Chapter 6: अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान
अभिवृत्ति की प्रकृति और घटक, अभिवृत्ति निर्माण, अभिवृत्ति परिवर्तन, पूर्वाग्रह और भेदभाव, सामाजिक संज्ञान, छवि निर्माण और आरोपण (attribution)।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में मनोविज्ञान
अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान — EG के अपने शब्दों में सार
Book: मनोविज्ञान (BSEB, Class 12 मनोविज्ञान) | Chapter 6 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
अभिवृत्ति (attitude) किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति हमारे मूल्यांकन का स्थायी प्रतिरूप है — हम किसी चीज़ को पसंद करते हैं या नापसंद। सामाजिक संज्ञान (social cognition) वह प्रक्रिया है जिससे हम दूसरों के व्यवहार को समझते और व्याख्या करते हैं। यह अध्याय बताता है कि अभिवृत्तियाँ कैसे बनती हैं, बदलती हैं और पूर्वाग्रह कैसे पैदा होता है।

चित्र 1: चित्र 1 में अभिवृत्ति के तीन घटकों — संज्ञानात्मक, भावात्मक और व्यवहारिक — का संबंध प्रवाह के रूप में दिखाया गया है।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं; इन्हें याद करके पूरा अध्याय दोहराया जा सकता है।
क्या सीखना है
- अभिवृत्ति के तीन घटक बताना।
- अभिवृत्ति निर्माण के स्रोत समझना।
- अभिवृत्ति परिवर्तन के कारक बताना।
- पूर्वाग्रह और भेदभाव में अंतर करना।
- छवि निर्माण और आरोपण को समझना।
1. अभिवृत्ति की प्रकृति और घटक
अभिवृत्ति के तीन घटक होते हैं: संज्ञानात्मक (किसी वस्तु के बारे में विचार और विश्वास), भावात्मक (उसके प्रति भावनाएँ — पसंद या नापसंद) और व्यवहारिक (उसके प्रति कार्य करने की प्रवृत्ति)। जैसे, पर्यावरण के प्रति अभिवृत्ति में यह विश्वास (प्रदूषण हानिकारक है), भावना (चिंता) और व्यवहार (पेड़ लगाना) — तीनों शामिल हो सकते हैं।
अभिवृत्तियाँ अपेक्षाकृत स्थायी होती हैं, पर बदली जा सकती हैं। वे हमें तेज़ी से निर्णय लेने में मदद करती हैं — हर बार हर चीज़ के बारे में नए सिरे से सोचने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
2. अभिवृत्ति निर्माण
अभिवृत्तियाँ कई स्रोतों से बनती हैं: प्रत्यक्ष अनुभव (किसी वस्तु का स्वयं अनुभव), परिवार और मित्रों का प्रभाव, सामाजिक अधिगम (दूसरों को देखकर सीखना) और संचार माध्यम (समाचार, विज्ञापन, सोशल मीडिया)। बचपन में परिवार का प्रभाव सबसे अधिक होता है; बाद में मित्र और माध्यम अधिक प्रभाव डालते हैं।
एक बार बनी अभिवृत्ति नई जानकारी के प्रति चयनात्मक हो जाती है — हम अपनी अभिवृत्ति के अनुरूप जानकारी पर अधिक ध्यान देते हैं और विरोधी जानकारी को अनदेखा कर देते हैं। यही कारण है कि अभिवृत्तियाँ बदलना कठिन होता है।
3. अभिवृत्ति परिवर्तन
अभिवृत्ति परिवर्तन दो तरह से होता है: केंद्रीय मार्ग (central route) — जब व्यक्ति तर्क और तथ्यों पर ध्यान देकर अभिवृत्ति बदलता है; और परिधीय मार्ग (peripheral route) — जब व्यक्ति संदेश देने वाले की आकर्षकता या भावनात्मक अपील से प्रभावित होकर बदलता है। केंद्रीय मार्ग से हुआ परिवर्तन अधिक स्थायी होता है।
संज्ञानात्मक विसंगति (cognitive dissonance) भी अभिवृत्ति बदलती है — जब व्यक्ति के विचार और व्यवहार में विरोध होता है, तो वह असहज महसूस करता है और विरोध कम करने के लिए अपनी अभिवृत्ति बदल लेता है। जैसे, धूम्रपान करने वाला व्यक्ति 'धूम्रपान उतना हानिकारक नहीं है' मानने लग सकता है।
