Chapter 3: मित्राय नमः
Original notes — ready CBSE (NCERT, English Medium) • Class 7 • Sanskrit • Book: Deepakam — Part 2
सूर्य-नमस्कार — बारह मन्त्र, बारह आसनों का समाहार और चतुर्थी विभक्ति (नया, NCERT-शुद्ध सार)
मित्राय नमः — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Deepakam — Part 2 (CBSE, Class 7) | Chapter 3 | Medium: Sanskrit (सरल Hindi व्याख्या सहित)

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): उद्यान जाते विद्यार्थी — पाठ के आरम्भिक प्रसंग की सामान्य तस्वीर है, पुस्तक का दृश्य नहीं। सूर्य-नमस्कार के बारह आसनों का क्रम-चित्र नीचे दिया गया है।

मिलकर भोजन करते बच्चे — पाठ के आरम्भ में साथ-साथ सीखने की सामान्य तस्वीर।
इस पाठ में ‘मित्र’ का अर्थ मित्र (दोस्त) नहीं है — यहाँ ‘मित्र’ सूर्य का नाम है। पाठ सूर्य-नमस्कार का है, मित्रता का नहीं। पुराने पृष्ठ पर मित्रता वाला सार गलत था; यहाँ NCERT के अनुसार पूरा सार बदला गया है।
पाठ का आरम्भ — उद्यान में योग की चर्चा
योगिता प्रतिदिन प्रातः अपने पिता के साथ उद्यान जाती है। वहाँ लोग भ्रमण, व्यायाम और योगासन करते हैं। सब बच्चे मिलकर योगशिक्षिका (आचार्या) के पास जाते हैं और पूछते हैं — क्या आप आज हमें योगासन सिखाएँगी? आचार्या कहती हैं — अवश्य। योगिता कहती है — आज सूर्य-नमस्कार सिखाइए। आचार्या बताती हैं कि सूर्य-नमस्कार बारह आसनों का समाहार (समूह) है, और प्रत्येक सूर्य-नमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है। पहला मन्त्र है — ‘ॐ मित्राय नमः’।
सूर्य-नमस्कार के बारह मन्त्र
सूर्य के बारह नामों से बारह मन्त्र बनते हैं। प्रत्येक मन्त्र में नाम चतुर्थी विभक्ति में है, क्योंकि ‘नमः’ के योग में चतुर्थी आती है।
| क्रम | मन्त्र (नाम + नमः) | अर्थ (सूर्य का नाम) |
|---|---|---|
| 1 | ॐ मित्राय नमः | मित्र (सबके मित्र) सूर्य को नमस्कार |
| 2 | ॐ रवये नमः | रवि सूर्य को नमस्कार |
| 3 | ॐ सूर्याय नमः | सूर्य को नमस्कार |
| 4 | ॐ भानवे नमः | भानु (प्रकाशवान्) सूर्य को नमस्कार |
| 5 | ॐ खगाय नमः | खग (आकाश में गमन करने वाले) सूर्य को नमस्कार |
| 6 | ॐ पूष्णे नमः | पूषन् (पोषण करने वाले) सूर्य को नमस्कार |
| 7 | ॐ हिरण्यगर्भाय नमः | हिरण्यगर्भ सूर्य को नमस्कार |
| 8 | ॐ मरीचये नमः | मरीचि (किरणों वाले) सूर्य को नमस्कार |
| 9 | ॐ आदित्याय नमः | आदित्य सूर्य को नमस्कार |
| 10 | ॐ सवित्रे नमः | सवितृ (प्रेरक) सूर्य को नमस्कार |
| 11 | ॐ अर्काय नमः | अर्क सूर्य को नमस्कार |
| 12 | ॐ भास्कराय नमः | भास्कर (प्रकाश करने वाले) सूर्य को नमस्कार |
अन्त में सब मिलकर ‘ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः’ भी कहते हैं।
सूर्य-नमस्कार के बारह आसन — क्रम से

चित्र (आसनों के नाम चित्र पर ही छपे हैं): बारह आसनों का मानक क्रम, सरल रेखाचित्र में — चरण 1 (प्रणामासन) से चरण 12 (प्रणामासन) तक। यह पुस्तक का चित्र नहीं, EG का अपना रेखाचित्र है।
