Chapter 3: अक्षांश, देशांतर और समय
पृथ्वी पर हर जगह का पता दो संख्याओं में है — अक्षांश और देशांतर — और उन्हीं से समय भी तय होता है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhugol mein Prayogatmak Karya Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
अक्षांश, देशांतर और समय — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhugol mein Prayogatmak Karya Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 3 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
अक्षांश भूमध्य रेखा से उत्तर-दक्षिण की कोणीय दूरी है (0° से 90°); देशांतर प्रधान याम्योत्तर (ग्रीनविच, 0°) से पूर्व-पश्चिम की कोणीय दूरी है (0° से 180°)। किसी स्थान की स्थिति अक्षांश + देशांतर से तय होती है।
समय देशांतर से तय होता है — पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, यानी 1 घंटे में 15° और 4 मिनट में 1°। इसलिए पूर्व का स्थान पश्चिम से आगे के समय पर होता है। भारत का मानक समय 82°30' पूर्व से तय है।
मुख्य बिंदु
- अक्षांश: 0°–90° उत्तर/दक्षिण; देशांतर: 0°–180° पूर्व/पश्चिम।
- 15° देशांतर = 1 घंटा; 1° = 4 मिनट।
- पूर्व का समय आगे, पश्चिम का पीछे।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| अक्षांश | भूमध्य रेखा से कोणीय दूरी |
| देशांतर | ग्रीनविच से कोणीय दूरी |
| 15° | 1 घंटे का अंतर |
| भारत | 82°30' पूर्व → IST |
पृथ्वी पर दो प्राकृतिक संदर्भ बिंदु हैं: उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव — घूर्णन अक्ष के दोनों छोर। इन्हीं से अक्षांश-देशांतर का जाल बनता है।
देशांतर पूर्व-पश्चिम में गिने जाते हैं, पर रेखाएँ उत्तर-दक्षिण चलती हैं। अक्षांश उत्तर-दक्षिण में गिने जाते हैं, पर रेखाएँ पूर्व-पश्चिम चलती हैं — दिशा उलटना आम गलती है।
समय का सूत्र: 1° देशांतर = 4 मिनट। पूर्व में समय आगे (+), पश्चिम में पीछे (−)। भारत का मानक याम्योत्तर 82°30′ पूर्व = ग्रीनविच से 5 घंटे 30 मिनट आगे।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): अक्षांश-देशांतर ग्रिड का सामान्य चित्रण — ग्लोब पर रेखाएँ और घड़ी। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: देशांतर से समय निकालने के चरण।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): अक्षांश-देशांतर का जाल, बृहत वृत्त और समय की गणना — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
पृथ्वी के दो प्राकृतिक संदर्भ बिंदु उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव हैं — इनसे होकर पृथ्वी का घूर्णन अक्ष गुजरता है। अक्षांश विषुवत् वृत्त से उत्तर-दक्षिण कोणीय दूरी है (0°–90°); देशांतर प्रधान याम्योत्तर (ग्रीनविच, 0°) से पूर्व-पश्चिम कोणीय दूरी है (0°–180°)। किसी स्थान का अक्षांश व देशांतर मिलकर उसका निर्देशांक बनाते हैं — जैसे दिल्ली लगभग 28°35′ उत्तर, 77°12′ पूर्व।
बृहत वृत्त वह वृत्त है जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटता है और जिसका केंद्र पृथ्वी के केंद्र से मिलता है। विषुवत् वृत्त एक बृहत वृत्त है; सभी देशांतर याम्योत्तर भी बृहत वृत्त हैं (दो विपरीत याम्योत्तर मिलकर एक वृत्त बनाते हैं)। अक्षांश वृत्त (विषुवत् को छोड़कर) लघु वृत्त हैं।
सूर्य पूर्व से पश्चिम जाता हुआ दिखाई देता है, क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है — यह आभासी गति है, जैसे चलती रेल से पेड़ पीछे जाते दिखते हैं। स्थानीय समय किसी स्थान का सूर्य की स्थिति पर आधारित समय है — जब सूर्य उस स्थान के ठीक ऊपर (उच्चतम बिंदु पर) होता है, तब वहाँ दोपहर (12 बजे) होती है।
