Chapter 10: मछली
झोले में तीन मछलियाँ — और दो बच्चों की करुणा, जो मछली को खाने की चीज़ नहीं, जीने वाली चीज़ समझती है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
मछली — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | गद्य खंड — अध्याय 10 | प्रकार: कहानी (विनोद कुमार शुक्ल) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मछली की देखभाल करता बच्चा — करुणा के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

तालाब में मछलियों की देखभाल करते बच्चे — एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
कहानी दो बच्चों — कथावाचक और संतू — की है, जो बाज़ार के दिन बारिश में झोले में तीन मछलियाँ लेकर दौड़ते हुए पतली गली से घर आते हैं। उन्हें डर लगता है कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में तीन मछलियाँ थीं — एक तो उसी वक्त मर गई थी, जब पिताजी खरीद रहे थे, दो ज़िंदा थीं।
घर आकर बच्चे नहानघर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेते हैं, भरी हुई बाल्टी को आधी खाली करके झोले की तीनों मछलियाँ उसमें डाल देते हैं। एक छोटी-सी मछली हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस जाती है। दीदी ने बताया था कि वह मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी, फिर शहर से तीन मील दूर मोहारा नदी में चली जाएगी। बच्चे दीदी की इस बात की परख भी करते हैं — छोटी मछली के नाली में जाने पर उन्हें दीदी की बात याद आती है।
घर में मछली काटने के लिए एक अलग पाटा था, जिस पर चाकू के आड़े-तिरछे निशान बन गए थे। घर का नौकर भंगू मछली काटता था। माँ को घर में मछली-गोश्त बनाना अच्छा नहीं लगता था; पिताजी ने कई बार चाहा कि बच्चे भी मछली-गोश्त खाया करें, पर माँ ने सख्ती से मना कर दिया था — और किसी को अच्छा भी नहीं लगता था, केवल पिताजी खाते थे। कहानी का मार्मिक मोड़ तब आता है, जब भंगू मछली काटता है और संतू अँगोछे में लिपटी मछली लेकर भाग जाता है — वह मछली को कुएँ में डालकर बड़ी करना चाहता है। अंत में बाल्टी उलट दी जाती है, नाली क्षणभर के लिए पूरी भर जाती है, फिर बिल्कुल खाली हो जाती है — और पूरे घर में मछलियों की गंध आ रही होती है।
क्या सीखना है
बच्चों की मछली-यात्रा, दीदी की जानकारी, भंगू का मछली काटना, संतू का विरोध और कहानी के शीर्षक की सार्थकता को समझें।
मुख्य शब्द
- संतू — कथावाचक का छोटा साथी; मछलियों से प्यार करने वाला बच्चा।
- दीदी — घर की बड़ी बहन; बच्चों को मछली-नाली की जानकारी देने वाली।
- भंगू — घर का नौकर; मछली काटने वाला।
- पाटा — मछली काटने के लिए अलग रखा गया लकड़ी का तख्ता।
- मोहारा नदी — शहर से तीन मील दूर की नदी, जहाँ नाली की मछली जाने की बात कही गई है।
- झोला — कपड़े का थैला, जिसमें मछलियाँ लाई गई थीं।
याद रखें
- झोले में तीन मछलियाँ थीं; एक खरीदते समय ही मर गई थी।
- बच्चे नहानघर में बाल्टी आधी खाली करके मछलियाँ डाल देते हैं।
- दीदी ने बताया था: नाली → शहर की सबसे बड़ी नाली → मोहारा नदी।
- घर में केवल पिताजी मछली खाते थे; माँ को बनाना अच्छा नहीं लगता था।
- संतू मछली लेकर भाग जाता है; अंत में बाल्टी उलट दी जाती है।
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार और कवि हैं। यह कहानी उनके संग्रह से ली गई है और बच्चों की दुनिया को उनकी करुणा से दिखाती है।
यह कहानी मछली खाने या पर्यावरण का सामान्य निबंध नहीं है। इसका केंद्र बच्चों की करुणा है — मछली को खाने की चीज़ नहीं, जीने वाली चीज़ समझना। उत्तर में यही केंद्र लिखें।
दीदी की जानकारी (नाली → बड़ी नाली → मोहारा नदी) और संतू का विरोध (मछली लेकर भागना) — ये दो प्रसंग अवश्य लिखें।
Chart / Table: कहानी के मुख्य प्रसंग
| विषय | विवरण |
|---|---|
| झोला | तीन मछलियाँ; एक खरीदते समय ही मर गई |
| बारिश | बच्चे दौड़ते हुए पतली गली से घर आते हैं |
| नहानघर | बाल्टी आधी खाली करके मछलियाँ डाली जाती हैं |
| नाली | छोटी मछली फिसलकर नाली में; दीदी की जानकारी |
| पाटा | मछली काटने का अलग पाटा; भंगू काटता है |
| विरोध | संतू मछली लेकर भागता है; कुएँ में डालना चाहता है |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए?
