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Class 10 • Hindi • Godhuli Bhag-2

Chapter 5: नागरी लिपि

आठवीं-नौवीं सदी से पूरे देश में व्याप्त एक लिपि — नागरी, जो देवनागरी कहलाई।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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नागरी लिपि — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10)  | गद्य खंड — अध्याय 5 | प्रकार: निबंध (गुणाकर मुले) |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

नागरी लिपि के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पुस्तकें, लेखनी और खाली पट्टी — लिपि सीखने का एक सामान्य चित्र।

नागरी लिपि के लिए चित्र

लिपि का अभ्यास करते विद्यार्थी — एक सामान्य चित्र।

इस अध्याय के बारे में

यह निबंध नागरी लिपि के इतिहास पर आधारित है। देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता धीरे-धीरे आई है — गुप्त काल की ब्राह्मी लिपि और बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या छोटे ठोस त्रिकोण थे, पर नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि उसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं — शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी रहती हैं, जितनी अक्षरों की चौड़ाई होती है।

नागरी लिपि का संबंध कई भारतीय लिपियों से बताया गया है — ब्राह्मी और सिद्धम से। दक्षिण भारत से नागरी (नंदिनागरी) लिपि के लेख आठवीं सदी से मिलने लगते हैं, और उत्तर भारत से नौवीं सदी से। सुदूर दक्षिण से प्राप्त वरगुण का पलितम ताम्रपत्र (9वीं सदी) नागरी लिपि में है, और श्रीलंका के पराक्रमबाहु, विजयबाहु (12वीं सदी) आदि शासकों के सिक्कों पर भी नागरी अक्षर देखने को मिलते हैं। उत्तर भारत में भी महमूद ग़ज़नवी, मुहम्मद ग़ोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए हैं, और बादशाह अकबर ने ऐसा सिक्का चलाया था, जिस पर राम-सीता की आकृति है और नागरी लिपि में 'रामसीय' शब्द अंकित है।

नागरी नाम की उत्पत्ति के बारे में विद्वानों में मतभेद है — एक मत के अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले-पहल इस लिपि का इस्तेमाल किया, इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा; एक अन्य मत के अनुसार काशी देवनगरी है, इसलिए काशी में प्रयुक्त लिपि का नाम देवनागरी पड़ा; और एक मत के अनुसार पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे, और चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' का व्यक्तिगत नाम 'देव' था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को 'देवनगर' भी कहा जाता होगा — देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। पर लेखक कहता है कि यह सिर्फ एक मत है, सप्रमाण नहीं बताया जा सकता कि देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया। ईसा की आठवीं-नौवीं सदी से नागरी लिपि का प्रचलन सारे देश में था — यह एक सार्वदेशिक लिपि थी। नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं — आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिंदी का साहित्य मिलने लग जाता है।

क्या सीखना है

नागरी लिपि की पहचान, उसका इतिहास, नाम की उत्पत्ति के मत और सार्वदेशिक प्रसार को समझें।

मुख्य शब्द

  • नागरी लिपि — देवनागरी का प्राचीन रूप; आठवीं-नौवीं सदी से पूरे देश में।
  • शिरोरेखा — अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीर — नागरी की मुख्य पहचान।
  • ब्राह्मी लिपि — भारत की प्राचीन लिपि; नागरी की पूर्ववर्ती।
  • सिद्धम लिपि — ब्राह्मी के बाद की लिपि; नागरी की पूर्ववर्ती।
  • नंदिनागरी — दक्षिण भारत की नागरी लिपि का नाम।

याद रखें

  • नागरी की पहचान: अक्षरों के सिरों पर पूरी शिरोरेखाएँ।
  • दक्षिण से लेख आठवीं सदी से; उत्तर से नौवीं सदी से।
  • वरगुण का पलितम ताम्रपत्र (9वीं सदी) नागरी में है।
  • अकबर के सिक्के पर 'रामसीय' अंकित था।
  • आठवीं-नौवीं सदी से नागरी सार्वदेशिक लिपि थी।
लेखक का परिचय

गुणाकर मुले (1935–1998) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और विज्ञान-लेखक थे। उन्होंने लिपियों, भाषाओं और विज्ञान के इतिहास पर कई पुस्तकें लिखीं। 'नागरी लिपि' उनका प्रसिद्ध निबंध है।

