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Class 9 • Geography • Bharat Bhumi evam Log

Chapter 6: जनसंख्या

भारत की जनसंख्या — आकार, वितरण, घनत्व, वृद्धि और उसके गुण — 2001 की जनगणना के पुस्तक-काल के आँकड़ों के साथ। पुस्तक पृष्ठ 83–95।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Geography • Book: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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जनसंख्या — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 9)  |  अध्याय 6  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

जनसंख्या के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): घर, स्कूल और अस्पताल — जनसंख्या और उसकी सुविधाओं का एक सामान्य चित्र। यह किताब का चित्र नहीं है।

जनसंख्या के लिए चित्र

बाज़ार की भीड़ और स्कूल जाते बच्चे — जनसंख्या का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

जनसंख्या क्या है — परिचय

किसी देश का आर्थिक विकास दो बातों पर टिका होता है — प्राकृतिक संसाधन और मानवीय संसाधन। जनसंख्या केवल विकास का साधन ही नहीं है, वह स्वयं विकास का लक्ष्य भी है। जब जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है तो उसे 'जनसंख्या विस्फोट' कहा जाता है।

इस अध्याय में जनसंख्या को तीन दृष्टियों से देखा गया है — (1) जनसंख्या का आकार और वितरण, (2) जनसंख्या वृद्धि और उसके बदलने की प्रक्रिया, (3) जनसंख्या के गुण या विशेषताएँ।

एक निश्चित समयांतराल में की गई आधिकारिक गिनती को जनगणना कहते हैं। भारत में पहली जनगणना 1872 ई० में हुई थी और पहली सम्पूर्ण जनगणना 1881 ई० में हुई थी; उसी समय से हर दस वर्ष पर जनगणना होती है। भारतीय जनगणना जनसांख्यिकी, समाजशास्त्रीय तथ्यों और आर्थिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है।

1 मार्च 2001 ई० तक भारत की जनसंख्या 102.8 करोड़ थी, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का 16.7 प्रतिशत थी। यह आबादी 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर (दुनिया के स्थलीय भू-भाग का 2.4 प्रतिशत) में असमान रूप से फैली हुई है — चित्र 6.1 में भारत का जनसंख्या घनत्व (2001) दिखाया गया है।

जनसंख्या का आकार और वितरण

2001 की जनगणना के अनुसार देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है — कुल आबादी 16.60 करोड़, यानी देश की कुल जनसंख्या का 16 प्रतिशत। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है (9.68 करोड़, कुल का 9.42 प्रतिशत) और तीसरे स्थान पर बिहार है (8.29 करोड़, कुल का 8.06 प्रतिशत)।

इसके ठीक विपरीत, हिमालय क्षेत्र के राज्य सिक्किम की आबादी केवल 5 लाख है और लक्षद्वीप में केवल 60 हजार लोग रहते हैं।

भारत की लगभग आधी आबादी केवल पाँच राज्यों में रहती है — उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आन्ध्र प्रदेश। दिलचस्प बात यह है कि क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है, पर उसकी आबादी भारत की कुल जनसंख्या का केवल 5.5 प्रतिशत है।

जानकारी प्राप्त कीजिए — भारत में जनसंख्या के असमान वितरण का क्या कारण है? इस प्रश्न पर सोचिए: मैदान, तट, पर्वत और पठार — हर क्षेत्र में आबादी एक जैसी क्यों नहीं है?

घनत्व के आधार पर जनसंख्या वितरण

जनसंख्या घनत्व का अर्थ है — भूमि के प्रति इकाई पर रहने वाली जनसंख्या। भारतीय जनगणना विभाग ने स्तरीय मापक के रूप में प्रतिवर्ग किलोमीटर को एक इकाई माना है।

2001 की जनगणना के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसमें भारी विषमता है। मैदानी राज्यों में सबसे अधिक घनत्व है, तटीय राज्यों में भी काफी घनत्व है, पर पर्वतीय राज्यों में अधिवासी आर्थिक संरचनात्मक सुविधा की कमी के कारण कम घनत्व पाया जाता है; पठारी राज्यों में सामान्य घनत्व की स्थिति है।

राज्यों में सबसे अधिक घनत्व पश्चिम बंगाल का है — औसतन प्रतिवर्ग किलोमीटर 904 व्यक्ति। इसके बाद क्रमशः बिहार (881) और केरल (819) का स्थान आता है। सबसे कम घनत्व अरुणाचल प्रदेश (पर्वतीय राज्य) का है — मात्र 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर देखें तो सबसे अधिक घनत्व दिल्ली में है — 9340 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का घनत्व मात्र 34 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

