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Class 11 • Physics • Bhautiki Bhag-2

Chapter 9: तरलों के यांत्रिकी गुण

दाब, पास्कल का नियम, बरनूली सिद्धांत, श्यानता, पृष्ठ तनाव और केशिकत्व — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print: browser से PDF save कर सकते हैं। यह कोई textbook PDF नहीं है।

तरलों के यांत्रिकी गुण — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics)  |  Chapter 9  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

दाब और पास्कल का नियम

तरल में दाब प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है। गहराई बढ़ने पर दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh।

पास्कल का नियम कहता है कि बंद तरल में दाब सभी दिशाओं में समान रूप से फैलता है। इसी पर हाइड्रॉलिक लिफ्ट और ब्रेक काम करते हैं।

उत्प्लावन और आर्किमिडीज़ का सिद्धांत

तरल में डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है, जो हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।

यदि वस्तु का घनत्व तरल से अधिक हो, तो वह डूबेगी; कम हो तो तैरेगी। जहाज़ का खोखला आकार उसके औसत घनत्व को कम करके तैरना संभव बनाता है।

श्यानता और बरनौली का सिद्धांत

श्यानता तरल के बहने के प्रति आंतरिक घर्षण है — शहद पानी से अधिक श्यान होता है। ताप बढ़ने पर तरल की श्यानता घटती है।

बरनौली का सिद्धांत कहता है कि जहाँ तरल की चाल अधिक होती है, वहाँ दाब कम होता है। हवाई जहाज़ के पंख की आकृति इसी से उत्थापन पैदा करती है। पृष्ठ तनाव तरल की सतह को सिकुड़ी झिल्ली जैसा बनाता है।

इस अध्याय का विचार: तरल (द्रव और गैस) अपना आकार नहीं बनाए रखते, पर आयतन बनाए रखते हैं (द्रव) या फैल जाते हैं (गैस)। इन्हीं गुणों से दाब का संचरण, उत्प्लावन, बरनूली का सिद्धांत, श्यानता और पृष्ठ तनाव की पूरी भौतिकी बनती है — हवाई जहाज़ के उठान से लेकर रक्तचाप तक।

पुस्तक की संरचना: अध्याय दाब और पास्कल के नियम से शुरू होकर धारा-रेखीय प्रवाह, बरनूली समीकरण, श्यानता और स्टोक्स नियम, पृष्ठ तनाव, केशिकत्व और वायुमंडलीय दाब के नियम तक जाता है।

10.1–10.2 दाब और पास्कल का नियम

दाब = बल/क्षेत्रफल; द्रवस्थैतिक दाब किसी बिंदु पर सभी दिशाओं में समान होता है — इसलिए दाब अदिश राशि है, भले ही इसकी परिभाषा में बल (सदिश) आता हो। पास्कल का नियम: किसी परिबद्ध द्रव पर लगाया गया दाब बिना घटे सभी दिशाओं में संचरित होता है — हाइड्रॉलिक लिफ्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं। गहराई के साथ दाब बढ़ता है: p = p₀ + ρgh।

10.3–10.4 धारा-रेखीय प्रवाह और सांतत्य समीकरण

स्थायी (धारा-रेखीय) प्रवाह में किसी बिंदु से गुजरने वाले सभी कण एक ही पथ (धारा-रेखा) का अनुसरण करते हैं; धारा-रेखाएँ एक-दूसरे को काट नहीं सकतीं (किसी बिंदु पर वेग की दो दिशाएँ असंभव हैं)। सांतत्य समीकरण: Av = नियत — संकीर्णन पर वेग बढ़ता है। विक्षुब्ध प्रवाह (नदी की क्षिप्रिका) में बरनूली समीकरण लागू नहीं होता।

10.5–10.6 बरनूली समीकरण

बरनूली समीकरण: p + ½ρv² + ρgh = नियत (स्थायी, असंपीड्य, अश्यान प्रवाह के लिए)। जहाँ वेग अधिक, वहाँ दाब कम — यही हवाई जहाज़ के पंखों का उठान, कागज़ का ऊपर उठना और स्प्रे पंप का सिद्धांत है। निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज दाब) इस्तेमाल करने से कोई अंतर नहीं पड़ता, क्योंकि समीकरण में केवल दाब-अंतर आते हैं।

