Chapter 5: थोड़ी धरती पाऊँ
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Durva Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
कवि को बस थोड़ी धरती चाहिए — ताकि वह बाग-बगीचा लगा सके, और बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रख सकें।
थोड़ी धरती पाऊँ — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Durva Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 5 | लेखक/कवि: (पाठ में कवि का नाम नहीं दिया गया है) | माध्यम: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): हाथों में मिट्टी और पौधा — धरती-प्रेम की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

बीज बोता बच्चा। मिट्टी से जुड़ाव की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
यह कविता एक ऐसे कवि की विनती है जो थोड़ी धरती पाकर बाग-बगीचा लगाना चाहता है। वह पेड़ों को काटने के खिलाफ़ आवाज़ उठाता है और कहता है कि आज सभ्यता वहशी (असभ्य) बनकर पेड़ों को काट रही है।
कविता में एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे और पेड़ — दोनों दुनिया को हरा-भरा रखते हैं। बच्चों की हँसी और पेड़ों की हरियाली — दोनों जीवन का आधार हैं।
सार — अपने शब्दों में
कवि की विनती सीधी है — उसे थोड़ी धरती मिल जाए, तो वह उस पर बाग-बगीचा लगाएगा। बगीचे में फूल होंगे, फल होंगे, चिड़ियाँ आएँगी और छाया होगी। यही कवि का सपना है।
पर आज की सभ्यता वहशी बन गई है — वह पेड़ों को काट रही है। पेड़ कटने से छाया खत्म होती है, पक्षियों का घर छिनता है, हवा खराब होती है और धरती सूखने लगती है। कवि इस पर दुखी है।
कविता में एक और सुंदर बात है — बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं। बच्चे जैसे अपनी मासूमियत से दुनिया को खुश रखते हैं, वैसे ही पेड़ अपनी हरियाली से दुनिया को जीवंत रखते हैं। दोनों की रक्षा करना ज़रूरी है।
इस पाठ के अंत में ‘जंगल’ शीर्षक की एक और कविता भी दी गई है, जिसके कवि लक्ष्मीनारायण पयोधि हैं। उस कविता में जंगल को बादलों का प्यार और आदमी का यार कहा गया है — जंगल फूल-फल देता है, सबका उपकार करता है, पर मूक (चुप) रहकर दुश्मनों के वार सहता है। कारखानों के धुएँ से जंगल बीमार पड़ गया है, और अगर वह इसी तरह कटता रहा तो थार (रेगिस्तान) बन जाएगा।
दोनों कविताओं का संदेश एक है — पेड़ों को बचाओ, जंगल को बचाओ, वरना धरती की हरियाली खत्म हो जाएगी।
मुख्य शब्द
- जलाशय — तालाब, झील आदि।
- दुष्कर्म — बुरा काम।
- दहकना — आग की लपटें उठना।
- अंग — भाग, हिस्सा; शरीर के हाथ-पाँव आदि।
- वहशी — असभ्य।
- सहन — आँगन।
- शिशु — बालक।
- विनती — प्रार्थना।
भाषा-बिंदु
- पर्यायवाची शब्द: धरती, चिड़िया, हवा, पेड़, दुनिया — इनके समान अर्थ वाले शब्द लिखो। जैसे धरती—ज़मीन, पृथ्वी; चिड़िया—पक्षी, पंछी; हवा—वायु, पवन; पेड़—वृक्ष, तरु; दुनिया—संसार, जगत।
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- कवि बाग-बगीचा क्यों लगाना चाहता है?
संकेत: सोचो — थोड़ी धरती, फूल-फल, छाया। - कविता में कवि की क्या विनती है?
संकेत: सोचो — पेड़ों को मत काटो। - कवि क्यों कह रहा है कि ‘आज सभ्यता वहशी बन, पेड़ों को काट रही है’? अपने विचार लिखो।
संकेत: सोचो — कटाई, प्रदूषण, स्वार्थ। - “बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं” — पेड़ों और बच्चों में क्या कुछ समानता है? अपने ढंग से लिखो।
संकेत: सोचो — मासूमियत, जीवन, सुरक्षा। - तुम पेड़ों को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकते हो?
संकेत: सोचो — लगाना, बचाना, जागरूक करना।
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- कवि बाग-बगीचा क्यों लगाना चाहता है?
क्योंकि वह थोड़ी धरती पाकर उस पर फूल, फल, छाया और हरियाली लाना चाहता है। बाग-बगीचा न केवल उसे खुशी देगा, बल्कि पक्षियों को घर देगा, हवा को शुद्ध करेगा और धरती को हरा-भरा रखेगा। - कविता में कवि की क्या विनती है?
कवि की विनती यह है कि पेड़ों को मत काटो। उसे थोड़ी धरती दे दो, ताकि वह बाग-बगीचा लगा सके। वह चाहता है कि लोग पेड़ों की रक्षा करें, न कि उन्हें काटकर धरती को उजाड़ें। - कवि क्यों कह रहा है कि ‘आज सभ्यता वहशी बन, पेड़ों को काट रही है’? अपने विचार लिखो।
क्योंकि आज की सभ्यता विकास के नाम पर पेड़ों को काट रही है — सड़कें, इमारतें और कारखाने बनाने के लिए जंगल उजाड़े जा रहे हैं। यह असभ्य व्यवहार है, क्योंकि पेड़ काटने से हवा खराब होती है, पक्षियों का घर छिनता है और धरती सूखने लगती है। - “बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं” — पेड़ों और बच्चों में क्या कुछ समानता है?