घनत्व तेज़ी से बढ़ा है: 1901 ई० में यह मात्र 37 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जो 2001 में बढ़कर 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो चुका है — जनसंख्या वृद्धि की दर तीव्र होने के कारण।

जनसंख्या वृद्धि — निरपेक्ष वृद्धि और वार्षिक दर

जनसंख्या वृद्धि का अर्थ है — किसी विशेष समय अंतराल में, जैसे 10 वर्षों के भीतर, किसी देश या राज्य के निवासियों की संख्या में परिवर्तन। इस परिवर्तन को दो तरह से बताया जा सकता है — पहला, सापेक्ष वृद्धि; दूसरा, प्रति वर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा।

निरपेक्ष वृद्धि वह संख्या है जो बाद की जनसंख्या (जैसे 2001) में से पहले की जनसंख्या (जैसे 1991) घटाकर मिलती है। वार्षिक वृद्धि दर का अर्थ है — किसी वर्ष की मूल जनसंख्या में प्रत्येक 100 व्यक्तियों पर जितने व्यक्तियों की वृद्धि हो; पुस्तक का उदाहरण: 100 पर 2 की वृद्धि यानी 2 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर।

भारत की आबादी 1951 में 3,610 लाख से बढ़कर 2001 में 10,280 लाख हो गई है। सिर्फ 1921 में ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि हुई है।

सारणी 6.1 और चित्र 6.2 बताते हैं कि 1951 से 1981 तक वार्षिक वृद्धि दर नियमित रूप से बढ़ रही थी (1.25 से 2.22 प्रतिशत तक) — यही तीव्र वृद्धि की व्याख्या है। 1981 से वृद्धि दर धीरे-धीरे कम होने लगी, फिर भी 2001 में कुल जनसंख्या में भारी दशकीय वृद्धि हुई थी — इतनी बड़ी दशकीय वृद्धि इससे पहले कभी नहीं हुई थी।

जानकारी प्राप्त कीजिए — वृद्धि दर में कमी के बावजूद प्रत्येक दशक में लोगों की संख्या में नियमित रूप से वृद्धि हो रही है। ऐसा क्यों हो रहा है? संकेत: विशाल आधार पर छोटी दर भी बड़ी संख्या जोड़ती है।

इसी बात को पुस्तक यों समझाती है: विशाल आकार की जनसंख्या में कम वार्षिक वृद्धि दर पर भी सापेक्ष वृद्धि बहुत अधिक होती है — जब 10 करोड़ जनसंख्या में न्यूनतम दर से भी वृद्धि होती है, तब जुड़ने वाले लोगों की कुल संख्या बहुत अधिक होती है। भारत की वर्तमान जनसंख्या में वार्षिक वृद्धि 155 लाख है, जो संसाधनों और पर्यावरणीय संरक्षण को निष्क्रिय करने के लिए पर्याप्त है।

वृद्धि के तीन कारण — जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवास

जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन के तीन मुख्य कारण हैं — जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास। जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अंतर ही जनसंख्या की वास्तविक प्राकृतिक वृद्धि है।

जन्म दर: एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है, उसे जन्म दर कहते हैं। यह वृद्धि का एक प्रमुख घटक है, क्योंकि भारत में हमेशा जन्म दर, मृत्यु दर से अधिक रही है।

मृत्यु दर: एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है। मृत्यु दर में तेज़ गिरावट भारत की जनसंख्या वृद्धि की दर का प्रमुख कारण है।

1980 तक उच्च जन्म दर में धीमी गति से और मृत्यु दर में तीव्र गति से गिरावट के कारण दोनों के बीच काफी बड़ा अंतर आ गया — और इसी कारण जनसंख्या वृद्धि विस्फोटक हो गई। 1981 से धीरे-धीरे जन्म दर में भी गिरावट आनी शुरू हुई, जिससे वृद्धि दर में भी गिरावट आई। इस परिवर्तन का प्रमुख कारण पारिवारिक, राजनैतिक, प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर नियोजित परिवार के प्रति जागरूकता है।

वृद्धि दर में कमी जन्म दर नियंत्रण के प्रयासों की सफलता को दिखाती है, फिर भी जनसंख्या की वृद्धि जारी है — और 2045 तक भारत, चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन सकता है (पुस्तक-काल का अनुमान)।

प्रवास — गाँव से शहर की ओर

जनसंख्या वृद्धि का तीसरा घटक है प्रवास — लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाना। प्रवास तीन तरह का हो सकता है — आन्तरिक (एक जगह से दूसरी जगह, जैसे उत्तरी बिहार में बाढ़ या विस्थापित क्षेत्रों में), अंतरराज्य (एक राज्य से दूसरे राज्य में) और अन्तर्राष्ट्रीय (एक देश से दूसरे देश में)।