4. पूर्वाग्रह और भेदभाव
पूर्वाग्रह (prejudice) किसी समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति है — बिना पर्याप्त जानकारी के पूरे समूह के बारे में नकारात्मक धारणा। भेदभाव (discrimination) पूर्वाग्रह का व्यवहारिक रूप है — किसी समूह के साथ अनुचित व्यवहार करना। पूर्वाग्रह विचार है, भेदभाव क्रिया है।
पूर्वाग्रह के कारण हैं: सामाजिक अधिगम, समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा, बलि का बकरा बनाना (अपनी निराशा का दोष किसी कमज़ोर समूह पर डालना) और आत्म-सम्मान बढ़ाने के लिए अपने समूह को श्रेष्ठ मानना। पूर्वाग्रह कम करने के उपाय हैं: समूहों के बीच संपर्क, समान लक्ष्य के लिए सहयोग और शिक्षा।
5. सामाजिक संज्ञान: छवि निर्माण और आरोपण
छवि निर्माण (impression formation) वह प्रक्रिया है जिससे हम दूसरों के बारे में धारणा बनाते हैं। इसमें प्रथम छवि (primacy effect) महत्वपूर्ण होती है — पहली जानकारी का प्रभाव अधिक होता है। प्रभामंडल प्रभाव (halo effect) में एक गुण के आधार पर व्यक्ति के बारे में सामान्य धारणा बना ली जाती है — जैसे, सुंदर व्यक्ति को अच्छा भी मान लेना।
आरोपण (attribution) वह प्रक्रिया है जिससे हम दूसरों के व्यवहार के कारण बताते हैं — आंतरिक कारण (व्यक्ति का गुण) या बाहरी कारण (परिस्थिति)। मूलभूत आरोपण त्रुटि (fundamental attribution error) में हम दूसरों के व्यवहार का कारण उनके गुणों को मान लेते हैं और परिस्थिति को अनदेखा कर देते हैं — जैसे, देर से आने वाले को 'लापरवाह' मान लेना, ट्रैफिक को अनदेखा करके।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| अभिवृत्ति के घटक | संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारिक |
| केंद्रीय मार्ग | तर्क और तथ्यों से परिवर्तन (स्थायी) |
| परिधीय मार्ग | आकर्षकता/भावना से परिवर्तन (अस्थायी) |
| संज्ञानात्मक विसंगति | विचार-व्यवहार विरोध से असहजता |
| पूर्वाग्रह | समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति (विचार) |
| भेदभाव | समूह के साथ अनुचित व्यवहार (क्रिया) |

चित्र 3: चित्र 3 में अध्याय का मानचित्र दिया गया है — अभिवृत्ति से लेकर आरोपण तक।
मुख्य शब्द / Key Terms
- अभिवृत्ति: किसी वस्तु/व्यक्ति के प्रति मूल्यांकन का स्थायी प्रतिरूप
- पूर्वाग्रह: किसी समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति
- भेदभाव: किसी समूह के साथ अनुचित व्यवहार
- आरोपण: व्यवहार के कारण बताने की प्रक्रिया
- प्रभामंडल प्रभाव: एक गुण के आधार पर सामान्य धारणा बनाना
याद रखें
- अभिवृत्ति के 3 घटक: संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारिक।
- केंद्रीय मार्ग = तर्क से, स्थायी; परिधीय मार्ग = भावना से, अस्थायी।
- पूर्वाग्रह = विचार; भेदभाव = क्रिया।
- प्रथम छवि का प्रभाव अधिक होता है।
- मूलभूत आरोपण त्रुटि: दूसरों के व्यवहार का कारण गुण मानना।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: पूर्वाग्रह और भेदभाव को एक समझ लेना। पूर्वाग्रह मन में है (नकारात्मक धारणा); भेदभाव व्यवहार में है (अनुचित क्रिया)। पूर्वाग्रह हो पर भेदभाव न हो, यह संभव है — और भेदभाव बिना पूर्वाग्रह के भी हो सकता है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- अभिवृत्ति के तीन घटक लिखिए। संकेत: संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारिक।
