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Class 10 • Hindi • Godhuli Bhag-2

Chapter 6: बहादुर

बारह-तेरह साल का एक नेपाली लड़का — जिसकी हँसी फूल की पंखुड़ियों जैसी थी।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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बहादुर — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10)  | गद्य खंड — अध्याय 6 | प्रकार: कहानी (अमरकांत) |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

बहादुर के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मुश्किल में डटा हुआ बच्चा — साहस के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

बहादुर के लिए चित्र

एक-दूसरे की मदद करते बच्चे — एक सामान्य चित्र।

इस अध्याय के बारे में

कहानी का कथावाचक एक दिन सहसा गंभीर हो जाता है — जैसे उस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। कारण यह है कि साले साहब बहादुर को लेकर आए हैं — बारह-तेरह वर्ष की उम्र, ठिगना चकड़ शरीर, गोरा रंग, चपटा मुँह, सफेद नेकर, आधी बाँह की सफेद कमीज़, भूरे रंग का पुराना जूता, गले में स्काउटों की तरह एक रुमाल बँधा था। नौकर रखना कई कारणों से बहुत ज़रूरी हो गया था — सभी भाई और रिश्तेदार अच्छे ओहदों पर थे और उन सभी के यहाँ नौकर थे; बहन की शादी में घर जाकर नौकरों का सुख देखा; दोनों भाभियाँ रानी की तरह बैठकर चारपाइयाँ तोड़ती थीं, जबकि निर्मला को सुबह से रात तक खटना पड़ता था।

साले साहब से असाधारण विस्तार से किस्सा सुनना पड़ा — बहादुर का गाँव नेपाल और बिहार की सीमा पर था, बाप युद्ध में मारा गया था, माँ सारे परिवार का भरण-पोषण करती थी, माँ उसकी बड़ी गुरसेल थी और उसे बहुत मारती थी। एक बार उसने उस भैंस को बहुत मारा, जिसको उसकी माँ बहुत प्यार करती थी; माँ ने भैंस की मार का काल्पनिक अनुमान करके डंडे से उसकी दुगुनी पिटाई की — लड़के का मन माँ से फट गया, और वह घर से भाग आया।

बहादुर घर में अंगीठी जलाता, चाय बनाता, पिलाता, दोपहर में कपड़े धोता और बर्तन मलता, रसोई बनाने की भी ज़िद करता। निर्मला की उन दिनों तबीयत ठीक नहीं रहती थी, वह कुछ दवा ले रही थी; बहादुर उसको कोई काम करते देखकर कहता था 'माता जी, मेहनत न करो, तकलीफ़ बढ़ जाएगा'। शाम को लेखक के दफ्तर से आने पर घर के सभी लोग अपने अनुभव सुनाते थे, बहादुर भी आता था — एक बार लेखक की ओर देखकर सिर झुका लेता और धीरे-धीरे मुस्कराने लगता; उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों। निर्मला कभी-कभी पूछती थी 'बहादुर, तुमको अपनी माँ की याद आती है?' — 'नहीं' — 'क्यों?' — 'वह मारता क्यों था?' — इतना कहकर वह खूब हँसता था। रात को काम-धाम के बाद बरामदे में एक टूटी हुई बैलचकट पर अपना बिस्तर बिछाता था, जेब से कपड़े की एक गोल-सी नेपाली टोपी निकालकर पहनता था, छोटा-सा आईना निकालकर बंदर की तरह उसमें अपना मुँह देखता था, फिर उसकी जेब से गोलियाँ, पुराने ताश की गड्डी, खूबसूरत पत्थर के टुकड़े, ब्लेड, काग़ज़ की नावें निकलकर उसके बिस्तरे पर सज जाती थीं — फिर धीमे स्वर में पहाड़ी गाने गुनगुनाने लगता था।

