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बिहार बोर्ड (BSEB) • कक्षा 8 • संस्कृत • दीपकम् • एनईपी मिरर (हिंदी)

पाठ 7: मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा

मधुर मञ्जूषा है सुन्दर सुरभाषा — संस्कृत की स्तुति का गीत।

यह पृष्ठ NCERT की NEP पुस्तक के Educational Galaxy नोट्स का हिंदी संस्करण है, जो बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। बिहार बोर्ड द्वारा इस पुस्तक को निर्धारित किए जाने का दावा नहीं किया जाता।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Sanskrit • पुस्तक: दीपकम् — एनईपी मिरर (हिंदी)

Print से browser से PDF save कर सकते हैं। यह textbook PDF नहीं है।

पाठ का सार — EG के अपने शब्दों में

पाठ एक संवाद से शुरू होता है। आज श्रावणी पूर्णिमा है। एक बहन पूछती है कि इस तिथि का क्या वैशिष्ट्य है। दूसरी बताती है कि आज संस्कृत-दिवस है और हम इसे सप्ताह भर मनाते हैं। वह गीत-गायन प्रतियोगिता में भाग लेगी और अपनी बहन के लिए उसी समय निमन्त्रण-पत्र देती है। फिर विद्यालय में संस्कृत-दिवस पर अनेक कार्यक्रमों की योजना की बात होती है और बहन से पूछा जाता है कि वह कौन-सा गीत गाएगी। वह गीत गाकर सुनाती है — यही गीत इस पाठ का मुख्य भाग है। गीत के चार पद्य हैं; नीचे प्रत्येक का भाव अपने शब्दों में दिया गया है।

गीत के चार पद्यों का भाव (अपने शब्दों में)

पहला पद्य — संस्कृत भाषा मुनियों द्वारा विकसित और श्रेष्ठ कवियों द्वारा विलसित मधुर मञ्जूषा (पेटिका) के समान है। हे माता! तुम्हारी पोषण-क्षमता मेरे वचन से परे है। संस्कृत अतीव सुन्दर भाषा है और देवभाषा के रूप में जानी जाती है। मुनियों ने इस भाषा का और इसके द्वारा सुष्ठु भारतीय भाषाओं का विकास किया है। यह भाषा विश्व की बहुत-सी भाषाओं की जननी-भाषा (स्रोत-भाषा) और गुरु-भाषा के समान है। बहुत-से कवियों ने काव्य-रचना से इसका सौन्दर्य बढ़ाया है। कोमल पदावली से परिपूर्ण यह ज्ञान की पेटिका है। संस्कृत अपनी पदावली से अन्य भाषाओं का ज्ञान और विज्ञान से परिपोषण करती है। उसका गौरव वर्णन से परे है।

दूसरा पद्य — वेदव्यास और वाल्मीकि जैसे मुनियों तथा कालिदास और बाण जैसे कवियों की वाणी से, और पौराणिक तथा सामान्य जनों के जीवन की आशा के रूप में संस्कृत सुन्दर सुरभाषा है। वाल्मीकि और वेदव्यास ने रामायण, महाभारत और पुराण जैसे ग्रन्थ रचे। कालिदास और बाणभट्ट जैसे विशिष्ट कवियों ने भी उपादेय काव्य रचे। प्राचीन काल से आज तक सामान्य जनों का जीवन संस्कृत से रचे गए काव्यों से प्रभावित है। संस्कृत बहुत-से लक्ष्यों की प्राप्ति कराने वाली है।

तीसरा पद्य — संस्कृत की ध्वनि सुनने में सुखद है, सबको आनन्द देने वाली है, स्मृति के लिए हितकर वर देने वाली है और सरस विनोद से युक्त है। वह गति और मति की प्रेरक है, काव्य-शास्त्र में विशारद है और हमारी संस्कृति की जननी के समान है — उसकी संस्कृति को रक्षित और प्रसारित करती है। संस्कृत वर के रूप में संस्कारजन्य ज्ञान देती है और सरस विनोद-भाव प्रकट करती है। मानव-जीवन को उत्तम गति और बुद्धि प्रदान करती है।

चौथा पद्य — नवरस की रुचिर अलंकृति-धारा वाली, वेद और वेदान्त के विचारों वाली, वैद्यक (आयुर्वेद), व्योम-शास्त्र आदि में विचरने वाली सुन्दर सुरभाषा धरती पर विजयी होती है। अर्थात् संस्कृत केवल काव्य की भाषा नहीं है — उसमें वेद-विचार, चिकित्सा-शास्त्र और खगोल-शास्त्र जैसे अनेक ज्ञान-क्षेत्र भी समाए हैं।

लेबल वाला चित्र: मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): खुली मंजूषा में किताबें और पास का दीपक। संस्कृत भाषा की मंजूषा की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

चित्र: मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा

मंजूषा से किताबें निकालकर पढ़ते बच्चे। भाषा के खजाने की सामान्य तस्वीर।

मुख्य शब्द — शब्दार्थ

शब्दअर्थ
मञ्जुलमञ्जूषामधुर पेटिका (खज़ाने की पेटी)
सुरभाषादेवताओं की भाषा, संस्कृत
श्रावणी पूर्णिमाश्रावण मास की पूर्णिमा — संस्कृत-दिवस
पोषणक्षमतापालन-पोषण करने की क्षमता
वचनातीतावचन से परे, अवर्णनीय
श्रुतिसुखनिनदःसुनने में सुखद ध्वनि वाला
सरसविनोदःरसयुक्त विनोद
नवरसःकाव्य के नौ रस
अलङ्कृतिःअलंकारों की शोभा
वेदान्तविचारःवेदान्त के विचार

