Chapter 10: हम धरती के लाल
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Durva Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
हम धरती के लाल हैं — नया संसार बसाएँगे, नया इंसान बनाएँगे, और रोज़ त्योहार मनाएँगे।
हम धरती के लाल — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Durva Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 10 | लेखक/कवि: (पाठ में कवि का नाम नहीं दिया गया है) | माध्यम: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): खेतों में काम करते किसान — सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

फ़सल काटते मज़दूर। श्रम-सम्मान की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
यह कविता धरती के लालों — यानी बच्चों — का गीत है। कवि कहता है कि बच्चे नया संसार बसाएँगे और नया इंसान बनाएँगे।
कविता में आशा और कल्पना का सुंदर मेल है — सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे, और दूध पूत के लिए तारों की चाल बदल दी जाएगी।
सार — अपने शब्दों में
कविता की पहली बात यह है कि कवि नया संसार बसाना चाहता है — जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों और जहाँ सभी सुखी हों। यही नया संसार है।
दूसरी बात यह है कि कवि नया इंसान बनाना चाहता है — ऐसा इंसान जो मेहनती हो, एकता में विश्वास रखता हो, समानता को मानता हो और सबकी खुशी चाहता हो।
तीसरी बात यह है कि कवि रोज़ त्योहार मनाना चाहता है। त्योहार का अर्थ है खुशी और मिलन — रोज़ त्योहार मनाने का अर्थ है रोज़ खुश रहना और सबको खुश रखना।
कविता में कल्पना की उड़ान भी है — सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे, और दूध पूत के लिए तारों की चाल बदल दी जाएगी। ये बातें सचमुच संभव नहीं हैं, पर ये कवि की आशा और विश्वास को बताती हैं — कि अगर हम मेहनत करें, तो दुनिया बदल सकती है।
कवि ‘हम धरती के लाल’ ही क्यों कहना चाहता है? क्योंकि बच्चे धरती के पुत्र हैं — वे धरती पर पैदा हुए हैं, धरती से जुड़े हैं, और धरती का भविष्य उन्हीं के हाथ में है। इसलिए वे ‘धरती के लाल’ हैं।
मुख्य शब्द
- लाल — पुत्र, बेटा, सपूत।
- संसार — दुनिया।
- स्वर — ध्वनि, आवाज़।
- राह — मार्ग, रास्ता, पथ।
- स्वप्न — सपना।
- समता — बराबरी का भाव।
- पूत — पुत्र, बेटा।
- त्योहार — पर्व, उत्सव।
भाषा-बिंदु
- वाक्य बनाओ: ‘सुख-स्वप्नों के स्वर गूँजेंगे’ — इसमें ‘स’ अक्षर बार-बार आया है। नीचे लिखे वर्णों से वाक्य बनाओ (उस वर्ण से शुरू होने वाले तीन शब्द वाक्य में हों): क…, त…, द…। उदाहरण: क — कवि की कल्पना कमाल की है। त — तारों की तरह चमको तुम। द — धरती के दुलारे बच्चे दुनिया बदलेंगे।
- शब्द-सज्जा: ‘हम नया भूगोल बनाएँगे’ — ‘भूगोल’ की जगह और कौन-कौन से शब्द आ सकते हैं? बॉक्स: संसार, कल्पना, इंसान, पौधा, चेतना, ज़माना, दुनिया, इतिहास। उत्तर: हम नया संसार बनाएँगे, हम नयी कल्पना बनाएँगे, हम नया इंसान बनाएँगे, हम नया ज़माना बनाएँगे, हम नयी दुनिया बनाएँगे, हम नया इतिहास बनाएँगे।
- घर की भाषा: नीचे लिखे शब्दों को तुम्हारे घर की भाषा में क्या कहते हैं — देश, धरती, दूध, जनता, त्योहार, इंसान। अपनी घर की भाषा (जैसे भोजपुरी, मैथिली, मगही, हिंदी) में लिखो।
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- “नया संसार बसाएँगे, नया इंसान बनाएँगे” — नया संसार बसाने और नया इंसान बनाने की ज़रूरत है या नहीं, कारण लिखो।
संकेत: सोचो — मेहनत, एकता, समता, सुख। - “रोज़ त्योहार मनाएँगे” — क्या रोज़ त्योहार मनाना उचित है, क्यों?
संकेत: सोचो — खुशी, मिलन। - “सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे; दूध पूत के लिए बदल देंगे तारों की चाल” — क्या ऊपर लिखी बातें संभव हो सकती हैं, कारण भी पता करो।
संकेत: सोचो — कल्पना, आशा। - कवि ‘हम धरती के लाल’ ही क्यों कहना चाहते हैं?
संकेत: सोचो — धरती के पुत्र, भविष्य। - कवि एक नया संसार बसाना चाहता है जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों, जहाँ सभी सुखी हों — तुम्हें अपने संसार में ऊपर लिखी बातें नज़र आती हैं या नहीं, इन बातों के होने या न होने का क्या कारण है?
संकेत: सोचो — अपना संसार।
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- “नया संसार बसाएँगे, नया इंसान बनाएँगे” — नया संसार बसाने और नया इंसान बनाने की ज़रूरत है या नहीं, कारण लिखो।
हाँ, ज़रूरत है। क्योंकि आज के संसार में मेहनत की पूजा कम होती है, जनता में एकता कम है, सब समान नहीं हैं और सभी सुखी नहीं हैं। नया संसार वह होगा जहाँ मेहनत पूजी जाए, एकता हो, समता हो और सभी सुखी हों। नया इंसान वह होगा जो मेहनती, एकता में विश्वास रखनेवाला और सबकी खुशी चाहनेवाला हो। - “रोज़ त्योहार मनाएँगे” — क्या रोज़ त्योहार मनाना उचित है, क्यों?
