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BSEB • Class 10 • विज्ञान • अध्याय 11

विद्युत

विद्युत आवेश के प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं।

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विद्युत — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10)  |  अध्याय 11  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है और यह पृष्ठ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं है।

विद्युत के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सरल विद्युत परिपथ का चित्र — बैटरी, बल्ब, स्विच और धारा की दिशा, लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

विद्युत के लिए चित्र

मेज़ पर बैटरी और जलता बल्ब — विद्युत परिपथ का रोज़ का दृश्य।

इस अध्याय के बारे में

विद्युत आवेश के प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं। धारा की दिशा परंपरागत रूप से धन आवेश के प्रवाह की दिशा मानी जाती है, जबकि धातुओं में असल में इलेक्ट्रॉन उल्टी दिशा में बहते हैं। धारा का मात्रक ऐम्पियर है। किसी चालक के दो सिरों के बीच धारा बहने के लिए विभवांतर ज़रूरी है, जिसका मात्रक वोल्ट है।

ओम का नियम कहता है: स्थिर तापमान पर किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है — V = IR। यहाँ R प्रतिरोध है, जो चालक की लंबाई बढ़ने पर बढ़ता है, मोटाई बढ़ने पर घटता है और पदार्थ पर निर्भर करता है। प्रतिरोध का मात्रक ओम है।

प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध सभी का योग होता है और हर प्रतिरोध में धारा समान रहती है। समांतर क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम हो जाता है और हर शाखा में विभवांतर समान रहता है। घरों में उपकरण समांतर क्रम में जुड़े होते हैं, ताकि एक के बंद होने से दूसरे पर असर न पड़े।

धारा के ऊष्मीय प्रभाव से बल्ब, हीटर और फ़्यूज़ काम करते हैं। फ़्यूज़ एक सुरक्षा उपकरण है — ज़्यादा धारा बहने पर वह पिघलकर परिपथ तोड़ देता है। विद्युत शक्ति P = VI से मापी जाती है, जिसका मात्रक वाट है। घरों में बिजली की खपत किलोवाट-घंटा (यूनिट) में मापी जाती है।

क्या सीखना है

धारा, विभवांतर, ओम का नियम, श्रेणी-समांतर संयोजन, ऊष्मीय प्रभाव और विद्युत शक्ति।

मुख्य शब्द

  • विद्युत धारा (Electric Current) — एकांक समय में बहने वाला आवेश; मात्रक ऐम्पियर।
  • विभवांतर (Potential Difference) — दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभव का अंतर; मात्रक वोल्ट।
  • प्रतिरोध (Resistance) — धारा के प्रवाह में रुकावट; मात्रक ओम।
  • ओम का नियम (Ohm's Law) — V = IR, स्थिर तापमान पर।
  • विद्युत शक्ति (Electric Power) — प्रति सेकंड खर्च ऊर्जा; P = VI, मात्रक वाट।

याद रखें

  • V = IR — तीनों में से कोई दो पता हों तो तीसरा निकल आता है।
  • श्रेणी में धारा समान, समांतर में विभवांतर समान रहता है।
  • फ़्यूज़ हमेशा परिपथ के श्रेणी क्रम में लगाया जाता है।
  • 1 यूनिट = 1 किलोवाट-घंटा।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: श्रेणी और समांतर में कुल प्रतिरोध का सूत्र उल्टा लिख देना। श्रेणी में प्रतिरोध जुड़ते हैं (R = R₁ + R₂); समांतर में व्युत्क्रम जुड़ते हैं (1/R = 1/R₁ + 1/R₂)।

Chart / Table: परिपथ के संयोजन

बिंदुविवरणटिप्पणी
श्रेणी क्रमधारा समान, विभवांतर बँटता हैकुल R बढ़ता है
समांतर क्रमविभवांतर समान, धारा बँटती हैकुल R घटता है
घरों की वायरिंगसमांतर क्रमहर उपकरण को पूरा वोल्टेज मिलता है

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. ओम का नियम लिखें।
    संकेत: V, I और R का संबंध याद करें।
  2. 2 ओम और 3 ओम श्रेणी में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध कितना होगा?
    संकेत: योग करें।
  3. घरों में उपकरण समांतर में क्यों जोड़े जाते हैं?
    संकेत: एक उपकरण बंद होने का असर सोचें।
  4. फ़्यूज़ का काम क्या है?
    संकेत: ज़्यादा धारा पर क्या होना चाहिए, सोचें।
  5. 1 यूनिट किसके बराबर है?
    संकेत: किलोवाट-घंटा याद करें।

प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers

  1. विद्युत धारा किसे कहते हैं?
    किसी चालक में आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
  2. विभवांतर का मात्रक क्या है?
    वोल्ट।
  3. प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है?
    चालक की लंबाई, मोटाई, पदार्थ और तापमान पर।
  4. श्रेणी और समांतर में क्या अंतर है?
    श्रेणी में धारा समान रहती है; समांतर में विभवांतर समान रहता है।
  5. विद्युत शक्ति का सूत्र लिखें।
    P = VI, जहाँ V विभवांतर और I धारा है।

बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न

नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. 6 V बैटरी से 2 ओम के प्रतिरोध में कितनी धारा बहेगी?
    I = V/R = 3 ऐम्पियर।
  2. समांतर क्रम में कुल प्रतिरोध सबसे छोटे से कैसा होता है?
    कम होता है।
  3. बल्ब किस प्रभाव से जलता है?
    धारा के ऊष्मीय प्रभाव से — तंतु गर्म होकर चमकता है।
  4. फ़्यूज़ किस धातु-गुण के कारण काम करता है?
    कम गलनांक के कारण वह ज़्यादा धारा पर पिघल जाता है।
  5. 100 वाट का बल्ब 10 घंटे चले तो कितनी यूनिट खर्च होगी?
    1 किलोवाट-घंटा, यानी 1 यूनिट।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

अभ्यास — पुस्तक के प्रश्न (Extension)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अध्याय-अंत अभ्यास पर आधारित हैं। प्रश्नों को Educational Galaxy के अपने शब्दों में फिर से लिखा गया है और उत्तर भी EG के अपने शब्दों में हैं। समीकरण, सूत्र और संख्याएँ पुस्तक के अनुसार यथावत रखी गई हैं।

  1. प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R′ है तो R/R′ अनुपात का मान क्या है — (a) 1/25, (b) 1/5, (c) 5, (d) 25? उत्तर: विकल्प (d) 25 सही है। हर टुकड़े का प्रतिरोध R/5 होगा। पाँचों को समांतर जोड़ने पर 1/R′ = 5/(R/5) = 25/R, इसलिए R′ = R/25 और R/R′ = 25।
  2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता — (a) I2R, (b) IR2, (c) VI, (d) V2/R? उत्तर: विकल्प (b) IR2 सही है। विद्युत शक्ति के सूत्र P = VI = I2R = V2/R होते हैं — IR2 इनमें से कोई नहीं है, उसकी विमा भी शक्ति की नहीं है।
  3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक 220 V; 100 W है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है — (a) 100 W, (b) 75 W, (c) 50 W, (d) 25 W? उत्तर: विकल्प (d) 25 W सही है। बल्ब का प्रतिरोध R = V2/P = 2202/100 = 484 Ω स्थिर रहता है। 110 V पर शक्ति = 1102/484 = 25 W — वोल्टता आधी होने पर शक्ति चौथाई रह जाती है।
  4. दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं, किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा — (a) 1:2, (b) 2:1, (c) 1:4, (d) 4:1? उत्तर: विकल्प (c) 1:4 सही है। समान वोल्टता पर शक्ति P = V2/R होती है। श्रेणी में तुल्य प्रतिरोध 2R और समांतर में R/2 होता है, इसलिए शक्तियों का अनुपात (V2/2R) : (2V2/R) = 1:4 — समान समय में ऊष्मा भी इसी अनुपात में बनेगी।
  5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है? उत्तर: वोल्टमीटर को उन दो बिंदुओं के पार्श्वक्रम (समांतर) में जोड़ा जाता है, क्योंकि वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है — समांतर में जुड़ने पर वह परिपथ की धारा को लगभग प्रभावित नहीं करता और दोनों बिंदुओं के बीच का वास्तविक विभवांतर माप लेता है।
  6. किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10−8 Ω m है। 10 Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा? उत्तर: तार की त्रिज्या 0.25 mm = 2.5 × 10−4 m, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = πr2 ≈ 1.96 × 10−7 m2। R = ρL/A से L = RA/ρ = 10 × 1.96 × 10−7 / 1.6 × 10−8 ≈ 122.5 m। व्यास दोगुना करने पर क्षेत्रफल चार गुना हो जाएगा, इसलिए समान लंबाई का प्रतिरोध चौथाई, यानी 2.5 Ω रह जाएगा।
  7. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं — I (ऐम्पियर): 0.5, 1.0, 2.0, 3.0, 4.0; V (वोल्ट): 1.6, 3.4, 6.7, 10.2, 13.2। V तथा I के बीच ग्राफ़ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। उत्तर: V-I ग्राफ़ एक सीधी रेखा बनाता है, जिसका ढाल (slope) ही प्रतिरोध है। V/I के मान लगभग 3.2, 3.4, 3.35, 3.4, 3.3 Ω आते हैं — औसतन प्रतिरोध ≈ 3.3 Ω।
  8. किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए। उत्तर: ओम के नियम से R = V/I = 12 / (2.5 × 10−3) = 4800 Ω = 4.8 kΩ।
  9. 9 V की किसी बैटरी को 0.2 Ω, 0.3 Ω, 0.4 Ω, 0.5 Ω तथा 12 Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12 Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी? उत्तर: श्रेणी में कुल प्रतिरोध = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 Ω। धारा I = V/R = 9/13.4 ≈ 0.67 A — श्रेणी में हर प्रतिरोधक से यही धारा बहती है, इसलिए 12 Ω से भी 0.67 A धारा प्रवाहित होगी।
  10. 176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत से संयोजन से 5 A विद्युत धारा प्रवाहित हो? उत्तर: आवश्यक तुल्य प्रतिरोध R = V/I = 220/5 = 44 Ω। n प्रतिरोधक समांतर में हों तो तुल्य प्रतिरोध 176/n होता है — 176/n = 44 से n = 4। अतः 4 प्रतिरोधक चाहिए।