10.7–10.8 श्यानता और स्टोक्स नियम

श्यानता तरल के प्रवाह के प्रति आंतरिक घर्षण है: गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर बढ़ती है, द्रवों की घटती है। प्वाज़ॉय समीकरण से नली में प्रवाह-दर Δp, त्रिज्या की चौथी घात के अनुक्रमानुपाती होती है। स्टोक्स नियम: F = 6πηrv — इसी से मिलिकन प्रयोग में तेल की बूँद की सीमांत चाल और धमनियों में रक्त-प्रवाह की अधिकतम चाल निकलती है।

10.9–10.11 पृष्ठ तनाव और केशिकत्व

पृष्ठ तनाव = प्रति इकाई लंबाई बल (या प्रति इकाई क्षेत्रफल ऊर्जा) — द्रव अपना पृष्ठीय क्षेत्रफल न्यूनतम करना चाहता है, इसलिए बाह्य बल न हो तो बूँद गोलाकार होती है। बूँद के भीतर दाब-आधिक्य = 2S/r; बुलबुले (दो पृष्ठ) में = 4S/r। केशिका में उत्थान/अवनमन h = 2S·cos θ/(rρg) — स्पर्श कोण न्यूनकोण हो तो उत्थान, अधिककोण हो तो अवनमन (पारा)।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

सिद्धांतकथन
पास्कलदाब सभी दिशाओं में समान फैलता है
आर्किमिडीज़उत्प्लावन = हटाए गए तरल का भार
बरनौलीअधिक चाल = कम दाब

तरलों के यांत्रिकी गुण — दाब और प्रवाह

चित्र 1: चित्र 1 में तरल के चार मुख्य गुण क्रम से दिखाए गए हैं।

तरलों के यांत्रिकी गुण — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

बरनूली सिद्धांत: संकीर्णन पर चाल अधिक, दाब कम

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बरनूली सिद्धांत: संकीर्णन पर चाल अधिक, दाब कम

मुख्य शब्द / Key Terms

  • दाब: प्रति इकाई क्षेत्रफल बल।
  • उत्प्लावन: तरल द्वारा ऊपर की ओर बल।
  • श्यानता: बहने के प्रति आंतरिक घर्षण।
  • पृष्ठ तनाव: सतह के सिकुड़ने की प्रवृत्ति।
  • धारा रेखीय प्रवाह: स्थिर, परतदार प्रवाह।
  • दाब: p = F/A; द्रव में p = p₀ + ρgh; पास्कल का नियम — परिबद्ध द्रव में दाब का समान संचरण।
  • बरनूली: p + ½ρv² + ρgh = नियत; वेग अधिक → दाब कम (उठान का सिद्धांत)।
  • श्यानता: गैस: ताप ↑ तो η ↑; द्रव: ताप ↑ तो η ↓; स्टोक्स बल F = 6πηrv।
  • पृष्ठ तनाव: S = बल/लंबाई; बूँद में 2S/r, बुलबुले में 4S/r का दाब-आधिक्य।
  • केशिकत्व: h = 2S·cos θ/(rρg); स्पर्श कोण ही उत्थान या अवनमन तय करता है।

याद रखें

  • गहराई के साथ दाब ρgh से बढ़ता है।
  • तैरने की शर्त घनत्व की तुलना से तय होती है।
  • श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है।
  • बरनौली में चाल अधिक होने पर दाब कम होता है।
  • पृष्ठ तनाव से छोटी बूँदें गोल बनती हैं।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: उत्प्लावन को वस्तु के भार के बराबर मान लेना। उत्प्लावन हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है, वस्तु के भार के बराबर नहीं।

जानकारी — दाब अदिश क्यों है

दाब को बल/क्षेत्रफल से परिभाषित किया जाता है, फिर भी यह अदिश है — क्योंकि किसी बिंदु पर द्रव का दाब सभी दिशाओं में समान होता है। बल की दिशा तल के अभिलंब से तय होती है, दाब की अपनी कोई दिशा नहीं होती।

