Chapter 8: काबुलीवाला
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Durva Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
काबुल से आए मेवे बेचनेवाले रहमत और छोटी बच्ची मिनी की मित्रता — जो सालों बाद भी एक नन्हें हाथ की छाप से पहचानी गई।
काबुलीवाला — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Durva Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 8 | लेखक/कवि: (पाठ में लेखक का नाम नहीं दिया गया है) | माध्यम: Hindi
ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है। चित्र सामान्य तस्वीरें हैं, पुस्तक के चित्र नहीं।

Diagram (labels are printed on the image): बच्ची से बात करता फेरीवाला — स्नेह की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

बाज़ार में फेरीवाला। मानवीय संबंध की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
यह पाठ काबुल से आए मेवे बेचनेवाले रहमत और छोटी बच्ची मिनी की मित्रता की कहानी है। पाठ में लेखक का नाम नहीं दिया गया है, इसलिए यहाँ लेखक का नाम नहीं लिखा जा रहा है।
मिनी एक चंचल (नटखट) बच्ची है। पहले उसे लगता था कि काबुलीवाला अपनी झोली में चुराए हुए बच्चों को छिपाए हुए है। फिर धीरे-धीरे दोनों में मित्रता हो गई।
सार — अपने शब्दों में
मिनी को पहले ऐसा लगता था कि काबुलीवाला अपनी झोली में चुराए हुए बच्चों को छिपाए हुए है। यह बच्चों की कल्पना थी — झोली में मेवे होते थे, पर मिनी को डर लगता था कि उसमें बच्चे छिपे होंगे।
फिर मिनी की काबुलीवाले से मित्रता हो गई। काबुलीवाला उसे मेवे देता था, उससे बातें करता था और मिनी की बातों में मज़ा लेता था। मिनी की माँ रहमत पर नज़र रखना चाहती थी, परंतु पिता रहमत को मना नहीं कर पाते थे — क्योंकि वे जानते थे कि काबुलीवाले के साथ बातचीत करने से बाहर जाने का काम हो जाता है, यानी बाहर के देश-दुनिया के बारे में जानकारी मिल जाती है।
काबुलीवाला हमेशा पैसे लौटा देता था। इसका कारण यह था कि वह मिनी से प्यार करता था और उसे अपनी बेटी की तरह समझता था — वह मिनी से पैसे नहीं लेना चाहता था, बल्कि उसे मेवे देना चाहता था।
फिर एक दिन रहमत ने एक धोखेबाज़ आदमी को छुरा मार दिया, और उसे जेल हो गई। वर्षों बाद जब वह लौटा, तो मिनी बड़ी हो चुकी थी। मिनी के पिता ने काबुलीवाले को उसकी किस बात से पहचान लिया? — एक काग़ज़ पर किसी नन्हें हाथ की छाप थी, जो रहमत की बेटी के हाथ की छाप थी। वही छाप उसकी पहचान बन गई।
कहानी का एक और सुंदर क्षण वह है जब रहमत का चेहरा पलक झपकाते ही आनंद से खिल उठा — यानी तुरंत खुशी से भर गया। यह क्षण बताता है कि पिता का प्यार सालों बाद भी वैसा ही रहता है।
मुख्य शब्द
- चंचल — नटखट।
- तमाशबीन — तमाशा देखने वाले।
- अचरज — हैरानी, आश्चर्य।
- नामुमकिन — असंभव।
- सौदा — वह चीज़ जो बाज़ार से खरीदी जाए, माल।
भाषा-बिंदु
- बार-बार बोलो: मिनी ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी; मिनी एक शक भरी नज़र से देखती हुई खड़ी रही; शरीर भी कमज़ोर हो गया था; काबुलीवाला दरवाज़े के पास खड़ा हो गया; काग़ज़ पर किसी नन्हें हाथ की छाप थी। इन वाक्यों को ज़ोर से बोलकर पढ़ो।
- पढ़ो और समझो (स्त्रीलिंग रूप): नायक—नायिका, बालक—बालिका, गायक—गायिका, लेखक—लेखिका, सेवक—सेविका। इसी तरह पाँच और पुल्लिंग-स्त्रीलिंग जोड़े लिखो।
- सही मिलान करो: बे-सिर-पैर — बिना मतलब की; पलक झपकते ही — तुरंत; बँधी हुई बातें — निश्चित बातें, एक ही तरह की बातचीत; बात चलना — बात शुरू होना; मुँह फेरना — चेहरा सामने से हटा लेना।
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- मिनी को ऐसा क्यों लगता था कि काबुलीवाला अपनी झोली में चुराए हुए बच्चों को छिपाए हुए है?
