Chapter 3: हमारी बदलती पृथ्वी
अंदर की हलचल और बाहर की घिसाई — धरती की शक्ल हर दिन थोड़ी-थोड़ी बदलती है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Social Science • Book: Hamara Paryavaran (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
हमारी बदलती पृथ्वी — EG's own notes, in simple Hindi
Book: Hamara Paryavaran (Nayi pustak — 2025 ke baad wali) | Chapter 3 | Medium: Hindi
ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है।

Diagram (labels are printed on the image): नदी, पवन और समुद्री लहरों से बनी स्थलाकृतियाँ। सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

बदलते भूदृश्य की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
इस अध्याय के बारे में
पृथ्वी की सतह स्थिर नहीं है — वह धीरे-धीरे, हर समय बदल रही है। कुछ बदलाव अचानक और तेज़ होते हैं, जैसे भूकंप और ज्वालामुखी का फटना। कुछ बदलाव इतने धीमे होते हैं कि एक जीवन में दिखाई नहीं देते, जैसे नदी का अपने किनारे की मिट्टी को धीरे-धीरे बहा ले जाना। इन सभी बदलावों के पीछे दो तरह के बल काम करते हैं।
अंतर्जनित बल पृथ्वी के अंदर से काम करते हैं। पृथ्वी की पर्पटी एक ही टुकड़ा नहीं है — वह कई बड़ी प्लेटों में टूटी हुई है, और ये प्लेटें बहुत धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें टकराती हैं या एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तो धरती हिलती है — यही भूकंप है। भूकंप के दौरान ज़मीन में कंपन होता है, इसलिए इमारतें गिर जाती हैं। जब पृथ्वी के अंदर का पिघला पदार्थ दरारों से बाहर निकलता है, तो ज्वालामुखी बनता है। प्लेटों की गति ही पहाड़ों के उठने का भी कारण है।
बहिर्जनिक बल पृथ्वी की सतह पर बाहर से काम करते हैं — इनमें अपक्षय और अपरदन मुख्य हैं। अपक्षय में चट्टानें अपनी जगह पर ही टूटती-फूटती हैं (गर्मी, ठंड, पानी और पौधों की जड़ों से), जबकि अपरदन में टूटा हुआ पदार्थ बहते पानी, पवन, हिमनद या समुद्री लहरों द्वारा एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। अपरदन ही नदियों, पवनों और लहरों की बनाई हुई स्थलाकृतियों का निर्माता है।
नदी अपने ऊपरी भाग में तेज़ बहती है और घाटी को गहरा करती है; मैदान में आकर उसकी गति धीमी हो जाती है और वह अपने साथ लाई मिट्टी बिछाने लगती है। बाढ़ के समय नदी के किनारों पर जमा हुई उपजाऊ मिट्टी से बाढ़कृत मैदान बनता है, और नदी के मुहाने पर जमा मिट्टी से डेल्टा बनता है — इसीलिए डेल्टा और बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं। नदी के मोड़ के कटे हुए हिस्से से कभी-कभी चापझील (धनुषाकार झील) बन जाती है। रेगिस्तान में पवन रेत को उड़ाकर बालू टिब्बा बनाती है, और कहीं-कहीं चट्टान का निचला हिस्सा ज़्यादा घिस जाने से छत्रक शैल (मशरूम जैसी शैल) बन जाती है। समुद्र के किनारे लहरें पहले समुद्री गुफा बनाती हैं, फिर मेहराब, और अंत में गुफा की छत गिर जाने से अकेला खड़ा स्टैक रह जाता है।
भूकंप और ज्वालामुखी से बचाव भी इस अध्याय का महत्वपूर्ण संदेश है। भूकंप के समय घबराकर भागने के बजाय मज़बूत मेज़ के नीचे छिपना, खुले मैदान में जाना और बिजली के खंभों से दूर रहना जैसे उपाय जान बचाते हैं। पृथ्वी बदलती रहेगी — समझदारी इसी में है कि हम उसके बदलावों को समझें और उनके अनुसार सुरक्षित रहें।
क्या सीखना है (What you should learn)
- अंतर्जनित और बहिर्जनिक बलों में अंतर करना और उनके उदाहरण देना।
- बताना कि प्लेटें क्यों घूमती हैं और उनसे भूकंप तथा ज्वालामुखी कैसे बनते हैं।
- अपक्षय और अपरदन में अंतर करना।
- नदी की बनाई स्थलाकृतियाँ समझाना: बाढ़कृत मैदान, डेल्टा, चापझील।
- पवन की बनाई स्थलाकृतियाँ समझाना: बालू टिब्बा, छत्रक शैल।