चेतावनी — बरनूली हर प्रवाह में नहीं

बरनूली समीकरण केवल स्थायी, असंपीड्य और अश्यान प्रवाह के लिए है। नदी की क्षिप्रिका (विक्षुब्ध प्रवाह), श्यान प्रवाह में क्षयकारी बलों के साथ, और संपीड्य गैसों के तेज़ प्रवाह में यह सीधे लागू नहीं होता।

टिप — प्रमापी दाब बनाम निरपेक्ष दाब

बरनूली समीकरण और U-नली के प्रश्नों में निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब इस्तेमाल करने से उत्तर नहीं बदलता — क्योंकि हर जगह वायुमंडलीय दाब एक ही नियतांक जुड़ता है और अंतरों में निरस्त हो जाता है।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. दाब का सूत्र लिखिए। संकेत: P = F/A।
  2. पास्कल का नियम क्या है? संकेत: बंद तरल में दाब सभी दिशाओं में समान फैलता है।
  3. आर्किमिडीज़ का सिद्धांत बताइए। संकेत: उत्प्लावन = हटाए गए तरल का भार।
  4. बरनौली का सिद्धांत क्या है? संकेत: अधिक चाल वाली जगह दाब कम होता है।
  5. श्यानता किसे कहते हैं? संकेत: तरल के बहने के प्रति आंतरिक घर्षण को।

मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A

  1. पैरों पर रक्तचाप मस्तिष्क की अपेक्षा अधिक क्यों होता है? उत्तर: पैर हृदय से लगभग 1.5 m नीचे हैं — रक्त स्तंभ का भार (ρgh) वहाँ दाब बढ़ा देता है; मस्तिष्क हृदय से ऊपर है, इसलिए वहाँ दाब कम है।
  2. 6 km पर वायुमंडलीय दाब आधा क्यों हो जाता है, जबकि वायुमंडल 100 km से ऊपर तक है? उत्तर: वायु का घनत्व ऊँचाई के साथ चरघातांकी रूप से घटता है — अधिकांश वायु-द्रव्यमान निचली परतों में ही है।
  3. बरनूली सिद्धांत से हवाई जहाज़ कैसे उठता है? उत्तर: पंख के ऊपर वायु तेज़ चलती है (दाब कम), नीचे धीमी (दाब अधिक) — यही दाब-अंतर उठान बल देता है।
  4. बिना बाह्य बल के द्रव की बूँद गोलाकार क्यों होती है? उत्तर: पृष्ठ तनाव पृष्ठीय क्षेत्रफल को न्यूनतम करना चाहता है; दिए गए आयतन के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल गोले का होता है।
  5. पारे की नली में स्तर नीचे क्यों जाता है, जबकि जल की नली में ऊपर चढ़ता है? उत्तर: स्पर्श कोण के कारण — जल-काँच का कोण न्यूनकोण (आसंजन > संसंजन) है, पारा-काँच का अधिककोण (संसंजन > आसंजन) है।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. लोहे की कील डूबती है पर जहाज़ क्यों तैरता है? उत्तर: जहाज़ का खोखला आकार औसत घनत्व को पानी से कम कर देता है।
  2. हाइड्रॉलिक लिफ्ट किस नियम पर काम करती है? उत्तर: पास्कल के नियम पर।
  3. हवाई जहाज़ के पंख पर उत्थापन कैसे बनता है? उत्तर: ऊपर की हवा तेज़ चलती है, दाब कम होता है, नीचे का अधिक दाब ऊपर धकेलता है।
  4. ताप बढ़ने पर शहद पतला क्यों हो जाता है? उत्तर: क्योंकि श्यानता घट जाती है।
  5. पानी की बूँद गोल क्यों होती है? उत्तर: पृष्ठ तनाव सतह का क्षेत्रफल कम से कम करना चाहता है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।

