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Class 10 • Hindi • Godhuli Bhag-2

Chapter 16: स्वदेशी

भारत में भारतीयता नहीं दिखती — जब सब कुछ विदेशी हो गया है, तो स्वदेशी की पुकार ही बचती है।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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स्वदेशी — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10)  | पद्य खंड — अध्याय 4 | प्रकार: कविता (बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन') |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

स्वदेशी के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): अपनी कला में लगे कारीगर — स्वदेशी के भाव का एक सामान्य चित्र।

स्वदेशी के लिए चित्र

हस्तशिल्प मेले में विद्यार्थी — एक सामान्य चित्र।

इस अध्याय के बारे में

यह कविता भारतेन्दु युग की स्वदेशी-भावना की कविता है। कवि को भारत में भारतीयता नहीं दिखाई पड़ती — क्योंकि लोगों की रुचि, घर, वस्तुएँ, चाल-चलन — सब कुछ विदेशी हो गया है। कवि समाज के उस वर्ग की आलोचना करता है, जो अंग्रेज़ी रुचि, अंग्रेज़ी वस्तुओं और अंग्रेज़ी चाल-चलन को ही श्रेष्ठ मानता है।

कवि नगर, बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर भी टिप्पणी करता है — बाज़ार में विदेशी वस्तुएँ भरी हुई हैं, और देश की अर्थव्यवस्था विदेशी वस्तुओं पर निर्भर हो गई है। नेताओं के बारे में कवि की राय यह है कि वे भी विदेशी रुचि और विदेशी चाल-चलन में डूबे हुए हैं — वे देश की भलाई की बात करते हैं, पर उनका जीवन विदेशी ढंग से चलता है।

कवि ने 'डफाली' उसे कहा है, जो दूसरों की खुशामद करता है और अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति की नकल करता है। कविता का शीर्षक 'स्वदेशी' इसलिए सार्थक है, क्योंकि पूरी कविता में स्वदेशी भावना की पुकार है — अपने देश की वस्तुओं, अपनी संस्कृति और अपनी भाषा को अपनाने की पुकार।

क्या सीखना है

स्वदेशी भावना, विदेशी नकल की आलोचना, नगर-बाज़ार की टिप्पणी और 'डफाली' के अर्थ को समझें।

मुख्य शब्द

  • स्वदेशी — अपने देश की वस्तुएँ, संस्कृति और भाषा को अपनाना।
  • डफाली — दूसरों की खुशामद करने वाला; अपनी संस्कृति छोड़कर विदेशी नकल करने वाला।
  • भारतीयता — भारत की अपनी संस्कृति, पहचान और जीवन-शैली।
  • अंग्रेज़ी रुचि — अंग्रेज़ी वस्तुओं, चाल-चलन और जीवन-शैली के प्रति आकर्षण।
  • नवजागरण — भारतेन्दु युग का सांस्कृतिक जागरण।

याद रखें

  • कवि को भारत में भारतीयता नहीं दिखती।
  • रुचि, घर, वस्तुएँ, चाल-चलन — सब विदेशी हो गए हैं।
  • बाज़ार विदेशी वस्तुओं से भरा है।
  • नेता भी विदेशी रुचि में डूबे हैं।
  • 'डफाली' = खुशामद करने वाला, विदेशी नकल करने वाला।
कवि का परिचय

बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' (1855–1922) भारतेन्दु युग के प्रमुख कवि थे। वे भारतेन्दु हरिश्चंद्र के समकालीन और मित्र थे, और उनकी कविताओं में स्वदेशी भावना प्रमुख है।

सामान्य गलती से बचें

कविता की व्याख्या में पंक्तियाँ हूबहू न लिखें — भाव अपने शब्दों में लिखें। 'डफाली' का अर्थ और स्वदेशी की पुकार अवश्य लिखें।

परीक्षा टिप

'कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखती' और 'डफाली किसे कहा गया है' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।

Chart / Table: कविता के मुख्य बिंदु

विषयविवरण
कवि की शिकायतभारत में भारतीयता नहीं दिखती
विदेशी नकलरुचि, घर, वस्तुएँ, चाल-चलन — सब विदेशी
बाज़ारविदेशी वस्तुओं से भरा
नेताविदेशी रुचि में डूबे
डफालीखुशामद करने वाला, विदेशी नकल करने वाला
शीर्षकस्वदेशी भावना की पुकार

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
    संकेत: स्वदेशी भावना की पुकार से सोचें।
  2. कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती?
    संकेत: विदेशी रुचि और वस्तुओं से सोचें।
  3. कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है और क्यों?
    संकेत: अंग्रेज़ी रुचि वाले वर्ग से सोचें।
  4. कवि नगर, बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर क्या टिप्पणी करता है?
    संकेत: विदेशी वस्तुओं से सोचें।
  5. कवि ने 'डफाली' किसे कहा है और क्यों?
    संकेत: खुशामद और नकल से सोचें।

