Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Class 10 • Hindi • Godhuli Bhag-2

Chapter 21: हमारी नींद

हम सो रहे हैं — और हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता ही जाता है।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

हमारी नींद — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10)  | पद्य खंड — अध्याय 9 | प्रकार: कविता (वीरेन डंगवाल) |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

हमारी नींद के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सोया हुआ शहर और जलते दीप — जागरूकता के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

हमारी नींद के लिए चित्र

दीप लिए विद्यार्थी — जागरूकता का एक सामान्य चित्र।

इस अध्याय के बारे में

यह कविता समाज की नींद पर आधारित है — यानी समाज अत्याचारों के प्रति सोया हुआ है। प्रथम अनुच्छेद में कवि एक बिम्ब की रचना करता है — मक्खी के जीवन-क्रम का बिम्ब। मक्खी का जीवन-क्रम यह है कि वह जन्म लेती है, बढ़ती है, और मर जाती है — पर उसके जीवन में कोई बदलाव नहीं आता। कवि इस बिम्ब से समाज की नींद को दिखाता है — जैसे मक्खी का जीवन बिना बदलाव के चलता है, वैसे ही समाज भी बिना जागे चलता रहता है।

कवि गरीब बस्तियों का उल्लेख इसलिए करता है, क्योंकि वहाँ भी धमाके से देवी जागरण लाउडस्पीकर पर होता है — यानी गरीब बस्तियों में भी धार्मिक जागरण तो होता है, पर सामाजिक जागरण नहीं होता। कवि अत्याचारियों का ज़िक्र इसलिए करता है, क्योंकि उन्होंने साधन तो सभी जुटा लिए हैं — वे अत्याचार के लिए हर साधन का उपयोग करते हैं — पर समाज फिर भी सोया हुआ है।

कविता में इनकार करना न भूलने वाले वे लोग हैं, जो अत्याचार के आगे झुकते नहीं हैं — वे साफ और मज़बूत इनकार करते हैं। कविता का शीर्षक 'हमारी नींद' इसलिए सार्थक है, क्योंकि पूरी कविता में समाज की नींद का वर्णन है — और अंत में कवि कहता है कि हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता ही जाता है — यानी जीवन रुकता नहीं, वह आगे बढ़ता ही है।

क्या सीखना है

समाज की नींद, मक्खी का बिम्ब, गरीब बस्तियों का उल्लेख और इनकार करने वालों को समझें।

मुख्य शब्द

  • बिम्ब — कविता में चित्र; यहाँ मक्खी के जीवन का चित्र।
  • गरीब बस्तियाँ — निर्धन लोगों की बस्तियाँ।
  • अत्याचारी — अत्याचार करने वाले।
  • इनकार — मना करना; यहाँ अत्याचार के आगे न झुकना।
  • हठीला — ज़िद्दी, न रुकने वाला।

याद रखें

  • कविता समाज की नींद पर है।
  • प्रथम अनुच्छेद में मक्खी के जीवन का बिम्ब है।
  • गरीब बस्तियों में भी लाउडस्पीकर पर देवी जागरण होता है।
  • अत्याचारियों ने साधन सभी जुटा लिए हैं।
  • हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता है।
कवि का परिचय

वीरेन डंगवाल (1947–2015) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। उनकी कविताओं में समाज, राजनीति और मानवता का भाव है। 'हमारी नींद' उनकी प्रसिद्ध कविता है।

सामान्य गलती से बचें

कविता की व्याख्या में पंक्तियाँ हूबहू न लिखें — भाव अपने शब्दों में लिखें। 'मक्खी का बिम्ब' और 'हमारी नींद के बावजूद' के भाव अवश्य लिखें।

परीक्षा टिप

'कविता में एक शब्द भी ऐसा नहीं है जिसका अर्थ जानने की कोशिश करनी पड़े — यह शक्ति है या सीमा' वाला प्रश्न अक्सर पूछा जाता है — उत्तर में सरल भाषा की शक्ति लिखें।

Chart / Table: कविता के मुख्य बिंदु

विषयविवरण
विषयसमाज की नींद — अत्याचारों के प्रति सोया समाज
बिम्बमक्खी का जीवन-क्रम
गरीब बस्तियाँलाउडस्पीकर पर देवी जागरण, पर सामाजिक जागरण नहीं
अत्याचारीसाधन सभी जुटा लिए हैं
इनकार करने वालेअत्याचार के आगे न झुकने वाले
अंतहमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता है

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि एक बिम्ब की रचना करता है। उसे स्पष्ट कीजिए।
    संकेत: मक्खी के जीवन से सोचें।
  2. मक्खी के जीवन-क्रम का कवि द्वारा उल्लेख किए जाने का क्या आशय है?
    संकेत: बिना बदलाव के जीवन से सोचें।
  3. कवि गरीब बस्तियों का क्यों उल्लेख करता है?
    संकेत: धार्मिक जागरण बनाम सामाजिक जागरण से सोचें।
  4. कवि किन अत्याचारियों का और क्यों ज़िक्र करता है?
    संकेत: साधन जुटाने से सोचें।
  5. कविता के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
    संकेत: समाज की नींद से सोचें।

