Chapter 9: एक तिनका
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Vasant Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
घमंड से ऐंठा हुआ आदमी — और आँख में पड़ा एक छोटा-सा तिनका, जो सबक सिखा गया।
एक तिनका — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Vasant Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 9 | लेखक/कवि: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ | माध्यम: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): हवा में एक तिनका — प्रतीक की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

खेत में घास। छोटी चीज़ों के महत्व की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
इस कविता के कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं। कविता ‘मैं’ से आरंभ होती है — कवि कहता है कि वह घमंड में भरा ऐंठा हुआ था और एक दिन मुंडेरे पर खड़ा था।
तभी अचानक दूर से उड़ता हुआ एक तिनका उसकी आँख में पड़ा। यहीं से कविता की घटना शुरू होती है — एक छोटे-से तिनके ने बड़े घमंड को कैसे तोड़ दिया, यही इस कविता की कहानी है।
सार — अपने शब्दों में
घमंडी आदमी मुंडेरे पर खड़ा था। अचानक एक तिनका उड़कर उसकी आँख में पड़ा। वह झिझक उठा, बेचैन-सा हो गया और लाल होकर उसकी आँख भी दुखने लगी। घमंड का सारा ऐंठन एक छोटे-से तिनके के सामने टिक नहीं पाया।
लोग कपड़े की मूँठ देने लगे — यानी आँख से तिनका निकालने के लिए तरह-तरह के उपाय करने लगे। इस बीच ‘ऐंठ’ बेचारी दबे पाँवों भाग गई। घमंड, जो अभी तक सीना तानकर खड़ा था, अब चुपचाप खिसक गया।
जब किसी ढब से तिनका निकल गया, तब ‘समझ’ ने उसे ताने दिए — ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए। अर्थ यह है कि जिसे तुम तुच्छ समझते हो, वही तुम्हारे घमंड को तोड़ने के लिए काफ़ी है।
कविता में ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ को सजीव प्राणियों की तरह दिखाया गया है — जैसे वे नाटक के पात्र हों। ‘ऐंठ’ भाग जाती है और ‘समझ’ ताना देती है। यही कविता की विशेषता है — भावों को पात्र बनाकर सामने लाना।
कवि ने ‘मैं’ से कविता आरंभ की है, इसलिए यह ‘मैं’ पढ़नेवाले से भी जुड़ जाता है। पढ़नेवाला महसूस करता है कि यह घमंड उसी का भी हो सकता है, और यह सबक उसी के लिए भी है।
मुख्य शब्द
- ऐंठ — घमंड, अकड़।
- मुंडेर — छत की किनारे की दीवार।
- मूँठ — कपड़े की छोटी-सी गठरी या पोटली — आँख सेंकने/साफ़ करने के लिए।
- ढब — तरीका, युक्ति।
- तिनका — घास का छोटा-सा टुकड़ा।
- समझ — समझदारी — यहाँ एक पात्र की तरह।
भाषा-बिंदु
- ध्वनि-वाक्यांश: ‘छप से’, ‘टप से’, ‘थर्र से’, ‘फुर्र से’, ‘सन् से’ — ये ध्वनि और गति बताते हैं। रिक्त स्थान भरो: मेंढक छप से कूद गया; नल बंद होने पर बूँद टप से चू गई; शोर पर चिड़िया फुर्र से उड़ी; ठंडी हवा सन् से गुज़री, मैं ठंड में थर्र से काँप गया।
- ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिखने पर वाक्य कैसे बदलेंगे? जैसे ‘मैं घमंड में भरा ऐंठा हुआ’ की जगह ‘वह घमंड में भरा ऐंठा हुआ’ — सर्वनाम बदलने से वाक्य का दृष्टिकोण बदल जाता है।
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?
संकेत: सोचो — मुंडेरे पर खड़े आदमी की आँख में क्या पड़ा? - आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई?
संकेत: सोचो — झिझक, बेचैनी, लाल आँख, दुख। - घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए आसपास के लोगों ने क्या किया?
संकेत: सोचो — कपड़े की मूँठ। - ‘समझ’ ने घमंडी को क्या चेतावनी दी?
संकेत: सोचो — एक तिनका ही काफ़ी है। - ‘मैं’ की जगह ‘वह’ लिखने पर वाक्य कैसे बदल जाएगा? एक उदाहरण दो।
संकेत: सोचो — दृष्टिकोण बदलता है।
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?
घमंड में भरा ऐंठा हुआ आदमी एक दिन मुंडेरे पर खड़ा था। अचानक दूर से उड़ता हुआ एक तिनका उसकी आँख में पड़ा। इसी छोटी-सी घटना से घमंड टूट गया — यही घटना घमंड नहीं करने का संदेश देती है। - आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई?
वह झिझक उठा, बेचैन-सा हो गया और लाल होकर उसकी आँख भी दुखने लगी। जो अभी तक घमंड से ऐंठा हुआ खड़ा था, वह एक तिनके के सामने बेबस हो गया। - घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए आसपास के लोगों ने क्या किया?
