Chapter 8: ठोसों के यांत्रिक गुण
प्रतिबल, विकृति, यंग गुणांक, अपरूपण और आयतन गुणांक — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ठोसों के यांत्रिक गुण — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics) | Chapter 8 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
प्रत्यास्थता और प्रतिबल
जब किसी ठोस पर बल लगता है, तो उसका आकार थोड़ा बदलता है। बल हटाने पर यदि आकार लौट आए, तो पदार्थ प्रत्यास्थ कहलाता है।
प्रतिबल प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला आंतरिक बल है और विकृति आकार में आपेक्षिक बदलाव है। प्रतिबल और विकृति का अनुपात प्रत्यास्थता गुणांक कहलाता है।
हुक का नियम और यंग गुणांक
प्रत्यास्थ सीमा के अंदर प्रतिबल विकृति के समानुपाती होता है — यही हुक का नियम है। लंबाई में खिंचाव के लिए यंग गुणांक Y = प्रतिबल/विकृति होता है।
स्टील का यंग गुणांक रबड़ से बहुत अधिक होता है, इसलिए स्टील कम खिंचता है। प्रत्यास्थ सीमा पार करने पर पदार्थ स्थायी रूप से विकृत हो जाता है।
आयतन और अपरूपण गुणांक
आयतन गुणांक दाब के कारण आयतन में बदलाव से जुड़ा है और अपरूपण गुणांक आकार के टेढ़े होने से जुड़ा है। तरल पदार्थों का अपरूपण गुणांक शून्य होता है क्योंकि वे आकार नहीं बनाए रखते।
पॉइसन अनुपात पार्श्व विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है। प्रत्यास्थ ऊर्जा खिंची हुई वस्तु में संचित होती है।
इस अध्याय का विचार: बल लगाने पर ठोस अपना आकार बदलता है, पर बल हटाने पर वापस लौट आता है — यही प्रत्यास्थता है। प्रतिबल (प्रति इकाई क्षेत्रफल बल) और विकृति (सापेक्ष परिवर्तन) का अनुपात ही पदार्थ के प्रत्यास्थता गुणांक हैं, जो पदार्थ की पहचान बताते हैं।
पुस्तक की संरचना: अध्याय प्रतिबल-विकृति की परिभाषाओं से शुरू होकर हुक का नियम, प्रतिबल-विकृति वक्र, यंग गुणांक, अपरूपण गुणांक, आयतन गुणांक और प्वासों अनुपात तक जाता है।
9.1–9.2 प्रतिबल और विकृति
प्रतिबल = बल/क्षेत्रफल (Pa में); विकृति = विमा में भिन्नात्मक परिवर्तन (विमाहीन)। प्रतिबल सदिश राशि नहीं है — यह बल की तरह किसी विशेष दिशा से निर्धारित नहीं होता, बल्कि काट की अभिविन्यास पर निर्भर करता है। अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL/L; आयतन विकृति = ΔV/V; अपरूपण विकृति = कोणीय विस्थापन।
9.3–9.4 हुक का नियम और प्रतिबल-विकृति वक्र
प्रत्यास्थता सीमा के भीतर प्रतिबल ∝ विकृति (हुक का नियम)। वक्र पर: आनुपातिक सीमा, प्रत्यास्थ सीमा, पराभव बिंदु, चरम प्रतिबल और भंजन बिंदु। वक्र के नीचे का क्षेत्रफल प्रति इकाई आयतन ऊर्जा (प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा घनत्व) देता है। भंजन प्रतिबल को पदार्थ की सामर्थ्य कहते हैं।