- केंद्रीय और परिधीय मार्ग में अंतर बताइए। संकेत: तर्क से स्थायी परिवर्तन बनाम भावना से अस्थायी परिवर्तन।
- संज्ञानात्मक विसंगति क्या है? संकेत: विचार-व्यवहार विरोध से असहजता।
- पूर्वाग्रह और भेदभाव में अंतर बताइए। संकेत: विचार बनाम क्रिया।
- मूलभूत आरोपण त्रुटि क्या है? संकेत: दूसरों के व्यवहार का कारण गुण मानना, परिस्थिति अनदेखा करना।
मुख्य प्रश्न — उत्तर सहित (Core Q&A)
- अभिवृत्ति किसे कहते हैं? इसके घटक बताइए। उत्तर: किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति मूल्यांकन का स्थायी प्रतिरूप। घटक: संज्ञानात्मक (विचार), भावात्मक (भावना) और व्यवहारिक (कार्य की प्रवृत्ति)।
- अभिवृत्तियाँ कैसे बनती हैं? उत्तर: प्रत्यक्ष अनुभव, परिवार और मित्रों का प्रभाव, सामाजिक अधिगम और संचार माध्यमों से।
- केंद्रीय और परिधीय मार्ग में अंतर बताइए। उत्तर: केंद्रीय मार्ग में तर्क और तथ्यों से अभिवृत्ति बदलती है और परिवर्तन स्थायी होता है; परिधीय मार्ग में आकर्षकता या भावनात्मक अपील से परिवर्तन होता है और वह अस्थायी होता है।
- संज्ञानात्मक विसंगति क्या है? उदाहरण दीजिए। उत्तर: विचार और व्यवहार में विरोध से असहजता। जैसे, धूम्रपान करने वाला 'धूम्रपान उतना हानिकारक नहीं है' मानकर विसंगति कम करता है।
- पूर्वाग्रह और भेदभाव में अंतर बताइए। उत्तर: पूर्वाग्रह किसी समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति (विचार) है; भेदभाव उस अभिवृत्ति के आधार पर अनुचित व्यवहार (क्रिया) है।
- पूर्वाग्रह के कारण बताइए। उत्तर: सामाजिक अधिगम, समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा, बलि का बकरा बनाना और अपने समूह को श्रेष्ठ मानकर आत्म-सम्मान बढ़ाना।
- पूर्वाग्रह कम करने के उपाय बताइए। उत्तर: समूहों के बीच संपर्क, समान लक्ष्य के लिए सहयोग और शिक्षा।
- छवि निर्माण में प्रथम छवि का क्या महत्व है? उत्तर: पहली जानकारी का प्रभाव अधिक होता है — बाद की जानकारी को उसी के प्रकाश में देखा जाता है।
- प्रभामंडल प्रभाव क्या है? उदाहरण दीजिए। उत्तर: एक गुण के आधार पर व्यक्ति के बारे में सामान्य धारणा बनाना — जैसे, सुंदर व्यक्ति को अच्छा मान लेना।
- मूलभूत आरोपण त्रुटि क्या है? उत्तर: दूसरों के व्यवहार का कारण उनके गुणों को मान लेना और परिस्थिति को अनदेखा कर देना।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड परीक्षा की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- एक विज्ञापन में प्रसिद्ध अभिनेता उत्पाद की प्रशंसा करता है। यह कौन-सा मार्ग है? उत्तर: परिधीय मार्ग — आकर्षकता से प्रभावित होकर अभिवृत्ति बदलना।
- एक व्यक्ति धूम्रपान करता है पर कहता है 'धूम्रपान से कुछ नहीं होता।' यह क्या है? उत्तर: संज्ञानात्मक विसंगति को कम करने का प्रयास।
- एक छात्र देर से आया। शिक्षक ने उसे 'लापरवाह' मान लिया, ट्रैफिक को अनदेखा करके। यह क्या है? उत्तर: मूलभूत आरोपण त्रुटि।
- एक व्यक्ति किसी समुदाय के बारे में नकारात्मक सोच रखता है पर उनके साथ बुरा व्यवहार नहीं करता। यह पूर्वाग्रह है या भेदभाव? उत्तर: पूर्वाग्रह है — विचार है, क्रिया नहीं।
- दो समूहों के बीच पूर्वाग्रह कम करने का एक उपाय बताइए। उत्तर: समान लक्ष्य के लिए दोनों समूहों का सहयोग।
