Chapter 20: एक वृक्ष की हत्या
वृक्ष बूढ़ा चौकीदार था — और उसकी हत्या केवल एक पेड़ की हत्या नहीं, जंगल की हत्या है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
एक वृक्ष की हत्या — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | पद्य खंड — अध्याय 8 | प्रकार: कविता (कुँवर नारायण) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): कटा वृक्ष और उड़ते पक्षी — पर्यावरण-नाश के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

पौधों को पानी देते बच्चे — संरक्षण का एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
यह कविता एक वृक्ष की हत्या पर आधारित है — पर वह हत्या केवल एक पेड़ की नहीं है, बल्कि पर्यावरण और मानवता की हत्या है। कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार लगता था — क्योंकि वह घर के दरवाज़े पर खड़ा रहकर उसकी रखवाली करता था, जैसे कोई बूढ़ा चौकीदार करता है। वृक्ष और कवि में संवाद भी होता था — दूर से ही वृक्ष ललकारता था 'कौन?', और कवि जवाब देता था 'दोस्त!'
कविता के अंत में कवि अपने अंदेशों का ज़िक्र करता है — उसे डर है कि जंगल मरुस्थल हो जाएगा, और मनुष्य जंगल हो जाएगा। घर, शहर और देश के बाद कवि जिन चीज़ों को बचाने की बात करता है, वे हैं जंगल और मनुष्य — जंगल को मरुस्थल होने से बचाना है, और मनुष्य को जंगल होने से बचाना है।
कविता में एक रूपक की रचना हुई है — वृक्ष का रूपक। वृक्ष यहाँ केवल एक पेड़ नहीं है, बल्कि वह चौकीदार, दोस्त और रक्षक का रूपक है — और उसकी हत्या मानवता की हत्या का रूपक है।
क्या सीखना है
वृक्ष का चौकीदार-रूपक, कवि-वृक्ष संवाद, अंदेशे और बचाने की बात को समझें।
मुख्य शब्द
- बूढ़ा चौकीदार — वृक्ष के लिए रूपक — घर की रखवाली करने वाला।
- रूपक — एक चीज़ को दूसरी चीज़ के रूप में दिखाना।
- मरुस्थल — रेगिस्तान; यहाँ जंगल के नष्ट होने का प्रतीक।
- अंदेशा — आशंका, डर।
- हत्या — यहाँ वृक्ष को काटने का प्रतीकात्मक अर्थ।
याद रखें
- वृक्ष बूढ़ा चौकीदार था — घर की रखवाली करता था।
- संवाद: वृक्ष 'कौन?', कवि 'दोस्त!'
- कवि के अंदेशे: जंगल मरुस्थल हो जाएगा, मनुष्य जंगल हो जाएगा।
- बचाना है: जंगल को मरुस्थल होने से, मनुष्य को जंगल होने से।
- रूपक: वृक्ष = चौकीदार, दोस्त, रक्षक।
कुँवर नारायण (1927–2017) हिंदी के प्रसिद्ध कवि और विचारक थे। उनकी कविताओं में पर्यावरण, मानवता और विचार की गहराई है। 'एक वृक्ष की हत्या' उनकी प्रसिद्ध पर्यावरण-कविता है।
कविता की व्याख्या में पंक्तियाँ हूबहू न लिखें — भाव अपने शब्दों में लिखें। 'बूढ़ा चौकीदार' और 'जंगल को मरुस्थल होने से बचाना' के भाव अवश्य लिखें।
'रूपक क्या है और यहाँ उसका क्या स्वरूप है' — यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, उत्तर में चौकीदार-रूपक लिखें।
Chart / Table: कविता के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| वृक्ष | बूढ़ा चौकीदार — घर की रखवाली |
| संवाद | वृक्ष 'कौन?', कवि 'दोस्त!' |
| अंदेशे | जंगल मरुस्थल होगा, मनुष्य जंगल होगा |
| बचाना है | जंगल को मरुस्थल होने से; मनुष्य को जंगल होने से |
| रूपक | वृक्ष = चौकीदार, दोस्त, रक्षक |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था?
संकेत: घर की रखवाली से सोचें। - वृक्ष और कवि में क्या संवाद होता था?
संकेत: 'कौन?' और 'दोस्त!' से सोचें। - कविता का समापन करते हुए कवि अपने किन अंदेशों का ज़िक्र करता है और क्यों?
संकेत: जंगल और मनुष्य से सोचें। - घर, शहर और देश के बाद कवि किन चीज़ों को बचाने की बात करता है और क्यों?
संकेत: जंगल और मनुष्य से सोचें। - कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
संकेत: हत्या के प्रतीक से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि वृक्ष की हत्या केवल एक पेड़ की हत्या नहीं है, बल्कि पर्यावरण और मानवता की हत्या है। वृक्ष बूढ़ा चौकीदार था — घर की रखवाली करने वाला, कवि का दोस्त — और उसकी हत्या से जंगल मरुस्थल हो जाएगा, और मनुष्य जंगल हो जाएगा। - वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था?
क्योंकि वृक्ष घर के दरवाज़े पर खड़ा रहकर उसकी रखवाली करता था, जैसे कोई बूढ़ा चौकीदार करता है। वह धूप, सर्दी और बारिश में भी खड़ा रहता था, और घर की रक्षा करता था। - वृक्ष और कवि में क्या संवाद होता था?