9.5–9.6 यंग गुणांक और अपरूपण गुणांक
यंग गुणांक Y = अनुदैर्ध्य प्रतिबल/अनुदैर्ध्य विकृति — केवल ठोसों के लिए प्रासंगिक (केवल ठोसों की लंबाई और आकृति होती है)। अपरूपण गुणांक G = अपरूपण प्रतिबल/अपरूपण विकृति — कुंडली का तनन इसी से निर्धारित होता है (तार में ऐंठन होती है)। इस्पात का Y रबर के Y से लगभग 10⁴ गुना अधिक है — इसलिए इस्पात अधिक प्रत्यास्थ है, भले ही रबर अधिक खिंचता दिखे।
9.7–9.8 आयतन गुणांक और प्वासों अनुपात
आयतन गुणांक B = −Δp/(ΔV/V) — ठोसों, द्रवों और गैसों सभी के लिए प्रासंगिक; द्रवों की संपीड्यता (1/B) गैसों की तुलना में लगभग 10⁴ गुना कम होती है, क्योंकि द्रवों में अणु पहले से ही निकट-संकुलित होते हैं। प्वासों अनुपात = पार्श्व विकृति/अनुदैर्ध्य विकृति — एक दिशा में खिंचाव अन्य दिशाओं में संकुचन लाता है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| गुणांक | किससे जुड़ा है |
|---|---|
| यंग गुणांक | लंबाई में खिंचाव |
| आयतन गुणांक | आयतन में बदलाव |
| अपरूपण गुणांक | आकार का टेढ़ापन |

चित्र 1: चित्र 1 में प्रतिबल-विकृति ग्राफ़ दिखाया गया है — सीधा भाग प्रत्यास्थ क्षेत्र है।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): प्रतिबल-विकृति वक्र: रैखिक भाग की ढाल = यंग गुणांक
मुख्य शब्द / Key Terms
- प्रत्यास्थता: बल हटने पर आकार लौटने का गुण।
- प्रतिबल: प्रति इकाई क्षेत्रफल आंतरिक बल।
- विकृति: आकार में आपेक्षिक बदलाव।
- हुक का नियम: प्रत्यास्थ सीमा में प्रतिबल ∝ विकृति।
- यंग गुणांक: अनुदैर्ध्य प्रतिबल/विकृति।
- प्रतिबल: बल/क्षेत्रफल (Pa); विकृति विमाहीन भिन्नात्मक परिवर्तन है।
- यंग गुणांक: Y = (F/A)/(ΔL/L); इस्पात ≈ 2.0×10¹¹ Pa, ताँबा ≈ 1.1×10¹¹ Pa, ऐलुमिनियम ≈ 0.7×10¹¹ Pa।
- अपरूपण गुणांक: G — आकृति परिवर्तन का प्रतिरोध; कुंडली का तनन इसी से तय होता है।
- आयतन गुणांक: B = −Δp/(ΔV/V); जल ≈ 2.2×10⁹ Pa, वायु ≈ 10⁵ Pa।
- प्रत्यास्थता की भ्रांति: अधिक खिंचने वाला पदार्थ अधिक प्रत्यास्थ नहीं होता — कम विकृति वाला (अधिक Y वाला) पदार्थ अधिक प्रत्यास्थ है।
याद रखें
- हुक का नियम केवल प्रत्यास्थ सीमा तक लागू होता है।
- स्टील रबड़ से अधिक प्रत्यास्थ है, अधिक खिंचने वाला नहीं।
- प्रतिबल का मात्रक दाब के मात्रक जैसा है — पास्कल।
- भंगुर पदार्थ बिना अधिक खिंचे टूट जाते हैं।
- तन्य पदार्थ पतली तार में खींचे जा सकते हैं।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: अधिक खिंचने वाले रबड़ को अधिक प्रत्यास्थ समझ लेना। प्रत्यास्थता का अर्थ आकार का पूरी तरह लौटना है, अधिक खिंचना नहीं — इसीलिए स्टील अधिक प्रत्यास्थ है।