पुस्तक के अभ्यास — प्रश्न दर प्रश्न (Extension Q&A)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास की अवधारणाओं पर EG के अपने शब्दों में बनाए गए अभ्यास हैं — ये पुस्तक के प्रश्नों की शब्दशः नकल नहीं हैं।
- अभिवृत्तियाँ बदलना कठिन क्यों होता है? उत्तर: क्योंकि हम अपनी अभिवृत्ति के अनुरूप जानकारी पर अधिक ध्यान देते हैं और विरोधी जानकारी को अनदेखा कर देते हैं।
- बलि का बकरा बनाना क्या है? उत्तर: अपनी निराशा का दोष किसी कमज़ोर समूह पर डालना।
- आरोपण में आंतरिक और बाहरी कारण का एक-एक उदाहरण दीजिए। उत्तर: आंतरिक: 'वह आलसी है'; बाहरी: 'ट्रैफिक था'।
- सामाजिक संज्ञान किसे कहते हैं? उत्तर: दूसरों के व्यवहार को समझने और व्याख्या करने की प्रक्रिया।
- अभिवृत्ति और व्यवहार में हमेशा संबंध क्यों नहीं होता? उत्तर: क्योंकि परिस्थिति, सामाजिक दबाव और अभिवृत्ति की शक्ति भी व्यवहार को प्रभावित करती है।
विस्तार — ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘अभिवृत्ति:’ और ‘पूर्वाग्रह:’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- अभिवृत्ति: — ‘अभिवृत्ति:’ का अर्थ है — अभिवृत्ति: किसी वस्तु/व्यक्ति के प्रति मूल्यांकन का स्थायी प्रतिरूप। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- पूर्वाग्रह: — ‘पूर्वाग्रह:’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — पूर्वाग्रह: किसी समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- भेदभाव: — ‘भेदभाव:’ — भेदभाव: किसी समूह के साथ अनुचित व्यवहार। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- आरोपण: — ‘आरोपण:’ का सामान्य अर्थ है — आरोपण: व्यवहार के कारण बताने की प्रक्रिया। परंतु ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- प्रभामंडल प्रभाव: — ‘प्रभामंडल प्रभाव:’ का अर्थ है — प्रभामंडल प्रभाव: एक गुण के आधार पर सामान्य धारणा बनाना। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
सामाजिक विज्ञान के इस अध्याय को कारण-प्रभाव से समझें
सामाजिक विज्ञान के अध्यायों में घटनाओं, संस्थाओं और प्रक्रियाओं के बीच कारण और प्रभाव का संबंध सबसे महत्त्वपूर्ण होता है। पढ़ते समय प्रत्येक तथ्य के साथ यह पूछें — इसका कारण क्या था, इसका प्रभाव क्या पड़ा, और इससे किस वर्ग या समुदाय पर क्या असर हुआ? कारण, प्रभाव और प्रभावित वर्ग — ये तीन बिंदु मिलकर किसी भी सामाजिक प्रश्न का पूरा ढाँचा बना देते हैं।
तिथियों, नामों और परिभाषाओं को अलग-अलग रटने की अपेक्षा उन्हें कहानी के क्रम में जोड़कर पढ़ें। पहले पृष्ठभूमि समझें, फिर मुख्य घटना या प्रक्रिया, फिर उसके परिणाम, और अंत में उसका दीर्घकालिक महत्त्व। इस क्रम से पढ़ने पर तिथियाँ और नाम भी अपने स्थान पर याद रहते हैं, क्योंकि वे किसी कहानी की कड़ियाँ बन जाते हैं, अलग-अलग टुकड़े नहीं।
उत्तर लिखते समय भूमिका में विषय का एक वाक्य का परिचय दें, मुख्य भाग में दो-तीन बिंदु क्रम से लिखें, और निष्कर्ष में एक पंक्ति का महत्त्व जोड़ें। बिंदुओं को ‘पहला, दूसरा, तीसरा’ के क्रम में लिखने से उत्तर स्पष्ट और परीक्षक के लिए जाँचने में आसान बनता है। साथ ही, जहाँ संभव हो, एक तुलना या एक उदाहरण अवश्य जोड़ें — तुलना से समझ की गहराई दिखती है।
परीक्षा में कैसे लिखें — उत्तर-लेखन की कला
‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ जैसे पाठों पर प्रश्न प्रायः तीन प्रकार के आते हैं — सीधा तथ्य या परिभाषा पूछने वाले, केंद्रीय भाव या कारण पूछने वाले, और अपने शब्दों में सार या मत पूछने वाले। तीनों के उत्तर की संरचना एक ही है: भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष। भूमिका में एक वाक्य में विषय का परिचय दें — पाठ किस बारे में है। मुख्य भाग में दो से चार बिंदु क्रम से लिखें — प्रत्येक बिंदु एक अलग तर्क, उदाहरण या परिणाम हो। निष्कर्ष में एक वाक्य में पाठ का संदेश या महत्त्व लिखें।
अंकों के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें। एक-दो अंक के प्रश्न में केवल परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है। तीन-चार अंक के प्रश्न में परिभाषा के साथ प्रसंग और एक-दो परिणाम जोड़ें। पाँच अंक के लंबे प्रश्न में भूमिका, तीन-चार बिंदु, एक तुलना या उदाहरण, और निष्कर्ष — सब कुछ होना चाहिए। उत्तर को अनुच्छेदों में बाँटें; एक ही लंबे अनुच्छेद में सब कुछ लिख देने से उत्तर भले ही सही हो, परंतु पढ़ने में कठिन लगता है।
उत्तर में पाठ के मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, परंतु मूल पाठ की पंक्तियों की नकल न करें। परीक्षक यह देखना चाहता है कि आपने समझा है — और समझ अपने शब्दों में ही दिखती है। उत्तर लिखने के बाद उसे एक बार पढ़कर देखें: क्या पहला वाक्य प्रश्न का सीधा उत्तर देता है? क्या बिंदु क्रम में हैं? क्या अंतिम वाक्य निष्कर्ष देता है? यदि तीनों उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो उत्तर पूरा है।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘अभिवृत्ति:’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘अभिवृत्ति:’ का अर्थ है — अभिवृत्ति: किसी वस्तु/व्यक्ति के प्रति मूल्यांकन का स्थायी प्रतिरूप। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘पूर्वाग्रह:’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘पूर्वाग्रह:’ का अर्थ है — पूर्वाग्रह: किसी समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘भेदभाव:’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘भेदभाव:’ का अर्थ है — भेदभाव: किसी समूह के साथ अनुचित व्यवहार। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘आरोपण:’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘आरोपण:’ का अर्थ है — आरोपण: व्यवहार के कारण बताने की प्रक्रिया। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘प्रभामंडल प्रभाव:’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘प्रभामंडल प्रभाव:’ का अर्थ है — प्रभामंडल प्रभाव: एक गुण के आधार पर सामान्य धारणा बनाना। ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है। - ‘अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान’ का सार बिना पुस्तक देखे कैसे लिखें?
पहले केंद्रीय भाव एक वाक्य में कहें, फिर मुख्य शब्दों को क्रम से याद करें और प्रत्येक शब्द से जुड़ा एक प्रसंग मन में लाएँ। फिर उन प्रसंगों को अपने शब्दों में पाँच-सात वाक्यों में जोड़ दें। जहाँ अटकें, वहीं समझ अधूरी है — उस अंश को दोबारा पढ़ें और फिर से लिखें। दो-तीन बार इस अभ्यास से सार बिना देखे भी पूरा लिखा जा सकेगा।
Recap — दोहराव
- अभिवृत्ति के 3 घटक: संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारिक।
- केंद्रीय मार्ग = तर्क से, स्थायी।
- पूर्वाग्रह = विचार; भेदभाव = क्रिया।
- प्रथम छवि का प्रभाव अधिक।
- मूलभूत आरोपण त्रुटि: गुण को कारण मानना।