सामान्य गलती से बचें

नागरी नाम की उत्पत्ति के बारे में कोई एक मत सप्रमाण नहीं है — उत्तर में 'यह सिर्फ एक मत है' अवश्य लिखें। तिथियों में भ्रम न करें — दक्षिण आठवीं सदी, उत्तर नौवीं सदी।

परीक्षा टिप

'नागरी की मुख्य पहचान' और 'नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

Chart / Table: नागरी लिपि के मुख्य बिंदु

विषयविवरण
पहचानअक्षरों के सिरों पर पूरी शिरोरेखाएँ
पूर्ववर्तीब्राह्मी और सिद्धम लिपि
दक्षिणआठवीं सदी से लेख
उत्तरनौवीं सदी से लेख
सार्वदेशिकआठवीं-नौवीं सदी से पूरे देश में
नामनागर ब्राह्मण / देवनगरी / देवनगर — मतभेद

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आई है?
    संकेत: शिरोरेखाओं से सोचें।
  2. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं?
    संकेत: हिंदी, मराठी, संस्कृत से सोचें।
  3. नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है?
    संकेत: पूरी शिरोरेखाओं से सोचें।
  4. नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं? लेखक इस संबंध में क्या बताता है?
    संकेत: मतों से सोचें।
  5. नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
    संकेत: आठवीं-नौवीं सदी से सोचें।

प्रश्न और उत्तर

  1. इस निबंध का केंद्रीय भाव क्या है?
    केंद्रीय भाव यह है कि नागरी लिपि भारत की एक प्राचीन और सार्वदेशिक लिपि है, जो आठवीं-नौवीं सदी से पूरे देश में व्याप्त थी, और जिसकी मुख्य पहचान उसके अक्षरों के सिरों पर पूरी शिरोरेखाएँ हैं।
  2. नागरी की मुख्य पहचान क्या है?
    नागरी की मुख्य पहचान यह है कि उसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं — शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी रहती हैं, जितनी अक्षरों की चौड़ाई होती है। ब्राह्मी और सिद्धम में सिरों पर छोटी लकीरें या त्रिकोण थे।
  3. नागरी कब सार्वदेशिक थी?
    ईसा की आठवीं-नौवीं सदी से नागरी लिपि का प्रचलन सारे देश में था — यह एक सार्वदेशिक लिपि थी। दक्षिण से आठवीं सदी से और उत्तर से नौवीं सदी से इसके लेख मिलते हैं।
  4. नागरी नाम की उत्पत्ति के क्या मत हैं?
    एक मत के अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले-पहल इस लिपि का इस्तेमाल किया, इसलिए नाम नागरी पड़ा; एक अन्य मत के अनुसार काशी देवनगरी है, इसलिए काशी की लिपि देवनागरी कहलाई; और एक मत के अनुसार पटना को 'देवनगर' कहा जाता था, इसलिए देवनगर की लिपि देवनागरी कहलाई — पर यह सिर्फ एक मत है, सप्रमाण नहीं कहा जा सकता।
  5. इस निबंध से क्या सीख मिलती है?
    यही कि लिपियाँ भी इतिहास की गवाह होती हैं — नागरी लिपि के प्रसार से ही भारत की सांस्कृतिक एकता का पता चलता है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)

इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 13 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।