प्रतिबल को बल की तरह किसी एक दिशा से परिभाषित नहीं किया जा सकता — यह काट की अभिविन्यास पर निर्भर करता है। इसलिए प्रतिबल को न तो अदिश और न ही सदिश कहते हैं; यह एक टेंसर राशि है (इस अध्याय के स्तर पर इतना जानना पर्याप्त है)।
प्रतिबल ∝ विकृति केवल वक्र के आरंभिक रैखिक भाग में सत्य है। पराभव बिंदु के बाद पदार्थ स्थायी विरूपण लेता है और हुक का नियम लागू नहीं होता — इस सीमा से आगे के प्रश्नों में Y का उपयोग गलत होगा।
कई तारों से लटकी दृढ़ पट्टी के प्रश्नों में ‘समतल रहना’ ही अतिरिक्त समीकरण देता है — सभी तारों का विस्तार बराबर होना चाहिए। इसी से व्यासों का अनुपात (प्रश्न 9.10) और भार की स्थिति (प्रश्न 9.18) निकलती है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- प्रतिबल और विकृति की परिभाषा लिखिए। संकेत: प्रतिबल = बल/क्षेत्रफल; विकृति = बदलाव/मूल मान।
- हुक का नियम क्या है? संकेत: प्रत्यास्थ सीमा में प्रतिबल विकृति के समानुपाती होता है।
- यंग गुणांक का सूत्र लिखिए। संकेत: Y = प्रतिबल/अनुदैर्ध्य विकृति।
- स्टील रबड़ से अधिक प्रत्यास्थ क्यों है? संकेत: क्योंकि समान प्रतिबल पर स्टील कम विकृत होता है।
- तरल का अपरूपण गुणांक कितना होता है? संकेत: शून्य।
मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A
- अधिक खिंचने वाला रबर इस्पात से अधिक प्रत्यास्थ क्यों नहीं है? उत्तर: प्रत्यास्थता का माप यंग गुणांक है — इस्पात का Y रबर से लगभग 10⁴ गुना अधिक है; रबर अधिक खिंचता है पर कम बल पर।
- प्रतिबल-विकृति वक्र के नीचे का क्षेत्रफल क्या बताता है? उत्तर: प्रति इकाई आयतन संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (ऊर्जा घनत्व)।
- द्रवों की संपीड्यता गैसों से इतनी कम क्यों है? उत्तर: द्रवों में अणु पहले से ही निकट-संकुलित होते हैं — दबाने के लिए खाली स्थान ही नहीं है; गैसों में अणुओं के बीच विशाल रिक्त स्थान होता है।
- कुंडली का तनन किस गुणांक से निर्धारित होता है? उत्तर: अपरूपण गुणांक से — कुंडली खींचने पर तार में ऐंठन (अपरूपण) होती है, खिंचाव नहीं।
- हीरे की निहाई से इतना अधिक दाब क्यों मिलता है? उत्तर: दाब = बल/क्षेत्रफल — सपाट पृष्ठ का व्यास केवल 0.50 mm है, इसलिए 50,000 N का बल लगभग 255 GPa का दाब पैदा करता है (प्रश्न 9.17)।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- प्रत्यास्थ सीमा पार करने पर क्या होता है? उत्तर: पदार्थ स्थायी रूप से विकृत हो जाता है, मूल आकार नहीं लौटता।
- पॉइसन अनुपात क्या बताता है? उत्तर: लंबाई बढ़ने पर चौड़ाई में सिकुड़न का अनुपात।
- प्रतिबल का SI मात्रक क्या है? उत्तर: पास्कल (N/m²)।
- भंगुर और तन्य पदार्थ में अंतर बताइए। उत्तर: भंगुर बिना खिंचे टूटता है; तन्य तार में खिंच जाता है।
- खिंची स्प्रिंग में कौनसी ऊर्जा संचित होती है? उत्तर: प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।