दूर से ही वृक्ष ललकारता था 'कौन?', और कवि जवाब देता था 'दोस्त!' — यही उनका संवाद था, जो दोस्ती और विश्वास का प्रतीक था। - कवि किन चीज़ों को बचाने की बात करता है?
कवि जंगल को मरुस्थल होने से बचाने की बात करता है, और मनुष्य को जंगल होने से बचाने की बात करता है — यानी पर्यावरण को नष्ट होने से बचाना है, और मनुष्य को क्रूर और हिंसक होने से बचाना है। - इस कविता से क्या सीख मिलती है?
यही कि पर्यावरण की रक्षा ही मानवता की रक्षा है — वृक्ष को काटना केवल एक पेड़ को काटना नहीं है, बल्कि अपने ही भविष्य को काटना है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 8 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था?
क्योंकि वृक्ष घर के दरवाज़े पर खड़ा रहकर उसकी रखवाली करता था, जैसे कोई बूढ़ा चौकीदार करता है। वह धूप, सर्दी और बारिश में भी खड़ा रहता था, और घर की रक्षा करता था — इसीलिए कवि को वह बूढ़ा चौकीदार लगता था। - वृक्ष और कवि में क्या संवाद होता था?
दूर से ही वृक्ष ललकारता था 'कौन?', और कवि जवाब देता था 'दोस्त!' — यही उनका संवाद था। यह संवाद दोस्ती और विश्वास का प्रतीक था — वृक्ष कवि को अपना दोस्त मानता था, और कवि भी वृक्ष को अपना दोस्त मानता था। - कविता का समापन करते हुए कवि अपने किन अंदेशों का ज़िक्र करता है और क्यों?
कविता के समापन में कवि अपने इन अंदेशों का ज़िक्र करता है कि जंगल मरुस्थल हो जाएगा, और मनुष्य जंगल हो जाएगा। उसे यह डर इसलिए है, क्योंकि वृक्षों की हत्या से पर्यावरण नष्ट हो रहा है, और पर्यावरण के नष्ट होने से मनुष्य भी क्रूर और हिंसक हो जाएगा। - घर, शहर और देश के बाद कवि किन चीज़ों को बचाने की बात करता है और क्यों?
घर, शहर और देश के बाद कवि जंगल और मनुष्य को बचाने की बात करता है — जंगल को मरुस्थल होने से बचाना है, और मनुष्य को जंगल होने से बचाना है। क्योंकि जंगल के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है, और मनुष्य के जंगल हो जाने से मानवता ही नष्ट हो जाएगी। - कविता की प्रासंगिकता पर विचार करते हुए एक टिप्पणी लिखें।
यह कविता आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि पर्यावरण का संकट आज भी बना हुआ है — वृक्षों की कटाई, जंगलों का नष्ट होना, और मनुष्य की क्रूरता आज भी जारी है। इसीलिए वृक्ष की हत्या की कविता आज भी हमें पर्यावरण की रक्षा की याद दिलाती है। - व्याख्या करें — कविता की पंक्तियों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
इस प्रश्न में कविता की दो पंक्तियों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: दूर से ही वृक्ष ललकारता था 'कौन?', और कवि जवाब देता था 'दोस्त!' — यानी वृक्ष और कवि के बीच दोस्ती और विश्वास का संवाद था; और बचाना है जंगल को मरुस्थल हो जाने से, बचाना है मनुष्य को जंगल हो जाने से — यानी पर्यावरण को नष्ट होने से बचाना है, और मनुष्य को क्रूर होने से बचाना है। - कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि कविता में वृक्ष की हत्या का वर्णन है — पर वह हत्या केवल एक पेड़ की नहीं है, बल्कि पर्यावरण और मानवता की हत्या है। 'हत्या' शब्द ही बताता है कि वृक्ष को काटना कोई साधारण काम नहीं है, बल्कि वह एक अपराध है — इसीलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है। - इस कविता में एक रूपक की रचना हुई है। रूपक क्या है और यहाँ उसका क्या स्वरूप है? स्पष्ट कीजिए।
रूपक वह अलंकार है, जिसमें एक चीज़ को दूसरी चीज़ के रूप में दिखाया जाता है। यहाँ वृक्ष का रूपक रचा गया है — वृक्ष को बूढ़ा चौकीदार, दोस्त और रक्षक के रूप में दिखाया गया है। वृक्ष यहाँ केवल एक पेड़ नहीं है, बल्कि वह चौकीदार है, जो घर की रखवाली करता है, दोस्त है, जो कवि से संवाद करता है, और रक्षक है, जो पर्यावरण की रक्षा करता है — यही यहाँ रूपक का स्वरूप है।
- कवि कुँवर नारायण; कविता पर्यावरण की है।
- वृक्ष बूढ़ा चौकीदार — घर की रखवाली।
- संवाद: 'कौन?' — 'दोस्त!'
- अंदेशे: जंगल मरुस्थल होगा, मनुष्य जंगल होगा।
- बचाना है: जंगल को मरुस्थल से, मनुष्य को जंगल से।
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