आन्तरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में कोई परिवर्तन नहीं लाता, लेकिन वह एक देश के भीतर जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है। जनसंख्या के वितरण और उसके घटकों को बदलने में प्रवास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

भारत में अधिकतर आन्तरिक प्रवास ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 'अपकर्षण' (PUSH) कारक प्रभावी होते हैं — गरीबी और बेरोजगारी की प्रतिकूल अवस्थाएँ; और नगर का 'कर्षण' (PULL) प्रभाव रोजगार में वृद्धि और अच्छे जीवन स्तर को दर्शाता है।

प्रवास केवल आकार को ही नहीं, उम्र और लिंग की दृष्टि से नगरीय और ग्रामीण जनसंख्या की संरचना को भी बदलता है। ग्रामीण-नगरीय प्रवास के कारण शहरों और नगरों की जनसंख्या में नियमित वृद्धि हुई है: 1951 में कुल जनसंख्या की 17.29 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या थी, जो 2001 में बढ़कर 27.78 प्रतिशत हो गई। एक दशक (1991 से 2001) के भीतर दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या 23 से बढ़कर 35 हो गयी है।

क्रियाकलाप — अपने दादा-दादी, नाना-नानी और माता-पिता के जन्म के समय से अपने परिवार में प्रवास की सूची बनाओ; प्रत्येक प्रवास के कारणों को ज्ञात करो।

जनसंख्या की विशेषताएँ — आयु संरचना

आयु संरचना की दृष्टि से भारतीय जनसंख्या को तीन वर्गों में बाँटा गया है — 1. किशोर वर्ग: 15 वर्ष से कम आयु; 2. प्रौढ़ वर्ग: पुस्तक में '15–19 वर्ष की आयु' छपा है (मुद्रण-त्रुटि — नीचे सावधानी देखें); 3. वृद्ध वर्ग: 60 वर्ष या इससे अधिक।

प्रौढ़ वर्ग की जनसंख्या को श्रमजीवी अथवा कार्यरत आयुवर्ग कहा गया है; प्रथम और अंतिम वर्ग को आधारित जनसंख्या (Dependent population) कहा गया है।

भारत में किशोर वर्ग के अंतर्गत 36.5 प्रतिशत जनसंख्या है, प्रौढ़ वर्ग के अंतर्गत 56.7 प्रतिशत और वृद्ध वर्ग में 6.8 प्रतिशत जनसंख्या है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में तेज़ी से हो रहे सुधार के कारण वृद्ध वर्ग की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि की संभावना है; इसके विपरीत, जनसंख्या नियंत्रण के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रबंधन के अनुकूल उपायों के कारण किशोर वर्ग में कमी आने की पूरी संभावना है। क्रियाशील वर्ग में जनसंख्या अनुपात में संभावित वृद्धि से रोजगार के नये आयामों को तलाशना होगा, अन्यथा बेरोजगारी की समस्या विस्फोटक रूप ले सकती है।

क्रियाकलाप — 1. अपने क्षेत्र में ऐसे कितने बच्चों को जानते हैं जो घरेलू सहायकों और श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। 2. अपने गाँव या आसपास में शिक्षित बेरोजगारों की सूची बनाइए।

लिंग अनुपात और साक्षरता

लिंग अनुपात: प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है। यह जानकारी किसी दिए गए समय में समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता की सीमा मापने का एक महत्वपूर्ण सामाजिक मापदंड है। देश में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में नहीं है।

सारणी 6.2 — भारत में लिंग अनुपात 1951–2001: 1951 में 946, 1961 में 941, 1971 में 930, 1981 में 934, 1991 में 929 और 2001 में 933।

क्या आप जानते हैं? — केरल में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1058 है; पांडिचेरी में प्रति 1000 पर 1001 है; जबकि दिल्ली में प्रति 1000 पर 821 और हरियाणा में प्रति 1000 पर केवल 861 महिलायें हैं।

साक्षरता दर: साक्षरता जनसंख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधनात्मक गुण है। केवल एक शिक्षित और जागरूक नागरिक ही बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय ले सकता है और शोध व विकास के कार्य कर सकता है। साक्षरता स्तर में कमी आर्थिक प्रगति में एक गंभीर बाधक है।

2001 की जनगणना के अनुसार, एक व्यक्ति जिसकी आयु 7 वर्ष या उससे अधिक है और जो किसी भी भाषा को समझकर लिख या पढ़ सकता है, उसे साक्षर की श्रेणी में रखा जाता है।