संकेत: सोचो — बच्चों की कल्पना, डर। - मिनी की काबुलीवाले से मित्रता क्यों हो गई?
संकेत: सोचो — मेवे, बातें, प्यार। - काबुलीवाला हमेशा पैसे क्यों लौटा देता था?
संकेत: सोचो — बेटी जैसा प्यार। - वर्षों बाद मिनी के पिता ने काबुलीवाले को उसकी किस बात से पहचान लिया?
संकेत: सोचो — नन्हें हाथ की छाप। - मिनी की माँ रहमत पर नज़र रखना चाहती थी, परंतु पिता रहमत को मना नहीं कर पाते थे — तुम्हारे विचार में कौन सही था, क्यों?
संकेत: सोचो — माँ की चिंता, पिता की समझ।
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- मिनी को ऐसा क्यों लगता था कि काबुलीवाला अपनी झोली में चुराए हुए बच्चों को छिपाए हुए है?
क्योंकि मिनी एक चंचल, नटखट बच्ची थी और बच्चों की कल्पना में झोली में कुछ छिपा होना डरावना लगता है। झोली में मेवे होते थे, पर मिनी को लगता था कि उसमें चुराए हुए बच्चे छिपे होंगे — यह उसका बचपना और डर था। - मिनी की काबुलीवाले से मित्रता क्यों हो गई?
क्योंकि काबुलीवाला मिनी को मेवे देता था, उससे प्यार से बातें करता था और उसकी बातों में मज़ा लेता था। धीरे-धीरे मिनी का डर खत्म हो गया और दोनों में मित्रता हो गई। काबुलीवाला मिनी में अपनी बेटी की झलक देखता था। - काबुलीवाला हमेशा पैसे क्यों लौटा देता था?
क्योंकि वह मिनी से प्यार करता था और उसे अपनी बेटी की तरह समझता था। वह मिनी से पैसे नहीं लेना चाहता था — वह उसे मेवे देना चाहता था, पैसे लेना नहीं। यही उसका पिता-जैसा प्यार था। - वर्षों बाद मिनी के पिता ने काबुलीवाले को उसकी किस बात से पहचान लिया?
मिनी के पिता ने काबुलीवाले को एक काग़ज़ पर किसी नन्हें हाथ की छाप से पहचान लिया। वह छाप रहमत की बेटी के नन्हें हाथ की थी, जिसे वह अपने पास रखता था। वही छाप उसकी पहचान बन गई। - मिनी की माँ रहमत पर नज़र रखना चाहती थी, परंतु पिता रहमत को मना नहीं कर पाते थे — तुम्हारे विचार में कौन सही था, क्यों?
दोनों अपने-अपने स्थान पर सही थे। माँ सही थी, क्योंकि वह अपनी बच्ची की सुरक्षा के लिए चिंतित थी — किसी अजनबी पर नज़र रखना माँ का स्वाभाविक कर्तव्य है। पिता भी सही थे, क्योंकि वे जानते थे कि रहमत सीधा आदमी है और उससे बातचीत से बाहर के देश-दुनिया की जानकारी मिलती है। दोनों की चिंता और समझ दोनों ज़रूरी थीं।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘अभ्यास’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों (बार-बार बोलो, स्त्रीलिंग रूप, पाठ संबंधी प्रश्न, सोचो और जवाब दो, सही मिलान, शब्द जाल, घूमना-फिरना, देखो समझो करो, संज्ञा-विशेषण) को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- सोचो और जवाब दो: रहमत ने एक धोखेबाज़ आदमी को छुरा मार दिया — अगर तुम रहमत की जगह होते तो क्या करते?
