Chapter 15: अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ
प्रेम का मार्ग अति सीधा है — पर उस पर चलने के लिए छल-कपट छोड़ना पड़ता है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | पद्य खंड — अध्याय 3 | प्रकार: छंद (घनानंद) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): वर्षा में भीगा बगीचा — विरह और प्रेम के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

खिड़की के पास पत्र लिखता बच्चा — भाव-अभिव्यक्ति का एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
घनानंद के छंदों में प्रेम की सीधी और निष्कपट साधना का भाव है। प्रथम छंद में कवि प्रेममार्ग को 'अति सूधो' कहता है — यानी प्रेम का मार्ग बहुत सीधा है, उसमें टेढ़ापन, छल-कपट और चतुराई की कोई जगह नहीं है। प्रेम में मन देना होता है, पर बदले में छटाँक भी नहीं लेना होता — यही प्रेम की निष्कपटता है।
द्वितीय छंद में कवि बादल को संबोधित करता है — वह अपने आँसुओं को बादल के माध्यम से अपने प्रिय तक पहुँचाना चाहता है। कवि चाहता है कि उसके आँसू वर्षा बनकर प्रिय के हृदय को स्पर्श करें — यही प्रेम की पीड़ा और उसकी अभिव्यक्ति है।
छंदों में परहित का भाव भी है — जो देह परहित के लिए ही धारण करता है, वही सच्चा प्रेमी है। कवि की पीड़ा उसके हृदय में है, और वह अपने आँसुओं को प्रिय तक पहुँचाना चाहता है।
क्या सीखना है
प्रेममार्ग की सीधाई, मन-देने की निष्कपटता, बादल को संबोधन और आँसुओं की अभिव्यक्ति को समझें।
मुख्य शब्द
- सूधो — सीधा।
- सनेह — प्रेम, स्नेह।
- नेकु — तनिक भी।
- बाँक — टेढ़ापन।
- छटाँक — माप-तौल का एक छोटा पैमाना; यहाँ बदले में कुछ भी न लेना।
- परजन्य — बादल।
याद रखें
- प्रेममार्ग 'अति सूधो' है — सीधा, निष्कपट।
- प्रेम में मन देना होता है, बदले में छटाँक भी नहीं लेना।
- द्वितीय छंद बादल को संबोधित है।
- कवि अपने आँसुओं को प्रिय तक पहुँचाना चाहता है।
- परहित के लिए देह धारण करना ही सच्चा प्रेम है।
घनानंद (1689–1739) रीतिकाल के रीतिमुक्त धारा के प्रसिद्ध कवि थे। उनके छंदों में प्रेम की पीड़ा और निष्कपटता का भाव है। 'सुजान' उनकी प्रेयसी का नाम माना जाता है।
छंदों की व्याख्या में पंक्तियाँ हूबहू न लिखें — भाव अपने शब्दों में लिखें। 'अति सूधो' और 'मन लैहु पै देहु छटाँक नहीं' के भाव अवश्य लिखें।
'प्रेममार्ग को अति सूधो क्यों कहा गया है' और 'द्वितीय छंद किसे संबोधित है' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
Chart / Table: छंदों के मुख्य भाव
| विषय | विवरण |
|---|---|
| प्रथम छंद | प्रेममार्ग अति सूधो — सीधा, निष्कपट |
| प्रेम की शर्त | मन देना, बदले में छटाँक भी नहीं लेना |
| द्वितीय छंद | बादल को संबोधन |
| कवि की इच्छा | आँसुओं को प्रिय तक पहुँचाना |
| परहित | देह परहित के लिए ही धारण करना |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- कवि प्रेममार्ग को 'अति सूधो' क्यों कहता है? इस मार्ग की विशेषता क्या है?
संकेत: सीधाई और निष्कपटता से सोचें। - 'मन लैहु पै देहु छटाँक नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?
संकेत: देने और न लेने से सोचें। - द्वितीय छंद किसे संबोधित है और क्यों?
संकेत: बादल और आँसुओं से सोचें। - परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है? स्पष्ट कीजिए।
संकेत: सच्चे प्रेमी से सोचें। - कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुँचाना चाहता है और क्यों?
