Chapter 1: दही वाली मंगम्मा
एक दही बेचने वाली बूढ़ी माँ — और सास-बहू के बीच अधिकारों की वह लड़ाई, जिसका कोई अंत नहीं।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
दही वाली मंगम्मा — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | वर्णिका भाग-2 — अध्याय 1 | प्रकार: कहानी (श्रीनिवास) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बाज़ार में दही बेचती महिला — साधारण काम की गरिमा का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

गाँव का बाज़ार — एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
कहानी की कथावाचिका बंगलौर में रहने वाली एक गृहिणी है, जो मंगम्मा की नियमित दही-ग्राहक है। गाँव से आकर मंगम्मा रोज़ दही बेचती है — बारी के हिसाब से रोज़ दही देना और महीने के अंत में पैसा लेना, यही व्यवस्था है। मंगम्मा गाँव की एक साधारण महिला है, जो अपने अनुभव से कथावाचिका को वैवाहिक जीवन की सलाह भी देती है।
कहानी का केंद्र मंगम्मा और उसकी बहू के बीच का विवाद है। विवाद तब शुरू होता है, जब बहू अपने बेटे को मारती है और मंगम्मा बीच में आ जाती है। बेटा भी इस विवाद में इस तरह पक्ष लेता है कि मंगम्मा को अलग रहना पड़ता है — पर वह फिर भी अपने पोते को दही देती रहती है। इसके बाद कई प्रसंग आते हैं — मंगम्मा की मखमली जैकेट, जिसे उसने बचत करके खरीदा था और जिस पर उसे ताने सुनने पड़े; रंगप्पा नाम का एक गाँव का आदमी, जो उससे कर्ज़ माँगता है, उसका पीछा करता है और उसका हाथ पकड़ लेता है, जिससे वह डर जाती है और अपना पैसा बैंक में सुरक्षित रखना चाहती है; और एक कौआ, जो उसके पोते के लिए ले जाए जा रहे मिठाई के पैकेट को उठा ले जाता है, जिससे वह अंधविश्वास से डर जाती है।
अंत में पोता अपनी दादी के पास भाग आता है और वापस जाने से इनकार कर देता है। बेटा, बहू और गाँव के बुज़ुर्ग बीच-बचाव करते हैं, और मंगम्मा खुशी-खुशी वापस लौट आती है — इस नई व्यवस्था के साथ कि बहू अब दही बेचने का काम सँभालेगी और मंगम्मा घर की मालकिन बनकर घर पर रहेगी। कथावाचिका इसके बाद बहू का पक्ष भी सुनती है — बहू को भी अपने पति और बेटे पर अपना अधिकार लगता है — और वह निष्कर्ष निकालती है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह सही लगते हैं, और सास-बहू के बीच अधिकारों की यह लड़ाई गाँव और शहर दोनों में, एक अनंत नाटक की तरह चलती रहती है।
क्या सीखना है
मंगम्मा, कथावाचिका, सास-बहू विवाद के कारण, रंगप्पा का प्रसंग और कहानी के अंत की नई व्यवस्था को समझें।
मुख्य शब्द
- मंगम्मा — कहानी की केंद्रीय पात्र; गाँव से आकर दही बेचने वाली महिला।
- बारी — रोज़ दही देने और महीने के अंत में पैसा लेने की व्यवस्था।
- रंगप्पा — गाँव का वह आदमी, जो मंगम्मा से कर्ज़ माँगता है और उसका पीछा करता है।
- कथावाचिका — कहानी सुनाने वाली बंगलौर की गृहिणी; मंगम्मा की नियमित ग्राहक।
- मखमली जैकेट — मंगम्मा की बचत से खरीदी गई जैकेट, जिस पर उसे ताने सुनने पड़े।
याद रखें
- कथावाचिका बंगलौर की गृहिणी है; मंगम्मा उसकी नियमित दही-विक्रेता है।
- विवाद बहू द्वारा बेटे को मारने और मंगम्मा के बीच में आने से शुरू हुआ।
- रंगप्पा मंगम्मा से कर्ज़ माँगता है और उसका हाथ पकड़ लेता है।
- पोता दादी के पास भाग आता है और वापस जाने से इनकार करता है।
- अंत: बहू दही बेचेगी, मंगम्मा घर की मालकिन रहेगी।
श्रीनिवास का पूरा नाम मास्ती वेंकटेश अय्यंगार है। उनका जन्म 6 जून 1891 को कोलार, कर्नाटक में हुआ था। वे कन्नड़ के प्रसिद्ध लेखक थे — उन्हें 1968 में 'सण्णा कथेगलु' कहानी-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला। यह कहानी 'कन्नड़ कहानियाँ' (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत) से ली गई है; हिंदी अनुवाद बी० आर० नारायण ने किया है।
इस कहानी का विषय दही की शुद्धता या मेहनत की गरिमा नहीं है — इसका केंद्र सास-बहू के बीच अधिकारों की लड़ाई है। उत्तर में यही केंद्र लिखें। लेखक का नाम पुस्तक के अनुसार श्रीनिवास है।
'मंगम्मा का चरित्र-चित्रण' और 'कहानी का सारांश' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। चरित्र में उसकी आत्मनिर्भरता, अनुभव और पोते के प्रति स्नेह अवश्य लिखें।
Chart / Table: कहानी के मुख्य पात्र और प्रसंग
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मंगम्मा | गाँव से आकर दही बेचने वाली; पोते से स्नेह |
| कथावाचिका | बंगलौर की गृहिणी; नियमित ग्राहक |
| बहू | बेटे की पत्नी; अपने अधिकारों के प्रति सजग |
| रंगप्पा | कर्ज़ माँगने वाला; मंगम्मा का पीछा करता है |
| पोता | दादी से स्नेह; वापस जाने से इनकार |
| अंत | बहू दही बेचेगी; मंगम्मा घर की मालकिन |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- मंगम्मा और उसकी बहू के बीच विवाद किस बात को लेकर था?