  1. 10.1 (a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव के पैरों पर रक्तचाप अधिक होता है, क्योंकि पैर हृदय से लगभग 1.5 m नीचे हैं — रक्त स्तंभ का भार (ρgh) वहाँ दाब बढ़ा देता है, जबकि मस्तिष्क हृदय से ऊपर है। (b) 6 km ऊँचाई पर वायुमंडलीय दाब समुद्र तल के दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमंडल का विस्तार 100 km से अधिक ऊँचाई तक है — क्योंकि वायु का घनत्व ऊँचाई के साथ चरघातांकी रूप से घटता है; अधिकांश वायु-द्रव्यमान निचली परतों में ही है, इसलिए ऊपर का भार तेज़ी से घटता है। (c) यद्यपि दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है, तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है — किसी बिंदु पर दाब सभी दिशाओं में समान होता है, इसकी अपनी कोई दिशा नहीं होती।
  2. 10.2 (a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिककोण होता है, जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है — क्योंकि पारे में संसंजन (पारे-पारे के बीच आकर्षण) आसंजन (पारा-काँच) से अधिक है, जबकि जल में आसंजन संसंजन से अधिक है। (b) काँच की स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है (काँच को गीला कर देता है), जबकि पारा बूँदें बनाने का प्रयास करता है — यही आसंजन-संसंजन का अंतर है। (c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता — यह प्रति इकाई लंबाई बल है, पृष्ठ की विमा से स्वतंत्र। (d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए — अपमार्जक पृष्ठ तनाव घटाकर जल को फैलने और रेशों के बीच घुसने में सहायता करते हैं। (e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है — पृष्ठ तनाव क्षेत्रफल को न्यूनतम करना चाहता है और दिए गए आयतन के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल गोले का होता है।
  3. 10.3 (a) व्यापक रूप से द्रवों का पृष्ठ तनाव ताप बढ़ने पर घटता है। (b) गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर बढ़ती है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है। (c) दृढ़ प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल अपरूपण विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह अपरूपण विकृति की दर के अनुक्रमानुपाती होता है। (d) किसी तरल के अविरत प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धि में संहति के संरक्षण (सांतत्य समीकरण) का अनुसरण होता है। (e) किसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रांतिक चाल की तुलना में अधिक होती है (रेनॉल्ड्स संख्या समान रखने के लिए छोटे मॉडल को अधिक चाल चाहिए)।
  4. 10.4 (a) किसी कागज़ की पट्टी को क्षैतिज रखने के लिए आपको उस कागज़ पर ऊपर की ओर हवा फूँकनी चाहिए, नीचे की ओर नहीं — ऊपर की वायु तेज़ चलकर दाब घटा देती है, जिससे कागज़ ऊपर उठता है। (b) जब हम किसी जल टोंटी को अपनी उँगलियों द्वारा बंद करने का प्रयास करते हैं, तो उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं — सांतत्य समीकरण से संकीर्ण मार्ग में चाल बढ़ जाती है। (c) इंजेक्शन लगाते समय डॉक्टर के अँगूठे द्वारा आरोपित दाब की अपेक्षा सुई का आकार दवाई की बहिर्वाही धारा को अधिक अच्छा