संकेत: प्रिय के हृदय से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इन छंदों का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि प्रेम का मार्ग बहुत सीधा है — उसमें छल-कपट, चतुराई और टेढ़ापन की कोई जगह नहीं है। सच्चा प्रेमी मन देता है, पर बदले में कुछ भी नहीं लेता, और अपनी पीड़ा को आँसुओं के माध्यम से प्रिय तक पहुँचाना चाहता है। - प्रेममार्ग 'अति सूधो' क्यों है?
क्योंकि प्रेम में कोई टेढ़ापन नहीं होता — वह सीधा, निष्कपट और सच्चा होता है। प्रेम में चतुराई, छल और स्वार्थ की कोई जगह नहीं है; जो प्रेमी सच्चा है, वह सीधे मन से प्रेम करता है। - 'मन लैहु पै देहु छटाँक नहीं' का अभिप्राय क्या है?
इसका अभिप्राय है कि प्रेम में मन देना होता है, पर बदले में छटाँक भी नहीं लेना होता — यानी सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है, उसमें लेने की कोई इच्छा नहीं होती, केवल देने की भावना होती है। - द्वितीय छंद किसे संबोधित है और क्यों?
द्वितीय छंद बादल को संबोधित है, क्योंकि कवि अपने आँसुओं को बादल के माध्यम से अपने प्रिय तक पहुँचाना चाहता है — बादल वर्षा बनकर उसके आँसुओं को प्रिय के हृदय तक ले जाएगा। - इन छंदों से क्या सीख मिलती है?
यही कि सच्चा प्रेम निष्कपट, निस्वार्थ और सीधा होता है — उसमें छल, चतुराई और स्वार्थ की कोई जगह नहीं होती।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 6 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- कवि प्रेममार्ग को 'अति सूधो' क्यों कहता है? इस मार्ग की विशेषता क्या है?
कवि प्रेममार्ग को 'अति सूधो' इसलिए कहता है, क्योंकि प्रेम का मार्ग बहुत सीधा है — उसमें टेढ़ापन, छल-कपट और चतुराई की कोई जगह नहीं है। इस मार्ग की विशेषता यह है कि उस पर चलने वाला मनुष्य सीधे, निष्कपट और सच्चे मन से प्रेम करता है। - 'मन लैहु पै देहु छटाँक नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?
कवि का अभिप्राय है कि प्रेम में मन देना होता है, पर बदले में छटाँक भी नहीं लेना होता — यानी सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है। प्रेमी अपना मन दे देता है, पर बदले में कुछ भी नहीं माँगता — यही प्रेम की सच्ची भावना है। - द्वितीय छंद किसे संबोधित है और क्यों?
द्वितीय छंद बादल को संबोधित है, क्योंकि कवि अपने आँसुओं को बादल के माध्यम से अपने प्रिय तक पहुँचाना चाहता है। बादल वर्षा बनकर उसके आँसुओं को प्रिय के हृदय तक ले जाएगा — इसीलिए कवि बादल से प्रार्थना करता है। - परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है? स्पष्ट कीजिए।
परहित के लिए ही देह वह धारण करता है, जो सच्चा प्रेमी है — जो दूसरों के हित के लिए अपना जीवन समर्पित कर देता है। सच्चा प्रेमी अपनी देह को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के हित के लिए धारण करता है। - कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुँचाना चाहता है और क्यों?
कवि अपने आँसुओं को अपने प्रिय के हृदय तक पहुँचाना चाहता है, क्योंकि उसके आँसू उसकी प्रेम-पीड़ा की अभिव्यक्ति हैं। वह चाहता है कि प्रिय उसके आँसुओं को देखकर उसकी पीड़ा को समझे और उसके हृदय को स्पर्श करे। - व्याख्या करें — छंदों की पंक्तियों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
इस प्रश्न में छंदों की दो पंक्तियों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: प्रेम के मार्ग में एक से दूसरा कोई अंक नहीं है — यानी प्रेम में कोई भेद, कोई गिनती, कोई हिसाब नहीं होता, वह एक ही होता है; और कवि की पीड़ा उसके हृदय में है — वह पीड़ा इतनी गहरी है कि वह उसके हृदय को स्पर्श करती है और आँसुओं के रूप में बाहर आती है।
- कवि घनानंद; रीतिमुक्त धारा।
- प्रेममार्ग अति सूधो — सीधा, निष्कपट।
- मन देना, बदले में छटाँक भी नहीं लेना।
- द्वितीय छंद बादल को संबोधित; आँसू प्रिय तक।
- परहित के लिए देह धारण करना ही सच्चा प्रेम।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