संकेत: बेटे को मारने और बीच में आने से सोचें। - रंगप्पा कौन था और वह मंगम्मा से क्या चाहता था?
संकेत: कर्ज़ और पीछा करने से सोचें। - बहू ने अपनी सास को मनाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?
संकेत: अंत की नई व्यवस्था से सोचें। - कहानी की कथावाचिका कौन है? उसका परिचय दीजिए।
संकेत: बंगलौर की गृहिणी और ग्राहक से सोचें। - मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
संकेत: आत्मनिर्भरता, अनुभव, स्नेह से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि सास और बहू के बीच अधिकारों की लड़ाई एक सार्वभौमिक नाटक है — दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह सही लगते हैं, और यह लड़ाई गाँव और शहर दोनों में, बिना अंत के चलती रहती है। - मंगम्मा कौन थी?
मंगम्मा गाँव की एक महिला थी, जो बंगलौर में आकर दही बेचती थी। वह कथावाचिका की नियमित दही-विक्रेता थी और अपने अनुभव से उसे वैवाहिक जीवन की सलाह भी देती थी। - विवाद कैसे शुरू हुआ?
विवाद तब शुरू हुआ, जब बहू ने अपने बेटे को मारा और मंगम्मा बीच में आ गई। बेटे ने भी इस विवाद में ऐसा पक्ष लिया कि मंगम्मा को अलग रहना पड़ा — पर वह फिर भी अपने पोते को दही देती रही। - कहानी का अंत क्या कहता है?
अंत कहता है कि पोते के दादी के पास भाग आने और गाँव के बुज़ुर्गों के बीच-बचाव के बाद मंगम्मा खुशी-खुशी लौट आती है — इस व्यवस्था के साथ कि बहू अब दही बेचने का काम सँभालेगी और मंगम्मा घर की मालकिन बनकर घर पर रहेगी। - इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
यही कि परिवार में अधिकारों की लड़ाई में कोई एक पक्ष पूरी तरह सही या गलत नहीं होता — दोनों पक्षों की भावनाओं को समझना ही समाधान है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 6 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- मंगम्मा और उसकी बहू के बीच विवाद किस बात को लेकर था?
विवाद इस बात को लेकर था कि बहू ने अपने बेटे को मारा और मंगम्मा बीच में आ गई। बहू को लगता था कि बेटे पर उसका अधिकार है, और मंगम्मा को लगता था कि पोते पर उसका भी अधिकार है — यही अधिकारों का टकराव विवाद का कारण बना। - रंगप्पा कौन था और वह मंगम्मा से क्या चाहता था?
रंगप्पा गाँव का एक आदमी था, जो मंगम्मा से कर्ज़ माँगता था। वह उसका पीछा करता था और एक बार उसका हाथ भी पकड़ लिया था, जिससे मंगम्मा डर गई थी और अपना पैसा बैंक में सुरक्षित रखना चाहती थी। - बहू ने अपनी सास को मनाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?