हाँ, उचित है — अगर त्योहार का अर्थ खुशी और मिलन समझा जाए। रोज़ त्योहार मनाने का अर्थ है रोज़ खुश रहना, सबको खुश रखना और मिल-जुलकर रहना। यह सचमुच के त्योहारों की तरह नहीं, बल्कि खुशी की भावना की तरह है। - “सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे; दूध पूत के लिए बदल देंगे तारों की चाल” — क्या ऊपर लिखी बातें संभव हो सकती हैं, कारण भी पता करो।
नहीं, ये बातें सचमुच संभव नहीं हैं — स्वर्ग ज़मीन पर नहीं उतर सकता, सूरज सोना नहीं बरसा सकता, तारों की चाल नहीं बदली जा सकती। पर ये कवि की आशा और विश्वास को बताती हैं — कि अगर हम मेहनत करें, एकता रखें और समता लाएँ, तो दुनिया इतनी अच्छी हो सकती है कि वह स्वर्ग जैसी लगे। - कवि ‘हम धरती के लाल’ ही क्यों कहना चाहते हैं?
क्योंकि बच्चे धरती के पुत्र हैं — वे धरती पर पैदा हुए हैं, धरती से जुड़े हैं, और धरती का भविष्य उन्हीं के हाथ में है। ‘लाल’ का अर्थ है पुत्र, सपूत। इसलिए कवि बच्चों को ‘धरती के लाल’ कहता है। - कवि एक नया संसार बसाना चाहता है जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों, जहाँ सभी सुखी हों — तुम्हें अपने संसार में ऊपर लिखी बातें नज़र आती हैं या नहीं, इन बातों के होने या न होने का क्या कारण है?
अपने संसार में ये बातें आंशिक रूप से नज़र आती हैं — कुछ जगह मेहनत की पूजा होती है, कुछ जगह एकता है, पर सब जगह नहीं। कारण यह है कि लोगों में स्वार्थ, असमानता और भेदभाव अभी भी है। इन्हें दूर करने के लिए शिक्षा, एकता और समानता की ज़रूरत है।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘अभ्यास’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों (कविता से, वाक्य बनाओ, शब्द-सज्जा, सोचो और बताओ, कैसे, यह भी करो) को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- वाक्य बनाओ: ‘स’ अक्षर से शुरू होने वाले तीन शब्दों से वाक्य बनाओ; ‘क’, ‘त’, ‘द’ से भी।
स — सुख-स्वप्नों के स्वर गूँजेंगे। क — कवि की कल्पना कमाल की है। त — तारों की तरह चमको तुम। द — धरती के दुलारे बच्चे दुनिया बदलेंगे। - शब्द-सज्जा: ‘हम नया भूगोल बनाएँगे’ — ‘भूगोल’ की जगह कौन-कौन से शब्द आ सकते हैं?
संसार, कल्पना, इंसान, पौधा, चेतना, ज़माना, दुनिया, इतिहास — जैसे हम नया संसार बनाएँगे, हम नयी कल्पना बनाएँगे, हम नया इंसान बनाएँगे। - घर की भाषा: देश, धरती, दूध, जनता, त्योहार, इंसान को तुम्हारे घर की भाषा में क्या कहते हैं?
अपनी घर की भाषा में लिखो — जैसे भोजपुरी में देश—देस, धरती—धरती, दूध—दूध, जनता—जनता, त्योहार—तिहार, इंसान—आदमी। - सोचो और बताओ: तुम भी अपने संसार के बारे में कल्पनाएँ ज़रूर करते होंगे — अपने सपनों की दुनिया के बारे में बताओ।
अपने सपनों की दुनिया के बारे में लिखो — कैसी दुनिया होगी, वहाँ क्या होगा, लोग कैसे रहेंगे। - कैसे: बताओ तुम ये काम कैसे करोगे — समय को राह दिखाना; जनता को एक करना; तारों की चाल बदल देना; नया भूगोल बनाना; नया इंसान बनाना।
समय को राह दिखाना: समय का सही उपयोग करके। जनता को एक करना: सबको साथ लेकर, भेदभाव मिटाकर। तारों की चाल बदल देना: यह कल्पना है — मेहनत से असंभव को संभव बनाकर। नया भूगोल बनाना: नयी सोच और नयी व्यवस्था बनाकर। नया इंसान बनाना: अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार देकर। - यह भी करो: ऐसी ही एक और कविता खोजकर कॉपी में लिखो, तुम स्वयं भी कविता की रचना कर सकते हो।
अपनी पसंद की कोई आशा और नया संसार वाली कविता खोजकर लिखो, या खुद चार पंक्तियों की कविता बनाओ।
- कविता: धरती के लालों (बच्चों) का गीत — नया संसार, नया इंसान।
- नया संसार: मेहनत की पूजा, जनता में एकता, समता, सबकी खुशी।
- रोज़ त्योहार: खुशी और मिलन की भावना — रोज़ खुश रहना।
- कल्पना: सौ सौ स्वर्ग, सूरज का सोना बरसाना, तारों की चाल बदलना — आशा का प्रतीक, सचमुच संभव नहीं।
- धरती के लाल: बच्चे धरती के पुत्र हैं, भविष्य उन्हीं के हाथ में है।
- भाषा: एक वर्ण से शुरू होने वाले शब्दों से वाक्य; शब्द-सज्जा (भूगोल की जगह); घर की भाषा।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