प्रश्न और उत्तर

  1. इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    केंद्रीय भाव स्वदेशी भावना है — कवि को भारत में भारतीयता नहीं दिखती, क्योंकि लोगों की रुचि, घर, वस्तुएँ और चाल-चलन सब विदेशी हो गए हैं। कवि अपने देश की वस्तुओं, संस्कृति और भाषा को अपनाने की पुकार लगाता है।
  2. कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखती?
    क्योंकि लोगों की अंग्रेज़ी रुचि, अंग्रेज़ी वस्तुएँ, अंग्रेज़ी चाल-चलन और अंग्रेज़ी जीवन-शैली ने भारतीयता को ढक लिया है। भारत में भारतीय को पहचानना मुश्किल हो गया है — सब कुछ विदेशी लगता है।
  3. कवि किस वर्ग की आलोचना करता है?
    कवि समाज के उस वर्ग की आलोचना करता है, जो अंग्रेज़ी रुचि, अंग्रेज़ी वस्तुओं और अंग्रेज़ी चाल-चलन को ही श्रेष्ठ मानता है — और अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति की नकल करता है।
  4. 'डफाली' किसे कहा गया है?
    'डफाली' उसे कहा गया है, जो दूसरों की खुशामद करता है और अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति की नकल करता है। वह अपनी पहचान खोकर दूसरों की नकल में ही खुश रहता है।
  5. इस कविता से क्या सीख मिलती है?
    यही कि अपने देश की वस्तुओं, संस्कृति और भाषा को अपनाना ही सच्ची देशभक्ति है — विदेशी नकल से अपनी पहचान खो जाती है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)

इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 8 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।

  1. कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
    शीर्षक सार्थक है क्योंकि पूरी कविता में स्वदेशी भावना की पुकार है — अपने देश की वस्तुओं, अपनी संस्कृति और अपनी भाषा को अपनाने की पुकार। कवि विदेशी नकल की आलोचना करके स्वदेशी को अपनाने का संदेश देता है — इसीलिए शीर्षक 'स्वदेशी' पूरी तरह सार्थक है।
  2. कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती?
    क्योंकि लोगों की रुचि, घर, वस्तुएँ, चाल-चलन — सब कुछ विदेशी हो गया है। अंग्रेज़ी रुचि ने भारतीयता को ढक लिया है, और भारत में भारतीय को पहचानना मुश्किल हो गया है — सब कुछ विदेशी लगता है।
  3. कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है और क्यों?
    कवि समाज के उस वर्ग की आलोचना करता है, जो अंग्रेज़ी रुचि, अंग्रेज़ी वस्तुओं और अंग्रेज़ी चाल-चलन को ही श्रेष्ठ मानता है। वह इस वर्ग की आलोचना इसलिए करता है, क्योंकि यह वर्ग अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति की नकल करता है और अपनी पहचान खो देता है।
  4. कवि नगर, बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर क्या टिप्पणी करता है?
    कवि टिप्पणी करता है कि नगर और बाज़ार विदेशी वस्तुओं से भरे हुए हैं, और देश की अर्थव्यवस्था विदेशी वस्तुओं पर निर्भर हो गई है। देश की अपनी वस्तुएँ और उद्योग पीछे छूट गए हैं, और बाज़ार में विदेशी वस्तुओं का ही बोलबाला है।
  5. नेताओं के बारे में कवि की क्या राय है?
    कवि की राय है कि नेता भी विदेशी रुचि और विदेशी चाल-चलन में डूबे हुए हैं। वे देश की भलाई की बात करते हैं, पर उनका अपना जीवन विदेशी ढंग से चलता है — वे भी स्वदेशी भावना से दूर हैं।
  6. कवि ने 'डफाली' किसे कहा है और क्यों?
    कवि ने 'डफाली' उसे कहा है, जो दूसरों की खुशामद करता है और अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति की नकल करता है। उसे 'डफाली' इसलिए कहा गया है, क्योंकि वह अपनी पहचान खोकर दूसरों की नकल में ही खुश रहता है — जैसे डफली बजाने वाला दूसरों के इशारे पर बजता है।
  7. व्याख्या करें — कविता की पंक्तियों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
    इस प्रश्न में कविता की दो पंक्तियों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: भारत में भारतीय को देखकर कोई पहचान नहीं पाता — क्योंकि सब कुछ विदेशी हो गया है, भारतीयता कहीं नहीं दिखती; और अंग्रेज़ी रुचि, अंग्रेज़ी घर, अंग्रेज़ी वस्तुएँ — सब कुछ देश के विपरीत हो गया है, यानी देश की अपनी पहचान ही खो गई है।
  8. आपके मत से स्वदेशी की भावना किस दोहे में सबसे अधिक प्रभावशाली है? स्पष्ट करें।
    स्वदेशी की भावना उस दोहे में सबसे अधिक प्रभावशाली है, जिसमें कवि कहता है कि भारत में भारतीय को पहचानना मुश्किल हो गया है — क्योंकि यह दोहा सीधे-सीधे विदेशी नकल की समस्या को उजागर करता है और पाठक को अपनी पहचान के बारे में सोचने पर मजबूर करता है।
सार — Recap
  • कवि बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'; भारतेन्दु युग।
  • शिकायत: भारत में भारतीयता नहीं दिखती।
  • विदेशी नकल: रुचि, घर, वस्तुएँ, चाल-चलन।
  • बाज़ार विदेशी वस्तुओं से भरा; नेता भी विदेशी रुचि में।
  • डफाली = खुशामद करने वाला, विदेशी नकल करने वाला।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

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