प्रश्न और उत्तर

  1. इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    केंद्रीय भाव यह है कि समाज अत्याचारों के प्रति सोया हुआ है — गरीब बस्तियों में भी धार्मिक जागरण तो होता है, पर सामाजिक जागरण नहीं होता। अत्याचारियों ने साधन सभी जुटा लिए हैं, पर समाज फिर भी सोया हुआ है — और हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता ही जाता है।
  2. मक्खी का बिम्ब क्या कहता है?
    मक्खी का बिम्ब यह कहता है कि जैसे मक्खी का जीवन बिना बदलाव के चलता है — जन्म, वृद्धि, मृत्यु — वैसे ही समाज का जीवन भी बिना जागे चलता रहता है। समाज भी मक्खी की तरह सोया हुआ है।
  3. गरीब बस्तियों का उल्लेख क्यों है?
    क्योंकि गरीब बस्तियों में भी लाउडस्पीकर पर धमाके से देवी जागरण होता है — यानी धार्मिक जागरण तो होता है, पर सामाजिक जागरण नहीं होता। लोग देवी को जगाते हैं, पर अपने अधिकारों के लिए नहीं जागते।
  4. इनकार करना न भूलने वाले कौन हैं?
    इनकार करना न भूलने वाले वे लोग हैं, जो अत्याचार के आगे झुकते नहीं हैं — वे साफ और मज़बूत इनकार करते हैं। वे ही समाज की आशा हैं।
  5. इस कविता से क्या सीख मिलती है?
    यही कि समाज को अत्याचारों के प्रति जागना चाहिए — सोया हुआ समाज अत्याचारियों को ही मज़बूत करता है, और जीवन हठीला आगे बढ़ता ही है, चाहे समाज सोया रहे या जागे।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)

इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 8 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।

  1. कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि एक बिम्ब की रचना करता है। उसे स्पष्ट कीजिए।
    प्रथम अनुच्छेद में कवि मक्खी के जीवन-क्रम का बिम्ब रचता है — मक्खी जन्म लेती है, बढ़ती है, और मर जाती है, पर उसके जीवन में कोई बदलाव नहीं आता। यही बिम्ब समाज की नींद को दिखाता है — जैसे मक्खी का जीवन बिना बदलाव के चलता है, वैसे ही समाज भी बिना जागे चलता रहता है।
  2. मक्खी के जीवन-क्रम का कवि द्वारा उल्लेख किए जाने का क्या आशय है?
    मक्खी के जीवन-क्रम का उल्लेख करने का आशय यह है कि समाज भी मक्खी की तरह सोया हुआ है — उसका जीवन भी बिना बदलाव, बिना जागरण के चलता रहता है। मक्खी का जीवन-क्रम समाज की नींद का प्रतीक है।
  3. कवि गरीब बस्तियों का क्यों उल्लेख करता है?
    कवि गरीब बस्तियों का उल्लेख इसलिए करता है, क्योंकि वहाँ भी धमाके से देवी जागरण लाउडस्पीकर पर होता है — यानी धार्मिक जागरण तो होता है, पर सामाजिक जागरण नहीं होता। लोग देवी को जगाते हैं, पर अपने अधिकारों और अत्याचारों के प्रति नहीं जागते।
  4. कवि किन अत्याचारियों का और क्यों ज़िक्र करता है?
    कवि उन अत्याचारियों का ज़िक्र करता है, जिन्होंने साधन तो सभी जुटा लिए हैं — वे अत्याचार के लिए हर साधन का उपयोग करते हैं, चाहे वह शक्ति हो, धन हो या प्रचार हो। उनका ज़िक्र इसलिए है, क्योंकि समाज के सोए रहने से ही अत्याचारी मज़बूत होते हैं।
  5. इनकार करना न भूलने वाले कौन हैं? कवि का भाव स्पष्ट कीजिए।
    इनकार करना न भूलने वाले वे लोग हैं, जो अत्याचार के आगे झुकते नहीं हैं — वे साफ और मज़बूत इनकार करते हैं। कवि का भाव है कि यही लोग समाज की आशा हैं — जो अत्याचार को साफ-साफ मना करते हैं, वे ही समाज को जगा सकते हैं।
  6. कविता के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
    शीर्षक सार्थक है क्योंकि पूरी कविता में समाज की नींद का वर्णन है — 'हमारी नींद' ही कविता का केंद्र है। समाज अत्याचारों के प्रति सोया हुआ है, और यही नींद कविता का विषय है — इसीलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।
  7. व्याख्या करें — कविता की पंक्तियों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
    इस प्रश्न में कविता की तीन पंक्तियों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: गरीब बस्तियों में भी धमाके से देवी जागरण लाउडस्पीकर पर होता है — यानी धार्मिक जागरण तो हर जगह होता है, पर सामाजिक जागरण नहीं; साधन तो सभी जुटा लिए हैं अत्याचारियों ने — यानी अत्याचारी हर साधन से लैस हैं; और हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता ही जाता है — यानी समाज सोया रहे या जागे, जीवन रुकता नहीं, वह आगे बढ़ता ही है।
  8. कविता में एक शब्द भी ऐसा नहीं है, जिसका अर्थ जानने की कोशिश करनी पड़े — यह कविता की भाषा की शक्ति है या सीमा? स्पष्ट कीजिए।
    यह कविता की भाषा की शक्ति है, न कि सीमा — क्योंकि सरल भाषा ही कविता को सब तक पहुँचाती है। जब कविता की भाषा सरल होती है, तो वह हर पाठक तक पहुँचती है, और उसका संदेश भी स्पष्ट होता है। कठिन शब्दों से कविता का संदेश धुँधला हो जाता है, पर सरल भाषा में वह स्पष्ट रहता है — इसीलिए यह शक्ति है, सीमा नहीं।
सार — Recap
  • कवि वीरेन डंगवाल; कविता समाज की नींद पर।
  • बिम्ब: मक्खी का जीवन-क्रम।
  • गरीब बस्तियों में लाउडस्पीकर पर देवी जागरण।
  • अत्याचारियों ने साधन सभी जुटा लिए हैं।
  • हमारी नींद के बावजूद जीवन हठीला आगे बढ़ता है।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

← Chapter 20: एक वृक्ष की हत्याChapter 22: अक्षर-ज्ञान →