Chapter 9: कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?
कौन नीरोग है? — हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्।
Original notes — ready CBSE (NCERT, English Medium) • Class 8 • Sanskrit • Book: Deepakam
पाठ का सार — EG के अपने शब्दों में
घर का प्रसंग — एक बच्ची को बहुत भूख लगी है और भोजन बहुत गरम है। माँ कहती है — थोड़ा प्रतीक्षा करो, मुँह जल जाएगा। बच्ची पूछती है कि गरम भोजन क्यों नहीं देना चाहिए। माँ बताती है कि आयुर्वेद का उपदेश है कि अत्युष्ण भोजन हितकर नहीं होता। आयुर्वेद में बहुत-से आहार-नियम हैं — यह बात उसके शिक्षक भी बताते हैं। फिर माँ आहार के विषय में एक रोचक प्रसंग सुनाती है — जब तक भोजन खाने योग्य हो, तब तक वह प्रसंग सुनो।
धन्वन्तरि और वाग्भट की कथा — भारतवर्ष में वैद्य विभिन्न व्याधियों का शमन कैसे करते हैं, यह जानने के लिए भगवान धन्वन्तरि ने मनोहर शुक (तोता) का रूप धारण किया और गाँव-गाँव घूमे। भ्रमण के समय वे बहुत-से प्रख्यात वैद्यों के भवन के पास वाले वृक्ष पर बैठकर “कोऽरुक्, कोऽरुक्, कोऽरुक्” की ध्वनि करते थे। परन्तु खग की इस ध्वनि पर किसी का ध्यान नहीं गया। अन्त में वे वैद्य वाग्भट की कुटी के समीप गए। वहाँ विशाल प्राङ्गण में स्थित पुष्प-तरु पर चढ़कर उन्होंने मधुर वाणी से फिर वही ध्वनि की। मधुर वाणी सुनकर चिकित्सा में निरत वाग्भट प्राङ्गण में आए और चारों दिशाओं में देखा। क्षण भर में उन्होंने मनोहर शुक को देखा। सार्थक मानव-ध्वनि करने वाले शुक को देखकर विस्मित वाग्भट ने सोचा — यह लौकिक खग नहीं है, निश्चय ही कोई देवविशेष है। उन्होंने झटिति उस विहग को मधुर फल समर्पित किए, परन्तु खग ने फल नहीं लिए और फिर प्रश्न-स्वर से वही ध्वनि की।
तब वाग्भट ने सोचा कि जब तक खग को अपने प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते, तब तक वह भोजन नहीं चाहता। अतः उन्होंने शीघ्र ही सूत्र-रूप में तीन उत्तर दिए — हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक्। समुचित उत्तर सुनकर अत्यन्त प्रसन्न शुक ने वाग्भट के दिए फल खाए। तब शुक-रूप धन्वन्तरि ने कहा — वत्स! मैं धन्वन्तरि हूँ। उत्तम वैद्य की खोज में भारतवर्ष में सर्वत्र घूमता हुआ यहाँ आया हूँ। तुम्हारे उत्कृष्ट आयुर्वेद-ज्ञान से मैं अतीव सन्तुष्ट हूँ। तुम अवश्य ही आयुर्वेद के अष्टाङ्ग-विचार का सारभूत तन्त्र रचो। यह कहकर वे अन्तर्हित हो गए।
तीन उत्तरों का अर्थ — दूर से यह सब देखते हुए विस्मित शिष्य आचार्य वाग्भट के पास आए और पूछा — गुरुवर! शुक ने “कोऽरुक्” कहा, उसका क्या अर्थ है? और आपने क्या उत्तर दिया? वाग्भट ने कहा — सुनो! शुक पूछता है कि कः अरुक्, अर्थात् कौन स्वस्थ या नीरोग है? मैंने उत्तर दिया — जो हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक् है, वही सदा स्वस्थ होता है। शिष्यों ने फिर पूछा कि इन तीनों का क्या आशय है। वाग्भट ने महर्षि चरक के वचनों से समझाया —
हितभुक् — जिस आहार के सेवन से स्वास्थ्य का रक्षण हो और अभी तक उत्पन्न न हुए विकारों की उत्पत्ति न हो, ऐसा आहार सेवन करना चाहिए। वही हितकारी भोजन है।
मितभुक् — गुरु (भारी) द्रव्य भी अल्प मात्रा में लेने से सुपाच्य हो जाते हैं, और लघु द्रव्य भी अति मात्रा में लेने से हानिकारक हो जाते हैं। अतः मात्रा के अनुसार ही खाना चाहिए — द्रव्यों के गुरु-लघु होने का कारण मात्रा ही बताई गई है।
ऋतुभुक् — ऋतु के अनुसार आहार लेने वाले का बल और वर्ण बढ़ता है। जिसने ऋतु के अनुकूल आहार-विहार को जान लिया है, वह स्वस्थ रहता है। इस प्रकार पाठ में आहार के तीन नियम — हित, मित और ऋतु के अनुसार — सिखाए गए हैं।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): छोटे क्लिनिक में बच्चे से बात करता वैद्य। प्रश्न और स्वास्थ्य की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

कक्षा में हाथ उठाकर प्रश्न पूछते विद्यार्थी। जिज्ञासा की सामान्य तस्वीर।
मुख्य शब्द — शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कोऽरुक् | कौन नीरोग है? (कः + अरुक्) |
| अरुक् | रोगरहित, नीरोग |
| हितभुक् | हितकारी भोजन करने वाला |
| मितभुक् | मात्रा के अनुसार भोजन करने वाला |
| ऋतुभुक् | ऋतु के अनुसार भोजन करने वाला |
| अत्युष्णम् | बहुत गरम |
| आहारनियमाः | भोजन के नियम |
| वैद्यः | चिकित्सक |
| शुकः | तोता |
| अष्टाङ्गम् | आयुर्वेद के आठ अङ्ग |
| विकारः | रोग, दोष |
| मात्रा | परिमाण, नाप |
व्याकरण और अभ्यास-प्रकार — इस पाठ से
वाक्य-श्लोक मेलन: दिए गए वाक्यों को पढ़कर उनसे सम्बद्ध श्लोक पाठ से चुनकर लिखो। पहले वाक्य का भाव पहचानो (हित, मित या ऋतु में से कौन-सा), फिर उसी भाव वाला श्लोक चुनो।
सन्धि-ज्ञान: कोऽरुक् शब्द स्वयं सन्धि का उदाहरण है — कः + अरुक्। सन्धि पहचानने के लिए पहले शब्द को दो सार्थक भागों में तोड़ो और फिर सन्धि का नियम बताओ।
आहार-शब्दावली: पाठ में बलकारक, आरोग्यप्रद जैसे विशेषण आते हैं। विशेषण का अर्थ उसके विशेष्य (भोजन) से जोड़कर समझो — कौन-सा भोजन बल देता है, कौन-सा आरोग्य देता है।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- माँ ने गरम भोजन क्यों नहीं दिया?