सूर्य-नमस्कार के लाभ — श्लोक का भाव
आचार्या एक श्लोक से सूर्य-नमस्कार के अनेक प्रयोजन बताती हैं। भाव अपने शब्दों में: जो लोग प्रतिदिन आदित्य (सूर्य) को नमस्कार करते हैं, उन्हें आयुः (दीर्घ जीवन), प्रज्ञा (बुद्धि), बलम् (शक्ति), वीर्यम् (तेज/पराक्रम) और तेजः (कान्ति) प्राप्त होते हैं। इसलिए योगासनों में सूर्य-नमस्कार एक श्रेष्ठ आसन-क्रम है — इससे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है। अतः हमें प्रतिदिन सूर्य-नमस्कार करना चाहिए, जिससे ‘स्वस्थं शरीरं, स्वस्थं मनः’ प्राप्त हो।
व्याकरण — चतुर्थी विभक्ति
नियम 1: ‘नमः’ शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति आती है — जैसे भास्कराय नमः, मित्राय नमः। नियम 2: दान के अर्थ में ‘दा’ और ‘यच्छ्’ धातुओं के योग में भी चतुर्थी आती है — जैसे शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति (शिक्षक छात्र को पुस्तक देता है)।
| शब्द (लिङ्ग) | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| छात्र (पुल्लिङ्ग) | छात्राय | छात्राभ्याम् | छात्रेभ्यः |
| आदित्य (पुल्लिङ्ग) | आदित्याय | आदित्याभ्याम् | आदित्येभ्यः |
| आचार्या (स्त्रीलिङ्ग) | आचार्यायै | आचार्याभ्याम् | आचार्याभ्यः |
| योगिता (स्त्रीलिङ्ग) | योगितायै | योगिताभ्याम् | योगिताभ्यः |
| नदी (स्त्रीलिङ्ग) | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| आसन (नपुंसक) | आसनाय | आसनाभ्याम् | आसनेभ्यः |
| फल (नपुंसक) | फलाय | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
मुख्य शब्द
- मित्रः — यहाँ सूर्य का नाम (सबका मित्र)।
- समाहारः — समूह, संग्रह; सूर्य-नमस्कार बारह आसनों का समाहार है।
- आचार्या — महिला आचार्य, योगशिक्षिका।
- अनुवदन्तु — पीछे-पीछे उच्चारण करो।
- अग्रिम-कक्षायाम् — अगली कक्षा में।
- प्रज्ञा — बुद्धि, विवेक।
- वीर्यम् — पराक्रम, तेज।
- तेजः — कान्ति, ओज।
- आध्यात्मिकम् — आत्मा/अध्यात्म से सम्बन्धित।
- स्वस्थम् — निरोग, स्वस्थ।
‘नमः’ देखते ही चतुर्थी लिखो — यह सबसे पक्का नियम है। और मन्त्रों के क्रम में ‘मित्राय’ पहला है, ‘भास्कराय’ बारहवाँ — क्रम उल्टा न हो, इस पर ध्यान दो।
- सूर्य-नमस्कार = 12 आसनों का समाहार; प्रत्येक से पहले एक मन्त्र।
- प्रथम मन्त्र: ॐ मित्राय नमः; अन्तिम: ॐ भास्कराय नमः।
- दैनिक लाभ: आयुः, प्रज्ञा, बलम्, वीर्यम्, तेजः।
- तीन बल: शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक। लक्ष्य: स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन।
- नमः के योग में चतुर्थी; दा/यच्छ् (दान) के योग में भी चतुर्थी।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- सूर्य-नमस्कार कितने आसनों का समाहार है?
Hint: बारह की संख्या के बारे में सोचो। - सूर्य-नमस्कार का प्रथम मन्त्र कौन-सा है?
Hint: ‘मित्र’ नाम वाले मन्त्र के बारे में सोचो। - ‘नमः’ के योग में कौन-सी विभक्ति आती है?
Hint: चतुर्थी के नियम के बारे में सोचो। - सूर्य-नमस्कार से कौन-से पाँच लाभ मिलते हैं?