देशांतर और समय का संबंध: पृथ्वी 360° घूमने में 24 घंटे लेती है, इसलिए 15° = 1 घंटा, 1° = 4 मिनट। प्रधान याम्योत्तर के पूर्व में समय आगे होता है, पश्चिम में पीछे। विश्व को 24 टाइम ज़ोन में बाँटा गया है। बड़े पूर्व-पश्चिम विस्तार वाले देश (रूस, कनाडा, अमेरिका) एक से अधिक मानक याम्योत्तर अपनाते हैं; भारत एक ही मानक समय (82°30′ पूर्व) अपनाता है।
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर पर है — यहाँ से दिन का प्रारंभ माना जाता है। इसे पूर्व की ओर पार करने पर एक दिन घट जाता है (बुधवार → मंगलवार), पश्चिम की ओर पार करने पर एक दिन बढ़ जाता है (मंगलवार → बुधवार)।
- संदर्भ बिंदु: उत्तरी ध्रुव, दक्षिणी ध्रुव।
- बृहत वृत्त: पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटे; विषुवत् व याम्योत्तर।
- निर्देशांक: अक्षांश + देशांतर का युग्म।
- 1° = 4 मिनट; पूर्व में +, पश्चिम में −।
- तिथि रेखा: 180°; पूर्व पार = दिन घटे, पश्चिम पार = दिन बढ़े।
Key Terms — मुख्य शब्द
- अक्षांश: भूमध्य रेखा से उत्तर-दक्षिण दूरी।
- देशांतर: प्रधान याम्योत्तर से पूर्व-पश्चिम दूरी।
- प्रधान याम्योत्तर: 0° देशांतर, ग्रीनविच से।
- मानक समय: देश के लिए तय एक समय।
- स्थानीय समय: किसी स्थान के देशांतर का अपना समय।
- प्रधान याम्योत्तर: 0° देशांतर — ग्रीनविच से गुजरने वाली रेखा, समय का आधार।
- मानक याम्योत्तर: किसी देश का तय किया गया देशांतर जिससे उसका मानक समय तय हो — भारत: 82°30′ पूर्व।
- टाइम ज़ोन: 15° देशांतर की पट्टी — एक घंटे के समय-अंतर वाला क्षेत्र; विश्व में 24।
- स्थानीय समय: सूर्य की स्थिति पर आधारित किसी स्थान का अपना समय।
- आभासी गति: पृथ्वी के घूमने से सूर्य/तारों की दिखाई देने वाली उल्टी गति।
Remember — याद रखें
- 15° = 1 घंटा और 1° = 4 मिनट — दोनों आंकड़े याद करें।
- पूर्व = आगे, पश्चिम = पीछे — दिशा न उलटें।
- अक्षांश उत्तर-दक्षिण, देशांतर पूर्व-पश्चिम — यही परिभाषा लिखें।
- समय की गणना में जोड़-घटाव की दिशा जाँच लें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: समय की गणना में पूर्व-पश्चिम की दिशा उलट देना। उत्तर में 'पूर्व का समय आगे' नियम लिखकर गणना करें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- अक्षांश और देशांतर क्या हैं?
संकेत: कोणीय दूरी के बारे में सोचें। - प्रधान याम्योत्तर कहाँ है?
संकेत: ग्रीनविच के बारे में सोचें। - 15° देशांतर कितने समय के बराबर है?
संकेत: 1 घंटे के बारे में सोचें। - पूर्व का समय आगे क्यों होता है?
संकेत: पृथ्वी के घूर्णन के बारे में सोचें। - भारत का मानक समय क्या है?
संकेत: 82°30' पूर्व के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- अक्षांश क्या है?
भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी, 0° से 90° तक। - देशांतर क्या है?
प्रधान याम्योत्तर (ग्रीनविच, 0°) से पूर्व या पश्चिम की कोणीय दूरी, 0° से 180° तक। - समय देशांतर से कैसे जुड़ा है?
पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए 15° देशांतर = 1 घंटा और 1° = 4 मिनट का अंतर होता है। - पूर्व का समय आगे क्यों होता है?
क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए पूर्वी स्थानों पर सूर्य पहले उगता है। - उदाहरण: ग्रीनविच पर दोपहर 12 बजे हो, तो 82°30' पूर्व पर क्या समय होगा?