कहानी का दुखद मोड़ तब आता है, जब घर आए रिश्तेदार साहब बहादुर पर चोरी का आरोप लगाते हैं — वे उसे पुलिस के पास ले जाने का नाटक करते हैं, दरवाज़े की ओर घसीटकर ले जाते हैं, फिर धीरे से कहते हैं कि बता दो, मैं कुछ नहीं करूँगा, बल्कि इनाम में दो रुपये दे दूँगा। बहादुर इनकार कर देता है। रिश्तेदार साहब हारकर उसे छोड़ देते हैं और हँसकर कहते हैं कि ये सब बड़े बाघ होते हैं, किसी झाड़ी-बाड़ी में छिपा आया होगा या ज़मीन में गाड़ आया होगा। इसके बाद निर्मला ने भी उसको डराया-धमकाया और दो-चार तमाचे जड़ दिए, पर वह 'नहीं-नहीं' करता रहा। इस घटना के बाद बहादुर काफी डाँट-मार खाने लगा, घर के सभी लोग उसको कुत्ते की तरह दुत्कारते थे, किशोर तो जैसे उसकी जान के पीछे पड़ गया था, वह उदास रहने लगा और काम में लापरवाही करने लगा। एक दिन लेखक दफ्तर से विलंब से आया — निर्मला आँगन में चुपचाप सिर पर हाथ रखकर बैठी थी, अंगीठी नहीं जली थी, आँगन गंदा पड़ा था, बर्तन बिना मले हुए रखे थे — 'क्या बात है?' — 'बहादुर भाग गया' — 'क्यों?' — 'पता नहीं, आज तो कुछ हुआ भी नहीं था, सुबह से ही बड़ा प्रसन्न था, दोपहर में खाना खाया, उसके बाद आँगन से सिल-बट्टा लेकर बरामदे में रखने जा रहा था कि सिल हाथ से छूटकर गिर गई और दो टुकड़े हो गई, शायद इसी डर से वह भाग गया कि लोग मारेंगे, पर मैं इसके लिए उसको थोड़ी कुछ कहती' — और सबसे बड़ा अफसोस यह था कि वह कोई भी सामान नहीं ले गया है — उसके कपड़े, उसका बिस्तर, उसके जूते — सभी छोड़ गया है।

क्या सीखना है

बहादुर का परिचय, उसके घर से भागने का कारण, घर में उसका जीवन, चोरी का आरोप और उसके भाग जाने को समझें।

मुख्य शब्द

  • बहादुर — कहानी का केंद्रीय पात्र; बारह-तेरह साल का नेपाली लड़का।
  • निर्मला — कथावाचक की पत्नी; बहादुर की देखभाल करने वाली।
  • किशोर — घर का लड़का; बहादुर को परेशान करने वाला।
  • साले साहब — बहादुर को लेकर आने वाले रिश्तेदार।
  • बैलचकट — टूटी हुई चारपाई; बहादुर का बिस्तर।

याद रखें

  • बहादुर बारह-तेरह साल का; गोरा रंग, चपटा मुँह, स्काउट रुमाल।
  • गाँव नेपाल-बिहार सीमा पर; बाप युद्ध में मारा गया।
  • माँ बहुत मारती थी; भैंस की पिटाई से मन फट गया।
  • हँसी कोमल और मीठी — फूल की पंखुड़ियाँ जैसी।
  • भाग गया — सिल टूटने के डर से; कोई सामान नहीं ले गया।
लेखक का परिचय

अमरकांत (1925–2014) हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार थे। उनकी कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन, मानवीय संवेदना और व्यंग्य का मिश्रण है। 'बहादुर' उनकी प्रसिद्ध कहानी है।

सामान्य गलती से बचें

बहादुर के भाग जाने का कारण सिल का टूटना है — चोरी नहीं। उत्तर में यही कारण लिखें। 'दिल' शब्द के बारे में किताब में कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला है — वह उत्तर व्याख्यात्मक है।

परीक्षा टिप

'बहादुर का चरित्र-चित्रण' और 'शीर्षक की सार्थकता' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। शीर्षक में 'नौकर' क्यों नहीं रखा गया, यह भी तैयार रखें।

Chart / Table: कहानी के मुख्य बिंदु

विषयविवरण
बहादुरबारह-तेरह साल; नेपाली लड़का
घर से भागनामाँ की मार से मन फट गया
घर में कामअंगीठी, चाय, कपड़े, बर्तन, रसोई
हँसीकोमल और मीठी — फूल की पंखुड़ियाँ
आरोपरिश्तेदार द्वारा चोरी का झूठा आरोप
भाग जानासिल टूटने के डर से; कोई सामान नहीं ले गया