- 9.1 स्टील का तार 4.7 m लंबा, अनुप्रस्थ काट 3.0×10⁻⁵ m²; ताँबे का तार 3.5 m लंबा, अनुप्रस्थ काट 4.0×10⁻⁵ m²; समान भारों से दोनों की लंबाइयों में समान वृद्धि होती है: Y = FL/(A·ΔL) से, F और ΔL समान होने पर Y ∝ L/A — अतः Y_स्टील/Y_ताँबा = (4.7/3.0×10⁻⁵)/(3.5/4.0×10⁻⁵) ≈ 1.79।
- 9.2 चित्र 9.11 के प्रतिबल-विकृति वक्र से: (a) रैखिक भाग की ढाल से यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 150×10⁶/0.002 = 7.5×10¹⁰ N/m²। (b) वक्र का शिखर (भंजन बिंदु) लगभग 300×10⁶ N/m² पर है, अतः पदार्थ की सन्निकट पराभव सामर्थ्य ≈ 3.0×10⁸ N/m²।
- 9.3 चित्र 9.12 (दोनों ग्राफ़ एक ही पैमाने पर): (a) B का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है — उसका वक्र अधिक ढालू है (समान प्रतिबल पर विकृति कम)। (b) A अधिक मजबूत है — उसका भंजन प्रतिबल (वक्र का शिखर) अधिक है; साथ ही A टूटने से पहले अधिक विकृति सहता है, अर्थात् A अधिक तन्य भी है, जबकि B भंगुर है।
- 9.4 (a) असत्य — इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक नहीं है; इस्पात का Y (≈2×10¹¹ Pa) रबड़ के Y (≈10⁷ Pa) से लगभग 10⁴ गुना अधिक है, इसलिए इस्पात अधिक प्रत्यास्थ है। (b) सत्य — किसी कुंडली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है, क्योंकि कुंडली खींचने पर तार में ऐंठन (अपरूपण विकृति) उत्पन्न होती है।
- 9.5 0.25 cm व्यास के दो तार (चित्र 9.13): इस्पात का तार 1.5 m (ऊपर, 4.0 + 6.0 = 10 kg का भार) और पीतल का तार 1.0 m (नीचे, 6.0 kg का भार); दोनों का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल π×(1.25×10⁻³)² ≈ 4.91×10⁻⁶ m²। इस्पात के तार में विस्तार = 100×1.5/(4.91×10⁻⁶×2.0×10¹¹) ≈ 1.53×10⁻⁴ m (0.153 mm); पीतल के तार में विस्तार = 60×1.0/(4.91×10⁻⁶×0.91×10¹¹) ≈ 1.34×10⁻⁴ m (0.134 mm)।
- 9.6 ऐलुमिनियम का घन (किनारा 10 cm), एक फलक ऊर्ध्व दीवार से दृढ़ता से जुड़ा है; सम्मुख फलक से 100 kg का द्रव्यमान जोड़ा गया है (अपरूपण गुणांक 25 GPa): अपरूपण प्रतिबल = 1000/0.01 = 10⁵ Pa; अपरूपण विकृति = 10⁵/25×10⁹ = 4×10⁻⁶; फलक का ऊर्ध्व विस्थापन = 4×10⁻⁶ × 0.1 = 4×10⁻⁷ m (0.0004 mm)।
- 9.7 मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तंभ 50,000 kg के भारी ढाँचे को आधार दिए हुए हैं; प्रत्येक स्तंभ की भीतरी और बाहरी त्रिज्याएँ क्रमशः 30 और 60 cm हैं: प्रत्येक स्तंभ का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल = π(0.6² − 0.3²) ≈ 0.848 m²; प्रत्येक पर भार = 125,000 N; संपीडन प्रतिबल ≈ 1.47×10⁵ Pa; Y = 2.0×10¹¹ Pa से संपीडन विकृति ≈ 7.4×10⁻⁷।
