Chapter 12: ध्वनि
ध्वनि का उत्पादन, माध्यम, चाल, आवृत्ति, आयाम और श्रव्य परिसर।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Science • Book: Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ध्वनि — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 9) | अध्याय 12 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): ध्वनि — स्वरित्र, तरंगें और कान — लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

कक्षा में स्कूल की घंटी और वाद्य यंत्र की आवाज़ सुनते छात्र — ध्वनि कंपन से ही जन्मती है।
इस अध्याय के बारे में
ध्वनि कंपन से पैदा होती है — तबला, सितार, हमारी आवाज़ — सब कंपन से ही बजते हैं। ध्वनि को चलने के लिए माध्यम चाहिए — ठोस, द्रव या गैस। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती, इसीलिए चंद्रमा पर आवाज़ सुनाई नहीं देगी।
ध्वनि की चाल माध्यम पर निर्भर है — ठोस में सबसे तेज़, गैस में सबसे धीमी। हवा में ध्वनि की चाल लगभग 344 मीटर/सेकंड है। ध्वनि तरंगों के रूप में चलती है — संपीडन (दबाव अधिक) और विरलन (दबाव कम) की श्रृंखला।
आवृत्ति (हर्ट्ज़) ध्वनि की ऊँचाई (तारत्व) तय करती है — अधिक आवृत्ति, अधिक तीखी आवाज़। आयाम प्रबलता तय करता है — बड़ा आयाम, तेज़ आवाज़। 20 हर्ट्ज़ से 20,000 हर्ट्ज़ तक की ध्वनि मनुष्य सुन सकता है — इसे श्रव्य परिसर कहते हैं।
क्या सीखना है
ध्वनि का उत्पादन, माध्यम, चाल, आवृत्ति, आयाम और श्रव्य परिसर।
मुख्य शब्द
- कंपन (Vibration) — ध्वनि का स्रोत — तेज़ आगे-पीछे की गति।
- आवृत्ति (Frequency) — प्रति सेकंड कंपन, हर्ट्ज़ में।
- आयाम (Amplitude) — कंपन की ऊँचाई — प्रबलता तय करता है।
- संपीडन (Compression) — तरंग का उच्च दबाव वाला भाग।
- श्रव्य परिसर — 20 Hz से 20,000 Hz — मनुष्य की सुनने की सीमा।
याद रखें
- ध्वनि को माध्यम चाहिए, निर्वात में नहीं चलती।
- ठोस में ध्वनि सबसे तेज़ चलती है।
- आवृत्ति से तारत्व, आयाम से प्रबलता तय होती है।
- 20,000 Hz से ऊपर पराश्रव्य (ultrasound) है।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: ध्वनि की चाल को हर माध्यम में समान मान लेना। चाल माध्यम पर निर्भर है — लोहे में हवा से लगभग 15 गुना तेज़।
Chart / Table: ध्वनि की चाल
| बिंदु | विवरण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| हवा | 344 मीटर/सेकंड | गैस — सबसे धीमी |
| पानी | 1480 मीटर/सेकंड | द्रव — मध्यम |
| लोहा | 5950 मीटर/सेकंड | ठोस — सबसे तेज़ |
| निर्वात | 0 | ध्वनि चलती ही नहीं |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- ध्वनि चंद्रमा पर क्यों नहीं सुनाई देगी?
संकेत: माध्यम की ज़रूरत देखें। - आवृत्ति बढ़ने पर आवाज़ कैसी होगी?
संकेत: तारत्व देखें। - आयाम बढ़ने पर क्या बदलता है?
संकेत: प्रबलता देखें। - हवा में ध्वनि की चाल लगभग कितनी है?
संकेत: 344 मीटर/सेकंड। - पराश्रव्य किसे कहते हैं?
संकेत: 20,000 Hz से ऊपर देखें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- ध्वनि कैसे पैदा होती है?
कंपन से — जब कोई वस्तु तेज़ी से आगे-पीछे हिलती है, तो आस-पास की हवा में तरंगें बनती हैं, जिन्हें हम ध्वनि के रूप में सुनते हैं। - ध्वनि निर्वात में क्यों नहीं चलती?
क्योंकि ध्वनि को चलने के लिए माध्यम के कण चाहिए; निर्वात में कण ही नहीं होते। - आवृत्ति और तारत्व का क्या संबंध है?
आवृत्ति जितनी अधिक, ध्वनि उतनी ही तीखी (ऊँचा तारत्व); आवृत्ति कम तो आवाज़ भारी (नीचा तारत्व)। - मनुष्य कितनी आवृत्ति तक सुन सकता है?
20 हर्ट्ज़ से 20,000 हर्ट्ज़ तक — इसे श्रव्य परिसर कहते हैं। - ध्वनि ठोस में तेज़ क्यों चलती है?
क्योंकि ठोस के कण पास-पास होते हैं, इसलिए कंपन जल्दी आगे बढ़ता है।
- ध्वनि को माध्यम चाहिए, निर्वात में नहीं चलती।
- ठोस में ध्वनि सबसे तेज़ चलती है।
- आवृत्ति से तारत्व, आयाम से प्रबलता तय होती है।
- 20,000 Hz से ऊपर पराश्रव्य (ultrasound) है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

