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बिहार बोर्ड (BSEB) • कक्षा 8 • हिंदी • मल्हार • एनईपी मिरर (हिंदी)

एक आशीर्वाद

कवि: दुष्यंत कुमार — युवाओं को आशीर्वाद: सपने बड़े हों, और उन्हें पूरा करने के लिए धरती पर चलना सीखो।

यह पृष्ठ NCERT की NEP पुस्तक के Educational Galaxy नोट्स का हिंदी संस्करण है, जो बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। बिहार बोर्ड द्वारा इस पुस्तक को निर्धारित किए जाने का दावा नहीं किया जाता।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Hindi • पुस्तक: मल्हार — एनईपी मिरर (हिंदी)

प्रिंट से ब्राउज़र से PDF सहेज सकते हैं। यह पाठ्यपुस्तक PDF नहीं है।

एक आशीर्वाद — EG के अपने शब्दों में सार

पुस्तक: मल्हार (बिहार बोर्ड हिंदी संस्करण, कक्षा 8)  |  अध्याय 3  |  कवि: दुष्यंत कुमार  |  माध्यम: हिंदी

लेबल वाला चित्र: एक आशीर्वाद

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बुजुर्ग का हाथ बच्चे के सिर पर — आशीर्वाद का भाव। पाठ के विषय की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

चित्र: एक आशीर्वाद

हाथ जोड़कर बड़ों का अभिवादन करता बच्चा। सम्मान की सामान्य तस्वीर।

कविता का सार

यह कविता युवाओं को दिया गया आशीर्वाद है। कवि आशीर्वाद देते हैं कि तुम्हारे सपने बड़े हों। वे कहते हैं कि कल्पना की गोद से उतरकर धरती पर चलना सीखो — यानी भावनाओं में बहने के बजाय वास्तविकता का सामना करो और ज़मीन पर पाँव रखकर आगे बढ़ो। चाँद-तारों जैसी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखो — यानी असंभव-से लगने वाले बड़े लक्ष्यों के लिए भी हठ और प्रयास करो। हँसना, मुसकराना और गाना सीखो — सपनों को आनंद और मुसकराहटों में बदलो, कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखो। हर दीये की रोशनी देखकर ललचाना सीखो — विविध ज्ञान के प्रति आकर्षण और उसे पाने की ललक रखो — और उस ललक में उँगली जलाना भी सीखो, यानी चुनौतियों को स्वीकार करो और कष्टों से न घबराओ। अंत में कवि यही आशीर्वाद दोहराते हैं कि अपने पैरों पर खड़े होना सीखो — आत्मनिर्भर बनो।

कविता की एक खास बात यह है कि इसमें सपनों को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है — सपने हँसते हैं, मुसकराते हैं, गाते हैं। एक ही संज्ञा 'स्वप्न' के इर्द-गिर्द कवि ने अनेक क्रियाएँ बुन दी हैं — चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुसकराना, गाना, ललचाना। यही इस कविता की रचना की विशेषता है।

कवि के बारे में

दुष्यंत कुमार (1933–1975) का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ। वे हिंदी के लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं; उन्होंने अपने छोटे-से जीवन में विविध रचनाओं से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और जीवंत भाषा का प्रयोग किया। उनका सबसे चर्चित ग़ज़ल-संग्रह 'साये में धूप' है और उनकी संपूर्ण रचनाएँ चार खंडों में 'दुष्यंत कुमार रचनावली' के नाम से प्रकाशित हुई हैं।

मुख्य शब्द

  • आशीर्वाद — बड़ों की ओर से दी गई शुभकामना और मंगल कामना।
  • स्वप्न — सपना; यहाँ आकांक्षा, बड़ा लक्ष्य और कल्पना की उड़ान के अर्थ में।
  • कल्पना की गोद — केवल कल्पना में जीना; भावनाओं में बहना।
  • अप्राप्य — जो आसानी से पाया न जा सके, लगभग असंभव-सा लगने वाला।
  • ललक — किसी चीज़ को पाने की तीव्र इच्छा और आकर्षण।
  • मानवीकरण — निर्जीव या अमूर्त चीज़ को मनुष्य जैसे गुण देना, जैसे सपने का हँसना-मुसकराना।