- 9.8 ताँबे का टुकड़ा (अनुप्रस्थ परिच्छेद 15.2 mm × 19.1 mm = 2.90×10⁻⁴ m²) 44,500 N के तनाव से खींचा जाता है (केवल प्रत्यास्थ विरूपण): प्रतिबल = 44,500/2.90×10⁻⁴ ≈ 1.53×10⁸ Pa; Y_ताँबा = 1.1×10¹¹ Pa से उत्पन्न विकृति ≈ 1.39×10⁻³।
- 9.9 1.5 cm त्रिज्या का इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है; इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 10⁸ N/m² है: अधिकतम भार = 10⁸ × π×(0.015)² ≈ 70,700 N — अर्थात् लगभग 7.1×10³ kg का द्रव्यमान उठाया जा सकता है।
- 9.10 15 kg की दृढ़ पट्टी तीन तारों (प्रत्येक 2 m) से समतल लटकाई गई है — सिरों के दोनों तार ताँबे के, बीच वाला लोहे का है। पट्टी समतल रहे, इसके लिए तीनों तारों का विस्तार बराबर होना चाहिए (ΔL = TL/(AY)); तनाव समान (50 N प्रत्येक) होने पर A·Y समान होना चाहिए → d_लोहा²/d_ताँबा² = Y_ताँबा/Y_लोहा = 1.1/2.0 → d_लोहा : d_ताँबा ≈ 0.74 : 1 (ताँबे के तार का व्यास लोहे के तार के व्यास का लगभग 1.35 गुना)।
- 9.11 एक मीटर लंबी इस्पात के तार के एक सिरे से 14.5 kg का द्रव्यमान बाँधकर ऊर्ध्व वृत्त में घुमाया जाता है; वृत्त की तली पर कोणीय वेग 2 rev/s है: तली पर तनाव = mg + mω²r = 145 + 14.5×(4π)² ≈ 2435 N; तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल 0.065 cm² = 6.5×10⁻⁶ m²; विस्तार = 2435×1/(6.5×10⁻⁶×2.0×10¹¹) ≈ 1.87×10⁻³ m (1.87 mm)।
- 9.12 जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक: आरंभिक आयतन 100.0 L, दाब में वृद्धि 100.0 atm (= 1.013×10⁷ Pa), अंतिम आयतन 100.5 L: B = Δp/(ΔV/V) = 1.013×10⁷/0.005 ≈ 2.0×10⁹ Pa। वायु का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक ≈ 1.0×10⁵ Pa है — अनुपात लगभग 2×10⁴। सरल शब्दों में: जल के अणु पहले से ही निकट-संकुलित हैं, इसलिए उसे दबाना कठिन है; वायु में अणुओं के बीच विशाल रिक्त स्थान है, इसलिए वह आसानी से संपीडित हो जाती है।
- 9.13 जल का घनत्व उस गहराई पर जहाँ दाब 80.0 atm है: संपीड्यता 45.8×10⁻¹¹ Pa⁻¹ से भिन्नात्मक आयतन-परिवर्तन = 45.8×10⁻¹¹ × 80×1.013×10⁵ ≈ 3.71×10⁻³; घनत्व उतने ही अंश से बढ़ेगा: ρ = 1.03×10³ × 1.00371 ≈ 1034 kg/m³।
- 9.14 काँच के स्लैब पर 10 atm का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में भिन्नात्मक अंतर = Δp/B = (10×1.013×10⁵)/(3.7×10¹⁰) ≈ 2.7×10⁻⁵।
- 9.15 ताँबे का ठोस घन (किनारा 10 cm) पर 7.0×10⁶ Pa का जलीय दाब लगाने पर आयतन में संकुचन = ΔV/V = Δp/B = 7.0×10⁶/1.4×10¹¹ = 5.0×10⁻⁵।
- 9.16 एक लीटर जल को 0.10% से संपीडित करने के लिए दाब में आवश्यक अंतर = B×0.001 = 2.2×10⁹×0.001 = 2.2×10⁶ Pa (लगभग 22 atm)।
पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)
ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।