संकेत: बारिश और मछलियों के मरने के डर से सोचें। - मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
संकेत: कुएँ में डालकर बड़ी करने से सोचें। - मछली को छूते हुए संतू क्यों हिचक रहा था?
संकेत: प्यार और डर से सोचें। - संतू क्यों उदास हो गया?
संकेत: मछली के कटने की बात से सोचें। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
संकेत: छोटी मछली और बड़ी करुणा से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि बच्चों की दुनिया में करुणा सबसे बड़ी होती है। दो बच्चे मछली को खाने की चीज़ नहीं, जीने वाली चीज़ समझते हैं — वे उसे कुएँ में डालकर बड़ी करना चाहते हैं, और जब मछली काटी जाती है, तो संतू उसे लेकर भाग जाता है। - झोले में कितनी मछलियाँ थीं और उनका क्या हुआ?
झोले में तीन मछलियाँ थीं — एक तो उसी वक्त मर गई थी, जब पिताजी खरीद रहे थे, दो ज़िंदा थीं। बच्चे उन्हें बारिश में दौड़ते हुए घर लाते हैं और नहानघर में बाल्टी में डाल देते हैं। - दीदी ने मछली के बारे में क्या जानकारी दी थी?
दीदी ने बताया था कि नाली में गई मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी, फिर शहर से तीन मील दूर मोहारा नदी में चली जाएगी। - घर में मछली कौन खाता था?
घर में केवल पिताजी मछली खाते थे। माँ को घर में मछली-गोश्त बनाना अच्छा नहीं लगता था, और पिताजी के चाहने पर भी माँ ने सख्ती से मना कर दिया था कि बच्चे मछली-गोश्त खाया करें। - कहानी का अंत क्या कहता है?
अंत कहता है कि बच्चों की करुणा हारती नहीं — संतू मछली लेकर भाग जाता है, और अंत में बाल्टी उलट दी जाती है, नाली क्षणभर के लिए पूरी भर जाती है, फिर खाली हो जाती है, और पूरे घर में मछलियों की गंध आ रही होती है — जैसे मछली की स्मृति पूरे घर में फैल गई हो।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 16 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए?
क्योंकि इस गली से घर नज़दीक पड़ता था और दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी — बाज़ार का दिन था और बूँदें पड़ने से भीड़ के बिखराव में तेज़ी आ गई थी। साथ ही उन्हें डर था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ, इसलिए वे दौड़ते हुए पतली गली से घर की ओर भागे। - मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
बच्चों की अभिलाषा यह थी कि वे ऊपर वाली मछली पिताजी से माँग लें, फिर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करें। जब मन होगा, बाल्टी से निकालकर खेलेंगे, बाद में फिर कुएँ में डाल देंगे — वे मछली को खाने की चीज़ नहीं, पालने की चीज़ समझते थे। - मछलियाँ लिए घर आने के बाद बच्चों ने क्या किया?
घर आने के बाद बच्चों ने नहानघर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया, भरी हुई बाल्टी को आधी खाली करके झोले की तीनों मछलियाँ उसमें डाल दीं। एक छोटी-सी मछली हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस गई, जिसे हाथों में टॉर्च लेकर ढूँढा गया, पर वह नहीं दिखी। - मछली को छूते हुए संतू क्यों हिचक रहा था?