संकेत: आयुर्वेद के उपदेश और अत्युष्ण भोजन की बात सोचो। - धन्वन्तरि ने शुक का रूप क्यों धारण किया?
संकेत: उत्तम वैद्य की खोज की बात सोचो। - वाग्भट ने शुक को पहले क्या दिया और शुक ने क्यों नहीं लिया?
संकेत: मधुर फल और प्रश्नों के उत्तर की बात सोचो। - एक वाक्य से सम्बद्ध श्लोक चुनकर लिखो।
संकेत: पहले वाक्य का भाव पहचानो — हित, मित या ऋतु। - “कोऽरुक्” का सन्धि-विच्छेद करो।
संकेत: शब्द को दो सार्थक भागों में तोड़ो।
प्रश्न और उत्तर
- “कोऽरुक्” का अर्थ क्या है?
“कोऽरुक्” का अर्थ है — कः अरुक्, अर्थात् कौन स्वस्थ या नीरोग है? धन्वन्तरि ने शुक-रूप में यही प्रश्न तीन बार पूछा था। - वाग्भट ने क्या उत्तर दिया?
वाग्भट ने सूत्र-रूप में तीन उत्तर दिए — हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक्। जो इन तीनों का पालन करता है, वही सदा स्वस्थ होता है। - हितभुक् किसे कहते हैं?
जो ऐसा आहार लेता है जिससे स्वास्थ्य का रक्षण हो और अभी उत्पन्न न हुए विकारों की उत्पत्ति न हो, वह हितभुक् है। - मितभुक् का नियम क्या है?
गुरु द्रव्य भी अल्प मात्रा में सुपाच्य होते हैं और लघु द्रव्य भी अति मात्रा में हानिकारक हो जाते हैं — इसलिए मात्रा के अनुसार ही खाना चाहिए। - धन्वन्तरि ने वाग्भट से क्या कहा?
धन्वन्तरि ने कहा कि वे उत्तम वैद्य की खोज में घूम रहे हैं, वाग्भट के ज्ञान से सन्तुष्ट हैं और वाग्भट आयुर्वेद के अष्टाङ्ग-विचार का सारभूत तन्त्र अवश्य रचें।
विस्तार — और गहराई से
- ऋतुभुक् का अपने जीवन से एक उदाहरण दो।
किसी ऋतु में खाए जाने वाले सुपाच्य भोजन का उदाहरण दो और बताओ कि वह ऋतु के अनुकूल क्यों है। - परियोजना: विद्यालय-परिसर के पाँच वृक्षों के नाम और उनका औषधीय प्रयोग लिखो।
प्रत्येक वृक्ष का नाम, उसका एक औषधीय प्रयोग और प्रयोग की सावधानी — तीन बातें लिखो। - परियोजना: स्वास्थ्य से सम्बद्ध दस श्लोकों का संग्रह करो।
श्लोकों का भाव अपने शब्दों में लिखो, केवल पंक्तियाँ उतारना पर्याप्त नहीं है। - परियोजना: पाठ के श्लोकों को कण्ठस्थ करके कक्षा में सुनाओ।
पहले भाव समझो, फिर शुद्ध उच्चारण के साथ सुनाओ — उच्चारण की शुद्धता ही इस पाठ की आत्मा है। - अत्युष्ण भोजन के अतिरिक्त आहार के दो और नियम अपने शब्दों में लिखो।
जैसे शान्त मन से भोजन करना, सही मात्रा में खाना — अपने शब्दों में दो नियम लिखो और उनका कारण बताओ।
- प्रश्न: कोऽरुक् = कौन नीरोग है? पूछने वाले: शुक-रूप धन्वन्तरि; उत्तर देने वाले: वाग्भट।
- तीन उत्तर: हितभुक् (हितकारी), मितभुक् (मात्रा अनुसार), ऋतुभुक् (ऋतु अनुसार)।
- चरक का मत: स्वास्थ्य-रक्षण और अनुत्पन्न विकारों की रोकथाम ही हित आहार है।
- अभ्यास-प्रकार: वाक्य-श्लोक मेलन, सन्धि-विच्छेद, परियोजना-कार्य।
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