विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
जब किसी चालक से धारा बहती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है।
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | अध्याय 12 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): Solenoid और विद्युत चुंबक का सरल चित्र — कुंडली, धारा की दिशा और ध्रुव, लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

वर्कबेंच पर चुंबक और कुंडली — चुंबकीय प्रयोगों का दृश्य।
इस अध्याय के बारे में
जब किसी चालक से धारा बहती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है। यह क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं से दिखाया जाता है — ये रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में जाती हैं, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, और जहाँ वे पास-पास होती हैं, वहाँ क्षेत्र मज़बूत होता है। धारा की दिशा बदलने पर क्षेत्र की दिशा भी उलट जाती है।
सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त होती हैं। कुंडली (solenoid) में धारा बहने पर वह छड़ चुंबक जैसा व्यवहार करती है — उसके एक सिरे पर उत्तर ध्रुव और दूसरे पर दक्षिण ध्रुव बनता है। कुंडली के अंदर नरम लोहे की छड़ रखने पर विद्युत चुंबक बनता है, जिसका चुंबकत्व धारा बंद करते ही खत्म हो जाता है।
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है — इसी सिद्धांत पर विद्युत मोटर काम करती है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से पता चलती है: तर्जनी क्षेत्र की दिशा, मध्यमा धारा की दिशा और अँगूठा बल की दिशा बताता है।
उल्टी प्रक्रिया भी होती है: जब किसी कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें धारा प्रेरित हो जाती है — इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। इसी पर विद्युत जनित्र (generator) काम करता है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। घरों में 220 V की प्रत्यावर्ती धारा (AC) आती है, और सुरक्षा के लिए फ़्यूज़ व भूसंपर्कन (earthing) ज़रूरी हैं।
क्या सीखना है
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ, solenoid और विद्युत चुंबक, मोटर का सिद्धांत, प्रेरण और जनित्र, घरेलू परिपथ की सुरक्षा।
मुख्य शब्द
- चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) — चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जहाँ चुंबकीय बल महसूस होता है।
- Solenoid — पास-पास लिपटी कुंडली, जो धारा बहने पर चुंबक जैसा व्यवहार करती है।
- विद्युत चुंबक (Electromagnet) — धारा से बना अस्थायी चुंबक, जो धारा बंद होते ही खत्म हो जाता है।
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम — मोटर में बल की दिशा जानने का नियम।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण — बदलते चुंबकीय फ्लक्स से कुंडली में धारा का प्रेरित होना।
याद रखें
- क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
- Solenoid के अंदर क्षेत्र लगभग एकसमान होता है।
- मोटर: विद्युत → यांत्रिक ऊर्जा; जनित्र: यांत्रिक → विद्युत ऊर्जा।
- घरों में AC 220 V, 50 Hz की होती है।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: मोटर और जनित्र को उल्टा लिख देना। याद रखें — मोटर चलती है (बिजली खर्च करती है), जनित्र बिजली बनाता है।
Chart / Table: मोटर बनाम जनित्र
| बिंदु | विवरण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| विद्युत मोटर | विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा | फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम |
| विद्युत जनित्र | यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा | प्रेरण का सिद्धांत |
| विद्युत चुंबक | अस्थायी चुंबक | धारा बंद = चुंबकत्व खत्म |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- धारावाही चालक के चारों ओर क्या बनता है?
संकेत: चुंबकीय क्षेत्र सोचें। - Solenoid किसका काम करता है?
संकेत: छड़ चुंबक जैसा व्यवहार याद करें। - मोटर में बल की दिशा किस नियम से पता चलती है?
संकेत: फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम। - जनित्र किस ऊर्जा को किसमें बदलता है?
संकेत: यांत्रिक से विद्युत की ओर देखें। - घरों में कितने वोल्ट की AC आती है?
संकेत: 220 V याद करें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का एक गुण लिखें।
वे कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। - विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में अंतर बताएँ।
विद्युत चुंबक का चुंबकत्व धारा पर निर्भर करता है और बंद किया जा सकता है। - विद्युत मोटर का सिद्धांत क्या है?
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल लगता है। - विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं?
बदलते चुंबकीय फ्लक्स से कुंडली में धारा का प्रेरित होना। - भूसंपर्कन (earthing) क्यों ज़रूरी है?
ताकि उपकरण में खराबी आने पर धारा ज़मीन में चली जाए और झटका न लगे।
बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न
नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ कैसी होती हैं?
संकेंद्रित वृत्तों जैसी। - फ्लेमिंग के बाएँ हाथ नियम में अँगूठा क्या बताता है?
चालक पर लगने वाले बल की दिशा। - Solenoid के अंदर क्षेत्र कैसा होता है?
लगभग एकसमान और मज़बूत। - AC और DC में एक अंतर लिखें।
AC की दिशा समय के साथ बदलती है, DC की नहीं। - फ़्यूज़ घरेलू परिपथ में क्यों लगाया जाता है?