याद रखें

  • कविता युवाओं (युवा वर्ग) को संबोधित आशीर्वाद है।
  • 'स्वप्न' का अर्थ यहाँ कल्पना की उड़ान भी है और बड़े लक्ष्य भी।
  • उँगली जलाना = चुनौतियों को स्वीकार करना और कष्टों से न घबराना।
  • अपने पैरों पर खड़े होना = आत्मनिर्भर होना।
  • कविता में सपने मानवीकृत हैं — वे हँसते, मुसकराते और गाते हैं।
  • शीर्षक 'एक आशीर्वाद' कविता के अंदर कहीं प्रयोग नहीं हुआ है।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: 'स्वप्न' का केवल एक अर्थ लिख देना। अच्छे उत्तर में दोनों पक्ष बताओ — कल्पना की उड़ान और बड़े लक्ष्य — और यह भी कि कविता में कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं, इसलिए अपना उत्तर चुनने का कारण भी देना चाहिए। समानार्थी छाँटने वाले प्रश्न में ध्यान रखो कि जो शब्द समानार्थी नहीं है, वही उत्तर है।

तालिका: पंक्ति और उसका भाव

पंक्ति का भावअर्थ
भावना की गोद से उतरकर धरती पर चलनाभावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना
हर दीये की रोशनी देखकर ललचानाविविध ज्ञान के प्रति आकर्षण और उसे पाने की ललक
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलनाअसंभव-से लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास
हँसें, मुसकराएँ, गाएँसपनों को आनंद और मुसकराहटों में बदलना; कठिन परिस्थितियों में मनोबल बनाए रखना

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. कविता किसे संबोधित है — युवा वर्ग, नागरिकों, बच्चों या श्रमिकों को?
    संकेत: आशीर्वाद किनके लिए है, इस पर सोचो।
  2. आशीर्वाद वाली पंक्ति में 'स्वप्न' से क्या तात्पर्य है?
    संकेत: कल्पना की उड़ान, आकांक्षाएँ और रुचियाँ, बहुत-सी उपलब्धियाँ या बड़े लक्ष्य — कौन-सा?
  3. उँगली जलाने का क्या अर्थ है?
    संकेत: चुनौतियों को स्वीकार करना, प्रकाश का प्रसार, अग्नि के ताप का अनुभव या कष्टों से न घबराना — कौन-सा?
  4. अपने पैरों पर खड़े होने का क्या अर्थ है?
    संकेत: अपने पैरों पर खड़े होना, सफलता प्राप्त करना, कठिनाइयों का सामना करना या आत्मनिर्भर होना — कौन-सा?
  5. मिलान करो: 'भावना की गोद से उतरकर धरती पर चलना' का सही भाव क्या है?
    संकेत: वास्तविकता से जोड़कर सोचो।

प्रश्न और उत्तर

  1. कविता में 'स्वप्न' शब्द का क्या अर्थ है?
    'स्वप्न' के यहाँ दो जुड़े अर्थ हैं — कल्पना की उड़ान और बड़े लक्ष्य (आकांक्षाएँ और रुचियाँ)। कवि आशीर्वाद देते हैं कि तुम्हारे सपने बड़े हों, यानी तुम्हारी आकांक्षाएँ ऊँची हों और तुम उन्हें पाने के लिए धरती पर चलना सीखो।
  2. 'हर दीये की रोशनी देखकर ललचाना' और 'उँगली जलाना' से कवि क्या कहना चाहते हैं?
    हर दीये की रोशनी देखकर ललचाना विविध ज्ञान के प्रति आकर्षण और उसे पाने की ललक है। उँगली जलाना चुनौतियों को स्वीकार करने और कष्टों से न घबराने का प्रतीक है — ज्ञान पाने की राह में कठिनाई भी आएगी, उससे भागना नहीं है।
  3. कविता में सपनों को मनुष्य की तरह कैसे चित्रित किया गया है?
    कवि ने सपनों का मानवीकरण किया है — सपने मनुष्य की तरह हँसते हैं, मुसकराते हैं और गाते हैं। इसके अलावा एक ही संज्ञा 'स्वप्न' के साथ अनेक क्रियाएँ बुनी गई हैं — चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुसकराना, गाना, ललचाना।
  4. 'अपने पैरों पर खड़े होना सीखो' का क्या अर्थ है?
    इसका अर्थ है आत्मनिर्भर होना — अपने फैसले स्वयं लेना, अपनी मेहनत से आगे बढ़ना और दूसरों के सहारे पर निर्भर न रहना। यही कविता का अंतिम आशीर्वाद है।
  5. कविता का शीर्षक 'एक आशीर्वाद' क्यों रखा गया होगा, जबकि यह शब्द कविता में आता ही नहीं?
    क्योंकि पूरी कविता ही एक आशीर्वाद है — कवि युवाओं को सपने, प्रयास, आनंद और आत्मनिर्भरता का आशीर्वाद दे रहे हैं। शीर्षक कविता के भाव को नाम देता है, भले ही वह शब्द कविता की पंक्तियों में न आया हो। यदि कविता की किसी पंक्ति या शब्द को शीर्षक बनाना हो तो अपने कारण सहित कोई पंक्ति चुनी जा सकती है, जैसे सपनों के बड़े होने वाली पंक्ति।