82°30' ÷ 15 = 5.5 घंटे आगे, यानी शाम 5:30 बजे — यही IST का आधार है।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- लघु उत्तरीय (क): पृथ्वी पर दो प्राकृतिक संदर्भ बिंदु कौन-से हैं?
उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव — पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के दोनों छोर। इन्हीं के आधार पर अक्षांश व देशांतर का जाल बनता है। - लघु उत्तरीय (ख): बृहत वृत्त क्या है?
वह वृत्त जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटता है और जिसका केंद्र पृथ्वी के केंद्र से मिलता है। विषुवत् वृत्त और सभी देशांतर याम्योत्तर (विपरीत जोड़े सहित) बृहत वृत्त हैं। - लघु उत्तरीय (ग): निर्देशांक क्या है?
किसी स्थान की स्थिति बताने वाला अक्षांश व देशांतर का युग्म — जैसे दिल्ली: 28°35′ उत्तर, 77°12′ पूर्व। इसी युग्म से मानचित्र पर स्थान की सटीक स्थिति मिलती है। - लघु उत्तरीय (घ): सूर्य पूर्व से पश्चिम जाता हुआ क्यों दिखाई देता है?
क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। सूर्य स्थिर है; पृथ्वी के घूमने से सूर्य की आभासी गति पूर्व से पश्चिम की ओर दिखाई देती है। - लघु उत्तरीय (ङ): स्थानीय समय से आप क्या समझते हैं?
किसी स्थान का सूर्य की स्थिति पर आधारित समय। जब सूर्य उस स्थान के ठीक ऊपर (उच्चतम बिंदु पर) होता है, तब वहाँ दोपहर (12 बजे) मानी जाती है; पूर्व के स्थानों पर दोपहर पहले, पश्चिम के स्थानों पर बाद में होती है। - अंतर: अक्षांशों एवं देशांतरों के बीच अंतर स्पष्ट करें।
अक्षांश: विषुवत् से उत्तर-दक्षिण कोणीय दूरी (0°–90°), रेखाएँ पूर्व-पश्चिम चलती हैं, परस्पर समानांतर, लंबाई घटती है (ध्रुवों पर बिंदु)। देशांतर: प्रधान याम्योत्तर से पूर्व-पश्चिम कोणीय दूरी (0°–180°), रेखाएँ उत्तर-दक्षिण चलती हैं, ध्रुवों पर मिलती हैं, लंबाई बराबर (अर्धवृत्त)। अक्षांश से जलवायु-क्षेत्र तय होते हैं, देशांतर से समय। - क्रियाकलाप (क): एटलस से निम्न स्थानों के अक्षांश-देशांतर लिखें।
मुंबई: लगभग 19°05′ उत्तर, 72°54′ पूर्व। व्लादिवोस्तोक: लगभग 43°07′ उत्तर, 131°54′ पूर्व। कैरो: लगभग 30°03′ उत्तर, 31°14′ पूर्व। न्यूयॉर्क: लगभग 40°43′ उत्तर, 74°00′ पश्चिम। ओटावा: लगभग 45°25′ उत्तर, 75°42′ पश्चिम। जेनेवा: लगभग 46°12′ उत्तर, 6°09′ पूर्व। जोहानसबर्ग: लगभग 26°12′ दक्षिण, 28°02′ पूर्व। सिडनी: लगभग 33°52′ दक्षिण, 151°13′ पूर्व। (एटलस के अनुसार छोटे अंतर संभव हैं।) - समय-गणना (क): प्रधान याम्योत्तर पर दोपहर 12 बजे हों तो दिल्ली में क्या समय होगा?
दिल्ली का देशांतर 82°30′ पूर्व है। 82°30′ × 4 मिनट = 330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट। पूर्व में समय आगे होता है, इसलिए दिल्ली में शाम के 5:30 बजेंगे। - समय-गणना (ख): लंदन में क्या समय होगा?
लंदन प्रधान याम्योत्तर (0°) पर ही है, इसलिए वहाँ भी दोपहर के 12 बजेंगे। - समय-गणना (ग): टोकियो में क्या समय होगा?