बहू ने अपनी सास को मनाने के लिए यह तरीका अपनाया कि वह दही बेचने का काम स्वयं सँभाल लेगी और मंगम्मा को घर की मालकिन बनाकर घर पर रखेगी — यानी उसने सास को सम्मान और आराम देकर मनाया, न कि झगड़कर। - कहानी की कथावाचिका कौन है? उसका परिचय दीजिए।
कहानी की कथावाचिका बंगलौर में रहने वाली एक गृहिणी है, जो मंगम्मा की नियमित दही-ग्राहक है। वह मंगम्मा से दही लेती है, उससे बातचीत करती है, और उसी के माध्यम से सास-बहू के विवाद की कहानी सुनती और सुनाती है। - मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
मंगम्मा आत्मनिर्भर, अनुभवी और स्नेहमयी महिला है। वह गाँव से आकर दही बेचकर अपना जीवन चलाती है, अपने अनुभव से दूसरों को सलाह देती है, और अपने पोते से गहरा स्नेह करती है — इतना कि अलग रहने पर भी वह उसे दही देती रहती है। वह डरती भी है — रंगप्पा से और अंधविश्वास से — पर अंत में वह सम्मान के साथ घर लौटती है। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
बंगलौर की एक गृहिणी मंगम्मा नाम की दही-विक्रेता से नियमित दही लेती है। मंगम्मा और उसकी बहू के बीच बेटे को मारने की बात पर विवाद होता है, मंगम्मा अलग रहने लगती है। बीच में मखमली जैकेट, रंगप्पा और कौए के प्रसंग आते हैं। अंत में पोता दादी के पास भाग आता है, गाँव के बुज़ुर्ग बीच-बचाव करते हैं, और मंगम्मा इस व्यवस्था के साथ लौट आती है कि बहू दही बेचेगी और वह घर की मालकिन रहेगी। कथावाचिका निष्कर्ष निकालती है कि सास-बहू के अधिकारों की यह लड़ाई एक अनंत नाटक है।
विस्तार — ‘दही वाली मंगम्मा’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘दही वाली मंगम्मा’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘मंगम्मा’ और ‘बारी’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- मंगम्मा — ‘मंगम्मा’ का अर्थ है — कहानी की केंद्रीय पात्र; गाँव से आकर दही बेचने वाली महिला।। ‘दही वाली मंगम्मा’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- बारी — ‘बारी’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — रोज़ दही देने और महीने के अंत में पैसा लेने की व्यवस्था। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘दही वाली मंगम्मा’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- रंगप्पा — ‘रंगप्पा’ — गाँव का वह आदमी, जो मंगम्मा से कर्ज़ माँगता है और उसका पीछा करता है।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘दही वाली मंगम्मा’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- कथावाचिका — ‘कथावाचिका’ का सामान्य अर्थ है — कहानी सुनाने वाली बंगलौर की गृहिणी; मंगम्मा की नियमित ग्राहक।। परंतु ‘दही वाली मंगम्मा’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- मखमली जैकेट — ‘मखमली जैकेट’ का अर्थ है — मंगम्मा की बचत से खरीदी गई जैकेट, जिस पर उसे ताने सुनने पड़े।। ‘दही वाली मंगम्मा’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
रचना की भाषा और शैली — कैसे पढ़ें
गद्य, पद्य और कथा — तीनों की पढ़ने की विधि अलग होती है। गद्य में तर्क का क्रम पकड़ना सबसे महत्त्वपूर्ण है: लेखक पहले क्या स्थापित करता है, फिर किस उदाहरण या तुलना से उसे पुष्ट करता है, और अंत में किस निष्कर्ष पर पहुँचता है। पद्य में भाव और बिंब पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कवि किस चित्र के माध्यम से अपना भाव व्यक्त करता है, और वह चित्र पाठक के मन में क्या प्रभाव छोड़ता है। कथा में पात्र, घटना और परिणाम का क्रम पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कौन-सा पात्र किस स्थिति में क्या करता है, और उससे क्या सीख निकलती है।
इस पाठ को पढ़ते समय भाषा के उन शब्दों पर भी ध्यान दें जो भाव को विशेष रंग देते हैं — जैसे तुलना, विरोधाभास, प्रश्न और दोहराव। लेखक अथवा कवि जब किसी बात पर बल देना चाहता है, तो वह उसे दोहराता है, किसी परिचित वस्तु से तुलना करता है, या प्रश्न के रूप में प्रस्तुत करता है। इन युक्तियों को पहचान लेने से पाठ का भाव अधिक स्पष्ट होता है और उत्तर में भाषा-संबंधी प्रश्नों का सामना करना आसान हो जाता है।
एक उपयोगी अभ्यास यह है कि पाठ के किसी एक अनुच्छेद या पद्यांश को अपनी भाषा में, बिना मूल शब्दों की नकल किए, दो-तीन वाक्यों में लिखें। फिर मूल से मिलाकर देखें कि केंद्रीय भाव छूटा तो नहीं है। यह अभ्यास न केवल समझ को गहरा करता है, बल्कि परीक्षा में ‘अपने शब्दों में उत्तर दीजिए’ जैसे प्रश्नों के लिए सीधी तैयारी भी है।
- लेखक श्रीनिवास (मास्ती वेंकटेश अय्यंगार); कन्नड़ से हिंदी अनुवाद: बी० आर० नारायण।
- कथावाचिका बंगलौर की गृहिणी; मंगम्मा दही-विक्रेता।
- विवाद: बहू द्वारा बेटे को मारना और मंगम्मा का बीच में आना।
- रंगप्पा: कर्ज़ माँगने वाला, पीछा करने वाला।
- अंत: बहू दही बेचेगी; मंगम्मा घर की मालकिन।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