2001 की जनगणना के अनुसार देश की साक्षरता दर 64.84 प्रतिशत है — पुरुषों का 73 प्रतिशत और महिलाओं की 53.67 प्रतिशत। परम्परागत मान्यताओं के कारण महिलाओं की साक्षरता दर कम है, लेकिन इसमें तेज़ी से सुधार हो रहा है। जानकारी प्राप्त कीजिए — भारत के पाँच सर्वाधिक साक्षर और पाँच सबसे कम साक्षर राज्यों के नाम।

व्यावसायिक संरचना और स्वास्थ्य

व्यावसायिक संरचना: आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक है। विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के अनुसार किए गए जनसंख्या के कार्यिक वितरण को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। व्यवसायों को सामान्यतः प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक श्रेणियों में बाँटा गया है।

प्राथमिक व्यवसाय के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण और मछली पालन तथा खनन जैसी क्रियाएँ शामिल हैं। द्वितीयक क्रियाकलापों में उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन और अन्य निर्माण कार्य आते हैं। तृतीयक क्रियाकलापों में परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन और विविध प्रकार की सेवाएँ आती हैं।

विकसित देशों में द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों में कार्य करने वाले लोगों का अनुपात अधिक होता है; विकासशील देशों में प्राथमिक क्रियाकलापों में कार्यरत लोगों का अनुपात अधिक होता है। भारत में कुल जनसंख्या का 64 प्रतिशत भाग केवल कृषि कार्य करता है; द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों का अनुपात क्रमशः 13 और 20 प्रतिशत है (योग-नोट नीचे देखें)।

स्वास्थ्य: वर्तमान स्थिति में स्वास्थ्य सूचकों में लगातार सुधार हुआ है। मृत्यु दर, जो 1951 में (प्रति हजार) 25 थी, 2001 में घटकर (प्रतिहजार) 8.1 रह गयी है। औसत आयु, जो 1951 में 36.7 वर्ष थी, 2001 में 64.6 वर्ष हो गयी है।

अधिकतर संक्रामक बीमारियों पर लगभग नियंत्रण कर लिया गया है, फिर भी विकसित देशों की तुलना में भारत का स्वास्थ्य स्तर निम्न है। प्रति व्यक्ति कैलोरी की खपत अनुशंसित स्तर से काफी कम है; जनसंख्या का एक बड़ा भाग कुपोषण से प्रभावित है। शुद्ध पानी पीने के लिए और मूल स्वास्थ्य रक्षा सुविधाएँ ग्रामीण जनसंख्या के केवल एक-तिहाई लोगों को उपलब्ध हैं।

अतः भारत के लिए आवश्यक है कि जनसंख्या प्रबन्धन को राष्ट्रीय नीतियों में प्राथमिकता दें। शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार लाकर ही कोई भी देश अपनी जनसंख्या को संसाधन में बदल सकता है। हर रोज के दंगे, मारपीट और हिंसा में संलग्न बहुत बड़ी युवा शक्ति का सही प्रबन्धन उसे कल के भारत का सिरमौर बना सकता है।

जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव

विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव बहुआयामी हैं। स्वतंत्रता के बाद खाद्य-उत्पादन, रोजगार के अवसरों और औद्योगिक संरचना में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के ही कारण भारत विकास की इन ऊँचाइयों को विकसित राष्ट्र में तब्दील नहीं कर सका।

आज भी भारत में आधे से अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं; अभी भी प्रति व्यक्ति खाद्य उपलब्धता 450 ग्राम प्रतिदिन से कम है। विश्व में सर्वाधिक निरक्षर और सर्वाधिक बेरोजगार भारत में ही हैं — निरक्षर और बेरोजगार का यह समूह स्वतंत्र भारत की विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि का परिणाम है।

कृषि भूमि पर जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि अधिकतर जनसंख्या गाँवों में रहती है। भूमि सीमित है और इसके उपयोग करने वालों का आकार वृहद हो गया है; वैसे भूमि पर भी कृषि, पशुचारण और अधिवास का दबाव पड़ने लगा है जो प्रकृति के नियमों के अनुरूप पारिस्थितिक संतुलन के अंग थी।

भारत के वनीय क्षेत्र, मरुस्थलीय क्षेत्र और नम भूमि में लगातार कमी आ रही है। कभी हिमालय पर्वतीय क्षेत्र जैविक विविधता का भंडारगृह था; आज हिमालय के राज्यों में तीव्र जनसंख्या वृद्धि, पर्यटन विकास, धार्मिक यात्राओं में वृद्धि और उद्योग व नगरों के बढ़ते विकास के कारण जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों में 40 प्रतिशत से भी कम भूमि पर वन है, जबकि यहाँ 60 प्रतिशत भूमि पर वन होने चाहिए।