विस्तार — और गहराई से

  1. भाषा की बात — समानार्थी छाँटना।
    नीचे दिए गए समूहों में वह शब्द चुनो जो समान अर्थ नहीं देता: पृथ्वी — धरा, वसुधा, अवनि, सुता (सुता समानार्थी नहीं है); चाँद — मधुकर, शशि, निशाकर, मयंक (मधुकर यानी भौंरा, समानार्थी नहीं है); तारे — नक्षत्र, सोम, तारक, उडुगण (सोम यानी चंद्रमा, समानार्थी नहीं है); रोशनी — प्रकाश, लालिमा, उजाला, आलोक (लालिमा यानी लाली, समानार्थी नहीं है); स्वप्न — सपना, इच्छा, यथार्थ, कल्पना (यथार्थ यानी वास्तविकता, समानार्थी नहीं है); दीया — दीन, ज्योति, दीपक, प्रदीप (दीन यानी गरीब, समानार्थी नहीं है)।
  2. सृजन — एक संज्ञा, अनेक क्रियाएँ।
    कविता की तरह एक संज्ञा लेकर उसके साथ अनेक क्रियाएँ बुनकर अपनी कविता बनाओ और सुनाओ। पाठ में दिया गया उदाहरण बादल का है — बादल को घिरते, गरजते, बरसते देखा है। इसी तरह तुम 'नदी', 'पतंग' या 'सपना' से अपनी कविता बना सकते हो।
  3. झरोखे से — डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का 'सपनों की उड़ान'।
    कलाम कहते हैं कि सपने वे नहीं होते जो नींद में देखते हो; सपने वे होते हैं जो सोने नहीं देते। सपने पूरे करने के लिए जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है। इक्कीसवीं सदी में जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी पहले कभी नहीं थीं। इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं — एक, उपलब्ध समय बढ़ाना; दूसरा, उतने ही समय में हासिल करने की मात्रा बढ़ा देना। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को समझ लेने से हर चीज़ तक पहुँचने के दरवाज़े खुद-ब-खुद खुल जाएँगे; यही वह लंबी छलाँग है जिसका मानवता को अब तक इंतज़ार था।
  4. डायरी और सपनों की बातें (विधि के रूप में)।
    एक दिन की डायरी में लिखो कि कब हँसे, कब मुसकराए, कब गाए, कब रूठे और कब मचले। अपने सपनों की पर्ची बनाओ — क्या करना चाहते हो और क्या पाना चाहते हो; कक्षा में प्रत्येक सपने पर चर्चा होगी कि उसके लिए क्या प्रयास, क्या योजना, किसका सहयोग और कौन-सी चुनौतियाँ हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों के सपने पूछो और किसी दैनिक सहायक (शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी) से उनके सपनों पर प्रश्न-सूची बनाकर बातचीत करो।

पाठ्यपुस्तक अभ्यास — क्या-क्या है

दोहराव — इस पाठ से क्या पक्का करें

  • कविता युवा वर्ग को दिया गया आशीर्वाद है — सपने बड़े हों।
  • भावना की गोद से उतरकर धरती पर चलना = वास्तविकता का सामना करना।
  • उँगली जलाना = चुनौतियों को स्वीकार करना; अपने पैरों पर खड़े होना = आत्मनिर्भरता।
  • सपने मानवीकृत हैं — हँसते, मुसकराते, गाते हैं।
  • कलाम का सूत्र: सपने वे जो सोने न दें; समय बढ़ाओ या उसी समय में मात्रा बढ़ाओ।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।