  1. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आई है?
    देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता धीरे-धीरे आई है — गुप्त काल की ब्राह्मी और बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी लकीरें या त्रिकोण थे, पर नागरी में सिरों पर पूरी लकीरें बन गईं — शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी, जितनी अक्षरों की चौड़ाई — और यही स्थिरता है।
  2. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं?
    देवनागरी लिपि में हिंदी, मराठी, संस्कृत, नेपाली और कई अन्य भारतीय भाषाएँ लिखी जाती हैं। यह भारत की सबसे व्यापक लिपियों में से एक है।
  3. किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?
    देवनागरी का संबंध ब्राह्मी लिपि और सिद्धम लिपि से बताया गया है — नागरी इन्हीं लिपियों से विकसित हुई है।
  4. नंदी नागरी किसे कहते हैं? किस प्रसंग में उल्लेख किया है?
    नंदी नागरी दक्षिण भारत की नागरी लिपि को कहते हैं — विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नंदिनागरी कहा है। इसका उल्लेख दक्षिण भारत से नागरी लेखों के प्रसंग में किया गया है।
  5. नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं? विवरण दें।
    नागरी लिपि के आरंभिक लेख दक्षिण भारत से आठवीं सदी से और उत्तर भारत से नौवीं सदी से प्राप्त हुए हैं। सुदूर दक्षिण से वरगुण का पलितम ताम्रपत्र (9वीं सदी) नागरी में है, और उत्तर भारत में मेवाड़, चौहान, गाहड़वाल, सोलंकी, परमार, चंदेल और कलचुरि शासकों के लेख नागरी में ही हैं।
  6. ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है?
    ब्राह्मी और सिद्धम के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या छोटे ठोस त्रिकोण थे, पर नागरी की मुख्य पहचान यह है कि उसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं — शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी, जितनी अक्षरों की चौड़ाई।
  7. उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं?
    उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं।
  8. नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं? लेखक इस संबंध में क्या बताता है?
    लेखक बताता है कि नागरी को देवनागरी कहने के बारे में कई मत हैं — एक मत के अनुसार काशी देवनगरी है, इसलिए काशी की लिपि देवनागरी कहलाई; एक मत के अनुसार पटना को 'देवनगर' कहा जाता था, इसलिए देवनगर की लिपि देवनागरी कहलाई। पर लेखक कहता है कि यह सिर्फ एक मत है, सप्रमाण नहीं बताया जा सकता कि देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया।
  9. नागरी लिपि की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है? पटना से नागरी का क्या संबंध बताया है?
    लेखक का कहना है कि नागरी जैसे अक्षर कुछ पुराने लेखों में दिखाई देते हैं, और पुरानी शैली के कुछ अक्षर नागरी लेखों में भी दिखाई देते हैं — इसीलिए यह नहीं कहा जा सकता कि अमुक निश्चित समय से ही नागरी की शुरुआत होती है। पटना से संबंध यह बताया गया है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे, और चंद्रगुप्त द्वितीय का नाम 'देव' था, इसलिए पटना को 'देवनगर' भी कहा जाता होगा — देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को देवनागरी नाम दिया गया होगा।
  10. नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
    ईसा की आठवीं-नौवीं सदी से नागरी लिपि का प्रचलन सारे देश में था — यह एक सार्वदेशिक लिपि थी। दक्षिण से आठवीं सदी से और उत्तर से नौवीं सदी से इसके लेख मिलते हैं।
  11. नागरी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है? इस संबंध में क्या जानकारी देता है?
    नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं — आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिंदी का साहित्य मिलने लग जाता है, हिंदी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं सदी) के 'दोहाकोश' की तिब्बत से मिली हस्तलिपि दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी है।
  12. गुर्जर प्रतिहार कौन थे?
    गुर्जर प्रतिहार उत्तर भारत का एक प्रमुख राजवंश था, जिसके शासनकाल में नागरी लिपि का प्रसार हुआ। उनके लेख भी नागरी लिपि में ही मिलते हैं — वे उत्तर भारत के प्रमुख शासकों में थे।
  13. निबंध के आधार पर काल-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।
    काल-क्रम से प्रमाण इस प्रकार हैं — आठवीं सदी से दक्षिण भारत से नागरी (नंदिनागरी) लेख मिलने लगते हैं; नौवीं सदी से उत्तर भारत से लेख मिलते हैं, जैसे वरगुण का पलितम ताम्रपत्र (9वीं सदी); 11वीं सदी में महमूद ग़ज़नवी के लाहौर टकसाल के सिक्कों पर नागरी शब्द हैं (1028 ई. से); 12वीं सदी में श्रीलंका के पराक्रमबाहु, विजयबाहु के सिक्कों पर नागरी अक्षर हैं; और 14वीं-15वीं सदी में विजयनगर के शासकों ने अपनी लिपि को नंदिनागरी कहा है।
सार — Recap
  • लेखक गुणाकर मुले; निबंध नागरी लिपि के इतिहास पर।
  • पहचान: अक्षरों के सिरों पर पूरी शिरोरेखाएँ।
  • दक्षिण आठवीं सदी; उत्तर नौवीं सदी।
  • सार्वदेशिक: आठवीं-नौवीं सदी से पूरे देश में।
  • नाम: मतभेद; सप्रमाण नहीं कहा जा सकता।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

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