- 9.17 हीरे के एकल क्रिस्टलों से बनी निहाइयों (चित्र 9.14) के संकीर्ण सिरों पर सपाट पृष्ठों का व्यास 0.50 mm है: क्षेत्रफल = π×(2.5×10⁻⁴)² ≈ 1.96×10⁻⁷ m²; चौड़े सिरों पर 50,000 N का बल लगाने पर नोंक पर दाब = 50,000/1.96×10⁻⁷ ≈ 2.55×10¹¹ Pa (लगभग 255 GPa) — इसी अतिउच्च दाब से पदार्थों के व्यवहार की जाँच की जाती है।
- 9.18 1.05 m लंबी नगण्य द्रव्यमान की छड़ बराबर लंबाई के दो तारों (A: इस्पात, क्षेत्रफल 1.0 mm²; B: ऐलुमिनियम, क्षेत्रफल 2.0 mm²) से सिरों पर लटकाई गई है (चित्र 9.15); द्रव्यमान m को छड़ के किस बिंदु से लटकाया जाए कि: (a) समान प्रतिबल उत्पन्न हो — T_A/1.0 = T_B/2.0 → T_B = 2T_A; आघूर्ण संतुलन से द्रव्यमान इस्पात के तार से 0.70 m की दूरी पर होना चाहिए। (b) समान विकृति उत्पन्न हो — T_A/(1.0×2.0×10¹¹) = T_B/(2.0×0.7×10¹¹) → T_B = 0.7T_A; आघूर्ण संतुलन से द्रव्यमान इस्पात के तार से 0.43 m की दूरी पर होना चाहिए।
- 9.19 मृदु इस्पात का तार (लंबाई 1.0 m, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल 0.50×10⁻² cm²) दो खंभों के बीच क्षैतिज दिशा में प्रत्यास्थ सीमा के भीतर ही तनित किया गया है; तार के मध्य-बिंदु से 100 g का द्रव्यमान लटकाया जाता है: साम्यावस्था में 2T·sin θ = mg और विस्तार-ज्यामिति से y³ = mgL/(8YA) के रूप में हल करने पर मध्य-बिंदु पर अवनमन y ≈ 1.1 cm प्राप्त होता है।
- 9.20 धातु की दो पट्टियों के सिरों को चार रिवेट से आपस में जोड़ा गया है; प्रत्येक रिवेट का व्यास 6 mm है; रिवेट पर अपरूपण प्रतिबल 6.9×10⁷ Pa से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए: प्रत्येक रिवेट अधिकतम 6.9×10⁷×π×(3×10⁻³)² ≈ 1951 N सह सकता है; चार रिवेट (प्रत्येक एक-चौथाई भार वहन करता है) मिलकर अधिकतम ≈ 7.8 kN का तनाव आरोपित कर सकते हैं।
- 9.21 प्रशांत महासागर में स्थित मैरियाना खाई में पानी की सतह से 11 km नीचे 0.32 m³ आयतन का इस्पात का गोला गिराया जाता है; खाई के तल पर जल का दाब 1.1×10⁸ Pa है और इस्पात का आयतन गुणांक 160 GPa है: गोले के आयतन में परिवर्तन ΔV = −V·Δp/B = −0.32×1.1×10⁸/1.6×10¹¹ ≈ −2.2×10⁻⁴ m³ (आयतन लगभग 0.22 लीटर घट जाएगा)।
- प्रतिबल = बल/क्षेत्रफल; विकृति = भिन्नात्मक परिवर्तन; हुक का नियम केवल रैखिक भाग में लागू होता है।
- यंग गुणांक ही ‘प्रत्यास्थता’ का माप है — अधिक खिंचना अधिक प्रत्यास्थता नहीं है (इस्पात > रबर)।
- आयतन गुणांक सभी पदार्थों के लिए प्रासंगिक है; द्रव गैसों की तुलना में लगभग 10⁴ गुना कम संपीड्य हैं।
- कुंडली का तनन अपरूपण गुणांक से तय होता है; समतल पट्टी की शर्त से व्यास-अनुपात और भार-स्थिति निकलती है।
- दाब = बल/क्षेत्रफल — छोटा क्षेत्रफल ही हीरे की निहाई के अतिउच्च दाब का रहस्य है।