संतू मछली को छूते हुए इसलिए हिचक रहा था, क्योंकि वह मछली को प्यार से देखता था और डरता था कि उसके छूने से मछली को तकलीफ़ होगी या वह मर जाएगी। तड़पती-फिसलती मछली को पकड़ने में उसे डर लगता था — यही उसकी करुणा और हिचकिचाहट थी। - मछली के बारे में दीदी ने क्या जानकारी दी थी? बच्चों ने उसकी परख कैसे की?
दीदी ने बताया था कि नाली में गई मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी, फिर शहर से तीन मील दूर मोहारा नदी में चली जाएगी। बच्चों ने इसकी परख तब की, जब एक छोटी-सी मछली हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस गई और घर के पीछे जाकर देखा गया कि घर की नाली एक बड़ी नाली से मिलती है — दीदी की बात सच लगने लगी। - संतू क्यों उदास हो गया?
संतू इसलिए उदास हो गया, क्योंकि उसे पता चला कि मछली अभी कट जाएगी। कथावाचक के यह कहने पर कि मछली अभी कट जाएगी, संतू भी उदास हो गया — वह मछली को मरते हुए नहीं देखना चाहता था। - घर में मछली कौन खाता था और वह कैसे बनाई जाती थी?
घर में केवल पिताजी मछली खाते थे। मछली घर में अलग पाटे पर रखकर काटी जाती थी — पाटे पर चाकू के आड़े-तिरछे निशान बन गए थे, और घर का नौकर भंगू मछली काटता था। माँ को घर में मछली-गोश्त बनाना अच्छा नहीं लगता था। - दीदी कहाँ थी और क्या कर रही थी?
दीदी अपने कमरे में लेटी थी — उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। बच्चों के गीले कपड़ों में देखकर वह पहले नाराज़ हुई, फिर प्यार से समझाया — संतू को अपने हाथों से नए कपड़े पहनाए, उसके बालों को टॉवल से पोंछकर उनमें तेल लगाया और उसके बाल सँवार दिए। - अरे-अरे कहता हुआ भंगू किसके पीछे भागा और क्यों?
भंगू संतू के पीछे भागा, क्योंकि संतू अँगोछे में लिपटी मछली लेकर भाग गया था। भंगू मछली काटना छोड़कर 'अरे-अरे' कहता हुआ उसके पीछे-पीछे भागा, ताकि मछली वापस लाई जा सके। - मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी? स्पष्ट करें।
मछली और दीदी में समानता यह दिखलाई पड़ी कि दोनों कोमल और दुखी हैं — मछली अँगोछे में धीरे-धीरे लहरा रही थी, और दीदी अपने कमरे में सिसक-सिसककर रो रही थी। दोनों की पीड़ा एक-दूसरे के प्रतिबिंब जैसी लगती है — एक छोटी-सी जीव की तड़प और एक बहन की सिसकी, दोनों में करुणा का एक ही भाव है। - पिताजी किससे नाराज़ थे और क्यों?