टोकियो का देशांतर लगभग 139°45′ पूर्व है। 139°45′ × 4 मिनट = 559 मिनट = 9 घंटे 19 मिनट। पूर्व में समय आगे, इसलिए टोकियो में रात के लगभग 9:19 बजेंगे। - समय-गणना (घ): पेरिस में क्या समय होगा?
पेरिस का देशांतर लगभग 2°20′ पूर्व है। 2°20′ × 4 मिनट = लगभग 9 मिनट। पूर्व में समय आगे, इसलिए पेरिस में दोपहर के लगभग 12:09 बजेंगे। - समय-गणना (ङ): कैरो में क्या समय होगा?
कैरो का देशांतर लगभग 31°14′ पूर्व है। 31°14′ × 4 मिनट = लगभग 125 मिनट = 2 घंटे 5 मिनट। पूर्व में समय आगे, इसलिए कैरो में दोपहर के लगभग 2:05 बजेंगे। - समय-गणना (च): मॉस्को में क्या समय होगा?
मॉस्को का देशांतर लगभग 37°37′ पूर्व है। 37°37′ × 4 मिनट = लगभग 150 मिनट = 2 घंटे 30 मिनट। पूर्व में समय आगे, इसलिए मॉस्को में दोपहर के लगभग 2:30 बजेंगे।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- अक्षांश और देशांतर की परिभाषा लिखिए।
अक्षांश: विषुवत् से उत्तर-दक्षिण कोणीय दूरी। देशांतर: प्रधान याम्योत्तर से पूर्व-पश्चिम कोणीय दूरी। - बृहत वृत्त और लघु वृत्त में अंतर लिखिए।
बृहत वृत्त पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटता है (केंद्र = पृथ्वी का केंद्र); लघु वृत्त नहीं बाँटता (जैसे कर्क, मकर रेखा)। - 1° देशांतर = कितने मिनट? इस सूत्र से 60° पूर्व पर समय निकालिए (ग्रीनविच 12 बजे)।
1° = 4 मिनट। 60° × 4 = 240 मिनट = 4 घंटे आगे → शाम 4 बजे। - अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पार करने पर दिन क्यों बदल जाता है?
क्योंकि 180° पर ग्रीनविच से पूरे 12 घंटे का अंतर दोनों दिशाओं से मिलकर 24 घंटे (एक दिन) हो जाता है — पूर्व पार करने पर दिन घटता है, पश्चिम पार करने पर बढ़ता है। - भारत एक ही मानक समय क्यों अपनाता है, जबकि रूस कई अपनाता है?
भारत का पूर्व-पश्चिम विस्तार लगभग 30° है (2 घंटे का अंतर) — एक मानक समय व्यावहारिक है। रूस का विस्तार बहुत अधिक है, इसलिए एक समय से काम नहीं चलता।
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विस्तार — ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘अक्षांश’ और ‘देशांतर’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- अक्षांश — ‘अक्षांश’ का अर्थ है — भूमध्य रेखा से उत्तर-दक्षिण दूरी।। ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- देशांतर — ‘देशांतर’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — प्रधान याम्योत्तर से पूर्व-पश्चिम दूरी। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- प्रधान याम्योत्तर — ‘प्रधान याम्योत्तर’ — 0° देशांतर, ग्रीनविच से।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- मानक समय — ‘मानक समय’ का सामान्य अर्थ है — देश के लिए तय एक समय।। परंतु ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- स्थानीय समय — ‘स्थानीय समय’ का अर्थ है — किसी स्थान के देशांतर का अपना समय।। ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- मानक याम्योत्तर — ‘मानक याम्योत्तर’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — किसी देश का तय किया गया देशांतर जिससे उसका मानक समय तय हो — भारत: 82°30′ पूर्व। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘अक्षांश, देशांतर और समय’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
संदर्भ: दोनों ध्रुव। निर्देशांक = अक्षांश + देशांतर। बृहत वृत्त: विषुवत् व याम्योत्तर। सूर्य की आभासी गति: पृथ्वी पश्चिम→पूर्व घूमती है। समय: 1° = 4 मिनट, पूर्व में +। तिथि रेखा 180°: पूर्व पार = दिन घटे, पश्चिम पार = दिन बढ़े।