नियंत्रित करता है — छोटा छिद्र प्रवाह-दर को सीमित करता है और समान बल छोटे क्षेत्रफल पर अधिक दाब देता है। (d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तरल उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है — संवेग संरक्षण (रॉकेट सिद्धांत)। (e) कोई प्रचक्रण क्रिकेट गेंद वायु में परवलीय प्रपथ का अनुसरण नहीं करती — मैग्नस प्रभाव: चक्रण से गेंद के दोनों ओर वायु की चाल भिन्न हो जाती है, दाब-अंतर पार्श्व बल पैदा करता है और पथ मुड़ जाता है।
  5. 10.5 ऊँची एड़ी के जूते पहने 50 kg भार की बालिका अपने शरीर को 1.0 cm व्यास की एक ही वृत्ताकार एड़ी पर संतुलित किए हुए है: एड़ी का क्षेत्रफल = π×(0.005)² ≈ 7.85×10⁻⁵ m²; क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब = 500/7.85×10⁻⁵ ≈ 6.4×10⁶ Pa।
  6. 10.6 टॉरिसेली के वायुदाब मापी में पारे का उपयोग किया गया था; पास्कल ने 984 kg/m³ घनत्व की फ्रेंच शराब का उपयोग करके ऐसा ही वायुदाब मापी बनाया: सामान्य वायुमंडलीय दाब के लिए शराब-स्तंभ की ऊँचाई = 1.013×10⁵/(984×9.8) ≈ 10.5 m।
  7. 10.7 समुद्र तट से दूर कोई ऊर्ध्व संरचना 10⁹ Pa के अधिकतम प्रतिबल को सहन करने के लिए बनाई गई है; महासागर की गहराई लगभग 3 km है: तल पर दाब = ρgh ≈ 1.03×10³×9.8×3000 ≈ 3.0×10⁷ Pa, जो 10⁹ Pa से बहुत कम है — अतः यह संरचना महासागर के भीतर किसी तेल कूप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त है (समुद्री धाराओं की उपेक्षा करके)।
  8. 10.8 द्रवचालित ऑटोमोबाइल लिफ्ट अधिकतम 3000 kg की कारों को उठाने के लिए बनाई गई है; बोझ उठाने वाले पिस्टन के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 425 cm² है: पिस्टन पर दाब = 30,000/0.0425 ≈ 7.06×10⁵ Pa — पास्कल के नियम से छोटे पिस्टन को भी यही अधिकतम दाब ≈ 7.1×10⁵ Pa सहन करना होगा।
  9. 10.9 U-नली की दोनों भुजाओं में भरे जल तथा मेथिलेटिड स्पिरिट को पारा एक-दूसरे से पृथक् करता है; जब जल तथा पारे के स्तंभ क्रमशः 10 cm तथा 12.5 cm ऊँचे हैं, तो दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है: ρ_स्पिरिट × 12.5 = ρ_जल × 10 → स्पिरिट का आपेक्षिक घनत्व = 10/12.5 = 0.8।
  10. 10.10 प्रश्न 10.9 की समस्या में, U-नली की दोनों भुजाओं में इन्हीं दोनों द्रवों को और उड़ेलकर दोनों द्रवों के स्तंभों की ऊँचाई 15 cm और बढ़ा दी जाएँ (जल 25 cm, स्पिरिट 27.5 cm): दोनों भुजाओं में पारे के स्तरों का अंतर Δh = (25 − 0.8×27.5)/13.6 = 3/13.6 ≈ 0.22 cm होगा।
  11. 10.11 नहीं — बरनूली समीकरण का उपयोग किसी नदी की किसी क्षिप्रिका के जल-प्रवाह का विवरण देने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि वहाँ प्रवाह विक्षुब्ध (अस्थायी, भँवरयुक्त) होता है; बरनूली समीकरण के लिए स्थायी, धारा-रेखीय, असंपीड्य और अश्यान प्रवाह आवश्यक है।
  12. 10.12 नहीं — बरनूली समीकरण के अनुप्रयोग में यदि निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज़ दाब) का प्रयोग करें, तो इससे कोई अंतर नहीं पड़ेगा, क्योंकि समीकरण में केवल दाब-अंतर आते हैं और वायुमंडलीय दाब का नियतांक उनमें निरस्त हो जाता है।