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. लेखक को क्यों लगता है कि जैसे उस पर एक भारी दायित्व आ गया हो?
    संकेत: बहादुर के आने से सोचें।
  2. अपने शब्दों में पहली बार दिखे बहादुर का वर्णन कीजिए।
    संकेत: उम्र, शरीर, कपड़ों से सोचें।
  3. बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था?
    संकेत: माँ की मार से सोचें।
  4. बहादुर के चले जाने पर सबको पछतावा क्यों होता है?
    संकेत: उसके न लेने गए सामान से सोचें।
  5. शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। लेखक ने इसका शीर्षक 'नौकर' क्यों नहीं रखा?
    संकेत: बहादुर के चरित्र से सोचें।

प्रश्न और उत्तर

  1. इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
    केंद्रीय भाव यह है कि एक छोटा-सा बच्चा, जो नौकर के रूप में घर में आता है, अपने स्नेह, हँसी और मेहनत से घर का हिस्सा बन जाता है — पर जब उस पर झूठा आरोप लगता है और उसे दुत्कारा जाता है, तो वह चुपचाप भाग जाता है, और तब घर वालों को पछतावा होता है कि उन्होंने एक निर्दोष बच्चे को खो दिया।
  2. बहादुर कौन था?
    बहादुर बारह-तेरह साल का नेपाली लड़का था, जिसका गाँव नेपाल और बिहार की सीमा पर था। बाप युद्ध में मारा गया था, माँ बहुत मारती थी, इसलिए वह घर से भाग आया था।
  3. बहादुर घर में क्या करता था?
    बहादुर अंगीठी जलाता, चाय बनाता, पिलाता, दोपहर में कपड़े धोता और बर्तन मलता, रसोई बनाने की भी ज़िद करता। वह निर्मला की तबीयत का भी ख्याल रखता था।
  4. बहादुर क्यों भाग गया?
    बहादुर इसलिए भाग गया, क्योंकि सिल हाथ से छूटकर गिर गई और दो टुकड़े हो गई — उसे डर था कि लोग मारेंगे। पर सबसे बड़ा अफसोस यह था कि वह कोई भी सामान नहीं ले गया — उसके कपड़े, बिस्तर, जूते — सभी छोड़ गया।
  5. इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
    यही कि छोटे और कमज़ोर लोगों के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए — झूठा आरोप और दुत्कार एक निर्दोष बच्चे को भी घर से भागने पर मजबूर कर सकती है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)

इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 18 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।