1960 के दशक में हरित क्रांति का आगमन हुआ तो पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के अर्द्धमरुस्थलीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि का विकास हुआ। इससे खाद्य पदार्थों के मामले में लगभग आत्मनिर्भर हो गया, लेकिन मृदा-प्रदूषण और पारिस्थितिकी असंतुलन की चुनौती छोड़ गया है।

ग्रामीण जनसंख्या में भारी वृद्धि के कारण ग्रामीण-नगरीय स्थानांतरण की प्रक्रिया तीव्र हो गई है। नगरों में ग्रामीण गरीबों की बढ़ती भीड़ से अनौपचारिक व्यवस्था, मलिन बस्ती, झुग्गी-झोपड़ी और अतिक्रमणित बस्तियों के विकास ने नगरीय पारिस्थितिकी को बर्बाद कर दिया है। वर्तमान समय में मुंबई विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नगर बन चुका है; यहाँ प्रतिवर्ष औसतन 3–4 लाख बाहर से आकर बसते हैं — इसका मूल कारण जनसंख्या विस्फोट ही है।

गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता और कुपोषण चार ऐसे स्तंभ हैं जो विकासशील भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं और इनकी जड़ें जनसंख्या विस्फोट के आधारभूत संरचना पर आधारित हैं।

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति

जनसंख्या विस्फोट से उत्पन्न हो रही समस्या को ध्यान में रखकर प्रथम पंचवर्षीय योजनाकाल से ही जनसंख्या नियंत्रण की नीति अपनाई जा रही है। भारत विश्व का पहला देश है जिसने प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान परिवार नियोजन कार्यक्रम को सरकारी कार्यक्रम घोषित किया। आज भी विश्व में सर्वाधिक परिवार कल्याण केंद्र भारत में हैं।

लेकिन परिवार नियोजन की स्वैच्छिक नीति के कारण जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में कोई विशेष सफलता नहीं मिली है। अतः 1976 ई० में राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या नीति की घोषणा की गई, जिसमें लड़के और लड़कियों के विवाह की आयु न्यूनतम क्रमशः 21 और 18 वर्ष रखा गया।

केरल जैसे राज्य में साक्षरता को प्राथमिकता देकर जनसंख्या नियंत्रण का अप्रत्यक्ष प्रयास प्रारंभ किया गया; इसमें भारी सफलता भी मिली। इस सफलता को आधार मानकर आठवीं पंचवर्षीय योजना से अप्रत्यक्ष कार्यक्रमों को अधिक महत्व दिया जा रहा है — महिलाओं के सशक्तिकरण, रोजगार की संभावनाओं का सृजन, गरीबी निवारण, द्वितीयक और तृतीयक रोजगार में लगे हुए लोगों के लिए प्रोत्साहन और हतोत्साहन की नीतियाँ, तथा जनसंख्या के आधार पर 2026 ई० तक लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के सीटों में वृद्धि न करने का निर्णय अधिक कारगर साबित हो रहा है।

2002 ई० की जनसंख्या नीति में स्पष्ट किया गया है कि 2045 तक भारत की जनसंख्या स्थिर हो जायेगी। वस्तुतः भारत की जनसंख्या नीति 'छोटा परिवार सुखी परिवार' की नीति पर आधारित है।

सावधानियाँ — पुस्तक की अपनी विसंगतियाँ

लाख/करोड़ की 10-गुना विसंगति: अध्याय-परिचय (पृ० 83) में 2001 की जनसंख्या 102.8 करोड़ और पृ० 86 पर 1951 = 3,610 लाख, 2001 = 10,280 लाख है; लेकिन सारणी 6.1 (शीर्षक 'लाख में') में मान 361.0 … 1028.7 छपे हैं और पृ० 87 का पाठ भी '1951 में 361 लाख से 2001 में 1028.7 लाख' कहता है। 361.0 लाख = 3.61 करोड़ होता है, जो परिचय से मेल नहीं खाता — सारणी के मान तभी संगत होते हैं जब उन्हें दस-लाख (मिलियन) में पढ़ा जाए (361.0 × 10 लाख = 3,610 लाख)। इस पृष्ठ पर मुख्य आँकड़े परिचय/पृ० 86 वाले हैं और सारणी जैसी छपी है वैसी, इस नोट के साथ।