ज़्यादा धारा से उपकरणों और तारों को बचाने के लिए।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
अभ्यास — पुस्तक के प्रश्न (Extension)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अध्याय-अंत अभ्यास पर आधारित हैं। प्रश्नों को Educational Galaxy के अपने शब्दों में फिर से लिखा गया है और उत्तर भी EG के अपने शब्दों में हैं। समीकरण, सूत्र और संख्याएँ पुस्तक के अनुसार यथावत रखी गई हैं।
- निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है — (a) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत होती हैं, (b) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं, (c) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है, (d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है? उत्तर: विकल्प (d) सही है। धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ तार को केंद्र मानकर बने संकेंद्री वृत्तों के रूप में होती हैं — उनका तल तार के लंबवत होता है।
- वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना — (a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है, (b) किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है, (c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है, (d) किसी विद्युत मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है? उत्तर: विकल्प (c) सही है। जब कुंडली और चुंबक के बीच आपेक्षिक गति होती है तो कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और उसमें विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है — यही वैद्युतचुंबकीय प्रेरण है।
- विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं — (a) जनित्र, (b) गैल्वेनोमीटर, (c) ऐमीटर, (d) मोटर? उत्तर: विकल्प (a) जनित्र सही है। जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। गैल्वेनोमीटर धारा की उपस्थिति जाँचता है, ऐमीटर धारा मापता है और मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है — उल्टा काम करता है।
- किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अंतर यह है कि — (a) ac जनित्र में विद्युत चुंबक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुंबक होता है, (b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है, (c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है, (d) ac जनित्र में सर्पी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है? उत्तर: विकल्प (d) सही है। ac जनित्र में कुंडली के सिरे दो अलग-अलग सर्पी वलयों से जुड़े रहते हैं, इसलिए बाहरी परिपथ में धारा की दिशा हर आधे घूर्णन पर बदलती रहती है। dc जनित्र में एक ही दिक्परिवर्तक (विभक्त वलय) धारा की दिशा को हर आधे घूर्णन पर पलटकर बाहरी परिपथ में एक ही दिशा बनाए रखता है।
- लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत धारा का मान — (a) बहुत कम हो जाता है, (b) परिवर्तित नहीं होता, (c) बहुत अधिक बढ़ जाता है, (d) निरंतर परिवर्तित होता है? उत्तर: विकल्प (c) सही है। लघुपथन में विद्युत धारा को लगभग बिना प्रतिरोध का रास्ता मिल जाता है, इसलिए ओम के नियम से धारा बहुत अधिक बढ़ जाती है — यही कारण है कि इससे तार गर्म होकर आग तक लग सकती है।
- निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए — (a) विद्युत मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करता है, (b) विद्युत जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है, (c) किसी लंबी वृत्ताकार विद्युत धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है, (d) हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है। उत्तर: (a) गलत — मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है, उल्टा नहीं। (b) सही — जनित्र में कुंडली के घूमने से फ्लक्स बदलता है और प्रेरित धारा बनती है। (c) सही — लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाएँ लगभग समांतर और एकसमान होती हैं। (d) गलत — हरे रंग का तार भूसंपर्क (अर्थ) तार होता है, विद्युन्मय (लाइव) तार सामान्यतः लाल होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के दो तरीकों की सूची बनाइए। उत्तर: (1) किसी स्थायी चुंबक (जैसे छड़ चुंबक) के आस-पास चुंबकीय क्षेत्र होता है। (2) किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है — यही विद्युत चुंबकत्व है।
- परिनालिका चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं? उत्तर: धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र लगभग एकसमान और अक्ष के समांतर होता है, और बाहर वह छड़ चुंबक के क्षेत्र जैसा दिखता है — इसलिए परिनालिका एक चुंबक की तरह व्यवहार करती है। हाँ, छड़ चुंबक से उसके ध्रुव निर्धारित किए जा सकते हैं — परिनालिका के जिस सिरे की ओर छड़ चुंबक का उत्तर ध्रुव आकर्षित हो, वह सिरा दक्षिण ध्रुव होगा, और जिस सिरे से प्रतिकर्षण हो, वह उत्तर ध्रुव।
- किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है? उत्तर: जब चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो। बल का मान F = BIL sin θ होता है — θ = 90° पर sin θ = 1, इसलिए बल अधिकतम होता है। चालक के क्षेत्र के समांतर होने पर बल शून्य हो जाता है।