  1. लेखक को क्यों लगता है कि जैसे उस पर एक भारी दायित्व आ गया हो?
    लेखक को इसलिए लगता है कि जैसे उस पर एक भारी दायित्व आ गया हो, क्योंकि साले साहब बहादुर को लेकर आए हैं — एक छोटा-सा बच्चा, जिसकी देखभाल, सुरक्षा और भविष्य की ज़िम्मेदारी अब लेखक के घर पर आ गई है।
  2. अपने शब्दों में पहली बार दिखे बहादुर का वर्णन कीजिए।
    पहली बार बहादुर बारह-तेरह वर्ष की उम्र, ठिगना चकड़ शरीर, गोरा रंग, चपटा मुँह, सफेद नेकर, आधी बाँह की सफेद कमीज़, भूरे रंग का पुराना जूता, गले में स्काउटों की तरह एक रुमाल बँधा हुआ दिखाई दिया था।
  3. लेखक को क्यों लगता है कि नौकर रखना बहुत ज़रूरी हो गया था?
    लेखक को इसलिए लगता है कि नौकर रखना बहुत ज़रूरी हो गया था, क्योंकि सभी भाई और रिश्तेदार अच्छे ओहदों पर थे और उन सभी के यहाँ नौकर थे; बहन की शादी में घर जाकर नौकरों का सुख देखा; दोनों भाभियाँ रानी की तरह बैठकर चारपाइयाँ तोड़ती थीं, जबकि निर्मला को सुबह से रात तक खटना पड़ता था।
  4. साले साहब से लेखक को कौन-सा किस्सा असाधारण विस्तार से सुनना पड़ा?
    साले साहब से लेखक को बहादुर के घर से भागने का किस्सा असाधारण विस्तार से सुनना पड़ा — उसका गाँव नेपाल और बिहार की सीमा पर था, बाप युद्ध में मारा गया था, माँ सारे परिवार का भरण-पोषण करती थी, माँ उसकी बड़ी गुरसेल थी और उसे बहुत मारती थी।
  5. बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था?
    बहादुर अपने घर से इसलिए भाग गया था, क्योंकि उसकी माँ उसे बहुत मारती थी। एक बार उसने उस भैंस को बहुत मारा, जिसको उसकी माँ बहुत प्यार करती थी; माँ ने भैंस की मार का काल्पनिक अनुमान करके डंडे से उसकी दुगुनी पिटाई की — लड़के का मन माँ से फट गया, और वह घर से भाग आया।
  6. बहादुर के नाम से 'दिल' शब्द क्यों उड़ा दिया गया? विचार करें।
    बहादुर के नाम से 'दिल' शब्द इसलिए उड़ा दिया गया होगा, क्योंकि घर में वह धीरे-धीरे एक व्यक्ति से एक नौकर बन गया था — उसका नाम छोटा करके उसे घर के काम का हिस्सा बना दिया गया था, जैसे उसका दिल और उसकी भावनाएँ अब मायने नहीं रखती थीं। (यह उत्तर व्याख्यात्मक है — किताब में इस बिंदु का कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला है।)
  7. व्याख्या करें — कहानी के चार कथनों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
    इस प्रश्न में चार कथनों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: पहला — उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों, यानी बहादुर की हँसी में बच्चों जैसी कोमलता और मिठास थी; दूसरा — पर अब बहादुर से भूल-गलतियाँ अधिक होने लगी थीं, यानी आरोप के बाद वह उदास और लापरवाह हो गया था; तीसरा — अगर वह कुछ चुराकर ले गया होता तो संतोष हो जाता, यानी घर वालों को लगता है कि यदि वह चोर होता तो उसका भाग जाना समझ में आता, पर वह निर्दोष था, इसीलिए पछतावा अधिक है; चौथा — यदि मैं न मारता, तो शायद वह न जाता, यानी लेखक को लगता है कि उसकी मार ने ही बहादुर को भागने पर मजबूर किया।
  8. काम-धाम के बाद रात को अपने बिस्तर पर गए बहादुर का लेखक किन शब्दों में चित्रण करता है? चित्र का आशय स्पष्ट करें।
    लेखक बहादुर का चित्रण इस तरह करता है कि रात को वह बरामदे में एक टूटी हुई बैलचकट पर अपना बिस्तर बिछाता था, जेब से नेपाली टोपी निकालकर पहनता था, आईने में अपना मुँह देखता था, फिर उसकी जेब से गोलियाँ, ताश की गड्डी, पत्थर के टुकड़े, ब्लेड, काग़ज़ की नावें निकलकर उसके बिस्तरे पर सज जाती थीं, और वह धीमे स्वर में पहाड़ी गाने गुनगुनाने लगता था। चित्र का आशय यह है कि बहादुर के पास भौतिक सुख नहीं था, पर उसके पास बचपन की दुनिया थी — छोटी-छोटी चीज़ों में ही उसकी खुशी थी।
  9. बहादुर के आने से लेखक के घर और परिवार के सदस्यों पर कैसा प्रभाव पड़ा?
    बहादुर के आने से लेखक के घर में एक नई रौनक आ गई — निर्मला को आराम मिला, बच्चे खुश हुए, और घर का काम भी सुचारु रूप से चलने लगा। बहादुर की हँसी और मेहनत ने घर को जीवंत बना दिया था।
  10. किन कारणों से बहादुर ने एक दिन लेखक का घर छोड़ दिया?
