Chapter 7: सर्वांगसमता
सर्वांगसमता की पहचान, संगत भागों की बराबरी और SSS, SAS, ASA, RHS नियमों से त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करना।
मूल नोट्स — तैयार Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Mathematics • Book: Ganit (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 7)
सर्वांगसमता — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
Book: Ganit (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 7) | अध्याय 7 | Medium: Hindi

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दो सर्वांगसम त्रिभुज — आकार और माप में एक जैसे। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है, पुस्तक का चित्र नहीं।

बच्चा रंगीन कागज़ से कटे एक जैसे त्रिभुजों को मिला रहा है। यह एक सामान्य चित्र है, पुस्तक का दृश्य नहीं।
यह अध्याय किस बारे में है
दो आकृतियाँ सर्वांगसम कहलाती हैं जब वे आकार और माप में पूरी तरह एक जैसी हों — एक को दूसरी पर रखने पर वह उसे पूरी तरह ढक ले। जैसे एक ही साँचे से कटे दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं: संगत भुजाएँ और संगत कोण।
त्रिभुजों की सर्वांगसमता जाँचने के चार मुख्य नियम हैं। भुजा-भुजा-भुजा (SSS) में तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं। भुजा-कोण-भुजा (SAS) में दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण बराबर होता है। कोण-भुजा-कोण (ASA) में दो कोण और उनके बीच की भुजा बराबर होती है।
समकोण त्रिभुजों के लिए एक विशेष नियम है — समकोण-कर्ण-भुजा (RHS): समकोण, कर्ण और एक भुजा बराबर हो तो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। ध्यान रहे, केवल कोणों की बराबरी (AAA) से सर्वांगसमता सिद्ध नहीं होती, क्योंकि आकार समान पर माप अलग हो सकती है।
तुम्हें क्या सीखना चाहिए
सर्वांगसमता की पहचान, संगत भागों की बराबरी और SSS, SAS, ASA, RHS नियमों से त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करना।
मुख्य शब्द
- सर्वांगसम — आकार और माप में पूरी तरह समान आकृतियाँ।
- संगत भाग — सर्वांगसम आकृतियों में एक-दूसरे के स्थान पर आने वाली भुजाएँ और कोण।
- SSS नियम — तीनों भुजाएँ बराबर हों तो त्रिभुज सर्वांगसम।
- SAS नियम — दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण बराबर हो तो त्रिभुज सर्वांगसम।
- ASA नियम — दो कोण और उनके बीच की भुजा बराबर हो तो त्रिभुज सर्वांगसम।
- RHS नियम — समकोण, कर्ण और एक भुजा बराबर हो तो समकोण त्रिभुज सर्वांगसम।
याद रखें
- सर्वांगसमता के लिए आकार और माप दोनों समान होने चाहिए।
- SAS में कोण दोनों भुजाओं के बीच का ही होना चाहिए।
- ASA में भुजा दोनों कोणों के बीच की ही होनी चाहिए।
- केवल तीनों कोण बराबर (AAA) होने से सर्वांगसमता सिद्ध नहीं होती।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: SAS में कोई भी कोण लेकर सर्वांगसमता बता देना। याद रखो, कोण उन दो भुजाओं के बीच का होना चाहिए जिनकी बराबरी बताई जा रही है।
चार्ट / तालिका: सर्वांगसमता के नियम — क्या बराबर चाहिए
| नियम | बराबर होने चाहिए | कहाँ लागू |
|---|---|---|
| SSS | तीनों भुजाएँ | सभी त्रिभुज |
| SAS | दो भुजाएँ और बीच का कोण | सभी त्रिभुज |
| ASA | दो कोण और बीच की भुजा | सभी त्रिभुज |
| RHS | समकोण, कर्ण और एक भुजा | केवल समकोण त्रिभुज |
अभ्यास — खुद करके देखो
- दो त्रिभुजों की भुजाएँ 5, 6, 7 सेमी और 5, 6, 7 सेमी हैं। क्या वे सर्वांगसम हैं? किस नियम से?
संकेत: तीनों भुजाएँ बराबर हैं। - एक त्रिभुज में दो भुजाएँ 4 और 6 सेमी हैं और बीच का कोण 50 डिग्री है। दूसरे में भी यही माप है। नियम बताओ।
संकेत: दो भुजाएँ और बीच का कोण। - क्या दो त्रिभुज जिनके कोण 40, 60, 80 डिग्री हैं, ज़रूर सर्वांगसम होंगे?
संकेत: केवल कोणों की बराबरी के बारे में सोचो। - दो समकोण त्रिभुजों के कर्ण 10 सेमी और एक भुजा 6 सेमी बराबर है। नियम बताओ।
संकेत: समकोण त्रिभुज का विशेष नियम। - सर्वांगसम त्रिभुजों में एक भुजा 8 सेमी है। उसकी संगत भुजा कितनी होगी?
संकेत: संगत भाग बराबर होते हैं।
प्रश्न और उत्तर
- सर्वांगसम और समरूप आकृतियों में अंतर समझाओ।
सर्वांगसम आकृतियाँ आकार और माप दोनों में समान होती हैं। समरूप आकृतियाँ केवल आकार में समान होती हैं, माप अलग हो सकती है — जैसे एक ही फोटो के छोटे और बड़े प्रिंट समरूप हैं पर सर्वांगसम नहीं। - दो त्रिभुजों में AB = PQ, BC = QR और कोण B = कोण Q है। कौन सा नियम लागू होगा और क्यों?
SAS नियम लागू होगा, क्योंकि दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण (B और Q) बराबर है। इसलिए त्रिभुज सर्वांगसम हैं। - एक समद्विबाहु त्रिभुज में माध्यिका खींचने पर बने दो त्रिभुज सर्वांगसम क्यों होते हैं?
माध्यिका आधार को दो बराबर भागों में बाँटती है, दोनों त्रिभुजों की एक भुजा उभयनिष्ठ है और समद्विबाहु की दो भुजाएँ बराबर हैं। तीनों भुजाएँ बराबर होने से SSS नियम लागू होता है। - RHS नियम केवल समकोण त्रिभुजों पर क्यों लागू होता है?
RHS में समकोण का होना ही शर्त है — समकोण के बिना कर्ण की परिभाषा ही नहीं बनती। इसलिए यह नियम अन्य त्रिभुजों पर लागू नहीं हो सकता। - दो त्रिभुजों में दो कोण और एक भुजा बराबर है, पर भुजा कोणों के बीच की नहीं है। क्या सर्वांगसमता सिद्ध हो जाएगी?
हाँ, यदि भुजा किसी एक कोण के सामने की संगत भुजा हो तो AAS स्थिति बनती है, जो ASA के बराबर है, क्योंकि तीसरा कोण भी कोण योग गुण से बराबर निकल आता है। पर भुजा की संगत स्थिति जाँचना ज़रूरी है।
इस पेज का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ो, फिर मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलकर दोहराओ, उसके बाद बिना देखे अभ्यास करो। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करो। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से भी जाँचवाओ।
- सर्वांगसमता के लिए आकार और माप दोनों समान होने चाहिए।
- SAS में कोण दोनों भुजाओं के बीच का ही होना चाहिए।
- ASA में भुजा दोनों कोणों के बीच की ही होनी चाहिए।
- केवल तीनों कोण बराबर (AAA) होने से सर्वांगसमता सिद्ध नहीं होती।