- समुद्री लहरों की शृंखला समझाना: गुफा → मेहराब → स्टैक।
गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं। डेल्टा त्रिभुज जैसी आकृति का होता है और उसकी मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है, इसलिए वहाँ खेती अच्छी होती है।
अपक्षय में चट्टान अपनी जगह पर टूटती है, वह कहीं जाती नहीं। अपरदन में टूटा पदार्थ ढोया जाता है। परीक्षा में ‘कौन-सा बल पदार्थ को ले जाता है?’ पूछा जाए तो उत्तर है — अपरदन करने वाले कारक (नदी, पवन, हिमनद, लहरें)।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- अंतर्जनित बल — पृथ्वी के अंदर से काम करने वाले बल; भूकंप, ज्वालामुखी, प्लेटों की गति।
- बहिर्जनिक बल — सतह पर बाहर से काम करने वाले बल; अपक्षय और अपरदन।
- प्लेट (Plate) — पृथ्वी की पर्पटी का बड़ा टुकड़ा; प्लेटें धीरे-धीरे खिसकती हैं।
- अपक्षय (Weathering) — चट्टानों का अपनी जगह पर टूटना-फूटना।
- अपरदन (Erosion) — टूटे पदार्थ का पानी, पवन, हिम या लहरों द्वारा बहाकर ले जाया जाना।
- बाढ़कृत मैदान — बाढ़ के समय नदी द्वारा बिछाई गई उपजाऊ मिट्टी का मैदान।
- डेल्टा — नदी के मुहाने पर जमा मिट्टी से बना त्रिभुज जैसा क्षेत्र।
- चापझील — नदी के मोड़ के कट जाने से बनी धनुषाकार झील।
- बालू टिब्बा — पवन द्वारा रेत के जमा होने से बना टीला।
- छत्रक शैल — नीचे से ज़्यादा घिसी हुई, छतरी/मशरूम जैसी शैल।
- स्टैक — समुद्री मेहराब की छत गिरने के बाद अकेला खड़ा चट्टानी स्तंभ।
याद रखें (Remember)
- अंदर के बल = अंतर्जनित (भूकंप, ज्वालामुखी); बाहर के बल = बहिर्जनिक (अपक्षय, अपरदन)।
- प्लेटों की गति → टकराव/रगड़ → भूकंप; मैग्मा का बाहर आना → ज्वालामुखी।
- नदी: बाढ़कृत मैदान, डेल्टा, चापझील। पवन: बालू टिब्बा, छत्रक शैल। लहरें: गुफा → मेहराब → स्टैक।
- बाढ़कृत मैदान और डेल्टा उपजाऊ होते हैं — नदी की नई मिट्टी के कारण।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती (Exam Tip / Common Mistake)
सामान्य गलती: ‘कारण बताइए’ वाले प्रश्नों में केवल परिभाषा लिख देना। कारण वाले प्रश्नों में प्रक्रिया समझानी होती है — जैसे ‘बाढ़कृत मैदान उपजाऊ क्यों?’ का उत्तर है: हर बाढ़ में नदी नई, महीन और उपजाऊ मिट्टी बिछा देती है। हमेशा ‘क्यों’ का जवाब दें, केवल ‘क्या’ का नहीं।
Chart / Table: कौन-सा कारक, कौन-सी स्थलाकृति
| कारक | बनाई गई स्थलाकृतियाँ |
|---|---|
| नदी | बाढ़कृत मैदान, डेल्टा, चापझील |
| पवन | बालू टिब्बा, छत्रक शैल |
| समुद्री लहरें | समुद्री गुफा, मेहराब, स्टैक |
| हिमनद | हिमोढ़ (मोरेन) — बर्फ द्वारा लाई मिट्टी-पत्थर की ढेरी |
अभ्यास (Practice set — try it yourself)
- अंतर्जनित और बहिर्जनिक बलों में दो अंतर लिखिए।
Hint: सोचें — कहाँ से काम करते हैं, अंदर से या बाहर से। - प्लेटें क्यों घूमती हैं और उनके घूमने से क्या-क्या होता है?
Hint: सोचें — पर्पटी के टुकड़े और उनकी टक्कर। - बाढ़कृत मैदान कैसे बनता है? इसे उपजाऊ क्यों कहते हैं?
Hint: सोचें — बाढ़ की मिट्टी। - समुद्री गुफा स्टैक में कैसे बदल जाती है? क्रम से समझाइए।
Hint: सोचें — गुफा, मेहराब, फिर छत का गिरना। - अपने क्षेत्र में अपरदन का एक उदाहरण देखिए और लिखिए कि वह किस कारक से हुआ है।
Hint: सोचें — नदी का किनारा, हवा से उड़ी मिट्टी या बारिश की नाली।
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- प्लेटें क्यों घूमती हैं?
पृथ्वी की पर्पटी कई प्लेटों में टूटी हुई है, और ये प्लेटें मैंटल के ऊपर बहुत धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। इनकी गति से प्लेटें टकराती हैं या अलग होती हैं, जिससे भूकंप आते हैं, ज्वालामुखी फटते हैं और पहाड़ उठते हैं। - बहिर्जनिक और अंतर्जनित बल क्या हैं?