प्रौढ़ वर्ग की आयु-सीमा: पृ० 89 पर '15–19 वर्ष की आयु' छपा है — यह मुद्रण-त्रुटि है। तीनों वर्ग मिलकर पूरी जनसंख्या ढकते हैं (किशोर 15 से कम, वृद्ध 60+), इसलिए बीच का वर्ग केवल 15–59 हो सकता है; 56.7 प्रतिशत का हिस्सा भी 15–59 से ही संगत है। पृष्ठ पर जैसा छपा है वैसा + यह नोट।

व्यावसायिक हिस्सों का योग: 64 (प्राथमिक) + 13 (द्वितीयक) + 20 (तृतीयक) = 97, 100 नहीं — जैसा छपा है वैसा, इस नोट सहित।

सभी आँकड़े 2001 की जनगणना के हैं (पुस्तक का अपना काल) — इन्हें वर्तमान आँकड़े न समझें। 2045-स्थिरीकरण और 'चीन को पीछे छोड़ना' पुस्तक-काल के अनुमान हैं।

पृ० 83 के परिचय में '102.8 करोड़ लाख' जैसा छपा है — पढ़ाई '102.8 करोड़' है; पृष्ठ पर '102.8 करोड़' लिखा गया है।

स्वास्थ्य अनुच्छेद का एक वाक्य रेंडर में वॉटरमार्क से आंशिक रूप से अस्पष्ट है — पृष्ठ पर उस वाक्य का अस्पष्ट अंश नहीं दोहराया गया है, केवल स्पष्ट तथ्य (मृत्यु दर, औसत आयु, कैलोरी, शुद्ध पानी) दिए गए हैं।

Key Terms — मुख्य शब्द

  • जनगणना — एक निश्चित समयांतराल की आधिकारिक गणना; पहली 1872, पहली सम्पूर्ण 1881, हर दस वर्ष पर।
  • जनसंख्या घनत्व — भूमि के प्रति इकाई (प्रतिवर्ग किलोमीटर) पर रहने वाली जनसंख्या; 2001 में भारत का औसत 325 व्यक्ति/वर्ग किमी।
  • निरपेक्ष वृद्धि — बाद की जनसंख्या में से पहले की जनसंख्या घटाकर प्राप्त संख्या (जैसे 2001 − 1991)।
  • वार्षिक वृद्धि दर — किसी वर्ष की मूल जनसंख्या में प्रत्येक 100 व्यक्तियों पर वृद्धि; पुस्तक का उदाहरण: 100 पर 2 = 2 प्रतिशत।
  • जन्म दर / मृत्यु दर — एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म / मृत्यु की संख्या; जन्म दर − मृत्यु दर = वास्तविक प्राकृतिक वृद्धि।
  • प्रवास (PUSH/PULL) — लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना; आन्तरिक, अंतरराज्य, अन्तर्राष्ट्रीय; ग्रामीण 'अपकर्षण' (गरीबी, बेरोजगारी) और नगर का 'कर्षण' (रोजगार, अच्छा जीवन स्तर)।
  • लिंग अनुपात — प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या; 2001 में 933; केरल 1058, हरियाणा 861।
  • साक्षर — 2001 की जनगणना के अनुसार — 7 वर्ष या अधिक आयु का व्यक्ति जो किसी भी भाषा को समझकर लिख या पढ़ सके।
  • व्यावसायिक संरचना — विभिन्न व्यवसायों के अनुसार जनसंख्या का कार्यिक वितरण — प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक।
  • आधारित जनसंख्या — किशोर वर्ग (<15) और वृद्ध वर्ग (60+) — प्रौढ़/कार्यरत वर्ग पर आश्रित माने जाने वाले वर्ग।
  • छोटा परिवार सुखी परिवार — भारत की जनसंख्या नीति का आधार; 1976 की नीति (विवाह आयु 21/18), 2002 की नीति (2045 तक स्थिरता का लक्ष्य)।
  • जनसंख्या विस्फोट — जनसंख्या की बहुत तेज़ वृद्धि; पुस्तक के अनुसार गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता और कुपोषण की जड़ में यही है।