  11. यह दर्शाइए कि आप 6 Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (i) 9 Ω, (ii) 4 Ω हो। उत्तर: (i) 9 Ω के लिए — दो प्रतिरोधकों को समांतर जोड़िए (तुल्य 3 Ω) और फिर तीसरे को उसके श्रेणी में जोड़िए: 3 + 6 = 9 Ω। (ii) 4 Ω के लिए — दो प्रतिरोधकों को श्रेणी में जोड़िए (12 Ω) और तीसरे को उसके समांतर जोड़िए: (12 × 6)/(12 + 6) = 72/18 = 4 Ω।
  12. 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5 A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं? उत्तर: एक बल्ब की धारा = P/V = 10/220 ≈ 0.045 A। 5 A की सीमा में बल्बों की संख्या = 5/0.045 ≈ 110। अतः अधिकतम 110 बल्ब समांतर में जोड़े जा सकते हैं।
  13. किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी है जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 Ω है तथा इन्हें पृथक्-पृथक्, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं? उत्तर: (1) अकेली कुंडली — I = 220/24 ≈ 9.17 A। (2) श्रेणीक्रम — कुल 48 Ω, I = 220/48 ≈ 4.58 A। (3) पार्श्वक्रम — तुल्य 12 Ω, I = 220/12 ≈ 18.33 A।
  14. निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए — (i) 6 V की बैटरी से संयोजित 1 Ω तथा 2 Ω श्रेणीक्रम संयोजन, (ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12 Ω तथा 2 Ω का पार्श्वक्रम संयोजन। उत्तर: (i) श्रेणी में कुल प्रतिरोध 3 Ω, धारा = 6/3 = 2 A, इसलिए 2 Ω की शक्ति = I2R = 4 × 2 = 8 W। (ii) समांतर में 2 Ω पर पूरी 4 V वोल्टता पड़ती है, इसलिए शक्ति = V2/R = 16/2 = 8 W। दोनों प्रकरणों में 2 Ω प्रतिरोधक 8 W शक्ति उपभुक्त करता है — शक्तियाँ बराबर हैं।
  15. दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो विद्युत मेन्स से कितनी धारा ली जाती है? उत्तर: समांतर में दोनों पर 220 V पड़ती है। कुल शक्ति = 100 + 60 = 160 W। मेन्स से ली गई धारा = P/V = 160/220 ≈ 0.73 A।
  16. किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है — 250 W का टी.वी. सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है? उत्तर: टी.वी. की ऊर्जा = 250 W × 1 h = 250 Wh। हीटर की ऊर्जा = 120 W × (10/60) h = 20 Wh। इसलिए टी.वी. सेट अधिक ऊर्जा (250 Wh) उपभुक्त करता है।
  17. 8 Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से 2 घंटे तक 15 A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए। उत्तर: ऊष्मा उत्पन्न होने की दर = I2R = 152 × 8 = 1800 W, यानी 1800 जूल प्रति सेकंड। दो घंटे में कुल ऊष्मा = 1800 × 7200 = 1.296 × 107 J होगी।
  18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए — (a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है, (b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं, (c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है, (d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है, (e) विद्युत संचरण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है? उत्तर: (a) टंगस्टन का गलनांक बहुत उच्च (लगभग 3380 °C) होता है और वह बिना पिघले तेज़ प्रकाश देता है; साथ ही उसका प्रतिरोध अधिक होता है जिससे कम धारा में ही वह तप्त होकर चमकता है। (b) मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है और उच्च ताप पर भी उनका उपचयन (जंग) नहीं होता — इसलिए तापन-तत्व लंबे समय तक चलते हैं। (c) श्रेणी में एक युक्ति के बंद होते ही पूरा परिपथ टूट जाता है, सभी युक्तियों को समान धारा मिलती है और वोल्टता बँट जाती है — इसलिए घरों में हर युक्ति को समांतर में जोड़ा जाता है ताकि सबको पूरी 220 V मिले और एक के बंद होने से दूसरी न रुके। (d) प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (R = ρL/A) — क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है और घटने पर बढ़ता है। (e) कॉपर और ऐलुमिनियम विद्युत के उत्तम चालक हैं, अपेक्षाकृत सस्ते हैं और तार खींचने में आसान (तन्य) हैं — इसलिए संचरण में इन्हीं का उपयोग होता है।
परीक्षा टिप: पहले इस पृष्ठ के ‘याद रखें’ बिंदुओं को पक्का करें, फिर अभ्यास के प्रश्न स्वयं हल करके उत्तरों से मिलाएँ।
सार-संक्षेप — याद रखें
  • V = IR — तीनों में से कोई दो पता हों तो तीसरा निकल आता है।
  • श्रेणी में धारा समान, समांतर में विभवांतर समान रहता है।
  • फ़्यूज़ हमेशा परिपथ के श्रेणी क्रम में लगाया जाता है।
  • 1 यूनिट = 1 किलोवाट-घंटा।