- मान लीजिए आप किसी चैंबर में अपनी पीठ को किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपकी दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है? उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर (अधोमुखी) है। फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम से — इलेक्ट्रॉन की गति के विपरीत दिशा (पीछे की दीवार की ओर) को धारा की दिशा मानकर, दाईं ओर के विक्षेप (बल) के साथ, क्षेत्र की दिशा नीचे की ओर आती है।
- विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है? उत्तर: सिद्धांत — चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली पर बल-युग्म लगता है, जिससे वह घूमने लगती है (फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम)। कार्यविधि — कुंडली की दो भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं, इसलिए कुंडली घूमती है; घूमते समय जब कुंडली ऊर्ध्वाधर स्थिति से गुज़रती है तो विभक्त वलय (दिक्परिवर्तक) ब्रशों से संपर्क बदलकर कुंडली में धारा की दिशा पलट देता है, जिससे बल-युग्म हमेशा एक ही दिशा में घुमाता रहे। विभक्त वलय के बिना कुंडली आधा चक्कर घूमकर रुक जाती — उसी से मोटर निरंतर एक ही दिशा में घूम पाती है। आरेख में — चुंबक के ध्रुव, कुंडली, विभक्त वलय के दो अर्धभाग, ब्रश और बैटरी नामांकित कीजिए।
- ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत मोटर उपयोग किए जाते हैं। उत्तर: विद्युत पंखे, वॉशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर, रेफ्रिजरेटर का कंप्रेसर, विद्युत कारों और ट्रेनों की मोटरें, पानी के पंप, कंप्यूटर की कूलिंग फैन — लगभग हर घूमने वाली विद्युत युक्ति में मोटर होती है।
- कोई विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक — (i) कुंडली में धकेला जाता है, (ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है, (iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है? उत्तर: (i) चुंबक धकेलने पर कुंडली से बद्ध फ्लक्स बढ़ता है — प्रेरित धारा बहती है और गैल्वेनोमीटर की सुई एक ओर विक्षेपित होती है। (ii) बाहर खींचने पर फ्लक्स घटता है — प्रेरित धारा विपरीत दिशा में बहती है और सुई दूसरी ओर विक्षेपित होती है। (iii) स्थिर रखने पर फ्लक्स नहीं बदलता — कोई प्रेरित धारा नहीं बहती और सुई शून्य पर रहती है।
- दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए। उत्तर: हाँ, प्रेरित होगी। A की धारा बदलने से उसके चारों ओर का चुंबकीय क्षेत्र बदलता है, इसलिए B से बद्ध फ्लक्स भी बदलता है — और फ्लक्स के इस परिवर्तन से B में प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है। यही अन्योन्य प्रेरण है, जिस पर ट्रांसफ़ॉर्मर काम करता है।
- निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए — (i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, (ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा (iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा। उत्तर: (i) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम — अंगूठा धारा की दिशा में रखें तो मुड़ी उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं। (ii) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम — अँगूठा बल, तर्जनी क्षेत्र और मध्यमा धारा की दिशा बताती है। (iii) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम — अँगूठा गति, तर्जनी क्षेत्र और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा बताती है।
- नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रशों का क्या कार्य है? उत्तर: सिद्धांत — वैद्युतचुंबकीय प्रेरण: चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली के घूमने से उससे बद्ध फ्लक्स बदलता है और प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। कार्यविधि — कुंडली के घूमने पर उसकी भुजाएँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती हैं; हर आधे घूर्णन पर प्रेरित धारा की दिशा बदल जाती है, इसलिए बाहरी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा (ac) मिलती है। ब्रशों का कार्य — घूमती कुंडली के सर्पी वलयों से स्थायी संपर्क बनाए रखना, ताकि उत्पन्न धारा बाहरी परिपथ तक लगातार पहुँच सके। आरेख में — चुंबक, कुंडली, सर्पी वलय, ब्रश और बाहरी परिपथ नामांकित कीजिए।
- किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है? उत्तर: जब विद्युन्मय (लाइव) तार और उदासीन (न्यूट्रल) तार सीधे एक-दूसरे के संपर्क में आ जाएँ — जैसे तारों का विद्युतरोधन क्षतिग्रस्त हो जाए या कोई धातु की वस्तु दोनों से टकरा जाए — तो धारा को लगभग शून्य प्रतिरोध का रास्ता मिल जाता है। धारा अचानक बहुत बढ़ जाती है और तार गर्म होकर आग का कारण बन सकता है — यही लघुपथन है।
- भूसंपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है? उत्तर: भूसंपर्क तार (हरा तार) साधित्र के धातु आवरण को पृथ्वी से जोड़ता है। यदि किसी खराबी से विद्युन्मय तार आवरण से टकरा जाए, तो धारा मनुष्य के शरीर से न जाकर भूसंपर्क तार से पृथ्वी में चली जाती है और फ़्यूज़ उड़ जाता है। इससे साधित्र छूने वाले व्यक्ति को विद्युत आघात नहीं लगता — इसलिए धातु आवरण वाले साधित्रों का भूसंपर्कन सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
- क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
- Solenoid के अंदर क्षेत्र लगभग एकसमान होता है।
- मोटर: विद्युत → यांत्रिक ऊर्जा; जनित्र: यांत्रिक → विद्युत ऊर्जा।
- घरों में AC 220 V, 50 Hz की होती है।