Remember — याद रखें

  • 2001: भारत 102.8 करोड़ (विश्व का 16.7 प्रतिशत); सबसे अधिक आबादी — उत्तर प्रदेश 16.60 करोड़, महाराष्ट्र 9.68 करोड़, बिहार 8.29 करोड़।
  • घनत्व 2001: औसत 325; सबसे अधिक — प० बंगाल 904, बिहार 881, केरल 819; सबसे कम — अरुणाचल 13; दिल्ली 9340, अंडमान-निकोबार 34।
  • सारणी 6.1: 1951–2001 में वृद्धि दर पहले बढ़ी (1.25 से 2.22 प्रतिशत), 1981 के बाद घटी (2001 में 1.93 प्रतिशत); सिर्फ 1921 में ऋणात्मक वृद्धि।
  • लिंग अनुपात 1951–2001: 946 → 933; केरल 1058, पांडिचेरी 1001, दिल्ली 821, हरियाणा 861।
  • साक्षरता 2001: कुल 64.84 प्रतिशत; पुरुष 73 प्रतिशत, महिला 53.67 प्रतिशत; साक्षर = 7 वर्ष+ जो किसी भाषा को समझकर लिख/पढ़ सके।
  • याद रखें बॉक्स: विश्व में प्रत्येक 6 में 1 भारतीय; 1991–2001 में प्रतिवर्ष 1.82 करोड़ वृद्धि; मुंबई की आबादी आस्ट्रेलिया की कुल आबादी से अधिक; प्रति मिनट 29 व्यक्तियों की वृद्धि।
  • नीति: प्रथम पंचवर्षीय योजना से परिवार नियोजन सरकारी कार्यक्रम (विश्व में पहला देश); 1976 (विवाह आयु 21/18); 2002 (2045 तक स्थिरता)।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सबसे बड़ी भूल: सारणी 6.1 के मानों को सीधे 'लाख' पढ़कर 1951 की आबादी 3.61 करोड़ लिख देना — पुस्तक में ही दो पढ़ाइयाँ हैं (परिचय/पृ० 86: 3,610 लाख; सारणी/पृ० 87: 361.0)। सही उत्तर: 36.1 करोड़ (3,610 लाख), विसंगति-नोट सहित। दूसरी भूल: प्रौढ़ वर्ग की आयु '15–19' लिखना — यह मुद्रण-त्रुटि है, तीनों वर्गों से 15–59 बनता है। तीसरी भूल: 64+13+20 का योग 100 मान लेना — पुस्तक में योग 97 है। चौथी भूल: 2001 के आँकड़ों को वर्तमान आँकड़ा लिखना।

Chart / Table: सारणी 6.1 — भारत की जनसंख्या वृद्धि : एक झलक (सारणी जैसी छपी है वैसी; इकाई-नोट सावधानी-खंड में पढ़ें)

वर्षकुल जनसंख्या (सारणी में जैसा छपा है)एक दशक में सापेक्ष वृद्धिवार्षिक वृद्धि दर (प्रतिशत)
1951361.042.431.25
1961439.278.151.96
1971548.2108.922.20
1981683.3135.172.22
1991846.4163.092.14
20011028.7182.321.93

