बेटा था — परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी। - कहानी से सिद्ध कीजिए कि ओडिशा का जन-जीवन बाढ़ और सूखे से बहुत प्रभावित है।
कहानी में सूखे के बाद एक महीने तक लगातार बारिश होती है, और बाढ़ का डर पूरे गाँव पर छा जाता है। गाँव के युवक बाँध पर पहरा देते हैं, लक्ष्मी के मन में पहले की बाढ़ की स्मृति है, और हीराकुड बाँध के निर्माण में उसके ससुर की मृत्यु हुई थी — ये सब दिखाते हैं कि ओडिशा का जन-जीवन बाढ़ और सूखे से गहराई से प्रभावित है। - कहानी के बाढ़-दृश्यों का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
बाढ़ के दृश्य इस प्रकार हैं — एक महीने की लगातार बारिश के बाद बाँध पर खतरा बढ़ता है, गाँव के युवक पहरा देते हैं, पर बाँध टूट जाता है। पानी गाँव में घुस आता है, लक्ष्मी अपने बच्चों के साथ भागती है, बरगद के पेड़ पर चढ़ जाती है, बेहोश हो जाती है, और होश आने पर पेड़ में एक डूबा बच्चा पाती है — यही बाढ़ की भयावहता का चित्र है। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि कहानी में बाँध, भाग्य और दैवी सुरक्षा पर विश्वास ढह जाता है — बाँध टूटता है, भाग्य साथ नहीं देता, और मंदिर के पास भी सुरक्षा नहीं मिलती। पर मानवीय ममता नहीं ढहती — लक्ष्मी एक अनजान बच्चे को भी अपने सीने से लगा लेती है। यही 'ढहते विश्वास' का भाव है। - लक्ष्मी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
लक्ष्मी संघर्षशील, साहसी और ममतामयी महिला है। वह कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, तहसीलदार के घर काम करती है, बाढ़ में अपने बच्चों को बचाकर बरगद पर चढ़ जाती है, और एक अनजान डूबे बच्चे को भी अपने सीने से लगा लेती है — यही उसकी ममता और मानवता है। - बिहार का जन-जीवन भी बाढ़ और सूखे से प्रभावित है — इस पर अपने विचार लिखिए।
बिहार का जन-जीवन भी बाढ़ और सूखे से गहराई से प्रभावित है — हर साल कोसी, गंडक और अन्य नदियों की बाढ़ से गाँव डूब जाते हैं, फसलें नष्ट होती हैं, और लोग विस्थापित होते हैं। सूखे के सालों में भी किसानों की कठिनाई बढ़ जाती है। ओडिशा की तरह बिहार में भी बाढ़ और सूखा जन-जीवन का एक स्थायी संकट है। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
लक्ष्मी दलेई बाँध के नीचे के घर में अपने बच्चों के साथ रहती है; पति कलकत्ता में काम करता है। सूखे के बाद एक महीने की बारिश से बाढ़ का डर बढ़ता है, गाँव के युवक बाँध पर पहरा देते हैं, पर बाँध टूट जाता है। लक्ष्मी बच्चों के साथ बरगद पर चढ़ जाती है, बेहोश हो जाती है, और होश आने पर पेड़ में एक डूबा बच्चा पाती है — वह उसका अपना बेटा नहीं है — जिसे वह अपने सीने से लगा लेती है।
- लेखक सातकोड़ी होता; उड़िया कहानी; संग्रह 'उड़िया की चर्चित कहानियाँ'।
- लक्ष्मी: दलेई बाँध के नीचे का घर; पति कलकत्ता में।
- बाढ़: एक महीने की बारिश; बाँध टूटा।
- अंत: बरगद पर डूबा बच्चा; ममता नहीं ढही।
- शीर्षक: बाँध-भाग्य पर विश्वास ढहा, ममता नहीं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