  13. 10.13 1.5 m लंबी, 1.0 cm त्रिज्या की क्षैतिज नली से ग्लिसरीन का अपरिवर्ती प्रवाह हो रहा है; नली के एक सिरे पर प्रति सेकंड एकत्र होने वाली ग्लिसरीन का परिमाण 4.0×10⁻³ kg/s है (घनत्व 1.3×10³ kg/m³, श्यानता 0.83 Pa·s): आयतन प्रवाह-दर Q = 4.0×10⁻³/1.3×10³ ≈ 3.08×10⁻⁶ m³/s; प्वाज़ॉय समीकरण से नली के दोनों सिरों के बीच दाबांतर = 8ηLQ/(πr⁴) ≈ 9.8×10² Pa। जाँच: रेनॉल्ड्स संख्या ≈ 0.31 (< 2000), अतः स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है।
  14. 10.14 आदर्श वायुयान के परीक्षण प्रयोग में वायु-सुरंग के भीतर पंखों के ऊपर और नीचे के पृष्ठों पर वायु-प्रवाह की गतियाँ क्रमशः 70 m/s तथा 63 m/s हैं; पंख का क्षेत्रफल 2.5 m² है (वायु का घनत्व 1.3 kg/m³): उत्थापक बल = ½ρA(v₁² − v₂²) = 0.5×1.3×2.5×(4900 − 3969) ≈ 1.5×10³ N।
  15. 10.15 चित्र 10.23 के दोनों चित्रों में से (b) सही नहीं है — संकीर्णन पर चाल अधिक होती है, अतः बरनूली समीकरण से वहाँ दाब कम होना चाहिए और दाबांतर-मापी स्तंभ नीचे होना चाहिए; चित्र (b) में संकीर्णन पर स्तंभ ऊँचा दिखाया गया है, जो गलत है। चित्र (a) सही है।
  16. 10.16 स्प्रे पंप की बेलनाकार नली के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 8.0 cm² है; इस नली के एक सिरे पर 1.0 mm व्यास के 40 सूक्ष्म छिद्र हैं; नली के भीतर द्रव के प्रवाहित होने की दर 1.5 m/min है: आयतन प्रवाह-दर = 8.0×10⁻⁴ × 0.025 = 2.0×10⁻⁵ m³/s; छिद्रों का कुल क्षेत्रफल = 40×π×(5×10⁻⁴)² ≈ 3.14×10⁻⁵ m²; छिद्रों से होकर जाने वाले द्रव की निष्कासन-चाल = 2.0×10⁻⁵/3.14×10⁻⁵ ≈ 0.64 m/s।
  17. 10.17 U-आकार के तार को साबुन के विलयन में डुबोकर बाहर निकाला गया, जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई; इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के संपर्क में एक फिसलने वाला हल्का तार लगा है जो 1.5×10⁻² N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) को सँभालता है; फिसलने वाले तार की लंबाई 30 cm है: फिल्म के दो पृष्ठ हैं, अतः 2×S×0.30 = 1.5×10⁻² → साबुन की फिल्म का पृष्ठ तनाव S = 2.5×10⁻² N/m।
  18. 10.18 चित्र 10.24(a) में किसी पतली द्रव-फिल्म को 4.5×10⁻² N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है: चित्र (b) तथा (c) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर उतना ही भार (4.5×10⁻² N) सँभाल सकती हैं — क्योंकि पृष्ठ तनाव द्रव का गुण है, फिल्म के क्षेत्रफल या आकृति पर निर्भर नहीं करता; धारण-बल केवल संपर्क में आए तार की लंबाई (जो समान है) और पृष्ठों की संख्या पर निर्भर करता है।
  19. 10.19 3.00 mm त्रिज्या की पारे की बूँद के भीतर कमरे के ताप पर दाब: दाब-आधिक्य = 2S/r = 2×0.465/0.003 = 310 Pa; वायुमंडलीय दाब 1.01×10⁵ Pa हो तो बूँद के भीतर कुल दाब ≈ 1.013×10⁵ Pa (दाब-आधिक्य 310 Pa)।
  20. 10.20 5.00 mm त्रिज्या के साबुन के विलयन के बुलबुले के भीतर दाब-आधिक्य (दो पृष्ठ): 4S/r = 4×2.50×10⁻²/0.005 = 20 Pa। यदि इसी विमा का वायु का बुलबुला 1.20 आपेक्षिक घनत्व के साबुन के विलयन से भरे पात्र में 40.0 cm गहराई पर बनता है, तो उस बुलबुले के भीतर दाब = 1.01×10⁵ + 1200×9.8×0.40 + 2×2.50×10⁻²/0.005 ≈ 1.01×10⁵ + 4704 + 10 ≈ 1.057×10⁵ Pa।

पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)

ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।

  1. 10.21 1.0 m² क्षेत्रफल के वर्गाकार आधार वाले टैंक को बीच में ऊर्ध्व विभाजक दीवार द्वारा दो भागों में बाँटा गया है; विभाजक दीवार में नीचे 20 cm² क्षेत्रफल का कब्ज़ेदार दरवाज़ा है; टैंक का एक भाग जल से भरा है तथा दूसरा भाग 1.7 आपेक्षिक घनत्व के अम्ल से भरा है; दोनों भाग 4.0 m ऊँचाई तक भरे गए हैं: दरवाज़े पर दोनों ओर के दाबों का अंतर = (1700 − 1000)×9.8×4.0 = 27,440 Pa; दरवाज़े को बंद रखने के आवश्यक बल = 27,440 × 20×10⁻⁴ ≈ 55 N।
  2. 10.22 चित्र 10.25 के मैनोमीटर में पारा भरा है; वायुमंडलीय दाब 76 cm (Hg) है: (i) प्रकरण (a) में बर्तन में भरी गैस का निरपेक्ष दाब = 76 + 20 = 96 cm (Hg), प्रमापी दाब = +20 cm (Hg); प्रकरण (b) में (पंप द्वारा कुछ गैस बाहर निकालने के पश्चात्) निरपेक्ष दाब = 76 − 18 = 58 cm (Hg), प्रमापी दाब = −18 cm (Hg)। (ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6 cm ऊँचाई तक जल (पारे के साथ अमिश्रणीय) उड़ेल दिया जाए, तो यह 1 cm (Hg) के बराबर अतिरिक्त दाब डालता है — पारा दाहिनी भुजा में 0.5 cm नीचे और बाईं भुजा में 0.5 cm ऊपर चला जाएगा, अर्थात् प्रकरण (b) में स्तरों का अंतर 18 cm से घटकर 17 cm रह जाएगा (गैस के आयतन में हुए थोड़े परिवर्तन की उपेक्षा करके)।
  3. 10.23 दो पात्रों के आधारों के क्षेत्रफल समान हैं परंतु आकृतियाँ भिन्न-भिन्न हैं; पहले पात्र में दूसरे पात्र की अपेक्षा किसी ऊँचाई तक भरने पर दो गुना जल आता है: दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान हैं — बल = दाब × क्षेत्रफल = ρgh × A, जो ऊँचाई और क्षेत्रफल समान होने पर समान है। फिर भी भार मापने की मशीन पर रखे एक ही ऊँचाई तक जल से भरे दोनों पात्रों के पाठ्यांक भिन्न-भिन्न होंगे, क्योंकि मशीन पात्र + जल का कुल भार मापती है (पहले में जल दो गुना है) — आधार पर बल और जल के भार का भिन्न होना ही ‘द्रवस्थैतिक विरोधाभास’ है (दीवारों के ऊर्ध्व घटक अंतर को संतुलित करते हैं)।
  4. 10.24 रुधिर-आधान के समय किसी शिरा में, जहाँ दाब 2000 Pa है, एक सुई धँसाई जाती है: रुधिर के पात्र को शिरा से इतनी ऊँचाई पर रखना चाहिए कि रुधिर का दाब शिरा के दाब से थोड़ा अधिक हो — संपूर्ण रुधिर का घनत्व 1.06×10³ kg/m³ लेकर, ऊँचाई = 2000/(1.06×10³×9.8) ≈ 0.19 m।
  5. 10.25 (a) यदि क्षयकारी बल उपस्थित हैं, तब नली के अनुदिश तरल में गति करने पर दाब में परिवर्तन प्रवाह की दिशा में घटता जाएगा — बरनूली नियतांक धारा-रेखा के अनुदिश नियत नहीं रहेगा, ऊर्जा का एक भाग ऊष्मा में क्षय हो जाएगा। (b) तरल का वेग बढ़ने पर क्षयकारी बल अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं — श्यान कर्षण वेग के साथ बढ़ता है और विक्षुब्ध प्रवाह में हानि वेग के वर्ग के साथ बढ़ती है; अतः उच्च वेगों पर बरनूली समीकरण का आदर्श रूप कम सटीक होता है।