समानता यह है कि दोनों मासूम हैं और दोनों जीवन देते हैं। बच्चे अपनी हँसी और मासूमियत से दुनिया को खुश रखते हैं, पेड़ अपनी हरियाली, छाया और ऑक्सीजन से दुनिया को जीवंत रखते हैं। दोनों को सुरक्षा और देखभाल चाहिए — बच्चे को प्यार चाहिए, पेड़ को पानी और सुरक्षा चाहिए। - तुम पेड़ों को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकते हो?
मैं पेड़ लगा सकता हूँ, उनकी देखभाल कर सकता हूँ, पेड़ काटने का विरोध कर सकता हूँ, दूसरों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित कर सकता हूँ और काग़ज़ की बर्बादी रोककर पेड़ों को बचा सकता हूँ।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘अभ्यास’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों (कैसी लगी कविता, बातचीत, बाग-बगीचा, यह भी करो, खोजबीन, समान अर्थ वाले शब्द, जंगल कविता) को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- कैसी लगी कविता: कविता की कौन-सी पंक्तियाँ तुम्हें सबसे अच्छी लगीं? वे क्यों अच्छी लगीं?
अपनी पसंद की दो पंक्तियाँ लिखो और कारण भी लिखो — जैसे ‘बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं’ — क्योंकि इसमें बच्चों और पेड़ों की समानता सुंदर ढंग से बताई गई है। - बातचीत: लकड़हारे और बच्ची की बातचीत दी गई है, अपनी समझ से पूरी करो। बच्ची: ओ भैया! आप इस पेड़ को क्यों काट रहे हो? लकड़हारा: यह तो मेरा काम है। बच्ची: पर यह तो गलत है। लकड़हारा: यह कैसे गलत है? इसी से तो मेरे परिवार का भरण-पोषण होता है।
बातचीत को आगे बढ़ाओ — बच्ची कहेगी कि पेड़ काटने से पक्षियों का घर छिनता है और हवा खराब होती है; लकड़हारा कहेगा कि उसे रोज़गार चाहिए; बच्ची सुझाव देगी कि पेड़ लगाकर भी रोज़गार पाया जा सकता है। - बाग-बगीचा: नीचे लिखी चीज़ों में से कौन-सी चीज़ें बगीचे में होंगी — कार, फूल, क्यारियाँ, चिड़ियाँ, सड़क, फल, खेत, तालाब, कारखाने, पेड़, कुर्सी, काग़ज़, पत्ता, टहनी?
बगीचे में होंगी: फूल, क्यारियाँ, चिड़ियाँ, फल, पेड़, पत्ता, टहनी। नहीं होंगी: कार, सड़क, कारखाने, कुर्सी, काग़ज़। (खेत, तालाब — बगीचे के पास हो सकते हैं, बगीचे में नहीं।) - यह भी करो: घर के पास कौन-कौन से पेड़-पौधे और पशु-पक्षी नज़र आते हैं — सूची बनाओ।
अपने घर के आस-पास के पाँच पेड़-पौधों और पाँच पशु-पक्षियों के नाम लिखो। - यह भी करो: आस-पास पता करके ऐसे व्यक्ति से बात करो जिसने कोई पेड़ या पौधा लगाया है — नाम, कब लगाया, देखभाल की या नहीं, अब भी मौजूद है?
किसी पड़ोसी या रिश्तेदार से पूछकर लिखो — जैसे दादाजी ने 10 साल पहले आम का पेड़ लगाया था, आज भी है और फल देता है। - खोजबीन: देश में पुराने समय से पेड़-पौधे लगाने और कटने से बचाने की परंपरा, और पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन (जैसे चिपको) की जानकारी इकट्ठा करके कॉपी में लिखो।
चिपको आंदोलन के बारे में लिखो — 1970 के दशक में उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) में महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से बचाया था। - समान अर्थ वाले शब्द: धरती, चिड़िया, हवा, पेड़, दुनिया के पर्यायवाची लिखो।
धरती—ज़मीन, पृथ्वी; चिड़िया—पक्षी, पंछी; हवा—वायु, पवन; पेड़—वृक्ष, तरु; दुनिया—संसार, जगत। - जंगल कविता: ‘जंगल’ शीर्षक की कविता (लक्ष्मीनारायण पयोधि) पढ़ो और दोस्तों को सुनाओ। उसका भाव क्या है?
भाव यह है कि जंगल बादलों का प्यार और आदमी का यार है — वह फूल-फल देता है, सबका उपकार करता है, पर मूक रहकर दुश्मनों के वार सहता है। कारखानों के धुएँ से वह बीमार पड़ गया है, और अगर वह इसी तरह कटता रहा तो थार (रेगिस्तान) बन जाएगा।
- कविता: कवि की विनती — थोड़ी धरती पाकर बाग-बगीचा लगाना।
- समस्या: सभ्यता वहशी बनकर पेड़ काट रही है।
- समानता: बच्चे और पेड़ — दोनों दुनिया को हरा-भरा रखते हैं।
- बोनस कविता: ‘जंगल’ (लक्ष्मीनारायण पयोधि) — जंगल आदमी का यार, पर बीमार और कटता हुआ।
- संदेश: पेड़ों को बचाओ, जंगल को बचाओ, धरती को हरा-भरा रखो।
- भाषा: पर्यायवाची (धरती—ज़मीन, पेड़—वृक्ष, हवा—वायु)।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