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. जनगणना किसे कहते हैं? भारत में पहली और पहली सम्पूर्ण जनगणना कब हुई?
    संकेत: निश्चित समयांतराल की आधिकारिक गणना। पहली 1872 ई०, पहली सम्पूर्ण 1881 ई०; हर दस वर्ष पर।
  2. 2001 में भारत का औसत जनसंख्या घनत्व कितना था? सबसे अधिक और सबसे कम घनत्व वाले राज्य कौन-से थे?
    संकेत: औसत 325 व्यक्ति/वर्ग किमी; सबसे अधिक प० बंगाल (904), सबसे कम अरुणाचल प्रदेश (13)।
  3. निरपेक्ष वृद्धि और वार्षिक वृद्धि दर में अंतर उदाहरण सहित समझाइए।
    संकेत: निरपेक्ष = बाद की जनसंख्या − पहले की जनसंख्या। वार्षिक दर = मूल जनसंख्या के प्रत्येक 100 पर वृद्धि (जैसे 100 पर 2 = 2 प्रतिशत)।
  4. ग्रामीण से शहरी प्रवास के PUSH और PULL कारक क्या हैं? एक-एक उदाहरण दीजिए।
    संकेत: PUSH (अपकर्षण): गाँव में गरीबी, बेरोजगारी। PULL (कर्षण): नगर में रोजगार में वृद्धि, अच्छा जीवन स्तर।
  5. लिंग अनुपात किसे कहते हैं? 2001 में भारत का लिंग अनुपात और केरल का लिंग अनुपात लिखिए।
    संकेत: प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या। भारत 2001: 933; केरल: 1058।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. भारत की जनसंख्या का आकार और वितरण 2001 की जनगणना के अनुसार बताइए।
    2001 में भारत की जनसंख्या 102.8 करोड़ थी (विश्व का 16.7 प्रतिशत), 32.8 लाख वर्ग किमी में असमान रूप से वितरित। सबसे अधिक आबादी: उत्तर प्रदेश 16.60 करोड़ (16 प्रतिशत), महाराष्ट्र 9.68 करोड़ (9.42 प्रतिशत), बिहार 8.29 करोड़ (8.06 प्रतिशत)। लगभग आधी आबादी पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश) में; सिक्किम केवल 5 लाख, लक्षद्वीप केवल 60 हजार।
  2. जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं? भारत के घनत्व की विषमता के आँकड़े लिखिए।
    भूमि के प्रति इकाई (प्रतिवर्ग किलोमीटर) पर रहने वाली जनसंख्या। 2001 में औसत 325 व्यक्ति/वर्ग किमी। राज्य: प० बंगाल 904, बिहार 881, केरल 819; सबसे कम अरुणाचल 13। केंद्र शासित: दिल्ली 9340, अंडमान-निकोबार 34। 1901 में औसत मात्र 37 था। मैदानी/तटीय अधिक, पर्वतीय कम, पठारी सामान्य।
  3. जनसंख्या वृद्धि के तीन कारणों का वर्णन कीजिए। 1951–2001 की वृद्धि-दर की प्रवृत्ति क्या रही?
    तीन कारण: जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवास; जन्म दर − मृत्यु दर = वास्तविक प्राकृतिक वृद्धि। भारत में जन्म दर हमेशा मृत्यु दर से अधिक रही; मृत्यु दर में तेज़ गिरावट वृद्धि का प्रमुख कारण बनी। 1951–1981 तक दर बढ़ी (1.25 से 2.22 प्रतिशत), 1981 के बाद घटी (2001 में 1.93 प्रतिशत); सिर्फ 1921 में ऋणात्मक वृद्धि।
  4. आयु संरचना, लिंग अनुपात और साक्षरता — तीनों विशेषताओं के 2001 के आँकड़े लिखिए।
    आयु: किशोर (<15) 36.5 प्रतिशत, प्रौढ़ 56.7 प्रतिशत, वृद्ध (60+) 6.8 प्रतिशत (प्रौढ़ वर्ग की छपी आयु '15–19' मुद्रण-त्रुटि है — तीनों वर्गों से 15–59 बनता है)। लिंग अनुपात: 2001 में 933 (1951 में 946); केरल 1058, हरियाणा 861। साक्षरता: कुल 64.84 प्रतिशत, पुरुष 73 प्रतिशत, महिला 53.67 प्रतिशत; साक्षर = 7 वर्ष+ जो किसी भाषा को समझकर लिख/पढ़ सके।
  5. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के मुख्य पड़ाव लिखिए।
    प्रथम पंचवर्षीय योजना से परिवार नियोजन सरकारी कार्यक्रम (विश्व का पहला देश); 1976 की राष्ट्रीय नीति — विवाह की न्यूनतम आयु लड़के 21, लड़कियाँ 18 वर्ष; केरल में साक्षरता-आधारित अप्रत्यक्ष प्रयास की सफलता के बाद आठवीं पंचवर्षीय योजना से अप्रत्यक्ष कार्यक्रमों को महत्व (महिला सशक्तिकरण, रोजगार, गरीबी निवारण, 2026 तक सीट-वृद्धि न करने का निर्णय); 2002 की नीति — 2045 तक जनसंख्या स्थिर करने का लक्ष्य; आधार: 'छोटा परिवार सुखी परिवार'।
पुनरावलोकन — याद रखने योग्य बातें
  • 2001: 102.8 करोड़ (विश्व का 16.7 प्रतिशत); उत्तर प्रदेश 16.60 करोड़, महाराष्ट्र 9.68 करोड़, बिहार 8.29 करोड़।
  • घनत्व: औसत 325; प० बंगाल 904, बिहार 881, केरल 819; अरुणाचल 13; दिल्ली 9340।
  • वृद्धि: 1951–1981 दर बढ़ी, फिर घटी; तीन कारण — जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवास; सिर्फ 1921 में ऋणात्मक वृद्धि।
  • विशेषताएँ: आयु (36.5 / 56.7 / 6.8 प्रतिशत), लिंग अनुपात 933, साक्षरता 64.84 प्रतिशत, व्यवसाय (64 / 13 / 20 — योग 97, जैसा छपा है वैसा)।
  • नीति: 1976 (21/18 वर्ष), 2002 (2045 तक स्थिरता), 'छोटा परिवार सुखी परिवार'।

अभ्यास — किताब के प्रश्न-प्रकार (उत्तर सहित)

नीचे अध्याय के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर दिए गए उत्तरों से मिलान करें।

अभ्यास — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (4)

अभ्यास — लघु उत्तरीय प्रश्न (6)

अभ्यास — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (2)

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।