Hint: आयु, बुद्धि, बल, वीर्य और तेज के बारे में सोचो। - ‘शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति’ — इसमें चतुर्थी रूप कौन-सा है?
Hint: जिसे पुस्तक दी जा रही है, उस शब्द को देखो।
प्रश्न और उत्तर
- मित्राय नमः का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है — मित्र (सूर्य) को नमस्कार। यहाँ ‘मित्र’ सूर्य का नाम है, और ‘नमः’ के योग में ‘मित्राय’ चतुर्थी रूप है। - सूर्य-नमस्कार क्या है?
सूर्य-नमस्कार बारह आसनों का समाहार है। प्रत्येक सूर्य-नमस्कार से पहले सूर्य के नाम का एक मन्त्र होता है, पहला मन्त्र ‘ॐ मित्राय नमः’ है। - सूर्य-नमस्कार के क्या लाभ हैं?
प्रतिदिन सूर्य-नमस्कार करने से आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज प्राप्त होते हैं, और शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक बल बढ़ता है — स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन मिलता है। - चतुर्थी विभक्ति के दो नियम बताओ।
पहला — ‘नमः’ के योग में चतुर्थी आती है (जैसे भास्कराय नमः)। दूसरा — दान के अर्थ में ‘दा’ और ‘यच्छ्’ धातुओं के योग में चतुर्थी आती है (जैसे शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति)। - इस पाठ से क्या सीख मिलती है?
इस पाठ से सीख मिलती है कि सूर्य-नमस्कार योगासनों में श्रेष्ठ क्रम है — इसे प्रतिदिन करके शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखो, और ‘नमः’ तथा दान के वाक्यों में चतुर्थी का शुद्ध प्रयोग सीखो।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — NCERT अभ्यास के प्रकारों पर
- सूर्य-नमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अस्ति?
सूर्य-नमस्कार बारह आसनों का समाहार है। - सूर्य-नमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः कः?
सूर्य-नमस्कार का प्रथम मन्त्र ‘ॐ मित्राय नमः’ है। - आचार्या कं श्लोकं पाठयति — उसका भाव क्या है?
आचार्या वह श्लोक पढ़ाती हैं जिसका भाव है कि प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करने वालों को आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज प्राप्त होते हैं। - सूर्य-नमस्कारेण कीदृशं बलं वर्धते?
सूर्य-नमस्कार से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक — तीनों प्रकार का बल बढ़ता है। - ‘नमः’ शब्दस्य योगे का विभक्तिः भवति? उदाहरण दो।
‘नमः’ के योग में चतुर्थी विभक्ति आती है — जैसे मित्राय नमः, भास्कराय नमः। - ‘छात्राय’ और ‘आचार्यायै’ में क्या अन्तर है?
दोनों चतुर्थी एकवचन हैं — ‘छात्राय’ अकारान्त पुल्लिङ्ग का रूप है और ‘आचार्यायै’ आकारान्त स्त्रीलिङ्ग का रूप है। - दानार्थे किन धातुओं के योग में चतुर्थी आती है? वाक्य बनाओ।
दान के अर्थ में ‘दा’ और ‘यच्छ्’ धातुओं के योग में चतुर्थी आती है — जैसे ‘माता याचकाय वस्त्रं ददाति’ (माता याचक को वस्त्र देती है)। - ‘अहं भगिन्यै उपायनं ददामि’ — इसमें चतुर्थी रूप कौन-सा है और क्यों?
‘भगिन्यै’ चतुर्थी रूप है, क्योंकि ‘दा’ धातु (ददामि) के योग में जिसे दिया जाता है, उसमें चतुर्थी आती है। - योगिता आचार्यां ‘किं शिक्षयतु’ इति वदति?
योगिता आचार्या से कहती है — ‘आज सूर्य-नमस्कार सिखाइए।’
परियोजना / कक्षा-कार्य: प्रतिदिन सपरिवार सूर्य-नमस्कार का अभ्यास करो और बारह मन्त्रों को क्रम से कण्ठस्थ करो; ‘नमः’ वाले दस वाक्य बनाकर उनमें चतुर्थी रूपों को रेखाङ्कित करो।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, तालिकाएँ बिना देखे दोहराओ, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