अपनी राय लिखो — क्या तुम गुस्से में छुरा मारते, या कानून की मदद लेते, या बातचीत से मामला सुलझाते? कारण भी लिखो। (यह प्रश्न किताब की पंक्ति नहीं है — यह एक सोचने का प्रश्न है।) - सोचो और जवाब दो: मान लो तुम मिनी हो, अब अपनी कहानी पूरी कक्षा को सुनाओ।
अपनी कल्पना से मिनी की आवाज़ में लिखो — ‘मैं मिनी हूँ। पहले मुझे काबुलीवाला से डर लगता था, फिर वह मेरा दोस्त बन गया। वह मुझे मेवे देता था और मेरी बातें सुनता था।’ - सोचो और जवाब दो: ‘पलक झपकाते ही रहमत का चेहरा आनंद से खिल उठा’ — अपनी भाषा में कैसे कहोगे?
अपनी भाषा में: ‘तुरंत रहमत का चेहरा खुशी से चमक उठा’ या ‘एक पल में रहमत बहुत खुश हो गया।’ - सही मिलान करो: बे-सिर-पैर, पलक झपकते ही, बँधी हुई बातें, बात चलना, मुँह फेरना के अर्थ लिखो।
बे-सिर-पैर — बिना मतलब की; पलक झपकते ही — तुरंत; बँधी हुई बातें — निश्चित बातें, एक ही तरह की बातचीत; बात चलना — बात शुरू होना; मुँह फेरना — चेहरा सामने से हटा लेना। - शब्द जाल: काबुलीवाला मेवे बेचता था — मेवों के नाम शब्दजाल में ढूँढो और उनकी विशेषता बताने वाले विशेषण भी लिखो।
मेवे: पिस्ता, छुआरा, बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट। विशेषण: मीठा पिस्ता, सूखा छुआरा, कुरकुरा बादाम, स्वादिष्ट काजू, छोटी किशमिश, कड़ा अखरोट। - घूमना-फिरना: ‘काबुलीवाले के साथ बातचीत करने से बाहर जाने का काम हो जाता है’ — मिनी के पिता का ऐसा कहना बताता है कि वह काबुली से बात करके बाहर के देश-दुनिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेता था। आज इसके अलावा और किन-किन साधनों से देश-विदेश के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है?
आज के साधन: समाचार-पत्र, टेलीविज़न, इंटरनेट, किताबें, यात्रा, रेडियो, मोबाइल। - देखो, समझो और करो (चित्र-पहचान): घड़ा, सीढ़ी, साँप, मुखौटा, पगड़ी, कुर्ता, मोर (राष्ट्रीय पक्षी), चूहा, गिलास, झंडा — इनके नाम लिखो।
चित्रों को पहचानकर नाम लिखो — घड़ा (मिट्टी का बर्तन), सीढ़ी (चढ़ने का साधन), साँप, मुखौटा (चेहरे का नकाब), पगड़ी (सिर का वस्त्र), कुर्ता (कपड़ा), मोर (राष्ट्रीय पक्षी), चूहा, गिलास, झंडा। - संज्ञा-विशेषण: बेटी, खिड़की, रहमत, काबुलीवाला, झोली, नायक, पैर, जेल, बच्चा — ये संज्ञा हैं। इनके साथ जो भी विशेषण ठीक लगे, उसे लगाकर वाक्य बनाओ।
बेटी — प्यारी बेटी; खिड़की — खुली खिड़की; रहमत — सीधा रहमत; काबुलीवाला — लंबा काबुलीवाला; झोली — भारी झोली; नायक — वीर नायक; पैर — थके पैर; जेल — अँधेरी जेल; बच्चा — नटखट बच्चा।
- कहानी: रहमत (काबुलीवाला, मेवे बेचनेवाला) और मिनी (चंचल बच्ची) की मित्रता।
- शुरुआत: मिनी को लगता था कि झोली में चुराए हुए बच्चे छिपे हैं — बच्चों की कल्पना और डर।
- मित्रता: मेवे, बातें, प्यार — मिनी में अपनी बेटी की झलक।
- पैसे लौटाना: मिनी से पैसे नहीं लेना — पिता-जैसा प्यार।
- जेल: धोखेबाज़ आदमी को छुरा मारने पर जेल; वर्षों बाद लौटा।
- पहचान: काग़ज़ पर नन्हें हाथ की छाप — रहमत की बेटी की छाप।
- माँ-पिता: माँ की चिंता (नज़र रखना) और पिता की समझ (बाहर की जानकारी) — दोनों ज़रूरी।
- भाषा: स्त्रीलिंग रूप; मुहावरे/सही मिलान; संज्ञा-विशेषण।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