  6. 10.26 (a) यदि किसी धमनी में रुधिर का प्रवाह पटलीय प्रवाह ही बना रहे, तो 2×10⁻³ m त्रिज्या की धमनी में रुधिर-प्रवाह की अधिकतम चाल: रेनॉल्ड्स संख्या 2000 लेकर, v_max = 2000×η/(ρd) = 2000×2.084×10⁻³/(1.06×10³×4×10⁻³) ≈ 0.98 m/s। (b) तदनुरूपी प्रवाह-दर = π×(2×10⁻³)²×0.98 ≈ 1.24×10⁻⁵ m³/s।
  7. 10.27 वायुयान किसी निश्चित ऊँचाई पर नियत चाल से उड़ रहा है; उसके दोनों पंखों में प्रत्येक का क्षेत्रफल 25 m² है; वायु की चाल पंख के निचले पृष्ठ पर 180 km/h (= 50 m/s) तथा ऊपरी पृष्ठ पर 234 km/h (= 65 m/s) है (वायु का घनत्व 1 kg/m³): कुल उत्थापक बल = ½×1×50×(65² − 50²) = 43,125 N; बरनूली सिद्धांत से संतुलन के लिए वायुयान की संहति = 43,125/9.8 ≈ 4400 kg।
  8. 10.28 मिलिकन तेल बूँद प्रयोग में, 2.0×10⁻⁵ m त्रिज्या तथा 1.2×10³ kg/m³ घनत्व की बूँद की सीमांत चाल = 2r²g(ρ − σ)/(9η) = 2×(2.0×10⁻⁵)²×9.8×1.2×10³/(9×1.8×10⁻⁵) ≈ 5.8×10⁻² m/s; इस चाल पर बूँद पर श्यान बल = बूँद का भार = (4/3)πr³ρg ≈ 3.9×10⁻¹⁰ N (वायु के कारण बूँद पर उत्प्लावन बल की उपेक्षा करके)।
  9. 10.29 सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है; पारे से भरी द्रोणिका में 1.00 mm त्रिज्या की काँच की नली का एक सिरा डुबोया जाता है: केशिका अवनमन = 2S·cos θ/(rρg) = 2×0.465×cos 140°/(1.0×10⁻³×13.6×10³×9.8) ≈ −5.34×10⁻³ m — अर्थात् पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर लगभग 5.3 mm नीचे चला जाता है।
  10. 10.30 3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली U-आकार की नली बनाई जाती है; इसमें जल भरा है: केशिका उत्थान h = 2S/(rρg) से छोटी भुजा में उत्थान ≈ 9.9 mm और बड़ी भुजा में ≈ 5.0 mm — दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में अंतर ≈ 5.0 mm (स्पर्श कोण शून्य, जल का पृष्ठ तनाव 7.3×10⁻² N/m, g = 9.8 m/s² लेकर)।
  11. 10.31 (a) वायुमंडल का नियम: द्रवस्थैतिक संतुलन dp = −ρg·dy और समतापी आदर्श गैस p = ρRT/M से dp/p = −(Mg/RT)·dy — समाकलन पर ρ = ρ₀·e^(−y/y₀), जहाँ y₀ = RT/(Mg) ≈ 8000 m है। (b) 1425 m³ आयतन का हीलियम से भरा गुब्बारा 400 kg के पेलोड को उठाता है (गुब्बारे की त्रिज्या नियत मानकर): संतुलन पर ρ_वायु(y) = ρ_He + 400/1425 = 0.18 + 0.281 = 0.461 kg/m³; 1.25·e^(−y/8000) = 0.461 से y = 8000×ln(1.25/0.461) ≈ 8.0 km — गुब्बारा लगभग 8 km की अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • दाब अदिश है; पास्कल का नियम — परिबद्ध द्रव में दाब का समान संचरण; गहराई के साथ दाब p = p₀ + ρgh।
  • सांतत्य (Av = नियत) और बरनूली (p + ½ρv² + ρgh = नियत) — वेग अधिक तो दाब कम; विक्षुब्ध प्रवाह में बरनूली लागू नहीं।
  • श्यानता: गैसों में ताप ↑ तो η ↑, द्रवों में η ↓; स्टोक्स बल और रेनॉल्ड्स संख्या प्रवाह की प्रकृति तय करते हैं।
  • पृष्ठ तनाव क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता; बूँद में 2S/r, बुलबुले में 4S/r; केशिकत्व स्पर्श कोण से तय होता है।
  • द्रवस्थैतिक विरोधाभास: आधार पर बल समान हो सकता है, पर तुला का पाठ्यांक जल के कुल भार पर निर्भर करता है।
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