अंतर्जनित बल पृथ्वी के अंदर से काम करते हैं, जैसे प्लेटों की गति, भूकंप और ज्वालामुखी। बहिर्जनिक बल सतह पर बाहर से काम करते हैं, जैसे अपक्षय (चट्टानों का अपनी जगह टूटना) और अपरदन (टूटे पदार्थ का बहाकर ले जाया जाना)। - अपरदन क्या है?
अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें चट्टानों के टूटे हुए कणों को बहता पानी, पवन, हिमनद या समुद्री लहरें एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं और फिर जमा कर देती हैं। - बाढ़कृत मैदान का निर्माण कैसे होता है?
जब नदी में बाढ़ आती है, तो वह अपने किनारों से बाहर बहकर महीन, उपजाऊ मिट्टी बिछा देती है। बार-बार ऐसा होने से किनारों पर समतल, उपजाऊ मैदान बन जाता है, जिसे बाढ़कृत मैदान कहते हैं। - बालू टिब्बा क्या है?
रेगिस्तान में पवन रेत को उड़ाकर एक जगह जमा कर देती है, जिससे रेत का टीला बन जाता है। इसी टीले को बालू टिब्बा कहते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)
- समुंद्री पुलिन का निर्माण कैसे होता है?
समुद्री लहरें किनारे की चट्टानों को घिसकर तोड़ती हैं और टूटा पदार्थ किनारे पर जमा करती हैं। इस जमा हुए पदार्थ से ही समुद्र तट (पुलिन) बनता है। - चापझील क्या है?
जब नदी अपने तेज़ मोड़ को काटकर सीधा रास्ता बना लेती है, तो कटा हुआ मोड़ अलग होकर धनुष के आकार की झील बन जाता है — इसे चापझील कहते हैं। - कारण बताइए: कुछ शैल छत्रक के आकार में होते हैं।
रेगिस्तान में पवन के साथ उड़ने वाली रेत चट्टान के निचले हिस्से को ज़्यादा घिसती है, क्योंकि रेत नीचे ही ज़्यादा होती है। नीचे पतला और ऊपर चौड़ा हो जाने से शैल छतरी (छत्रक) जैसी दिखने लगती है। - कारण बताइए: बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं।
क्योंकि हर बाढ़ में नदी नई, महीन और खनिजों से भरपूर मिट्टी बिछा देती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। - कारण बताइए: भूकंप के दौरान इमारतें गिरती हैं।
भूकंप में ज़मीन में तेज़ कंपन होता है। यह कंपन इमारतों की नींव को हिला देता है, और जो इमारतें इस कंपन को सह नहीं पातीं, वे गिर जाती हैं।
अतिरिक्त अभ्यास — NCERT अभ्यास के प्रकार
- विश्व की कुछ नदियों के नाम लिखिए जो डेल्टा का निर्माण करती हैं।
गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी — ये सभी अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं। - रिक्त स्थान भरिए: समुद्री लहरों की शृंखला है — गुफा → ______ → स्टैक।
मेहराब। गुफा की छत घिसकर मेहराब बनती है, और मेहराब की छत गिरने पर स्टैक बचता है। - सही या गलत, कारण सहित: ‘अपक्षय में चट्टान का पदार्थ एक जगह से दूसरी जगह जाता है।’
गलत। अपक्षय में चट्टान अपनी जगह पर ही टूटती है; पदार्थ को ले जाना अपरदन का काम है। - कारण बताइए: समुद्री गुफा स्टैक के रूप में परिवर्तित हो जाती है।
लहरें गुफा को धीरे-धीरे बड़ा करके मेहराब बना देती हैं। जब मेहराब की छत का सहारा कमज़ोर होकर गिर जाता है, तो किनारे पर अकेला खड़ा चट्टानी स्तंभ (स्टैक) रह जाता है। - भूकंप के समय अपनी सुरक्षा के तीन उपाय लिखिए।
मज़बूत मेज़ के नीचे छिपें; खुले मैदान में जाएँ; बिजली के खंभों और ऊँची इमारतों से दूर रहें; घबराकर भागें नहीं। - एक तालिका बनाइए: नदी, पवन और लहरों की दो-दो स्थलाकृतियाँ।
नदी — बाढ़कृत मैदान, डेल्टा; पवन — बालू टिब्बा, छत्रक शैल; लहरें — समुद्री गुफा, स्टैक।
- अंदर के बल: प्लेट-गति, भूकंप, ज्वालामुखी। बाहर के बल: अपक्षय, अपरदन।
- नदी → बाढ़कृत मैदान, डेल्टा, चापझील। पवन → बालू टिब्बा, छत्रक शैल। लहरें → गुफा → मेहराब → स्टैक।
- कारण वाले प्रश्नों में प्रक्रिया समझाएँ, केवल परिभाषा नहीं।
How to use this page: Read the summary, say the Key Terms in your own words, then try the practice set without looking. Use the Questions with Answers to check yourself afterwards. Ask your teacher or parent to check your answers.