लोग कपड़े की मूँठ देने लगे — यानी कपड़े की पोटली से आँख को सेंकने और साफ़ करने के उपाय करने लगे। तब किसी ढब से तिनका निकल गया। - ‘समझ’ की चेतावनी क्या थी?
जब तिनका निकल गया, तब ‘समझ’ ने ताने दिए — ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए। अर्थ यह है कि घमंड की कोई वजह नहीं है, क्योंकि सबसे छोटी और तुच्छ समझी जानेवाली चीज़ भी घमंड को तोड़ने के लिए काफ़ी है। - कबीर की पंक्तियों से इस कविता की समानता और अंतर बताओ।
कबीर ने भी कहा है कि तिनके को कभी छोटा मत समझो — पाँव तले का तिनका कभी उड़कर आँख में पड़ जाता है और बड़ी पीड़ा देता है। समानता यह है कि दोनों में तिनके की शक्ति का संदेश है। अंतर यह है कि हरिऔध की कविता में घमंडी का अपना अनुभव है और ‘ऐंठ’ तथा ‘समझ’ पात्र बनकर आते हैं, जबकि कबीर की पंक्तियाँ सीधी सीख देती हैं।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘कविता से’, ‘अनुमान और कल्पना’ तथा ‘भाषा की बात’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- कविता से: कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलो — ‘एक तिनका आँख में मेरी पड़ा’।
सामान्य वाक्य: मेरी आँख में एक तिनका पड़ा। इसी तरह: लोग कपड़े की मूँठ देने लगे; एक दिन जब वह मुंडेरे पर खड़ा था; लाल होकर आँख भी दुखने लगी; ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भाग गई; जब किसी ढब से तिनका निकल गया। - अनुमान: कवि ने कविता को ‘मैं’ से आरंभ किया है। यह ‘मैं’ पढ़नेवाले से भी जुड़ सकता है — कैसे?
क्योंकि ‘मैं’ पढ़ते समय हर पढ़नेवाला अपने आप को उस जगह रख लेता है। उसे लगता है कि यह घमंड उसी का भी हो सकता है, इसलिए सबक भी उसी के लिए है। - अनुमान: ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिखने पर वाक्य कैसे बदलेंगे?
‘मैं घमंड में भरा ऐंठा हुआ’ की जगह ‘वह घमंड में भरा ऐंठा हुआ’ हो जाएगा — अनुभव अपना न रहकर किसी और का लगने लगेगा। नाम लिखने पर, जैसे ‘मोहन घमंड में भरा ऐंठा हुआ’, तो वह किसी एक व्यक्ति की कहानी बन जाएगी। - अनुमान: ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ का सजीव प्राणी-सा प्रयोग हुआ है। यदि ये नाटक के पात्र होते तो इनका अभिनय कैसा होता?
‘ऐंठ’ अकड़कर चलेगी, सीना तानकर बोलेगी और फिर दबे पाँवों भाग जाएगी। ‘समझ’ शांत स्वर में, ताना मारते हुए बोलेगी। अभिनय में इनके हाव-भाव ही इनके स्वभाव को दिखाएँगे। - कबीर की पंक्तियाँ: ‘उठा बबूला प्रेम का, तिनका उड़ा आकास; तिनका-तिनका हो गया, तिनका तिनके पास’ — तिनके के अलग-अलग अर्थ बताओ।
पहली पंक्ति में तिनका छोटी चीज़ है जो प्रेम के बबूले से आकाश तक उड़ जाती है। दूसरी में तिनका-तिनका होकर तिनके के पास पहुँच जाता है — यानी छोटी-छोटी चीज़ें मिलकर बड़ी बन जाती हैं। - भाषा की बात: ध्वनि-वाक्यांशों से रिक्त स्थान भरो — छप से, टप से, थर्र से, फुर्र से, सन् से।
मेंढक छप से कूद गया। नल बंद होने पर बूँद टप से चू गई। शोर पर चिड़िया फुर्र से उड़ी। ठंडी हवा सन् से गुज़री, मैं ठंड में थर्र से काँप गया।
- कवि: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’; विषय: घमंड और एक तिनका।
- घटना: मुंडेरे पर खड़े घमंडी की आँख में तिनका पड़ा; मूँठ देने लगे; तिनका निकला।
- पात्र-भाव: ‘ऐंठ’ दबे पाँवों भागी; ‘समझ’ ने ताना दिया — एक तिनका ही बहुत है।
- तुलना: कबीर — तिनके को कभी छोटा मत समझो।
- भाषा: ध्वनि-वाक्यांश (छप, टप, थर्र, फुर्र, सन्); ‘मैं’ बनाम ‘वह’।
- संदेश: घमंड नहीं करना चाहिए; छोटी चीज़ भी बड़ा सबक दे सकती है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