व्याकरण और अभ्यास-प्रकार — इस पाठ से

विभक्ति और वचन: दिए गए पदों की विभक्ति और वचन लिखो। पद का अन्त देखकर पहले विभक्ति पहचानो (जैसे -स्य षष्ठी का चिह्न है, -भ्यः पञ्चमी/चतुर्थी का), फिर वचन देखो — एकवचन, द्विवचन या बहुवचन।

प्रश्न-निर्माण: रेखांकित पदों को आधार बनाकर प्रश्न बनाओ। उत्तर में वही रेखांकित पद आना चाहिए — प्रश्नवाचक शब्द उसी कारक से बनेगा।

पद्यांश-मेलन और रिक्त स्थान: पद्यांशों का यथायोग्य मेलन करो — पहले पद्य का भाव पहचानो, फिर उससे जुड़ा अंश चुनो। पेटिका से शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरते समय छन्द और अर्थ दोनों की जाँच करो।

परीक्षा टिपगीत के चार पद्यों को चार उपाधियों से याद रखो — 1. मञ्जूषा और पोषण, 2. मुनि-कवि और जन-जीवन, 3. श्रुति-सुख और संस्कृति, 4. नवरस-शास्त्र और विजय। उत्तर में पद्य-क्रम न बिगड़े।
सामान्य गलतीसंस्कृत को केवल “पुरानी भाषा” लिख देना। पाठ में वह जननी-भाषा, गुरु-भाषा, ज्ञान की पेटिका और अनेक शास्त्रों की भाषा है — ये चारों बातें लिखो।

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. श्रावणी पूर्णिमा का क्या वैशिष्ट्य बताया गया है?
    संकेत: संस्कृत-दिवस और सप्ताह भर के उत्सव की बात सोचो।
  2. संस्कृत को मञ्जूषा क्यों कहा गया है?
    संकेत: कोमल पदावली और ज्ञान के खज़ाने की बात सोचो।
  3. किसी एक पद की विभक्ति और वचन लिखो।
    संकेत: पद के अन्त का चिह्न देखो, फिर वचन गिनो।
  4. रेखांकित पद से एक प्रश्न बनाओ।
    संकेत: प्रश्नवाचक शब्द उसी कारक से बनेगा।
  5. दो पद्यांशों का सही मेलन करो।
    संकेत: पहले भाव पहचानो, फिर अंश चुनो।

प्रश्न और उत्तर

  1. संस्कृत-दिवस कब मनाया जाता है?
    श्रावणी पूर्णिमा को संस्कृत-दिवस मनाया जाता है और इसे सप्ताह भर मनाया जाता है। पाठ में बहन गीत-गायन प्रतियोगिता में भाग लेती है।
  2. पहले पद्य में संस्कृत की क्या विशेषता बताई गई है?
    संस्कृत मुनियों द्वारा विकसित और श्रेष्ठ कवियों द्वारा विलसित मधुर मञ्जूषा है; वह बहुत-सी भाषाओं की जननी-भाषा और गुरु-भाषा के समान है।
  3. दूसरे पद्य में किन मुनियों और कवियों का नाम है?
    वेदव्यास और वाल्मीकि मुनियों का तथा कालिदास और बाण जैसे कवियों का — जिन्होंने रामायण, महाभारत, पुराण और उपादेय काव्य रचे।
  4. तीसरे पद्य में संस्कृत के कौन-से गुण बताए गए हैं?
    श्रुति-सुखद ध्वनि, सबको आनन्द, स्मृति-हितकर वर, सरस विनोद, गति-मति की प्रेरणा और संस्कृति का रक्षण-प्रसारण।
  5. चौथे पद्य से क्या पता चलता है?
    संस्कृत केवल काव्य की भाषा नहीं है — उसमें नवरस-अलंकृति, वेद-वेदान्त के विचार और वैद्यक-व्योम जैसे शास्त्र भी हैं, इसलिए वह धरती पर विजयी होती है।

विस्तार — और गहराई से

  1. संस्कृत को जननी-भाषा क्यों कहा गया है?
    क्योंकि बहुत-सी भारतीय भाषाओं का विकास संस्कृत से हुआ है और वह अपनी पदावली से अन्य भाषाओं का ज्ञान-विज्ञान से परिपोषण करती है।
  2. परियोजना: संस्कृत-नाटिका से छात्रों को जागरूक करो।
    एक छोटी संस्कृत-नाटिका तैयार करो जिसमें संस्कृत के महत्त्व का सन्देश सरल संवादों में आए।
  3. परियोजना: सरल संस्कृत-गीतों का संग्रह करके कक्षा में गाओ।
    सरल गीतों को संग्रह करो, उनके भाव समझो और कक्षा में सामूहिक रूप से गाओ।
  4. परियोजना: संस्कृत-साहित्य के प्रसिद्ध कवियों और काव्यों का संग्रह करो।
    कवि का नाम, उसका काव्य और एक पंक्ति का भाव — इस रूप में संग्रह तैयार करो।
  5. अपने विद्यालय में संस्कृत-दिवस की एक कार्यक्रम-योजना लिखो।
    गीत, नाटिका, भाषण और प्रदर्शनी — चार कार्यक्रमों को क्रम और समय के साथ लिखो।
पुनरावलोकन
  • प्रसंग: श्रावणी पूर्णिमा, संस्कृत-दिवस सप्ताह, गीत-गायन प्रतियोगिता, निमन्त्रण-पत्र।
  • गीत: मञ्जूषा-पोषण; मुनि-कवि-जनजीवन; श्रुति-सुख-संस्कृति; नवरस-शास्त्र-विजय।
  • व्याकरण: विभक्ति-वचन, प्रश्न-निर्माण, पद्यांश-मेलन, पेटिका से रिक्त स्थान।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।