पिताजी दीदी से नाराज़ थे — दीदी के कमरे से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी और पिताजी दरवाज़े के पास गुस्से से टहल रहे थे। कथावाचक को लगता है कि पिताजी ने दीदी को मारा है। पिताजी का गुस्सा घर के उस वातावरण से जुड़ा है, जिसमें मछली को लेकर बच्चों की करुणा और बड़ों की नाराज़गी टकरा रही है। (ध्यान दें: किताब में पिताजी की नाराज़गी का सटीक कारण सीधे-सीधे नहीं बताया गया है — यह उत्तर पाठ के संकेतों पर आधारित है।) - सप्रसंग व्याख्या करें — कहानी के चार कथनों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
(क) बरसते पानी में खड़े होकर झोले का मुँह आकाश की तरफ फैलाकर मैंने खोल दिया ताकि आकाश का पानी झोले के अंदर पड़ी मछलियों पर पड़े — इसका आशय है कि कथावाचक मछलियों को बचाने के लिए बरसते पानी में खड़ा होकर झोले का मुँह आकाश की ओर खोल देता है, ताकि बारिश का पानी मछलियों पर पड़े और उनमें थोड़ी जान आ जाए — यह बच्चों की करुणा का प्रमाण है। (ख) अगर बाल्टी भरी होती तो मछली उछलकर नीचे आ जाती — इसका आशय है कि बाल्टी को आधी खाली इसलिए किया गया था, क्योंकि भरी बाल्टी से मछली उछलकर नीचे आ जाती — बच्चों की सावधानी दिखती है। (ग) और पास से देख — परछाईं दिखती है — इसका आशय है कि पास से देखने पर मछली की परछाईं दिखती है — बच्चों की जिज्ञासा और निरीक्षण की बारीकी दिखती है। (घ) नहानघर की नाली क्षणभर के लिए पूरी भर गई, फिर बिल्कुल खाली हो गई — इसका आशय है कि अंत में बाल्टी उलट दी जाती है, तो नाली क्षणभर के लिए पूरी भर जाती है, फिर बिल्कुल खाली हो जाती है — जैसे मछली की स्मृति क्षणभर के लिए पूरे घर में फैलकर फिर खाली हो जाती है, पर उसकी गंध पूरे घर में रह जाती है। - संतू के विरोध का क्या अभिप्राय है?
संतू के विरोध का अभिप्राय है कि वह मछली को मारे जाने का विरोध करता है — वह मछली को खाने की चीज़ नहीं, जीने वाली चीज़ समझता है। उसका मछली लेकर भाग जाना और उसे कुएँ में डालकर बड़ी करना चाहना बच्चों की करुणा का सबसे बड़ा प्रमाण है — वह मछली की जान बचाना चाहता है, न कि उसे कटते हुए देखना। - दीदी का चरित्र चित्रण करें।
दीदी स्नेहमयी और संवेदनशील है। वह बच्चों के गीले कपड़े देखकर पहले नाराज़ होती है, फिर प्यार से उन्हें कपड़े पहनाती है, संतू के बाल सँवारती है और उनमें तेल लगाती है। वह बच्चों को मछली-नाली की जानकारी भी देती है। पर वह स्वयं भी दुखी है — अपने कमरे में सिसक-सिसककर रोती है, और उसकी सिसकी मछली की तड़प से मिलती-जुलती लगती है। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि पूरी कहानी एक छोटी-सी मछली के इर्द-गिर्द घूमती है — और उसी मछली के माध्यम से बच्चों की करुणा, दीदी की संवेदनशीलता और घर के वातावरण का पूरा चित्र उभरता है। मछली यहाँ केवल एक जीव नहीं, बल्कि करुणा का प्रतीक है। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
बाज़ार के दिन बारिश में दो बच्चे झोले में तीन मछलियाँ लेकर दौड़ते हुए घर आते हैं। नहानघर में बाल्टी में मछलियाँ डाली जाती हैं, एक छोटी मछली नाली में चली जाती है। दीदी बताती है कि वह नाली से बड़ी नाली होते हुए मोहारा नदी में जाएगी। घर में केवल पिताजी मछली खाते हैं; भंगू मछली काटता है। संतू मछली को लेकर भाग जाता है, ताकि उसे कुएँ में डालकर बड़ी कर सके। अंत में बाल्टी उलट दी जाती है, नाली क्षणभर भरकर खाली हो जाती है, और पूरे घर में मछलियों की गंध फैल जाती है।
- लेखक विनोद कुमार शुक्ल; कहानी बच्चों की करुणा की है।
- झोले में तीन मछलियाँ; एक खरीदते समय ही मर गई।
- दीदी की जानकारी: नाली → बड़ी नाली → मोहारा नदी।
- केवल पिताजी मछली खाते थे; भंगू पाटे पर काटता था।
- संतू मछली लेकर भागा; अंत में बाल्टी उलटी, पूरे घर में गंध।
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