    बहादुर ने लेखक का घर इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उस पर चोरी का झूठा आरोप लगा, उसे डराया-धमकाया गया, तमाचे मारे गए, घर के सभी लोग उसे कुत्ते की तरह दुत्कारने लगे, और अंत में सिल टूटने के डर से वह भाग गया — उसे डर था कि लोग मारेंगे।
  11. बहादुर पर ही चोरी का आरोप क्यों लगाया जाता है और उस पर इस आरोप का क्या असर पड़ता है?
    बहादुर पर ही चोरी का आरोप इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि वह घर का सबसे कमज़ोर और छोटा सदस्य है — उस पर आरोप लगाना आसान है। इस आरोप का उस पर यह असर पड़ता है कि वह उदास रहने लगता है, काम में लापरवाही करने लगता है, और घर के सभी लोग उसे दुत्कारने लगते हैं।
  12. घर आए रिश्तेदारों ने कैसा प्रपंच रचा और उसका क्या परिणाम निकला?
    घर आए रिश्तेदार साहब ने यह प्रपंच रचा कि वे बहादुर को पुलिस के पास ले जाने का नाटक करते हैं, दरवाज़े की ओर घसीटकर ले जाते हैं, फिर धीरे से कहते हैं कि बता दो, मैं कुछ नहीं करूँगा, बल्कि इनाम में दो रुपये दे दूँगा। बहादुर इनकार कर देता है। परिणाम यह निकलता है कि रिश्तेदार हारकर उसे छोड़ देते हैं, पर बहादुर पर चोरी का दाग लग जाता है, और घर में उसे दुत्कारा जाने लगता है।
  13. बहादुर के चले जाने पर सबको पछतावा क्यों होता है?
    बहादुर के चले जाने पर सबको पछतावा इसलिए होता है, क्योंकि वह कोई भी सामान नहीं ले गया है — उसके कपड़े, उसका बिस्तर, उसके जूते — सभी छोड़ गया है। इससे साबित होता है कि वह चोर नहीं था, निर्दोष था — और घर वालों ने एक निर्दोष बच्चे को खो दिया है।
  14. बहादुर, किशोर, निर्मला और कथावाचक का चरित्र-चित्रण करें।
    बहादुर स्नेहमयी, मेहनती और आत्मसम्मानी बच्चा है — वह घर का काम करता है, निर्मला की तबीयत का ख्याल रखता है, और निर्दोष होते हुए भी आरोप सहता है। किशोर घर का लड़का है, जो बहादुर को परेशान करता है। निर्मला दयालु और संवेदनशील है — वह बहादुर की देखभाल करती है, पर आरोप के बाद वह भी उसे डराती-धमकाती है। कथावाचक मध्यवर्गीय, संवेदनशील व्यक्ति है — वह बहादुर के प्रति स्नेह रखता है, पर अंत में उसे पछतावा होता है।
  15. निर्मला को बहादुर के चले जाने पर किस बात का अफसोस हुआ?
    निर्मला को इस बात का अफसोस हुआ कि बहादुर कोई भी सामान नहीं ले गया है — उसके कपड़े, उसका बिस्तर, उसके जूते — सभी छोड़ गया है। उसे लगता है कि यदि वह कहता तो वह उसे रोकती थोड़े, बल्कि उसे खूब अच्छी तरह पहना-ओढ़ाकर भेजती, हाथ में उसकी तनख्वाह भी देती — पर वह बिना कुछ लिए ही चला गया।
  16. कहानी छोटा मुँह बड़ी बात कहती है — इस दृष्टि से 'बहादुर' कहानी पर विचार करें।
    कहानी छोटा मुँह बड़ी बात कहती है, क्योंकि एक छोटे-से बच्चे की कहानी के माध्यम से वह मध्यवर्गीय समाज की बड़ी समस्याओं — झूठे आरोप, दुत्कार, वर्ग-भेद और मानवीय संवेदनहीनता — को दिखाती है। छोटी-सी कहानी बड़ी बात कह जाती है।
  17. शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। लेखक ने इसका शीर्षक 'नौकर' क्यों नहीं रखा?
    शीर्षक सार्थक है क्योंकि बहादुर ही कहानी का केंद्र है — उसकी हँसी, उसकी मेहनत, उसका भाग जाना — सब उसी के इर्द-गिर्द है। लेखक ने शीर्षक 'नौकर' इसलिए नहीं रखा, क्योंकि बहादुर केवल एक नौकर नहीं था — वह घर का एक सदस्य बन गया था, एक बच्चा था, जिसका अपना चरित्र, अपनी दुनिया और अपना आत्मसम्मान था। 'नौकर' शीर्षक उसकी मानवीयता को छोटा कर देता।
  18. कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
    साले साहब बहादुर नाम के नेपाली लड़के को लेकर आते हैं, जो माँ की मार से घर से भाग आया था। वह घर में काम करता है, निर्मला की देखभाल करता है, और अपनी हँसी से घर को जीवंत बना देता है। रिश्तेदार उस पर चोरी का झूठा आरोप लगाते हैं, घर में उसे दुत्कारा जाता है, और अंत में सिल टूटने के डर से वह भाग जाता है — कोई सामान नहीं ले जाता — और घर वालों को पछतावा होता है।
सार — Recap
  • लेखक अमरकांत; कहानी बहादुर पर।
  • बहादुर: बारह-तेरह साल; माँ की मार से भागा।
  • घर में काम: अंगीठी, चाय, कपड़े, बर्तन।
  • आरोप: रिश्तेदार का झूठा चोरी का आरोप।
  • भाग जाना: सिल टूटने के डर से; कोई सामान नहीं ले गया।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

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